Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 3

Manmarjiyan Season 3 – 65

by Story With Sanjana August 27, 2025
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Manmarjiyan Season 3 – 65

Manmarjiyan - Season 3
Manmarjiyan – Season 3 by Sanjana Kirodiwal

फुलवारी मंगल फूफा की बांहो में थी और गोलू के फोन पर एक बार फिर अजीबो गरीब रिंगटोन बज रही थी और गोलू ठहरा बकैत जिस मंगल फूफा से गुप्ता जी थर थर काँप रहे थे गोलू उनके सामने भी बकैती कर रहा था उलटा उसे गुप्ता जी और गुप्ताइन से जो थप्पड़ पड़े थे उनका बदला भी उसने मंगल फूफा से लिया और तड़ातड़ चांटे उनके गालो पर बरसा दिए।


गुप्ताइन फटी आँखों से अपने फूफा और फुलवारी को देख रही थी और बगल में खड़े गुप्ता जी मुंह फाड़े गोलू को देख रहे थे गोलू नाचते हुए पलटा और गुप्ता जी के सामने आकर नाचते हुए होंठ हिलाये “मंजिल मेरी बस तू ही तू”
इतने में गुप्ता जी ने खींचकर गोलू को थप्पड़ मारा और गोलू उछलकर लवली की गोद में चढ़ गया और होंठ हिलाये “तेरी गली मैं चली” 

अपनी उंगलियों को लवली के गाल से लगाकर फिर अपने होंठो पर लगा ली बेचारा लवली क्या ही कहता उसने गोलू को धरती पर गिरा दिया ?
“हाय रे गुड्डू भैया जे का किया ? हाय हमायी कमर,,,,,,,,,!!”,गिरते ही गोलू जोर से चिल्लाया जिस से मंगल फूफा और फुलवारी की तंद्रा टूटी और फुलवारी जल्दी से उनसे दूर हुई। गुप्ताइन ने देखा तो अपने फूफा की तरफ आयी और कहा,”का फूफा ? गोलू के पिताजी के जैसे आप भी इह का चक्कर मा फंस गए”


“अरे नहीं नहीं कैसी बातें करती हो ? वैसे इह है कौन ?”,मंगल फूफा ने फुलवारी को देखकर बड़े ही प्यार से पूछा
फुलवारी फूफा की नजर भांप गयी इसलिए अपनी साड़ी का पल्लू सही करके जैसे ही कहने को हुई गुप्ताइन ने उखड़े हुए स्वर में कहा,”अरे जे ही तो है जे के चक्कर मा गोलू के पिताजी बुढ़ापे मा अपने बालों मा पुष्प हिना लगाने का सपना देख रहे है,,,,,,,,,!!”

“का कह रही हो जीजी ? तुम्हाये कहने का मतलब का है ?”,फुलवारी ने गुस्से से कहा
“अरे कुछो नाही इह का ग़लतफ़हमी हो गयी है फुलवारी तुमहू अपने घर जाओ”,गुप्ता जी ने आकर कहा
“आप चुप रहिये गोलुआ के पिताजी , आप का सोच रहे मिटटी की हंडिया मा नमक तोड़ेंगे और किसी को पता नाही ना चलेगा,,,,,,,,,ए फुलवारी कान खोल के  सुन ल्यो जॉन डोरे तुमहू हमाये पति पर डाल रही हो ना ओह्ह ही डोर से तोहार गला काट देही है समझी”,गुप्ताइन ने कहा


“तो हमहू भी कोनो कच्ची चुडिया नाही पहनी हूँ गोलू की अम्मा फाड़कर रख दूंगी समझी,,,,,,,,,,!!”,फुलवारी ने तनते हुए कहा
मंगल फूफा ने अपने आदमियों की तरफ देखा और मुस्कुराकर कहा,”कितना अच्छा बोलती है ना,,,,,,,कड़क”
गोलू ने सुना फुलवारी उसकी अम्मा को धमका रही है तो वह आगे आया और कहा,”ए चाची ! का फाड़कर रख देंगी और तुमहू फाड़ दी तो सिलेगा कौन ? नवरतन टेलर की सिलाई का दाम जानती हो ना,,,,,,,,,,,,और इतना ही बुरा लग रहा है अम्मा की बातो का तो काहे चलायी हमाये पिताजी के साथ चक्कर , अच्छा लगेगा जे उम्र पिताजी आपको लेकर भाग जाए”


