Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 76

by Story With Sanjana May 16, 2026
written by Story With Sanjana May 16, 2026 4 comments
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Pasandida Aurat Season 2 – 76

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी उदास सा घर के बाहर बैठा रहा। धीरे धीरे होलिका दहन के लिए सभी जमा होने लगे। पृथ्वी के सभी पुराने दोस्त भी आये थे इसलिए पृथ्वी उनके पास चला आया। ये वही दोस्त थे जिनके साथ पृथ्वी पहले क्रिकेट खेला करता था। रवि जी ने लता को सम्हाला और फिर दोनों पूजा के लिए घर से बाहर चले आये। लक्षित भी तैयार होकर पृथ्वी के पास चला आया और कहा,”दादा ! वहिनी आपके साथ नहीं आयी ?”

“उसकी पहली होली है ना इसलिए वह वहा नहीं आ सकती , बड़े पापा के घर में है। तुम जाना कल उसे साथ होली खेलने”,पृथ्वी ने कहा
“वो तो मैं जाऊंगा ही लेकिन आप क्यों नहीं जा रहे ? क्या आप उनके साथ होली खेलना नहीं चाहते ?”.लक्षित ने पूछा
“चाहता तो हूँ लेकिन ये घर की परम्पराओ के नाम पर बंधा हुआ हूँ”,पृथ्वी ने मायूस होकर कहा
“कोई बात नहीं दादा जब वहिनी वापस आ जाये तब आप अकेले उनके साथ होली खेल लेना”,लक्षित ने कहा और वहा से चला गया

अवनि के साथ अकेले होली खेलने के बारे में सोचकर ही पृथ्वी का चेहरा शर्म से लाल होने लगा और वह मुस्कुरा उठा। हम में ऑफिस से आते वक्त वह अपना फोन ले आया था इसलिए उसने अपने जेब से फोन निकाला और अवनि का नंबर डॉयल किया। रिंग जाती रही लेकिन अवनि ने फोन नहीं उठाया।

पृथ्वी ने फोन जेब में रखा और खुद में ही बड़बड़ाया,”शायद वो सबके साथ पूजा के लिए गयी हो , आज रात की तो बात है पृथ्वी कल शाम तो अवनि अपने घर वापस आ जाएगी,,,,,,,अह्हह्ह्ह्ह लेकिन कल सब उसे रंग लगाएंगे बस मैं ही नहीं लगा सकता”
“पृथ्वी ! यहाँ आओ”,रवि जी की आवाज कानों में पड़ी तो पृथ्वी की टी तंद्रा टूटी और वह उनकी तरफ चला गया।

सुरभि का घर ,उदयपुर
सिद्धार्थ के घरवालों से मिलने के बाद सुरभि अपने घर उदयपुर पहुंची ! वह वक्त से पहुंच गयी थी इसलिए तैयार होकर अपने मम्मी पापा और भाई के साथ चौक में चली आयी जहा होलिका दहन की तैयारी चल रही थी। सुरभि की कॉलेज की कुछ दोस्त भी यहाँ मौजूद थी और सुरभि कितने दिनों बाद सब से मिल रही थी। होलिका दहन हुआ और सभी पूजा करने लगे तभी सुरभि की नजर जलती होलिका के उस पार खड़े अनिकेत पर पड़ी जो कि किसी लड़की के साथ खड़े होकर पूजा कर रहा था।

अनिकेत को किसी और लड़की के साथ देखते ही सुरभि का दिल टूट गया। वह वहा से जाने लगी तो उसकी मम्मी ने हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और कहा,”कहा जा रही है ?”
“मैं घर जा रही हूँ मम्मी,,,,,,,,,,मुझे यहाँ अच्छा नहीं लग रहा”,सुरभि ने उदासी भरे स्वर में कहा  
“अरे थोड़ी देर की बात है बस सभी साथ ही चलते है , लो तुम ये पूजा की थाली पकड़ो मैं ज़रा होलिका की फेरी करके आती हूँ”,सुरभि की मम्मी ने सुरभि को पूजा की थाली थमाकर कहा

