Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 28

by Story With Sanjana September 5, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 28

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गोलू ख़ुशी से फुला नहीं समा रहा था और गुड्डू उसे देखकर मन ही मन दुखी हो रहा था। वह गोलू को सच बताने के लिए उसकी तरफ बढ़ा ही था कि मंगल फूफा से जलता भुनता नवरतन गुड्डू के बीच में आ गया और गुड्डू लड़खड़ा कर मुँह के बल जमीन पर गिर पड़ा। गोलू ने गुड्डू को नीचे गिरे देखा तो उसे उठाते हुए कहा,”अरे गुड्डू भैया ! आप का हिया धरती माँ को परनाम कर रहे है , आईये हमाये साथ आँगन मा माहौल बनाते है”
गुड्डू उठा और पीछे देखकर चिल्लाया,”धक्का कौन मारा बे ?”

“अरे जान दयो गुड्डू भैया ! जोन हिसाब से आपकी हमायी जिंदगी चल रही है आये दिन धक्के लगते ही रहते है। इह सब छोड़िये और चलिए बाहिर मिश्रा जी कहकर गए है ठंडा लेकर आएंगे हमायेलिए ,,,,,,,,,काहे गरम होय रहे है चलिए ठंडा पिलाते है आपको”,गोलू ने कहा

“ए गोलू सुनो ! हमे ना तुमको बहुते जरुरी बात बतानी है , जोन पिरोगराम की बात तुमहू कर रहे हो ना उह्ह उह्ह पिरोगराम नाही है जोन तुमहू समझ रहे हो”,गुड्डू ने दबे  पास ही खड़े आदर्श फूफा ने सुन लिया और मन ही मन बड़बड़ाये,”जे साला गुडडुआ तो हमाओ पुरो मजो खराब कर दिहिस , अरे हमहू तो खुद चाहते है इह साले गोलुआ की आज मिश्रा तबियत से सुताई करे तो हमाये कलेजे को ठंडक पड़े , का है कि जे के अंदर बहुते बड़ा कीड़ा है कांड करने का,,,,,,,,,,पर इह ससुरा गुड्डू जे का पहिले ही सब बताय के चेताय दे रहा है , इह हम ना होने देंगे”

गुड्डू ने गोलू से जो भी कहा वह गोलू के सर के ऊपर से गया क्योकि उसके सर पर तो फिलहाल पिरोगराम का भूत सवार था ! वो मिश्रा जी जो गोलू को गाहे बगाहे जब चाहे सूत दिया करते थे , वे खुद गोलू के लिए आज महफ़िल सजाने वाले थे और ये जानकर गोलू पगलाए नहीं ये भला कैसे हो सकता है ? गोलू ने गुड्डू के कंधे पर हाथ रखा और बहुत ही इत्मीनान से कहा,”का गुड्डू भैया ! तबियत तो ठीक है ना आपकी ?”

“जे पिरोगराम की बात सुनकर ना तुमहू पगलाय गए हो गोलू ! मरो बाद मा हमे नाही कहना कि हमने बताया नहीं”,गुड्डू ने खीजकर कहा और पैर पटकते हुए बाहर आँगन की तरफ चला गया
गोलू गुड्डू की बात में दिमाग लगाता इस से पहले आदर्श फूफा आ टपके और कहा,”अरे गोलू हिया खड़े का कर रहे हो ? सब तो बाहिर है , शायद तुम्हरा ही इन्तजार कर रहे है”

“हमरा इंतजार काहे ?”,गोलू ने कहा
“अरे आज के पिरोगराम की सान तुम्ही तो हो”,आदर्श फूफा ने कहा
“ल्यो जे ही बात हमहू गुड्डू भैया से कहे तो उह्ह्ह बिदककर भाग खड़े हुए”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा
“अरे उह्ह्ह साला तुमसे जलता है”,आदर्श फूफा ने भी मुँह बनाकर कहा

