Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 3

Pasandida Aurat Season 3 – 24

by Story With Sanjana August 4, 2026
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Pasandida Aurat Season 3 – 24

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी को मनाने के लिए अवनि ने आज सामने से पहल की और ये देखकर पृथ्वी को अच्छा लगा। आज अवनि ने उसे वो सारे हक़ दे दिए जो शादी के बाद एक पति के होते है। पृथ्वी अवनि के करीब आया। कमरे में जलती लाईटे मध्यम पड़ने लगी। खिड़की के समंदर की शोर करती लहरे धीरे धीरे शांत पड़ने लगी थी। आसमान में चमकते चाँद की दूधिया रौशनी से समंदर का पानी चमचमा रहा था। पृथ्वी अपने और अवनि के बीच आज किसी को आने देना नहीं चाहता था इसलिए उसने खिड़की के परदे गिरा दिए और अवनि को अपनी गोद में उठाकर बिस्तर की तरफ चला आया।  

( इस से ज्यादा रोमांस की उम्मीद मुझसे करना आपको निराश कर सकता है क्योकि आप सब जानते है निजी पलों में क्या होता है , उन्हें यहाँ लिखना जरुरी नहीं )

सिद्धार्थ का घर , सिरोही
रात 10 बजे सिद्धार्थ अपने ऑफिस से घर आया। आज वह ऑफिस देर से गया था इसलिए उसे वापस आने में भी काफी देर हो गयी लेकिन आज सिद्धार्थ खुश था। सुरभि की आँखों  लिए  वह देखने के बाद सिद्धार्थ ये जान चुका था कि सुरभि भी उस से प्यार करती है। सीटी बजाते , गुनगुनाते हुए सिद्धार्थ घर के अंदर आया और जैसे ही हॉल में पहुंचा जगदीश जी और गिरिजा को देखकर ठिठक गया और हैरानी भरे स्वर में कहा,”आप दोनों अभी तक सोये नहीं ? मम्मी मैंने फोन पर आपसे कहा था ना मुझे आने में देर हो जाएगी आप मेरा इंतजार नहीं करना,,,,,,,,,,,!!!”

“तुम्हारे देर से घर आने का कारण कही वो लड़की तो नहीं ?”,जगदीश जी ने पूछा
“कौन लड़की ?”,सिद्धार्थ ने चौंककर कहा
जगदीश जी सोफे से उठे और सिद्धार्थ की तरफ देखकर गुस्से से कहा,”वही लड़की जिसके साथ सरे आम तुम मेरी इज्जत की धज्जिया उड़ा रहे हो”
सिद्धार्थ ने सुना तो उसे सुबह सुरभि से हुई मुलाकात याद आ गयी और उसने बेचैनी भरे स्वर में कहा,”पापा ! आप जैसा सोच रहे है वैसा कुछ नहीं है , हम बस अच्छे दोस्त है”

“अच्छे दोस्त ? उस दिन रात में तुम लड़की को घर लेकर आये थे मुझे उसी वक्त समझ जाना चाहिए था कि तुम दोनों के बीच दोस्ती जैसा तो कुछ नहीं है”,जगदीश जी ने कहा
सिद्धार्थ कुछ देर खामोश रहा और कहा,”मैं सुरभि को पसंद करता हूँ पापा और उस से शादी करना चाहता हूँ”

सिद्धार्थ की बात सुनकर जगदीश जी की भँवे तन गयी और उन्होंने पलटकर गिरिजा जी से कहा,”देख रही हो इसकी बेशर्मी ! अब ये उस लड़की से शादी करना चाहता है”
“इसमें गलत क्या है पापा ? मैं उसे पसंद करता हूँ और उसके साथ जिंदगी बिताना चाहता हूँ इसमें क्या बुराई है ?”,सिद्धार्थ ने इस बार थोडा गुस्से से कहा  

“बुराई ये है कि इस से पहले भी तुमने दो लड़कियों को पसंद करने और उनसे शादी करने का दावा किया था,,,,,,,,,,,तुम्हारी चुनी एक लड़की ने यहाँ आकर मेरी बेइज्जती की और दूसरी लड़की ने पुरे समाज के सामने और अब तुम्हे इस लड़की से शादी करनी है , अब क्या तुम पुरे शहर में मेरी इज्जत नीलाम करना चाहते हो ?”,जगदीश जी ने कहा

