Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 3

Pasandida Aurat Season 3 – 31

by Story With Sanjana August 13, 2026
written by Story With Sanjana August 13, 2026 4 comments
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Pasandida Aurat Season 3 – 31

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

नीलेश के कम्पनी ज्वाइन करने के बाद जयदीप थोड़ा परेशान और टेंशन में था उस पर अंकित उन्हें और टेंशन देकर चला गया। जयदीप अपनी कुर्सी पर आकर बैठा और अंकित की लायी फाइल्स को देखने लगा। फाइल चेक करते हुए उसने अपने लिए कॉफी आर्डर की और वापस अपने काम में लग गया।  कॉफी आर्डर किये जयदीप को बस कुछ ही सेकेण्ड हुए होंगे कि उसके केबिन का दरवाजा खुला और किसी ने कॉफी का मग उसकी टेबल पर रखकर कहा,”आपकी कॉफी सर”

जयदीप का ध्यान फाइल में था इसलिए उसने ये देखे बिना ही कि कॉफी कौन लेकर आया है मग उठाया और एक घूंठ भरकर कहा,”इस ऑफिस में ये पहली बार हुआ है जब कोई चीज टाइम से पहले आयी है , हाँ कॉफी थोड़ी स्ट्रांग है लेकिन अच्छी है”
“स्ट्रांग इसलिए है ताकि इसे पीकर आप फ्रेश फील करे और आज की मीटिंग के लिए तैयार रहे”,जयदीप के सामने खड़े नीलेश ने कहा और जयदीप के लिए कॉफी भी वही लेकर आया था
जयदीप ने सर उठाकर सामने खड़े नीलेश को देखा और हैरानी से कहा,”ये कॉफी तुम लेकर आये हो ?”

“जी,,,,,,,,,आपका स्टाफ बहुत ही लेजी है बट नो वरी जल्दी सब एक्टिव हो जायेंगे,,,,,,,,,लेकिन उनसे पहले आपको एक्टिव होने की जरूरत है। मीटिंग टाइम आफ्टर लंच 3 pm , नाउ एक्सक्यूज मी प्लीज”,कहकर नीलेश वहा से चला गया ना उसने जयदीप का जवाब सुना ना ही उसे बोलने का मौका दिया।
जयदीप ने उसे जाते देखकर कॉफी का एक घूंठ भरा और अगले ही पल खाँसा क्योकि नीलेश से उसे अब घबराहट होने लगी थी।

पोस्ट ऑफिस , सिरोही
सुरभि अपने ऑफिस गयी होगी सोचकर सिद्धार्थ उसके अपार्टमेंट से निकलकर सीधा पोस्ट ऑफिस पहुंचा लेकिन पोस्ट ऑफिस के बाहर लगा ताला देखकर सिद्धार्थ को याद आया कि आज तो सुरभि का ऑफिस बंद है और ये बात सुरभि ने उसे कल ही बताई थी। हताश होकर सिद्धार्थ ने एक बार फिर सुरभि का नंबर डायल किया रिंग जाती रही लेकिन सुरभि ने फोन नहीं उठाया

सिद्धार्थ ने उदास होकर फोन जेब में रख लिया और कलाई पर बंधी घडी में समय देखा। उसकी आज जरुरी मीटिंग थी इसलिए सिद्धार्थ सीधा उसी के लिए निकल गया जो कि शहर से बाहर रखी गयी थी। रास्तेभर वह सुरभि को कॉल पर कॉल लगाता रहा लेकिन सुरभि फोन तब उठाये जब फोन उसके पास हो , उसका फोन तो फ्लेट के कमरे में पड़ा बज रहा था।

सिद्धार्थ ने थककर अपना फोन साइड सीट पर डाल दिया तभी नजर फूलों के बुके और चॉकलेट्स पर पड़ी जो उसने सुरभि के लिए खरीदे थे।  सिद्धार्थ का चेहरा फिर उदासी से घिर गया। गाड़ी ट्रेफिक में आकर रुकी। वह गाड़ी के स्टेयरिंग पर कोहनी टिकाये उंगलियों को अपने होंठो से लगाए सोच में डूबा था तभी किसी ने उसकी गाड़ी का शीशा खटखटाया। सिद्धार्थ की तन्द्रा टूटी उसने देखा एक छोटी लड़की अपनी गोद में एक छोटे बच्चे को उठाये आस भरी नजरो से सिद्धार्थ को देख रही थी और खाना माँग रही थी।

