Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 42

by Story With Sanjana October 5, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 42

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गुप्ताइन ने गुस्से में आकर जो खाना गुप्ता जी को दिया वो खाना गुप्ता जी ने बेचारे मंगल फूफा को खिला दिया। मंगल फूफा ने जैसे ही एक निवाला खाया उनके कान से धुआँ निकलने लगा और मुँह मिर्च से जलने लगा। उन्होंने मुश्किल से मुँह में चबाया निवाला निगला और आँखों में आँसू भरकर गुप्ता जी की तरफ देखकर कहा,”इह का गुप्ता जी ! कौनसे जन्म का बदला ले रहे आप हमसे जो इत्ता जहरीला खाना खिलाये रहे ? अरे जे से अच्छो तो हमे थोड़ो जहर खिलाय देते तो चैन से मर तो जाते हम,,,,,,,,,,!!!!”

“यही तो हमहू नाही चाहते मंगलू कि तुमहू मरो , और तुमहू काहे मरोगे बे ? मरे उह्ह्ह तुम्हरा सौतन जानकीनाथ जो तुम्हरी रूपा को तुम से छीन के ले गवा,,,,,,,,,अरे हम तुमको जे खाना इह वास्ते खिलाये रहय कि जे का खाकर तुम्हरा गुस्सा ठंडा पड़ने के बजाय बढ़ जाए , याद करो कैसे रूपा तुम्हरे सामने उह्ह्ह जानकीनाथ का हाथ पकड़ी रही , याद करो”,गुप्ता जी ने मंगल फूफा के सीने में जलती आग को हवा देते हुए कहा

मंगल फूफा बेचारे सीधे और थोड़े से बेवकूफ भी , आ गए गुप्ता जी की बातो में और गुस्से गुस्से में एक निवाला तोड़कर फिर खा लिया ये देखकर गुप्ता जी खुश क्योकि उनकी इस थाली का खाना खत्म करने का जिम्मा अब मंगल फूफा पर आ गया। मंगल फूफा की नाक बहने लगी , आँखों से आँसू बहने लगे और होंठ जलने लगे ,, कही वह पीछे ना हट जाए सोचकर गुप्ता जी ने फिर कहा,”याद करो मंगलू कैसे तुम्हाये प्यार की धज्जिया उड़ाकर उह्ह्ह रूपा सबके सामने तुम्हायी छाती पर पैर धर के चली गयी”

मंगल फूफा और जोश में आ गए और इस बार सीधा एक पूड़ी आधी सब्जी गटक ली और हलवे पर जो हाथ मारा तो तीन चौथाई हलवा सीधा उनके मुँह में लेकिन अगले ही पल उनका मुँह बन गया और उन्होंने गुप्ता जी से कहा,”यह तो नमकीन है”


गुप्ता जी ने सुना तो मन ही मन बड़बड़ाये,”इह गुप्ताइन भी लगता है आज हमाओ बीपी बढ़ाने की ठान लेइ है”
उन्होंने देखा मंगल फूफा बेमन से हलवे को चबाये जा रहे है रहे तो कहा,”अरे नमकीन कहा है मंगलू , हलवा तो मीठा ही होता है उह्ह्ह का है तुम्हरा दुःख जियादा है ना तो तुम्हरे आँसू जे मा गिरकर नमकीन बनाय दिए रहय,,,,,,,,,तुमहू रुक काहे गए  खाओ ना”  

गोलू एक नंबर का बंडलबाज और उसके पिताजी उस से भी बड़े बंडलबाज , वो अपनी बातो से किसी को बोतल में उतारे और कोई ना उतरे ये तो पॉसिबल ही नहीं था। उन्होंने देखा मंगल फूफा पर उनकी बात का असर नहीं हुआ है और मंगल फूफा अपनी जबान बाहर निकाले सी सी कर रहे है तो उन्होंने कहा,”अरे भूल गए का मंगलू ? कैसे तुम्हायी रूपा ने कानपूर मा आकर सबके साथ धड़ाधड़ खाते खोले और FD करवाई उह्ह्ह जानकीनाथ के साथ,,,अरे तुमहू हिया रूपा के लिए सपने बुनते रहे और उह्ह्ह ससुरा तुम्हरी प्रेम कहानी पर मूतकर चला गवा”

