Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 97

by Story With Sanjana June 24, 2026
written by Story With Sanjana June 24, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat Season 2 – 97

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

सुबह सुबह नीलम का घर घरवालों के शोर शराबो और हंसी से गूंज रहा था। आज अवनि और पृथ्वी की हल्दी थी और घर में उसी की तैयारियां चल रही थी। पृथ्वी भी दो दिन के लिए फ्लेट बंद करके लता के घर चला आया था ताकि उनके साथ अपनी शादी की खुशियों में शामिल हो सके। पृथ्वी अपने आई बाबा के घर में सो रहा था और रवि जी लता सुबह सुबह नीलम के घर के लिए निकल गए। सभी मेहमान शादी वाले दिन आने वाले थे इसलिए हल्दी के फंक्शन में अभी बस सोसायटी के कुछ लोग और घर के लोग ही जमा हुए थे।

अवनि ने नीलम की दी नयी साड़ियों में से गुलाबी रंग की एक साड़ी पहन ली। साक्षी और हिमानी ने मिलकर उसे तैयार कर दिया। अवनि उस साड़ी में बहुत सुन्दर लग रही थी। पंडित जी भी गणेश पूजा के लिए घर आ चुके थे ! वे हॉल में बैठकर दादी से बात कर रहे थे उन्होंने देखा घर में सब है लेकिन पृथ्वी कही नजर नहीं आ रहा तो उन्होंने कहा,”माजी ! सब यहाँ मौजूद है लेकिन जिसकी शादी है वो कहा है ? उसे बुलाइये उसके बिना पूजा कैसे होगी ?”
दादी ने देखा पृथ्वी अभी तक नहीं आया है तो उन्होंने रवि जी को बुलाकर पूछा,”पृथ्वी कहा है ?”

“वो घर पर है मैं उसे बोलकर आया था कि नहाकर यहाँ आ जाये लगता है वो अभी तक सो रहा है ,आप रुकिए मैं उसे फोन करता हूँ”,रवि जी ने कहा और अपने कुर्ते के जेब से फोन निकालकर पृथ्वी को फ़ोन करते हुए साइड में चले गए।
कुछ देर बाद रवि जी आये और कहा,”वो आ रहा है , पंडित जी तब तक आप पूजा की तैयारिया कीजिये”
“जी यजमान”,कहकर पंडित जी उठे और पूजा की तैयारी करने लगे।

रवि जी का फोन आते ही पृथ्वी तुरंत उठा जल्दी से तैयार हुआ और नीलम भुआ के घर चला आया। पृथ्वी आकर दादी से मिला तो उन्होंने आते ही उसे दो चार गालिया तो सूना ही दी क्योकि वह देर से आया था लेकिन पृथ्वी उनकी बात का कभी बुरा नहीं मानता था उलटा वह दादी के बगल में बैठा और उनको साइड से गले लगाकर कहा,”आप इसलिए चिढ रही हो न क्योकि आपसे ज्यादा सुंदर मेरी बायको है”

“हट परे,,,,,,,,,!!!”,दादी ने चिढ़ते हुए कहा तो पृथ्वी ने उनका गाल खींचा और कहा,”मेरी बायको कितनी भी सुन्दर रहे मेरा पहला प्यार तो आप ही रहोगी”
“जा न बेशर्म ! कैसी बातें करता है , जा पंडित जी के पास जाकर बैठ पूजा शुरू होने वाली है,,,,,,,,,,,,,,!!!”,दादी ने कहा तो पृथ्वी मुस्कुराते हुए वह चला आया और पंडित जी के पास आ बैठा

पंडित जी ने अवनि को बुलाने को कहा। नजरें झुकाये , गुलाबी रंग की साड़ी और उस पर कुछ गहने और हाथो में चुडिया पहने अवनि आयी और आकर पृथ्वी के बगल में बैठ गयी। पृथ्वी एकटक अवनि को देखता रहा वह दूसरी बार उसे साड़ी में देख रहा था और वह बहुत सुन्दर लग रही थी। आज इत्तेफाक से पृथ्वी ने भी हल्के गुलाबी रंग का शर्ट पहना था और मन ही मन खुश हो रहा था कि उसके और अवनि के कपड़ो की मैचिंग हो गयी है। अवनि और पृथ्वी के साथ ही बाकी सब घरवाले भी आ बैठे और पंडित जी ने पूजा शुरू कर दी।

