Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 45

by Story With Sanjana May 4, 2026
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Manmarjiyan Season 4 – 45

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू अपनी बाइक पर मंगल फूफा और गोलू को लेकर निकल गया दूकान के लिए। तीनो दुकान पर पहुंचे वहा एक चमचमाती गाड़ी पहले से खड़ी थी। गोलू ने देखा तो बाइक से उतरा और गाडी के पास आकर कहा,”का बात है गुड्डू भैया ! बेडिंग प्लानर के काम मा इत्ता मुनाफा कमाय लिये कि रातो रात गाडी खरीद लिए,,,,,,,,,,,जिओ गुड्डू भैया”

गुड्डू ने सुना तो बाइक को साइड में लगाया और उतरकर गोलू के पास आकर उसके सर एक चपत लगाकर कहा,”अबे खरीदे नाही है भाड़े की है ,अब भाभी को का टेंट वाली पिकअप मा लेकर आएंगे ,, हमारी थू थू नाही होगी , का सोचेगी भाभी इत्ते बड़े वेडिंग प्लानर और खुद की गाडी तक नाही”

मंगल फूफा थोड़ा देर से पहुंचे क्योकि हलके होने चले गए थे उन्होंने भी जब नयी गाड़ी देखी तो खुश होकर कहा,”अरे वाह गुड्डू जे गाडी बहुते जोरदार ली हो तुमहू,,,,,,,,,,अब नयी गाडी ले ही लिए हो तो बिना पूजा के नाही चलाना”
“अब जे का नवा बवाल है ?”,गुड्डू ने कहा
“बवाल नाही भैया फूफा सही कह रहे है , कोई भी नयी चीज घर मा आये तो पंडित जी से पूजा करवाना जरुरी है”,गोलू ने कहा

“अबे तो लेकिन भाड़े की गाड़ी की पूजा हम काहे करवाए ? का भाग वांग खाये हो का दोनों कचोरी मा मिलाकर,,,,,,,,,,,,,चलकर गाडी मा बइठो देर हो रही है”,गुड्डू ने झुंझलाकर कहा
गोलू ने सुना तो गुड्डू की तरफ आया और उसकी बाँह थामकर कहा,”गुड्डू भैया गाड़ी भाड़े की हो चाहे खुद की पूजा तो करवानी पड़ती है ना , और वैसे भी जे गाडी हम तीनो सफर करने वाले है वो भी इत्तो बड़ो सफर , अरे रस्ता मा कोनो ऊंच नीच हो गयी तब,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने गुड्डू को बातो में लपेटते हुए कहा

 गुड्डू ने सुना तो गोलू को घूरकर देखा और कहा,”तुम दोनों के होते ऊंच का तो पता नाही नीच काम होने है,,,,,,,,,,अब साला तुम्हरे लिए पंडित कहा से लेकर आये हम ?”
“पंडित ,पंडित ,पंडित”,गोलू ने अपना गाल खुजाते हुए इधर उधर देखा लेकिन यहाँ कहा पंडित मिलता जो गाडी के लिए पूजा करे। गोलू के मुँह से पंडित का नाम सुनकर मंगल फूफा उसके सामने आ धमके और कहा,”अरे हम है ना”

गुड्डू और गोलू ने सुना तो दोनों हैरानी से मंगल फूफा को देखने लगे।
“तुम तो डाकू थे न फूफा तुम कब से पंडित बन गए ?”,गोलू ने हैरानी से पूछा
“अरे गोलू ! उह्ह्ह का है ना जब हमहू बीहड़ मा थे अपनी टोली के साथ तब हमने एक बार एक ठो पंडित को उठा लिया था , पूरा एक महीना उह्ह हमरे साथ ही रहा।

अब ओह्ह्ह के पास हमे देने को रुपया पैसा तो था नाही तो हमे पंडिताई का  थोड़ा ज्ञान दे दिए रहय तब से छोटी मोटी पूजा तो हम भी करवा देते है”,फूफा ने कहा
गोलू ने सुना तो मारे ख़ुशी के फूफा का चेहरा अपने हाथो में थामा और उनके टकले पर जबरदस्त चुम्मा देकर कहा,”अरे जिओ फूफा”