“मम्मी ,मम्मी,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि कहती ही रह गयी और उसकी मम्मी वहा से चली गयी। सुरभि पूजा की थाली लिए साइड में चली आयी लेकिन उसे नहीं पता था जहा वह खड़ी है उसके ठीक बगल में अनिकेत के घरवाले खड़े थे। सुरभि ने तो उन्हें नहीं देखा लेकिन जैसे ही अनिकेत की मम्मी की नजर सुरभि पर पड़ी और उन्होंने चौंककर कहा,”अरे सुरभि ! तुम यहाँ कब आयी ?”

“4 महीने पहले”,सुरभि ने बिना किसी भाव के कहा तो अनिकेत की मम्मी हैरानी से उसे देखने लगी तो सुरभि ने कहा,”आंटी जब आप लोग आये ,बाकि सब आये तभी तो मैं यहाँ आयी ना,,,,,,,,,,,,ऐसा तो है नहीं कि 6 महीने पहले से मैंने बुकिंग ले ली होगी कि नहीं नहीं इस होलिका दहन तो सुरभि ही सबसे पहले आएगी”
सुरभि की बात सुनकर वो एक बार फिर हैरान हुई और फिर एकदम से हंसकर कहा,”हाहाहा तुम भी न सुरभि ,तुम्हारी ये मजाक करने की आदत जाएगी नहीं”

“और आपकी ये टोकने की आदत नहीं जाएगी”,सुरभि धीरे से बड़बड़ाई
“कुछ कहा तुमने ?”,अनिकेत की मम्मी ने पूछा
“अह्ह्ह्ह नहीं नहीं कुछ नहीं,,,,,,,,,,मैं चलती हूँ”,सुरभि ने वहा से निकलने का बहाना बनाकर कहा लेकिन अनिकेत की मम्मी ने उसे रोक लिया और कहा,”अरे रुको जरा ! इतने दिनों बाद मिली हो , अनिकेत और उसकी मंगेतर भी यहाँ है उनसे मिलकर जाओ,,,,,,,,,!!”

सुरभि जो नहीं चाहती थी वही हुआ वह वहा से निकल पाती इस से पहले अनिकेत अपनी मंगेतर के साथ वहा आ धमका। सुरभि को अपनी मम्मी के साथ देखकर अनिकेत भी थोड़ा परेशान हुआ लेकिन परेशानी का कोई भाव चेहरे पर नहीं आने दिया और कहा,”हाय सुरभि ! तुम यहाँ ?”
“हाँ ! मुझे नहीं पता था इस शहर का नाम उदयपुर से बदलकर अनिकेत रख दिया है वरना तुम से परमिशन लेकर आ जाती”,सुरभि ने अनिकेत को ताना मारकर कहा

सुरभि की बात सुनकर अनिकेत ने कुछ नहीं कहा लेकिन उसकी मंगेतर का मुँह बन गया ये देखकर सुरभि ने उसके सामने जान बुझकर अनिकेत का गाल खींचकर कहा,”अरे बाबा ! मजाक कर रही हूँ , तुम्हे तो पता है न मैं कितनी मजाकिया हूँ”
ये देखकर तो अनिकेत की मंगेतर का खून ही जल गया , गुस्सा उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था ये देखकर अनिकेत ने अपनी मंगेतर के कंधो पर अपनी बाँह रखकर कहा,”सुरभि इनसे मिलो ! ये है शिवानी मेरी मंगेतर और बहुत जल्द हम लोग शादी कर रहे है,,,,,,,,,,!!!”

सुरभि ने सुना तो इस बार मायूसी के भाव उसके चेहरे पर आये और ये देखकर अनिकेत की मंगेतर ने सुरभि को ताना मारकर कहा,”लगता है आपकी दोस्त को हमारी शादी की खबर सुनकर अच्छा नहीं लगा इसलिए बेचारी इतनी उदास हो गयी,,,,,,,,,!!!”

