Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 1

Manmarjiyan – 30

by Story With Sanjana November 3, 2020
written by Story With Sanjana November 3, 2020 9 comments
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Manmarjiyan – 30

Manmarjiyan
Manmarjiyan by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू और गोलू दोनों ही फाइनल ईयर में फ़ैल हो गए ,, लेकिन मार्च के महीने में रिजल्ट आना गुड्डू को परेशान कर रहा था उसने डरते डरते कहा,”पिताजी आपको शायद गलतफहमी हुई है अभी रिजल्ट आने में वक्त है , अभी तो मार्च चल रहा है और रिजल्ट तो अप्रैल में आएगा ना”
“पांडे जी ने कहा है तो उह झूठ कहेंगे का ?”,मिश्रा जी ने कहा
“उह साला पाण्डे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने जैसे ही कहा मिश्रा जी ने उसे आँखे दिखाई तो गुड्डू ने बात सम्हालते हुए कहा,”हमारा मतलब आप उनकी बात काहे मान रहे हो ?”


“ठीक है उनकी बात नहीं मान रहे पर तुम्हरा इह दोस्त भी तो कह रहा है ना की इह फ़ैल हो गवा है”,मिश्रा जी ने कहा
“अरे चचा हम तो उह कम्प्यूटर के इम्तिहान में फ़ैल हो गए है”,गोलू ने चप्पल मिश्रा जी की और बढाकर कहा तो मिश्रा जी ने चप्पल लेकर गोलू के पिछवाड़े पर जड़ते हुए कहा,”तो पूरी बात काहे नहीं बताते हो बे ,, और इम्तिहान कोई भी हो तुम दोनों को फ़ैल ही होना है”


बेचारा गोलू बेचारगी से कभी गुड्डू की और देखता तो कभी मिश्रा जी की और। मिश्रा जी ने चप्पल फेंका और गुड्डू के पास आकर कहा,”देखो बेटा तुम्हायी शादी होने वाली है और हमे शादी से पहले अब कोई बवाल नहीं चाहिए समझे , तुम्हरा रिजल्ट हो चाहे तुम्हरी रंगबाजी सब क्लियर चाहिए इस बार”
“जी जी पिताजी”,गुड्डू ने कहा तो मिश्रा जी वहा से चले गए। गोलू गुड्डू के पास आया और कहा,”अरे यार तुम्हाये बाप को दौरे पड़ते है का ? साला जब देखो तब पेलने के लिए तैयार खड़े रहते है। इति जोर से मारा है हमाये पीछे”


“साले जबान सम्हाल के पिताजी है उह हमाये , और तुमको का जरूरत थी फट्टे में टाँग अड़ाने की ,, और सबसे पहले तो उह पांडे को देखते है का उटपटांग बोल रहा है उह”,गुड्डू ने गुस्से से कहा और बाइक लेकर जैसे ही जाने लगा गोलू ने कहा,”रुको भैया हम भी चलते है”
दोनों वहा से निकले और पहुंचे पांडे जी की पान की दुकान पर। पाण्डे जी उस वक्त अकेले ही थी गुड्डू बाइक से उतरा और पाण्डे जी को कहा,”का बे पाण्डे साला हमायी जिंदगी में कम बवाल है जो तुमहू पिताजी के सामने कुछ भी अंट शंट बक दिए”


“अरे अरे गुड्डू भैया काहे बिगड़ रहे हो यार मतलब हमहू का किये ?”,पांडे ने डरते हुए कहा
“तुमहू का किये ? हमाये पिताजी से झूठ काहे कहे की हमहू फ़ैल हो गए है ,, रिज्लट तो अगले महीने आने वाला है फिर तुमको का माता आयी रही या सपना आय रहा हमाये फ़ैल होने का”,गुड्डू ने गुस्से से कहा
“अरे हम काहे झूठ बोलेंगे इह देखो व्हाट्सप्प पर आया है फाइनल का रिजल्ट”,पांडे ने अपना फोन दिखाते हुए कहा


गुड्डू ने फोन देखा उसमे किसी अखबार का फोटो शेयर किया हुआ था गुड्डू ने उसे ज़ूम करके ध्यान से देखा और पांडे जी से कहा,”अबे इह दो साल पुराना फोटो है , तुमहू साले इह व्हाट्सप्प ग्रुप के चक्कर में जिंदगी पान बनाय दिए हो चुने पर चुना लगाए जा रहे हो”
“सॉरी भैया हमे का पता था पुराना फोटो है”,पांडे ने गुड्डू की पकड़ में मिमियाते हुए कहा
“तुम्हाये सॉरी के चक्कर में हमहू तो पेले जाते ना सुबह सुबह ,, देखो पांड़े पहिले से हमायी जिंदगी में इतनी परेशानी है तुमहू और चरस ना बोओ समझे”,गुड्डू ने उसकी कॉलर सही करते हुए कहा