फुलवारी ने सुना तो गुप्ता जी को देखा और कहा,”थू ! अरे हमायी अकल पर पत्थर पड़े है का जो हमहू इनसे चक्कर चलाएंगे , अरे कहा इह कहा हमरे यादव जी अरे शक्ल देखी है इनकी जे शक्ल से ही चोर है हमहू इन से चक्कर चलाएंगे,,,,,,,,,,,!!”
“वही हम सोचे इतनी बुरी चॉइस तो नाही हो सकती आपकी,,,,,,,,,!!”.मंगल फूफा ने फिर बड़े प्यार से कहा गुप्ताइन ने घुरा तो मंगल फूफा दूसरी तरफ देखने लगे।

गोलू ने सुना तो गुप्ता जी को देखा और फुलवारी की तरफ देखकर कहा,”ए चाची अपनी जबान को ज़रा लगाम दयो और का यादव जी हां दिनभर अपनी भैंसिया के गोबर की तरह बास मारते यादववा को तुमहू हमाये पिताजी से कम्पेयर कर रही हो,,,,,,अरे हमाये पिताजी अपने ज़माने के शाहरुख़ खान रहे है”
“अरे जाओ गोलू ! तुम्हायी अम्मा की तरह तुमहाओ दिमाग भी ना खाली हो गओ है , अरे मोहल्ला मा का मर्दो की कमी है जो हम तुम्हाये पिताजी से चक्कर चलाएंगे,,,,,,,,,!!”,फुलवारी ने भड़ककर कहा


गुप्ता जी के घर के सामने से निकलते मोहन हलवाई ने जैसे ही सुना उसने अंदर झांकते हुए कहा,”मतलब हमाओ भी कोनो चांस है का ?”
गोलू ने सुना तो गुस्से से एक बड़ी साँस ली और गेट के पास आकर मोहन हलवाई को ऊपर से लेकर नीचे तक देखा और कहा,”अबे बास मारते कलाकंद की चाशनी हिया हमायी अम्मा को घर टूट रहो और तुमहू चांस मांग रहे , ऐसी मार मारेंगे ना साले जिंदगीभर तुमहाओ लोटा सीधी जलेबी बनाएगा,,,,,,,भाग जाओ साले वरना तुम्हायी बूंदी बिखेर देंगे , मौका चाहिए इनको,,,,,,,,,पिताजी के रहते हमहू नाही मांगे कबो मौका”


“अबे का बक रहे हो गोलू ?”,गुप्ता जी ने दाँत पीसते हुए कहा तो गोलू उनकी तरफ चला आया और अपनी जबान सम्हालकर कहा,”अरे पिताजी हमारा मतलब आपके सामने आज तक हमहू कुछो बोले है का ?”
गुप्ता जी ने फुलवारी की तरफ देखा और कहा,”ए फुलवारी तुमहू बताती काहे नाही कि सच का है ? अरे इनका बताओ कि तुम्हाये हमाये बीच कोनो,,,,,,,,,,,,!!!”
गुप्ता जी आगे कहते इस से पहले ही गोलू का फोन फिर बज उठा  “चुरा के दिल मेरा गोरिया चली,,,,,,,,चुरा के दिल मेरा गोरिया चली”


गुप्ता जी ने गुस्से से पलटकर देखा , फोन अंदर टेबल पर रखा था जो कि बज रहा था। लवली जिसे पिछले 20 मिनिट से कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या हो रहा है क्या नहीं , उसने अंदर जाते हुए कहा,”हम उठाते है”
गोलू , गुप्ता जी , गुप्ताइन और फुलवारी फिर आपस में उलझ गए उधर लवली ने जब फोन देखा तो स्क्रीन पर गुड्डू भैया नाम देखकर उसके दिमाग में यहाँ से निकलने का एक आइडिआ आया और उसने फोन उठा लिया।
“हेलो ! गोलू कहा हो यार हम फोन कर रहे है फोन काहे नाही उठा रहे तुम ?

