Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 51

by Story With Sanjana May 17, 2026
written by Story With Sanjana May 17, 2026 1 comment
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Manmarjiyan Season 4 – 51

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी का घर ,कानपूर
अम्मा के कमरे में खड़ी मिश्राइन ,शगुन और वेदी सोये हुए भुआ और फूफा को मरा हुआ समझकर अवाक् खड़ी थी। वेदी ने देखा मिश्राइन खामोश खड़ी है न कुछ बोल रही है ना हिल रही है तो वह उनके पास आयी और उनकी बाँह पकड़कर उन्हें हिलाते हुए कहा,”अम्मा ! अम्मा का हुआ ?”
मिश्राइन चौंकी जैसे किसी ने उन्हें नींद से उठाया हो। उन्होंने वेदी की तरफ देखा और घबराये हुए स्वर में कहा,”जे आदर्श बाबू और जिज्जी को का हुआ रे वेदिया , जे दोनों उठ काहे नाही रहे ?”

मिश्राइन को घबराया देखकर शगुन उनके पास आयी और उन्हें कमरे से बाहर ले जाते हुए कहा,”माजी ! आप मेरे साथ बाहर आईये”
वेदी वही खड़ी भुआ और फूफा को देखती रही वह धीरे धीरे चलकर उनके पास आयी और भुआ के नाक के पास अपनी ऊँगली लगाकर देखा। ख़ुशी से वेदी का चेहरा खिल उठा वह भागकर बाहर आयी और तख्ते पर बैठी मिश्राइन से कहा,”अम्मा ! अम्मा भुआ फूफा मरे नाही है ज़िंदा है , लगता है उह्ह दोनों गहरी नींद मा है”
“अरे जे कैसी नींद है जे मा जिज्जी आँखे खोलकर सोई है”,मिश्राइन ने घबराहट भरे स्वर में कहा  

“अरे अम्मा हमने अपनी ऊँगली उनके नाक के आगे लगाकर देखी है ,साँस आ रहा है उनको”,वेदी ने कहा
“अरे वेदिया तुमहू भी का उल जुलूल बकती हो अरे उह्ह्ह मरने के बाद थोड़ी सांसे इंसान की नाक मा रह जाती है , तुमहू ओही महसूस की होगी,,,,,,,,,अभी अम्मा को गुजरे थोड़ा ही वक्त हुआ था अब जे दोनों भी भगवान् को प्यारे हो गए,,,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए मिश्राइन रोआँसा हो गयी और अपनी साड़ी का पल्लू मुँह में खोंसकर जैसे ही रोने लगी शगुन ने कहा,”माजी ! वेदी सही कह रही है , वो दोनों मरे नहीं है ज़िंदा है वो तो लवली भैया ने उन्हें,,,,,,,,,,,,,,!!”

“लवली ने का शगुन ?”,मिश्राइन ने शगुन को देखकर हैरानी से कहा
जल्दबाजी में शगुन के मुँह से लवली का नाम निकल गया लेकिन उसने असल बात नहीं बताई और कहा,”अरे माजी ! वो लवली भैया ने उनके लिए जो खाना बनाया था ,लगता वही खाकर उनकी तबियत खराब ज्यादा हो गयी है और वो अभी तक सो रहे है,,,,,,,!!!”
“वेदिया जे लवली कहा है जरा बुलाओ ओह्ह का , उह्ह्ह कब से जे सब कांड करने लगा ?”,मिश्राइन ने वेदी से कहा तो वेदी वहा से चली गयी।

मिश्राइन की घबराहट देखकर शगुन उनके लिए पानी ले आयी। मिश्राइन ने पानी पीने लगी तभी अम्मा के कमरे से निकलकर फूफा आये उन्हें देखते ही मिश्राइन के मुँह में भरा पानी बाहर आ गिरा और उनके मुँह से निकला,”अरे आदर्श बाबू आप ज़िंदा है ?”
आदर्श फूफा ने सुना तो उनकी भँवे तन गयी और उन्होंने कहा,”हाँ हमहू ज़िंदा है लेकिन आपके उह्ह लवली ने तो हमे मारने का पूरा बंदोबस्त कर लिया था। उह् ससुरे को छोड़ेंगे नाही हम,,,,,,,,,,!!!”

“कौन आपको मारना चाह रहा है आदर्श बाबू ?”,मिश्रा जी की आवाज एकदम से सबके कानो में पड़ी। सबने आँगन की सीढ़ियों की तरफ देखा तो पाया मिश्रा जी अभी अभी घर आये थे। मिश्रा जी को घर में देखकर आदर्श बाबू और चौड़ में आ। मिश्राइन भी तख्ते से उठ खड़ी हुयी। मिश्रा जी तख्ते पर आ बैठे और कहा,”का बात हो गयी आप इत्ता गुस्सा मा काहे है ?”

