Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 94

by Story With Sanjana June 18, 2026
written by Story With Sanjana June 18, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat Season 2 – 94

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी से बात करके जयदीप अपनी कुर्सी पर आ बैठा और खुद में ही बड़बड़ाया,”ये पृथ्वी को अचानक से मुंबई से बाहर क्यों जाना है , आखिर ऐसा तो क्या काम होगा उसे ? खैर मिस्टर देसाई के साथ आज की मीटिंग मैं ही अटेंड करता हूँ आखिर पता तो चले वो भरत चाहता क्या है ? मेरी कम्पनी की हर डील केंसल करने के पीछे आखिर उसकी मंशा क्या है ?”
जयदीप ने कुछ जरुरी काम किये ,मेल्स चेक किये और आज के काम का अपडेट सबको भेजकर लेपटॉप बंद कर दिया। जयदीप ने अपना फोन और गाडी की चाबी उठायी और केबिन से बाहर निकल गया।

जयदीप जाने लगा तो सामने से आते अंकित ने कहा,”आप कहे तो आज की मीटिंग में मैं आपके साथ चलता हूँ”
“अह्ह्ह्ह नहीं ! मीटिंग के बाद मैं सीधा चेम्बूर निकल जाऊंगा वहा एक जरुरी काम है। आज पृथ्वी भी ऑफिस में नहीं है इसलिए उसकी सारी जिम्मेदारी तुम पर आती है अंकित ,ध्यान रहे कोई गलती ना हो”
“जी सर मैं ख्याल रखूंगा”,अंकित ने कहा और फाइल जयदीप को देकर चला गया।
जयदीप भी फाइल लेकर देसाई ग्रुप के लिए निकल गया।

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
मिस्टर देसाई अपने केबिन में बैठे थे और हमेशा उनके बगल में खड़ा रहने वाला भरत आज उनके सामने पड़ी कुर्सी पर बैठा था। प्राची की हरकतों की वजह से मिस्टर देसाई ने उसे ऑफिस से आने से मना कर दिया था और साथ ही उस से ऑफिस के सभी एक्सेस भी छीन लिए थे। एक दिन पहले ही प्राची अपना सामान लेकर यहाँ से जा चुकी थी और आज वह ऑफिस भी नहीं आयी थी इस वजह से कही ना कही मिस्टर देसाई थोड़े उदास थे।

वे जानते थे प्राची एक बहुत ही  टेलेंटेड लड़की है लेकिन बीते दिनों के अपने पागलपन और मनमानियों की वजह से वह मिस्टर देसाई की नजरो में बस गिरती ही जा रही थी। प्राची के बाद इस
कम्पनी में सबसे होनहार था नीलेश और नीलेश भी प्राची की वजह से नौकरी छोड़कर चला गया।

प्राची और नीलेश से पहले भी कई एम्प्लॉय ये कम्पनी छोड़कर जा चुके थे और मिस्टर देसाई इसके पीछे की वजह नहीं जान पाए। मिस्टर देसाई उदास से किसी सोच में गुम थे ये देखकर भरत ने कहा,”सर मैं देख रहा हूँ आप कुछ परेशान नजर आ रहे है , कोई बात है तो मुझे बताईये सर”

भरत की बात सुनकर मिस्टर देसाई सीधे होकर बैठे और बुझे स्वर में कहने लगा,”समझ नहीं आ रहा भरत आखिर गलती कहा हो रही है। मैं इस कम्पनी में सब एम्प्लॉय को बाकि कम्पनी के मुकाबले ज्यादा तनख्वाह दे रहा हूँ। हर तरह की सुविधा दे रहा हूँ इसके बाद भी कोई एम्प्लॉय यहाँ ज्यादा दिन काम नहीं करना चाहता,,,,,,,,,,,,कम्पनी के शेयर्स भी पिछले साल के मुकाबले इस साल सबसे ज्यादा गिरे है ऐसे ही चलता रहा तो मुझे ये कम्पनी बंद करनी पड़ेगी”

भरत ने सुना तो कुछ देर खामोश रहा और गंभीर होकर कहने लगा,”सर ! ज्यादा तनख्वाह देने से एम्प्लॉय ईमानदारी से काम करेंगे ये आपने कैसे सोच लिया ? सर इस कपंनी में 80 परसेंट एम्प्लॉय ऐसे है जो बस ऑफिस आते है और टाइमपास करके चले जाते है ऐसे एम्प्लॉय पर पैसा बर्बाद करने से अच्छा है आप खुद ह उन्हें निकाल दे”
“ये तुम क्या कह रहे हो भरत अगर सबको निकाल देंगे तो फिर काम कैसे होगा ?”,मिस्टर देसाई ने कहा

