Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 55

by Story With Sanjana May 25, 2026
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Manmarjiyan Season 4 – 55

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

रवि को जो लोकेशन मिला उसके हिसाब से रवि गोलू और मंगल फूफा को लेकर आ पंहुचा चंदौली से 20 किलोमीटर दूर एक श्मशान में। गोलू के मुँह से श्मशान का नाम सुनकर मंगल फूफा बेहोश होकर गाड़ी की पिछली सीट पर फ़ैल गए। रवि ड्राइवर सीट से नीचे उतरा और गोलू की तरफ आकर कहा,”का गोलू भैया ! जे इत्ती जोर से चिल्लाकर श्मशान के भूतो को न्योता काहे दे रहे हो ? हम तो कहते है चुपचाप बैठते है गाडी मा और गाडी स्टार्ट कर बैक लेकर चलते है हिया से,,,,,,,,,,,,पता चले साला सुबह तक आप और हम भी भूत बन जाए”

गोलू ने सुना तो अंदर ही अंदर तो घबरा गया लेकिन रवि के सामने बेइज्जती ना हो जाये सोचकर उसने रवि का मजाक उड़ाते हुए कहा,”हाह ! श्मशान से डर रहे हो तुमहू ? भूल गए रविवा अंत मा सबको यही आना है,,,,,,,,,,,,और का भूत भूत भूत लगाय रखा है ,अरे ऐसे भूतो को तो हमहू अपनी जेब मा रखते है रवि”
“हैं गोलू भैया सच्ची ?”,रवि ने गोलू की बातो में आकर कहा

बस फिर क्या था इतने में ही हमारे गोलू महाराज फ़ैल गए और कहा,”और नहीं तो का ? अरे एक बार हम और गुड्डू भैया फंस गए थे ऐसे ही एक ठो श्मशान मा , अब गुड्डू भैया ठहरे कमजोर दिल के श्मशान के नाम से ही हाथ पैर फूलने लगे ओह्ह के,,,,,,लेकिन हम साथ थे तो पकडे गुड्डू भैया का हाथ और कहा चलो हमाये साथ हम भी तो देखे हमसे बड़ा भूत कौन है ?”

“का बात है गोलू भैया आप बहुते डेरिंग आदमी निकले”,रवि ने हैरानी से कहा
“अरे जे भूत वूत कुछो नाही होता और होता है तो फिर साला हमरे सामने आये , गुद्दी पकड़ कर ऐसा पेलेंगे ना कि नानी याद आ जाएगी”,गोलू ने कहा तभी किसी ने गोलू का कंधा थपथपाया और ये देखकर रवि की आँखे मारे डर के बड़ी हो गयी और मुँह खुला का खुला रह गया।

 “बस ,बस ऐसे ही गुड्डू भैया का मुँह खुला का खुला रह गया था उह्ह दिन जब उह्ह हमायी डेरिंग देखे थे,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने कहा तभी पीछे खड़े किसी शख्स ने उसका कंधा फिर थपथपाया और गोलू ने पलटकर चिढ़ते हुए कहा,”का है बे ?”
गोलू जैसे ही पीछे पलटा उसने देखा मैला कुचला एक आदमी कंधो पर मोटी सी काली चादर डाले , हाथ में सहारे के लिए लकड़ी पकडे खड़ा उसे ही घूर रहा है तो गोलू मारे डर के थरथर काँपने लगा और उछलकर रवि में गिरा लेकिन रवि खुद डरा हुआ था इसलिए उसने गोलू को आगे धकेल दिया।

गोलू फिर आदमी के सामने और उसी डरावनी गुस्से वाली शक्ल देखकर बेचारे की हालत पतली हो गयी फिर भी रवि के सामने कही उसका पोपट ना हो जाये सोचकर गोलू ने कहा,”कौन हो बे तुम ?”
“जे गाँव मा नए आये हो साहब ?”,आदमी ने बिना पलकें झपकाए गोलू की तरफ देखकर कहा
गोलू ने सुना तो आदमी को देखा और मुँह बनाकर कहा,”इस गांव में नए आये हो साहब ,अरे हमे आये पुरे 17 मिनिट हो चुके तुमहू देर से आये हो,,,,,,,,,!!!”

