Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 16

by Story With Sanjana August 1, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 16

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी के घर में मिश्राइन सबकी क्लास लगा रही थी और जब उन्होंने लवली से पूछा तो लवली ने सब गोलू पर डाल दिया क्योकि इस काण्ड की शुरुआत गोलू महाराज ने ही की थी। तीसरे सीजन में आदर्श फूफा को उठाना भारी पड़ा था और चौथे सीजन में बिंदिया को लेकिन अब लग रहा था पांचवे सीजन में गोलू खुद ही दुनिया से उठने वाला था क्योकि इस बार उसका कांड मिश्रा जी या गुप्ता जी के सामने नहीं बल्कि मिश्राइन के सामने आया था और मिश्राइन वो जिनके सामने कभी मिश्रा जी की नहीं चली तो गोलू की भला क्या ही चल पाती।

गोलू का नाम सामने आते ही आदर्श फूफा तो उठकर वहा से चले गए। राजकुमारी भुआ ने एक नजर रूपा को देखा और मुँह बनाकर वहा से चली गयी।  जबसे रूपा आयी थी राजकुमारी भुआ खामखा उस से चिढ़ी हुई थी और इसी के चलते बार बार आदर्श फूफा को भी सुना दे रही थी। गोलू का नाम बोलकर लवली ने जैसे ही गुड्डू की तरफ देखा गुड्डू ने हाथो से लवली को इशारा करके आँखों ही आँखों में कहा,”इह का किया लवली भैया ?”

मिश्राइन को खामोश देखकर मिश्रा जी ने धीरे से कहा,”जाने दो ना मिश्राइन ,, बच्चे अपने घर आ गए है। इह मामला शांत हो जाए ओह्ह्ह के बाद हमहू खुद जाकर मंगेश से  बिंदिया और लवली के ब्याह की बात कर लेंगे”
मिश्राइन ने गुस्से से मिश्रा जी को देखा और उनके पास आकर कहा,”हम तो जाने देंगे गुड्डू के पिताजी पर का बिंदिया के बापू जान देंगे , अभी जाकर पुलिस मा खबर कर दे कि आप सब बिटिया को उठाकर लाये है तो सब के सब जेल जायेंगे,,,,,,,,,,,,,अरे का जे ही दिन देखने के लिए हमहू ज़िंदा थे। जबसे अम्मा गुजरी है ना जाने का का देखनो पड़ रहो हमे”

कहकर मिश्राइन सुबकने लगी ये देखकर लवली को अच्छा नहीं लगा वह मिश्राइन के पास आया और कहा,”अम्मा ! ऐसा मत कहो अम्मा , इन सारी उलझनों की वजह हम है। हम बिंदिया को लेकर हमेशा हमेशा के लिए हिया से चले जाएंगे। हमायी वजह से आपको और पिताजी को किसी तरह की कोनो तकलीफ नाही होगी अम्मा”
लवली की बात सुनकर मिश्राइन उसकी तरफ पलटी और गुस्से से कहा,”जबान खींच लेंगे तुम्हायी जो फिर ऐसी बात कही हमसे , अरे हमने कबो तुम मा और गुडडु मा फर्क कोनो फर्क किया है का जो तुमहू ऐसी बात कर रहे हो ?

कही नाही जाओगे तुमहू यही रहोगे हमाये पास”
मिश्राइन की बात सुनकर लवली उनके गले आ लगा। मिश्राइन ने भले ही लवली को जन्म ना दिया हो लेकिन इस घर में आने के बाद प्यार हमेशा गुड्डू जितना ही किया। उन्होंने लवली की पीठ थपथपाई और कहा,”हमहू खाना लगवाते है सब खाय ल्यो”

लवली मिश्राइन से दूर हटा और उनका हाथ थामकर कहा,”अम्मा ! उह्ह गोलू से कुछो नाही कहना , माफ़ कर देना ओह्ह्ह का ,, उह इह सब हमरे कहने पर किये रहा,,,,,,,,,,,,,जे सब मा उह अकेले की कोनो गलती नाही है”
मिश्राइन मुस्कुराई और कहा,”जे बात के लिए तो हमहू ओह्ह्ह से कुछो नाही कहेंगे लवली पर परसादी तो ओह्ह्ह का आज मिल के रही है”