सिद्धार्थ ने शीशा नीचे किया और सीट पर रखे सभी चॉकलेट्स उठाकर बच्ची को दे दिए। चॉकलेट्स देखते ही बच्ची की आँखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान तैर गयी। वह खुश होकर जाने लगी तो सिद्धार्थ ने उसे आवाज दी,”सुनो”
बच्ची पलटकर वापस आयी तो सिद्धार्थ सीट पर रखा बुके उठाया और बच्ची को देकर कहा,”ये भी तुम रख लो”
“थैंक्यू भैया”,बच्ची ने कहा और ख़ुशी ख़ुशी वहा से चली गयी। जल्दी ही उसने अपने आस पास के बच्चो को भी बुला लिया और उनके साथ चॉकलेट बाटने लगी ये देखकर सिद्धार्थ मुस्कुरा उठा।

सहसा आँखों के सामने वो पल आ गए जब ऐसे ही एक बार अवनि ने ट्रेफिक में किसी बच्चे को कुछ देना चाहा और सिद्धार्थ ने उसे कितना सुनाया था। वो पल याद आते ही सिद्धार्थ के मन में एक टीस उठी। आज वह बेशक बदल चुका था , पहले से खुद को बेहतर बना चुका था लेकिन अवनि के साथ उसने हमेशा गलत किया।

वह अवनि के बारे में सोचते हुए बड़बड़ाया,”मुझे माफ़ कर देना अवनि ! मैंने तुम्हे बहुत हर्ट किया है और बहुत दिल दुखाया है तुम्हारा,,,,,,,,,तुम हमेशा से बेहतर डिजर्व करती थी लेकिन मैं तो तुम्हे थोड़ा भी नहीं दे पाया,,,,,,,,,,,,शायद इसलिए महादेव ने तुम्हे मेरी जिंदगी से निकालकर तुम्हारी जिंदगी में पृथ्वी को लिखा,,,,,,,,,मैं दुआ करूंगा तुम दोनों हमेशा खुश रहो और एक दूसरे के साथ रहो”
ट्रेफिक क्लियर हो चुका था। गाडी के हॉर्न से सिद्धार्थ की तंद्रा टूटी और उसने गाडी आगे बढ़ा दी

पृथ्वी अवनि के साथ अच्छा वक्त बिता रहा था। उसने अपने और अवनि के खाना और कुछ ड्रिंकस आर्डर की जिसमे सिर्फ जूस और कोल्ड कॉफी था क्योकि अवनि को फिर से शराब पिलाने का रिस्क पृथ्वी दोबारा लेना नहीं चाहता था। खाना आया और जैसे ही अवनि ने खाने के लिए हाथ बढ़ाया पृथ्वी ने उसे रोककर कहा,”आज मैं तुम्हे अपने हाथ से खिलाऊंगा”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”पृथ्वी ! आप ठीक है न ? आई मीन आज आपको मुझ पर कुछ ज्यादा ही प्यार नहीं आ रहा ?”

पृथ्वी उठा और अवनि के बगल में पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए कहा,”वो क्या है न मिसेज उपाध्याय मैं एक बहुत रोमांटिक और लविंग हस्बेंड हूँ , तुम्हारी तरह बोरिंग नहीं हूँ जो सिर्फ कहानियो में प्यार और रोमांस लिखना जानती है जबकि असल जिंदगी में तो रोमांस का आर तक नहीं पता”
कहते हुए पृथ्वी ने खाने से एक निवाला उठाया और अवनि को खिला दिया। अवनि ने भी निवाला खाया और कहा,”ऐसा आपको लगता है”