पूजा में बैठी अवनि की नजरे झुकी हुई थी , उसके लिए ये सब पहली बार नहीं था , वह पहले भी ऐसे पूजा में बैठ चुकी थी , पहले भी शादी की तैयारिया कर चुकी थी और जो कुछ हुआ वो सब सोचकर अवनि का मन उदास हुआ जा रहा था। इंसान की जिंदगी में कितनी भी खुशिया आये लेकिन जब उसकी जिंदगी में कोई पल फिर से दोहराता है तो उसे उन कड़वी यादो का अहसास जरूर होता है। अवनि खामोश थी और उसके बगल में बैठा पृथ्वी खुश क्योकि उसकी जिंदगी में ये सब पहली बार हो रहा था ,

पहली बार वह पूजा में उस लड़की के बगल में बैठा था जो उसकी पसंदीदा औरत है। पृथ्वी बीच बीच में कनखियों से अवनि को देखता और मुस्कुरा उठता।
“अपना दाहिना हाथ आगे कीजिये”,पंडित जी ने पृथ्वी से कहा तो पृथ्वी ने अपना हाथ आगे कर दिया। पंडित जी ने कुछ अक्षत मोली पृथ्वी के हाथ में रखा और मंत्र पढ़ने के बाद अवनि से कहा,”आप अपना दाहिना हाथ इनके हाथ पर रखिये”

अवनि ने धीरे से अपना हाथ पृथ्वी की हथेली पर रखा। अवनि के हाथ का स्पर्श पृथ्वी के होंठो पर मुस्कान ले आया। पंडित जी ने अवनि के हाथ में भी पूजा की कुछ सामग्री रखी और कुछ मंत्रोचारण के बाद उन्हें भगवान् के सामने अर्पित करने को कहा।

पूजा सम्पन होने और पृथ्वी अवनि को आशीर्वाद देने के बाद पंडित जी बोले,”अब आप हल्दी की रस्म शुरू कर सकते है”
“आप मेरे साथ आईये पंडित जी”,रवि जी ने उठते हुए कहा और पंडित जी को अपने साथ लेकर चले गए। पृथ्वी अवनि से बात करना चाहता था लेकिन चाची और घर की औरतो ने उसे कमरे से बाहर निकाल दिया और दरवाजा बंद कर लिया।

पृथ्वी अपना सर खुजाते हुए पलटा और बड़बड़ाया,”हाह ! ये लोग मुझे मेरी ही बायको से मिलने नहीं दे रहे”
सामने खड़े हिमांशु भैया ने सुना तो मुस्कुराये और पृथ्वी के पास आकर कहा,”उसे अपनी बायको बनाने के लिए अभी तुम्हे बहुत मेहनत करनी पड़ेगी , अभी तो हल्दी , मेहँदी , फिर कल शादी की रस्मे बहुत कुछ बाकी है तब तक के लिए अपनी भावनाओ को थोड़ा काबू में रखो”
“वो तो पिछले 1 महीने से रख ही रहा हूँ मैं”,पृथ्वी धीरे से बड़बड़ाया

“तुमने कुछ कहा क्या ?”,हिमांशु ने पूछा
“मैं ये कह रहा हूँ ये जो रस्मो की लिस्ट आपने बताई है वो तो ठीक है लेकिन अभी तक मैंने शादी के कपडे भी नहीं खरीदे है , मैं कल शादी में पहनूंगा क्या ?”,पृथ्वी ने कहा
“उसकी टेंशन तुम मत लो ,हल्दी के बाद शाम में तुम्हारे लिए शॉपिंग करने चलेंगे। मेरी बात हो चुकी है मेरे दोस्त ने नया शोरूम खोला है। कल के फंक्शन के लिए कपडे वही से लेंगे”,चाचा ने कहा

