Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 13

by Story With Sanjana July 27, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 13

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गुप्ता जी का घर , कानपूर
रूपा को मिश्रा जी के घर छोड़कर गोलू अपने घर वापस आया। उसने स्कूटी साइड में लगायी और अंदर जाने लगा तो नजर सीढ़ियों पर बैठे मंगल फूफा पर पड़ी जो कि रेडियो पर गाना चलाकर देवदास बने पड़े थे। रेडियो पर जो गाना बज रहा था , अपनी बेसुरी आवाज में मंगल फूफा भी उसे साथ साथ गा रहे थे
“दोस्त दोस्त ना रहा , प्यार प्यार ना रहा , जिंदगी हमे तेरा , ऐतबार ना रहा , ऐतबार ना रहा”

गोलू मंगल फूफा के पास आया और रेडियो का बटन बंद करके कहा,”का रे फूफा ! काहे पंकज उदास बने हो ?”
गोलु को देखते ही मंगल फूफा का गुस्सा फुट पड़ा क्योकि गोलू ही तो था जो रूपा को मिश्रा जी के घर छोड़ने गया था। मंगल फूफा उठे और गोलू को हाथ दिखाकर गुस्से से कहा,”का रे गोलू ! साला तुमसे नीच आदमी अपनी पूरी जिन्दगी मा नाही देखे हम , डाल आये हमाये पियार को किसी और की झोली मा ?

तुमसे साला हमायी ख़ुशी बर्दास्त नाही हुई , एक लड़की से सच्चा प्रेम किये थे हम उह्ह्ह भी छीन लिए हमसे,,,,,,,,,,,अरे डायन भी 7 घर छोड़ देती है तुमहू साला अपने ही फूफा के जीवन मा आग लगाय दिए,,,,,,,,,तुम्हायी अम्मा के रिश्तेदार नाही होते ना तो अभी इत्ती गाली देते , ऐसी गाली देते साला तुमहू अपने पुरे जीवन में नाही सुने होंगे,,,,,,,,,,,!!!”

“गाली से याद आया फूफा ! पहली बात तो तुमहू रूपा से अपने पियार का इजहार किये नाही ? पिछले दो दिन से तुमहू ओह्ह्ह का साथ लेकर घूम रहे हो आई लव यू काहे नाही बोले ? आजकल की लड़किया इत्ता बैट नाही करती है फूफा,,,,,,,,,तुमहू साला जब तक कहोगे नाही उसे कैसे पता चलेगा कि जे साढ़े चार फुट की बॉडी मा जो पाव भर का दिल है उह्ह्ह रूपा के लिए धड़कता है। ऐसे तो बहुते शाहरुख खान बनते हो अब तक ओह्ह्ह से कहे काहे नाही कि ए ए ए रूपा , तुझपे मरता है ये मंगल फूफा हम्म्म्म ए”,गोलू ने मंगल फूफा को जो कहा सो कहा साथ में डायलॉग भी मार दिया !

“अरे कहा से कहते ? तुम साले सब दरिदर मिलकर हमे बोलने कहा दिए ? ऊपर से उह्ह्ह तुम्हाये बाप भेज दिए रूपा को उह्ह्ह मिश्रा जी के घर मा , अब उह्ह हिया होती तो हमहू ओह्ह्ह से अपने दिल की बात कहते ना,,,,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने चिढ़कर कहा
गोलू ने अपने गाल से हाथ लगाया और सोचते हुए कहा,”हम्म्म तो इह का मतलब जे फसाद की जड़ है गज्जू गुप्ता”
“इह नमूना कौन है ?”,मंगल फूफा ने पूछा

गोलू ने मंगल के सर पर एक चपत लगायी और कहा,”अबे हमाये बाप है जो तुम्हायी प्रेम कहानी मा कुंडली मारकर बैठे है चलो पहिले उन्ही से निपटते है”
गोलू मंगल फूफा को अपने साथ लेकर अंदर चला गया और जाते जाते रेडियो पर लात मार दी जो की नीचे गिरकर फिर बजने लगा