सुरभि को कोई ताना मारे और सुरभि चुप रह जाये ऐसा भला कैसे हो सकता था लेकिन यहाँ सुरभि ने गुस्से से काम नहीं लिया बल्कि दिमाग से काम लिया और अपने फोन से किसी का नंबर डॉयल करके उसे लाऊड स्पीकर पर डालकर कहा,”हाह ! मुझे तुम दोनों की शादी में कोई इंट्रेस्ट नहीं है मैं तो इसलिए अपसेट हूँ क्योकि मैं अपने बॉयफ्रेंड से दूर हूँ,,,,,,,,,,!!!”

सुरभि की बात सुनकर लड़की को तो कोई खास फर्क नहीं पड़ा लेकिन अंदर ही अंदर अनिकेत का खून जल गया। उसे लगा वह सुरभि को छोड़ देगा तो सुरभि हुए उसके पास आएगी लेकिन यहाँ तो सुरभि ने नया बॉयफ्रेंड तक बना लिया था। जैसे जैसे रिंग जा रही थी अनिकेत अंदर ही अंदर जल रहा था।
“हेलो,,,,,,,!!”,एक मर्दाना आवाज सुरभि के फोन से आयी
“हेलो बेबी,,,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने बड़े ही प्यार से कहा और अनिकेत को एक लुक दिया
“बेबी ?”दूसरी तरफ से आवाज आयी

“ओह्ह्ह्ह बेबी ! आई नो तुम मुझसे गुस्सा हो लेकिन आई प्रॉमिस नेक्स्ट होली हम दोनों साथ होंगे,,,,,,,,,,,आई मिस यू सो मच”,सुरभि ने फोन का स्पीकर बंद कर फोन कान से लगाकर कहा
“तुम्हारा दिमाग तो ठीक है न ये क्या बकवास कर रही हो तुम ?”,दूसरी तरफ से किसी ने थोड़ा गुस्से से कहा लेकिन सुरभि ये सुनकर भी मुस्कुराती रही। अनिकेत चेहरे पर चिढ़े हुए भाव लिए एकटक सुरभि को देखे जा रहा था। सुरभि का किसी और लड़के से बात करना उसके करीब जाना अनिकेत बर्दास्त ही नहीं कर पा रहा था।  

सुरभि ने देखा अनिकेत चिढ रहा है तो उसने फोन अपने होंठो से लगाकर कहा,”मुह्हह्हआआआ ! आई लव यू बेबी,,,,,,,,,,,मैं जल्दी ही वापस आउंगी वैसे भी उदयपुर में सड़े हुए लोगो की शक्लें देखकर मेरा मूड खराब हो गया है,,,,,,,,,ओहके बेबी अपना ख्याल रखना , बाययययययय”
कहकर सुरभि अनिकेत और उसकी मंगेतर को देखकर मुस्कुराई और वहा से चली गयी।

अनिकेत सुरभि को जाते देखता रहा। अनिकेत को खामोश देखकर उसकी मंगेतर ने उसकी बाँह थामी और कहा,”चले अनिकेत ?”
अनिकेत ने धीरे से उसके हाथ को अपनी बाँह से हटाया और आगे बढ़ गया। जाते जाते मंगेतर ने गुस्से से सुरभि को देखा और वहा से चली गयी।

सुरभि तब तक अपना फोन काट चुकी थी और जब उसने अनिकेत की शक्ल देखी तो जोर जोर से हंस पड़ी। वह जो करना चाहती थी वह हो चुका था। उसने खुद को शांत किया और कहा,”हाँ ! मुझे जलाने चला था अब खुद ही जलकर राख़ हुआ न,,,,,,,,,,,,,,सुरभि से पंगा लेना अच्छे अच्छो को भारी पड़ता है बच्चू,,,,,,,,वैसे पृथ्वी ने सही कहा था तुम मेरे लायक हो ही नहीं , आई डिजर्व बेटर,,,,,,,,,,आई थिंक आई डिजर्व मच बेटर”