6 बजे पिताजी स्टेशन पहुँच जायेंगे हमने तुमसे कहा था ना उन्हें लेने जाना है , हेलो गोलू , अबे सो रहे हो का बे तुम जवाब काहे नाही देते हमायी बात का ?”,गुड्डू ने कहा
“हेलो गुड्डू उर्फ़ अर्पित मिश्रा , चूहे बिल्ली के इस खेल में मजा आ रहा है कि नाही ?”,लवली ने कहा
“तुम , तुम कौन हो और तुम्हायी आवाज तो बिल्कुल हमाये जैसी है , कही तुम हमाये हमशक्ल,,,,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने घबराहटभरे स्वर में कहा


“गोलू ने जितना बताया था उतने भी बेवकूफ नहीं हो तुम गुड्डू , वैसे तुम्हारा प्यारा गोलू जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है हो सके तो आकर बचा लो,,,,,,,!!”,लवली ने गुड्डू को डराने के लिए कहा ताकि गुड्डू गोलू को बचाने यहाँ आ जाये और लवली को भागने का मौका मिल जाये।
लवली की बात सुनकर गुड्डू घबरा गया और कहा,”ए देखो तुम्हे जो करना है हमाये साथ करो गोलू को छोड़ दयो अरे उह्ह बेचारे की कोनो गलती नाही है ए भाई तुमहू सुन रहे हो ना हम का कह रहे है ?

अरे हमहू तो तुमको जानते भी नाही है यार हमाये साथ का दुश्मनी है तुम्हायी आखिर हमने तुम्हारा का बिगाड़ा है ? तुम तुम जे बताओ कहा से बोल रहे हो हमहू आकर मिलते है ना तुमसे बैठकर बात करते है बस गोलू को कुछ मत करना,,,,,,,,,,!!”
“तुम्हारा दोस्त अपने घर पर ही है आकर बचाय लयो”,लवली ने कहा और फोन काट दिया।


“हेलो हेलो,,,,,,,!!”,गुड्डू बोलता ही रह गया। गोलू की जान को ख़तरा है ये जानकर गुड्डू जल्दी से घर से बाहर आया और अपनी बाइक स्टार्ट की लेकिन पाया कि बाइक के टायर में हवा नहीं है। गुड्डू देर नहीं कर सकता था इसलिए पैदल ही गोलू के घर की तरफ भागा , इंसान जब परेशान होता है तो चारो तरफ से और परेशानिया उसके पास आती है , गोलू के घर की तरफ जाने वाले रास्ते पर नाले जा रहे थे इसलिए गुड्डू को दूसरे रस्ते से जाना पड़ा जो कि थोड़ा घुमाकर था लेकिन गोलू को बचाने के लिए गुड्डू का जाना जरुरी था।

गुड्डू को यहाँ बुलाकर लवली गोलू का फोन लिए बाहर आया और गुप्ता जी के बगल में खड़ा हो गया वह बस ख़ामोशी से इस नाटक के ख़त्म होने का इंतजार कर रहा था। गुप्ता जी बेचारे अकेले उनकी बात कोई सुनने को तैयार ही नहीं था। गुप्ताइन फुलवारी के साथ अच्छा खासा उलझ चुकी थी। गुप्ताइन के हाथ में फुलवारी के बाल थे तो फुलवारी के हाथो में गुप्ताइन का गला , गुप्ता जी औरतो के बीच में कैसे पड़े इसलिए उन्होंने गोलू को झिड़का,”अबे गोलू खड़े खड़े का कर रहा है मुर्ख अलग कर उन दोनों को,,,,,,,,,!!”