“अरे अब काहे की परसादी अम्मा ? जब लवली भैया कह रहे है गोलू की इह सब मा कोनो गलती नाही है तो फिर परसादी काहे ?”,गुड्डू ने मिश्राइन के पास आकर कहा
“ल्यो ! इह बोले गोलुआ के वकील साहब बीच मा , का बेटा तुमको का लगता है हमहू पगलेट है ? अरे तुम्हरी और उह्ह गोलुआ की रग रग से वाकिफ है हमहू इहलीये जियादा वकील नाही बनो वरना के ओह्ह्ह के साथ साथ तुमहू भी कूटे जाओगे”,मिश्राइन ने गुड्डू को फटकार लगाकर कहा तो गुड्डू आगे बहस किये बिना ही सीधा डायनिंग टेबल की तरफ बढ़ गया।

लवली , वेदी और रूपा भी खाना खाने चले गए अब बचे मिश्रा जी तो मिश्राइन ने कहा,”अब आप हिया काहे रुके है ? चलिए चलकर खाना खाइये”
मिश्रा जी उठे और सहजता से कहा,”मिश्राइन तुमको नाही लगता आज तुमहू कुछो जियादा कठोर होय रही हो ?”
“अरे कठोर तो हमको बहुते पहिले हो जाना चाहिए था मिश्रा जी लेकिन का करे अपनी लाज शरम के चलते खामोश रहे और देख लीजिये नतीजा ,,

जे पिद्दी भर के लड़के हमाये सामने इत्ते बड़े बड़े कांड करके बैठे है , अब अगर चुप रहे ना तो कल को गुडडुआ की औलाद भी हमाये सर पर चढ़कर नाची है। आपकी बाटा की चप्पलो मा अब उह्ह्ह बात नाही रही जिस से गुड्डू और गोलू सुधर जाय”,मिश्राइन ने कड़क स्वर में कहा
“तो अब ?”,मिश्रा जी ने कहा

“कपड़ा धोने वाले सोटे का नाम सुने है ना”,मिश्राइन ने कहा तो हैरानी से मिश्रा जी की आँखे फ़ैल गयी और उन्हें याद आया कि कॉलेज के दिनों में उनकी अम्मा उन्हें उसी सोटे से दिन में तारे दिखाया करती थी। उन्होंने मिश्राइन से आगे कोई सवाल नहीं किया और चुपचाप डायनिंग टेबल की तरफ चले आये।  

शगुन और बिंदिया का खाना मिश्राइन ने वेदी के हाथ कमरे में ही भिजवा दिया। आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ भी खाना खाने आ बैठे। मिश्राइन ने सबको खाना परोसना शुरू किया तो रूपा ने उनकी मदद करते हुए कहा,”लाओ चाची हम तुम्हरी मदद कर देते है”

“अरे नाही बिटिया ! तुमहू बइठो मेहमान हो , तुमहू जे सब करती अच्छी नाही लगोगी। तुमहू बैठकर खाओ हम परोसते है”,मिश्राइन ने कहा तो रूपा वापस बैठ गयी। वेदी भी वापस आयी और मिश्राइन को अकेले खाना परोसते देखा तो कहा,”लाओ अम्मा ! हम परोस देते है”
वेदी और मिश्राइन ने सबको खाना परोसा और सब खाने लगे। मिश्रा जी ने देखा मिश्राइन एक तरफ खड़ी है तो उन्होंने कहा,”गुड्डू की अम्मा ! तुमहू भी थोड़ा खाय ल्यो”

“हमाओ आज उपवास है,,,,,,,,,आप सब खाइये”,कहकर मिश्राइन वहा से चली गयी  
गुड्डू मिश्रा जी के बगल में बैठा था उसने खाना खाते हुए धीरे से कहा,”पिताजी लगता है अम्मा कुछो जियादा ही नाराज है”
मिश्रा जी मिश्राइन की नाराजगी से एक तो पहले ही परेशान थे ऊपर से गुड्डू उनके जले पर नमक छिड़क रहा था। उन्होंने बाँये हाथ से एक मुक्का गुड्डू की पीठ पर मारा और दबे स्वर में कहा,”इह तुम्हरे और उह्ह गोलुआ की वजह से हुआ है , आन दयो आज साम मा ओह्ह्ह का घर पे निकालते है ओह्ह्ह की सारी रंगबाजी”

