Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 44

by Story With Sanjana May 5, 2026
written by Story With Sanjana May 5, 2026 1 comment
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Manmarjiyan Season 4 – 44

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी से बचकर गुड्डू घर से निकला और बाइक लेकर सीधा जा पहुंचा कानपूर चौक जहा गोलू और मंगल फूफा उसे मिलने वाले थे। रास्तेभर गुड्डू गोलू के इस नए काण्ड के बारे में सोचकर गुस्से से भरा जा रहा था। चौक पहुंचते ही उसने देखा मंगल फूफा और गोलू कचौरी वाले के पास खड़े होकर कचौरी खा रहे है तो वह और ज्यादा चिढ गया। गुड्डू ने बाइक साइड में लगायी और गोलू की तरफ चला आया। गुड्डू को आते देखकर मंगल फूफा ने गोलू से कहा,”अरे गोलू ,गुड्डू भी आ गवा एक ठो पिलेट ओह्ह के लिए भी लगवाय ल्यो”

“अरे जाने दो न फूफा गुड्डू भैया खाते पीते घर से है , मिश्राइन सुबह सुबह ओह्ह्ह का बिना खाये आने थोड़ी देंगी,,,,,,,,,गुड्डू भैया खाकर ही आये होंगे”,गोलू ने अपने हाथ में पकड़ी कचोरी को खाते हुए कहा
“गुड्डू खाते पीते घर से है तो तुम का भूखे नंगे खानदान से हो गोलू,,,,,,,,झूठ कहे तो हमायी जबान जल जाये पर आज भी मोहल्ला मा तुम्हाये पिताजी के पास सबसे ज्यादा पैसो है”,मंगल फूफा ने भी चम्मच चाटते हुए कहा

“हाँ तो हमाये बाप के पास है हमाये पास नाही , और ओह्ह की जियादा तरफदारी करने को दिल कर रहो ना तो एक काम करो जे कचौरी का पईसा उन्ही से लेकर देओ”,गोलू ने मंगल फूफा को घूरकर कहा
मंगल फूफा ने सुना तो झेंपते हुए मुस्कुराने लगे और चुपचाप कचौरी खाने लगे।
गुस्से से भरा गुड्डू गोलू के सामने आकर खड़ा हुआ तो गोलू ने खुश होकर कहा,”अरे गुड्डू भैया कचौरी खाओगे
“खाओगे तो तुम गोलू”,गुड्डू ने गोलू को घूरकर कहा

“अरे नाही भैया ! दुई कचौड़ी आलू सब्जी के साथ पहिले ही पेल चुके है अब और नाही खा पाएंगे”,गोलू ने कुनमुनाते हुए कहा
“हमहू कचौड़ी की बात नाही कर रहे गोलू,,,,,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने गुस्से से दाँत पीसकर कहा
“ए भैया ! ए आप हमे जे DDLJ के अमरीश पूरी की नजर से काहे देख रहे है ?”,गोलू को अब थोड़ा थोड़ा डर लगने लगा
गुड्डू नीचे झुका और अपने पैर का जूता निकालकर कहा,”ताकि तुम्हरे अंदर से उह्ह्ह कीड़ा निकाल सके जोन तुमको रोज नए नए कांड करने पर मजबूर करता है”

गुड्डू के हाथ में जूता देखकर गोलू समझ गया कि आज वह मिश्रा जी के साथ साथ गुड्डू के हाथो भी पिटने वाला है। उसने खाली प्लेट साइड में रखते हुए कहा,”अरे अब हम का कर दिए ?”
“का कर दिए ? साले बैल ,मुर्ख , भगवान के घर मा जब बुद्धि बँट रही थी तब का सो रहे थे,,,,,,,,,,साले कसम खा लिए हो बिना कांड किये खाना नाही खाओगे”,कहते हुए गुड्डू ने फेंककर गोलू को मारा क्योकि गोलू बचने के लिए पहले ही भाग चुका था पर गुड्डू का आज्ञाकारी जूता भी जाकर लगा सीधा गोलू की पीठ पर और गोलू आइआइआइआइ” करके चिल्ला उठा  

गुड्डू गोलू के पास आया उसकी गुद्दी पकड़ी और उसे अपनी तरफ घुमाया तो गोलू ने रोआँसा होकर कहा,”ए यार गुड्डू भैया ! हमको बताओ तो सही हमने किया का है ?”

