Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 56

by Story With Sanjana May 27, 2026
written by Story With Sanjana May 27, 2026 1 comment
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Manmarjiyan Season 4 – 56

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी का घर ,कानपूर
मिश्राइन और शगुन ने सबके लिए डायनिंग पर खाना लगा दिया। मिश्रा जी और आदर्श फूफा में चकिया जाने को लेकर फ़िलहाल के लिए दोस्ती हो चुकी थी इसलिए दोनों साथ साथ डायनिंग पर आ बैठे। मिश्राइन ने देखा तो उनका सर ही चकरा गया। अभी कुछ देर पहले दोनों एक दूसरे को ताने मार रहे थे और अब साथ साथ है। खैर उस वक्त मिश्राइन ने कुछ ना कहना ही ठीक समझा और चुपचाप खाना परोसने लगी। लगे हाथ भुआ भी चली आयी और खाना खाने आ बैठी।

मिश्राइन ने वेदी को भी आवाज दी और जैसे ही लवली को आवाज देने का सोचा उन्हें याद आया कि मिश्रा जी ने आज लवली को खाना देने से मना किया है। सभी चुपचाप खाना खाने लगे। लवली को वहा ना देखकर शगुन ने धीरे से मिश्राइन से कहा,”माजी ! पापाजी से कहकर लवली भैया को भी बुला लीजिये”
“नाही शगुन ! सुनि नाही शाम मा जे का कहे थे ? हमहू ओह्ह का बाद मा खिला देंगे”,मिश्राइन ने कहा तो शगुन ने धीरे से हामी में गर्दन हिला दी।

“ए भाभी ! जे खाने मा तो कुछो गड़बड़ नाही की हो न ?”
“गड़बड़ की भी होगी तो आपके साथ साथ बाकि सबको भी भुगतना पडेगा,,,,,,,,,!!!”,मिश्राइन ने मुँह बनाकर कहा क्योकि वे भुआ से अच्छा खासा नाराज जो थी
“जे चपाती तो ठंडी हुई गयी है ,गर्म लाय दयो ज़रा”,भुआ ने फिर खाने में कमी निकालकर कहा
“गुड्डू के पिताजी और आदर्श बाबू चुपचाप खाय रहे है ना पर नाही जे जिज्जी का तो अलग से तमाशा रही”,मिश्राइन बड़बड़ाई

“आप रुकिए मैं ले आती हूँ”,कहकर शगुन किचन की तरफ चली गयी।
खाना खाकर मिश्रा जी उठे तो आदर्श फूफा भी उनके साथ ही उठ खड़े हुए और हाथ धोकर उनके पीछे जाने लगे तो मिश्रा जी ने खुद को शांत किया और आदर्श फूफा की तरफ पलटकर बोले,”आदर्श बाबू ! चकिया सुबह जाना है आप अभी से काहे हमायी पूछ पकड़ लिए ?”

“अरे आपका का भरोसा आप हमे सोते में छोड़ जाए”,फूफा ने कहा
“अरे हम आपको सोता छोड़कर काहे जायेंगे ?”,मिश्रा जी ने कहा
“मतलब साथ लेकर जायेंगे ?”
“हाँ जायेंगे”
मतलब अभी हमे आपके पीछे आने की जरूरत नाही ?”
“हाँ नाही है”
“तो हम जाकर सो जाए ?”
“हाँ आप जाकर सो जाईये’

“ठीक है पर आप सुबह हमको ले जाना भूलेंगे तो नाही ना ?”
“अरे काहे भूलेंगे ?’
“मतलब याद रखेंगे ?”
“हाँ याद रखेंगे”
“का याद रखोगे ?”
मिश्रा जी फूफा के सवालो से अंदर ही अंदर तिलमिला गए लेकिन फिर भी गुस्से का घूंठ भरकर शांति से कहा,”आदर्श बाबू ! कल सुबह हम आपको अपने साथ चकिया ले जायेंगे,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

“ठीक है तो फिर हमहू सोने जाते है”,आदर्श फूफा ने कहा
मिश्रा जी ने उनके सामने हाथ जोड़े और कहा,”हाँ जाईये”
आदर्श फूफा जाने के लिए आगे बढ़ गए तो मिश्रा जी खुद में ही बड़बड़ाये,”जे साला आदर्श बाबू को काहे हम गले मा घंटी की तरह बाँध लिए ?”

