Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 50

by Story With Sanjana May 15, 2026
written by Story With Sanjana May 15, 2026 1 comment
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Manmarjiyan Season 4 – 50

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू ने गोलू से गाडी आगे लगाने को कहा और गोलू ने मंगल फूफा को , अब मंगल फूफा ठहरे कद में छोटे ,वो गाड़ी में तो जा बैठे गाड़ी स्टार्ट भी कर ली और आगे भी बढ़ा दी लेकिन पैर ब्रेक तक पहुँच ही नहीं पाया और गाडी जाकर टकराई सीधा सामने खड़ी दिवार से। जैसे ही गाड़ी दिवार से टकराई एक तेज आवाज गुड्डू और गोलू के कानों में पड़ी। गुड्डू ने आँखे खोली और गाड़ी की तरफ भागा , पीछे पीछे गोलू भी भागकर आया और देखा की गाडी सामने ट्रक में जा लगी है।

गुड्डू ने देखा तो उसका तो दिल ही बैठ गया , अगले ही पल गोलू उसके बगल में आया और कहा,”गुड्डू भैया ! बच गए गाड़ी सही सलामत है”
गुड्डू ने जब गोलू की आवाज सुनी तो हैरानी से उसकी तरफ देखा और कहा,”तुम हिया हो तो फिर गाड़ी कौन चला रहा है ?”
“गाड़ी तो मंगल फूफा चला रहे है”,गोलू ने कहा
गुड्डू ने उसे एक चपत मारकर गाड़ी की तरफ धकेलते हुए कहा,”अबे हमहू तुमसे कहे थे तुमहू साले मंगल फूफा को सम्हला दिए,,,,,,,,,,,!!!”

गुड्डू से चपत खाकर गोलू गाडी के पास आया। ट्रक वाले ने अपने ट्रक आगे लिया तो गोलू की नजर पड़ी गाड़ी की दोनों हेडलाईट पर जो की टूटकर लटक चुकी थी। ये देखकर गोलू का दिल बैठ गया तब तक गुड्डू भी वहा चला आया और जैसे ही उसने गाड़ी की टूटी हुई हेडलाईट देखी उसका चेहरा गुस्से से लाल हो उठा उसने गोलू को वही गाडी के  डेशबोर्ड पर पटका और दोनों हाथो से उसका गला दबाते हुए कहा,”का कहे थे तुम कि गाडी सही सलामत है ,जे है सलामत ? साले तुम दोनों साथ मा रहे ना तो जे गाडी चलकर नहीं बल्कि बोरे मा भरकर ले जानी पड़ेगी हमे , पहिले फ्रंट शीशा तोड़ दिया ,

फिर खिड़की का शीशा तोड़ दिया और अब जे हेडलाईट फोड़ दी,,,,,,,,,,,,अबे जे गाडी को सही सलामत चंदौली पहुंचने दोगे के नाही तुम लोग ?”
गुड्डू और गोलू को उलझा देखकर मंगल फूफा ने दरवाजा खोला और गाड़ी से बाहर आकर गुड्डू को रोकते हुए कहा,”अरे गुड्डू ! गुड्डू छोडो उसे का कर रहे हो ? अरे उह्ह्ह मर जाएगा”

मंगल फूफा की बात सुनकर गुड्डू और चिढ गया और गोलू का गला छोड़ उनके सामने आकर कहा,”उह्ह्ह नाही मरेगा उह्ह्ह साला हमको साथ लेके मरेगा,,,,,,,,साला एक तो भाड़े की गाड़ी है उसकी भी ऐसी तैसी करने में लगे हो आप दोनों ! हमे जे बताओ गाड़ी चलाने को किसने कहा आपसे ?”
गोलू तब तक खाँसते हुए गुड्डू के पास चला आया और कहा,”अरे भैया ! गाड़ी चलाने को तो हमहू कहे रहे जे से”
“काहे ? चाबी देने से पहिले इह तो देख लेते कि जे के पैर ब्रेक तक पहुचंते भी है के नाही,,,,,,,,,,,,,,,,साला बैठे बिठाये गाडी की हेडलाईट तुड़वा दिए अब कैसे पहुंचेंगे चंदौली ?”,गुड्डू ने कहा  