आदमी ने सुना तो गोलू को देखा फिर रवि को देखा और फिर गाडी को देखकर डरवाने अंदाज में कहा,”लगता है आपकी गाड़ी खराब हो गयी है”
“ओह्ह्ह तो तुमहू मेकेनिक हो”,गोलू ने राग अलापकर कहा
रवि ने सुना तो गोलू को पीछे खींचकर दबे स्वर में कहा,”अरे गोलू भैया जे मेकेनिक नाही कुछो और ही लग रहे है हमे ,जे का हाल देखो ऐसा लग रहा है जैसे हफ्तों से नहाये नहीं है , जे के कपडे देखो,,,,,,,,,,,हमे तो लगता है इह,,,,,,,,!!!”

“का लगता है तुम्हे ?”,गोलू ने पूछा
“हमे तो लगता है इह कोनो भूत तो नाही”,रवि ने जैसे ही कहा गोलू की जान सूख गयी और वह जो सर पर पाँव रखकर भागा एक बार को तो रवि भी हैरान रह गया हुआ क्या लेकिन अगले ही पल उसके कानो में सामने खड़े आदमी की आवाज पड़ी,”सुनो हमायी एक ठो मदद,,,,,,,,!!”
” आह्ह्हह्ह्ह्ह भूत,,,,,,,,,,,!!”,चिल्लाकर रवि भी गोलू के पीछे भागा। गोलू और रवि एक दूसरे के पीछे चिल्लाते हुए ऐसे भागे कि पूरा श्मशान नाप दिया और भागते भागते दोनो गाड़ी के पास चले आये।

रवि ने ड्राइवर सीट का दरवाजा खोला और गोलू ने बगल वाली सीट का दरवाजा खोला और दोनों अंदर आ बैठे। रवि ने गाड़ी स्टार्ट की और पीछे लेकर फुल स्पीड में भगा दी। मंगल फुफा जो कि बेहोश होने का नाटक किये थे जब उन्होंने गोलू के मुँह से भूत सुना तो सच में बेहोश हो गए बस गनीमत था भागते वक्त गाडी से नहीं गिरे।
श्मशान में खड़े आदमी ने गाड़ी को जाते देखा और कहा,”अजीब लोग है ! हमारी बात भी नहीं सुनी अरे हम तो कह रहे थे कि हमारी एक मदद कर दो हो सके तो हमे चकिया तक छोड़ दो,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

मिश्रा जी का घर , कानपूर
मिश्रा जी ने जब कहा कि मंगेश को जेल से उन्होंने बाहर निकाला है तो ये सुनकर फूफा हक्के बक्के रह गए कोई मंगेश था लवली का जानी दुश्मन और उसकी वजह से ही लवली के पिता पहाड़ी से कूद गए थे। आदर्श फूफा के चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये और उन्होंने कहा,”जे आप का किये मिश्रा जी ? अरे दुश्मन को जेल से निकाल दिए भूल गए उह्ह्ह मंगेशवा लवली के असली पिता बृजेश्ववा का कातिल है”

“आदर्श बाबू ! आप भी जानते है कि बृजेश ने पहाड़ी से कूदकर आत्महत्या की थी मंगेश ने ओह्ह्ह का नाही मारा था”,मिश्रा जी ने शांत स्वर में कहा
“अरे लेकिन आत्महत्या के लिए ओह्ह्ह का उकसाये कौन ? और बृजेश को गलत रास्ते पर चलाय कौन ?”,आदर्श फूफा ने कहा

“अच्छा ! हमहू आपसे कहेंगे जाकर गंगा मा कूद जाओ तो का कूद जोओगे ? अरे इत्ते बड़े हो गए है बुद्धि का इस्तेमाल काहे नाही करते ! मानते है मंगेशवा ने गलती की है पर ओह्ह्ह को चाबी भरने वाला ससुरा उह्ह्ह लल्लन था। जब हमको इह पता चला कि लवली ओह्ह्ह की बिटिया बिंदिया को चाहता है और ओह्ह्ह से शादी करना चाहता है तो हमने मंगेश को बाहर निकाला ताकि जे दुश्मनी हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाये।

