Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 7

by Story With Sanjana July 13, 2026
written by Story With Sanjana July 13, 2026 0 comments
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Manmarjiyan Season 5 – 7

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

रूपा नवरत्न की बाँहो में थी और नवरत्न प्यार भरी नजरो से रूपा को देख रहा था। नवरत्न को देखकर रूपा का दिल भी धड़कने लगा। गोलू एम्बुलेंस देखने के लिए बाहर आया लेकिन जैसे ही उसकी नजर रूपा और नवरत्न पर पड़ी वह जोर से चिल्लाया,”फुफआआआआ ! जल्दी आओ तुम्हायी सादी खतरे मा है”
गोलू के चिल्लाने से नवरत्न की तंद्रा टूटी उसने बड़े प्यार से रूपा को साइड में खड़ा किया और गोलू की तरफ आया। तब तक गोलू की चीख़ सुनकर गुप्ता जी , मिश्रा जी , आदर्श फूफा , गुड्डू , मनोज , पिंकी , गुप्ताइन और शर्माईन सब भागकर बाहर आये।

नवरत्न गोलू के पास आया उसके चेहरे को अपने दोनों हाथो में थामा और मारे ख़ुशी के उसका ललाट चूमकर कहा,”वाह गोलू वाह ! का लड़की ढूंढकर लाये हो हमाये लिए,,,,,,,,,,,,,हमहू खामखा तुम पर सक किये तुमहू तो सच मा हमायी जिंदगी के हीरो निकले,,,,,,,,,,हमे जे लड़की बहुते पसंद है”
गोलू ने सुना तो उसका दिल धक् से रह गया , अब उसे याद आया कि काण्ड उसने सिर्फ चकिया में ही नहीं बल्कि चकिया जाने से पहले कानपूर में भी किया था वो भी नवरत्न के रूप में,,,,,,,,,,,,!!!

गोलू के अलावा किसी को समझ नहीं आया कि नवरतन किस बारे में बात कर रहा है। गुप्ता जी ने उसकी बाँह पकड़कर उसे साइड करके कहा,”अबे का आते ही इमरान हाशमी के जइसन चुम्मा चाटी सुरु कर दिए ? सबेरे सबेरे तुमहू हिया कर का रहे हो ?”
नवरतन मुस्कुराया और गोलू की तरफ देखकर कहा,”आये तो हम गोलू का खून करने थे लेकिन अब नाही करेंगे,,,,,,,का है कि इह हमायी अँधेरी जिंदगी मा उजाला करने वाली जो ले आये है”

गुप्ता जी को अभी भी नहीं समझ आया तो उन्होंने झल्लाकर कहा,”अबे कहना का चाहते हो ? सुबह सुबह भांग पिए हो के चरस खाये हो ,, कबसे अपनी ही राम कहानी बाके जा रहे हो”
“राम कहानी नहीं चचा प्रेम कहानी कहो प्रेम कहानी”,नवरतन ने रूपा की तरफ देखकर प्यार से कहा
“हम कब से तुम्हरे चचा हो गए बे ? कल तक तो तुम्हरे लिए इह मिश्रा जी थे , हम गुप्ता जी थे आज डायरेक्ट चचा,,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने कहा

मिश्रा जी को मामला थोड़ा गंभीर लगा इसलिए उन्होंने गुप्ता जी को साइड किया और नवरत्न से कहा,”नवरत्न ! साफ साफ कहो तुम हिया का कर रहे हो ?”
“हम ! अरे हम तो गोलू से अपनी दुल्हिन लेने आये है”,नवरत्न ने कहा
गुप्ता जी ने गोलू की बाँह पकड़कर उसे अपनी तरफ किया और कहा,”का बे गोलुआ ! टेंट लगाने के साथ साथ अब जे दलाली भी सुरु कर दिए तुमहू ?”
गोलू को काटो तो खून नहीं , उसने तो अपने होंठो को जैसे सिल ही लिया

