Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 12

by Story With Sanjana July 22, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 12

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी का घर , कानपूर
रूपा जैसे ही अंदर आयी किचन की तरफ जाती मिश्राइन की उस पर नजर पड़ी और उन्होंने रूपा की तरफ आते हुए कहा,”अंदर कहा चली आय रही हो ? कौन हो तुम और हमाये घर मा का कर रही हो ?”
“हमारा नाम रूपा है , हम चकिया से आये है। हमे बिंदिया से मिलना है”,रूपा ने कहा
“बिंदिया से मिलना है ? पर हिया तो कोई बिंदिया नाही है , बिटिया तुमहे कोनो गलतफमी हुई है तुमहू गलत घर मा आयी हो”,मिश्राइन ने कहा

“हम सही घर मा आये है चाची , जे मिश्रा जी का ही घर है ना जहा लवली रहता है , लवली बिंदिया को यही लेकर आया है”,रूपा ने कहा
लवली का नाम सुनकर मिश्राइन चौंकी और कहा,”लवली बिंदिया को हिया लेकर काहे आयेगा ?”
मिश्राइन के सवालों से तंग आकर रूपा ने कहा,”अरे चाची ! कल हुआ चकिया मा बिंदिया की सादी लल्लन के भतीजे से रही और बिंदिया लवली से प्रेम करती है इहलीये कल लवली ओह्ह्ह का सादी से भगा के कानपूर ले आये,,,,,,,,,,,अब समझी हमायी बात ?”

“का लवली सादी के मंडप से बिंदिया को भगा लाया”,मिश्राइन ने अपने सीने पर हाथ रखकर कहा और बेहोश होकर धड़ाम से नीचे जा गिरी। गिरने की आवाज से मिश्रा जी , गुड्डू , आदर्श फूफा , राजकुमारी भुआ , शगुन और वेदी भागकर बाहर आये। मिश्राइन को नीचे गिरे देखकर सब उनकी तरफ भागे और गुड्डू ने उन्हें सम्हालकर कहा,”अम्मा , अम्मा का हुआ तुमको ? अम्मा अम्मा आँखे खोलो,,,,,,,,,,शगुन , पानी लेकर आओ”
शगुन डायनिंग की तरफ आयी और गिलास में पानी भरकर गुड्डू की तरफ चली आयी।

मिश्रा जी भी घुटनो के बल आ बैठे और मिश्राइन का हाथ अपने दोनों हाथो में लेकर मसलते हुए कहा,”मिश्राइन , मिश्राइन उठो का हुआ तुम्हे ?”
आदर्श फूफा को मिश्राइन की परवाह नहीं थी वे तो बस रूपा को घूर रहे थे ये देख रूपा ने उन्हें झिड़ककर कहा,”घूर का रहे हो बे ?”
राजकुमारी भुआ ने देखा तो आदर्श फूफा को साइड करके कहा,”अरे आप का हिया खड़े है जाकर डाक्टर को फोन कीजिये”

आदर्श फूफा चले गए वेदी मिश्राइन को बेहोश देखकर रोने लगी तो शगुन ने उसे सम्हाला और कहा,”शांत हो जाओ वेदी माजी को कुछ नहीं हुआ है”
मिश्रा जी ने वेदी को रोते देखा और कहा,”वेदिया ! ए बिटिया रोओ नाही ठीक है तुम्हायी अम्मा”
गुड्डू ने पानी के छींटे मिश्राइन को मारे तो उन्हें होश आ गया। मिश्रा जी और गुड्डू ने उन्हें उठाया और सम्हालकर सोफे की तरफ ले आये। शगुन और वेदी भी उस तरफ चली गयी। राजकुमारी भुआ रूपा के पास आयी उसे देखते हुए उसके इर्द गिर्द एक चक्कर काटा और कहा,”तुम कौन हो ? पहिले तो कबो नाही देखे तुम्हे”

उलटे जवाब देने के मामले में रूपा भी कम नहीं थी इसलिए कहा,”अभी उह्ह्ह जो 6 फुट का बांस जैसा आदमी हिया खड़ा था ना , जाकर ओह्ह से पूछ ल्यो उह्ह्ह हमे बहुते अच्छे से जानते है , उह्ह्ह आपको डिटेल में सब बता देंगे,,,,,,,,!!!”