लेकिन अगले ही पल गोलू को चुम्मे के साथ साथ चमेली के तेल का स्वाद भी आया जो फूफा की खोपड़ी पर बचे चार बालो में चोपड़ा हुआ था। गोलू ने साइड में थूकते हुए गुड्डू से कहा,”गुड्डू भैया ! आप का काम हुई गवा , पंडित की समस्या खत्म ,गाडी की पूजा अब फूफा करेंगे,,,,,,,,,!!”
“किस से हवा से , अबे पूजा करने के लिए पूजा का सामान भी जरुरी है”,गुड्डू ने झुंझलाकर कहा

“अब पूजा अपना सामान काहे देगी ? उह्ह्ह तो खुद कॉलेज के दिनों मा लाली लिपस्टिक का पैसा हमसे मांगकर ले जाती थी,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने गुड्डू की बात का कोई और ही मतलब निकालकर कहा
गुड्डू एक तो पहले से खीजा हुआ था गोलू की बात सुनकर उसे बाँह में दबोचा और कहा,”अबे तुम्हाये ऊपर का माला खाली है का गोलू ? साले हम पूजा के सामान की बात कर रहे है धुप बत्ती की,,,,,,,,,,,साला तुम दोनों मिलकर हमको पागल कर दोगे”

गोलू ने सुना तो उसे समझ आया और उसने खिंसियाकर कहा,”अरे सॉरी सॉरी गुड्डू भैया ! हमहू कुछो और समझ लिए,,,,,,,,,पूजा का सामान हम लाते है ना”
“तुम लाओगे ! कहा से लाओगे ? मार्किट हिया से 7 किलोमीटर दूर है,,,,,,,,,,,,,सारा बख्त जे सब मा बर्बाद कर देंगे तो चंदौली कैसे पहुंचेंगे ?”,गुड्डू ने गोलू को मंगल फूफा की तरफ धकेलकर कहा

गोलू ने सुना तो उलझन में पड़ गया और अपना सर खुजाते हुए मंगल फूफा की तरफ देखा और कहा,”ए फूफा ! जे बिना सामान के पूजा नाही हो सकती का ? मतलब दुइ चार मंत्र वंत्र पढ़ के , का है कि हिया आस पास मा तो पूजा का सामान मिलना मुश्किल है और गुड्डू भैया को निकलने की जल्दी,,,,,,,,,,!!!”
“बिना सामान के भी पूजा हो सकती है पर एक ठो नारियल तो बहुते जरुरी है,,,,,,,,उह्ह्ह अगर मिल जाये तो फिर समझो ऐसा मंत्र पढ़ेंगे चार पहियों की जे गाड़ी हेलीकॉप्टर बन जाहि है”,मंगल फूफा ने कहा

गुड्डू मंगल के पास आया और कहा,”ओह्ह्ह फूफा ! जे गाड़ी को ना गाड़ी ही रहन दयो और जो करना है जल्दी करो”
गोलू ने देखा सामने ही एक परचून की दूकान थी वह भागकर गया और वहा से एक नारियल साथ में कुमकुम का पैकेट भी ले आया। गोलू ने नारियल और कुमकुम लाकर फूफा को दिया तो फूफा मुस्कुराये और कहा,”पुरे गुप्ता खानदान मा एक तुम्ही समझदार हो गोलू ,नारियल के साथ कुमकुम भी ले आये अब तो
और गजब की पूजा करे है हम,,,,,,,,,,जरा थोड़ा पानी ले आओ कुमकुम गीला करे”

गोलू ने इधर उधर देखा गाड़ी के डेशबोर्ड में ही पानी की बोतल दिखी तो उसने दरवाजा खोला और बोतल लेकर आया।  फूफा ने कुमकुम निकाला गोलू की हथेली पर और पानी से गीला करके गाड़ी के बोनट पर स्वस्तिक बनाने लगे। उन्होंने स्वास्तिक बनाया लेकिन गोलू का ध्यान उस पर नहीं गया वह तक फूफा को फटाफट मंत्र पढ़ते देखकर हैरान था।
फूफा ने थोड़ा कुमकुम लेकर अपने ललाट और फिर गोलू के ललाट पर लगाकर कहा,”जाओ गुड्डू को भी तिलक लगाय दयो”