रूपा के चले जाने से मंगल फूफा पहले ही गुस्से में थे उस पर गोलू ने गुप्ता जी का नाम लेकर आग में घी डालने का काम कर दिया। गोलू मंगल फूफा के साथ अंदर आया।  गुप्ता जी अपना नाश्ता करने के बाद हॉल में सोफे पर बैठे अपना अखबार पढ़ रहे थे। गोलू उनके सामने आकर चिल्लाया,”पिताजी”
“सुन रहे है कानों मा सरसो का तेल नाही डालें है,,,चिल्लाय काहे रहे हो ?”,गुप्ता जी ने अख़बार में नजरे गड़ाए कहा

“आप इत्ते जालिम कैसे हो सकते है पिताजी ? मंगल फूफा की सेटिंग को मिश्रा जी के घर भेज दिए , जे बेचारे मासूम आदमी पर आपको दया नाही आयी , अरे जे का घर बसने से पहिले ही उजाड़ दिए आप”,गोलू ने गुस्से से कहा
गुप्ता जी ने सुना तो अख़बार समेटकर रखा और गोलू की तरफ देखकर कहा,”हम का जे का घर उजाड़ेंगे बे इहह्ह खुदही अपने घर मा भूचाल लाना चाहता है”
“ए गुप्ता जी ! जबान सम्हाल के हमायी रूपा को भूचाल कहा तो हम से बुरा कोई ना होगा”,मंगल फूफा ने गुस्से से कहा

“तुमसे बुरा कोनो है भी नाही ! कबो आईने मा अपनी सूरत देखी है,,,,,,,,अरे कहा तुम कहा उह्ह रूपा ,, दो मंगल मिला भी दे ना तब भी रूपा की गर्दन तक ही पहुंच पाए हो,,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने अपनी जगह से खड़े होकर कहा
मंगल फूफा ने सुना तो गुस्से से अपने दाँत भींच लिए और दोनों हाथो की मुट्ठिया भी लेकिन गुप्ता जी को कोई जवाब नहीं दे पाए।

“बस बस कल भी साँस लेना है”,गुप्ता जी ने एक तो मंगल को गुस्सा दिलाया ऊपर से उसका मजाक भी उड़ा दिया
“पिताजी,,,,,,,,,,अरे आप मंगल फूफा के जीजा है के दुश्मन ? जे का मामला बनाने के बजाय बिगाड़ रहे हो,,,,,,,,,,,अरे आपने भी अपनी जवानी मा किसी से पियार किया होगा”,गोलू ने भड़ककर कहा  
प्यार का नाम सुनकर गुप्ता जी के होंठो पर मुस्कान तैर गयी और उन्होंने कहा,”पियार तो हमे तुम्हायी अम्मा से ही हुआ था गोलुआ”

गुप्ता जी की बात सुनकर गोलू भी मुस्कुराया लेकिन अगले ही पल गुप्ता जी के चेहरे पर गुस्से के भाव झिलमिला उठे और उन्होंने गोलू को हाथ दिखाकर कहा,”लेकिन हमे मालूम होता कि उह्ह्ह प्रेम का नतीजा तुम निकलोगे तो साला जिंदगी भर कंवारे रह जाते लेकिन पियार नाही करते”
“पिताजी,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने मुँह फाड़कर हैरानी से कहा

गुप्ता जी ने गोलू को साइड किया और वहा से जाते हुए कहा,”उधर मरो और जियादा परवाह है ना अपने जे मंगल फूफा की तो तुमहू भी जे के साथ बीहड़ निकल जाओ,,,,,,,,,,,,!!”
गोलू आया था मंगल फूफा को इन्साफ दिलाने और यहाँ गुप्ता जी ने उसे भी बाहर का रास्ता दिखा दिया।

मंगल फूफा गोलू के पास आये और कहा,”क्यों मिल गयी तुम्हाये कलेजे को ठंडक ? हिया अपने बाप से निपटने आये थे ना तुमहू पर उह्ह्ह हमहि पर मूतकर चले गए,,,,,,,,,,,,,,,अब का करि हो ? रूपा तो हमाये हाथ से गयी ही अब लगता है तुम्हरे चक्कर मा साला जे घर से भी बाहिर निकाले जायेंगे हम”
गोलू ने सुना और बहुत ही गंभीर स्वर में कहा,”फूफा ! अगर हाई-कोर्ट ने हमायी बात नाही सुनी तो का हुआ , हमाये पास सुप्रीम कोर्ट है न हमहू वहा अपील करेंगे लेकिन तुमको तुम्हायी रूपा वापस दिलाकर रहेंगे”