सभी ने इतना ही कहा था कि उसका फोन बजा स्क्रीन पर सिद्धार्थ का नाम देखकर सुरभि की ख़ुशी गायब हो गयी और उसका दिल धड़कने लगा। उसने फोन काट दिया  साँस ली लेकिन अगले ही पल फोन फिर बजा और सुरभि ने फोन पहले अपने ललाट पर मारा और फिर उठाकर कान से लगाकर उखड़े स्वर में कहा,”हेलो,,,,,,,,,,,,,!!!”
“वो सब क्या था ?”,सिद्धार्थ ने पूछा
“क्या ! क्या था ?”,सुरभि ने अनजान बनकर कहा

“अभी तुमने मुझे फोन करके जो बकवास की थी वो क्या थी और क्यों थी ?”,सिद्धार्थ ने पूछा
“अह्ह्ह्ह अच्छा वो , वो तो मैंने बस ऐसे ही ,, मैंने सोचा अवनि के जाने के बाद तुम अकेले हो गए होंगे और अब तो मैं भी नहीं हु वहा तुम्हे परेशान करने के लिए इसलिए सोचा तुम से थोड़ी प्यारी बाते करके तुम्हे खुश कर दू”,सुरभि ने कहा

“प्यारी बाते ? तुम्हारी जहर जैसी जबान से इतनी प्यारी बातें कैसे निकल सकती है ? जरूर तुमने फिर कोई गड़बड़ की है,,,,,,,,,,,,बताओ मुझे अब क्या किया तुमने ?”,सिद्धार्थ ने कहा
“हाह ! भलाई का जमाना ही नहीं है , एक तो मैं तुमसे प्यार से बात की और तुम मुझे ही सुना रहे हो”,सुरभि ने चिढ़कर कहा
“क्योकि तुम मुझसे कभी प्यार से बात कर ही नहीं सकती , तुम तो मुझे हर बार काटने को दौड़ती हो,,,,,,,,,,,,मुझे परेशान किये बिना तुम्हारा खाना तक नहीं पचता”,सिद्धार्थ ने भी चिढ़कर कहा

सुरभि ने सुना तो धीरे से खुद में बड़बड़ाई,”हम्म्म्म बात तो तुमने सही कही चिलगोजे ,तुम से और प्यार से बात,,,,,,,हाह ! इस जन्म में तो बिल्कुल नहीं”
“अब चुप क्यों हो कुछ बोलोगी और सबसे पहले तो मुझे ये बताओ कि तुमने फोन क्यों किया था ?”,सिद्धार्थ ने कहा तो सुरभि की तन्द्रा टूटी और उसने कहा,”बस मुझे तुम्हारी याद आ रही थी इसलिए कर दिया,,,,,,,,,,और देखो इसके बाद तुम अपने दिमाग में कोई खिचड़ी पकाने मत लग जाना,,,,,,,,,,,,,,बाय ! एंड हैप्पी होली”

सुरभि ने इतना कहा और फोन काट दिया उसने सिद्धार्थ का जवाब तक नहीं सुना क्योकि सामने से उसके मम्मी पापा चले आ रहे थे।
“अरे तुम यहाँ क्या कर रही हो ? मैं तुम्हे वहा ढूंढ रही थी। पूजा हो गयी है चलो घर चलते है”,सुरभि की मम्मी ने उसके हाथ से पूजा की थाली लेकर कहा और सुरभि उनके साथ घर के लिए निकल गयी।