“बसस्स्सस्स्स्स”,मंगल फूफा ने गुस्से से अपना हाथ गुप्ता जी के सामने करके कहा  
एक पल को तो गुप्ता जी भी घबरा गए लेकिन खुद को शांत रखा तो मंगल ने कहा,”रूपा का धोखा हमहू कबो नाही भूली है गुप्ता”

गुप्ता जी ने सुना तो हैरानी से कहा,”गुप्ता जी से सीधा गुप्ता और इह भूली का है बे ? डायलॉग के चक्कर मा जेंडर काहे चेंज कर दे रहे हो अपनों”
मंगल फूफा ने कोई जवाब नहीं दिया उन्होंने बची आखरी पूड़ी उठायी , उसमे हलवा लपेटा और बची सब्जी भी लपेट कर मुँह में ठुस ली और पैर पटकते हुए वहा से चले गए।

मंगल फूफा के जाने के बाद गुप्ता जी ने राहत की साँस ली और जैसे ही सामने से आती गुप्ताइन दिखी अपनी उंगलिया चाटते हुए बुरा सा मुँह सा मुँह बनाया। गुप्ताइन ने देखा थाली साफ है , खाना गायब तो गुप्ता जी से कहा,”का हो ! सब खाय लिया ?”
“अब तुमहू कुछ कहो और हम ना करे इह कबो हुआ है का गुप्ताइन ?”,गुप्ता जी ने प्यार से कहा
“पर उह्ह्ह तो कड़वा था न”,गुप्ताइन ने उदास होकर कहा

गुप्ता जी उठे और गुप्ताइन की तरफ आकर कहा,”अरे तुम्हरे हाथ से तो नीम भी मीठा लगता है हमको , अब अपने जे ही हाथो से एक ठो मीठी मीठी चाय पिलाय दयो हमका तो जे कड़वाहट भी दूर हो जाहि है”
गुप्ता जी की बातो से गुप्ताइन पिघल गयी और कहा,”हमहू अभी लेकर आते है,,,,,,,,!!!”
गुप्ताइन के जाने के बाद गुप्ता जी उबकाई करते हुए वाशबेसिन की तरफ बढ़ गए क्योकि खाने का स्वाद अभी तक उनके मुँह से गया नहीं था।

अपने कमरे के बिस्तर पर गोलू चारो हाथ पाँव फैलाकर सोया था। वह आया तो कमरे में पिंकी से बात करने था लेकिन पिंकी उस वक्त नहाने गयी हुई थी और जब तक वापस आयी गोलू महाराज नींद से चित्त , पिछले कुछ दिनों से गोलू ठीक से सोया नहीं था आज उसे चैन की नींद सोने का मौका मिला तो वह हाथ पांव पसार कर ऐसा सोया कि उसे दीन दुनिया की खबर ही नहीं थी। गुप्ताइन ने खाने के लिए बुलाया लेकिन गोलू नहीं आया। पिंकी ने बताया वह सो रहा है तो गुप्ताइन ने पिंकी से खाना खाने को कहा और गोलू का खाना ढककर रख दिया ताकि उठने के बाद खा ले।

सुबह से दोपहर हो गयी लेकिन गोलू ना उठे ,सोते सोते गोलू ने एक सपना देखा। वह और गुड्डू अपनी टेंट हॉउस की दूकान के सामने खड़े है। गुड्डू गुस्से से लाल पीला है और गोलू मायूस सा सामने खड़ा है।
“चुप क्यों हो , जवाब काहे नाही देते ? अब बताओ का जवाब देंगे हमहू अपने दोस्त को ?”,गुड्डू ने चिल्लाकर कहा
“किस बात का जवाब ?”,गोलू ने मासूमियत भरे स्वर में पूछा

“अबे उसकी गाडी कहा है ? जो भाड़े पर लाये रहय हमहू”,गुड्डू फिर चिल्लाया
“उह्ह्ह तो आप चकिया लेकर गए थे ना गुड्डू भैया”,गोलू ने फिर मासूमियत से कहा
“हाँ तो चकिया मा उसकी जो माँ बहन किये हो तुम लोग , ओह्ह के बाद का जवाब दे अपने दोस्त को ?”,गुड्डू ने दाँत पीसकर कहा