मिश्रा जी ने जैसे ही अपनी बात खत्म की आदर्श फूफा पलटकर वापस आये और कहा,”मिश्रा जी हम जे कह रहे थे कि क्यों ना आज रात आपके साथ ही सो जाये , फिर सुबह जल्दी उठकर चल देंगे”
मिश्रा जी झुके और अपने पैर से चप्पल निकालते हुए कहा,”अबे तुमहू जाते हो कि नाही ?”
“अरे जाते है जाते है,,,,,,,,,,,शुभरात्रि”,कहकर फूफा वहा से भाग उठे
“आप जैसे असुरो के होते हमायी कोनो रात्रि शुभ कैसे हो सकती है भला ?”,मिश्रा जी ने हाथ में पकड़ी चप्पल को जमीन पर पटक कर कहा और अपने कमरे मे  चले गए।

मिश्राइन ने देखा भुआ और फूफा अम्मा के कमरे में सोने जा चुके है और मिश्रा जी भी अपने कमरे में है तो उन्होंने शगुन के लिए थाली में खाना परोसा और खाने को कहा। शगुन खाना खाने आ बैठी। मिश्राइन ने एक थाली उठायी और उसमे खाना परोसा और जाने लगी तो शगुन ने कहा,”माजी ये,,,,,,!!!”

“तुमहू खाओ बिटिया हमहू ज़रा लवली को खाना खिलाकर आते है शाम से उह्ह्ह एक बार भी नीचे नाही आया भूखा होगा”,कहकर मिश्राइन चली गयी
शगुन ने सुना तो मुस्कुरा उठी क्योकि मिश्राइन गुड्डू और लवली में जरा भी भेदभाव नहीं करती थी। शगुन अपना खाना खाने लगी और गुड्डू के बारे में सोचने लगी जबकि उसे तो पता भी नहीं था कि गुड्डू चकिया में है और किसी ने उसे किडनेप कर लिया है।

खंडरनुमा घर , चकिया
मंगेश के आदमियों ने गुड्डू को लवली समझकर अगवा कर लिया और बोरे में डालकर वही बिंदिया के घर से कुछ दूर एक खाली पुराने मकान में ले आये। उन्होंने बोरे और सामने पड़े घास पर फेंका और कहा,”साला ! जे लवली का खाता है बे ? जे का हिया लाते लाते जान ही निकल गयी”
“का पतो कानपूर मा कोनो अच्छी डाइट मिली हो”,आदमी के साथी ने कहा

“जो भी है अब रातभर इसे यही छोड़ देते है , कल मंगेश की बिटिया का ब्याह हो जाये ओह्ह्ह के बाद जे लवली ओह्ह्ह्ह का सौंप देंगे,,,,,,,,,,,!!!”,आदमी ने अपने चेहरे से पसीना पोछते हुए कहा और अपने साथी के साथ कमरे से बाहर निकलकर दरवाजा बंद कर दिया ताकि किसी को शक न हो अंदर कोई है।
बोरे में बंद गुड्डू ने दिमाग से काम लिया वह चुपचाप उन दोनों की बाते सुनता रहा ताकि कल सुबह से पहले यहाँ से निकलने का कोई जुगाड़ लगा सके।

