Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 52

by Story With Sanjana May 19, 2026
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Manmarjiyan Season 4 – 52

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गोलू आगे और गुड्डू पीछे और दोनों वही भागते हुए चंदौली मोड़ पर बरगद के पेड़ के चारो और चक्कर लगाने लगे।
“साले आज तुमको छोड़ेंगे नाही गोलू ! साला सुबह से हमायी नाक मा दम किये हुए हो तुम और ऊपर से जे भाड़े की गाड़ी की माँ-बहन किये सो अलग ,अब कानपुर तुम नाही तुम्हायी लास वापस जाहि है ! रुक जाओ साला भागते कहा हो ?”,गोलू के पीछे भागते हुए गुड्डू चिल्लाया

“बस का गुड्डू भैया ! अरे भूल गए कित्ती बार हमहू आपको मिश्रा जी से मार खाने से बचाये थे , कितनी बार आपके घर ,बाहिर ,मोहल्ला के काण्ड सम्हाले थे”,गुड्डू के आगे भागते गोलू ने कहा
“सम्हाले ? अबे जे कहो काण्ड हमेशा तुम किये रहय और फसाये हमको,,,,,,,,,!!”,कहते हुए गुड्डू ने हाथ में पकड़ा जूता गोलू को मारने के लिए जैसे ही फेंका गोलू भागते भागते साइड हो गया और जूता जाकर लगा सामने घास चरती गाय को , अब कहने को गाय हमारी माता है लेकिन यहाँ गाय ने गुस्से से दूसरा ही रूप धर लिया और गुस्से से बौखलाकर आयी गुड्डू की तरफ ,,

अब जो गुड्डू कुछ देर पहले तक गोलू के पीछे भाग रहा था अब अपनी जान बचाने के लिए गाय के आगे भागने लगा। गोलू ने जब ये नजारा देखा तो ताली मारकर जोर से हंसा और कहा,”का गुड्डू भैया ! मजा आ रहा है ना गऊ माता के आगे भागकर ,,,,,,,,,,!!!”
“अबे गोलू बचाओ हमे,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने गोलू के सामने से भागते हुए कहा

“हम काहे बचाये ,नहीं हम काहे बचाये ? अभी थोड़ी देर पहिले जब आप हमे भगाय रहे थे तब का आपने दया दिखाई थी नहीं न,,,,,,,,,,,,,,,साला हम काहे बचाये , एक तो नेकी करे ऊपर से चूल्हे मा डाले साला हम नाही बचाएंगे”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा
“अबे साले तुमहू हमाये दोस्त हो के दुश्मन ? और कानपूर का हमाये बिना चले जाओगे ?”,गुड्डू गुस्से से चिल्लाया

गुड्डू की बात सुनकर गोलू खुद में ही बड़बड़ाने लगा,”साला बात तो गुड्डू भाई सही कह रहे है जे के बिना कानपूर गए तो पहिले मिश्रा जी से मार खाएंगे ,फिर उह्ह्ह सांड से मार खाएंगे , अरे और कौन उह्ह्ह लवली , बाद मा रही सही कसर शगुन भाभी पूरी कर देइ है ताना देकर कि का गोलू जी बहुते हनुमान बनकर गए थे अपने भैया के साथ और ओह्ह की ही लंका लगा आये,,,,,,,,,,,,,छहह का मुँह दिखाएंगे हमहू कानपूर जाकर ?”

भागते हुए गुडडू ने देखा गोलू खुद में ही उलझा हुआ है तो उसने गोलू को एक गन्दी गाली दी ( जो मैं यहाँ नाही दे सकती ) और कहा,”हाँ तुमहू अपना अलग गणित लगाय ल्यो , अबे बचाओ हमे अब का हमायी मौत का इंतजार कर रहे हो ?”
“अरे गुड्डू भैया ! फॅमिली स्टोरी थी गाली काहे दे दिए ?”,गोलू ने गुस्सा होकर कहा
“अबे हिया हमायी फट के हाथ मा आ गयी है तुमको साला फॅमिली स्टोरी की पड़ी है , अबे रोको जे का ?”,गुड्डू कहते हुए गोलू के पीछे आ छुपा