“किया का है ? भुआ के साथ मिल के उह्ह्ह जोन व्हाट्सप्प ग्रुप बनाये थे ना उह्ह भुआ अब तुम्हरी मौत बनकर पिताजी के सामने खड़ी है। साले भंड आदमी पूरा कानपूर मा तुमको एक वही रिश्तेदार मिली ग्रुप बनाने के लिए ऊपर से ओह्ह्ह का वेदिया के रिश्ते की खबर भी तुम्ही दिए रहय , अब उह्ह्ह अपने उह्ह्ह चांडाल फूफा को लेकर सुबह सुबह घर मा धमकी और लगे दोनो जन तमाशा करने और जानते हो जे तमाशे मा पिताजी के सामने सबसे पहला नाम किसका आया है ?”,गुड्डू ने गुस्से से उबलकर कहा  

“हमारा ?”,गोलू ने काँपते हुए कहा
“तो का तुम्हाये ससुर का आएगा ,तुम्ही न भुआ के साथ मिलकर व्हाट्सअप व्हाट्सअप खेल रहे थे , अब भुगतो इह बार पिताजी बाटा की चप्पल और नीम की सनटी से बात नाही करेंगे,,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने गोलू की जान को हलक में अटकाते हुए कहा
“फिर ?”,गोलू बस रोने ही वाला था
“लोहे के सलिये गर्म करके तुम्हाये पेट मा घुसेड़ देंगे या फिर तुम्हाये अंगूठे काट देंगे”,गुड्डू ने कहा
“अंगूठे काहे काटेंगे ?”,गोलू ने डरकर कहा

“भुआ को मैसेज जे ही अंगूठे से किये रहय ना तुमहू,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा
“अह्ह्ह्हह्हह ,अह्ह्ह्हह्हह , गुडडू भैया हमे बचाय ल्यो हमसे गलती हुई गयी,,,,,,,,,,,उह्ह्ह मोटकी भुआ मीठा मीठा बोल के हमायी मासूमियत का फायदा उठाय लेइ,,,,,,,,,,कसम खाकर कह रहे है हमने ओह्ह्ह का कुछो नाही बताया अरे हम तो सुबह शाम बस फूल पत्ती वाला गुड मॉर्निंग गुड नाईट का मैसेज भेजते थे हमे का पतो थो उह्ह्ह डायन मिश्रा जी के सामने हमाये ही पत्ते बिखेर देगी , ए गुड्डू भैया हमका बचाय ल्यो”,गोलू ने वही रोना चालू कर दिया

गुड्डू ने देखा आस पास खड़े लोग गोलू को ही देख रहे है तो उसने आगे बढ़कर उसका मुँह बंद करते हुए कहा,”अबे का पिछले जन्म मा का भांड थे ? कैसे सुवरो की तरह गला फाड् के रो रहे हो,,,,,,,,,!!!”
“अब रोने से का फायदा है गोलू , तुमको पहिले सोचना चाहिए था”,मंगल फूफा ने आकर कहा
गोलू एक तो पहले ही मिश्रा जी के ख्याल से डरा हुआ था ऊपर से मंगल फूफा उसे और डरा रहे थे।

गोलू चिढ़कर मंगल फूफा की तरफ बढ़ा तो गुड्डू ने उसे रोक लिया लेकिन गोलू बिफर पड़ा और कहा,”जे सब ना तुम्हाये कारण हो रहा है फूफा , तुम्ही हो हमायी कुंडली के असली सनी ,, साला जब से आये हो हमायी बत्ती बनी हुई है,,,,,,,,,,,,,,साला तुम्हरा नाम मंगल नाही अमंगल होना चाहिए था , अमंगल भी नाही तुम्हरा नाम दंगल होना चाहिए था,,,,,,,,,,,,,!!!”