बोरे को काफी मजबूती से बांधा गया था इसलिए उसे खोलकर बाहर आना तो गुड्डू के लिए मुमकिन नहीं था इसलिए गुड्डू ने धीरे धीरे अपने दाँतो से बोरे की रस्सियों को काटना शुरू किया और थोड़ी मेहनत के बाद बोरे मे एक छोटा छेद हो गया। गुड्डू ने उसमे से अपना हाथ बाहर निकाला और जैसे तैसे करके बोरे की रस्सी को खोलकर बाहर आया। बाहर आकर गुड्डू ने सबसे पहले साँस ली और फिर खुद से कहा,”जे बिंदिया का बाप तो बहुते खतरनाक निकला ,हिया लवली भैया को मारने के लिए आदमी तैनात कर रखे है।

अच्छा हुआ लवली भैया हिया नहीं आये और हम चले आये,,,,,,,,,,,,हमे जल्द से जल्द बिंदिया भाभी से मिलना होगा और ओह्ह्ह का सब सच बताना होगा,,,,,,,,,,,,,,लेकिन बाहर गए तो फिर पकडे जायेंगे और अब तो उह्ह्ह लोगो ने हमे , मतलब लवली भैया को देख भी लिया है ,अब तक तो उह्ह्ह मंगेश को पता चला चुका होगा,,,,,,,,,,,,,,!!!”

 खुद में ही बड़बड़ाते हुए गुड्डू वही घास पर आ बैठा और वहा से निकलने के बारे में सोचने लगा तभी उसकी नजर सामने खूंटी पर टंगे घाघरा चुनरी पर गयी। गुड्डू मुस्कुरा उठा।

मनोज अंदर ही अंदर घबराता हुआ मंगेश के आदमियों के साथ चल पड़ा। उसके मन में अजीब अजीब ख्याल आने लगे। कही मंगेश के आदमियों ने लवली को यहाँ देख तो नहीं लिया ? कही मंगेश को पता तो नहीं चल गया कि मनोज ने लवली को अपने घर में जगह दी है ? मनोज मंगेश के सामने आया तो मंगेश ख़ामोशी से उसे घुरने लगा ये देखकर तो मनोज की हालत और खराब हो गयी उसने हाथ जोडते हुए कहा,”सच कह रहे है चचा जे सब के बारे में हमे कुछो नाही पता,,,,,,,,,,हमका जाय दयो”

“तुमको नाही पता तो किसे पता होगा ? पुरे गाँव के पिरोगराम मा नाच गाने का बंदोबस्त तुमहि देखते हो ना फिर बिंदिया के ब्याह मा इंतजाम काहे नाही किये ?”,मंगेश ने कठोरता से कहा
मनोज ने सुना तो हैरानी से मंगेश को देखने लगा दरअसल मनोज के पास दो चार लोगो की एक टीम थी जो गांव के हर शादी ब्याह और शुभ काम में नाच गाना किया करती थी , मगेश ने उसके लिए मनोज को बुलाया था।

मनोज को हक्का बक्का देखकर मंगेश ने कहा,”अच्छा अच्छा ! तुमहू उह्ह्ह दिन वाली मार की वजह से हमसे नाराज हो,,,,,,,,,,,अरे जाय दयो ना मनोजवा गलती हो जाती है ,अब तुमको साला जब बिंदिया से मिलना था तो सीधा सीधा आकर मिलते , ओह्ह की सहेली बनकर आने की का जरूरत थी,,,,,,,,,,,,खैर छोडो जे सब इह बताओ कित्ता लोगे ?”
“का ?”,मनोज ने घबराहटभरे स्वर में कहा

“अबे नाच गाने का कित्ता पईसा लोगे ? एक काम करो पहिले तुमहू अपने लोगो को बुलाय ल्यो ओह्ह्ह के बाद देख लेंगे,,,,,,,,,देखो अभी खाने का पिरोगराम चालू है खाना खाने के बाद सभी नाच गाना देखने हिया आँगन मा जमा हो जायेंगे,,,,,,,,,,तब तक तुमहू सब इंतजाम देख ल्यो”,कहते हुए मंगेश ने मनोज का कंधा थपथपाया और वहा से चला गया।
मंगेश के पीछे पीछे उसके आदमी भी वहा से चले गए और मनोज ने राहत की साँस ली।