“कौनसी दुल्हन और कहा है ?”,मिश्रा जी ने कहा
“इह है तो”,कहते हुए नवरत्न रूपा की तरफ आया और फिर अपनी बाँह रूपा के कंधो पर रखकर कहा,”हमे लड़की बहुते पसंद है मिश्रा जी”
“अबे हाथ नीचे रख,,,,,,,,,,,,,!!!”,नवरत्न को रूपा के बगल में देखकर सब शांत और अवाक् खड़े थे तभी मंगल फूफा अपनी पूरी जान लगाकर चिल्लाये।

सबकी गर्दन मंगल फूफा की तरफ घूम गयी ! गुस्से से लाल , पीले , नीले , गुलाबी मंगल फूफा सीढ़ियों से उतरकर नवरतन और रूपा के साथ आये और फिर चिल्लाकर कहा,”हाथ नीचे रख”
नवरत्न ने रूपा के कंधो से अपनी बाँह हटाई तो मंगल फूफा ने रूपा का हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ करके कहा,”जे तुम्हायी दुल्हिन नाही हमायी रूपा है और खबरदार जो हमायी पिरोपर्टी की तरफ आँख उठाकर भी देखा तुम्हायी कैंची लेकर ऐसी जगह घुसाएँगे,,,,,,,,,जिंदगीभर बैठने को तरस जाओगे”

मंगल फूफा की धमकी सुनकर नवरत्न भी भड़क गया और रूपा का हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ करके कहा,”अरे तो हमने भी कोनो चूडिया नाही पहनी है जो तुमसे डर जायेंगे,,,,,,,,,,,,,हमको रूपा पसंद है हम इसी से सादी करेंगे,,,,,,,,,,चालीस साल मा पहली बार कोनो लड़की हमको पसंद आय रही और तुमहू चाहते हो तुम्हाये लिए छोड़ दे,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा ने सुना तो उन्होंने अपनी मुट्ठी भींच ली और कहा,”तुमहू चालीस साल तक रंडवे रहे तो का ओह्ह्ह हमायी गलती है। रूपा हमायी है चकिया से इसे अपने साथ हम लेकर आये थे समझे”

“तुम लेकर आओ चाहे गोलुआ लेकर आये , सादी की बात तो हमाये साथ हुई थी ना,,,,,,,,,,,,,,,पूछो अपने गोलू से का उसने हमे लड़की दिलाने का वादा नाही किया , का उह्ह्ह सादी करवाने के लिए हम से पैसा नाही लिया , पूछो ओह्ह्ह से”,नवरतन ने गुस्से से कहा
मंगल फूफा ने सुना तो गुस्से से गोलू को देखा , उनका अपना ही गोलू गद्दार निकलेगा मंगल फूफा ने सोचा नहीं था वे गोलू की तरफ बढ़ गये।

गोलू के पास खड़े गुडडू ने जब नवरत्न की बात सुनी तो गोलू को अपनी तरफ करके कहा,”साले गोलू ! टेंट के काम के अलावा तुमहू साइड बिजनेस सुरु कर दिए और हमे बताया तक नाही,,,,,,,,,बस का गोलू का जे ही थी तुम्हायी दोस्ती ?”
एक तो गोलू फंस चुका था ऊपर से गुड्डू उस से गलत टाइम पर गलत सवाल कर रहा था उसका दिल किया सबसे पहले गुड्डू का ही काम तमाम कर दे लेकिन वह बेचारा कुछ कह पाता इस से पहले गुप्ता जी ने उसे अपनी तरफ किया और कहा,”का बे गोलू ! जे नवरत्न का कह रहा है ?”

“बहरे है आप ? सुने नाही का कहे उह्ह्ह”,गोलू ने चिढ़कर कहा
गोलू बदतमीजी करे और मिश्रा जी चुप रहे ऐसा भला कैसे हो सकता था , उन्होंने गोलू की गुद्दी पकड़ी और उसे  झंझोड़कर कहा,”का बेटा ! बाप से बात करने की तमीज नाही है तोह का ? घुसा मार के नाक फोड़ देंगे समझे,,,,,,,,,,,,,,,कायदे में रहो थोड़ा”
गुप्ताइन ने सब सुना और गोलु के पास आकर बोली,”ए गोलू ! तुमहू नवरत्न से शादी करवाने का पैसा लिए रहय का