पांडे ने हां में गर्दन हिला दी। गुड्डू उसे छोड़कर बाइक की और बढ़ गया , गोलू को लगा उसे भी गुड्डू की तरह थोड़ी धमकी देनी चाहिए इसलिए वह पांडे जी के पास आया और कहा,”देखो पांड़े चुना ना पान पर लगाया करो लोगो की जिंदगी में नाही”
गोलू की बात सुनकर पांड़े जी ने एक कंटाप रखा उसके कान पर और कहा,”बेटा उसकी बात सुन लिए क्योकि हमायी गलती थी तुम्हायी नहीं सुनेंगे ,, इसलिए बकैती वहा करो जहा चल सके ,, चलो निकलो”


बेचारा गोलू गाल सहलाते हुए आकर गुड्डू के पीछे बैठ गया और कहा,”लगता है आज का दिन ही ख़राब है , चलो भैया”
गुड्डू बाइक लेकर आगे बढ़ गया। अभी कुछ ही दूर चले होंगे की सामने से पिंकी आती दिखाई दी। उदास चेहरा , बुझी आँखे आँखे देखकर गुड्डू को अच्छा नहीं लगा। पिंकी की नजर जब गुड्डू पर पड़ी तो गुड्डू उसे देखते हुए बाइक से आगे बढ़ गया पर अंदर ही अंदर उसका दिल किया की एक बार रूककर पिंकी से पूछ ले की उसने उसके साथ ऐसा क्यों किया ? गुड्डू घर पहुंचा तो गोलू भी उसके साथ साथ अंदर चला आया उन्हें देखते ही मिश्राइन ने कहा,”गुड्डू आकर नाश्ता कर लो”


गुड्डू के साथ साथ गोलू भी चला आया और दोनों बैठकर नाश्ता करने लगे। वेदी की सहेली शालू घर आयी थी वेदी के साथ बाजार जाने के लिए। गुड्डू और गोलू चुपचाप खा रहे थे। मिश्रा जी के साथ कोई आदमी आया हुआ था जिसे वे शादी में घर की सजावट के बारे में बता रहे थे और साथ ही नोट करवाते जा रहे थे की फूलो की लड़िया कहा कहा लगेगी , लाइट्स कितनी लगेगी , कोनसा कालीन कहा बिछेगा ये सब।
“नमस्ते अंकल”,शालू ने आकर मिश्रा जी से कहा


“अरे नमस्ते बिटिया कैसी हो ?”,मिश्रा जी ने मुस्कुराकर कहा
“हम ठीक है अंकल , वेदी और हम बाजार जा रहे थे इसलिए चले आये”,शालू ने कहा
“अच्छा बिटिया कुर्तियां ठीक थी वो जो दुकान से ली थी”,मिश्रा जी ने सवाल पूछा तो शालू सोच में पड़ गयी और कहा,”कोनसी कुर्ती अंकल जी हम तो इन दिनों आपकी दुकान आये ही नहीं”
“अच्छा , एक मिनिट (कहकर मिश्रा जी ने गर्दन घुमाई और आवाज लगाई) गुड्डू , वेदी यहाँ आओ ज़रा”,मिश्रा जी ने कहा


“अब का कर दिया हमने”,गुड्डू बड़बड़ाया और नाश्ता छोड़कर मिश्रा जी के सामने आ खड़ा हुआ वेदी भी चली आयी और कहा,”जी पिताजी”
“बिटिया उस दिन तुम कहे रही की गुड्डू ने कपडे शालू बिटिया को दिए है पर शालू बिटिया तो कुछ और ही कह रही है”,मिश्रा जी ने शांत स्वर में कहा तो वेदी और गुड्डू एक दूसरे की और देखने लगे। दोनों जानते थे की उस दिन गुड्डू को मिश्रा जी की डांट से बचाने के लिए वेदी ने झूठ कहा था। शालू भी असमझ की स्तिथि में वेदी और गुड्डू को देख रही थी , वेदी को चुप देखकर मिश्रा जी ने गुड्डू से कहा,”हां बेटा और कितने झूठ बोले हो हमसे ?”


