Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 27

by Story With Sanjana March 17, 2026
written by Story With Sanjana March 17, 2026 2 comments
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Manmarjiyan Season 4 – 27

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

सोनू भैया के ऑफिस की पार्टी तो अच्छे से चल रही थी लेकिन गुड्डू की जिंदगी में चरस की कमी नहीं थी। गोलू महाराज दारू पीकर भंड पड़े थे और गुड्डू को जाना था घर ताकि अपने ससुराल वालों से मिल सके लेकिन फंक्शन किसके भरोसे छोड़कर जाये ? यहाँ बस दो लड़के थे बाकि सबसे समझदार लड़का रवि तो गोलू को लेकर घर छोड़ने चला गया था। रवि के लौटने का इंतजार करने का अलावा गुड्डू के पास अब कोई दूसरा रास्ता नहीं था तभी उसे सामने से सोने भैया आते दिखाई दिए।

गुड्डू को परेशान देखकर सोनू भैया उसके पास आये और कहा,”अरे का बात है गुड्डू बड़े परेशान दिखाई दे रहे हो , सब ठीक तो है ना ? देखो अगर आज के फंक्शन को लेकर परेशान हो तो चिंता छोड़ दयो और जे पकड़ो चेक,,,,,,,हमरे बॉस को तुम्हरा अरेंजमेंट बहुते पसंद आया , उन्होंने तो जे तक कहा है कि अब से हमरे ऑफिस का हर अरेंजमेंट तुम्ही देखोगे”

गुड्डू ने बुझे मन से उदास चेहरे के साथ सोने भैया के हाथ से चेक लिया और जींस की पॉकेट में डाल लिया ये देखकर सोनू भैया ने थोड़ा प्यार से कहा,”अरे का हुआ बऊआ , इत्ता टेंशन मा काहे हो ?”
गुड्डू ने रोनी सी सूरत बना ली और कहा,”हमको घर जाना है भैया , वहा शगुन के घरवाले हमाओ इन्तजार कर रहे है पर हम जे सब किसके भरोसे पर छोड़कर जाए ?”

“का बात कर रहे हो गुड्डू , अरे हम मर गए है का ? अरे तुम्हारे पार्टनर ना सही पर तुम्हाये भाई तो है ना , हिया सब हम सम्हाल लेंगे तुमहू बिंदास घर जाओ”,सोनू भैया ने कहा हालाँकि उन्होंने भी थोड़ी थोड़ी पी रखी थी लेकिन अभी होश में थे
“सच सोनू भैया ?”,गुड्डू ने मासूमियत से कहा
“अरे हाँ भाई ! अब का इतना भी काम नाही आएंगे हम तुम्हाये ? तुमहू जाओ हम है हिया”,सोनू भैया ने कहा
“थैंक्यू भैया ! ध्यान रखना हा , कोनो चीज की जरूरत हो तो हमको फोन करना,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा और वहा से चला गया।

सोनू भैया ने कुर्सी खिसकाई और उस पर बैठकर वेटर को आवाज दी , लड़का एक आवाज में सोनू की तरफ दौड़ा चला आया और सोनू भैया ने कहा,”एक ठो बढ़िया चिल्ड पैग हमरे लिए,,,,,,,,,,साथ मा चखना भी”

गुड्डू के कहने पर रवि गोलू को अपनी बाइक से लेकर घर के लिए निकल गया। रवि बाइक लेकर जैसे ही शर्मा जी की गली से निकला गोलू ने उसका कन्धा थपथपाते हुए कहा,”अबे रविवा , रोको रोको रोको”
बेचारा रवि ने अचानक से ब्रेक मारा तो गोलू उसी पर आ लदा , रवि ने उसे पीछे धकेला और कहा,”का गोलू भैया ! आप भी ना कमाल करते है अभी आपके रोकने के चक्कर में डायरेक्ट महादेव से मीटिंग कर लिए होते हम”
गोलू बाइक से नीचे उतरा और कहा,”अरे हमको एक नंबर जाना है”