गुस्से से भरी गाय गोलू के ठीक सामने खड़ी थी और गोलू की सांसे हलक में अटकी थी। उसने झेंपते हुए गाय को देखा और हाथ जोड़कर कहा,”माता काहे हमायी जान की दुश्मन बनी हुई हो ? अरे गुड्डू भैया मासूम है कभी कभी गलती कर देते है अब का जान ले लोगी इनकी ,, अरे माफ़ करि दयो मालिक गलती हुई गयी आगे से नाही करेंगे ? अरे माफ़ करी दयो हमने आपका दूध पीया है”
“अबे जे का तुम्हायी मौसी है जो इत्ता बतिया रहे हो ?”,गोलू के पीछे खड़ा गुड्डू धीरे से फुसफुसाया।

“अरे गुड्डू भैया रुको न ! जे ट्रिक होती है जानवरो का ध्यान भटकाने की,,,,,,,,,,,,थोड़ी देर शांत रहिये”,गोलू ने गुड्डू की तरफ देखकर कहा
“कुछ भी करो गोलू लेकिन जे का भगाओ हिया से वरना आज जे हमे मारकर छोड़ेगी,,,,,,,!!”,गुड्डू ने कहा
गुड्डू ने गाय से दो चार मीठी मीठी बातें की और फिर उसे नमस्ते करके जाने के लिए पलटा और दबे स्वर में गुड्डू से कहा,”देखा गुड्डू भैया ! ऐसे बहलाया जाता है आपकी तरह नाही जे के मधुबाला बनकर जे के आगे आगे भागने लगो”

गोलू की बात सुनकर गुड्डू ने मुँह बनाया और जैसे ही पीछे देखा उसके चेहरे का रंग उड़ गया , गुस्से से भरी गाय जमीन पर अपने सींग रगड़ रही थी। गुड्डू ने गोलू की तरफ देखा और उसे साइड में धकियाकर कहा,”अबे गोलू भाग” 

गाय गुड्डू को छोड़कर अब गोलू के पीछे पड़ गयी। गुड्डू पेड़ के पास बने चबूतरे पर आ बैठा। रवि और दुकान पर काम करने वाले लड़को ने जब गुड्डू और गोलू को वहा देखा तो सब गुड्डू के पास चले आये। मंगल फूफा अभी भी आँखे बंद किये जमीन पर लेटकर बेहोशी का नाटक कर रहे थे कि गाय के आगे भागते गोलू ने उनकी छाती पर पैर रखा और आगे बढ़ गया। मंगल फूफा की तो जान ही हलक में अटक गयी।

उन्होंने मुश्किल से साँस ली और अगले ही पल फिर एक पैर उनकी छाती पर लगते लगते बचा जो कि गाय का था लेकिन मंगल फूफा ने करवट ले ली और जाते जाते गाय ने मंगल फूफा के मुँह पर गोबर कर दिया। एक तो मंगल फूफा ठिगने , उस पर उनके सर पर गिनती के चार बाल , उस पर उनका पूरा मुँह और सर गोबर से भर गया।

भागते भागते गोलू गाडी के पीछे चला आया और हाँफते हुए खुद से कहने लगा,”जे साला गुड्डू भैया को बचाने के चक्कर मा हमहू अपनी लंका खुदही लगा लिए। अब समझ आ रहा है पनौती हम नाही गुड्डू भैया है,,,,,,,,,,,,,,लेकिन अब उह्ह्ह गाय से कैसे बचे उह्ह्ह तो जैसे हमरी जान की दुश्मन हो गयी है,,,,,,,!!!”
कहते कहते गोलू की नजर पड़ी गाड़ी की डिग्गी पर और मुसीबत में गोलू का दिमाग कुछ ज्यादा ही काम करने लग जाता था