“ओके देन शो मी”,पृथ्वी ने कहा
“यहाँ , सबके सामने ?”,अवनि ने चौंककर कहा
“अब प्यार है तो सबके सामने जताने में कैसी शर्म ? वैसे भी यहाँ मौजूद लोगो को हम से कोई मतलब नहीं सब अपनी अपनी दुनिया में मस्त है,,,,,,,,,,,,,,यहाँ अगर किसी को किसी से मतलब है तो वो हो तुम और मैं,,,,,,,,,,,,,नाउ शो मी”,पृथ्वी ने कहा  

अवनि ने बोलने को तो बोल दिया कि वह भी पृथ्वी की तरह रोमांटिक है लेकिन सबके सामने दिखाए कैसे ? पृथ्वी एकटक उसे देखता रहा तो अवनि ने इधर उधर देखते हुए कहा,”अह्ह्ह्ह मुझे नहीं करना”
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”कोई बात नहीं मैं सीखा दूंगा”
पृथ्वी ने प्लेट में रखा फ्राइज का एक टुकड़ा उठाया और अवनि के होंठो के बीच रख दिया। अवनि एकटक पृथ्वी को देख रही थी।

पृथ्वी उस फ्राइज के आधे टुकड़े को खाने के लिए जैसे ही अवनि के करीब आया अवनि ने उसे पूरा खा लिया ये देखकर पृथ्वी ने अफ़सोस में अपना सर झटका और पीछे होकर कहा,”हाह ! इतनी रोमांटिक राइटर होकर भी तुम इतनी अनरोमांटिक कैसे हो सकती हो अवनि ?”
कहकर पृथ्वी ने प्लेट में रखे फ्राइज उठाये और मायूस होकर खाने लगा।

अवनि ने देखा तो दूसरी प्लेट में रखे खाने से एक निवाला उठाकर पृथ्वी को खिलाते हुए कहा,”प्यार जताने का हर किसी का अपना तरीका होता है पृथ्वी”
“किसी दिन कोई और मुझे अपनी अदाओ से फसाकर ले जाएगी और तुम प्यार जताते रह जाओगी”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने निवाला पृथ्वी को खिलाया और कहा,”वो दिन कभी नहीं आएगा मुझे खुद से ज्यादा आप पर यकीन है”

“यही तो बात है ना अवनि ! मैं तुमसे इतना प्यार करता हूँ कि किसी की तरफ देखना तो दूर , किसी का ख्याल भी मेरे जहन में नहीं आता और इसलिए तुम मुझे इतना सताती हो,,,,,,,,,,,,नखरे दिखाती हो”,पृथ्वी ने बच्चो की तरह मचलकर कहा

“मैं खुशनसीब हूँ पृथ्वी जिसे आपका प्यार मिला , अब आप ही बताईये जिसके पास इतना प्यार करने वाला शख्स होगा वो थोड़े नखरे तो दिखाएगी ना”,अवनि ने शरारत भरे स्वर में कहा
“अरे भाई दिखाओ ना , मैं हूँ ना तुम्हारे नखरे उठाने के लिए,,,,,,,,,,,मैं जिंदगीभर उठाऊंगा तुम्हे भी और तुम्हारे नखरे भी”,कहते हुए पृथ्वी उठा और अवनि को अपनी गोद में उठाकर वहा से ले गया जहा उसने अवनि के लिए कुछ और भी सरप्राइज रखा था।

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
मिस्टर देसाई अपने केबिन में बैठकर काम कर रहे थे। भरत भी एक नयी कम्पनी के साथ मीटिंग खत्म करके अपने केबिन में आया था और केबिन में आते ही लीगल टीम हेड ने एक लिफाफा भरत की तरफ करके कहा,”ये शर्मा ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज से एक नोटिस आया है और आज शाम उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी है। आप ये नोटिस देखकर इसमें क्या लिखा है वो देसाई सर से डिस्कस कर लीजिये”

“लीगल नोटिस देखना तुम्हारा काम है या मेरा ?”,भरत लीगल हेड पर चिल्ला उठा क्योकि सुबह से ऑफिस के आधे से ज्यादा काम और मीटिंग्स अब उस पर आ चुके थे और वह इनसे चिढ़ने लगा था