“सर ! आप क्यों टेंशन लेते है मैं हूँ ना , मेरे पास ऐसे कितने ही बेहतरीन एम्प्लॉय है जो इस कम्पनी को उंचाईयों पर ले जाने की सोच रखते है। कम्पनी के शेयर्स  गिर रहे थे क्योकि अब तक प्राची इस कम्पनी को लेकर फैसले कर रही थी। बिजनेस हमेशा दिमाग से होता है और प्राची मैडम दिल से डिसीजन लेने लगी थी इसीलिए तो बेक टू बेक 8 डील उन्होंने एक ही कम्पनी के साथ डन कर दी”,भरत ने कहा
“तुम किस की बात कर रहे हो भरत ?”,मिस्टर देसाई ने पूछा

मैं जयदीप मौर्या की बात कर रहा हूँ सर ,आप भी जानते है कि वो एक नयी कम्पनी है और कुछ साल पहले ही मार्किट में आयी है। हमारी कम्पनी उन पर आँख बंद करके भरोसा कैसे कर सकती है ? आप भी जानते है कि उस कम्पनी को डील देने के पीछे प्राची मेडम का बस एक ही मकसद था “पृथ्वी उपाध्याय” और इसलिए उन्होंने कम्पनी का लॉस प्रॉफिट देखे बिना ही सारी डील डन कर दी जिस से वे उस कम्पनी में आ जा सके,,,,,,,,,,,,,!!!”,भरत ने कहा

मिस्टर देसाई ने सुना तो उन्हें पहले भरत पर गुस्सा आया लेकिन जब प्राची की हरकते याद आयी तो उन्हें ना चाहते हुए भी भरत की बात माननी पड़ी।

मिस्टर देसाई ने भरत की बात का यकीन तो कर लिया लेकिन पृथ्वी को वे शुरू से ही बहुत पसंद करते थे। उसकी पर्सनालिटी , उसके काम करने का तरीका , उसके उसूल सब से मिस्टर देसाई काफी प्रभावित थे तभी तो उन्होंने हमेशा प्राची को समझाया कि वह पृथ्वी की जिंदगी में दखल ना दे।

उन्होंने भरत को देखा और कहा,”भरत ! हो सकता है तुम्हारी बात सही हो और प्राची ने कम्पनी को लेकर कुछ गलत डिसीजन लिए हो लेकिन पृथ्वी को लेकर मैं यकीन से  कह सकता हूँ कि वह कभी कोई गलत डील लेकर यहाँ नहीं आएगा और जयदीप से भी मैं बहुत बार मिल चुका हूँ वो अपने काम को लेकर काफी ईमानदार और गंभीर है। तुम्हे शायद कोई गलतफहमी हुई है , वैसे भी प्राची की जगह अब तुम इस कम्पनी के प्रेजिडेंट हो तो मेरे ख्याल से तुम बेहतर फैसला ले सकते हो।

प्राची का बिहेवियर दिन ब दिन बदलता जा रहा है और इन दिनों मैं उसे लेकर परेशान हूँ इसलिए ऑफिस में भी ठीक से ध्यान नहीं दे पा रहा। मैं एक हफ्ते के लिए प्राची को साथ लेकर कोलकाता जा रहा हूँ उसकी भुआ के घर ताकि उसकी हवा पानी बदले तब तक ऑफिस के सब काम तुम्हेँ ही देखने होंगे,,,,,,,,,मैं फोन और मेल पर अवेलेबल रहूंगा तो कोई भी जरुरी डिसीजन हो तो तुम पहले मुझसे पूछना,,,,,,,,,!”

भरत ने जब सुना कि देसाई सर एक हफ्ते के लिए मुंबई से बाहर जा रहे है तो वह मन ही मन खुश हो गया लेकिन चेहरे पर गंभीर भाव लाकर कहा,”सर ! आपके बिना मैं अकेले कैसे ये सब सम्हाल पाऊंगा ?”
“भरत ! मुझे तुम पर पूरा भरोसा है तुम कर लोगे ? इस कम्पनी में मुझे सबसे ज्यादा तुम पर भरोसा है और इसीलिए मैं ये सब तुम पर छोड़कर एक हफ्ते के लिए बाहर जाना चाहता हू”,मिस्टर देसाई ने कहा