 “अरे गुड्डू भैया काहे चिंता कर रहे है ? शीशे के साथ साथ हेडलाईट भी लगवा लेंगे”,गोलू ने बेपरवाही से कहा
गुड्डू ने सुना तो गोलू की तरफ पलटा और,”हाँ ! तुम्हाये हमाये पिताजी कानपूर मा मैकेनिक जो लगे है,,,,,,,,,,,घुसा मार के नाक तोड़ देंगे समझे,,,,,,,,,,,,एक तो इत्तो बड़ो नुक्सान कर दिए रहय और ऊपर से बकैती कर रहे हो। राजा महाराजा के खानदान से नाही हो बेटा जो हमाये मांगने पर बाप नोटों की गड्डी उछाल देगा ,, ओह्ह्ह को पता चला ना पहिले दूकान बंद करवाएंगे फिर पटक के मारेंगे”

गुड्डू की फटकार सुनकर गोलू तो चुपचाप पीछे हो गया। गुड्डू पलटा मंगल फूफा की तरफ और कहा,”और आपको का जरूरत थी गाड़ी आगे लगाने की ?”
“वो गोलू हमसे कहे रहा तो हमहू सोचे,,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने इतना ही कहा कि गुड्डू ने उसकी बात बीच में काटकर कहा,”तो आप सोचे गाड़ी की माँ बहन एक कर दो,,,,,,,अरे उह्ह्ह तो साला है ही मंदबुद्धि आप भी अपनी अकल का कानपूर मा छोड़ आये हो,,,,,,,,,,,उह्ह्ह बोलेगा कुए मा कूद जाओ तो का कूद जाओगे ?”
“कूदेंगे तो नाही पर हाँ झांककर तो देख ही लेंगे”,मंगल फूफा ने मासूमियत से कहा

गोलू ने सुना तो खुश होकर हवा में एक चुम्मा उछाला मंगल फूफा की तरफ और कहा,”मुहहहआ ! वाह फूफा का बात कहे हो”
“थन्कु,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने खुश होकर कहा
“आपके थैंक्यू की बत्ती बनाकर ना,,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने इतना ही कहा कि गोलू चिल्लाया,”ए गुड्डू भैया ! का कर रहे हो यार फॅमिली स्टोरी है,,,,,,,,,,,!!!”

गुड्डू पलटा और गोलू की गुद्दी पकड़कर गुस्से से कहा,”हाँ तो हमको भी पता है फॅमिली स्टोरी है साले पहले पूरी बात सुन लिया करो,,,,,,,,,,,,पहिले ही चिल्लाना शुरू कर देते हो ,गुड्डू भैया गुड्डू भैया , का इलेक्शन मा खड़े हो का ?”
“अरे तो फिर का कह रहे थे आप ?”,गोलू ने मिमियाते हुए कहा
“अरे भाई तुमहू अपनी बात पूरी करो ना,,,,,,,,,,,,,,,बहुते कन्फ्यूजन है यार”,मंगल फूफा ने गुड्डू के सामने आकर कहा

गुड्डू ने गोलू को साइड किया और मंगल फूफा से कहा,”हम कह रहे है आपके थैंक्यू की बत्ती बनाकर ना दिया जलाइए और पूजा कीजिये अपने गोलू महाराज की,,,,,,,,,,,,,जे गाडी से चंदौली अब हम अकेले जायेंगे”
“अरे तो फिर हम कैसे आएंगे ?”,गोलू ने तुनककर कहा
“अभी जो तुम्हाये मंगल फूफा थैंकू दिए ना तुमको ओह्ह्ह मा पहिये लगाकर आ जाओ”,कहते हुए गुड्डू गाड़ी की तरफ बढ़ गया

मंगल फूफा गोलू के पास आये और कहा,”जे गुड्डू तो कुछो जियादा ही खिज गया लगता है , अब का करे ?”
“अब बस एक ही रास्ता है”,गोलू ने सोचते हुए कहा
“कौनसा रास्ता ?”,मंगल फूफा ने पूछा
अगले ही पल दोनों गुड्डू के पैरों में थे और उसका एक एक पैर पकड़कर धरती पर लेटे हुए थे। गुड्डू ना आगे बढ़ पा रहा था ना ही उन दोनों से अपना पैर छुड़वा पा रहा था।