“अब जे सुप्रीम कोर्ट का है ?”, मंगल फूफा ने झुंझलाकर कहा  
गोलू मंगल फूफा की तरफ पलटा और चिढ़कर कहा,”जिंदगी मा कबो स्कूल गए होते तो समझ आता न फूफा , अरे अगर सुप्रीम कोर्ट मतलब हाई कोर्ट से भी ऊपर वाला कोर्ट , अब मान लो हमाये पिताजी है हाई कोर्ट ओह्ह उह्ह्ह हमायी ना सुन रहे तो अब हमहू कहा अपील करेंगे ?”
“सुप्रीम कोर्ट मा”,मंगल फूफा ने कहा

“और सुप्रीम कोर्ट कौन है ?”,गोलू ने फिर पूछा
“मिश्रा जी,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने पूछा
“का बात है फूफा , हमाये साथ रह के बुद्धि काम करने लगी है तुम्हायी,,,,,,,!!!”,गोलू ने मंगल फूफा के कंधो पर अपनी बाँह रखकर उन्हें झंझोड़ते हुए कहा
“पर उह्ह मिश्रा जी का हमायी बात सुनेंगे ?””,मंगल फूफा ने शंका जहीर की

“अरे सुनेंगे काहे नाही ? जरूर सुनेंगे , हमे जानते नाही का फूफा हमाये सामने बड़े बड़े मिश्रा , शर्मा , गुप्ता , तिवारी , मुरारी सब सांत हो जाते है ,गुंडई का दूसरा नाम है पिंकेश गुप्ता”,गोलू ने अपनी तारीफ़ में कहा तभी एक थैला आकर उसके मुँह पर लगा और गुप्ता जी की आवाज उसके कानों में पड़ी,”ओह्ह्ह गुंडे महाराज इह थैला ल्यो और बाजार से दुइ चार अच्छी सब्जी ले आओ और सुनो धनिया लाना नाही भूलना , आज चटनी खाने का मन है हमारा”

गुप्ता जी इतना कहकर वहा से चले गए और गोलू ने थैला अपने मुँह से हटाकर चिढ़े हुए स्वर में कहा,”देखा फूफा ! पुरे कानपूर के लोग हमे और गुड्डू भैया को सलाम ठोकते है बस साला जे ही घर मा हमायी कोनो इजजत नाही है,,,,,,,,,,सब्जी लाने वाले दिख रहे है हम इनको ? का दिन आ गए है हमाये सब्जी लेने जाना पड़ रहा है उह्ह्ह भी जे शेरवानी पहिन कर,,,,,,,,,,,!!!”

मंगल फूफा ने कुछ नहीं कहा बस मुँह लटकाकर गोलू को देखते रहे तो गोलू ने उनकी बाँह पकड़ी और उन्हें अपने साथ ले जाते हुए कहा,”हिया खड़े खड़े इन्तजार करने से रूपा ना मिली है हमाये साथ चलो,,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा गोलू के साथ वहा से निकल गए।  

मिश्रा जी का घर , कानपूर
मिश्राइन की फटकार सुनकर सब चुपचाप अपने अपने कमरों में चले गए। लवली ऊपर अपने कमरे में आकर नहाने चला गया। आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ अम्मा के कमरे में चले गए। मिश्रा जी अपने कमरे में आये और नहाने चले गए। बिंदिया और रूपा वेदी के कमरे में थी और गुड्डू अपने कमरे में चला गया।
शगुन ने देखा रूपा और बिंदिया के कपडे बहुत गंदे हो चुके है तो उसने बिंदिया से कहा,”बिंदिया तुम अंदर जाकर नहा लो मैं तुम्हारे लिए साफ कपडे लेकर आती हूँ और रूपा जी आपके लिए भी”

बिंदिया बाथरूम में नहाने चली गयी और रूपा कमरे में पड़ी कुर्सी पर आ बैठी। वेदी बिंदिया को तो जानती थी लेकिन रूपा से पहली बार मिली थी इसलिए बस जब भी दोनों एक दूसरे को देखती तो वेदी हल्का सा मुस्कुरा देती। रूपा से क्या बात करे वेदी को समझ नहीं आ रहा था इसलिए उसने कहा,”आप बैठिये मैं आपके लिए पानी लेकर आती हूँ”
“कुछो खाने को भी ले आना , सुबह से कुछो खाये नहीं है हम”,रूपा ने कहा
“ठीक है,,,,,,,,,,,!!”,कहकर वेदी वहा से चली गयी !