का है कि मंगेश है तो बिंदिया का बाप ही ना और उह्ह्ह लवली को ज़रा भी पसंद नाही करता,,,,,,,,,,,हमने सोचा हमहू ओह्ह्ह का बाहिर निकाल लेई तो उह्ह्ह लवली को माफ़ कर दे और बिंदिया का ब्याह ओह्ह्ह के साथ कर दे,,,,,,,,,,,,,,पर हिया तो मामला कुछो और ही नजर आ रहा है”,मिश्रा जी पूरी बात आदर्श फूफा को बताई तो आदर्श फूफा सोच मा पड़ गए और कुछ देर बाद कहा,”ठीक है मान लिया आपने सब अच्छे के लिए किया लेकिन उह्ह्ह तो आपको धोखा दे गया ना , बिंदिया की सादी उह्ह्ह लल्लन के साले के लड़के से कर रहा है”

“इह भी हमको तो लल्लन की ही चाल लगती है आदर्श बाबू”,मिश्रा जी ने कहा
“उह्ह्ह ससुरा तो बहुते हरामी है , बिना मतलब के तो उह्ह अपने बाप की मय्यत में ना आये फिर मंगेश के घर मा ब्याह काहे करवाय रहे है ?”,आदर्श फूफा ने गंभीर स्वर में कहा
“जे तो चकिया जाकर ही पता चलेगा आदर्श बाबू”,मिश्रा जी ने कहा
“तो फिर सोच का रहे है , चलिए चलते है”,फूफा ने कहा

मिश्रा जी ने सुना तो हैरानीभरे स्वर में कहा,”अब आप काहे वहा जाने के लिए इतने उत्साहित है ?”
“तो का अकेले जाईयेगा ? मिश्रा जी अब 26 के नाही रहे है आप जो अकेले भीड़ जायेंगे हम तो कहते है हम जैसो को साथ रखिये”,फूफा ने कहा
“हाँ आप तो जैसे अभी पालने मा झूल रहे है,,,,,,,,,,!!!”,मिश्रा जी ने कहा
“अरे ले चलिए न , वैसे भी दुइ महीना हिया रहेंगे तो बोर नहीं ना हो जायेंगे , आपके साथ जायेंगे तो थोड़ा हवा पानी बदलेगा और आपकी मदद भी हो जाही है”,फूफा ने कहा

“मतलब आपने मन बना लिया है दो महीना हिया रहने का ?”,मिश्रा जी ने पूछा
“देखो मिश्रा जी उह्ह मेटर अलग है जे लवली का मेटर अलग है,,,,,,,,,,और फिर हमको उह्ह ललनवा से कुछो पुराना हिसाब भी बराबर करना है तो चकिया तो हमहू जायेंगे”,फूफा ने कहा
“ठीक है फिर कल सुबह निकलते है”,मिश्रा जी ने हाथ में पकड़ा कागज मोड़ते हुए कहा

“अरे जे का कोई प्रेम पत्र है जो सम्हालकर रखने का सोच रहे है आप , फेंकिए जे का और चलिए चलकर पिलानिंग करते है”,आदर्श फूफा ने मिश्रा जी के हाथ से कागज लेकर फेंकते हुए कहा और उनके कंधो पर हाथ रखकर आगे बढ़ गए।
डायनिंग टेबल पर खाना लगाती शगुन ने आदर्श फूफा और मिश्रा जी को ऐसे साथ में देखा तो हैरानी से बगल में खड़ी मिश्राइन से कहा,”माजी ! जे पापा जी और फूफा जी साथ साथ ?”

“पता नाही जे घर मा का हो रहा है शगुन ? हमे तो जे सब देख के ही चक्कर आय रहे है”,मिश्राइन ने कहा
मिश्रा जी और आदर्श फूफा वहा से चले गए और मिश्राइन शगुन के साथ मिलकर डायनिंग पर खाना लगाने लगी

गुड्डू गायब नहीं हुआ था बल्कि पास वाले घर के बगल में बनी नल के नीचे अपना पैर साफ कर रहा था जो चलते चलते गोबर में भर गया था। वह बेचारा नल के पास खड़ा अपना पैर धोते हुए बड़बड़ाने लगा,”जे साला गोबर को भी हमाये पैर मा ही लगना था। कित्ता बदबू मार रहा है साबुन भी नाही है हिया”