“हमसे काहे जलेंगे गुड्डू भैया ? हमाये से जियादा सुन्दर सकल दी है भगवान ने , हमाये से अच्छी बॉडी है , हमाये से जियादा जायदाद है और तो और  मेहरारू भी हमाये से जियादा समझदार मिली है फिर गुड्डू भैया हमाये से काहे जले है ? ए फूफा हमाये और गुड्डू भैया के बीच मा आग तो नहीं लगाय रहे ना तुमहू ?”,गोलू ने चिढ़कर कहा
“हम काहे लगाएंगे आग ? अरे माना गुडडुआ के पास इह सब तुमसे जियादा है पर दिमाग तो तुम्हाये पास जियादा है ना , तबही ना मिश्रा आज तुम्हाये लिए पिरोगराम रखे है”,आदर्श फूफा ने गोलू के कंधो पर अपनी बाँह रखकर दबे स्वर में कहा

तारीफ सुनकर गोलू महाराज फ़ैल गए और कहा,”बात तो तुम्हायी सही है फूफा , तबही गुड्डू भैया आज हमसे उखड़े उखड़े घूम रहे है”
“करे जान दयो गुड्डू को आओ आँगन मा चलते है”,आदर्श फूफा ने कहा और गोलू को साथ लेकर आँगन में चले आये जहा सीढ़ियों पर पहले ही शर्मा जी , शर्माईन , गुप्ता जी , गुप्ताइन , बिंदिया , लवली , गुड्डू , शगुन और वेदी बैठी थी।

राजकुमारी भुआ एक तरफ खड़ी  मिश्राइन को कुछ समझाने की नाकाम कोशिश कर रही थी क्योकि राजकुमारी बोल कम रही थी और सुबक ज्यादा रही थी। वही सीढ़ियों के नीचे आँगन में खड़े नवरतन और मंगल फूफा के बीच रूपा को लेकर अलग ही शीत युद्ध चल रहा था। रूपा अपने दोनों हाथ बांधे एक तरफ खड़ी थी , नवरतन और मंगल फूफा उसके पास खड़े होने के लिए झगड़ रहे थे।

गोलू ने देखा तो उन तीनो की तरफ आया और चिल्लाकर कहा,”अरे का चिरकुट भाँडो की तरह लड़ रहे हो तुम लोग , रूपा के साथ अब हम खड़े होंगे”
जैसे ही गोलू ने रूपा का नाम लिया सीढ़ियों पर बैठे सब लोग एक साथ चिल्लाये,”गोलूउउउउउउउउ”
आदर्श फूफा ने सुना तो सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए कहा,”लयो ! हमहू तो पहिले ही कहे थे कि इह रूपा जे घर के मर्दो का सत्यानाश करके रही है , सम्हालो रूपा रानी के एक और नवे आशिक़ आ गए है मार्किट मा”

आदर्श फूफा की बात सुनकर गोलू चिल्लाया,”ए फूफा ! का बक रहे हो ? अरे हमहू कह रहे है कि अब कोई रूपा के लिए नाही लड़ेगा , ना ही कोई जे का परेशान करि है , कल फैसला होने तक हमहू रूपा की साइड है ओह्ह्ह के छोटे भाई बन के,,,,,,,,,,,,,,फूफा छोटे , छोटे भाई , ठीक है ?”
कहते हुए गोलू ने हाथो से इशारा करके आदर्श फूफा से कहा तो आदर्श फूफा मुँह बनाकर दूसरी तरफ देखने लगे।

बिंदिया तो ये सब देखकर उलझन में थी उसे नहीं समझ आ रहा था कि यहाँ हो क्या रहा है और क्यों सब यहाँ इक्क्ठा हुए है। वह तो बस सुबह होने का इंतजार कर रही थी ताकि मिश्रा जी से बात करके लवली के साथ अपने घर वापस जा सके लेकिन यहाँ तो अलग ही नौटंकी चालू थी। आदर्श फूफा और बाकि सबको समझाकर गोलू रूपा की तरफ पलटा तो देखा मंगल फूफा और नवरत्न फिर उस से चिपक गए है।

गोलू उन दोनों के पास आया और उनको रूपा से अलग करके इधर उधर फेंका और रूपा से कहा,”तुम का माधुरी दीक्षित बनके खड़ी हो , जे चाण्डालों को मना नाही कर सकती”
रूपा ने सुना तो मुँह बना दिया गोलू ने हाथ के इशारे से उसे जाकर बैठने को कहा तो रूपा अपनी चोटी घुमाते हुए आदर्श फूफा के बगल में जा बैठी। कहा भुआ सुबकते हुए मिश्राइन को समझा रही थी और कहा आदर्श फूफा के बगल में रूपा को बैठे देखकर अपने दोनों हाथ अपनी ही छाती पर मारकर जो चिल्लाई है ,