गोलू ने सुना तो मुस्कुराते हुए कुछ दूर साइड में खड़े गुड्डू के पास आया और कहा,”भैया तिलक”
गुड्डू ने सब्र का घूंठ निगला और अपना ललाट गोलू के सामने कर दिया। अब गोलू के साथ कब क्या हो जाये इसकी खबर तो खुद गोलू को नहीं थी। कुमकुम में अंगूठा डुबोकर उसने गुड्डू के ललाट से लगाया और अगले ही पल उसे इतनी जोर की छींक आयी की कुमकुम गुड्डू के ललाट से होकर ऊपर बालों तक जा पहुंचा।

गुड्डू ने महसूस किया तो गुस्से से कहा,”एक ठो काम करो ना माँग ही भर दयो हमायी , फेरे लेइ ल्यो हमाये साथ बन जाओ हमायी घरवाली,,,,,,,,,,,,अबे ऐसे कौन तिलक लगाता है ?”
“वो छींक आ गयी थी हमे”,गोलू ने मासूमियत से कहा
गोलू और मंगल फ़ुफ़ा की इस नयी नौटंकी से गुड्डू अब झुंझला उठा उसने गोलू को साइड किया और गाड़ी की तरफ आया लेकिन जैसे ही गुड्डू ने बोनट पर बने स्वस्तिक को देखा चिल्ला उठा,”अबे जे का किया ?”

गोलू ने सुना तो गुड्डू की तरफ आया और देखा मंगल फूफा ने बोनट पर उलटा स्वास्तिक बनाया है। गुड्डू ने बगल में खड़े मंगल फूफा को देखा और दोनों हाथो से उनकी कोलर पकड़कर उन्हें हवा में उठाकर गुस्से से कहा,”अबे तुम्हायी कौनसी अम्मा ऐसे स्वास्तिक बनाती है बे ? तुम साले पूजा कर रहे हो कि पनौती लगा रहे हो”
“अरे गुड्डू भैया का कर रहे है नीचे उतरिये इन्हे”,गोलू ने कहा तो गुड्डू ने गुस्से से फूफा को नीचे पटका और फूफा धड़ाम से जमीन पर आ गिरे।

गुड्डू गोलू की तरफ पलटा और कहा,”हो गयी तुमको तसल्ली , पूजा करवाते है पूजा करवाते है ,, अबे हमायी गाड़ी नाही है जे ऊपर जे कलाकारी और दिखा दिए तुम्हाये जे फूफा,,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे गुड्डू भैया ! गुस्सा थूक दीजिये ना”,गोलू ने प्यार से कहा
“कहा थूके ,तुम्हाये मुँह पे ?”,गुड्डू ने गुस्से से कहा

“अरे हमरा मतलब सांत हो जाईये , उलटा बनाया हो या सीधा बना तो स्वास्तिक ही है ना ,, अब हमहू चाँद पैरो पर खड़े होकर देखे या सर के बल उलटे खड़े होकर देखे रहेगा तो उह्ह चाँद ही ना,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने गुड्डू को समझाते हुए कहा
“तुम्हरा जे लॉजिक कुछो समझ नाही आया हमे”,गुड्डू ने कहा
 “हमे भी कहा समझ आया”,कहते हुए गोलू फूफा के पास आया और उन्हें जमीन से उठाकर कहा,”ए फूफा ! हुई तुम्हायी पूजा के और भी कुछो बाकी है ?”