“सर आपने मुझ पर भरोसा किया थैंक्यू ! मैं पूरी कोशिश करूंगा कि आपको शिकायत का मौका ना दू”,भरत ने हलकी से मुस्कान के साथ कहा लेकिन इस मुस्कान के पीछे का राज कुछ और था जो सिर्फ भरत जानता था।
मिस्टर देसाई उठे और अपना फोन उठाकर जेब में रखते हुए कहा,”मैं अब चलता हूँ , मुझे घर जाकर प्राची से बात करनी होगी और फिर आज शाम की फ्लाइट है,,,,,,,,!!!”
“आईये मैं आपको बाहर तक छोड़ देता हूँ”,भरत ने अपनी कुर्सी से उठकर कहा

मिस्टर देसाई ने भरत के कंधे पर हाथ रखकर उसे वापस बैठाया और कहा,”भरत ! अब तुम इस कम्पनी के प्रेजिडेंट हो मेरे मैनेजर नहीं , तुम बैठो मैं चला जाऊंगा बाहर ड्राइवर मेरा इंतजार कर रहा है”
भरत ने हामी में गर्दन हिला दी और मिस्टर देसाई वहा से चले गए।

मिस्टर देसाई अपनी गाड़ी में बैठकर ऑफिस से निकल गए और उसी वक्त जयदीप की गाडी आकर रुकी। उसने मिस्टर देसाई को जाते नहीं देखा इसलिए अपनी गाड़ी साइड में लगाई और अंदर चला आया। अंदर आकर जयदीप सीधा मिस्टर देसाई के केबिन की तरफ जाने लगा तभी सामने से आते भरत से नजरे मिली और जयदीप रुक गया। भरत जयदीप के पास आया और मुस्कुरा कर कहा,”जयदीप मौर्या ! आप और यहाँ ?”

“आखिर ये सब क्या है भरत ? देसाई सर ने हमारी कम्पनी से हुई सभी डील को केंसल क्यों कर दिया ? सभी डॉक्युमेंट्स क्लियर है और शेयर्स होल्डर्स ने खुद इसे अप्रूव किया है फिर एकदम से इन्हे केंसिल करने का क्या मतलब है ? मुझे अभी और इसी वक्त देसाई सर से मिलना है”,जयदीप ने कठोर स्वर में कहा। डील केंसल होने का गुस्सा उसकी आँखों और शब्दों में साफ़ नजर आ रहा था।
“आपने आने में देर कर दी मिस्टर जयदीप मौर्या ! देसाई सर तो अभी अभी निकल गए , दरअसल वो एक हफ्ते के लिए फॅमिली ट्रिप पर जा रहे है और कुछ देर बाद उनकी फ्लाइट है”,भरत ने सहजता से कहा

“क्या एक हफ्ते के लिए ? लेकिन दो दिन बाद मुझे सभी प्रोजेक्ट सबमिट करने है और ऐसा नहीं हुआ तो फिर ये डील मेरे किसी काम की नहीं रहेगी और लाखो का नुकसान हो जाएगा”,जयदीप ने घबराहट भरे स्वर में कहा
“आई ऍम सो सॉरी जयदीप मौर्या ! आपके प्रोजेक्ट्स की सभी रिपोर्ट्स गलत है और मुझे नहीं लगता है आपकी इन डील्स से हमारी कम्पनी को कोई फायदा है,,,,,,,,,,,,,,,ऐसा मेरा नहीं देसाई सर का कहना है और उन्होंने ही मुझसे इन्हे केंसल करने को कहा है”,भरत ने कहा

भरत ने सुना तो उलझन में पड़ गया। उसे अहसास हुआ कि जल्दी ही वह एक बड़ी मुसीबत में फसने वाला है। उसने अपने रुमाल से अपना ललाट पोछा और कहा,”सभी प्रोजेक्ट फाइल मेरी निगरानी में सबमिट हुई है भरत उनमे गलती होने के चांस ही नहीं है और फिर एक बार मुझसे गलती हो भी जाए लेकिन पृथ्वी ,पृथ्वी की रिपोर्टिंग में कोई गलती नहीं हो सकती। प्लीज भरत अगर तुम्हारी मौर्या ग्रुप के साथ कोई दुश्मनी है तो उसे किसी और तरह से निकालो पर ये मत करो,,,,,,,,,,,मैं मैं बर्बाद हो जाऊंगा , मैं इन 6 प्रोजक्ट्स पर बहुत पैसा लगाया है और 1 साल की मेहनत भी है,,,,,,,,,,,!!!”