पृथ्वी ने सुना तो कहा,”ये आप दोनों ने मेरी शादी की तैयारियों को कुछ ज्यादा ही सीरियस नहीं ले लिया है ?”
“अरे यार ! ये सब तो फिर भी बहुत जल्दी में हो रहा है वरना ऐसी तैयारी करता कि पूरी सोसायटी देखती,,,,,,,,,,,वैसे तू यहा क्या कर रहा है चलकर कपडे बदल बाहर हल्दी की रस्म शुरू होने वाली है”,कहते हुए चाचा पृथ्वी को वहा से लेकर चले गए और हिमांशु भी उनके साथ चला आया।

बाहर छोटा सा हल्दी का प्यारा सा सेटअप बनाया हुआ था। घरवालों और सोसायटी के लोगो के साथ रवि जी और लता के पहचान के लोग भी मौजूद थे। पृथ्वी सफ़ेद रंग का कुरता पजामा पहनकर बाहर आया। एक तो उसका कद लंबा और उस पर कुरता पजामा ,, वो किसी हीरो से कम नहीं लग रहा था। पृथ्वी बाहर खड़ा था और सब उसे छेड़ रहे थे। कुछ देर बाद नकुल ,रिया ,लक्षित ,मोहित और पृथ्वी के दूसरे दोस्त भी वहा चले आये और अब तो सबने पृथ्वी को परेशान करना शुरू कर दिया।

सब पृथ्वी को परेशान कर ही रहे थे कि तभी पृथ्वी की नजर सामने से आती अवनि पर पड़ी। पीले रंग की साड़ी में , ना भारी भरकम गहने ना ज्यादा मेकअप , अवनि सादगी में भी बहुत सुंदर लग रही थी। सब मुस्कुराते हुए उसे ही देखे जा रहे थे। पृथ्वी के सामने खड़ा लक्षित उसे परेशान कर रहा था इस वजह से पृथ्वी अवनि को ठीक से देख भी नहीं पा रहा था। पृथ्वी ने लक्षित की गर्दन पर हाथ रखा और अवनि को देखते हुए लक्षित को साइड कर दिया अब अवनि उसे आराम से दिखाई दे रही थी। अवनि के साथ साक्षी भाभी हिमानी नीलम भुआ चाची और लता जी भी थी।

सबके साथ चलते हुए अवनि जैसे ही पृथ्वी के बगल से निकली उसने बड़ी कातिल नजर से पृथ्वी को देखा और आगे बढ़ गयी। पृथ्वी का हाथ अपने सीने पर चला गया और वह पीछे गिरने लगा लेकिन गनीमत था उसके पीछे खड़े मोहित और नकुल ने उसे सम्हाल लिया और अवनि के पास जाने को कहा।
अवनि और पृथ्वी चौकी पर आ बैठे और उसके बाद सभी घरवाले बारी बारी से उन दोनों को हल्दी लगाने लगे। सभी घरवालों का प्यार पाकर अवनि भी बीते वक्त की बाते भूलकर उस पल को जीने लगी और सबके साथ हसने मुस्कुराने लगी।

सब हल्दी लगा चुके थे और फिर नीलम भुआ और उनकी सहेलिया मिलकर ढोलक बजाने लगी और सब वही डांस कर रहे थे। पृथ्वी ने देखा सबने अवनि को हल्दी लगायी लेकिन वह तो अवनि को हल्दी लगा ही नहीं पाया। जब रस्म खत्म हुए और सब जाने लगे तो पृथ्वी ने उठकर कहा,”अरे लेकिन मैंने तो अवनि को हल्दी लगाई ही नहीं,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी की बात सुनकर सब हंस पड़े और नीलम भुआ ने आगे आकर कहा,”तुम अब जिंदगीभर उसे अपने प्यार की हल्दी लगाते रहना”