गुड्डू ने तीन चार बार अच्छे से अपना पैर और जूता धोया और फिर वापस उसी जगह आया जहा उस आदमी को छोड़ा था लेकिन वहा तो कोई नहीं था। परेशान सा गुड्डू बिंदिया के घर की तरफ देखने लगा तभी किसी ने आकर उसपर बड़ा सा बोरा डाला और उसे उठाकर ले गए। गुड्डू चिल्लाता रहा लेकिन किसी ने उसी कोई बात नहीं सुनी और गुड्डू को भी नहीं पता था कि ये कौन लोग थे ?

उधर मनोज जब घर आया तो देखा गुड्डू कमरे में नहीं है। उसने पुरे घर में देख लिया लेकिन गुड्डू कही नहीं मिला तो मनोज खुद में ही बड़बड़ाया,”जे लवली भैया कहा चले गए ? कही मंगेश चचा के आदमियों ने ओह्ह्ह का हिया आते हुए देख तो नाही लिया ?”
मनोज गुड्डू को लेकर परेशान हो रहा था कि तभी उसके कानो में एक जानी पहचानी आवाज पड़ी जो कि बिरजू की थी,”ए मनोजवा ! मंगेश भैया तोह का बुलाय रहे है”

मनोज ने सुना तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा और उसने मन ही मन खुद से कहा,”लगता है लवली भैया मंगेशवा के हाथ लग गए है और इसलिए वो मुझे बुला रहे है का करे का करे हमे तो कुछो समझ नाही आ रहा है” “अरे खड़े खड़े का सोच रहे हो ? चलो भी सादी का घर है और भी बहुते काम है हमे”,बिरजू ने कहा
“तुम , तुम चलो हम आते है”,मनोज ने कहा
“मंगेश भैया ने कहा है तुम्हे साथ लेकर आने को,,,,,,,,,हमहू तुम्हे लेकर ही जायेंगे , अब चलो”,बिरजू ने थोड़ा कठोर स्वर में कहा तो मनोज उसके पीछे पीछे चल पड़ा

रवि ने श्मशान से जो गाड़ी भगाई तो ऐसे भगाई की गाड़ी 20 किलोमीटर दूर वापस चंदौली में आकर रुकी और रुकने के साथ ही मंगल फूफा गाड़ी से बाहर और लुढ़क कर झाड़ियों में हालाँकि वो अभी तक बेहोश ही थे। गाडी रुकी तो गोलू ने रवि की तरफ देखा और मुस्कुराया लेकिन गोलू की मुस्कान देखकर रवि चिढ गया और कहा,”थू,,,,,,,,,,,गोलू भैया,,,,,,,,,,,अबे काहे के भैया ,

एक नंबर के डरपोक और बंडलबाज आदमी हो कसम से,,,,,,,,,,,,,हमसे कहे रहे भूत से नाही डरते , अगर हुआ दो मिनिट और रुक जाते ना आप तो कपडे गंदे कर देते,,,,,,,,,,,बात करते है। साला हम ही जानते है कैसे जान बचाकर भागे है हुआ से और कैसे गाडी चलाये है ?”
“अरे हमहू भागे कब हम तो तुम्हरे साथ भाग के तुमको हिम्मत दे रहे थे”,गोलू ने अपनी गलती ना मानकर उलटा रवि को बहलाते हुए कहा

“आपकी जे हिम्मत आप अपने पास ही रखो,,,,,,,हमहू ज़रा पानी पीकर आते है हमाओ गलो सूख रहो”,रवि ने गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर निकलते हुए कहा
“प्यास तो हमे भी लगी है एक काम करते है मंगल फूफा से भी पूछ लेते है पानी पिएंगे का,,,,,,,,,,,फूफा ,ए फूफा , ए मंगल फूफा”,कहते हुए गोलू ने पीछे देखा तो
पाया कि फूफा तो गाड़ी में है ही नहीं। फूफा को गाड़ी ना देखकर गोलू के चेहरे का रंग उड़ गया वह जल्दी से गाडी से उतरा और रवि का कंधा थपथपा कर कहा,”ए रवि रवि रवि ए फूफा गायब है”