“एक नंबर दो नंबर जो भी जाना हो घर चलकर करना , गुड्डू भैया ने हमे आपको घर छोड़ने को कहा है बैठिये”,रवि ने थोड़ा खीजकर कहा
“और अगर घर पहुंचने से पहिले कर दिया तो घर चलकर तुम धोओगे हमाओ कच्छा ? चुपचाप खड़े रहो हमहू अभी हलके होकर आते है”,गोलू ने कहा और शर्मा जी के घर की तरफ बढ़ गया
गोलू जैसे ही शर्मा जी के घर के सामने खड़ा हुआ रवि ने दबी आवाज में कहा,”गोलू भैया ! का कर रहे हो ? घर के मालिक ने देखा ना तो बहुते कुटे जाओगे बताय रहे है हम”

गोलू ने सुना और रवि की बात को गंभीरता से ना लेकर शर्मा जी के घर के सामने हलके होते हुए कहा,”पता है रविवा ! जे मोहल्ला मा 150 मकान है पर का तुम जानते हो 149 घर छोड़कर हमहू जे ही घर के सामने पिरोगराम काहे किये ? क्योकि जे हमाये ससुर का घर है,,,,,,,,,!!!”
“का आपके ससुर ?”,रवि ने हैरानी से कहा

गोलू पलटा और रवि की तरफ आते हुए कहा,”अबे काहे का ससुर ? एक नंबर का असुर है असुर ,, हाथ पैर जोड़े तब जाकर अपनी बिटिया हमाये साथ ब्याहे,,,,,,लब मैरिज किये ना तो गिफ्ट मा जो सोने की चैन दी उह्ह्ह भी नकली,,,,,,,,,अरे जब देखो तब हमाये पीछे पड़े रहते है जैसे हमहू मंगलसूत्र ओह्ह्ह की बिटिया के नाही ओह्ह के गले मा डाले हो.,,,,,,,रविया हमहू सच बताय रहे है भैया कबो लब मैरिज ना ही करना,,,,,,,,,,,,,जे साले लब मैरिज वाले ससुर जिंदगीभर असुर बनकर हमाये सर पर तांडव करते है,,,,,,,!!!”

गोलू रवि के सामने अपने ससुर की तारीफों के पूल बांध ही रहा था कि तभी घर का दरवाजा खुला और शर्मा जी को बाहर आते देखकर रवि ने जल्दी से बाइक स्टार्ट की और कहा,”गोलू भैया बैठिये”
गोलू जो की नशे में था उसे नहीं समझ आया रवि उसे कहा बैठने को कह रहा है इसलिए वह जहा खड़ा था वही नीचे जमीन पर बैठ गया। शर्मा जी को अपनी तरफ आते देखकर रवि ने बाइक आगे बढ़ा दी और गोलू नीचे ही बैठे रह गया।

“हमको बैठा के जे साला कहा निकल गया ? अबे ए रविया अबे हमको तो लेकर जाओ बे,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने उठकर कहा लेकिन रवि वहा से जा चुका था। नशे में धुत्त गोलू जैसे ही पलटा अपने पीछे खड़े शर्मा जी को देखकर डर गया और पीछे हटकर कहा,”का जान लेने की ठान लिए हो का हमायी ?”
“इतनी रात में आप हिया का कर रहे है ?”,शर्मा जी ने कठोरता से पूछा
“बच्चो को स्कूल छोड़ने जा रहे है,,,,,,,,,,दिखाई नाही देता काम से आ रहे थे अब घर जा रहे है”,गोलू ने लड़खड़ाती जबान में कहा

शर्मा जी को समझते देर नहीं लगी कि गोलू ने शराब पी रखी है। उन्होंने गुस्से से कहा,”बाकि सब बुरी आदते तो थी ही अब दारू पीना भी शुरू कर दिया , पता नहीं कौनसी मनहूस घडी में हमने अपनी बेटी की शादी आप से करवाने का फैसला किया”
“मनहूस नाही बहुते शुभ घडी थी जब हम शादी के लिए हाँ कहे थे , अरे आपको अपना ससुर रखे ये का कम बात है। आपकी बिटिया का ख्याल आपसे भी जियादा रखते है”,गोलू ने मुंह बनाकर कहा और लड़खड़ाया तो शर्मा जी ने सम्हाल लिया और कहा,”खुद को ठीक से सम्हाल नहीं पा रहे हमारी बिटिया को क्या सम्हालोगे ?”