गाड़ी की डिग्गी को देखकर उसने एक बार फिर खुद से कहा,”अगर,,,,,,,,,,,,,हम,,,,,,,,,,जे गाड़ी की डिग्गी मा छुप जाए और शटर बंद कर ले तो उह्ह्ह चार पैरो वाली गाय हमाओ का बिगाड़ लेगी ? जब उसको हम दिखाई नहीं देंगे तो थोड़ी देर मा खुद ही वापस चली जाएगी,,,,,,,,,,,,,,,अरे जिओ गोलू का दिमाग है तुम्हाये पास , बुद्धि तो साला कूट कूट कर भरी है तुम्हाये अंदर”

गोलू अभी अपने आईडिया पर खुश हो ही रहा था कि गाय वहा आ पहुंची। गाय को देखते ही गोलू जल्दी से डिग्गी खोलने लगा लेकिन ये क्या डिग्गी नहीं खुली ,अब तो गोलू के हाथ पाँव फूलने लगे और वह खुद में ही झल्लाया,”अबे जे खुल काहे नाही रही है ?”
गाय गुस्से से गोलू की तरफ बढ़ी , गोलू ने मन ही मन भगवान् को याद किया और इस बार थोड़ा दम लगाया तो डिग्गी तो खुल गयी लेकिन गोलू नीचे जा गिरा। गाय भी गुस्से से गाड़ी की तरफ आयी और अपने सींग दे मारे सीधा डिग्गी के शटर पर और शटर भड़भड़ाकर गिर पड़ा। गाय का गुस्सा शांत हो गया वह पूछ हिलाते हुए वहा से चली गयी।

गोलू उठा और देखा डिग्गी का ऊपर का ढाँचा गायब है तो उसने मारे डर के अपना सीना ही पकड़ लिया। मंगल फूफा ने देखा तो गोलू के पास आये और जब उन्होंने गली के पिछले हिस्से की ये हालत देखी तो वापस बेहोश होने में ही अपनी भलाई समझी। गुड्डू ने देखा गाय जा चुकी है और गोलू बुत बना गाड़ी के पास खड़ा है तो वह उठकर आया और कहा,”बच गए गोलू,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

लेकिन जैसे ही गुड्डू की नजर गाड़ी के उड़े हुए ढांचे पर पड़ी तो उसने चिल्लाकर कहा,”अबे जे का किये गोलू ! डिग्गी का ढांचा कहा है ?”
गोलू गुड्डू की तरफ पलटा और रोआँसा होकर कहा,”गुड्डू भैया ! चाहो तो दुइ लात घुसा और मार ल्यो पर जे ढाँचे का पईसा कानपूर जाकर हम दे देंगे”

गुड्डू ने सुना तो गुस्से से उसका चेहरा लाल हो गया और उसने गोलू की गर्दन दबोचकर कहा,”अबे पईसा तो तुम तब दोगे जब ज़िंदा कानपूर पहुंचोगे , साला जब से गाड़ी मा बैठे हो ये तोडा वो तोडा ,, साला गाड़ी लेकर आये थे पर तुम लोगो की वजह से कबाड़ लेकर जायेंगे,,,,,,,,,,,,आज तुमहू ज़िंदा नहीं बचे हो गोलू ,आज तुमको बूढ़ा के पास पहुंचा के रहे है,,,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए गुड्डू ने गोलू को दो चार घुसे भी जमा दिए और गर्दन दबोचे रखी सो अलग

रवि ने देखा उसके दोनों मालिक आपस में ही उलझे पड़े है तो उसने गुड्डू को गोलू से अलग किया और बीच में आकर कहा,”अरे बस करो ! का चिरकुट भाँडो की तरह लड़ रहे है आप दोनों,,,,,,,,,,,,,चंदौली आना था आ चुके अब जे डिसाइड करो जाना कहा है ? रात होने वाली है और टेंट कहा लगना है जे का कुछो अता पता नाही और आप दोनों बस तब से एक दूसरे के खून के प्यासे बने हो,,,,,,,!!!”