एक बार के लिए सब डर गए लेकिन कोई कुछ समझ पाता इस से पहले ही भुआ अपनी छाती पीटती हुई वहा से चली गयी और आदर्श फूफा ने अपना सर पकड़ लिया क्योकि इतने लोगो ने सिर्फ उन्हें ही समझ आया था कि भुआ को क्या हुआ है ? लेकिन फूफा इतने बद्तमीज कि उठकर भुआ को मनाने भी नहीं गए क्योकि भुआ से बड़ी इम्पोर्टेन्ट चीज तो आज उनके लिए गोलू था !

गोलू ने देखा सब आ चुके है लेकिन मिश्रा जी नहीं आये है तो उसने कहा,”अरे यार जे मिश्रा जी कहा रह गए ? वक्त निकल रहा है आये और पिरोगराम सुरु करे ! ऊपर से जे दानवो की फौज और इक्क्ठा कर लेइ,,,,,,,,,,,अरे मिश्रा जी ओह्ह्ह्ह चचा,,,,,,,,,,अरे कहा रह गए ?”
गोलू की आवाज सुनकर मिश्रा जी बाहर आये और अपने तख्ते पर आ बैठे। मिश्रा जी को देखते ही गोलू का चेहरा खिल उठा !

गोलू ख़ुशी से भरकर मिश्रा जी के पास आया और कहा,”हाँ चचा ! अब बताओ जे सबको कि आज आपने इह पिरोगराम काहे रखा है ?”
“बताते है , बताते है , पहिले पैर छूकर आशीर्वाद तो लेइ लयो”,मिश्रा जी ने बिना किसी भाव के कहा
“चचा ! लगता है कोनो धार्मिक पिरोगराम रखे हो , अब हिया तो उम्र मा आप ही सबसे बड़े है तो शुरुआत पहिले आप ही से करते है”,कहते हुए गोलू जैसे ही मिश्रा जी के पैर छूने के लिए झुका मिश्रा जी ने आशीर्वाद की जगह अपनी कोहनी गोलू की पीठ पर मारी और गोलू रायते की तरह मिश्रा जी के पैरों में फ़ैल गया     

मिश्रा जी का ये रूप देखकर गुप्ताइन , शर्माईन और बिंदिया जहा हैरान थी तो वही शगुन के चेहरे पर तकलीफ के भाव थे। गुड्डू और लवली निराश होकर एक दूसरे को देख रहे थे तो वही गुप्ता जी और शर्मा जी इशारो इशारो में मिश्रा जी से दो चार और लगाने को कह रहे थे। मिश्राइन तो खुद गोलू के काण्ड सुनकर भरी पड़ी थी। रूपा को कोई खास फर्क नहीं पड़ा और आदर्श फूफा ख़ुशी से उछलकर लगभग रूपा की गोलू में ही आ गिरे लेकिन जैसे ही मिश्रा जी की जलती नजरो ने आदर्श फूफा को देखा वे सम्हलकर बैठ गए।  

नवरतन हैरान परेशान सा कभी नीचे गिरे गोलू को देखता तो कभी मिश्रा जी और बचे मंगल फूफा तो उन्हें गोलू पर दया आयी और वे उसे उठाने मिश्रा जी की तरफ आये लेकिन मंगल फूफा की किस्मत तो गोलू से भी ज्यादा बुरी थी। वे गोलू तक पहुंचते उस से पहले ही उनका पैर फिसला और वे गोलू पर जा गिरे। मंगल फूफा कद में भले कम हो लेकिन वजन बहुत था उनमे , जैसे ही गोलू पर गिरे गोलू की तो जैसे जान ही निकल गयी। जैसे तैसे करके उसने साँस ली और मरे हुए स्वर में मंगल फूफा से कहा,”अबे मंगलू ! अबे तुम हमको बचाने आये हो या मारने,,,,,,,,,,,,!!!”