“ऑफकोर्स इस कम्पनी के सारे लीगल वर्क और नोटिस देखने का काम मेरा है लेकिन ये आपका पर्सनल नोटिस है मिस्टर भरत , मिस्टर शर्मा से आपने पिछले महीने ही 10 लाख एडवांस लिए थे जिसके बदले में आप उन्हें मेंटेरियल भेजने वाले थे लेकिन नहीं भेजा , उसके बाद आप मौर्या ग्रुप के तीन प्रोजेक्ट उन्हें हेंडओवर करने वाले थे लेकिन आपने वो भी नहीं किया और आज सुबह ही मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी ने अपनी 6 डील्स केंसल कर दी”,लीगल हेड ने बहुत ही शांति से कहा

“ये तुम्हे कैसे पता ?”,भरत ने हैरानी भरे स्वर में कहा क्योकि उसके और चेतन के अलावा ये बात किसी को नहीं पता थी। यहाँ तक कि भरत ने मिस्टर देसाई तक को इस बारे में नहीं बताया था बल्कि आज लंच के बाद वह खुद मोर्या ग्रुप जाने वाला था जयदीप से बात करने,,,,,,,,,,,,!!

“मुझे खुद मिस्टर शर्मा ने ये इन्फॉर्मेशन दी है कि मौर्या ग्रुप की जो डील्स आप उन्हें देने वाले थे वो अब मिस्टर जयदीप डायरेक्ट उन्हें सबमिट कर रहे है इसलिए मिस्टर शर्मा हमारी कम्पनी से सारे बिजनेस रिलेशन खत्म करके अपना एडवांस वापस चाहते है और इसी के लिए उन्होंने ये कॉन्फ्रेंस मीटिंग रखी है जिसमे आपका और मिस्टर देसाई का शामिल होना बहुत जरुरी है , अगर आप ये कॉन्फ्रेंस अटेंड नहीं करते है तो आपको चार गुना रकम शर्मा ग्रुप को लौटानी होगी”,लीगल हेड ने कहा

भरत ने जैसे ही सुना उसके पाँव के नीचे से जमीन खिसक गयी ! वह इस कम्पनी में MD जरूर था लेकिन कोई भी चेक क्लियर करने या पैसे का लेन देन करने के लिए उसे मिस्टर देसाई की इजाजत लेनी ही पड़ती थी। उसका सर फटने लगा और गुस्से से चेहरा लाल हो गया उसने चिल्लाकर कहा,”व्हाट द हेल ? ये कैसे हो सकता है ? शर्मा ग्रुप पिछले 15 सालो से देसाई ग्रुप के साथ काम कर रहा है फिर अचानक वह इतना बड़ा डिसीजन कैसे ले सकता है ?”

“आई डोंट नो सर,,,,,,,,,,लेकिन अगर आपने जल्दी ही इसका सोलुशन नहीं निकाला तो आप एक बड़ी मुसीबत में पड़ सकते है”,लीगल हेड ने कहा और वहा से चला गया
भरत ने अपना सर पकड़ लिया कहा वह इस कम्पनी पर कब्जा करना चाहता था और कहा एक के बाद एक मुसीबत आती जा रही थी। जयदीप इतना मास्टरमाइंड निकलेगा ये उसने कभी सोचा नहीं था जबकि वह नहीं जानता था कि जयदीप तो बस जरिया था जबकि ये सब करवा कोई और रहा था।

भरत के दिमाग ने अब लगभग काम करना बंद कर दिया था। प्राची के कहने पर पृथ्वी का रिजाइन लेकर उसने पहली गलती की और जयदीप से दुश्मनी बढ़ा ली , प्राची के मैनेजर कम ऑफिस के सबसे इंटेलिजेंट एम्प्लॉय नीलेश को ये ऑफिस छोड़ने पर मजबूर कर दिया और अब उसे ढूंढने का काम भी मिस्टर देसाई ने भरत को ही दिया जो कि उसकी दूसरी गलती थी।