रवि की बात सुनकर गुड्डू और गोलू एक दूसरे से दूर हो गए। रवि ने देखा मामला शांत है तो उसने गुड्डू से कहा,”आपको हिया से चकिया जाना था ना तो उह्ह्ह जा रही आखिरी बस ओह्ह मा चढ़ जाईये पहुंच जायेंगे चकिया”
गुड्डू ने देखा एक खटारा सी बस वहा से गुजर रही थी तो उसने हाथ से बस वाले को रुकने का इशारा किया और फिर रवि से बोला,”और जे गाड़ी का ?”

“जे की हालत देखकर लगता नाही इह चल भी पायेगी ,कल सुबह इसे ठीक करवाकर हम ले आएंगे चकिया। वैसे भी बिना हेडलाईट के कहा चला पाएंगे आप इसे”,रवि ने कहा
रवि की बात में गुड्डू को थोड़ी समझदारी दिखी इसलिए वह गोलू को घूरते हुए वहा से निकल गया।

गुड्डू के जाने के बाद गोलू ने राहत की साँस ली और रवि की तरफ पलटकर कहा,”थन्कु रवि ! तुमहू सही बख्त पर आकर हमका बचाय लिए वरना गुड्डू भैया तो आज हमको मिश्रा जी की अम्मा के दर्शन करवाय देते”
“आप भी कमाल करते हो गोलू भैया , पहिले खुदही अपनी जिंदगी मा चरस बोई ल्यो बाद मा ढूंढते रहो कि कोनो आकर उह्ह्ह चरस को काटे। दुइ घंटा से सारे लड़के भूखे प्यासे हिया आपकी राह देख रहे है कि आप कुछो बताओ तो आगे बढे और हिया तो आप खुद अपनी ही लंका लगाय के बैठे है”,रवि ने कहा

“अरे दुइ घंटे से हिय का कर रहे हो ? हमहू फोन करके कहे थे ना कि चंदौली पहुंचकर सीधा कचिया निकल जाना,,,,,,,,,,हुआ सादी वाला घर है खाने पीने का सब इंतजार रहेगा,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने चिढ़कर कहा
“कचिया नाम का कोनो गाँव नाही है जे चंदौली मा,,,,,,,,,,,,हिया से गुजरने वाले 150 लोगो से पूछ चुके , कुछ से तो गाली भी खा चुके ,, गोलू भैया बुकिंग के टाइम पर एड्रेस सही से तो पूछे थे ना ?”,रवि ने कहा

“तुमको का हमहू अनपढ़ लगते है , अबे कानपूर कॉलेज से बी.ए. पढ़े है हाँ उह्ह बात और है कि आखरी साल मा जॉन्डिस होने से हमहू पेपर नाही दे पाए”,गोलू ने अपनी तारीफ में कहा

“पेपर देकर भी का ही उखाड़ लेते ? हमहू एम.ए पास है पर साला काम तो आपके साथ ही करना पड़ रहा है ना”,रवि बड़बड़ाया
“का , नहीं का ? मुँह मा काहे दही मथ रहे हो कुछो कहना है तो मुँह पर कहो ना”,गोलू ने कहा
रवि ने खुद को शांत रखा और कहा,”गोलू भैया ! हम बस जे कहना चाह रहे है ,उह्ह्ह बुकिंग करवाने वाले आदमी का नंबर होगा ना आपके पास एक बार ओह्ह्ह का फोन करके सही एड्रेस पूछ ल्यो,,,,,,,,का है कि रात होने वाली है और हिया आस पास रुकने का भी कोनो जुगाड़ नाही है”

“अरे जे तो हमहू सोचे ही नाही , रुको अभी फोन लगाते है”,कहकर गोलू ने अपनी जेब से फोन निकाला और साइड में आकर बुकिंग वाले को यानि बिरजू को फोन लगाने लगा।