अपने कमरे में गुमसुम बैठी बिंदिया लवली को याद कर उदास हुई जा रही थी तभी उसकी अम्मा उसके लिए खाना लेकर आयी और कहा,”ल्यो बिंदिया खाना खाय ल्यो फिर तो कल फेरो के बाद ही खाना मिली है तोह का”
“हमे नाही खाना अम्मा , हमे भूख नाही है”,बिंदिया ने उदासी भरे स्वर में कहा

बिंदिया की अम्मा ने पास बैठी रूपा को देखा तो रूपा ने हाथ से इशारा कर उन्हें रुकने को कहा और थाली उनके हाथ से लेकर उन्हें बाहर भेज दिया और खुद बिंदिया के सामने आ बैठी और कहा,”ए बिंदिया ! खाना खाय ल्यो , अरे खाने से का नाराजगी भाई”
“हमे नाही खाना रूपा ,, वक्त कितनी जल्दी गुजर रहा है कल हमायी सादी किसी और से हो जाएगी और लवली को अहसास तक नाही है,,,,,,,,,,पता नाही उह्ह चिट्टी ओह्ह्ह तक पहुंची होगी भी कि नाही ?”,बिंदिया ने रोआँसा होकर कहा

“अरे काहे चिंता करती हो बिंदिया ? सुनो हमने सोच लिया है कल तुम्हे कैसे और कब हिया से भगाना है ?”,रूपा ने आँखों में चमक भरकर कहा तो बिंदिया एकटक उसे देखने लगी और रूपा उसे खाना खिलाते हुए कल के प्लान के बारे में बताने लगी जिसे सुनकर बिंदिया को थोड़ी राहत मिली और वह ख़ुशी ख़ुशी खाना खाने लगी 

गुड्डू ने कपडे बदले और अपने कपड़ो को वही छोड़कर घर से बाहर चला आया। बाहर आकर वह फिर से पकड़ा ना जाये सोचकर उसने लंबा सा घूँघट कर लिया और चल पड़ा बिंदिया के घर की तरफ ,गुड्डू ने देखा वह घाघरा चुन्नी में है लंबा सा घूंघट निकाले है फिर भी लोग उसे देख रहे है। अगले ही पल उसे याद आया कि कपडे तो उसने लड़कियों वाले पहने है लेकिन चल वह अभी भी मर्दो की तरह रहा है तो उसने अपनी चाल में थोड़ी सी अदाए और लचक डाली और मंगेश के घर की तरफ बढ़ गया।

पहले गुड्डू को डर लगा लेकिन बाद में उसने भगवान का नाम लिया और घर में दाखिल हो गया।
घर में सभी खाना खा चुके थे और नाच गाने के लिए आँगन में जमा होने लगे। मंगेश ने देखा मनोज अभी तक अपने लोगो को लेकर नहीं आया है तभी उसकी नजर गुड्डू पर पड़ी और उसने उसके पास आकर कहा,”इत्ता बख्त काहे लगा दिया आने मा ? सब लोगन तुम्हायी राह देख रहे है चलो अब जल्दी से शुरू करो”

मंगेश को अपनी तरफ आते देखकर एक बार के लिए तो गुड्डू की जान ही हलक में अटक गयी लेकिन बाद में मंगेश की बात सुनकर गुड्डू को समझ आया कि मंगेश उसे कुछ और समझ रहा है। गुड्डू ने अपनी आवाज को थोड़ा बारीक़ किया और कहा,”जी माफ़ कर दीजिये उह्ह्ह रस्ते मा लड़का लोग छेड़ने लगे थे,,,,,,,,,,,,,नासपीटे कही के ,बहुते घटिया गांव है आप का”
“हाँ हाँ ठीक है और उह्ह्ह मनोजवा कहा है उह्ह्ह नहीं आया ?”,मंगेश ने कहा