“गोलू जी वो जो कह रहे है वो सच है क्या ?”,पिंकी ने भी घबराहतभरे स्वर में कहा
तभी मंगल फूफा गोलू के सामने आये और ताली मारकर बोले,”वाह गोलू वाह ! हमहू तुमको सेब काटने को छुरा दिए और तुमहू ओह्ह्ही छुरा हमायी पीठ मा भोंक दिए ,, जिसको बनाना चाहते थे हमहू तुम्हायी भुआ उसी की जिंदगी से तुमहू खेल बैठे जुआ ,, हमको लगा तुमहू हमाये सच्चे दोस्त हो पर गोलू तुमहू तो एक नंबर के अहसानफरामोश हो,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

गुप्ता जी मंगल के बगल में ही खड़े थे उन्होंने मंगल का डायलॉग सुनकर उसे गोलू की तरफ धकियाकर कहा,”डायलॉग का मार रहे हो रख के दयो एक कंटाप ससुरे को,,,,,,,,,,!!!!”
मंगल फूफा ने सुना पलटकर गुप्ता जी को देखा और मायूसी भरे स्वर में कहा,”हमाओ हाथ हुआ तक नाही पहुंचे है”
“तो जहा तक पहुंचे है वहा मार दयो”,गुप्ता जी ने कहा
गोलू ने सुना तो चिढ़कर गुप्ता जी से कहा,”ए पिताजी ! ए आप हमाये बाप है कि साँप हैं ? हमाये ही पिछवाड़े पर डसने की बात कर रहे है”

“अरे हमहू तो पहिले ही कहे थे जे गोलू ससुरा साँस लिए बिना रह सकता है लेकिन कान किये बिना नाही , कानपूर पहुचंते ही कर दिया ना नवा कांड”,आदर्श फूफा ने माचिस की तीली से अपना दाँत खुजाते हुए कहा
गोलू को कोई अपनी बात रखने का मौका ही नहीं दे रहा था इसलिए वह और चिढ गया और आदर्श फूफा से कहा,”का नवा कांड किये हम , फूफा हो जे का मतलब इह नाही हर घर मा आग लगाओगे,,,,,,,,,,,,,!!!!”

बिगड़ती स्तिथि देखकर मिश्रा जी ने सबको शांत रहने को कहा और खुद गोलू के सामने आकर बोले,”गोलू ! हमे सिर्फ इतना बताओ तुमहू नवरत्न से ओह्ह्ह की सादी करवाने का वादा किया था ?”
गोलू ने नवरतन को देखा और मिश्रा जी के सामने एकदम से सफ़ेद झूठ बोल पड़ा,”नहीं हमहू कोई वादा नहीं किये और हम काहे करेंगे ऐसो वादा , जे कि सादी की उम्र तो पहले ही दो बार निकल चुकी है,,,,,,,,,,,,!!”

गोलू की बात सुनकर नवरत्न का हाथ अपने सीने पर चला गया और वह मुँह फाड़कर गोलु को देखने लगा।
गोलू जब झूठ कहता था तो मिश्रा जी की आँखों में नही देखता था , आज भी यही हुआ तो मिश्रा जी समझ गए कि दाल में जरूर कुछ काला है उन्होंने गोलू से कहा,”हाँ तो फिर जे बात हमायी आँखों मा देखकर कहो ना इधर उधर काहे देख रहे हो ?”
गोलू कुछ कहता इस से पहले सबके कानो में शर्मा जी की आवाज पड़ी,”अरे जे का कहेगा मिश्रा जी , सच का है हम  बताते है”

शर्मा जी को वहा देखकर शर्माईन ने खुश होकर उनके पास आकर कहा,”अरे आप ज़िंदा है”
“तो तुमहु का सोची मर गए है,,,,,,,,,!!”,शर्मा जी ने कहा
शर्मा जी को होश में आया देखकर मिश्रा जी की जान में जान आयी और गुप्ता जी बड़बड़ाये,”तुमहू इत्ती जल्दी कहा मरे हो शर्मा , तुम्हरे सामने तो एक दिन हम सब ही चल बसे है”
“पापा ! पापा ! आप ठीक तो है ना , आप गिर कैसे गए और आपकी आँखों को क्या हुआ ?”,पिंकी ने शर्मा जी की सूजी हुई आँखों को देखकर पूछा