“अरे तो ढांचा तो बचा है न ओह्ह्ह का गेराज मा डालकर सही करवा लेंगे,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने बेफिक्र होकर कहा
 गुड्डू ने खा जाने वाली नजरो से गोलू को देखा और कहा,”ढांचे को नदी मा नाही बहाय दिए तुम ? अब बचा है उह्ह्ह गाडी का जे स्टेयरिंग , इसका का करे डाले तुम्हायी गर्दन पे और बनाये तुमको फोर व्हीलर”
“अरे हमने का किया ? हम तो बस आपकी मदद कर रहे थे”,गोलू ने भी चिढ़कर कहा

गुड्डू ने गोलू की गर्दन को दबोचा और उसकी कोल में दो तीन घुसे जड़कर कहा,”साले मदद कर रहे थे कि हमायी बत्ती बनाय रहे थे,,,,,,,हमको हमायी गाडी चाहिए वरना मार मार के तुमको साइकिल बना देंगे हम”

गोलू का सपना इतना रियल था कि वह हाथ पैर पटकते हुए बिस्तर से नीचे आ गिरा और जब सर नीचे धरती से टकराया तो उसकी नींद खुली और वह अपने सर को सहलाते हुए उठा और कमरे में इधर उधर देखा ! खुद को अपने कमरे में पाकर गोलू को समझ आया कि गुड्डू वहा नहीं है बल्कि वह बस एक बुरा सपना देख रहा है। गोलू मुस्कुराते हुए उठा और अपने सर खुजाते हुए बिस्तर पर आकर लेट गया

लेकिन अगले ही पल झटके से उठा और कहा,”सपने में गुड्डू भैया अपनी गाडी की बात कर रहे है लेकिन गाडी तो है ही नहीं,,,,,,,,,,,,,,उह्ह्ह तो , उह्ह्ह तो , उह्ह्ह तो , अह्ह्ह्हह्हह गुड्डू भैया”
गोलू रोते हुए कमरे से बाहर भागा और हॉल में खड़े गुप्ता जी को टक्कर मारते हुए घर के दरवाजे की तरफ बढ़ गया !

गुप्ता जी बेचारे अभी अभी चाय का कप लेकर हॉल में आये ही थे कि गोलू ने उसे गिरा दिया , उन्होंने गुस्से से गोलू को देखा उसे रोकते इस से पहले तो गोलू दरवाजे से बाहर निकल गया और गुप्ता जी बड़बड़ाये,”लगता है आज का दिन ही खराब है , पतो नाही सुबह सुबह किस मनहूस की सकल देखत रहे , अबे साला खुदही को ना देखे थे,,,,,,,,भक्क साला”

गुड्डू के नाम का राग अलापते हुए गोलू घर के मेन गेट की तरफ जा ही रहा था कि तभी उसके कदम ठिठके और उसे मिश्रा जी की कही बात याद आ गयी
“कान खोल के सुन लयो जब तक तुम दोनों साथ रही हो कोई न कोई काण्ड जरूर होइ है और हम ना बेटा तुम्हायी बोई चरस को काटते काटते थक चुके है इहलीये आज के बाद तुम दोनों को साथ देखा ना तो इह समझ लेना तुम्हाये टेंट हॉउस के टेंट को तुम्हायी ही तेहरवी मा लगा देंगे,,,,,,,,,,,समझे”

मिश्रा जी की बात याद आते ही गोलू उदास हो गया लेकिन अगले ही पल उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया जब उसे गुड्डू के कहे शब्द याद आये
“जाओ नाही मिलेंगे तुमसे आज के बाद साला जब जब तुमसे मिलते है अपनी ही खाल छिलते है और सुनो बे ! तुम का हमायी गर्लफ्रेंड हो जो तुम्हरा नंबर ब्लेक लिस्ट मा डाल दे,,,,,,,,,,साला नंबर ही डिलीट कर देंगे तुम्हरा”

गोलू ने अपने कदम पीछे लिए और वापस घर के अंदर चला आया , पैर पटकते हुए वापस घर की तरफ बढ़ा और बड़बड़ाया,”हमको का मतलब गुड्डू भैया की गाड़ी से और वैसे भी गुड्डू भैया ने हमसे दूरी बना ली है अब अपना फैलाया रायता खुद ही समेटे तब पता चली है ओह्ह्ह का गोलू की अहमियत,,,,,,,!!!”