“पिताजी भैया ने कोई झूठ नहीं बोला वो हमारे कहने पर ही दिए गए थे”,वेदी ने कहा
“तुमहू कितने खड्डो पर मिटटी डालोगी वेदी , इनका रोज का हो चुका है इह सब। खैर छोडो शालू बिटिया इंतजार कर रही है तुम दोनों जाओ और हमारी स्कूटी ले जाओ”,मिश्रा जी ने कहा और चले गए
वेदी जाने लगी तो गुड्डू ने उसे रोकते हुए कहा,”थैंक्यू यार वेदी बचा लिया तूने”


वेदी ने गुड्डू के सामने हाथ जोड़े और कहा,”प्लीज भैया अब और कोई कांड मत करना”
गुड्डू ने सूना तो मुंह बनाकर चला गया। वेदी और शालू घर के बाहर चली आयी। वेदी ने स्कूटी स्टार्ट की और हेलमेट लगाया शालू उसके पीछे आ बैठी और कहा,”तुम्हारे पापा गुड्डू को इतना लताड़ते क्यों है ?”
“बहन तुम्हे नहीं पता गुड्डू भैया के चर्चे , वो कोई ना कोई गड़बड़ करते ही रहते है। छोड़ो चलते है बाजार वरना देर हो जाएगी”,कहते हुए वेदी ने स्कूटी आगे बढ़ा दी

बनारस , उत्तर-प्रदेश
विनोद जी सुबह के 5 बजे बनारस पहुंचे। शगुन और प्रीति को घर छोड़कर चाचा चाची के साथ अपने घर चले गए। नींद से ग्रस्त शगुन और प्रीति कमरे में चली आयी और आते ही बिस्तर पर गिर गयी। सुबह 9 बजे गुप्ता जी चाय लेकर उनके कमरे में आये और प्यार से शगुन के सर पर हाथ फेरते हुए उसे उठाया।
शगुन उठकर बैठ गयी और कहा,”गुड़ मॉर्निंग पापा”


“गुड़ मॉर्निंग बेटा , ये लो चाय पीओ”,गुप्ता जी ने कप शगुन की और बढ़ाते हुए कहा
“अरे पापा आपने क्यों तकलीफ की मुझे उठा दिया होता”,शगुन ने कहा
“तुम लोग लम्बे सफर के बाद सुबह आये थे सोचा सोने दू तुम्हे ,, चाय पि लो और फिर नहाकर नीचे आ जाना पंडित जी आने वाले है”,कहते हुए गुप्ता जी उठे और चले गए
“प्रीति उठो”,शगुन ने प्रीति का कन्धा थपथपाते हुए कहा तो प्रीति ने तकिया मुंह पर डालते हुए कहा,”सोने दो ना दी”


शगुन ने चाय पि और उठकर अंगड़ाई लेते हुए खिड़की पर चली आयी। सुबह सुबह अस्सी घाट का नजारा और भी खुबसुरत नजर आता है। शगुन कुछ देर वही खड़े खड़े उसकी खूबसूरती को निहारती रही और फिर अलमारी से कपडे निकालकर नहाने चली गयी। लाल रंग का चूड़ीदार सुट पहना , बाल गीले थे इसलिए उनमे क्लेचर डालकर छोड़ दिया , माथे पर छोटी सी लाल बिंदी लगायी , आँखों में काजल डाला और कानो में छोटे छोटे बुँदे पहनकर शगुन ने खुद को आईने में देखा। रोजाना की भांति आज शगुन कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रही थी।

उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। शगुन ने दुपट्टा लगाया और नीचे चली आयी। निचे विनोद चाचा बैठकर गुप्ता जी को मिश्रा जी और उनके साथ बिताये वक्त के बारे में बता रहे थे। विनोद की बातो से गुप्ता जी को ये अहसास हो चुका था की उन्होंने शगुन का रिश्ता एक अच्छे परिवार में किया है। विनोद उन्हें शगुन के लिए दिए गए गहने और कपडे दिखाने में लगा हुआ था। कुछ देर बाद शगुन आयी , उसके हाथ में दो प्लेट थी जिनमे गर्मागर्म पोहा रखा हुआ था। शगुन ने एक प्लेट अपने पापा और दूसरा प्लेट विनोद की और बढ़ा दिया। कुछ देर में चाय भी ले आयी और वही बैठ गयी