मंगल फूफा खुद नहीं उठ पाए तो मिश्रा जी ने मंगल फूफा की गुद्दी पकड़कर उन्हें उठाया और साइड में करके कहा,”तुमको बड़ी जल्दी है,,,,,,,,सब्र करो तुम्हे
 नंबर भी आहि है,,,,,,,,तुम्हाये गोलू महाराज पहिले पेटभर खाय ले ओह्ह्ह के बाद तुम्हरा ही नंबर है,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा ने सुना तो मिश्रा जी के डर से कांपने लगे , वे चुपचाप वहा से खिसकने को हुए तो मिश्रा जी ने कड़ककर कहा,”ए बइठो हिया चुपचाप”

मंगल फूफा रोते हुए हाथ जोड़े वही मिश्रा जी के पैरों के पास उकडू बैठ गया और गोलू से कहा,”ए गोलुआ ! ए साला तुम पर भरोसा करके ही गलती कर दी हमने,,,,,,,,,,,हमको तुम्हाये साथ हिया आना ही नाही चाहिए था”
गोलू जैसे तैसे करके अपनी पीठ सहलाते हुए उठा और मिश्रा जी से कहा,”इह परसादी देने से पहिले जे तो बताय दयो हमायी गलती का है ?”

मिश्रा जी मुस्कुराये , गोलू भी मुस्कुराया , मिश्रा जी फिर मुस्कुराये , गोलू भी फिर मुस्कुराया तो मिश्रा जी चिढ गए और एक  थप्पड़ गोलू के गाल पर रसीद करके कहा,”का नौटंकी चल रही है का हिया ?”
गोलू मिश्रा जी के सामने से उठा और पीछे हटकर उछलकर कहा,”अरे हम पूछ रहे है आखिर हमायी गलती का है ? एक तो पिरोगराम के नाम पर हमे हिया बुलाया और अब सुताई कर रहे है,,,,,,,,,,,,,आखिर किया का है हमने ?”
“ए गोलू बिटवा ! हिया आवा बऊआ , हम बतावत है”,मिश्राइन ने बड़े प्यार से कहा

गोलू ने सुना तो मिश्रा जी तरफ देखा और बिफरकर कहा,”सीखो चाची से कुछो ! देखा कित्ता पियार से बोल रही है जैसे जुबान मा शहद घोल ली है,,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी से कहकर गोलू ने मिश्राइन की तरफ देखा और उनकी तरफ जाते हुए कहा,”आवत है चाची ! जे घर मा एक आप ही है जोन हमाओ दुःख दर्द पीड़ा समझ सकत है,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू मिश्राइन की तारीफों के पूल बांधते हुए उनके सामने आ खड़ा हुआ और मिश्राइन को देखकर मुस्कुराया ,

जवाब में मिश्राइन भी मुस्कुराई तो गोलू फिर मुस्कुराया लेकिन इस बार मिश्राइन नहीं मुस्कुरायी बल्कि तड़ातड़ चाँटे गोलू के गालों पर बरसा दिए। गोलू तो बोखला ही गया , उसे समझ ही नहीं आया कि जिस जबान से शहद टपक रहा था अब उसी जबान से गोलू को प्यारी प्यारी गालियाँ कैसे पड़ने लगी ?
गोलू को पड़े थप्पड़ो की आवाज सुनकर बेचारे गुड्डू ने तो अपने दोनों कानो पर हाथ ही रख लिए और सर झुका लिया क्योकि यहाँ बैठे आधे लोगो को पता था गोलू की बेंड क्यों बज रही है ?

गोलू ने अपने दोनों हाथो को अपने दोनों गालों पर रखा और मिश्राइन की तरफ देख रोआँसा होकर कहा,”ए चाची ! इह कौनसा नवा तरीका ढूंढी हो बात बताने का  ? अरे मिश्रा जी हमको मारे उह्ह्ह समझ आता है पर आप काहे हमाये ऊपर हाथ साफ़ की ?”
“जे बिंदिया को शादी से उठाने का आइडिआ किसका था ?”,मिश्राइन ने गोलू को घूरकर पूछा तो गोलू के दिल की धड़कने रुक गयी। अब उसे समझ आया कि ये प्रोग्राम उसे शाबासी देने के लिए नहीं बल्कि उसकी बुद्धि सही करने के लिए रखा गया था।