रवि बेचारा झुककर नल पर पानी पी रहा था गोलू के थपथपाने से मुंह नीचे काई में जा लगा और पानी पर जमी हरी हरी काई अब रवि के मुँह की शोभा बढ़ा रही थी। गुस्से से लाल रवि गोलू की तरफ पलटा तो गोलू बिदककर दूर हटा और कहा”,जे तुमहू अपने मुँह पर धनिया काहे उगाय लिए ?”
रवि ने काई को मुँह से हटाया और कहा,”गोलू भैया ! माँ कसम बहुते बड़े बकैत किस्म के इंसान हो आप ,,और का हुआ काहे चिल्लाय रहे है इतना ?”

“अबे फूफा गाड़ी मा नाही है”,गोलू ने घबराकर कहा
“गाड़ी मा नाही है तो फिर कहा गया ?”,रवि ने हैरानी से कहा
“कहा जा सकता है ?”,गोलू ने भी परेशानी भरे स्वर में पूछा
“गोलू भैया ! कही फूफा हुआ श्मशान मा ही तो नाही रह गए ?”,रवि ने एकदम से गोलू के कंधे पर मारकर कहा और गोलू जा गिरा काई के ऊपर अब जो धनिया कुछ देर पहले रवि के मुँह पर उगा था वो अब गोलू के मुँह की शोभा बढ़ा रहा था

रवि ने देखा गोलू गिर गया है तो जल्दी से उसके पास आकर उसे उठाया और कहा,”अरे अरे गोलू भैया ! आप तो गिर गए”
“तुम से तो काम ही गिरे है”,गोलू ने गुस्से से कहा तो रवि दूसरी तरफ देखने लगा।
गोलू उठा और इधर उधर देखा लेकिन अंधेरे में भला क्या ही दिखाई देता ? एक तो पहले ही देर हो चुकी थी ऊपर से मंगल फूफा गायब थे अब तो गोलू का सर दुखने लगा था।

वह गाड़ी से कुछ दूर उकडू आ बैठा और अपना हाथ सर से लगाकर कहा,”हमाओ तो अब सर घूम रहो है रवि , एक तो जे मंगल फूफा नाही मिल रहे ऊपर से कचिया भी नाही पहुंचे,,,,,,,,,,,लगता है इह बार दुइ चीज बंद होकर रहेगी”
“का गोलू भैया ?”,रवि ने उसके बगल में आकर बैठते हुए कहा,”एक ठो गुड्डू भैया की जे वेडिंग प्लानर की दुकान और दूसरी हमायी सांसे,,,,,,,,,,,!!!”

रवि ने सुना तो मायूसी से गोलू को देखने लगा और फिर पैर पसारकर बैठते हुए कहा,”हम का कह रहे है गोलू भैया ! कचिया ना जाकर आज रात यही रुक जाते है सुबह जल्दी निकल जायेंगे,,,,,,,,,,,,,वैसे भी रात मा कौनसा टेंट लगाना है ,काम तो सारा सुबह शुरू होगा”
गोलू ने सुना तो रवि की तरफ देखा और कहा,”रवि ! भगवान ने शक्ल चाहे तुमको उन्नीस दी हो लेकिन दिमाग पूरा बीस दिया है,,,,,,,,,,,,,,जे ही सही रहेगा तब तक का पता मंगल फूफा की भी कोनो खबर मिल जाए,,,,,,,,!!!”

“उह्ह्ह पेड़ के चबूतरे पर चलकर सो जाते है”,रवि ने उठते हुए कहा और गोलू के साथ चबूतरे पर चला आया। दोनों को भूख लगी थी लेकिन कहे किस से ? दूर दूर तक न कोई दुकान था ना कोई मकान इसलिए दोनों पानी पीकर ही सो गए।

( क्या मिश्रा जी और आदर्श फूफा बिंदिया की शादी से पहले पहुँच पाएंगे चकिया ? गुड्डू को किडनेप करने वाले मंगेश के आदमी है या कोई और ? आखिर क्यों मिलना चाहता है मंगेश मनोज से ?  जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल   

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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