“शगुन मिश्रा जी ने बहुत खर्चा कर दिया बेटा तुमने रोका नहीं इन सबके लिए”,गुप्ता जी ने कहा
“मैंने कहा था पापा लेकिन उन्होंने,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”,शगुन ने कहा
“भाईसाहब वो कह रहे थे की उनके यहाँ रिवाज है शादी का जोड़ा और शादी के गहने लड़के वालो की और से ही जाते है ,”विनोद ने कहा
“हां विनोद लेकिन इतना सब , और ये सब काफी महंगे भी दिख रहे है”,गुप्ता जी ने कहा
“अरे भाईसाहब उनका खुद का शोरूम है कानपूर में , वही से तो ये सब कपड़ो की खरीदारी हुई है”,विनोद ने कहा


“हां लेकिन उन्होंने इतना किया है तो हमे भी लड़के वालो को उस हिसाब से ही देना होगा सब”,गुप्ता जी ने कहा
“आप चिंता मत कीजिये सब हो जाएगा , नाश्ता कीजिये”,विनोद ने चाय का कप उठाते हुए कहा
“पापा मिश्रा अंकल बहुत अच्छे है उन्होंने मुझे भी ड्रेस दिलवाया है”,प्रीति ने आते हुए कहा
“अच्छे है तो है मिश्रा जी लेकिन उनका दिल बहुत बड़ा है ,, पंण्डित जी आने वाले थे मैं ज़रा उन्हें फोन कर लू”,गुप्ता जी ने कहा


“हर हर महादेव गुप्ता जी”,पंडित जी ने दरवाजे से अंदर आते हुए कहा।
“ये लीजिये भाईसाहब पंडित जी को याद किया और वे आ गए , आईये आईये पंडित जी बहुत लम्बी उम्र है आपकी,,,,,,,,,,(पलटकर शगुन से कहते है) शगुन बिटिया पंडित जी के लिए भी चाय नाश्ता ले आओ”,विनोद ने कहा


“जी चाचू”,कहकर शगुन उठी और चली गयी। कुछ देर बाद वह पंडित जी के लिए चाय नाश्ता ले आयी। पंडित जी ने चाय नाश्ता किया और उसके बाद शादी गणेश पूजन से लेकर शादी तक के बीच में होने वाली सभी रस्मो के शुभ मुहूर्त की लिस्ट बनाकर दे दी। शगुन के मन में तितलियाँ सी उड़ रही थी। प्रीति इशारो इशारो में उसे छेड़ रही थी। गुप्ता जी ने इशारा किया तो विनोद ने पंडित जी को दक्षिणा दी और पंडित जी वहा से चले गए। गुप्ता जी उठे और कहा,”विनोद शादी में अब 4 हफ्ते ही बचे है हमे तैयारी शुरू कर देनी चाहिए , देखना शगुन की शादी में किसी तरह की कोई कमी ना रहे”


“अरे हा भाईसाहब , शगुन बिटिया सिर्फ आपकी बेटी थोड़े है वो हमारी भी बेटी है उसकी शादी इतने धूमधाम से करेंगे की पूरा बनारस देखेगा , चलिए पहले चलकर हलवाई और डेकोरेटर से मिल लेते है”,विनोद ने कहा तो गुप्ता जी उनके साथ बाहर निकल गए
शगुन सारा सामान उठाकर नीचे खाली पड़े रूम में रखने लगी। उसने सब सामान जमाया और हाथो को झाड़ते हुए जैसे ही बाहर आयी उसके कानो में गाने की आवाज पड़ी


“हमारी शादी में अभी बाकि है हफ्ते चार
चार सौ बरस लगे ये हफ्ते कैसे होंगे पार ?
नहीं कर सकता मैं और एक दिन भी इंतजार
आज ही पहना दे पहना दे पहना दे
आज ही पहना दे तेरी गोरी बांहो का हार”


शगुन ने नजर उठाकर देखा तो छत पर खड़ी प्रीति नजर आयी उसके हाथ में स्पीकर था और शगुन को चिढ़ाने के लिए ये गाना उसी ने चला रखा था। “प्रीति की बच्ची रुक तुझे मैं अभी बताती हूँ”,कहकर शगुन सीढ़ियों की और भागी। प्रीति ने स्पीकर रखा और शगुन के आगे पुरे घर में भागने लगी। भागते भागते उसने तार पर सूखे सारे कपडे नीचे गिरा दिए। प्रीति आगे और शगुन पीछे दोनों बहने पुरे घर में दौड़ रही थी और भागते भागते प्रीति निचे चली आयी शगुन भी निचे आयी ,, प्रीति दरवाजे से बाहर भाग गयी शगुन भी उसके पीछे आयी।