गोलू ने मायूसी से गुड्डू की तरफ देखा तो गुड्डू गोलू को नजरअंदाज करके आसमान की तरफ देखने लगा जैसे उसने कुछ देखा सुना ही ना हो। गोलू समझ गया इसलिए उसने लवली की तरफ देखा लेकिन लवली ने भी दूसरी तरफ देखा तो गोलू चिढ गया उसने मिश्राइन से कहा,”एक मिनिट हमहू आते है”

गोलू गुड्डू और लवली के सामने आया और ताली बजाकर कहा,”वाह गुड्डू भैया वाह , हर काण्ड मा हमाये साथ होते थे और आज जब हमको अकेले थप्पड़ पड़ रहे है तो आप हुआ आसमान मा देख रहे है,,,,,,,,,,,,,,,,अरे का देख रहे है वहा ? हमाये लिए जगह,,,,,,,,,,,,,,,,,,लेकिन साथ मा अपने लिए भी देख लेना का है कि अकेले तो नर्क नाही जायेंगे हमहू,,,,,,,,,,,,,,!!!!” 

गुड्डू पर अपने मन की भड़ास निकालकर गोलू आया लवली के सामने और कहा,”और आप लवली भैया ! इह था आपका फेयर डिसीजन,,,,,,,,,,,,साला कांड सब मिलकर करे और जब सुताई हो तो गोलू को आगे कर दो,,,,,,,,अरे हमने बिंदिया भाभी को उठाने को कहा तो मना कर सकते थे ना आप , फिर काहे नाही किया ?”
“हमे माफ़ कर दो गोलू”,लवली ने धीरे से कहा

गोलू बिदककर पीछे हटा और कहा,”माफ़ कर दे ? अरे हिया जे सब मिलके हमे साफ़ कर रहे है और आप कह रहे हो माफ़ कर दो,,,,,,,,,,,,,अच्छा धोखा दिया हमको लवली भैया , जिंदगी मा साला आज के बाद किसी की मदद नाही करेंगे”
कहते कहते गोलू रोने लगा तो मिश्रा जी ने थोड़ा प्यार से कहा,”ए गोलू ! उह्ह्ह जरा हमायी बाटा की चप्पल तो देना बचुआ”
“नाही चचा ! हमहू अभी अभी कसम खाये है आइंदा किसी की मदद नाही करेंगे”,गोलू ने सुबकते हुए कहा

“अरे तो हमहू कहा मदद मांग रहे है तुमसे , तुमहू हमको चप्पल दो हमहू बदले मा कुछो देंगे तुमको”,मिश्रा जी ने उतने ही प्यार से कहा
 गोलू ने सुना तो सुबकते हुए चप्पल उठायी और मिश्रा जी की तरफ चला आया। अब गोलू के साथ रहते रहते मंगल फूफा का भी मानसिक संतुलन हिल चुका था इसलिए उन्होंने सोचा मिश्रा जी गोलू को जो दे रहे है क्यों है न वह भी थोड़ा सा अपने लिए मांग ले तो उसने अपने दोनों हाथ फैलाकर मिश्रा जी से कहा,”ए मिश्रा जी ! गोलू को जो दे रहे है उसमे से थोड़ा हमको भी दीजिये ना”

“गोलुआ को जो दे उह्ह्ह तुमको भी चाही ?”,मिश्रा जी ने पूछा
“हाँ चाही चाही चाही हमका भी चाही”,मंगल फूफा ने हाथ फैलाकर गिड़गिड़ाकर कहा
गोलू ने सुना तो मुँह बनाकर कहा,”देखा चचा ! जब मार खा रहे थे तब इह बुटका नाही बोला कि थोड़ी हमको दो , अब आप मदद के बदले मा हमे कुछो दे रहे है तो कैसे दोनों हाथ फैला दिए”
“तो का हो गवा थोड़ा ही तो माँगे है”,मंगल फूफा ने चिढ़कर कहा

मिश्रा जी ने मंगल फूफा की तरफ देखा और कहा,”अरे थोड़ा काहे ! गोलुआ को जितना मिली है ओह्ह्ह का दुगुना देंगे तुमको”
मंगल फूफा ने सुना तो ख़ुशी से भरकर उठे और अपनी छाती पीटते हुए कहा,”हम तैयार है”

( तो दोस्तों अब आप ही बताईये मिश्रा जी की ये बाटा की चप्पल आखिर किस काम आती है ? )

Continue With Manmarjiyan Season 5 – 30

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संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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