राजकुमारी भुआ ने सुना तो उनका मुँह खुला का खुला रह गया और रूपा वहा से अंदर चली गयी। राजकुमारी भुआ कुछ सुने और उसका सही मतलब निकाल ले ऐसा हो ही नहीं सकता उनको लगा आदर्श फूफा का रूपा के साथ चक्कर चल रहा है और अब रूपा उनकी सौतन बन के इस घर में आ गयी है तो उन्होंने वही से अपनी छाती पीटना शुरू कर दिया और अंदर आते हुए कहा,”हाय हाय हाय ! हमहू तो बर्बाद हो गए ! हमाये जीते जी घर मा हमायी सौतन ले आये कोमलिया के पिताजी , अरे का कमी रह गयी थी हमाये पियार मा जो इह कदम उठाये,,,,,,,,,,,हम तो लुट गए रे भैया , बर्बाद हुई गए अम्मा”

अच्छा भुआ छाती पीटकर रो रही है वो तो ठीक है लेकिन रोते रोते साथ में घूमने भी लगी जैसे उनमे कोई माता आ गयी हो। सब हैरानी से भुआ को देखने लगे क्योकि किसी को कुछ समझ ही नहीं आया उन्हें हुआ क्या है ?
आदर्श फूफा ने भुआ के मुँह से सौतन का नाम सुना तो भुआ के सामने आये और कहा,”ए राजकुमारी ! का अंट शंट बक रही हो ? जे उम्र मा हमहू काहे तुम्हये लिए सौतन लाएंगे ?”

“अरे लाएंगे का कोमलिया के पिताजी , आप तो साथ मा लेकर आये है,,,,,,,,,अरे हमसे कोनो गलती हुई होती तो हमसे कहा होता , हमे इत्ता बड़ा सप्राइज दे दिए,,,,,,,,,,,,,,अम्मा हमको अपने पास बुलाय ल्यो अम्मा , हमहू जे सदमा बर्दास्त नाही कर पाही है”,राजकुमारी भुआ ने रोते हुए कहा

“बस करो राजकुमारी ! इह सब का है ? काहे इत्ता हल्ला मचाय रही हो ? देख नाही रही गुड्डू की अम्मा की तबियत खराब है”,इस बार मिश्रा जी ने डाँटकर कहा तो भुआ और जोर से रोने लगी और कहा,”आपको इह हल्ला दिख रहा है भाईसाहब ! हिया कोमलिया के पिताजी खुले आम रंगबाजी कर रहे है उह्ह नाही दिख रही है,,,,,,,,,,,,,हमहू इंसाफ मांगने कहा जाए रे शंकर,,,,,,,,,!!!!”

“आदर्श बाबू ! राजकुमारी का कह रही है ? कौनसी रंगबाजी किये हो आप ?”,मिश्रा जी ने कड़ककर कहा
“ए फूफा ! ए यार जे उम्र मा इह उम्मीद नाही किये थे आपसे,,,,,,,,,,भुआ के होते जे उम्र मा बाहिर चक्कर चलाये , अरे आने वाली पीढ़ी को का शिक्षा देंगे आप , छह,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा
वेदी ने कुछ कहा तो नहीं लेकिन हीन भावना से आदर्श फूफा को देखा और मुँह फेर लिया

“का आदर्श बाबू , इह सब का है ? इहलीये जिज्जी को हिया छोड़कर बाहिर गए थे ताकि रंगबाजी कर सके”,मिश्राइन ने भी धीमे स्वर में कहा
बेचारे आदर्श फूफा जिन्होंने कुछ किया ही नहीं खामखा सबके तानो का शिकार हो गए और चिल्लाकर कहा,”बअअअअअअअअस बस करो सब , अरे का सब मिलके हमको रंगबाज , मवाली , ठरकी बना देंगे,,,,,,,,,!!!”