मंगल फूफा गुड्डू के डर से बेहोश होकर लेटे थे पर जब देखा गुड्डू यहाँ नहीं है और मामला अब शांत है तो वे उठे और इधर उधर देखा उन्हें सब धुंधला नजर आ रहा था क्योकि गाय का गोबर उनकी आँखों में जो चला गया था। मंगल फूफा धीरे धीरे गोलू के पास आये और उसका कंधा थपथपाया। उधर बिरजू के फोन उठाने पर गोलू ने जैसे ही हेलो कहा इधर मंगल फूफा ने उसका कंधा थपथपा दिया और गोलू पलटा। गोलू ने जैसे ही गोबर में भरे मंगल फूफा को देखा सबसे पहले अपनी नाक बंद की और कहा,”जे का फूफा जे गोबर से काहे नहाये हो ? दूर हटो बहुते बास आ रही है”

अरे हम नहीं नहाये उह्ह गाय ने हमाये ऊपर गोबर कर दिया , ए गोलू ! हमको कुछो दिखाई नाही दे रहा हमाओ मुँह धुलवाय दयो”,मंगल फूफा ने रोआँसा होकर कहा
अब इधर मंगल फूफा मुँह धुलवाने का कह रहे थे उधर फोन के दूसरी तरफ से बिरजू हेलो हेलो की रट लगाए था। गोलू ने रवि को अपने पास बुलाया और कहा,”ल्यो ! जे से बात करके पूछो कहा आना है तब तक हमहू फूफा का मुँह धुलवाकर लाते है”

रवि ने फोन लिया और बात करते हुए साइड में चला गया। गोलू भी मंगल फूफा को लेकर मुंह धुलवाने सामने नल के पास गया और फिर फूफा के साथ वापस चला आया तो देखा ना वहा लड़के है और ना ही सामान की पिकअप ये देखकर गोलू ने कहा,”अबे रवि ! सब कहा गए ?”
“गोलू भैया ! पार्टी से बात करके हमने सबको लोकेशन पर भेज दिया है,,,,,,,,,,,,!”,रवि ने कहा
“तो तुम हिया का कर रहे हो ,तुम काहे नाही गए उह्ह सब के साथ ?”,गोलू ने पूछा

“जे हालत मा उह्ह्ह गाडी चला पाओगे आप लोग ?”,रवि ने गोलू और मंगल फूफा की तरफ इशारा करके कहा तो गोलू समझ गया और मंगल फूफा के साथ चुपचाप गाड़ी में पीछे जा बैठा। अब गाड़ी की दोनों हेडलाईट टूटी हुई थी इसलिए रवि ने पहले ही टेंट के सामान से एक लाइट निकाल ली थी तो उसे जुगाड़ के साथ गाडी के आगे लगा दिया जिस से रास्ता देखने में आसानी हो। रवि गाड़ी में आ बैठा।  सामने का गायब था। गाडी की ये हालत देखकर पीछे बैठे गोलू से जैसे ही कुछ कहने को पलटा उसने देखा पिछली सीट की एक खिड़की का शीशा गायब है और दूसरी तरफ मंगल फूफा गाड़ी का दरवाजा पकड़कर बैठे है।

“ठीक से पकड़कर बैठना फूफा , दरवाजा गिरने ना पाए”,गोलू ने कहा तो रवि ने अफ़सोस में सर हिलाकर गर्दन घुमा ली। उसने चाबी घुमाई और गाडी स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी। फोन पर ठीक से नेटवर्क ना होने की वजह से गाँव का नाम तो रवि को भी समझ नहीं आया लेकिन वह गुड्डू और गोलू से थोड़ा समझदार था इसलिए उसने व्हाट्सप्प पर सीधा लोकेशन ही मंगवा ली और अब उसी को देखते हुए आगे बढ़ रहा था।

( गोलू की किस्मत सच में खराब है या वह जान बूझकर देता है मुसीबत को न्यौता ? बार बार बेहोश होने का नाटक कर क्या मंगल फूफा बच पायेगा गुड्डू और गोलू की गड़बड़ से ? जो लोकेशन रवि को मिली है वो पहुचायेगी इन तीनो को सही जगह या मिलेगा इन्हे सरप्राइज ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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