अपने में ही बड़बड़ाते हुए गोलू जैसे ही अंदर जाने लगा सीढ़ियों पर नजर पड़ी जहा मंगल फूफा हाथ में बड़ा सा छुरा लेकर उसे पत्थर पर रगड़ते हुए उसकी धार तेज कर रहे थे। गोलू ने देखा तो हैरानी से मंगल फूफा की तरफ आया और कहा,”ए फूफा ! ए रूपा के जाने के बाद का कसाई का काम सुरु कर दिए हो जो इह का धार बनाय रहे हो ?”

मंगल फूफा ने गोलू की बात पर ध्यान नहीं दिया वे गुस्से में थे और उनके इस गुस्से को बढ़ाने में हाथ था गुप्ता जी का , मंगल फूफा धीरे धीरे रूपा को भूल भी जाते लेकिन गुप्ता जी ने रूपा के नाम की बत्ती लगाकर मंगल फूफा को भड़का दिया और अब मंगल फूफा रूपा के आशिक जानकीनाथ से बदला लेने का मन बना लिए।
गोलू ने देखा मंगल फूफा ने उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया है तो उसने थोड़ा चिढ़कर कहा,”अरे हमहू कुछो कह रहे है , सुनाई नहीं ना देता है ?”

मंगल फूफा ने झटके से छुरा गोलू की तरफ किया , चाकू और गोलू की गर्दन में बस दो इंच का फर्क था और अगले ही पल गुस्से से अपनी गर्दन भी गोलू की तरफ घुमाई तो गोलू के तो पैर ही काँप गए , उसने काँपती आवाज में कहा,”फूफा ! ए फूफा ! ए तुम्हरे अंदर कोनो आत्मा वात्मा तो नहीं आ गयी ना,,,,,,,,,,,साला हमको इत्ती नफरत से काहे देख रहे हो ?”

मंगल फूफा उठे और छुरा हाथ में उठाये गोलू की तरफ बढ़कर कहा,”इह छुरा तैयार कर रहे है उह्ह्ह रूपा के आशिक के लिए , एक बार उह्ह हमाये हाथ लग जाए साले को छोटे छोटे टुकड़ो मा काटकर कुत्तो को खिला देहि है,,,,,,,,,,,,,,,,ओह्ह्ह के बाद रूपा,,,,,,,,!!!”
“ओह्ह्ह के बाद रूपा तुम्हायी”,गोलू ने खुश होकर तपाक से कहा  

“अबे हट ! मंगल का उसूल है एक बार जो हमको ठुकरा दी ओह्ह्ह का दोबारा मुँह नाही लगाता इह मंगल फूफा,,,,,,,,,उह्ह्ह का समझती है हमरा से पियार करके , हमाये मासूम दिल से खेल के उह्ह्ह हमको ठेंगा दिखा के निकल जाएगी और हमहू कुछो नाही कहेंगे,,,,,,,,,,अरे ठुकरा के हमरा प्रेम हमरा सर्वनाश देखेगी”,मंगल फूफा ने जोश में आकर कहा

“सर्वनाश नाही फूफा इन्तेक़ाम , इन्तेकाम देखेगी”,गोलू ने कहा
“उह्ह्ह तुम दिखा देना ओह्ह्ह का”,मंगल फूफा ने गोलू का कंधा थपथपा कर कहा और वहा से चले गए। गोलू अपना सर खुजाते हुए मंगल फूफा की कही बात का मतलब सोचता रहा और फिर एकदम से कहा,”अबे हम काहे दिखाएँगे , हमायी गर्लफ्रेंड थोड़ी है उह्ह्ह ?”
मंगल फूफा वहा से जा चुके थे इसलिए गोलू भी अंदर चला गया।

मिश्रा जी का घर , कानपूर
गुड्डू और आदर्श फूफा को रिक्शा से आने का बोलकर लवली सीधा घर चला आया। उसने बाइक साइड लगाई और अंदर आया तो नजर हॉल में बैठे लोगो पर पड़ी। लवली उस तरफ चला आया। लवली ने जैसे ही मंगेश को वहा देखा उसके चेहरे पर गुस्से के भाव झिलमिलाने लगे। वह मिश्रा जी के सामने आया और कहा,”पिताजी ! जे लोग हिया काहे आये है ?”