नीलम भुआ की बात सुनकर सभी एक बार फिर हंस पड़े और अवनि शरमाकर वहा से चली गयी। पृथ्वी ने अवनि को जाते देखा तो कटोरे से हल्दी अपने हाथो में उठायी और नीलम भुआ से दबे स्वर में कहा,”तो क्यों न फिर शुरुआत आज से ही हो जाये”
नीलम भुआ ने सुना तो मुस्कुराई और पृथ्वी से जाने का इशारा करके बाकी सबकी  तरफ पलटी और कहा,”अरे चलो चलो सब बैठे क्या हो ? मेरे भतीजे की शादी है नाचो गाओ”

सभी खुशिया मनाने लगे और एक दूसरे को हल्दी लगाने लगे। बाहर माहौल काफी खुशनुमा हो चला था। पृथ्वी से बचकर अवनि अंदर चली आयी और उसके पीछे पीछे पृथ्वी भी चला आया। नीलम भुआ के कमरे में आकर अवनि शीशे के सामने आ खड़ी हुई , उसने शीशे में खुद को देखा गालों पर हल्दी लगी थी लेकिन हल्दी से भी गहरा रंग इस वक्त पृथ्वी के प्यार का था। उसकी आँखों में एक चमक थी और चेहरे पर शर्म की लाली।

वह खुद को यकीन दिलाने की कोशिश कर रही थी कि ये खुशिया उसके जीवन में खुद चलकर आयी है और जो हो रहा है वो कोई सपना नहीं सच है। अवनि ने अपनी पलकें झुका ली और अपनी धड़कनो को शांत करने लगी।

उसने अपनी पलकें उठायी और सामने देखा तो उसे शीशे में अपने पीछे खड़ा पृथ्वी नजर आया। अवनि को लगा उसके मन का वहम है तो उसने पलकें झुका ली और एक बार फिर उठाकर देखा तो पाया कि पृथ्वी सच में कमरे में था। अवनि पलटी कुछ ही दूर उसके सामने पृथ्वी खड़ा था। अवनि के दिल की धड़कने फिर तेजी से चलने लगी। पृथ्वी अवनि की तरफ बढ़ा , जैसे जैसे उसके कदम अवनि की तरफ बढ़ रहे थे अवनि का दिल और तेजी से धड़क रहा था।

अवनि को अब पृथ्वी से शर्म आने लगी थी इसलिए उसने एक नजर पृथ्वी को देखा और कमरे से बाहर जाने लगी तो पृथ्वी ने उसे रोकने के लिए अपना हाथ बढ़ाया जिस से अवनि के बलाऊज को डोरियाँ पृथ्वी के हाथ में आ गयी और अवनि को रुकना पड़ा। अवनि ख़ामोश थी और पृथ्वी की आँखों में शरारत नाच रही थी। वह उन डोरियों को थामे अवनि के करीब आया और धीरे से कहा,”तुम कितना भी मुझसे दूर जाओ अवनि आखिर में आना तुम्हे मेरे पास ही है,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

“पृथ्वी ! मुझे जाने दो कोई आ जायेगा”,अवनि ने काँपती आवाज में कहा उसकी धड़कने अभी भी तेज थी
पृथ्वी ने अवनि की बात पर ध्यान ही नहीं दिया उसकी निगाहें अवनि की पीठ के उस तिल पर थी जिसे पृथ्वी पहले भी देख चुका था। उसने हल्दी से भरी उंगलियों को अवनि की पीठ पर घुमाते हुए कहा,”सबने तुम्हे हल्दी लगायी लेकिन अभी मेरा तुम्हे हल्दी लगाना बाकी है”

कहते हुए पृथ्वी ने अवनि की पीठ पर हल्दी लगा दी ,पृथ्वी के स्पर्श से अवनि सिहर उठी और एकदम से पृथ्वी की तरफ़ पलटी तो पृथ्वी ने बची हल्दी अवनि की गर्दन पर लगा दी क्योकि अवनि के गालो पर हल्दी पहले से लगी थी। वह एकटक अवनि को देखने लगा तो अवनि ने अपने दोनों गालों से हल्दी ली और पृथ्वी के ललाट से लेकर उसके बाँये गाल तक लगा दी और अवनि का स्पर्श पाकर पृथ्वी ने अपनी आँखे मूँद ली , उसके होंठो पर मुस्कान थी।