“ऐसा नहीं है पापा , नंदिनी सिर्फ़ मेरी अच्छी दोस्त थी और अवनि किसी और को पसंद करती थी इसलिए मुझे पीछे हटना पड़ा ,, मैं जिंदगी भर उसे दुखी नहीं देख सकता था। सुरभि को मैं सच में पसंद करता हूँ और उस से शादी करना चाहता हूँ इसमें गलत क्या है ?”,सिद्धार्थ ने रोआँसा होकर कहा
“गलत है ! वो लड़की इस घर में बहू बनकर नहीं आएगी और अब तुम्हारी शादी वही होगी जहा मैं चाहूंगा समझे तुम,,,,,,,,,,,,मैंने भाईसाहब से तुम्हारे लिए लड़की देखने को कहा है और इस रविवार हम उसे देखने चलेंगे,,,,,,,,,,ये मेरा फैसला है”,जगदीश जी ने गुस्से से कहा

जगदीश जी की हर बात चुपचाप सुनने वाला सिद्धार्थ आज चिल्ला उठा और कहा,”अगर आपने फैसला कर लिया है तो फिर मेरी भी एक बात सुन लीजिये पापा , मैं किसी और से शादी नहीं करूंगा,,,,,,,,,ये मेरी जिंदगी है इसका फैसला मुझे करना है आपको नहीं,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ को जबान लड़ाते देखकर जगदीश जी का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। बाप और बेटे को गुस्से में एक दूसरे के खिलाफ देखकर गिरिजा जी बीच में आयी और सिद्धार्थ को फटकार लगाकर कहा,”सिद्दू ! ये क्या तरीका है अपने पापा से बात करने का ?”

सिद्धार्थ ने कुछ नहीं कहा उसने गुस्से से जगदीश जी को देखा और अपने कमरे में जाकर दरवाजा जोर से बंद कर दिया। ये देखकर गिरिजा का दिल बैठ गया लेकिन एक तरफ पति था तो दूसरी तरफ बेटा और इस वक्त उनकी अपने पति के प्रति जिम्मेदारी ज्यादा बनती थी। सिद्धार्थ की बात से आहत होकर जगदीश जी खामोश से सोफे पर आ बैठे। गिरिजा उनके पास आयी और उनके कंधे पर हाथ रखकर प्यार से कहा,”उसे माफ़ कर दीजिये ! बच्चा है मैं उसे समझा दूंगी लेकिन,,,,,,,,,,,,!!!”

“लेकिन क्या गिरिजा ?”,जगदीश जी ने हताश होकर कहा
“सिद्धू जो कह रहा है वो भी तो गलत नहीं है ! अगर वो उस लड़की से शादी करना चाहता है तो इसमें हर्ज ही क्या है ? अगर आप उसकी शादी अवनि से करवाने  तैयार हो सकते है तो फिर इस लड़की में क्या हर्ज है ? जरा ठन्डे दिमाग से सोचिये इन सब से गुजरने के बाद सिद्दू ने शादी का सोचा तो सही वरना मुझे तो लगता था वह हमेशा अकेला ही रहेगा”,गिरिजा ने जगदीश जी को समझाते हुए कहा

गिरिजा जी की बात सुनकर जगदीश जी उठे और चुपचाप वहा से चले गए। गिरिजा का चेहरा मायूसी से घिर गया , वे एक बार फिर बेटे और पति के बीच पीस चुकी थी। उनकी आँखों में आँसू भर आये। उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू से अपनी आँखों के किनारे साफ़ किये और फिर किचन की तरफ चली आयी क्योकि उन्हें एक माँ होने का फर्ज भी तो निभाना था। उन्होंने प्लेट में सिद्धार्थ के लिए खाना लिया और लेकर सिद्धार्थ के कमरे के दरवाजे के सामने चली आयी ! सिद्धार्थ अभी भी गुस्से में होगा सोचकर गिरिजा दरवाजा खटखटाने में भी सोच रही थी।