जयदीप की बात सुनकर भरत कुछ देर खामोश रहा और फिर कहा,””ठीक है मै आपकी मदद करने के लिए तैयार हूँ लेकिन बदले में मैं जो कहू वो आपको करना होगा”
“मुझे क्या करना होगा ?”,जयदीप ने पूछा
“आईये बैठकर बात करते है”,भरत ने कहा और जयदीप के साथ अपने केबिन में चला आया। केबिन में जाते हुए जयदीप के चेहरे पर उम्मीद की किरण थी आधे घंटे बाद जयदीप केबिन से बाहर आया।

उदास चेहरा , खामोश आँखे और चाल इतनी धीरे जैसे उसके पैरो में जान ही ना हो। भरत ने जयदीप से क्या कहा ये तो भरत और जयदीप को ही पता था लेकिन उसने जयदीप के सामने ऐसी शर्त रखी जो शायद इस डील को बचाने से भी ज्यादा अहम् थी। जयदीप थके कदमो से कम्पनी से बाहर निकल गया। वह अपनी गाडी में आकर बैठा और वहा से निकल गया।

नीलम भुआ का घर ,पनवेल
अवनि और दादी नीलम भुआ के घर में थे और जैसे ही सब घरवालों को पता चला कि अवनि और दादी नीलम भुआ के घर में है तो सभी वहा आ धमके। बड़े पापा घर में ही रहते थे लेकिन रवि जी और चाचा को बाहर काम करने जाना पड़ता थे लेकिन उन्होंने भी एक हफ्ते की छुट्टी ले ली क्योकि उन्हें पृथ्वी और अवनि की शादी की तैयारी जो करनी थी। सभी नीलम भुआ के घर के हॉल में बैठे थे। साक्षी मीशू के साथ घर पर थी , हिमांशु अपने ऑफिस में था जबकि हिमानी , मोहित और लक्षित कॉलेज गए थे।

बड़े पापा , बड़ी मम्मी , चाचा ,चाची , रवि जी और लता जी नीलम भुआ के घर में थे। दादी , नीलम भुआ और अवनि पहले से वहा मौजूद थे।
दोपहर होते होते हिमांशु , साक्षी , मीशू , हिमानी , मोहित और लक्षित भी वही चले आये और अब तो पहले से भी ज्यादा हंसी मजाक और शोर गुल बढ़ चुका था। सब शादी की तैयारियों को लेकर बाते कर रहे थे और अवनि बार बार अपना फोन देख रही थी। पृथ्वी ने सुबह से एक भी मैसेज या फोन नहीं किया था और ऑफिस के काम में बिजी होगा सोचकर अवनि सामने से उसे डिस्टर्ब करना नहीं चाहती थी।

मायूस अवनि ने अपना फोन साइड में रखा और सबकी बातें सुनने लगी। पृथ्वी के बिना उसे यहाँ कुछ अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन फिर भी उसने अपना मन सबकी बातो में लगाने की कोशिश की।
“अवनि ! यहाँ आओ”,रवि जी ने अपने जेब से पर्स निकालकर कहा

अवनि उसके पास जा खड़ी हुई तो उन्होंने पर्स से कुछ नोट निकाले और अवनि की तरफ बढाकर कहा,”ये तुम रखो तुम्हारे काम आएंगे और मैंने बात कर ली है कल सुबह सबके साथ जाकर अपने लिए शादी का जोड़ा पसंद करके आना,,,,,,,,,,बाकि सब मैं देख लूंगा”
अवनि ने रवि जी के हाथ में पैसे देखकर,”मैं आपसे पैसे कैसे ले सकती हूँ ? आप रखिये प्लीज”

रवि जी ने पैसे अवनि के हाथ में थमाकर कहा,”जैसे एक बेटी अपने पिता से लेती है वैसे ही रखो ये पैसे तुम्हारी छोटी मोटी जरूरतों में काम आएंगे”
रवि जी के मुँह से पिता शब्द सुनकर अवनि की आँखों की आँखों में आँसू भर आये। उसे एकदम से अपने पिता विश्वास जी की याद आ गयी। वे भी तो अवनि को पढाई और दूसरे खर्चो के लिए ऐसे ही जिद करके पैसे दिया करते थे।

घरवालों ने रवि जी को अवनि की परवाह करते देखा तो सबके चेहरे ख़ुशी से खिल उठे और फिर सबने अवनि से वो पैसे रख लेने को कहा। लता ने अवनि से अपने पास आने का इशारा किया और उसका हाथ थामकर कहा,”अवनि ! क्या तुम अब भी हम सबको पराया समझ रही हो ?”
अवनि ने सुना तो नम आँखों से ना में गर्दन हिला दी।