शर्मा जी ने देखा गोलू बिल्कुल होश में नहीं है तो वे उसे सम्हालकर घर के अंदर ले गए। शर्माईन सो रही थी उन्हें जगाकर शर्मा जी परेशान करना नहीं चाहते थे इसलिए खुद ही गोलू को लेकर बगल वाले कमरे में चले आये और बिस्तर पर लेटा दिया जो कि शादी से पहले पिंकी का कमरा हुआ करता था। गोलू ने ज्यादा पी ली थी इसलिए बिस्तर पर गिरते ही उसे नींद आ गयी थी।
शर्मा जी ने राहत की साँस और कमरे का दरवाजा बंद करके बाहर चले आये।

सोनू भैया को फंक्शन की जिम्मेदारी देकर गुड्डू सीधा घर चला आया। जैसे ही गुड्डू घर में घुसा सामने से आते लवली ने उसका हाथ पकड़ा और उसे साइड में लाकर कहा,”अबे कहा रह गए थे ? पता है जब से इन लोगो को लेकर घर आये है सब हमे गुड्डू समझ रहे है ऊपर से तुम्हायी वो साली गुड्डू जीजू गुड्डू जीजू करके तब से हमाये पीछे पड़ी है ,, तुम जाओ अंदर और तुम ही सम्हालो ये सब हमसे नहीं होगा”

“अरे माफ़ करना लवली भैया वो गोलू,,,,,,,,,,छोडो जाने दो , हम जाकर उनसे मिलते है और उन्हें सब सच भी बताते है”,कहकर गुड्डू अंदर चला गया। सीढिया चढ़कर गुड्डू आँगन की तरफ जाने लगा तो सामने से आते मिश्रा जी से टकरा गया। मिश्रा जी ने सामने खड़े गुड्डू को देखा वे उस से कुछ कहते इस से पहले शराब की तेज गंध मिश्रा जी के नाक से होकर गुजरी और उनकी भँवे तन गयी।

उन्होंने गुड्डू की बाँह पकड़ी और उसे साइड में लाकर दबी आवाज में कहा,”तुम्हायी अकल पर का पत्थर पड़े है गुड्डू ? हिया तुम्हाये ससुराल वाले बैठे है और तुमहू शराब पीकर घर आये हो,,,,,,,,अरे ऐसी कौनसी टेंशन है तुमको जो तुमहू अब शराब पीने लगे हो”

मिश्रा जी की बात सुनकर गुड्डू हैरानी से उन्हें देखने लगा , शराब पीना तो दूर गुड्डू तो खुद ये सब से दूर रहता था लेकिन वह भूल गया कि कुछ देर पहले ही वह गोलू नाम की मुसीबत को गले लगाकर आया था और शराब गोलू ने पी रखी थी और इसीलिए अब गुड्डू भी महक रहा था और साथ ही गोलू ने मुँह में भरी शराब भी गुड्डू की शर्ट पर उड़ेल दी थी।

“अरे पिताजी आप गलत समझ रहे है हमने शराब नहीं पी है,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने मिश्रा जी की तरफ बढ़कर कहा लेकिन बेचारे की ख़राब किस्मत की मिश्रा के सामने लड़खड़ा गया ये देखकर मिश्रा जी ने गुस्से ने दबी आवाज में कहा,”ठीक से चल तक नाही पा रहे हो तुमहू गुड्डू , तुम से तो हम कल सुबह बात करेंगे ,, चुपचाप जाओ लवली के कमरे में और नीचे नहीं आना,,,,,,तुम्हाये ससुराल वालो ने तुमको जे हालत में देखा तो का सोचेंगे उह्ह्ह लोग ?”
बेचारा गुड्डू उसने सुना तो मायूसी से कुछ दूर खड़े लवली को देखा , ना उसने कुछ किया न करा और खामखा मिश्रा जी के सामने बदनाम हो गया।

“पिताजी हमने नहीं पी है वो तो उह्ह्ह गोलू ने हम पर शराब गिरा दी थी इसलिए हम से महक आ रही है , हम सच कह रहे है हमने नहीं पीया है , हम शगुन के घरवालों से जाकर मिल लेते है”,गुड्डू ने कहा
मिश्रा जी ने उसे जाने से रोका और कहा,”शगुन के घरवालों से हम लवली को मिलवा देंगे तुम ऊपर जाओ,,,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने सर झुकाया और सीढ़ियों की तरफ बढ़ गया। लवली ने अफ़सोस में अपना सर झटका और जाने लगा तो मिश्रा जी ने उसे रोका और उसकी तरफ चले गए ताकि एक बार फिर उसे गुड्डू बनाकर शगुन के घरवालों के सामने गुड्डू बनाकर पेश कर सके।  