आदर्श फूफा की बात सुनकर सब चुप हो गए लेकिन भुआ का रोना जारी था ये देखकर आदर्श फूफा ने टेबल पर रखा सेब उठाया और भुआ के मुँह में ठुसकर कहा,”अरे चुप हो जाओ देवी , हमको अपनी बात रखने का मौका तो दयो”

भुआ ने सेब का एक टुकड़ा खाया और रोआँसा होकर कहा,”जरा भी मीठा नाही है,,,,,,,,,!!!”
इन सब में अगर कोई सबसे समझदार थी तो वो थी शगुन जो शांत खड़ी थी और हालातों को समझने की कोशिश कर रही थी। आदर्श फूफा ने सबको देखा और फिर गुस्से से कहा,”हमाओ किसी के साथ कोई चक्कर नाही चल रहो ! ए मिश्रा जी राजकुमारी के अलावा कबो देखो हो हमे किसी और औरत से बात करते ? नहीं ना फिर कैसे मान लिए हम रंगबाज है ? और गुडडुआ तुम तुम का हमे रंगबाज कह रहे हो बे तुम्हाये कारनामे बताये अभी सबको ,

कौन गली मा कौनसा पर्चा छपा है हमसे नाही छुपा है बेटा , और वेदिया तुम , तुम का हमे देख के मुँह बनाय रही हो ? अरे हमायी बिटिया की उम्र की हो तुम कबो गलत नजर से नाही देखे है तुम्हे हमेशा बिटिया ही समझा है और सरिता जी आप , आपसे थोड़ा समझदारी की उम्मीद किये थे हम लेकिन आप भी इन सबके साथ मिलकर हमे रंगबाज बनाय दी , अरे पूछिए अपने पतिदेव से कल सुबह से लेकर आज सुबह तक इनके साथ ही थे। अब का इनसे भी चक्कर है हमाओ”

कहकर आदर्श रुके तो मिश्रा जी मिश्राइन गुड्डू और वेदी इधर उधर देखने लगे और फिर आदर्श फूफा के आगे का इंतजार करने लगे। आदर्श फूफा पलटे राजकुमारी की तरफ और कहा,”और तुमहू राजकुमारी ! ना बात बताई ना वजह बताई और लगी गला फाड़कर रोने , छाती पीटने , अरे पहिले बताओ तो सही बात का है ? ससुरा कुछो सुनो और लग जाओ हाय तौबा करने,,,,,,,,,,,,कौन गोबरबुद्धि तुमको जे बोला कि हमाओ चक्कर चल रहो है,,,,,,,,,,,,साला तुम्हरे जे भैया के चक्कर मा कल से इत्ता पेले गए है कि हमे चक्कर आने लगे है , हम का किसी से चक्कर चलाएंगे ?”

“जे हमसे कहे रही कि आप जे का बहुते अच्छे से जानते है”,राजकुमारी भुआ ने रूपा की तरफ इशारा करके कहा
रूपा को वहा देखकर मिश्रा जी और गुड्डू थोड़ा हैरान हुए लेकिन रूपा यहाँ क्यों आयी है ये जाने बिना वे क्या ही बोलते , मिश्राइन ने रूपा को देखा तो उन्हें लवली वाली बात याद आ गयी

आदर्श फूफा ने रूपा की तरफ देखा और कहा,”लगाय दी आग हिया भी,,,,,,,,,,,,अरे जे रूपा है बिंदिया की सहेली चकिया से ओह्ह्ह के साथ हिया आयी है , अब जे का मिश्रा जी भी जानते है , गुड्डू भी जानता है , गुप्ता , शर्मा , यादव , गोलू और उह्ह्ह ससुरा मंगलू भी जानता है तो का जे सब का इह के साथ चक्कर है ?”
राजकुमारी भुआ ने सुना तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और वे मिश्राइन के बगल में आ बैठी।

मिश्राइन ने रूपा को देखा और उठकर मिश्रा जी से कहा,”ए गुड्डू के पिताजी ! इह कह रही है कि लवली चकिया से बिंदिया को भगाकर ले आया है , जे बात सच है का ?”
मिश्रा जी ने सुना तो चुप कहे तो कहे क्या क्योकि सिर्फ लवली ही नहीं बल्कि इस काण्ड में इस बार पूरी मिश्रा मण्डली शामिल थी।