गुड्डू के चेहरे पर खीझ के भाव थे उसने गोलू को देखा और दाँत पीसते हुए कहा,”गोलू हमरा पैर छोडो”
“नाही गुड्डू भैया ! हम नाही छोड़ेंगे ,जब तक आप हमे और फूफा को माफ नाही  कर देते हम आपका पैर नाही छोड़ेंगे”,गोलू ने गुड्डू के पैर से लिपटकर कहा

मिश्रा जी का घर ,कानपूर
शाम के 4 बज रहे थे लेकिन सुबह के सोये भुआ और फूफा अभी तक सो रहे थे। मिश्राइन को इस बात की कोई खबर नहीं थी कि लवली ने कुछ गड़बड़ की है वे तो दिनभर अपने काम में लगी रही और दोपहर में सोने चली गयी। मिश्रा जी अपने शोरूम पर थे और वेदी अपनी पढाई में लगी थी। लवली की गड़बड़ के बारे में अगर किसी को पता था तो वो थी शगुन लेकिन दोपहर होते होते शगुन के दिमाग से भी वो बात निकल गयी और वह आराम करने अपने कमरे में चली आयी।

लवली ऊपर अपने कमरे में चला आया और बिंदिया के बारे में सोचने लगा लेकिन साथ ही उसे अब थोड़ी थोड़ी तसल्ली भी थी कि गुड्डू गया है चकिया और वह बिंदिया को ले आएगा।
पढाई करके वेदी को जब नींद आने लगी तो वह उठी और बाहर मुँह धोने चली आयी। मुँह धोते हुए वेदी ने देखा कि उसके गाल पर दो चार पिम्पल निकल आये है तो उसने घबराकर कहा,”अरे ये कैसे हुआ ? इन्हे भी अभी होना था , कुछ महीने बाद शादी है और इनके निशान तो 6 महीनो तक नहीं जायेंगे , कही अमन ने हमे बाद में नापसंद कर दिया तो,,,,,,,,,,,,,अब हम का करे ? अम्मा से पूछते है”

वेदी मिश्राइन के कमरे में आयी और देखा मिश्राइन सो रही है लेकिन मिश्राइन को जगाने से ज्यादा डर वेदी को अपने पिम्पल्स का था इसलिए वह मिश्राइन के पास आयी और धीरे से उनकी बाँह थपथपाकर कहा,”अम्मा ! अम्मा ! अम्मा सो रही हो का ?”
“नाही ! गली की औरतन के साथ मण्डली मा बैठकर भजन कर रहे है। दिखाई नहीं ना देता है सो रहे है,,,,,,,,!!”,मिश्राइन ने अधखुली आँखों से वेदी को देखकर पहले प्यार से कहा और फिर एकदम से खिज गयी

“अम्मा ! अम्मा सुनो ना , हमाये चेहरे पर जे इत्ती सारी फुंसी निकल आयी है , हम का करे  ?”,वेदी ने मिश्राइन की बाँह थपथपाकर कुनमुनाते हुए कहा
“अम्मा के कमरे मा उबटन रखो है जाकर लगाय ल्यो और हमे परेशान नाही करो वरना पिट जाओगी”,कहकर मिश्राइन ने करवट बदली और मुँह फेरकर सो गयी।
वेदी उठी और कमरे से बाहर चली आयी।

शगुन के कमरे का पर्दा हटाकर देखा तो पाया शगुन भी सो रही है इसलिए वह खुद ही चम्मच और कटोरी लेकर अम्मा के कमरे में चली आयी। उसी कमरे में भुआ और फूफा सो रहे थे , सो क्या रहे थे लवली की दी दवा से बेहोश पड़े थे। वेदी ने कमरे की लाइट जलाई और सीधा अलमारी की तरफ चली आयी जहा उबटन रखा था , फूफा और भुआ पर तो उसका ध्यान ही नहीं गया था।
उसने डिब्बे से उबटन कटोरी में निकाला और जैसे ही पलटी भुआ और फूफा को बेहोश पड़ा देखकर कटोरी उसके हाथ से नीचे जा गिरी और वह जोर से चिल्लाई।

वेदी के चिल्लाने की आवाज सुनकर भुआ फूफा तो नहीं उठे लेकिन मिश्राइन और शगुन जरूर घबराकर उठी। दोनों अपने कमरे से बाहर आयी और शगुन ने कहा,”माजी ! आपने वेदी के चिल्लाने की आवाज सुनी ?”
“हाँ शगुन ! उह्ह्ह अम्मा के कमरे मा उबटन लेने गयी थी ,चलो चलकर देखते है का हुआ है ?”,मिश्राइन ने कहा और शगुन के साथ अम्मा के कमरे की तरफ बढ़ गयी।