मुक्का पड़ने से गुड्डू की रीढ़ की हड्डी सीधी हो गयी और वह चुपचाप खाना खाते हुए सोचने लगा आज शाम में गोलू को घर आने से कैसे रोके ? खाना खाते हुए मिश्रा जी की नजर रूपा पर पड़ी जिसने गुड्डू के कपडे पहन रखे थे। उन्होंने खाना खाते हुए गुड्डू से कहा,”गुड्डू,,,,,,,,,!!!”
“जी पिताजी,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने कहा

“खाना खाने के बाद रूपा को अपने साथ लेकर नवरत्न के पास जाओ और जे के कपड़ो का नाप देकर उस से कहो दुइ चार जोड़ी कपडे बना दे इह के लिए”,मिश्रा जी ने कहा
“ठीक है पिताजी ले जायेंगे”,गुड्डू ने कहा क्योकि मिश्रा जी की बात टाल जो नहीं सकता था
रूपा ने जैसे ही नवरत्न का नाम सुना उसकी आँखे ख़ुशी से चमक उठी और होंठो पर मुस्कान तैर गयी। सामने बैठे आदर्श फूफा ने देखा तो धीरे से बड़बड़ाये,”नवरत्न का नाम सुनकर इत्ता काहे खुश होय रही है इह , लगता है दाल मा कुछो काला है”

“अरे इह जीरा है छौंक लगाया तो काला हुई गवा”,बगल में बैठी राजकुमारी भुआ ने कहा
आदर्श फूफा ने सुना तो घूरकर भुआ को देखा और अपनी कटोरी उनकी प्लेट में रखकर कहा,”एक काम करो इह भी तुम्ही खाय ल्यो”
मिश्रा जी अपना खाना ख़त्म कर चुके थे और उठाकर हाथ धोने चले गए।

गुप्ता जी का घर , कानपूर
घर के हॉल में यहाँ से वहा चक्कर लगाते गुप्ता जी बड़बड़ाये,”इह साला गोलुआ को धनिया लाने भेजे रहे और उह्ह अभी तक नाही आया। कही धनिया लेने डायरेक्ट खेतो मा तो नाही चला गवा ? ससुरा जा भी सकता है आजकल ओह्ह्ह की हालत देखकर तो लगता है जैसे शनि की साढ़ेसाती और राहू की महादशा एक ठो साथ लगी हो ओह्ह्ह पे,,,,,,,,,,,,,अरे पर उह्ह्ह अभी तक आया काहे नाही ? कही रस्ते मा निपट तो नाही गवा ?”

“अरे खुले बैल की तरह का हिया से हुआ चक्कर काट रहे है ?”,गुप्ताइन ने गुप्ता जी की तरफ आते हुए कहा
“तुम्हाये सपूत का इन्तजार कर रहे है , धनिया लाने भेजत रहे ओह्ह्ह का अभी तक नाही लौटे ? पतो नाही अब कहा अपनी छीछा लेदर करवाय रहे होंगे। कभी कभी तो हमाओ दिल करे एक बार तबियत से सूत दे तुम्हाये गोलुआ को”,गुप्ता जी ने कहा

गोलू मंगल फूफा के साथ अंदर आया और कहा,”काहे सूत देंगे , अब का किये हम ?”
“तुमको धनिया लाने भेजे थे कि उगाने , इत्ती देर कहा थे ?”,गुप्ता जी ने कहा
“झूला झूल रहे थे,,,,,,,,,,,,अरे धनिया लाने भेजे थे तो ओहि लेने गए होंगे ना और पुरे बाजार का चक्कर लगाये तब जाकर इह मिला है,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने गुप्ता जी से कहा और फिर हाथो में पकडे दो थैले गुप्ताइन की तरफ बढाकर कहा,”इह ल्यो अम्मा ! इह सब्जी और इह पकड़ो धनिया और चटनी थोड़ा जियादा बनाना”