मिश्रा जी को खामोश देखकर मिश्राइन गुड्डू की तरफ पलटी और कहा,”ए गुड्डू ! तुम बताओ का लवली सच मा बिंदिया को भगाकर लाया है ?”
गुड्डू ने पहले मिश्रा जी की तरफ देखा और फिर कहा,”भगाकर नाही लाया अम्मा,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने अभी आधी बात ही कही कि मिश्राइन ने राहत की साँस लेकर हाथ सीने पर रख लिया लेकिन अगले ही पल गुड्डू ने अपनी बात पूरी की,”पिकअप मा बैठाकर लाया है”

मिश्राइन ने सुना तो चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये और गुड्डू की तरफ देखकर कहा,”हमरे साथ बकैती की तो मुँह खोंच देंगे तुम्हरा समझे”
“अरे इह सब का बताये है सरिता जी हम बताते है,,,,,,,,,,,,,,!!”,कहकर आदर्श फूफा ने बिंदिया की चिट्टी आने से लेकर चकिया में जो कुछ हुआ वो सब मिश्राइन के सामने उगल दिया। अब मिश्राइन से डरते तो मिश्रा जी भी थे इसलिए चुपचाप खड़े रहे। मिश्राइन ने सुना तो हैरानी से भरकर अपना हाथ मुँह पर रखा और आदर्श फूफा से कहा,”जे सब मा गुड्डू के पिताजी भी सामिल थे ?”

“और नहीं तो का जे सारा पिलान इनका ही तो था”,आदर्श फूफा ने मुँह बनाकर कहा
सामने खड़े मिश्रा जी मन ही मन सोच रहे थे कि अगर आज एक खून माफ़ होता तो वो सबसे पहले आदर्श फूफा का ही करते। बात को मिश्रा जी शांति से सम्हालना चाहते थे आदर्श फूफा ने उसे रायते की तरह फैला दिया।

गोलू के समझाने के बाद लवली बिंदिया को लेकर घर आया था लेकिन सबको हॉल में जमा देखकर डायनिंग के पास ही रुक गया और बातें सुनने लगा जो बाते कम और बकैती जयादा थी। लवली ने बिंदिया की तरफ देखा और धीरे से कहा,”तुमहू पूछ रही थी ना हम जे सबके साथ काहे नाही रहना चाहते ? देख ल्यो वजह तुम्हाये सामने है”
बिंदिया ने कुछ नहीं कहा बस हताश होकर लवली को देखा और फिर सामने देखने लगी।

मिश्राइन ने जब सुना कि इसमें मिश्रा जी खुद शामिल है तो अपना सर पकड़कर सोफे पर आ बैठी। मिश्रा जी ने देखा तो आदर्श फूफा को घूरते हुए मिश्राइन के पास आये और कहा,”चिंता काहे करती हो मिश्राइन हम है ना हम सब ठीक कर देंगे”

मिश्राइन ने सर उठाकर मिश्रा जी को देखा और गुस्से से कहा,”चिंता नाही करे ? अरे आपका लड़का किसी की बिटिया को सादी के मंडप से भगाकर ले आया है और आप कह रहे है कि चिंता नाही करे , उह्ह भी उह मंगेश की लड़की को अरे उह्ह तो पहिले से आपकी जान का दुश्मन बना बैठा है ओह्ह्ह से और दुश्मनी काहे बढ़ाय लिए गुड्डू के पिताजी ?”

“पिताजी की इह मा कोनो गलती नाही है अम्मा”,लवली की आवाज सबके कानो में पड़ी। लवली बिंदिया का हाथ थामकर सबके बीच चला आया। मिश्राइन ने देखा तो उठकर लवली के पास आयी और कहा,”जे तूने का किया रे लवली ! ऐसो गलत कदम काहे उठाये बिटवा ? अरे हमरे पियार मा कोनो कमी रह गयी लल्ला जो तुम इत्तो बड़ो फैसलों ले रहे , तुम्हे बिंदिया से ब्याह करना था तो एक ठो बार हमे कहते हम बात करते जे के अम्मा बाउजी से , समझाते ओह्ह्ह का , मनाते पर तुम जे काहे कर लिए बिटवा ? साडी के मंडप से बिंदिया को काहे भगाये ?”