मिश्रा जी ने एक नजर मंगेश की तरफ देखा और जैसे ही लवली से कुछ कहने को हुए मंगेश अपनी जगह से उठा और लवली की तरफ आते हुए कहा,”हम बताते है,.,,,,,,,,!!!”
लवली मंगेश की तरफ पलट गया तो मंगेश उसके सामने आ खड़ा हुआ और कहा,”हम हिया तुम से और बिंदिया से माफ़ी मांगने आये है लवली”

मंगेश की बात सुनकर लवली ने हैरानी से उसे देखा तो मंगेश ने अपने हाथ जोड़कर कहा,”हमे माफ़ कर दो लवली ! हमने तुम्हाये साथ बहुते अन्याय किया है , तुम्हाये पिताजी की मौत के जिम्मेदार भी हम है , तुम्हायी ऐसी हालत के जिम्मेदार भी हम ही है , हम अपने किये पर बहुते शर्मिन्दा है। हमका माफ़ कर दयो”
लवली ने सुना तो ख़ामोशी से मंगेश को देखने लगा , कुछ ही दूर मिश्राइन के साथ खड़ी बिंदिया ने जब ये सुना तो उसकी आँखों में आँसू भर आये।

मंगेश के इस बदले रूप को देखकर लवली को अभी भी भरोसा नहीं हो रहा था , उसे इसमें भी मंगेश की कोई चाल नजर आ रही थी वह मिश्रा जी की तरफ आया और कहा,”पिताजी ! जे आदमी एक नंबर का धोखेबाज है , जे की बातो मा नाही आना आप ,, इह झूठ कह रहा है , हम जानते है इह हिया बस बिंदिया को लेने आया है ताकि हम से , आप से बदला ले सके,,,,,,,,,,जे की बातो पर विश्वास नाही करना पिताजी”

लवली की बाते सुनकर मंगेश ने कहा,”नहीं लवली ! तुमहू हमका गलत समझ रहे हो , हम अपने किये पर सच मा सर्मिन्दा है , हम हिया बिंदिया को लेने नहीं बल्कि मिश्रा जी से बिंदिया के लिए तुम्हरा हाथ मांगने आये है लवली,,,,,,,,,हमरी बात का बिस्वास करो”
लवली गुस्से से पलटकर मंगेश के सामने आया और कहा,”बिस्वास करे , उह्ह्ह भी तुम्हरा ,, उह्ह्ह लल्लन के साथ मिलकर का का नहीं किये हो तुमहू चचा !

कित्ता भरोसा किया हमने तुम पर और तुमने हमायी पीठ मा छुरा भोंका , हमे धोखा दिया। आज तुमहू बिंदिया को हिया से ले जाहि हो और ओह्ह्ह के बाद फिर तुम्हरा असली चेहरा सामने आहि है , हम जानते है चकिया जाने के बाद बिंदिया हमे नाही मिलेगी”
मंगेश को लेकर लवली का गुस्सा जायज था लेकिन मंगेश को भी अपनी गलतियों का अहसास था इसलिए उसने इधर उधर देखा और उसकी नजर पड़ी घर के मंदिर पर ,

मंगेश मंदिर की तरफ गया वहा रखी सिंदूर की डिब्बी उठाई और लवली के सामने आकर सिंदूर उसकी तरफ बढाकर कहा,”आगे तुमको हम पर भरोसा नाही है तो इह ल्यो सिंदूर और भर दयो बिंदिया की मांग,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगेश की बात सुनकर लवली हैरानी से उसे देखने लगा और बाकि सब भी ख़ामोशी से उसे देखने लगे हॉल में बस बिंदिया की सिसकियों की आवाज गूंज रही थी।

( मिश्रा जी के मना करने के बाद भी क्या गोलू मिलेगा गुड्डू से ? क्या मंगल फूफा सच में लेने वाले है रूपा से बेवफाई का बदला ? क्या मंगेश की बातो पर लवली को होगा यकीन और वो भरेगा बिंदिया की  मांग ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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