कुछ देर बाद उन्होंने दरवाजे का हेंडल घुमाया तो पाया कि दरवाजा खुला है। गिरिजा अंदर आयी देखा सिद्धार्थ बिस्तर पर बैठा है और उदास आँखों से सामने खाली दिवार को देख रहा है। गिरिजा ने खाने की प्लेट लाकर बिस्तर पर रखी और सिद्धार्थ के बगल में बैठकर अपना हाथ उसके हाथ पर रखकर कहा,”सिद्दू ! इतना मत सोचो , चलो चलकर खाना खाओ”
“क्या मैं आपसे एक बात पूछ सकता हूँ ?”,सिद्धार्थ ने उदासी भरे स्वर में कहा
“हम्म्म पूछो”,गिरिजा ने कहा

“अवनि किसी और से प्यार करती थी लेकिन जिंदगीभर उसे मुझसे प्यार का नाटक ना करना पड़ा और हमारी शादी एक समझौता ना कहलाये इसलिए मैंने उसे पृथ्वी के साथ जाने दिया। क्या मैंने कुछ गलत किया ?”,,सिद्धार्थ ने पूछा
“नहीं तुमने कुछ गलत नहीं किया सिद्दू ! मैं भी चाहती थी अवनि इस घर की बहू बने , खैर उसके नसीब में कुछ और लिखा था।”,गिरिजा ने हताश होकर कहा

“तो फिर पापा ये क्यों कहते है कि मैंने उनकी इज्जत को मिटी में मिला दिया , मैंने चार लोगो की जिंदगी ख़राब होने से बचाई है मैंने कुछ गलत नहीं किया मम्मी”,सिद्धार्थ ने तड़पकर कहा
सिद्धार्थ को दुखी देखकर गिरिजा ने उसे अपने सीने से लगाया और कहा,”मैं उन्हें समझाउंगी सिद्धू ! अभी वो गुस्से में है और अपनी जिद पर अड़े है लेकिन इस बार उनकी जिद नहीं चलेगी। तुम्हारी शादी वही होगी जहा तुम चाहोगे”
सिद्धार्थ ने सुना तो सुबकते हुए गिरिजा के सीने से लग गया।

“चलो आओ ! खाना खाओ और सो जाओ,,,,,,,,,!!!”,गिरिजा ने कहा तो सिद्धार्थ उठकर बाथरूम में गया और हाथ मुँह धोकर बाहर आया। उसने अपने हाथ और मुँह पोछा और खाना खाने के लिए बिस्तर पर आ बैठा। उसने खाना खाया तब तक गिरिजा जी उसके पास ही बैठी रही और उसे समझाती रही।
खाना खाकर सिद्धार्थ सोने चला गया और गिरिजा जी बर्तन उठाकर किचन में चली आयी। बर्तन धोते हुए वे बस सिद्धार्थ और जगदीश जी के बारे में सोच रही थी कि कैसे दोनों बाप बेटे में सुलह करवाई जाए।

देसाई मेंशन्स , मुम्बई
सुबह की घर से निकली देर रात प्राची घर लौटी। मिस्टर देसाई डायनिंग टेबल पर बैठे थे और शायद प्राची का ही इन्तजार कर रहे थे। उन्होंने अभी तक खाना भी नहीं खाया था। प्राची अपना पर्स हवा में उछालते हुए अंदर आयी बाकि दिनों के बाजय आज कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रही थी। प्राची ने डायनिंग पर बैठे मिस्टर देसाई पर कोई ध्यान ही नहीं दिया और गुनगुनाते हुए सीढ़ियों की तरफ बढ़ी ये देखकर मिस्टर देसाई ने उसे आवाज दी,”प्राची !”