“लवली ने हमे नहीं भगाया है माजी ! हमहू खुद अपनी सादी छोड़कर आये है”,बिंदिया ने कहा तो मिश्राइन हैरान परेशान सी बिंदिया को देखने लगी
बिंदिया ने सबको एक नजर देखा और फिर कहने लगी,”हमने जब होश सम्हाला तबही से लवली को अपना पति मान लिया इसके अलावा हमहू कबो किसी को नजर भर देखे तक नाही,,,,,,,,,,,,हमाये बापू भी जे बात से खुश थे और कहा कि जब सादी की उम्र हो जाहि है तो लवली से हमाओ ब्याह करवाय देंगे पर बाद मा जब लवली को पता चला कि बृजेश चचा को बर्बाद करने के पीछे हमाये बापू का हाथ है तो जे दोनों मा दुश्मनी हो गयी।

लवली से बदला लेने के लिए बापू हमाओ ब्याह लल्लन के रिश्तेदार से कर दिये रहय और जबरदस्ती हमायी सादी ओह्ह्ह के साथ करवाने लगे इहलिये हमहू भाग आये,,,,,,,,,,,एक लड़की को अपना पति चुनने का हक़ होता है ना माजी”
बिंदिया की बात सुनकर मिश्राइन को स्तिथि समझ आयी उन्होंने बिंदिया का चेहरा अपने हाथो में लिया और कहा,”अरे बिटिया ! हम तुम्हायी हालत नाही जानते थे इहलीये जे सब कह दिए हमका माफ़ कर देना”

“आप माफ़ी मत मांगिये माजी”,बिंदिया ने कहा तो मिश्राइन ने उसे अपने सीने से लगाया और कहा,”चिंता नाही करो बिटिया तुम्हायी और लवली की सादी धूमधाम से करे है हम”
मिश्राइन की बात सुनकर मिश्रा जी ने राहत की साँस ली , शगुन और वेदी मुस्कुरा उठी , गुड्डू ने आकर लवली का कंधा दबाया तो लवली गुड्डू को देखकर मुस्कुरा उठा। आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ भी खुश हो गए और रूपा भी मुस्कुराते हुए बिंदिया के पास चली आयी तो बिंदिया ने मिश्राइन से कहा,”इह हमायी सहेली है रूपा”

“शगुन बिंदिया और जे कि सहेली को अंदर लेकर जाओ”,मिश्राइन ने शगुन से कहा तो शगुन और वेदी बिंदिया और रूपा को लेकर चली गयी। मिश्राइन ने गुड्डू को देखा और कहा,”तुम जे किसकी लूंगी पहिने हो ? जाओ जाकर नहाय ल्यो और थोड़े ढंग के कपडे पहिन ल्यो”
गुड्डू ने सुना और वहा से चला गया। मिश्राइन ने लवली को देखा और उसे भी जाकर नहाने को कहा। लवली भी चला गया। मिश्राइन पलटी राजकुमारी भुआ और आदर्श फूफा की तरफ और कहा,”और आदर्श बाबू आप ! आप भी जाकर नहाय ल्यो”

आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ भी वहा से अम्मा के कमरे की तरफ चले गए। बचे मिश्रा जी तो वे मिश्राइन के पास आये और कहा,”का बात है मिश्राइन ! एक ही बार मा सबको सीधा कर दिया”
मिश्राइन मिश्रा जी की तरफ पलटी और कहा,”अभी आपको सीधा करना बाकी है गुड्डू के पिताजी , जाईये जाकर नहा लीजिये फिर आपसे बात करती हूँ”

कहकर मिश्राइन वहा से चली गयी और मिश्रा जी बड़बड़ाये,”मतलब अब बत्ती बनाने वालो की भी बत्ती बनेगी,,,,,,,,,,,,इह तो अन्याय है मालिक”

( मिश्रा जी के घर में रहकर क्या रूपा करेगी आदर्श फूफा को परेशान ? क्या मिश्राइन लगाएंगी मिश्रा जी क्लॉस ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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