अम्मा के कमरे में आकर मिश्राइन ने देखा वेदी घबराई हुई सी खड़ी है , उसका मुँह खुला है और आँखे बाहर आने को बेताब , वह एकटक बस सामने ही देख रही थी। मिश्राइन ने गर्दन घुमाकर सामने देखा तो पाया भुआ और फूफा बेसुध पड़े है। भुआ खुली आँखों के साथ कुर्सी पर बैठी है और फूफा का सर उनकी गोद में पड़ा है और बाकि शरीर नीचे जमीन पर,,,,,,,,,,,,,!!!”

शगुन ने जाकर वेदी को सम्हाला और मिश्राइन बड़बड़ाते हुए भुआ की तरफ बढ़ी,”लाज शर्म नाम की कोनो चीज नाही है दोनों जन मा , कैसे बैठे है ? जिज्जी ! ए जिज्जी ,आदर्श बाबू ,आदर्श बाबू,,,,,,,,,,अरे उठिये”
शगुन ने देखा दोनों ना हिल रहे है ना बोल रहे है तो उसे याद आया लवली ने ही उन्हें नींद की दवा दी थी। वह कुछ कहती इस से पहले वेदी बोल पड़ी,”अम्मा लगता है जे दोनों मर गए है”
वेदी की बात सुनकर मिश्राइन के चेहरे का रंग उड़ गया और शगुन के चेहरे पर भी परेशानी के भाव उभर आये।

शर्मा जी का ढाबा
“अबे हमाओ पाँव छोडो”,गुड्डू चिल्लाया
“नाही गुड्डू भैया ! आप चाहे हमे मार ल्यो पीट ल्यो गरिया ल्यो पर हम आपको पाँव ना छोड़ी है”,गोलू ने कहा
“हाँ गुड्डू हम भी ना छोड़े है ,जब तक तुम हम दोनों को माफ़ नाही करोगे हम ऐसे ही तुम्हाये चरणों मा पड़े रहेंगे”,मंगल फूफा ने भी गोलू की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा

गुड्डू भी सोचने लगा कि कहा वह इन दो नमूनों के साथ फंस गया है। गोलू और मंगल फूफा को माफ़ करने के अलावा गुड्डू के पास अब कोई रास्ता नहीं था इसलिए उसने झल्लाकर कहा,”ठीक है माफ़ किया , अब छोडो हमाये पैर”
गोलू और मंगल फूफा ने जैसे ही सुना कि गुड्डू ने उन्हें माफ़ कर दिया है तो दोनों ख़ुशी ख़ुशी उठे और गोलू ने कहा,”बस गुड्डू भैया ! जे आखरी बार था  पहुंचने से पहिले कोनो गड,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”

“चुप , बिल्कुल चुप , कोई कुछ नहीं बोलेगा , चुपचाप पीछे बैठो और हमे सोचने दयो आगे का करना है,,,,,,,,,,,,,एक तो साला शाम होने वाली है और ऊपर से हेडलाईट और तोड़ देइ हो तुम लोग”,गुड्डू ने चिल्लाकर गोलू को चुप करवाया और फिर रोआँसा होकर कहा
“अरे आपकी जे पिरोब्लम का हल भी है ना हमाये पास”,गोलू ने कहा

गुड्डू ने सुना तो कहा,”का हल है ? नहीं बताओ हमे का हल है , अब जे नाही कहना कि टोर्च लेकर तुमहू गाड़ी के बोनट पर बैठने वाले हो”
गोलू ने सुना तो हसने लगा और कहा,”हाहाहाहा ! का गुड्डू भैया का गजब का सेन्स ऑफ़ हूमर है आपका , अरे इत्ता पगलेट भी नाही है,,,,,,,,,हमहू तो जे कह रहे कि अभी बजा है चार और चंदौली पहुंचने में लगेगा ढाई घण्टा और तो अगर आप गाड़ी को स्पीड मा भगाये तो अँधेरा होने से पहले दुइ घंटा मा चंदौली ,आपकी हेडलाईट की पिरोब्लाम सॉल्व”