मिस्टर देसाई की आवाज सुनकर प्राची चौंकी उसने पलटकर देखा तो पाया कि मिस्टर देसाई डायनिंग के पास बैठे है और खाना उनके सामने रखा है। प्राची उनकी तरफ आयी और कहा,”डेड ! आप अभी तक जाग रहे है ?”
“हाँ तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था , आओ बैठो खाना खाते है”,मिस्टर देसाई ने अपने सामने पड़ी प्लेट को सीधा करके कहा

प्राची हंसी और अपनी कलाई पर बंधी घडी दिखाकर कहा,”डेड ! रात के 11 बज रहे है और मैं अपनी दोस्तों के साथ बाहर से पार्टी करके आयी हूँ , आपको लगता है मैंने वहा खाना नहीं खाया होगा,,,,,,,,,,,,,,,,एक्चुली मैंने कुछ ज्यादा ही खा लिया है बट वहा का सी फ़ूड डेड ,, सो डिलेसियस ! यू मस्त ट्राय डेड”
“हम्म्म जरूर ! तुम्हे खाना नहीं खाना तो जब तक मैं खाऊ तब तक यहाँ बैठ ही जाओ”,मिस्टर देसाई ने कहा
“ओह्ह्ह डेड ! ठीक है”,प्राची ने कुर्सी खिसकाकर बैठते हुए कहा और घर के नौकर को अपने पास बुलाया और उस से कहा,”मेरे लिए एक ग्रीन टी ले आओ”

“ओके मेम”,नौकर ने कहा और वहा से चला गया
देसाई सर खुद से अपनी प्लेट में खाना परोसने लगे तो प्राची ने कहा,”डेड मैं सर्व करती हूँ”
प्राची ने मिस्टर देसाई की प्लेट में खाना परोसा और प्लेट उनकी तरफ खिसकाकर कहा,”खाइये”
मिस्टर देसाई खाने लगे और खाते कहते उन्होंने प्राची से सवाल किया,”प्राची तुम्हे विक्रम कपूर कैसा लगता है ?” “अच्छा लड़का है डेड”,प्राची ने अपने फोन में नजरे गड़ाए कहा क्योकि इस वक्त वह विक्रम के ही मैसेज का जवाब दे रही थी साथ ही उसके होंठो पर एक प्यारी सी मुस्कान भी थी।  

मिस्टर देसाई ने देखा तो फिर सवाल किया,”,मैं सोच रहा हूँ इस हफ्ते के नए प्रोजेक्ट्स हमारी कम्पनी कपूर एंड ग्रुप्स के साथ साईन कर ले,,,,,,,,,,तुम्हारा क्या ख्याल है ?”
“ग्रेट आइडिआ सर ! मिस्टर कपूर आपको डिसअपोइंट नहीं करेंगे”,प्राची ने एक बार फिर फोन में नजरें गड़ाए कहा
“क्यों ना इस बार की मीटिंग तुम अटेंड करो”,मिस्टर देसाई ने इस बार अपने शब्दों पर जोर देकर कहा जिस से प्राची ने अपना फोन साइड रखकर उनकी तरफ देखा और कहा,”ओह्ह कम ऑन डेड ! मैं अब आपकी कम्पनी में काम नहीं करती फिर मैं इस मीटिंग को अटेंड कैसे कर सकती हूँ ? आप भरत कहिये वो कर लेगा”

“नहीं प्राची भरत नहीं करेगा क्योकि इस बार मिस्टर कपूर ऑफिस के बजाय हमारे घर आने वाले है”,मिस्टर देसाई ने कहा
प्राची ने सुना तो थोड़ा चिढ गयी और कहा,”दिस इज टू मच डेड ! ऑफिस मीटिंग कब से घर पर होने लगी ?”
” मेडम ! आपकी ग्रीन टी”,नौकर ने कप प्राची के सामने रखकर कहा
“थैंक्यू,,,,,,,,,तुम जाओ”,प्राची ने नौकर से कहा और फिर मिस्टर देसाई की तरफ देखकर बोली,”डेड ऑफिस मीटिंग्स घर पर कब से होने लगी ? अब क्या आप इस घर को भी ऑफिस बनाना चाहते है ?”