किचन से बाहर आती शगुन की नजर सीढ़ियों की तरफ पड़ी तो उसने देखा गुड्डू उसके घरवालों से मिले बिना ही ऊपर छत पर जा रहा है। शगुन ने हाथ में पकड़ी ट्रे वेदी को दी और खुद सीढ़ियों की तरफ चली आयी लेकिन तब तक गुड्डू ऊपर जा चुका था। शगुन भी सीढिया चढ़कर गुड्डू के पीछे ऊपर आयी और उसे आवाज दी,”गुड्डू जी”

शगुन की आवाज सुनकर गुड्डू रुका और पलटकर। शगुन उसके पास आयी और कहा,”गुड्डू जी ! कहा थे अब एक आप ? पता है सब नीचे कब से आये हुए है और बेचारे लवली भैया को गुड्डू जी समझ रहे है,,,,,,,,,अब आप आ गए है तो चलिए सब से मिल लीजिये ताकि उनकी गलतफहमी भी दूर हो जाए”
कहते हुए शगुन ने पास आकर जैसे ही गुड्डू की बाँह पकड़ी उसमे से आती शराब की बदबू शगुन के नाक से होकर गुजरी  

“गुड्डू जी ! आपने शराब पी है ?”,शगुन ने गुड्डू की तरफ देखकर हैरानी से पूछा
नीचे मिश्रा जी गुड्डू को पहले ही गलत समझ चुके थे अब शगुन भी कही उसे गलत ना समझ ले सोचकर गुड्डू ने शगुन को सब सच बता दिया और कहा,”गोलू की वजह से पिताजी ने हमे गलत समझ लिया”
शगुन ने सुना तो उसे भी गोलू पर थोड़ा गुस्सा आया और उसने कहा,”गुड्डू जी ! एक काम कीजिये कल गोलू जी को घर बुलाइये उनकी खबर मैं लेती हूँ और आप जाईये नहा लीजिये और कपडे बदलकर नीचे आ जाईये , पापा जी से बात मैं कर लुंगी”

शगुन ने कहा और जाने लगी तो गुड्डू ने कहा,”शगुन”
“हाँ,,,,,,,,,,!!!”,शगुन ने पलटकर कहा
“थैंक्यू ! हमे इतना समझने के लिए”,गुड्डू ने मुस्कुरा कर प्यार से कहा
“गुड्डू जी , पूरी दुनिया आपको गलत समझ सकती है लेकिन मैं नहीं,,,,,,जाईये नहा लीजिये”,कहकर शगुन वहा से चली गयी
गुड्डू ने सुना तो मुस्कुरा उठा और खुद में ही बड़बड़ाया,”साला ! कित्ती सही घरवाली मिली है हमे,,,,,,भगवान् हर जिंदगी में हमे ना शगुन ही देना”

गुड्डू से बात करके शगुन नीचे चली आयी और मिश्रा जी को ढूंढने लगी। मिश्रा जी आँगन की सीढ़ियों के पास लवली से बात करते दिखाई दिए तो शगुन उनके पास आयी और उन्हें सब बात बताई। मिश्रा जी ने सुना तो उनके चेहरे पर कठोर भाव आये वही लवली को मन ही मन गोलू की इन हरकतों पर खीज हुई और उसने कहा,”जे गोलू कही रहे और गड़बड़ ना हो ऐसा भला कभी हो सकता है क्या ?”

“जे गोलू दिन ब दिन बहुते जियादा बिगड़ता जा रहा है जे का इलाज करना पड़ेगा,,,,,,,कल सुबह बुलाओ ओह्ह्ह का घर हमहू अपने तरीके से समझाते है ओह्ह का,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने कहा
“हाँ पिताजी ! अगर ऐसे ही उह्ह्ह गलतिया करता रहा तो किसी दिन कोनो बड़ी मुसीबत मा फंस जाएगा”,लवली ने कहा

मिश्रा जी शगुन और लवली को साथ लेकर अंदर चले आये। हॉल में सभी बैठे थे मिश्रा जी , शगुन और लवली भी वहा चले आये। लवली को देखते ही प्रीति उसके पास आयी और उसकी बाँह थामकर उसे अपने और रोहन के बीच में बैठाते हुए कहा,”अरे गुड्डू जीजू ! आप बीच बीच में कहा चले जाते है ? यहाँ बैठिये ना हम सबके साथ”
लवली ने प्रीति को देखा और जबरदस्ती मुस्कुरा दिया तभी बगल में बैठे रोहन ने लवली की तरफ झुककर धीरे से कहा,”इतना तो प्रीति हम से प्यार नहीं करती है जितना आपसे करती है……..!!!”
लवली ने सुना तो अफ़सोस में अपना हाथ अपने ललाट से लगा लिया।