फूफा ने हाथ में पकड़ा नारियल गोलू को देकर कहा,”बस गाडी के सामने जे नारियल फोड़ देओ तो पूजा सम्पन्नं है”
गोलू ने नारियल लिया और जैसे ही गुड्डू की तरफ जाने लगा मंगल फूफा ने कहा,”ए गोलू ! हमायी दक्षिणा तो देओ पहिले”
गोलू ने सुना तो पलटा और कहा,”कहो तो जे नारियल तुम्हायी खोपड़ी पर ही फोड़ दे , तसल्ली नाही है कही भागे जा रहे है का हम और गुड्डू भैया दे देंगे”
“अरे ठीक है ठीक है हम तो बस याद दिला रहे थे”,मंगल फूफा ने झेंपकर कहा

गोलू गुड्डू के पास आया और कहा,”गुड्डू भैया ! इह पकड़ो नारियल और गाड़ी के सामने फोड़ देओ”
“जे काम भी तुमहि कर ल्यो”,गुड्डू ने खीजकर कहा
“अरे का गुड्डू भैया ! जाने दो ना छोड़ दो गुस्सा , ल्यो नारियल फोड़ो फिर चलते है चंदौली,,,,,,,,,,,मकसद भूल गए का ?”,गोलू ने आखरी शब्द बहुत ही गंभीर होकर कहे
“का आतंकवादी हो का तुम जो मकसद की बात कर रहे हो ? भाषा सुधार ल्यो अपनी वरना किसी दिन बेमौत मारे जाओगे”,कहते हुए गुड्डू ने गोलू के हाथ से नारियल लिया और गाडी के सामने आ खड़ा हुआ।

मंगल फूफा ने एक पत्थर लाकर गाड़ी से दूर ठीक उसके सामने रखा और कहा,”सुनो गुड्डू ! जे पत्थर पर मारना जल्दी फूट जाहि है”
गुड्डू ने भगवान् का नाम लिया और जोर से नारियल पत्थर पर दे मारा लेकिन जितनी खराब गोलू की किस्मत है उस से चार गुना ज्यादा खराब किस्मत गुड्डू की है और गुड्डू से भी चार गुना ज्यादा खराब मंगल फूफा की,,,,,,,,,,,!!!

गुड्डू ने पत्थर पर जो नारियल मारा वो तो नहीं टुटा लेकिन नारियल उछलकर सीधा लगा गाडी के शीशे पर और पूरे शीशे में दरारे , वहा से उछला नारियल जाकर लगा मंगल फूफा के ललाट और मंगल फूफा पीठ के बल सीधा जमीन पर।
“अरे गुड्डू भैया जे का किया ?”,गोलू ने गुड्डू के पास आकर चिल्लाते हुए कहा
“अरे हमने का किया हम तो नारियल तोड़ रहे थे”,गुड्डू ने गाड़ी के पास जाकर शीशे को देखते हुए कहा

गोलू भी गुड्डू के पास आया और कहा,”अरे गुड्डू भैया ! बच गए सिर्फ शीशा मा स्क्रेच हुआ है टूटा नाही है”
कहते हुए गोलू ने जैसे ही शीशे पर हाथ रखा शीशा भड़भड़ाकर गिर गया और अब गाडी का सामने वाला शीशा पुरी तरह से बर्बाद था। गोलू ने झेंपते हुए गुड्डू को देखा तो गुड्डू ने खींचकर एक थप्पड़ गोलू को मारा और कहा,”और करवाय ल्यो पूजा,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू गाल से हाथ लगाए चुपचाप पीछे हट गया और गुड्डू ने एक बार फिर अपना सर पकड़ लिया।

 मिश्रा जी का घर ,कानपूर
शगुन को किचन से बाहर भेजकर लवली फूफा के लिए खाना बनाने लगा। लवली जो बना रहा था वो सामान्य खाना नहीं था बल्कि वह फूफा के लिए कुछ स्पेशल बना रहा था जिसे खाने के बाद फूफा का क्या हाल होने वाला था ये तो खुद फूफा भी नहीं जानते थे। लवली ने फूफा के लिए आलू गोभी की रसीली सब्जी और सादे घी वाले पपराठे बनाये साथ में खीर और हलवा भी,,,,,,,,,,,,,,,मिश्राइन ने लवली को रसोईघर में काम करते देखा तो उसके पास आयी और कहा,”अरे लवली जे का कर रहे हो , जे खाना किसके लिए बनाय रहे हो बिटवा ?”