सिद्धार्थ का घर , सिरोही
सुरभि के अचानक ऐसे बात करने से सिद्धार्थ परेशान हो गया। आज से पहले सुरभि ने कभी उस से इतने प्यार से बात बिल्कुल नहीं की थी और जब उसने दोबारा सुरभि से बात की तो वह ये सुनकर और भी हैरान हो गया कि सुरभि उदयपुर जाकर उसे याद कर रही है। सिद्धार्थ ने फोन कान से हटाया और मुस्कुराने लगा। सुरभि के मना करने के बाद भी वह उसके बारे में सोचने पर मजबूर हो गया। सिद्धार्थ को मुस्कराते देखकर गिरिजा उसके पास आयी और कहा,”सिद्धू ! सिद्धू , क्या हुआ तुम इतना मुस्कुरा क्यों रहे हो ?”

गिरिजा की आवाज से सिद्धार्थ की तन्द्रा टूटी और उसने फोन साइड में रखकर कहा,”अह्ह्ह कुछ नहीं”
“चलो आओ ! होलिका दहन का समय हो गया है बाहर पापा इंतजार कर रहे है”,गिरिजा ने कहा और कमरे से बाहर चली गयी
सिद्धार्थ भी उठा और शीशे के सामने आकर अपने बालों में से उंगलिया घुमाते हुए खुद को देखा आज उसकी आँखों में एक अलग ही ख़ुशी और चेहरे पर एक अलग ही चमक थी।  

देसाई मेंशन , मुंबई
प्राची शाम में घर चली आयी। आज होलिका दहन था और सोसायटी में होलिका दहन की तैयारी चल रही थी। ऑफिस में आज सुबह से बहुत तमाशा हो चुका था इसलिए मिस्टर देसाई भी जल्दी घर चले आये। घर आकर उन्होंने शॉवर लिया और सफ़ेद रंग का कुरता पजामा पहनकर बाहर सोसायटी लॉन में चले आये जहा कई लोग इक्क्ठा थे। देसाई सर सबसे मिले और बातें करने लगे। हर कोई उनसे उनकी बेटी प्राची के बारे में पूछ रहा था कि वह क्यों नहीं आयी ?

देसाई सर ने अपने साथ आये घर के नौकर को अपने पास बुलाया और उसे प्राची को बुलाकर लाने को कहा
नौकर वहा से चला गया और देसाई सर बाकि सबके साथ बिजी हो गये।

अपने कमरे में बिस्तर पर बैठी प्राची रो रही रही थी। आज वह बहुत दुखी थी। पृथ्वी ने उसे उसके पापा के सामने थप्पड़ मारा और उसके पापा ने भी पृथ्वी का साथ दिया। उसका सबसे वफादार और ईमानदार मैनेजर नीलेश उसकी नौकरी छोड़कर जा चुका था और प्राची की नौकरी के साथ साथ वह देसाई ग्रुप भी छोड़ चुका था। मिस्टर देसाई ने प्राची को ऑफिस आने से मना कर दिया और उस से ऑफिस का एक्सेस लेकर मिस्टर भरत को दे दिया।

एक ही दिन में प्राची अर्श से फर्श पर आ गिरी उसका सारा घमंड चूर चूर हो चुका था। रोने की वजह से उसकी आँखे सूज चुकी थी और चेहरा लाल हो चुका था। वह सर झुकाये आँसू टपका ही रही थी कि घर के नौकर ने आकर कहा,”मैडम ! सर ने आपको बाहर होलिका दहन के लिए बुलाया है ?”
प्राची ने सुना तो अपने आँसू पोछे और नौकर की तरफ देखकर कहा,”होलिका दहन में क्या होता है ?”