गोलू ने कोशिश की लेकिन दोनों एक दूसरे को छोड़ने का नाम ना ले। गोलू ने साइड में खड़ मंगल फूफा को देखा और कहा,”ओह्ह्ह छोटा भीम , का हमाये पिताजी की बारात मा आये हो , हिया आके हमायी मदद करो छुड़वाओ इन्हे”
मंगल फूफा ने सुना तो आकर फुलवारी को पकड़ा और गोलू ने अपनी अम्मा को , दोनों ने उन्हें खींचा अब गुप्ताइन तो थी भारी भरकम इसलिए वे तो जैसे की तैसे खड़ी रही हाँ गोलू जाकर गिरा गुप्ता जी के पैरो में , उसके हाथ गुप्ता जे के पैरो पर और मुंह भी उसने सर उठाकर देखा और कहा,”आशीर्वाद दयो पिताजी”


“इह ल्यो”,कहकर गुप्ता जी एक लात गोलू के पिछवाड़े पर दे मारी और गोलू लुढ़कते हुए सीढ़ियों से नीचे जा गिरा। उधर मंगल फूफा फुलवारी को लेकर नीचे जा गिरे , साढ़े पांच फुट के मंगल फूफा नीचे और फुलवारी उनके ऊपर दोनों फिर एक दूसरे की आँखों में देखने लगे और गोलू का फोन बजा। क्या मतलब कि ऐसी सिचुएशन में फोन बार बार बज रहा है ? मैंने कहा ना ये स्क्रिप्ट मैंने लिखी है जब जब मैं चाहूंगी गोलू का फोन तब तब बजेगा
“चुरा के दिल मेरा , गोरिया चली
चुरा के दिल मेरा , गोरिया चली”


गुप्ता जी के सब्र का बांध अब टूट चुका था उन्होंने बगल में खड़े लवली के हाथ से गोलू का फोन लिया और जमीन पर दे मारा और गुस्से से कहा,”ना रहेगा फोन ना बजेगा गाना”
“पिताजी जे का किये हमाओ फ़ोन काहे तोड़ दिए ?”,गोलू चिल्लाया
“जे फोन की किस्तें हमने ही भरी है”,कहते हुए गुप्ता जी नीचे आये और मंगल की तरफ बढे लेकिन वे मंगल के पास जाते इस से पहले मंगल के दोनों आदमियों ने गुप्ता जी को पकड़ लिया गुप्ता जी चिल्लाये,”अबे गोलू अबे दूर उह्ह चांडाल को फूल से,,,,,,,,!!”

बेचारे गुप्ता जी के मुंह से पूरा नाम निकलता इस से पहले ही उनके मुंह पर एक मुक्का पड़ चुका था। गुप्ता जी के मुंह से फूल सुनकर गुप्ताइन भड़क गयी और उन्होंने कहा,”फूल , फुलवारी से इह अब सीधा फूल हो गयी आपके लिए,,,,,,,हाय जे सुनने से पाहिले हमहू बहरे काहे नाही हो गए ?”
पिंकी जो इस पुरे नाटक में अब तक चुपचाप खड़ी थी वह लवली के पास आयी और कहा,”गुड्डू खड़े खड़े देख क्या रहे हो पिताजी को छुड़वाओ ना उन लोगो से”


लवली को मजबूरन आना पड़ा और उसने मुस्टंडो में से एक से कहा,”ए भाई छोडो इन्हे का कर रहे हो ?”
आदमी ने गुप्ता जी को तो नहीं छोड़ा उलटा एक घुसा लवली को दे मारा और लवली सीधा जाकर गोलू के गले लगा। गोलू को लात पड़ने के साथ साथ अपना फोन टूटने का दुःख था जैसे ही लवली आकर उसके गले लगा गोलू ने धक्का मारकर कहा,”अबे गुड्डू भैया का कर रहे हो ? जे कोई गले मिलने का बख्त है”


लवली बेचारा गोलू के धक्के से एक बार फिर आदमी से टकराया उसने भी गुस्से से लवली को एक घुसा मारा और लवली जाकर गिरा फुलवारी और मंगल फूफा पर इतने में मंगल चिल्लाया,”अबे गधो देख का रहे हो उठाकर पटको इसे”
दोनों आदमियों ने गुप्ता जी को छोड़ा और लवली की तरफ आये उनमे से एक ने जैसे ही लवली को पकड़ा गोलू दौड़कर आया और दूसरे को धक्का मारकर कहा,”साले हमाये गुड्डू भैया को मारते हो तुम्हायी ऐसी की तैसी”