“जे मा मंगल फूफा की का गलती है , रायता फैलाओ तुम और समेटे हम और जब हम पर कोनो बस नाही चले तो पोछे मंगल फूफा,,,,,,,,,,,,उह्ह्ह रात जब हमहू पूछे कि फोन मा घुसकर किस के साथ इत्ता मुस्कराय रहे हो ? तब सच बता देते तो आज पिताजी के गुस्से से बच नहीं न जाते लेकिन नाही खुद को अक्षय कुमार समझ लिए है , खतरों के खिलाड़ी बनेंगे,,,,,,,,,,,बनो अब पिताजी के सामने , साला सिर्फ हम जानते है कैसे बचते बचाते हिया तक पहुंचे है”,गुड्डू ने गोलू को फटकार लगाकर कहा

गोलू ने सुना तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ मजाक मजाक में बनाया व्हाट्सप्प ग्रुप उसकी इतनी बुरी लंका लगाएगा गोलू ने ये कभी नहीं सोचा था। उसने गुड्डू के पास आकर कहा,”ए गुड्डू भैया ! जे मुसीबत से निकलने का कोई तो रास्ता होगा ?”
“आओ हमाये साथ”,गुड्डू ने गोलू से कहा

“ए भैया हमहू मुसीबत से निकलने को रास्तो पूछ रहे है आप जे रस्ता काहे दिखा रहे है ?”,गोलू ने गुड्डू के पीछे आते हुए कहा
गुड्डू रुका और पलटा तो पीछे आते गोलू से टकरा गया और खीजकर कहा,”गोलू बुरा ना मानों तो हमहू तुम्हाये मुँह पर दो चार घुसंड मार दे,,,,,,,,,,,,,बकैती करने के अलावा कुछो आता है तुमको”

गोलू ने सुना तो दो कदम पीछे हट गया ये देखकर गुड्डू ने एक गहरी साँस ली और कहा,”फिलहाल के लिए तुम्हरा कानपूर मा रहना मौत को दावत देने बरोबर है ,का है कि पिताजी बहुते गुस्से मा है और ओह्ह से अगर बच भी गए तो उह्ह्ह चांडाल फूफा तो है ही तुम्हायी बेंड बजाने के लिए , तो अभी के लिए बेहतर जे ही होगा कि चुपचाप बिना कोई ड्रामा किये हमाये साथ चंदौली चलो। तुम और मंगल फूफा मिल के हुआ कि सादी निपटाओ और हम बिंदिया भाभी को वहा से सही सलामत निकालते है।

ओह्ह्ह के बाद सोचेंगे तुम्हरे जे व्हाट्सप्प वाले मेटर का का करना है ? और का पता तब तक जे मामला सांत हो जाये और पिताजी का गुस्सा भी कम हो जाये”
“वाह वाह वाह गुड्डू भैया आपके सोचने का तो जवाब ही नाही है,,,,,,,,,,,का बात कही है , सही कहा अभी चलते है चंदौली बाद मा देखेंगे अर्थी उठेगी कि डोली ,वाह वाह वाह का शायरी किये है हम,,,,,,,,,,!!!!”,गोलू ने अपनी तारीफ में कहा और इतनी टेंशन में भी उसकी बकैती नहीं बंद हो रही थी

“शायरी तो बहुते गजब कहे गोलू”,मंगल फूफा ने गोलू की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा और बस इतने में गोलू फ़ैल गया और खुश होकर मंगल फूफा से कहा,”अरे उह्ह्ह का है ना मंगल फूफा कॉलेज के दिनों मा हमहू बहुते बड़े आशिक़ किस्म के,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू अपनी बात पूरी कर पाता इस से पहले गुड्डू का हाथ आकर लगा गोलू के गाल को और गुड्डू ने कहा,”निकल गओ तुमहाओ आशिक़ के बाकि है ?”

गोलू समझ गया अब चुपचाप चलने में ही भलाई है तो अपना हाथ गाल से लगाए गुड्डू के आगे निकल गया और पीछे पीछे मंगल फूफा और अफ़सोस में सर हिलाकर गुड्डू भी उनके पीछे चल पड़ा। गुड्डू ने बाइक स्टार्ट की ,गोलू और मंगल फूफा उसके पीछे आ बैठे और तीनो वहा से दुकान के लिए निकल गए क्योकि सफर लंबा था और वहा से तीनो गाड़ी से जाने वाले थे।