अवनि ने अपने कदम पीछे बढ़ाये और जैसे ही जाने लगी पृथ्वी ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और उसकी पीठ दिवार से लगाकर उसके सामने आ खड़ा हुआ। पृथ्वी के दिमाग में क्या चल रहा था अवनि नहीं जानती थी लेकिन पृथ्वी का एकटक उसे देखना अवनि को बैचैन कर रहा था।  

 पृथ्वी की नजर अवनि के होंठो पर ठहर गयी और जब वह अपनी भावनाओ को नहीं रोक पाया तो उसने अपने होंठ अवनि के होंठो की तरफ बढ़ा दिए। उसके होंठ अवनि के होंठो को छू पाते इस से पहले ही सब घरवाले अंदर चले आये और ये देखकर पृथ्वी रुक गया और पीछे हट गया।

“ए तुमको कितनी बार समझाया शादी से पहले अवनि से नहीं मिलना है , चलो निकलो यहाँ से,,,,,,,,,,!!”,चाची ने पृथ्वी को कमरे से बाहर निकालते हुए कहा
“अरे मैं तो सिर्फ बात करने आया था”,पृथ्वी ने कहा लेकिन चाची और लोगो ने उसकी कोई बात नहीं सुनी और उसे कमरे से बाहर निकालकर चाची ने कहा,”जो भी बात करनी है कल शादी के बाद करना , चलो जाओ यहाँ से”
कहकर चाची ने फिर दरवाजा बंद कर दिया। अवनि से जाकर नहाने को कहा और खुद बाकि सबके साथ बैठकर हंसी मजाक और बातें करने लगी।

बेचारा पृथ्वी एक बार फिर मायूस होकर हॉल में चला आया। अवनि के पास जाना तो दूर घरवाले तो उसे अवनि से बात तक नहीं करने दे रहे थे।  
पृथ्वी भी नहाने चला गया और खाना खाने के बाद हिमांशु भैया और अपने चाचा के साथ शादी के कपडे लेने चला गया। अवनि ने भी नहाकर सूट पहन लिया और खाना खाकर सबके साथ आ बैठी। अवनि को थका हुआ देखकर लता ने उसे कमरे में जाकर आराम करने को कहा।

अवनि कमरे में आकर लेट गयी लेकिन आराम उसकी किस्मत में नहीं थी वह लेटी ही थी कि तभी उसका फोन बजा अवनि ने फोन देखा तो स्क्रीन पर सुरभि का नंबर देखकर वह उठ बैठी और अपना हाथ अपने ललाट पर मारा। ऐसा अवनि ने इसलिए किया क्योकि यहाँ मुंबई में इतना सब हो रहा था और लेकिन वह सबके साथ इतना बिजी हुई कि उसे बताना ही भूल गयी। 

( क्या हल्दी का ये रंग अवनि और पृथ्वी की जिंदगी को भर पायेगा प्यार के रंगो से ? आखिर कब होगी दूर पृथ्वी और अवनि के बीच की ये दूरिया ? क्या होगा सुरभि का रिएक्शन जब जानेगी वह अवनि और पृथ्वी की शादी के बारे में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” सीजन 2 )

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संजना किरोड़ीवाल

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1 comment

Kshmata Chauhan June 24, 2026 - 9:39 pm

Surbhi ko hee bool gai Avni….koi baat nahi Prithvi hai na, usne Surbhi ko zarur bulaya hoga… mujhe to laga tha ki aaj haldi m Avni k ghar wale zarur aayenge…but koi nhi…wo log shadi m aa jayenge…lakin Prithvi aur Avni dono kitne khush hai… bhagwan inki khushi ko kisi ki Nazar na Lage.

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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