“मुझे ज्यादा तो नहीं पता मैडम लेकिन कहते है आज के दिन हमे अपनी बुराईयो को उस दहन के हवाले कर देना चाहिए”,नौकर ने कहा
प्राची ने जाने का इशारा किया। वह उठी बाथरूम गयी और मुंह धोकर वापस चली आयी। उसने कपडे बदले और कमरे में रखा कुछ सामान एक ठेले में भरने लगी और फिर वह थैला उठाकर कमरे से बाहर निकल गयी।

हिमांशु का घर , पनवेल
होलिका दहन के समय मौजूद सभी लोग अवनि से मिल रहे थे उस से बाते कर रहे थे जिस से अवनि का मन अब थोड़ा थोड़ा लगने लगा वरना जब से अवनि आयी थी गुमसुम और चुपचुप थी। साक्षी अवनि के साथ ही थी और उसे सबसे मिलवा रही थी। हर कोई अवनि की तारीफ कर रहा था उसके साथ हंस मुस्कुरा रहा था जिस से अवनि भी खुश हो गयी और मुस्कुराने लगी। साक्षी ने अवनि से रुकने को कहा और किसी काम से साइड में चली गयी।

अवनि भी एक तरफ खड़ी होकर मुस्कुराते हुए सबको देखने लगी। नीलम भुआ ने अवनि को अकेले खड़े देखा तो उसके पास आयी और साड़ी देखकर कहा,”ये साड़ी,,,,,,,,!!!”
“जी ! ये साक्षी भाभी ने मुझे पहनने के लिए दी है”,अवनि ने कहा
“साक्षी ने ? सच में ? लेकिन साक्षी ने तुम्हारे साथ ऐसा क्यों किया ?”,नीलम भुआ ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“मैं कुछ समझी नहीं,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने असमझ की स्तिथि में कह


“ये साड़ी मेरी है ,पुरानी हो गयी थी इसलिए मैंने ही साक्षी को दी थी कि इसे कामवाली को दे देना लेकिन उसने ये साड़ी तुम्हे पहनने को दे दी ,उसने ऐसा क्यों किया मुझे नहीं पता लेकिन हाँ तुम्हारा स्टेंडर्ड इतना गिर जाएगा मुझे इसका अंदाजा भी नहीं था,,,,,,,,,,,,,,,,,,वैसे अच्छी लग रही है ये साड़ी तुम पर,,,,,,,!!!”,नीलम भुआ ने अवनि को ताना मारकर कहा और वहा से चली गयी।
अवनि के चेहरे पर जो ख़ुशी थी वो पलभर में मायूसी में बदल गयी और उसकी आँखों में आँसू भर आये।

( क्या अनिकेत के दिल में अब भी है सुरभि के लिए प्यार ? क्या सुरभि को लेकर पकने लगी है सिद्धार्थ के दिमाग में खिचड़ी ? होलिका दहन के नाम पर प्राची ने थैले में कौनसा सामान रखा है ? आखिर नीलम भुआ ने क्यों दी अवनि को अपनी पहनी हुई पुरानी साड़ी ? जानने के लिए पढ़े “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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4 comments

JRD May 16, 2026 - 10:42 am

Holi ke shubh din pe bhi Nilam bua baaj nahi aai..bhagvan saja dega..

Reply
Kshmata Chauhan May 16, 2026 - 3:13 pm

Sade log kabhi nhi sudar sakte hai, jaise Neelam bua…unhone kyu Sakshi ko Avni k liye Saree dee, ab pta chal gaya…kitna neecha dikhana chahati hai yeh Neelam bua Avni ko…bas Avni thoda sabar rakho lo…ek raat ki baat hai…fir to prithvi k pass jana hai tumko …aur Surbhi ne kya sabak sikhaya Aniket ko…mazaa aa gaya…lakin Surbhi ne Siddarth k dil m pyar ka deepak bhi jalaya…wha Surbhi tum to smart ho… Prachi pta nhi aaj kis cheez ka dahan karengi… bhagwan ji usko buddee de.

Reply
Nency Patel May 16, 2026 - 3:51 pm

Ab yeh prachi sudhar jaye to better hai also is neelam bua se bohot chid ho rahi hai muje

Reply
ਗੁਮਨਾਮ May 24, 2026 - 3:12 pm

So finally avnii realised her love for prithivi. I was waiting for this moment …… Amazing!!!!

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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