“का नहाने वाले हो चटनी से ?”,गुप्ता जी ने कहा
गुप्ताइन अपना सामान लेकर वहा से जा चुकी थी इसलिए गोलू गुप्ता जी की तरफ पलटा और कहा,”अरे नाही पिताजी ! नहाने के लिए तो कुछो और बंदोबस्त किये है हमहू,,,,,,,,इह पकड़िए आपका बचा हुआ पैसा , 210 की सब्जी लाये और इह बाकि के 320 रुपया”

गुप्ता जी को याद आया कि उन्होंने झोले के साथ गोलू को 500 का नोट दिया था , अब सब्जी अगर 210 की है और वापस 320 मिले है तो बाकि के 70 रूपये कहा गए ? उन्होंने गोलू की तरफ देखा और कहा,”कौनसे स्कूल मा पढ़े हो बेटा ?”
“आदर्श विद्या बाल निकेतन , कानपूर मा , काहे पूछ रहे है ?”,गोलू ने मासूमियत भरे स्वर में पूछा

“तो तुम्हाये आदर्श कहा गए बेटा ? 500 रुपया दिए रहय तुमका और हिसाब तुमहू 430 का दे रहे हो , बाकि के 70 रूपये का का किये ? कही दारू वारू तो नाही पीने लगे हो जे मंगलू के साथ मिलकर ?”,गुप्ता जी ने कहा
“छी छी कैसी बात कर रहे है पिताजी , दारू काहे पिएंगे ?”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा
“अरे तो फिर बाकि का पैसा कहा है ?”,गुप्ता जी ने गुस्से से कहा

“70 रूपये का हमहू एक ठो लक्स साबुन खरीद लिए पिताजी”,गोलू ने खुश होकर कहा
गुप्ता जी ने सुना तो उनका हाथ सीने पर चला गया जिस घर में 30 रूपये से ऊपर का साबुन नहीं आया उस घर में सीधा 70 रूपये का साबुन , उन्होंने गोलू को घूरकर देखा और कहा,”तुम्हरे बाप दादा भी नहाये है कबो 70 रूपये के साबुन से ?” “अरे यार पिताजी ! का एक साबुन के लिए इत्ता बिलबिलाय रहे है आप , दे देंगे आपके 70 रूपये , अरे 70 का आप 100 ले लीजियेगा हमसे”,गोलू ने चिढ़कर कहा

“उह्ह ठीक है पर इह बताओ इत्ते महंगे साबुन से नहाकर कहा जाय रहे हो तुमहू ?’,गुप्ता जी ने पूछा
“अरे उह्ह्ह मिश्रा जी है ना , उह्ह अपने घर मा कोनो पिरोगराम रखे है। साम मा घर बुलाये है हमे और मंगल फूफा को,,,,,,,,,,स्पेशल गेस्ट है हमहू”,गोलू ने ख़ुशी से चहककर कहा
गुप्ता जी ने सुना तो उन्हें मिश्रा जी की बात याद आ गयी लेकिन वे गोलू को कैसे बताते कि मिश्रा जी ने आज शाम उसके लिए कोई और ही प्रोग्राम सेट कर रखा है।

गुप्ता जी को खोया देखकर गोलू ने आगे कहा,”तो हमहू सोचे कि जाने से पहिले अच्छे से नहाय ले का है कि दुइ दिन से ठीक से नहाये नहीं है बदन बहुते बास मार रहा है। थोड़ा हम लगाएंगे थोड़ा मंगल फूफा लगा लेंगे का कहते हो ?”
“कबो बिलौटे को लक्स साबुन से नहाते देखे हो ?”, गुप्ता जी ने कहा तो गोलू ने चिढ़कर कहा,”ए पिताजी ! आप हमको बिलौटा कह रहे हो ?”