लवली ने जब सुना तो गोलू की तरफ देखने लगा , लवली जानता था कि वह गुड्डू नहीं है फिर भी उसे मार खाते देखकर गोलू कैसे उसे बचाने चला आया ये गुड्डू के लिए गोलू का प्यार ही तो था। दोनों आदमियों ने लवली को छोड़ गोलू को धर लिया

 गुप्ता जी गुप्ताइन के पास आये और कहा,”अरे कैसी औरत हो भाई तुमहू , साला अपने ही घर मा लोगन को बुलाके पति और बेटे का धुलाई करवाय रही हो , कोनो लाज शर्म बची के नाही बची तुम्हाये अंदर ?”
“उह हमाये मंगल फूफा है उन्हें गुंडा वुन्डा ना कहना समझे,,,,,,,और मार खाये वाले काम तो आप किये रहय गोलुआ के पिताजी सच्चाई सामने आयी रही तो मिर्चा लग रही आपको,,,,,,,,,,और गोलुआ को का जरूरत है फट्टे मा टाँग अड़ाने की,,,,,,,अब ले परसादी आपके साथ मा”,गुप्ताइन ने गुप्ता जी को झिड़कते हुए कहा


आदमियों में से एक ने गोलू को नीचे गिरा दिया और उसकी छाती पर चढ़ गया , लवली अभी भी बैठ के गोलू को देख रहा था तो गोलू ने मरे हुए स्वर में कहा,”ए गुड्डू भैया अबे का हमाये मरने का इंतजार कर रहे है आप , अरे जे सांड का हटाओ हमाये ऊपर से भइआ”
गोलू की बात सुनकर लवली की तंद्रा टूटी उसके पास यहाँ से भागने का अच्छा मौका था ना जाने क्यों फिर भी लवली उठा और गोलू को बचाने के लिए आदमी को मारने लगा , लवली को देखकर गोलू में भी हिम्मत आ गयी वह दूसरे आदमी को मारने लगा।

गुप्ता जी ने देखा तो गोलू की मदद करने आये तो पिंकी ने पास पड़ा डंडा उठाकर उन्हें देते हुए कहा,”पिताजी जे लीजिये”
“अरे थन्कु बिटिया,,,,,,,,!!”,कहकर गुप्ता जी आगे बढ़ गए गुप्ताइन ने सुना तो पिंकी को तिरछी नजर से देखा और कहा,”सब के सब मिले हुए है जे घर मा” उधर मंगल फूफा और फुलवारी उठे और फूफा ने लार टपकाते हुए कहा,”आपको कही चोट तो नाही लगी ?”
“नहीं हमहू ठीक है”,फुलवारी ने अपने हाथो को झाड़ते हुए कहा


“उह हम जे कह रहे थे कि,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा इतना ही कह पाया कि तभी घर का दरवाजा खुला और यादव दनदनाते हुए अंदर आकर बोला,”कौन है बे जो हमायी धर्मपत्नी का धरम भरष्ट करने का कोशिश किया , रामप्यारी की कसम हमहू साला जमीन मा ज़िंदा गाड़ देंगे , अरे गोबर के ढेर मा पैक कर देंगे ,दूध की बाल्टी मा डुबो डुबो कर जान से मार डालेंगे ससुर का नाती को,,,,,,,,,हे कौन है बे ?”
आखरी के चार शब्द यादव जी बाँहे फैलाकर गुस्से से कही और उनका भारी भरकम हाथ लगा मंगल फूफा के मुंह पर और फूफा औंधे मुंह धरती पर जा गिरे

गुप्ता जी गोलू की मदद करने गए थे लेकिन यादव को अपने घर में देखकर उनका खून खौल गया उन्होंने हाथ में पकड़ा डंडा साइड में फेंका और वह जाकर लगा लवली के सर पर , लवली का चेहरा गुस्से से लाल हो गया उसका दिल किया इन दो मुस्टंडो से पहले वह एक बार गोलू और गुप्ता जी की धुलाई कर दे आखिर असली गुंडे तो ये दोनों ही थे  

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संजना किरोड़ीवाल 

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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