मंगल फूफा ने सुना तो खुश होकर गोलू को ऐसे देखा जैसे गोलू ने कोई बहुत बड़ी समस्या हल की हो। गुड्डू ने सुना तो गोलू की तरफ देखकर कहा,”जे से घटिया आईडीओ ना मिलो,,,,,,,,,,,,,जे , जे सड़क पर गाडी को भगाएंगे ना तो गाडी सीधा पाताल मा पहुंच जाएँगी और हम तीनो ऊपर,,,,,,,,तुम ना हम पे एक अहसान करो अपना मुँह ना बंद रखो और जाकर गाडी मा बइठो हमहू देख लेंगे का करना है”
गोलू ने सुना तो मुँह बनाया और मंगल फूफा की तरफ आकर धीरे से कहा,”साला ! अच्छे टेलेंट की कोनो कदर ही नाही है”

गुड्डू के कानों में उसकी बात पड़ी तो गुड्डू ने कहा,”पिंकिया को पटाने के अलावा और कोई अच्छो टेलेंट नाही देखे है हमहू तुमहाओ आज तक”
गोलू ने सुना तो गुड्डू को घूरने लगा और फिर गाडी का दरवाजा खोलकर मंगल फूफा के साथ अंदर जा बैठा। गुड्डू भी ड्राइवर सीट पर आया और गाडी स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी। गुड्डू के बगल वाली सीट अब खाली थी।

बिंदिया का घर , चकिया
शादी के खिलाफ बिंदिया अब चुपचाप सभी रस्मो में शामिल हो रही थी और फिर दुपहर बाद मेहँदी लगवाने बैठ गयी। मेहँदी लगाने वाली रूपा थी जो कि शादी से पहले यहाँ से भागने में बिंदिया की मदद करने वाली थी। बिंदिया को शादी की रस्मो में शामिल होते देखकर मंगेश को लगा कि बिंदिया के सर से लवली के प्रेम का भूत उतर चुका है इसलिए वह भी बेफिक्र हो गया और लल्लन के पास चला आया जो कि घर के पीछे वाली खाली जगह को देख रहा था जहा शादी का टेंट और मंडप लगना था।

पास ही में हलवायी और उसके साथ शादी की मिठाईया बना रहे थे। मंगेश आया और लल्लन से कहा,”अरे भाई लल्लन ! तुम तो सच में हमाये मेहमान बनकर यही बस गए , अरे तुम्हरे साले के लड़के की शादी है हुआ फूफा की जरूरत तो पड़ेगी ना ?”
“हमरी जरूरत कल सुबह पड़ेगी जब साले का लौंडा दूल्हा बनेगा , तब तक हमायी चौकीदारी हिया सही”,मंगल ने कहा

“अरे काहे परेशान होते हो लल्लन ? हमको पूरा यकीन है उह्ह्ह साला लवली हिया कदम भी नाही रखेगा और अब तो बिंदिया ने भी हार मान ली है , देखे नाही सुबह से कैसे ख़ुशी ख़ुशी शादी की रस्मो मा शामिल होय रही है”,मंगेश ने कहा

“हमको तो दाल मा कुछो काला लग रहा है मंगेशवा , तुम्हरी बिटिया इतनी आसानी से सादी को कैसे मान गयी ?  अरे हमहू खुद देखे है ओह्ह्ह का बचपन से लवली के नाम की माला जपते हुए,,,,,,,,,,,,,,,,देखो मंगेश पहिला पिरेम इत्ती आसानी से नाही भुलाय जाता , हाँ एक ठो बार रीतिकवा से ओह्ह की शादी हो जाए तो फिर लवली तो का ओह्ह्ह की परछाई भी नाही पड़ने देंगे तुम्हायी बिटिया पर”
“हमे तुम पर पूरा भरोसा है लल्लन , एक बार बिंदिया की सादी हो जाये ओह्ह के बाद लवली को ठिकाने लगा देंगे हम”,मंगेश ने कहा और ये सुनकर लल्लन मुस्कुरा उठा। 

 ( क्या मंगल फूफा और गोलू के होते गुड्डू पहुँच पायेगा शाम होने से पहले चंदौली ? क्या सच में कह दिया है फूफा और भुआ ने इस दुनिया को अलविदा ? क्या मंगेश के हाथो लवली को मरवा देगा लल्लन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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1 comment

Nency Patel May 15, 2026 - 3:17 pm

Yeh mangesh kabhi nai sudhar sakta

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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