उसे ध्यान नहीं रहा और वह सामने से आते पारस से टकरा गयी जो की उन्ही के घर किसी काम से आया था।
“अरे अरे देख के”,पारस ने कहा तो शगुन को अहसास हुआ की प्रीति के साथ साथ वह भी बचकाना हरकत कर रही है
“सॉरी पारस वो मैंने देखा नहीं था , कैसे आना हुआ ?”,शगुन ने साँस लेते हुए कहा
“तुम्हारी सेलरी और TDS देने आया था”,पारस ने लिफाफा शगुन की और बढ़ाते हुए कहा
“ये तो मैं बाद में ले लेती तुम खामखा परेशान हुए पारस”,शगुन ने कहा


“मुझे लगा तुम्हारी शादी है तो उसमे ये पैसे काम आएंगे इसलिए देने चला आया”,पारस ने कहा
“थैंक्यू ! अंदर आओ”,शगुन ने कहा
“नहीं मुझे देर हो रही है निकलना है ,, मिलता हूँ”,कहकर पारस वहा से चला गया। शगुन भी लिफाफा लेकर अंदर आ गयी स्पीकर पर अभी भी गाना बज रहा था “हमारी शादी में अभी बाकि है हफ्ते चार” जिसे सुनकर शगुन मुस्कुरा उठी और यही लाइन्स सुनकर पारस के चेहरे पर उदासी छा गयी

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संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan
Manmarjiyan by Sanjana Kirodiwal
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Manmarjiyan by Sanjana Kirodiwal

“मुझे लगा तुम्हारी शादी है तो उसमे ये पैसे काम आएंगे इसलिए देने चला आया”,पारस ने कहा
“थैंक्यू ! अंदर आओ”,शगुन ने कहा
“नहीं मुझे देर हो रही है निकलना है ,, मिलता हूँ”,कहकर पारस वहा से चला गया। शगुन भी लिफाफा लेकर अंदर आ गयी स्पीकर पर अभी भी गाना बज रहा था “हमारी शादी में अभी बाकि है हफ्ते चार” जिसे सुनकर शगुन मुस्कुरा उठी और यही लाइन्स सुनकर पारस के चेहरे पर उदासी छा गयी

“मुझे लगा तुम्हारी शादी है तो उसमे ये पैसे काम आएंगे इसलिए देने चला आया”,पारस ने कहा
“थैंक्यू ! अंदर आओ”,शगुन ने कहा
“नहीं मुझे देर हो रही है निकलना है ,, मिलता हूँ”,कहकर पारस वहा से चला गया। शगुन भी लिफाफा लेकर अंदर आ गयी स्पीकर पर अभी भी गाना बज रहा था “हमारी शादी में अभी बाकि है हफ्ते चार” जिसे सुनकर शगुन मुस्कुरा उठी और यही लाइन्स सुनकर पारस के चेहरे पर उदासी छा गयी

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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9 comments

Preeti November 3, 2020 - 10:45 am

Bechara guddu 2 saal pehle k result pr pitai ho gyi mazaa aa gya

Reply
शैलेंद्र+कुमार November 3, 2020 - 10:57 am

मैम शादी में बचे हैं हफ्ते अब चार….शगुन का दिल हो गया हैं बेकरार… फिर से दोनों को मिलवाओं तो सही एकबार…. जिससे गुड्डू को भी हो जायें शगुन से प्यार😊 shandaar part👌👌👌👌👌

Reply
Ankita Dubey November 3, 2020 - 10:59 am

Wowww mstt part😍😍😍

Reply
Saroj November 3, 2020 - 11:03 am

Guddu ki subah ki shuruwat or din ka ant dono hi sirf mishra ji ki danth se hi hota hai😆

Reply
Seema srivastava November 3, 2020 - 11:12 am

Very nice

Reply
Kshmata November 3, 2020 - 11:29 am

संजना जी…गुड्डू से बढिया तो ये गोलू बहुत मजेदार है…सच में इसके बिना ये स्टोरी अधूरी है…सबको गोलू जैसा मस्त दोस्त मिलना चाहिए… बस अब जल्दी से गुड्डू और शगुन की शादी हो जाए…

Reply
Rachna aggarwal November 3, 2020 - 11:56 am

😂😂😂mjedar part.. golu to jese kntap khane k liye hi bna h🤣🤣🤣

Reply
Soni Rajput November 3, 2020 - 2:50 pm

Nice part

Reply
Aarti+Srivastava November 3, 2020 - 3:01 pm

Wah bhai …. Shaddi ke hafte chaar … Yeh din kaise honge paar🙂🙂🙂😍😍😍😍😍😍

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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