“जे सब तुम्हाये पति परमेश्वर की वजह से हुआ है”,शर्मा जी ने गोलू को घूरकर कहा क्योकि उनकी आँखे अब थोड़ी थोड़ी खुल जो गयी थी।
“हम का किये ? हम कहे थे आपसे मिश्रा जी की पूछ पकड़कर चकिया आने को ? साला जब देखो तब गोलू ने जे किया गोलू ने वो किया गोलू ना हुई गवा ChatGPT हुई गवा सब अपने अपने सवाल लेकर हम पर चढ़ जाओ”,गोलू ने उछलकर कहा

शर्मा जी ने गोलू को साइड किया और मिश्रा जी के सामने आकर कहा,”जे गोलू ने अपना काम निकालने के लिए उह्ह्ह नवरत्न को शादी का झांसा दिया और पैसे भी लिए,,,,,,,,उह्ह्ह दिन जब हम अपनी पेंट सिलवाने गए रहय तब नवरत्न ने खुद हमे बताया था। जे गोलू एक नंबर का तिकड़मबाज है मिश्रा जी यकीन नहीं तो नवरतन से पूछ लीजिये कि उन्होंने गोलु को पैसे दिए के नाही”

गोलू ने सुना तो उसकी सिट्टी पिट्टी गुम , एक तो नवरतन से शादी का झूठा वादा किया ऊपर से मिश्रा जी से झूठ कहा। मिश्रा जी की आँखों में गुस्सा तैरने लगा उन्होंने घर की औरतों की तरफ पलटकर कहा,”आप तीनो अंदर जाईये। रूपा बिटिया तुमहू भी अंदर जाओ हमहू ज़रा गोलू से बात कर ले”

रूपा , पिंकी , गुप्ताइन और शर्माईन अंदर चली गयी जाते जाते गुप्ताइन मिश्रा जी की तरफ आयी और कहा,”जे गोलुआ की बुद्धि ना भ्रष्ट हुई गयी है दुइ चार धर दीजिये मिश्रा जी तो अक्कल आये इनका,,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने सुना उसकी अपनी ही अम्मा उसको मारने की बाते कर रही है तो वह चिल्लाया,”ए अम्मा ! तुमहू सच मा हमायी अम्मा ही हो ना का है कि कोई भी माँ अपनी औलाद से इत्तो पियार तो ना करि है कि ओह्ह्ह का धरने की बात करे”

गुप्ताइन ने गोलू को देखकर मुँह बनाया और अंदर चली गयी। जाते जाते दरवाजा भी बंद कर लिया ताकि बाहर की आवाज अंदर ना जाए।

पिंकी और शर्माईन शांत थी तो वही रूपा के चेहरे पर परेशानी के भाव थे। गुप्ताइन भी उनके पास आयी और शर्माईन से कहा,”बहन जी ! चाय पीजिएगा ? अरे बैठिये बैठिये हमहू बना कर लाते है,,,,,,,,,,,,ए बिटिया तुम खड़ी काहे हो तुमहू भी बइठो”
रूपा ने देखा बाहर टेंशन का माहौल है और अंदर सब शांत है तो उसने गुप्ताइन से कहा,”चाची ! बाहिर सब गोलू जी पर गुस्सा कर रहे है और आप चाय पीने की बात कर रही है आपको टेंशन नाही हो रही ?”