शगुन अपने कमरे में आयी और अलमारी खोलकर बिंदिया के लिए कपडे लेने लगी। गुड्डू के साथ अपनी शादीशुदा जिंदगी शुरू करने के बाद से ही शगुन बस साड़िया पहनने लगी थी लेकिन एक तरफ उसके कुछ सूट भी रखे थे। शगुन ने अपना एक ड्रेस उठाया और जैसे ही जाने के लिए पलटी पीछे खड़े गुड्डू से टकरा गयी जो कि अभी अभी नहाकर आया था। गुड्डू के बालों से पानी टपक रहा था ये देखकर शगुन ने कहा,”गुड्डू जी ! अपने बाल तो ठीक से पोछिए”

गुड्डू शगुन के थोड़ा करीब आया और कहा,”तुमको देखकर लग नहीं रहा शगुन तुमहू हमाये घर आने से जियादा खुश हो ?”
शगुन ने गुड्डू को पीछे किया और बिस्तर पर बैठाकर , हाथ में पकडे कपडे साइड में रखे और तौलिया लेकर गुड्डू के सामने आ खड़ी हुई और उस के बाल पोछते हुए कहा,”हाँ खुश तो होना ही चाहिए मुझे , इतना महान काम जो करके आये है आप”

शगुन की बात सुनकर गुड्डू समझ गया कि शगुन उसे ताना मार रही है उसने शगुन का हाथ पकड़कर उसे अपने बाल पोछने से रोका और कहा,”का शगुन ? अब अम्मा की तरह तुम भी हमे ताना मारोगी ?”
शगुन ने गीला तौलिया कुर्सी पर सुखाया और गुड्डू के सामने आकर प्यार से कहा,”गुड्डू जी ! मैं आपको ताना नहीं मार रही , पर आप बताईये आप जब ये सब उलटी सीधी हरकते करते है तब क्या आपको ये ख्याल नहीं आता कि अब ये नन्ही सी जान भी आपकी जिम्मेदारी है”

शगुन की बात सुनकर गुड्डू ख़ामोशी से उसे देखने लगा। शगुन ने गुड्डू का चेहरा अपने हाथो में लिया और उसकी आँखों में देखते हुए प्यार से कहने लगी,”गुड्डू जी ! बिंदिया के घर जाकर आप लोगो ने जो कुछ भी किया क्या वो सही है ? मैं लवली भैया और बिंदिया के प्यार खिलाफ नहीं हूँ लेकिन एक लड़की को शादी के मंडप से भगाकर ले आना , कभी सोचा है उनके माँ-बाप पर क्या गुजर रही होगी ?”

“लेकिन इह बार वाला कांड हमहू अकेले नाही किये पिताजी भी इह मा शामिल थे”,गुड्डू ने मासूमियत से कहा तो शगुन का वाला लहजा तुरंत गुस्से में बदल गया और उसने कहा,”पापा जी ने ये किया तो आपने उन्हें रोका क्यों नहीं ? और वो गोलू जी वो कहा थे उस वक्त ? आप सब ना गुड्डू जी एक ही थाली के बैंगन है और इस बार तो आपने पापाजी को भी इसमें शामिल कर लिया”

कहकर शगुन गुड्डू से दूर हटी और जैसे ही जाने लगी गुड्डू ने दोनों हाथो से शगुन की कमर पकड़कर उसे अपनी गोद में बैठाया तो शगुन ने मचलते हुए कहा,”गुड्डू जी छोड़िये मुझे,,,,मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी”
“माफ़ कर दो ना शगुन,,,,,,,,गलती हो गयी , अब से कोई कांड नहीं करेंगे पक्का”,गुड्डू ने अपना गाल शगुन की पीठ से लगाकर कहा

“मैं आपकी बातों में नहीं आने वाली गुड्डू जी ! छोड़िये मुझे”,कहते हुए शगुन गुड्डू से दूर हुई और मुँह बनाकर कपडे उठाते हुए वहा से चली गयी ! गुड्डू उठा और अपने बालों में उंगलिया घुमाकर कहा,”साला जे लवली भैया की लुगाई उठाने के चक्कर मा हमायी वाली हम से रूस गयी,,,,,,,!!!”