“उह्ह्ह भी यही कही होगा,,,,,,,,वैसे ब्याह केह को है ?”,गुड्डू ने जानबूझकर पूछा ताकि पता लगा सके बिंदिया कहा है और फिर उस से बात करने का मौका ढूढ़ सके।
“ब्याह हमायी बिटिया को है और तुमहू जियादा हिया की भुआ ना बनो जेह काम के लिए आयी हो उह्ह्ह करो, ऐसो रंग जमाओ की सब देखते रह जाये”,मंगेश ने कहा।
“अरे चिंता नाही करो ! ऐसो रंग जमाहे है पुरो गाँव देखे है,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर गुड्डू आगे बढ़ गया लेकिन इस बार उसने थोड़ा भारी आवाज में कहा जिसे सुनकर मंगेश बड़बड़ाया,”जे आवाज हमे जानी पहचानी लग रही है”

“ए चचा ! तैयार कहा हो हम हिया तो चारो तरफ मर्द ही मर्द है”,गुड्डू ने वापस आकर कहा तो मंगेश की तंद्रा टूटी और उसने बिंदिया के कमरे की तरफ इशारा करके कहा,”उह्ह्ह कमरा मा चली जाओ और जल्दी करो,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने मंगेश के सीने पर धीरे से मुक्का मारा और कहा,”आये हाय ! गांववालों से जियादा तो तुम्हे जल्दी है चचा”
मंगेश कुछ कहता इस से पहले गुड्डू लटक मटक करता वहा से चला गया।

गुड्डू बिंदिया के कमरे में चला आया जहा सिर्फ रूपा और बिंदिया ही थी। उसने जैसे ही बिंदिया को देखा उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा उसने जल्दी से कमरे का दरवाजा बंद किया और बिंदिया की तरफ पलटा तो बिंदिया ने हैरानी से कहा,”ए कौन हो तुम और दरवजा काहे बंद किया है ?”
गुड्डू ने अपना घूँघट हटा दिया ये देखकर बिंदिया ने कहा,”लवली तुम”

“देखा बिंदिया हम कहे थे ना लवली भैया तुम से सच्चा प्यार करते है उह्ह तुम्हे लेने जरूर आएंगे,,,,,,,एक काम करते है हमहू जाते है तुम बात करो”,कहकर रूपा दरवाजे की तरफ बढ़ी तो गुड्डू ने उसे रोककर कहा,”खिड़की से कूदकर जाओ ना”
रूपा ने सुना तो मुँह बनाया और खिड़की से बाहर चली गयी। गुड्डू ने जल्दी से खिड़की बंद की और बिंदिया के सामने चला आया तो बिंदिया ने रोते हुए कहा,”लवली”

“भाभी ! हमहू लवली नाही गुड्डू है ,लवली भैया कानपूर मा है”,गुड्डू ने कहा
बिंदिया ने जैसे ही सुना लवली कानपूर में है और उसके सामने खड़ा इंसान गुड्डू है तो उसके चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये और उसने कहा,”तो तुम हिया का हमाओ ब्याह देखने आये हो ? और उह्ह्ह लवली तुमको हिया भेजकर हुआ कानपूर मा का कर रहा है,,,,,,,,,,,,,अरे हम ओह्ह्ह से पियार करते है तुमसे नाही”
“अरे भाभी का कह रही हो ?”,गुड्डू ने कहा

बिंदिया गुस्से से गुड्डू की तरफ बढ़ी और कहा,”खबरदार जो हमको भाभी कहे तो ,मर गयी तुम्हायी भाभी,,,,,,,,,,,ओह्ह्ह धोखेबाज , मतलबी लवली को शर्म नाही आयी ,, खुद आने के बी बजाय तुम्हे हिया भेज दिया,,,,,,,,,,,,,,चले जाओ हिया से”
“अरे भाभी हमायी बात तो सुनो”,गुड्डू ने बिंदिया को समझाने की कोशिश की लेकिन बिंदिया तो जैसे कुछ सुनने को तैयार ही नहीं थी। उसने खिड़की खोली और गुड्डू को बाहर धकेलते हुए कहा,”चले जाओ हिया से और जाकर कह दो अपने लवली भैया से कि मर गयी बिंदिया,,,,,,,,,!!!”