“अरे काहे की टेंशन उह्ह्ह हमरे लौंडे का इह रोज का है , जब तक अपने बाप से दुइ चार कंटाप नहीं खा ले ओह्ह्ह का दिन शुरू ही नाही होता तुमहू चिल करो बिटिया,,,,,,,,,!!”,गुप्ताइन ने कहा और अपना पल्लू लहराते हुए किचन की तरफ चली गयी। गुप्ताइन की बात सुनकर रूपा हैरान थी , उसने पिंकी और शर्माईन की तरफ देखा तो और ज्यादा हैरान हुई क्योकि वे दोनों भी बाहर की परेशानी भूलकर हँसते मुस्कुराते बात कर रही थी। परेशान सी रूपा सोफे पर आ बैठी।

बाहर मिश्रा जी , गुप्ता जी , शर्मा जी , आदर्श फूफा , मंगल फूफा , मनोज , गुड्डू और नवरतन एक तरफ खड़े थे और रही सही कसर यादव जी ने आकर पूरी कर दी। यादव जी को वहा देखकर गुप्ता जी ने कहा,”तुमहू हिया का कर रहे हो बे ?””जे फोन देने आये थे देखा आप सब गोलू को घेर के खड़े है तो रुक गए”,यादव जी ने हाथ में पकड़ा फोन दिखाकर कहा
“जे हमाओ है”,नवरत्न ने यादव जी के हाथ से फोन लपककर कहा
गोलू ने देखा घरवाले तो घरवाले अब यादव जी भी तमाशा देखने चले आये है तो उसने बिगड़कर कहा,”हाँ हाँ तुमहू भी आ जाओ नंगे नाच रहे है ना हमहू हिया जो चले आये देखने”

गोलू की बात सुनकर मिश्रा जी ने उसे घुरा तो गोलू चुप हो गया लेकिन यादव को तो पता था आगे क्या होने वाला है इसलिए वह तो इस तमाशे को छोड़कर नहीं जाने वाला था। वही वही सीढ़ी पर आ बैठा और तमाशा देखने लगा।

मिश्रा जी गोलू के पास आये उसके दोनों कानों को हाथो में पकड़ा और उसे झूला झुलाकर कहा,”कित्ती बार कहे है तुमसे कि दुसरो के फट्टे मा टाँग ना अड़ाओ लेकिन तुमको समझ नाही ना आता है। का है कि तुम्हाये भेजे मा भरा है भूसा और एक बार उह्ह्ह भूसा मा चिंगारी लगी सो लगी तुमहू पूरा शहर जला देते हो,,,,,,,,,,,,,का जरूरत थी तुमको इह नवा कांड करने की ? नवरतन के ब्याह की चिंता तुमको काहे थी तुमहू अम्मा लगे हो ओह्ह्ह के ? अब चुप काहे हो जवाब काहे नाही देते ?”

गोलू के कान तो जैसे सुन्न ही पड़ गए और आवाज गले में दबकर रह गयी। मिश्रा जी की बातें सुनकर वह तो मारे दर्द के बस मुँह ही बनाता रहा तो मिश्रा जी ने उसे गुप्ता जी की तरफ फेंककर कहा,”ए गुप्ता ! तुम्ही सम्हालो अपने जे सपूत को,,,,,,,,!!!”
गोलू गुप्ता जी के सीने से आकर लगा तो गुप्ता जी ने सीने से लगे गोलू का गाल थपथपाकर कहा,”अलेलेलेलेले मेरा गोलू,,,,,,,,,,,,,गोबरप्रसाद”

कहकर गुप्ता जी ने बाँये हाथ से गोलू की शेरवानी की कोलर पकड़ी और दाँये से तड़ातड़ चाँटे उसके गालों पर बरसा दिए। गोलू को चाँटे पड़ते देखकर गुड्डू का भी मुँह बन रहा था लेकिन इस वक्त कुछ भी करने की स्तिथि में नहीं था। गुड्डू को सिसकिया भरते देखकर मिश्रा जी ने कहा,”का बेटा ! दोस्त को पीटते देखकर तकलीफ होय रही है कहो तो तुमको भी डेमो दे दे”
गुड्डू ने सुना तो घबराकर पीछे हटा और मुँह घुमा लिया क्योकि गोलू को मार खाते वह तो नहीं देख सकता था।