बड़ी बड़ी कम्पनीज से एडवांस लेकर मिस्टर देसाई को धोखे में रखा ये तीसरी गलती की और सबसे बड़ी गलती की प्रवीण पर झूठा इल्जाम लगाकर क्योकि प्रवीण ही था जो उसे इन सब मुसीबतो से बाहर निकाल सकता था लेकिन उसे भी उसने जलील करके निकाल दिया। लीगल टीम हेड से भरत ने हाथ मिलाया लेकिन उसे भरत की मुसीबतो में ख़ास दिलचस्पी नहीं थी उलटा वह आकर हर बार भरत के जख्मो पर नमक ही   छिड़क रहा था।

भरत ने अपना सर पकड़ लिया और आकर सोफे पर बैठ गया। उसने फोन करके एक कॉफी भिजवाने को कहा और सोचने लगा कि इस नयी मुसीबत से छुटकारा कैसे पाए ? कुछ देर बाद कॉफी आयी ! कॉफी पीकर भरत ने अपनी आँखे बंद की और गर्दन पीछे लुढ़का ली। उसके जहन में एक साथ सब चल रहा था और सहसा ही उसे अपनी प्रॉब्लम का एक सोलुशन मिला।

वह मुस्कुराया और उठकर खुद में ही बड़बड़ाकर कहा,”आज शाम की कॉन्फ्रेंस मीटिंग से पहले अगर मैं जयडीप को ही खरीद लू तो,,तो ये सब एकदम इजी हो जाएगा। मिस्टर शर्मा के पास इस कम्पनी के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचेगा और मिस्टर देसाई तक ये बात पहुंचने से पहले पहले मैं उनसे इस कम्पनी के पेपर्स पर साइन ले लूंगा उसके बाद कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता,,एक एक करके सबको धक्के मारकर इस कम्पनी से बाहर करूंगा”
एक रहस्य्मयी मुस्कान भरत के होंठो पर तैर गयी और उसने शर्मा ग्रुप से आये नोटिस को फाड़कर डस्टबिन में डाल दिया।

सिरोही रेलवे स्टेशन , राजस्थान
“पापा मेरी बात तो सुनिए , आप लोग जो समझ रहे है वैसा कुछ भी नहीं है मैंने कुछ गलत नहीं किया है। प्लीज मेरी बात का विश्वास कीजिये हम दोनों अच्छे दोस्त है बस”,ट्रेन के अंदर बैठी सुरभि ने रोते हुए अपने पापा से कहा
“यारी दोस्ती करने के लिए तुझे यहाँ भेजा था। वहा पुरे उदयपुर में पहले ही तुम्हारा नाम उस अनिकेत के साथ उछला हुआ है और अब यहाँ ये लड़का,,,,,,,,,,,,,तुम्हे जरा भी शर्म नहीं है सुरभि ? क्या इस दिन के लिए सबके खिलाफ जाकर तुम्हे इतना पढ़ाया लिखाया और नौकरी करने घर से दूर भेजा था ?”,सुरभि के पापा ने सुरभि को फटकार लगाकर कहा

“सारा गाँव समाज म तू म्हारी नाक कटवा दी छोरी”,चाचा ने कहा
सुरभि आँसू बहाते हुए चुपचाप सबकी बाते सबके ताने सुन रही थी। कोई उसे अपनी बात रखने का मौका ही नहीं दे रहा था और वह बस सोच रही थी कि ऐसा तो क्या गलत कर दिया उसने जो उसे इतनी बड़ी सजा मिल रही है।
“कान खोलकर सुन ले सुरभि , बहुत हो गयी नौकरी बहुत कर ली मनमानी ! अब तेरो ब्याह बठे होगो जठे मेह चावंगा”,सुरभि की मम्मी ने कहा तो सुरभि का दिल धड़क उठा और चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये

उसने कहा,”मैं कोई भेड़ बकरी कोनी जो थे लोग मन जठे चाहो बठे बाँध देओगा,,,,,,,,,,मैं कुछ गलत ना करि हूँ पापा,,,,,,,,,,,,,मन्ने पुरो हक़ अपनों जीवनसाथी चुनने को और वो मैं चुन ली,,,,,,,,,,,,आप लोग पूछ रया हो कुण है ओह्ह छोरो तो प्यार करू मैं आ स और ब्याह भी आ स ही करुँगी,,,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि की बात सुनकर सब हैरानी से उसे देखने लगे और सुरभि उठकर गुस्से से वहा से चली गयी।