मिश्रा जी ने एक नजर सबको देखा और लवली की तरफ देखकर कहा,”हमे आप सबको कुछो बताना है , हमाये बीच ये जो बैठा है उह्ह गुड्डू नाही बल्कि ओह्ह्ह का जुड़वा भाई ‘लवली’ है जो बिल्कुल गुड्डू की तरह दिखता है”
मिश्रा जी की बात सुनकर मिश्राइन , शगुन , वेदी और लवली के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे बाकि सब हैरानी से लवली को देख रहे थे। प्रीति ने जैसे ही सुना जल्दी से लवली की बाँह छोड़ी और उठकर उस से दूर खड़ी हो गयी। ये देखकर लवली धीरे से हंसा और शगुन भी मुस्कुरा उठी।

“ये आप क्या कह रहे है समधी जी , हमे तो कुछ समझ नहीं आ रहा ?”,गुप्ता जी ने उलझनभरे स्वर में कहा
मिश्रा जी ने लवली को अपने पास बुलाया और सबसे उसका परिचय करवाकर सारा सच दिया बस ये नहीं बताया कि लवली और गुड्डू उनके दोस्त बृजेश के बेटे है बल्कि उन्होंने कहा कि गुड्डू लवली के जन्म के समय उन्होंने अपना एक बच्चा अपने दोस्त को दे दिया था और आज जब उसका दोस्त और उसकी पत्नी  नहीं रहे तो उन्होंने लवली को अपने पास बुला लिया।

मिश्रा जी की बातें सुनकर सब पहले खूब हैरान परेशान हुए लेकिन बाद में सबके चेहरो पर ख़ुशी थी।
“दामाद जी की तरह आपके बड़े बेटे भी बहुत अच्छे है मिश्रा जी हमे तो इनसे मिलकर बहुत ख़ुशी हुई,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने कहा तो लवली उनकी तरफ देखकर  मुस्कुरा दिया।

रोहन को प्रीति को छेड़ने का मौका मिल गया इसलिए उसने कहा,”लवली भैया ! आपसे मिलकर सब बहुत खुश है लेकिन सबसे ज्यादा प्रीति खुश है क्यों प्रीति ?”
प्रीति ने सुना तो शर्माकर शगुन के पास आयी और उसके पीछे छुपकर कहा,”दी ! आपने मुझे बताया क्यों नहीं ये गुड्डू जीजू नहीं है,,,,,,,!!!”
शगुन ने सुना तो अपने हाथ से उसका गाल थपथपाया और मुस्कुराकर कहा,”इसलिए मैं कहती हूँ अपना अल्हड़पन थोड़ा कम करो”

“लेकिन गुड्डू जी है कहा ?”,इस बार विनोद चाचा ने कहा तब तक गुड्डू नहाकर कपडे बदलकर आ चुका था और अब उसमे से बस परफ्यूम की खुशबु आ रही थी शराब की नहीं। गुड्डू हॉल में आया और कहा,”हम यहाँ है , माफ़ कीजियेगा आने में थोड़ी देर हो गयी उह्ह्ह का है ना एक ठो पार्टी का आर्डर लिए थे तो बस वही थे”
गुड्डू ने आकर चाचा-चाची और गुप्ता जी के पैर छुए लेकिन इस बार भी गुप्ता जी ने गुड्डू को अपने पैर ना छूने देकर उसे गले लगाया और कहा,”सच बेटा जी ! आपको ऐसे मेहनत करते देखकर बहुत अच्छा लगता है और आज तो मिश्रा जी लवली जी के रूप में हमे बड़ा सरप्राइज दे दिया

गुड्डू ने सुना तो लवली की तरफ देखकर मुस्कुराया और फिर सबके साथ बैठकर बाते करने लगा। सबने गुड्डू को प्रीति के बारे में बताया कि कैसे वह लवली को गुड्डू समझकर उसके आगे पीछे घूम रही थी। गुड्डू ने सुना तो सबके साथ मिलकर खूब हंसा और बेचारी प्रीति बस झेंपती रही