“भुआ और फूफा के लिए”,लवली ने कहा
“का उह्ह्ह दोनों के लिए तुम खाना बनाय रहे हो ? अरे हमाओ बस चले ना तो दोनों को जहर दे दे,,,,,,,,,,कैसे तुम्हाये पिताजी को सुनाय रहे थे दोनों , अरे कुत्ते की दुम सीधी हो सकती है पर जे दोनों की नाही”,मिश्राइन ने कुढ़ते हुए कहा
“जहर तो नाही अम्मा पर जहर से थोड़ा कम ही समझ ल्यो”,लवली ने कहा
“का मतलब ?”,मिश्राइन ने पूछा

“अरे हमाओ मतलब ! पहली बार खाना बनाय रहे है ना तो मिर्च मसाले थोड़े कम जियादा हो सकते है,,,,,,,,,,,आप हिया का कर रही है जाईये पिताजी को सम्हालिए कही फिर से उह्ह्ह आदर्श फूफा से बहस ना करने लग जाये”,लवली ने बात सम्हालते हुए कहा
मिश्राइन चली गयी।  खाना तैयार था लवली ने खाना दो थाली में परोसा और लेकर बाहर आया। उसने दोनों थाली डायनिंग टेबल पर रखते हुए कहा,”ए भुआ-फूफा आओ खाना खाय ल्यो”

अब आदर्श फूफा तो आदर्श फूफा है , उनको करना था सबको परेशान इसलिए ऊँची आवाज में कहा,”हमरा खाना हिया लेकर आओ , उह्ह्ह डायनिंग टेबल पर भूखे नंगे लोग खाना खाते है हमहू नाही”
लवली ने सुना तो उसका मन किया जाए और सारा खाना फूफा के मुँह पर फेंक दे लेकिन उसने गुस्से का घूंठ निगला और थाली लाकर फूफा के सामने रख दी। फूफा घरवालों से नाराज थे लेकिन जैसे ही थाली में इतना लजीज खाना देखा तो उनके मुँह में पानी भर आया और वे अपना गुस्सा भूलकर खाने पर टूट पड़े।

भुआ भी अपनी थाली लेकर फूफा की तरफ चली आयी और कहा,”खाना कैसा बना है कोमलिया के पिताजी ?”
“अरे राजकुमारी ! जे से बढ़िया खानो तो हमहू आज तक नाही खाये,,,,,,,तुम भी खाओ”,कहते हुए फूफा ने एक बड़ा सा निवाला मुँह में रहा और अगले ही पल उनके पेट से गुड़गुड़ की आवाज आयी।
फूफा ने झेंपते हुए लवली को देखा और फिर थाली टेबल पर रख राजकुमारी की तरफ देखकर कहा,”हमहू अभी आते है”

फूफा जल्दी से वहा से भागे और भुआ ख़ुशी ख़ुशी अपना खाना खाने लगी। लवली मन ही मन मुस्कुराते हुए वहा से चला गया क्योकि कुछ ही देर में एक गड़बड़ होने वाली थी

( गोलू की हर बात मानकर गुड्डू क्यों हर बार फंस जाता है मुसीबत में ? भाड़े की गाड़ी का शीशा तोड़कर गुड्डू क्या जवाब देगा गाड़ी के मालिक को ? खाना खाते खाते फूफा अचानक कहा चले ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

शगुन को किचन से बाहर भेजकर लवली फूफा के लिए खाना बनाने लगा। लवली जो बना रहा था वो सामान्य खाना नहीं था बल्कि वह फूफा के लिए कुछ स्पेशल बना रहा था जिसे खाने के बाद फूफा का क्या हाल होने वाला था ये तो खुद फूफा भी नहीं जानते थे। लवली ने फूफा के लिए आलू गोभी की रसीली सब्जी और सादे घी वाले पपराठे बनाये साथ में खीर और हलवा भी,,,,,,,,,,,,,,,मिश्राइन ने लवली को रसोईघर में काम करते देखा तो उसके पास आयी और कहा,”अरे लवली जे का कर रहे हो , जे खाना किसके लिए बनाय रहे हो बिटवा ?”

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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1 comment

Nency Patel May 5, 2026 - 8:46 am

Bichare guddu ki kismat kitni futi hui hai yeh puja ke chakkar m gadi ka kach tut gaya aur lovely bhi kamal hai khane me jamal gota mila diya 🤣🤣

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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