गुड्डू को खिड़की से बाहर धकेलकर बिंदिया ने खिड़की बंद कर ली। उसने बेचारे गुड्डू की बात तक नहीं सुनी। मायूस होकर गुड्डू ने साइड में देखा तो कुछ दूर खड़ी रूपा उसे देखकर मुस्कुराई और कहा,”लगता है कुछो जियादा ही नाराज है बिंदिया आपसे , एक काम कीजिये कल सुबह आईये हमहू बात करवाते है ना आप की ओह्ह से,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने हामी में गर्दन हिलायी और वहा से चला गया।  

सुबह गोलू बेसुध पड़ा था और बगल में सोया रवि भी बेखबर सो रहा था तभी उसके कानो में बकरियों के मिमियाने की आवाज पड़ी। रवि आँखे मसलते हुए उठा और जैसे ही उसकी नजर गाड़ी पर पड़ी उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह गयी। 10-12 बकरिया गाड़ी के अंदर बाहर ऊपर और इर्द गिर्द खड़ी थी। रवि ने जल्दी से गोलू को उठाया। गोलू उठा और जैसे ही उसने गाड़ी को देखा रवि से कहा,”रविया एक ठो बात बताओ , हम का बहुते सुन्दर दिखते है ?”

“नाही भैया”,रवि ने मासूमियत से कहा
“अबे तो फिर बैठ के हमे का देख रहे हो उह्ह्ह बकरियों को भगाओ”,गोलू ने चबूतरे से नीचे कूदकर कहा.

गोलू और रवि ने जैसे तैसे करके सबको भगाया लेकिन गाड़ी में लगी सीटें देखकर गोलू का सर चकराने लगा। बकरियों ने गाड़ी की आगे और पीछे वाली सीटों को फाड़कर उनके फोम को चबा डाला था। ये देखकर गोलू ने तो मारे दर्द के अपना सीना ही पकड़ लिया। रवि ने देखा तो गोलू के पास आया और कहा,”गोलू भैया सम्हालिए खुद को,,,,,,,,,,,,!!!”
“अबे रवि ! जे बकरियों ने का कर डाला ? गुड्डू भैया जे सब देखे है तो हमायी बत्ती बना देंगे,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने रोआँसा होकर कहा

“अरे गोलू भैया ! जे मा आपकी गलती थोड़ी है और वैसे भी जब गाडी मा शीशा , हेडलाईट और दरवजा लगाए हो तो नयी सीट भी लगवाय लेना,,,,,,,,,,और देखना गाड़ी की जे हालत देखकर तो गुड्डू भैया को भी आप पर तरस आ जाहि है”,रवि ने गोलू को तसल्ली देकर कहा
“सच्ची ?”,गोलू ने रवि से चिपककर आस भरे स्वर में पूछा
रवि ने गोलू का गाल पकड़ा और प्यार से कहा,”मुच्ची”

( क्या मिश्रा जी आदर्श फूफा के साथ जायेंगे चकिया या इनके साथ शामिल होंगे और लोग भी ? क्या बिंदिया सुनेगी गुड्डू की बात या समझ लेगी लवली को गलत ? गाडी की ये हालत देखकर गुड्डू को आएगा गोलू पर तरस या फिर से होगी गोलू की सुताई ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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1 comment

Nency Patel May 27, 2026 - 12:50 pm

Yaar yeh bindiya bhi pagal hai kya guddu ki bat hi nai sun rahi hai

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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