शगुन से दूर हटकर प्रीति वेदी की तरफ चली आयी और उसके बगल में बैठकर अमन के नाम से उसे छेड़ने लगी। अमन सामने ही बैठा था और वेदी को देखकर मुस्कुरा रहा था , घर आने के बाद से दोनों को बात करने का मौका ही नहीं मिला था। चाय नाश्ते और बातचीत के बाद मिश्रा जी , गुप्ता जी और चाचा जी वही हॉल में बैठकर बाते करने लगे। लवली ने मिश्रा जी के कहने पर शगुन के घरवालों के रहने का इंतजाम किया था उसी को दिखाने वह गुड्डू को अपने साथ लेकर चला गया।

शगुन और मिश्राइन किचन में खाने की तैयारी देखने लगी तो चाची भी उनके पास चली आयी हालाँकि मिश्राइन ने उन्हें काम करने नहीं दिया वे बस बैठकर उनसे बातें कर रही थी। वेदी को प्रीति से बहुत सारी बाते करनी थी क्योकि प्रीति की शादी के बाद दोनों आज मिल रही थी इसलिए वह प्रीति को लेकर अपने कमरे में चली आयी। बचा अमन तो वह ना हॉल में बड़ो के बीच बैठ पा रहा था , ना औरतो के बीच किचन में जा सकता था , ना ही वह गुड्डू लवली के साथ जा सकता था क्योकि वे दोनों काम में व्यस्त थे।

अब बचा सामने बैठा अमन का छोटा जीजा रोहन,,,,,,,,,,,,अमन ने आँखों ही आँखों में रोहन से वहा से चलने का इशारा किया।
रोहन उठा तो अमन उसके पापा चला आया और मिश्रा जी से कहा,”अंकल जी ! हम छोटे जीजाजी को आपका घर दिखा दे ? ये यहाँ पहली बार आये है ना”

“हाँ हाँ बिटवा बिल्कुल ! जे भी कोनो पूछने की बात है ? और जे अंकल जी का होता है आप भी हमको सबकी तरह पिताजी कहने की आदत डाल लेओ , बिटिया से रिश्ता पक्का होने जा रहा है आपका”,मिश्रा जी ने प्यार से कहा तो अमन शरमा गया और रोहन के साथ वहा से चला गया।

शर्मा जी का घर , कानपूर
शर्मा ने जी ने गोलू को कमरे में लेटाया और खुद अपने कमरे में आकर सो गए लेकिन कुछ देर बाद ही गोलू फिर उठ गया। उसका सर घूम रहा था और उसे होश नहीं था कि वह कहा है ? वह उठा और कमरे से बाहर चला आया। वाशबेसिन के पास आकर वह नल चालू करने की कोशिश करने लगा और हवा में ही कितनी देर तक हाथ घुमाता रहा लेकिन नल से पानी नहीं आया।

“लगता है आज मुन्सीपाल्टी वालो ने फिर पानी नाही दिया , अबे पानी नाही दोगे तो हमहू नहाएंगे कैसे ?”,गोलू खुद में ही बड़बड़या और सामने देखा तो उसकी नजर पड़ी शेविंग किट पर , गोलू ने उसे उठाया और बड़े ध्यान से देखने लगा उसने शेविंग किट से जिलेट का रेजर निकाला और फिर अपने मुँह पर हाथ घुमाकर कहा,”हमको तो दाढ़ी आती ही नहीं है फिर जे का हमने गाजर छिलने के लिए रखा है,,,,,,,,,बहुत फिजूल खर्चा करते हो गोलू तुमहू”

खुद में ही बड़बड़ाते हुए गोलू ने जैसे ही उसे रखना चाहा उसकी नजर पड़ी शर्मा जी के कमरे की तरफ जिसका दरवाजा खुला था और शर्मा जी गहरी नींद में सो रहे थे। गोलू को दाढ़ी बेशक ना आती हो लेकिन शर्मा जी की बड़ी बड़ी मुछे देखकर वह उनकी तरफ बढ़ गया।

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संजना किरोड़ीवाल

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2 comments

Sapna garg March 17, 2026 - 12:47 pm

Where is part 26?

Reply
Aarohi Rohilla March 18, 2026 - 1:38 pm

This is part 27 but part 26 isn’t posted yet!???

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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Sanjana Kirodiwal