मिश्रा जी का घर , कानपूर
आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ ने ऐलान कर दिया कि वेदी की शादी तक अब दोनों इसी घर में रहेंगे और दोनों अपना अपना सामान लेकर अंदर चले गए। बाहर सीढ़ियों पर खड़े मिश्रा जी चिंता में डूब गए इसलिए नहीं कि इस घर में दो लोगो का खाना उन्हें भारी पड़ रहा था बल्कि इसलिए कि इन चार महीनो में आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ कही घरवालों का जीना हराम ना कर दे। मिश्रा जी ने खुद को शांत किया और अंदर चले आये तो अंदर का नजारा देखकर और परेशान हो गए।

हॉल में पड़े सोफे पर बैठे मंगल फूफा मिश्राइन को ताने मार रहे थे। मिश्रा जी ने सुना तो आदर्श फूफा के पास आये और कहा,”हमायी एक ठो बात कान खोलकर सुन लीजिये आदर्श बाबू , आपको और राजकुमारी को हिया जित्ते दिन रहना है रहिये हमे कोई आपत्ति नहीं लेकिन हिया रहकर कोनो तमाशा करने की जरूरत नाही है,,,,,,,,,,,,,जे घर के मुखिया हम है जो कहना है हमसे कहिये गुड्डू की अम्मा और घर के बच्चो से कुछो कहने की जरूरत नाही है समझे”

“अरे हम कहा कुछो कह रहे है मिश्रा जी , हम तो बस सरिता जी से पूछ रहे थे कि सिर्फ बिटिया के ब्याह की बात छुपाई है हमसे या कुछो और भी है ,, का है कि बाद मा फिर कोनो बात सामने आये और बार बार आपको सर हमाये सामने झुके ,अच्छा नहीं ना लगता है”,आदर्श फूफा ने कहा
मिश्रा जी ने सुना तो गुस्से का घूंठ पीकर रह गए और अंदर चले गए।

लवली सब सुन रहा था मिश्रा जी के जाने के बाद वह आदर्श फूफा के पास आया और कहा,”का आदर्श फूफा ! जे का तमाशा लगा रखो है ? ददिया के दिनों मा इत्ता सब करके मन नाही भरा आप दोनों का जो अब फिर से वही राग अलापना शुरू कर दिए। तब तो बहुत उछल उछल कर पिताजी और गुड्डू की मदद कर रहे थे ओह्ह्ह मा घुसे पड़े थे और ओह्ह की तारीफ करते जबान नाही थक रही थी आपकी और अब फिर से अपनों असली रंग दिखाय दिए,,,,,,,,,,,,,का थोड़ी भी लाज शरम नाही बची है दोनों मा ?”

लवली की बात सुनकर आदर्श फूफा का मुँह बन गया और उन्होंने कहा,”लाज शरम नाही होती ना लबली तो कल गुडडुआ के ससुराल वालो के सामने आकर तमाशा करते उनके जाने के बाद शिकायत करने नहीं आते ,, तुम बताओ हम और राजकुमारी अगर गलत है तो का तुम्हाये पिताजी सही है ,, उह्ह्ह कहे खबर नाही किये हमे कि वेदिया आ रिश्ता पक्का करने जा रहे है।

कल को हम कोमलिया का रिश्ता कर दे और जे का खबर तक ना करे तो का इन्हे बुरा नहीं लगेगा ,, और अब तो कोनो दुश्मनी भी नहीं बची थी जाते जाते सारी शिकायते दूर करके गए थे ओह्ह्ह के बाद भी उह्ह्ह हमे ऐसे नजरअंदाज कर दिए जैसे हम और राजकुमारी कुछो है ही नहीं,,,,,,,,,,,,सही कहा था गोलू ने अम्मा के दिनों मा कि अम्मा के जाने के बाद तो कानपूर आना भी दुर्लभ हो जाना है हमरा और देखो वही हो रहा है”

रसोईघर के दरवाजे पर खड़ी शगुन सब सुन रही थी और आज पहली बार उसे फूफा की बातो में मिश्रा जी की गलती नजर आयी। वही लवली ने जब फूफा के मुँह से गोलू का नाम सुना तो धीरे से बड़बड़ाया,”जे सारा किया धरा उह्ह गोलू महाराज का ही तो है ,खामखा सुबह हमने ओह्ह्ह के लिए हमदर्दी दिखाई ओह्ह्ह के तो काम ही सारे मार खाने वाले है,,,,,,,,,,,,,,का जरूरत थी भुआ के साथ व्हाट्सप्प ग्रुप बनाकर जे बताने की,,,,,,,,,!!!”