लता ने अवनि के गाल को अपने हाथ से छुआ और प्यार से कहा,”तो फिर तुम्हारी आँखों में ये आँसू किसलिए ? ये घर और इस घर के लोग अब से सब तुम्हारे अपने है और तुम पुरे हक़ से हम सब से जो चाहिए वो माँग सकती हो”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”मैं जो माँगू मुझे वो मिलेगा”
“अरे बेटा तुम मांगकर तो देखो , फिर तुम देखोगी उपाध्याय खानदान वालो का दिल कितना बड़ा है”,बड़े पापा ने कहा

अवनि ने अपनी नजरे झुकाई और सबकी तरफ पलटकर कहा,”मैं शादी में अपनी माँ की दी पोशाक पहनना चाहती हूँ , अगर आप सब मुझे इसकी इजाजत दे तो मैं वो पहनना चाहती हूँ,,,,,,,,,मुझे लगेगा ख़ुशी के इस मौके पर वो मेरे साथ है,,,,,,,,,,,बस इस से ज्यादा मुझे आप सबसे कुछ नहीं चाहिए”
अवनि की बात सुनकर सब मुस्कुराने लगे। अवनि ने माँगा भी तो क्या मांगा और इसके लिए उसे भला कौन ही मना करता ? सबने ख़ुशी ख़ुशी अवनि की इस बात को मान लिया।

दोपहर बाद सभी घरवाले अपने अपने घर चले गए। नीलम भुआ ,दादी और अवनि रह गए। जब अवनि होली पर घर आयी थी तब नीलम भुआ उसके साथ बुरा बर्ताव कर रही थी लेकिन अब जब अवनि उनके घर आयी तो उन्होंने तो जैसे उसे पलकों पर ही बैठा लिया। दादी थक गयी थी इसलिए आराम करने को लेट गयी और नीलम भुआ अवनि को लेकर अपने कमरे में चली आयी। नीलम भुआ ने अवनि को सभी घर वालो के बारे में बताया , पृथ्वी के बचपन की शरारतो के बारे में बताया और भी कई बाते बताई और अवनि हँसती मुस्कुराती हुई सब सुनती रही।

“भुआ जी ! आपने सबके बारे में बताया लेकिन अपनी शादी के बारे में नहीं बताया,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने एकदम से कहा तो नीलम कुछ देर के लिए खामोश हो गयी और फिर बिस्तर पर आ बैठी। नीलम भुआ ने अवनि को अपनी शादी और उसके टूटने के बारे में बताया जिसे सुनकर अवनि उदास हो गयी। अवनि को उदास देकर नीलम भुआ उठी और कहा,”जाने दो इन बातो को वैसे भी ये सब गुजर चुका है अवनि,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि का मन फिर भी उदास ही था क्योकि नीलम भुआ की बातों से उसे अहसास हुआ कि उनकी शादी बस कुछ गलतफहमियों की वजह से टूटी थी।

नीलम भुआ ने कबर्ड खोला और कुछ साड़िया लेकर अवनि के पास आयी और कहा,”अवनि ! ये साड़िया मैंने बहुत सम्हालकर रखी सोचा मेरी कोई बेटी होगी तो उसे दूंगी लेकिन किस्मत ने वो पल मेरी जिंदगी में दिया ही नहीं इसलिए मैं चाहती हूँ तुम्हारी और पृथ्वी की शादी तक तुम इन्हे पहनो,,,,,,,,,,,अगर तुम इन्हे पहनोगी तो मुझे ख़ुशी होगी”

अवनि ने देखा ये वही नीलम भुआ थी जो दो दिन पहले उसे अपनी पुरानी साड़ी पहनाकर उसे ताने मार रही थी और आज अपनी नयी साड़िया लाकर अवनि के सामने रख दी। वक्त इतनी जल्दी बदलेगा अवनि ने ये कभी सोचा नहीं था , उसकी आँखों में एक बार फिर ख़ुशी के आँसू भर आये।

( क्या मिस्टर देसाई जान पाएंगे भरत के इरादे ? भरत ने आखरी जयदीप के सामने वो कौनसी शर्त रखी जिसे सुनकर उड़ गए जयदीप के होश ? क्या अवनि पहनेगी नीलम की दी इन साड़ियों को ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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1 comment

Kshmata Chauhan June 18, 2026 - 11:20 am

Yr yeh Bharat to bahot hee zayda kamina nikla…isne company ko dubone m koi kasar nhi chodi hai…itna andha visvas achcha nhi hota hai Mr. Desai…ek taraf wo pagal ladki Prachi Desai jo Prithvi ko pane k sapne dekh rhi hai, usko company aur apne baap se kuch matlab nhi hai…khar Bharat ne zarur Jaideep sir se moti rakam maangi hogi deal k badle…ek baar Prithvi aaj jaye Udaipur se…tab dekhna Bharat tumko kaise thik krta hai Prithvi.

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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