“तुम समझती नहीं हो प्राची,,,,,,,,,,ये सिर्फ बिजनेस मीटिंग नहीं बल्कि,,,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्ह खैर जाने दो मैं देख लूंगा,,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने कहा वे अभी एकदम से प्राची के सामने उसके रिश्ते की बात करना नहीं चाहते थे लेकिन बातो ही बातो में उन्हें प्राची से ये जानने को मिल चुका था कि विक्रम उसकी नजर में अच्छा लड़का है”
“तो अब मैं जाऊ डेड ? एक्चुली मुझे बहुत नींद आ रही है,,,,,,,,,, मैं आपसे कल सुबह बात करती हूँ,,,,,,,,,,,,गुड नाईट डेड”,प्राची ने अपनी ग्रीन टी खत्म कर उठते हुए कहा और वहा से चली गयी
मिस्टर देसाई ने भी अपना खाना ख़त्म किया और अपने कमरे में चले गए।

अगली सुबह , गोआ रिसोर्ट
रिसोर्ट के उस आलिशान कमरे का नजारा देखने लायक था जिसमे अवनि और पृथ्वी ठहरे थे। बिस्तर पर पृथ्वी की बाँहो में सिमटी अवनि गहरी नींद में सो रही थी। पृथ्वी ने कंबल से खुद को और अवनि को सीने तक ढका हुआ था। बाहर मौसम काफी सुहावना था और ठंडी हवाएं चल रही थी जिस से खिड़की पर लगे पर्दे हवा से बहुत ही शालीनता से उड़ रहे थे। अवनि नींद में कुनमुनाई तो पृथ्वी ने धीरे से अपनी आँखे खोली और सोई हुई अवनि को देखा।

आज पृथ्वी की आँखों में एक अलग ही नशा था और चेहरे की चमक बता रही थी कि उसकी रात अच्छी गुजरी थी। अवनि की बंद आँखों में सुकून था और पृथ्वी के सीने से लगी वह बेफिक्र सो रही। नींद से भरी आँखों से पृथ्वी ने अवनि को देखा और फिर उसके ललाट को अपने होंठो से छूकर आँखे मूँद ली। इस बार पृथ्वी सोया और गहरी नींद में चला गया।

कुछ देर बाद अवनि की आँखे खुली उसने खुद को पृथ्वी की बाँहो में पाया तो मुस्कुरा उठी और फिर धीरे से उस से दूर होकर खुद को वहा पड़ी चद्दर में लपेटा और अपने कपडे उठाकर बाथरूम की तरफ चली आयी। अवनि ने हाथ में पकडे कपडे बाथरूम में पड़ी बाल्टी में डाले और खुद शीशे के सामने चली आयी। अवनि ने जैसे ही खुद को शीशे में देखा शर्म से उसका चेहरा लाल हो उठा। वह एक हाथ से चद्दर को थामे रही और दूसरे हाथ में पानी लेकर अपने चेहरे को धोने लगी तो सहसा ही उसकी नजर अपनी गर्दन पर पड़ी

जहा एक गहरा लाल निशान था और वैसे ही कुछ निशान उसकी गर्दन के दूसरी तरफ और कंधे पर भी थे जिन्हे देखकर अवनि शर्म से और ज्यादा पानी पानी हो गयी।
वह पृथ्वी को जितना सीधा समझती थी पृथ्वी उतना सीधा भी नहीं था। उसने ब्रश उठाया और पेस्ट निकालकर अपने दाँत घिसने लगी तभी पृथ्वी ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया और कहा,”अवनि ! दरवाजा खोलो”

अवनि ने पहले दरवाजे को देखा और फिर शीशे में खुद को देखा और फिर हाथ से पकड़ी उस चद्दर को जिसके अंदर अवनि ने बहुत कम कपडे पहने थे। पृथ्वी दरवाजा खटखटाये ही जा रहा था। अवनि ने इधर उधर देखा उसे रेंक में पृथ्वी की एक टीशर्ट टंगी दिखी। अवनि ने जल्दी से मुँह धोया और पृथ्वी की टीशर्ट को पहन लिया जो कि उसके घुटनो से कुछ ऊपर तक आ रही थी। उसने धीरे से दरवाजा खोला पृथ्वी ने जब अवनि को अपनी टीशर्ट पहने देखा तो उसकी भँवे चढ़ गयी और वह अवनि को घूरने लगा।

( क्या गिरिजा जी करा पायेगी सिद्धार्थ और जगदीश जी में सुलह ? क्या प्राची जान पाएंगी मिस्टर देसाई की बातों का मतलब ? अवनि को अपनी टीशर्ट में देखकर क्यों चढ़ गयी पृथ्वी की भवें ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 3
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