“खुद मा का बड़बड़ा रहे हो ? गरियाना ही है तो हमाये मुँह पर गरियाओ ना , हमे भी तो पता चले जे घर मा कौन कौन हमाये खिलाफ है ?”,आदर्श फूफा ने कहा तो लवली बड़बड़ाना छोड़कर उनके पास आया और कहा,”ए फूफा ! काहे इत्ती छोटी सी बात पर इत्ता बिगड़ रहे हो ,अरे का हुई गवा जो पिताजी ने आपको वेदी का रिश्ता पक्का करने की बात नहीं बताई ,ओह्ह्ह की सादी मा आपको और भुआ को दुइ हफ्ता पहले बुला लेंगे”

फूफा ने सुना तो लवली की तरफ देखा और कहा,”बुला लेंगे ? अरे हमहू अब वेदिया की शादी तक यही रहे है , जाके हमाये खाने का इंतजाम करो”
लवली को समझ आ गया कि फूफा इतनी आसानी से मानने वाला नहीं है तो वह उठा और कहा,”का खाएंगे आप लात घुसा के जूता ?”
“का कहे ! तुम हमको लात घुसा खिलाओगे ?”,फूफा ने भड़ककर कहा
“अरे फूफा ! हम कह रहे लाते है खाना जूता उतारिये , अब का जूते पहिने पहिने खाओगे ?”,लवली ने तुरंत अपनी बात बदलकर कहा

“अरे हमहू जूता पहिनकर खाये चाहे उतारकर हमाई मर्जी,,,,,,,,,तुमहू जाकर खाने का इंतजाम करो ना भाई और हाँ सुनो थोड़ा कुछो चटपटा बनवाना”,फूफा ने जूते पहने पहने ही सोफे पर पसरते हुए कहा
“तुम्हायी मर्जी जे घर मा तो नाही चलने देंगे फूफा,,,,,,,,,,,,चटपटा का ऐसा खाना खिलाएंगे 7 जन्म तक याद रखोगे हमे”,लवली ने मन ही मन कहा और वहा से चला गया।

लवली किचन में चला आया उसने देखा शगुन पहले से वहा है और उदास सी गैस पर चाय चढ़ा रही है। लवली दरवाजे पर ही रुक गया तो शगुन ने पलटकर लवली को देखा और कहा,”अरे लवली भैया ! आप बाहर क्यों रुक गए , आपको कुछ चाहिए ?”
”हाँ उह्ह्ह फूफा को खाना चाहिए था , तुम्हारा काम हुई गवा तो तुमहू बाहिर आओ हमहू उनके लिए खाना बनाते है”,लवली ने कहा

“अरे आप क्यों बनाएंगे ? मुझे बताईये ना मैं बना देती हूँ,,,,,,,!!”,शगुन ने हैरानी से कहा
“फूफा को जो खाना चाहिए वो तुम नहीं बना पाओगी शगुन ओह्ह्ह का पेट तो अब हम ही खराब करेंगे,,,,,,,,,हमारा मतलब भरेंगे”,लवली ने कहा और बीच में उसकी जबान भी फिसली जिस पर शगुन ने कहा,”क्या कहा आपने ? लवली भैया ! कही आप कुछ गड़बड़ तो नहीं करने वाले ?”

लवली ने सुना तो किचन के अंदर आते हुए कहा,”तुम का हमको गुड्डू और गोलू समझ ली शगुन जो हम गड़बड़ करेंगे , कांड करने मा कॉपीराईट तुम्हरे गुड्डू जी और गोलू जी का है , तुम जे चाय पकड़ो और जाओ अपने कमरे मा जाकर आराम करो”
कहते हुए लवली ने चाय छानकर कप शगुन की तरफ बढ़ा दिया और शगुन को वहा से भेज दिया।

( गोलू के व्हाट्सप्प ग्रुप वाले कांड के बाद क्या गुड्डू झेल पायेगा उसका चंदौली वाला कांड ? क्या मिश्रा जी और मिश्राइन मना पाएंगे आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ को ? गुड्डू और गोलू के साथ रहते रहते क्या लवली भी करने चला है कांड ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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1 comment

Nency Patel May 4, 2026 - 2:02 pm

Yeh lovely bhi kand karna Sikh hi gaya

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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