गुप्ता जी से चाँटे गोलू के गाल लाल हो गए और उसने कहा,”अरे लेकिन हमने किया का है ?”
गुप्ता जी गोलू से कुछ कहते इस से पहले मंगल फूफा ने गुप्ता को साइड करके कहा,”इह का जवाब हम तुम्हे देंगे”
लेकिन मंगल फूफा कद में छोटे गोलू के मुँह तक पहुंचे कैसे उन्होंने अपने बगल में खड़े आदर्श फूफा से कहा,”ए सुनो ! जरा हमको थोड़ा ऊपर तो उठाना”

“गोलू को मारोगे ?”,आदर्श फूफा ने कहा क्योकि उन्हें गोलू को पीटते देखकर बड़ा मजा आ रहा था
“हाँ मारेंगे”,मंगल फूफा ने जोश में आकर कहा
“पक्का मारोगे ना ?”,आदर्श फूफा को जैसे विश्वास नहीं हुआ
“हमरे सर पर बचे चार बालों की कसम पक्का मारेंगे,,,,,,,उठाओ हमे”,मंगल फूफा ने गुस्से से अपने टकले पर हाथ घुमाकर कहा

“अबे ए मंगल फूफा ! पगला गए हो का हमे मारने की बात कर रहे हो , जे सर पर जो चार बाल बचे है ना उह्ह्ह भी उखाड़ देंगे”,गोलू चिल्लाया
आदर्श फूफा ने मंगल फूफा को उठाया , मंगल फूफा ने गोलू की शेरवानी की कॉलर अपने दोनों हाथो में पकड़ी और कहा,”का रे गोलुआ ! कौनसे जन्म का बदला लिए रहय तुमहू हमसे रूपा को छीन के उह्ह दानव की झोली मा डाल दिए ! हमरी प्रेम कहानी सुरु होने से पहिले ही ओह्ह्ह के विलीन बन गए,,,,,,,,,,,!!!!”

“अरे यार मंगल फूफा तुमहू जैसा देख रहे हो वैसा नहीं है”,गोलू ने झुंझलाकर कहा
“थोड़ी देर पहिले हमहू अपनी फूल सी रूपा को ओह्ह्ह की बाँहो मा देखत रहे और तुमहू कह रहे हो वैसा कुछो नाही है , काहे गोलू काहे ?”,मंगल फूफा ने कहा
“बाँहो में थी और मुस्कुरा भी रही थी,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा को गोद में उठाये आदर्श फूफा ने कहा

“हाँ हाँ लगा दयो आग , हिया हमसे पहले लगी नाही बुझ पा रही तुमहू और लगाय दयो,,,,,,,,एक बार हमको हिया से निकलन दयो सबसे पहिले तुम्हायी कबर खोदेंगे फूफा,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने गुस्से से आदर्श फूफा से कहा
“देख लीजिये मिश्रा जी आपके सामने सामने धमकी दे रहा है हमे”,आदर्श फूफा ने मिश्रा जी से कहा
“तो का चुम्मा दे तुम्हे,,,,,,,!!!”,गोलू ने भड़ककर कहा
“ए गोलू तुमको हमको धोखा काहे दिए जे बताओ ?”,मंगल फूफा ने कहा

“अरे हमने तुमको कोई धोखा नाहीं दिया , रूपा तुम्हायी है,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
गोलू की बात सुनकर नवरतन गुस्से से उसकी तरफ आया उसने आदर्श फूफा और मंगल फूफा को साइड किया और गोलू की कॉलर पकड़कर बोला,”रूपा इसकी है तो फिर हमसे सादी का वादा करके पैसा काहे लिया बे ?”
नवरतन के धक्के से आदर्श फूफा और मंगल फूफा यादव जी पर जा गिरे  , अब यादव जी का हट्टे कट्टे आदर्श फूफा पर तो बस चला नहीं इसलिए उन्होंने मंगल फूफा की धुलाई कर दी और थोड़ी ज्यादा ही क्योकि अचानक से उन्हें फुलवारी की याद जो आ गयी थी।

( रंगबाज मंगल और सीधे साधे नवरतन में से किसको मिलेगी रूपा ? गोलू को मार पड़ते देखकर भी कैसे शांत है पिंकी और गुप्ताइन ? क्या गोलू बच पाएंगे इन सबसे या पड़ने वाली है उसे अच्छी खासी मार ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ Season 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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