“अरे नाही बिटवा तुमहू तो सूअर हो , बिलौटा तो हमहू जे मंगलू को कह रहे है। बड़ी चौड़ मा रूपा को लेने गए थे का हुआ , मिली रूपा ?”,गुप्ता जी ने कहा और वहा से चले गए
गोलू ने मंगल फूफा को देखा तो मंगल फूफा वहा से चले गए और गोलू भी कपडे लेने अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।

गोलू कमरे में आया और पिंकी से कहा,”पिंकिया ज़रा हमाये कपडे तो निकाल दयो”
“का गोलू ? सुबह सुबह इह सब”,पिंकी ने हैरानी से कहा
“अरे हमहू अलमारी से कपडे निकालने को कह रहे है यार , का तुमहू बात बात पर रोमांटिक हो जाती हो,,,,,,,,,,,कपडे निकालो हमे नहाने जाना है,.,,,,,,70 रूपये का लक्स लेकर आये है घिसेंगे खूब अच्छे से अपने बदन पर”,गोलू ने कहा

पिंकी ने सुना तो मुँह बनाया और अलमारी से गोलू के लिए कपडे निकालने लगी तभी एक डिब्बा आकर नीचे गिरा और उसमे रखा सामान बिखर गया। पिंकी ने कपडे निकालने छोड़कर जल्दी से सामान उठाया और जल्दी जल्दी डिब्बे में डालकर डिब्बे को वापस अलमारी में ठूस दिया तो गोलू ने कहा,”इह सब का है ?”
पिंकी गोलू के कपडे लेकर पलटी और कहा,”कुछो नाही ! स्किन केयर का सामान है”
गोलू तो ये नाम ही पहली बार सुन रहा था उसने चौंककर कहा,”इह का होत है ?”

पिंकी गोलू के पास आयी और हाथो में पकडे कपडे गोलू की तरफ बढाकर प्यार से कहा,”होता है गोलू तुमहू नाही समझोगे , इह जो हमयी ब्यूटी है ना इह सब स्किन केयर की वजह से ही है”
“हैं ? मतलब तुम्हायी ब्यूटी मा हमाये पिरेम की कोनो रिस्पॉन्सबिलिटी नाही है,,,,,,,,,,,साला अब पता चल रहो , कमाई तो हमायी सारी जे मेडम जी के लाली पोडर मा जाय रही है,,,,,,,लगाओ भैया स्किन केयर हमहू तो लक्स लगाकर ही दिल को तसल्ली दे देंगे”,कहते हुए गोलू कमरे से बाहर चला गया और पिंकी ने राहत की साँस लेकर अपने सीने पर हाथ रखा।

गोलू कपडे लेकर बाहर आया और बाहर आंगन में बने बाथरूम की तरफ जाने लगा तो पीछे पीछे मंगल फूफा भी चले आये ये देखकर गोलू रुका और कहा,”का ?”
“हमहू सोच रहे है हमहू भी नहाय ले , तीन दिन से इह फूलो वाली शर्ट पहिन के घूम रहे है अब तो जे के पत्ते भी झड़ चुके,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने कहा

“हाँ तो का हमायी गोद मा बैठकर नहाओगे ? अरे पहिले हम नहा लेते है बाद मा तुमहू नहाय लेना”,कहकर गोलू हाथ में पकडे कपड़ो को एक एक करके रेंक पर टांगने लगा और फिर अपना हाथ अपने सर पर दे मारा।
”का हुआ , नहाते काहे नाही ?”,मंगल फूफा ने पूछा
गोलू ने मंगल फूफा को देखा और कहा,”ए यार फूफा ! हमहू रूपा की चड्डी लाना भूल गए”

मंगल फूफा ने सुना तो आँखे गुस्से से लाल और चेहरा तमतमाने लगा वे अपनी पूरी जान लगाकर चिल्लाये और कहा,”शर्म नाही आती अपनी होने वाली भुआ के बारे में ऐसी अपमानजनक बात कहते हुए”
गोलू तो बेचारा दिवार से ही चिपक गया उसे समझ ही नहीं आया कि आखिर उसने ऐसा क्या गलत बोल दिया ?  
अगर आपको समझ आया है तो कमेंट सेक्शन में जरूर बताये

( मिश्राइन ने सच में रखा है उपवास या अभी भी मिश्रा जी से है नाराज ? नवरतन का नाम सुनकर क्यों खिल उठा रूपा का चेहरा ? क्या पिंकी का स्किन केयर बनेगा इस कहानी का अगला कांड ? गोलू की बात सुनकर आखिर क्यों भड़क उठे मंगल फूफा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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