शगुन कपडे लेकर वेदी के कमरे में आयी तब तक बिंदिया नहा चुकी थी। शगुन ने बाथरूम में खड़ी बिंदिया को अपने कपडे पकड़ाए और फिर रूपा की तरफ देखकर कहा,”आपको मेरे कपडे नहीं आएंगे”
“तो फिर इह का पहनेगी भाभी ?”,वेदी ने पूछा

“मैं गुड्डू जी से कहकर बाहर से कुछ कपडे मंगवा देती हूँ”,शगुन ने कहा और जैसे ही जाने लगी रूपा ने कहा,”अरे काहे परेशान होती हो ! अभी बाहर उह्ह्ह मोटकी खड़ी थी ना ओह्ह का साड़ी देइ दयो हमहू ओही पहिन ली है”
रूपा के मुँह से भुआ के लिए मोटकी सुनकर शगुन को अच्छा नहीं लगा फिर भी उसने शांत स्वर में कहा,”वो इस घर की बेटी है और गुड्डू जी की भुआ जी है , आप भी उन्हें भुआ जी कहकर बुला सकती है , रुकिए हम लेकर आते है”

“भाभी आप बैठिये मैं लेकर आती हूँ ! इस टाइम में आपको इतनी भाग दौड़ नहीं करनी चाहिए,,,,,,,,!!!”,वेदी ने शगुन को बिस्तर पर बैठाकर कहा और वहा से चली गयी !
शगुन बिस्तर पर आ बैठी , रूपा ने शगुन के पेट की तरफ देखा और कहा,”तुमहू पेट से हो का ?”
“हम्म्म,,,,,,,!!!”,शगुन ने धीरे से हामी में गर्दन हिलायी तो रूपा मुस्कुरा दी। बिंदिया भी कपडे बदलकर बाहर चली आयी। शगुन के कपडे उसे पुरे आ रहे थे। शगुन ने उसे बैठने को कहा और बिंदिया अपने बालों को पोछने लगे।

वेदी रूपा के लिए कपडे लेने भुआ के पास आयी और कहा,”ए भुआ ! तुम्हायी एक ठो साड़ी और लहंगा ब्लाउज देइ दयो उह्ह रूपा के लिए चाहि”
रूपा के आने से भुआ पहले ही गुस्सा थी , वेदी की बात सुनकर और भड़क गयी और कहा,”हमहू काहे अपना कपडे दे ओह्ह के लिए ? एक तो बिन बुलाये मेहमान की तरह हिया चली आयी है ऊपर से हमाओ कपड़ा भी मांग रही है,,,,,,,,,,,इह सब ना तुम्हरे जे फूफा की वजह से हुआ है”

रूपा का गुस्सा भुआ ने आदर्श फूफा पर निकाला जो कि अभी अभी नहाकर आये थे। आदर्श फूफा ने सुना तो भडककर कहा,”ए राजकुमारी ! का पगला गयी हो का ? जे रूपा का बिल हमाये नाम पर काहे फाड़ रही हो ? उह्ह ससुरा मंगलवा लेकर आय रहा जे का कानपूर मा हम नाही,,,,,,,,,,!!!”

“हिया तो उह्ह आपके पीछे पीछे ही आयी है ना ? सब समझ रहे है हम कोमलिया के पिताजी , घर से बाहिर गए नाही कि रंगबाजी चालू आपकी ,, अरे का जे ही दिन देखने के लिए हमायी अम्मा ब्याहे रही तोह के साथ हमका,,,,,,,,,,,,,,!!!”,कहते कहते भुआ साड़ी का पल्लू मुँह में खोंसकर रो पड़ी
वेदी बेचारगी से कभी भुआ को देखती तो कभी फूफा को जिन्होंने उलझन के चलते कुरता उलटा पहन लिया था और वापस निकालते हुए वह उनके सर और हाथो में फंस गया था

( क्या गोलू करेगा मंगल फूफा की मदद और करवाएगा रूपा से उनकी शादी ? क्या गुड्डू मना पायेगा शगुन को और शगुन करेगी गुड्डू को माफ़ ? कहा से आएंगे रूपा के लिए कपडे और क्या होगा आदर्श फूफा का हाल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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