चलती ट्रेन में सुरभि उतरकर कहा जाएगी ये सोचकर घरवालों ने उसे नहीं रोका लेकिन सुरभि रुकी और पलटकर कहा,”चिंता मत करो भाग कर कोनी जाऊ ब्याहकर जाउंगी”
सुरभि चली गयी तो उसकी मम्मी ने रोते हुए कहा,”आ छोरी तो महारो नाम खराब करन की ठान ली है सुरभि का पापा”
“तू चिंता ना कर एक बार उदयपुर पहुंचा बिके पछ इह स बात करा , कही गुस्सा म आकर कोई गलत कदम ना उठा ले इह वास्ते शांत रो थोड़ी देर”,इस बार सुरभि के फूफा ने कहा जो कि थोड़े समझदार दिखाई पड़ रहे थे

घरवालो से हुई गर्मागर्म बहस के बाद सुरभि ट्रेन के बाथरूम की तरफ चली आयी और ट्रेन के दरवाजे के पास खड़ी होकर हवा खाने लगी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसका फोन उसके पास नहीं था , सिद्धार्थ का नंबर भी उसे याद नहीं था जिस से वह उसे कुछ बता सके। कुछ देर खड़े रहने के बाद सुरभि वाशबेसिन के सामने आयी और अपना मुँह धोने लगी। मुँह धोकर सुरभि ने शीशे में खुद को देखा तभी पास खड़े अनिकेत ने कहा,”कैसा लगा मेरा सरप्राइज ? सिरोही से सीधा उदयपुर,.,,,,,,,,,,,,,,!!!”

सुरभि ने गर्दन घुमाकर देखा तो पाया दरवाजे के पास खड़ा अनिकेत उसे देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था।  

( क्या नीलेश के दिमाग में है कोई प्लान जिसके बारे में जयदीप नहीं जानता ? क्या अवनि जतायेगी सबके सामने पृथ्वी के लिए प्यार ? क्या भरत हो पायेगा सफल अपनी चाल में ? आखिर अनिकेत ने क्यों बताया सुरभि के घरवालों को उसके और सिद्धार्थ के बारे में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal
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4 comments

Kshmata chauhan August 13, 2026 - 10:49 am

Mera guss sahi nikla…yeh sab Aniket ka kiya dhara hai…yr phele Siddarth esa tha tab yeh Aniket sahi aur ab yeh Siddarth sahi hua hai to iss Aniket ne apna asli rang dikha diya…saare ladke ek jaise hote kutte…bas kuch ko chod kar…jaise hamara hero Prithvi…ab to Surbhi ko iss Aniket ko muh tod jawab dena chahiye…lakin shant hokar…aur ab Prithvi aur Avni bhi jaldi wapas aa jao… Surbhi ko tum dono ki jarurat hai…aur yeh Bhart khud ko kya samjhta hai.. yeh Jaideep ko kreedega…iski aukat hai itni…kutta aadmi hai yeh…bas ab iski band bajni chahiye…part bahot badhiya hai…bas Surbhi k liye bura lag rha hai.

Reply
Nency Patel August 13, 2026 - 6:25 pm

Yeh aniket to sala madarchod nikla matlab khud shadi shuda hai aur surbhi ke pichche kha pike pada hai yeh bat surbhi ko uski wife ko batani chahiye tabhi iss besharm ki akal thikane aayegi but I don’t think so iski akal thikane aayegi kyuki iski akal to ghas charne gayi hai

Reply
Akankchha August 13, 2026 - 10:57 pm

Ye ghatiya kaam aniket ka hi ho skta tha yha isse bda chutiya hai hi kon bhla
Angur khatte hai wala haal h
Surbhi mili nhi toh usi pe iljam lga diya

Reply
Pooja August 14, 2026 - 4:18 am

Kahi chalti train se dhakka hi na mar de surbhi aniket ko or maar hi de to achha h

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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