“अरे गुस्साये ना तो और का करे मिश्रा जी , हमहू वेदिया के ब्याह तक जे घर मा रहने की बात का कह दिए सब हमायी और राजकुमारी की जान के दुश्मन बन गए ,आपके उह्ह्ह लाड़ले लवली ने हमे और राजकुमारी को जान से मारने की कोशिश की है। अरे बुलाओ ओह्ह का अभी दूध का दूध और पानी का पानी हो जाही है”,फूफा ने गुस्सा होकर कहा
मिश्रा जी ने सुना तो मिश्राइन की तरफ देखा। मिश्रा जी के सवालो से बचने के लिए मिश्राइन ने कहा,”मैं आपके लिए पानी लेकर आती हूँ”

मिश्राइन के जाने के बाद मिश्रा जी ने लवली को आवाज लगाई,”लवली , लवली”
“आया पिताजी”,लवली ऊपर से ही चिल्लाया और नीचे जाने के लिए सीढ़ियों की तरफ भागा। आज पहली बार इस घर में उसे मिश्रा जी का डर महसूस हुआ। लवली मिश्रा जी के सामने आया और कहा,”आपने बुलाया पिताजी”
“जे आदर्श बाबू का कह रहे है ?”,मिश्रा जी ने बाँयी भंव चढ़ाकर लवली से सवाल किया

“का कह रहे है पिताजी ?”,लवली ने अनजान बनते हुए कहा जबकि पता उसे भी था कि उसने आदर्श फूफा और भुआ के साथ क्या किया है ?
“का कह रहे है ? अरे हम जे कह रहे है कि पहिले खाने मा कुछो मिलाया और हमरा पेट खराब किया फिर दवा के बहाने हमे नींद की दवा दे दी। नहीं का चाहते हो तुमहू ,हमे और हमायी राजकुमारी को मारना चाहते थे ?”,आदर्श फूफा ने गुस्से से कहा

लवली ने सुना तो चुप हो गया उसका कांड सामने आ चुका था और फूफा को ये समझते देर भी नाही लगी। लवली को चुप देखकर फूफा की हिम्मत और बढ़ गयी और उन्होंने मिश्रा जी को सुनाते हुए कहा,”क्यों बोलती काहे बंद हुई गयी तुम्हाये लौंडे की मिश्रा जी ? अरे पूछो इनसे हमाये खाने मा दवा मिलाये के नाही जे ? जैसा बाप वैसा बेटा ,अरे इत्ती जल्दी नाही मरे है हम तुम सब लोगन को साथ लेकर मरे है”

“आदर्श बाबू ! जबान को थोड़ा सम्हालिए ,,अभी अभी अम्मा गुजरी है और आप ऐसी अशुभ बातें कर रहे है,,,,,,,,,!!”,मिश्राइन ने कहा
“अरे हमहू तो सिर्फ अशुभ बात किये है पर जे लवली , जे तो अशुभ काम करने जा रहे थे। अरे इत्ती नफरत है हम से और राजकुमारी से तो कह दयो ना हमहू ख़ुशी ख़ुशी हिया से चले जाते पर जे तो हमे दुनिया से भेजने आ  पिलान बनाए के बैठे है”,आदर्श फूफा ने कहा

मिश्रा जी ने सब बात सुनी और लवली की तरफ देखकर कहा,”आदर्श बाबू जो कह रहे है का उह्ह सच है ?”
“पिताजी वो ,वो हम ,हम आपको समझाते है”,लवली ने कहा
“लवली हमने पूछा आदर्श बाबू जो कहे रहय उह्ह सच है कि नाही ? केवल हाँ या न में जवाब दोगे तुम”,मिश्रा जी ने थोड़ा कड़क स्वर में पूछा
“हाँ,,,,,,,,,,,!!!”,लवली ने नजरे झुकाकर धीरे से कहा

मिश्रा जी ने सुना तो उनके चेहरे पर गुस्से के भाव तैरने लगे।  गोलू गुड्डू गलतिया करते थे लेकिन अब लवली भी ऐसी हरकते करने लगा जानकर मिश्रा जी को बहुत दुःख हुआ। सच जानने के बाद भी मिश्रा जी को चुप देखकर आदर्श फूफा ने कहा,”क्यों मिश्रा? बिटवा का सच सामने आये रहा तो मुँह मा दही जमाय लिए अभी जे ही हरकत उह्ह्ह गोलुआ किये रहता तो बेचारे को अब तक पेल दिए होते तुम,,,,,,,,,,,,,,,,,

और गुड्डू गोलू कित्ती भी गड़बड़ किये होंगे पर कबो हमायी जान लेने की कोशिश नाही की पर तुम्हरा जे लौंडा लवली जे तो पहली बार मा ही हमे मारने का सोच लिए ,जे लिए कोनो सजा नाही है ?”
आदर्श फूफा की बात सुनकर मिश्राइन ने मिश्रा जी के पास आकर कहा,”देखिये जी जे आदर्श बाबू तो बात का बतंगड़ बना रहे है , लवली ने ऐसा कुछो नाही किया,,,,,,,,,,ओह्ह्ह का माफ़ कर दयो”

“मिश्राइन ! लगता है तुमहू ध्यान से नाही सुनी , सबके सामने अभी अभी लवली ने हाँ कहा है , ओह्ह्ह का मतलब है आदर्श बाबू जो कह रहे है उह्ह सच है इहलीये तुमहू बीच मा नाही पड़ो”,मिश्रा जी ने कठोर स्वर में कहा
मिश्रा जी की आँखों में गुस्सा देखकर मिश्राइन ख़ामोशी से पीछे हट गयी लेकिन मन ही मन उन्हें लवली के लिए बुरा भी लग रहा था। लवली चुपचाप खड़ा था और मन ही मन खुद को दोष दे रहा था कि आखिर उसने ऐसी बचकानी हरकत क्यों की ? वह शर्मिंदा था कि उसकी वजह से एक बार फिर आदर्श फूफा को उलटा सीधा बोलने का मौका मिल जाएगा और मिश्रा जी को सुनना पड़ेगा।

आदर्श फूफा के मुँह से सजा की बात सुनकर मिश्रा जी उठे और वही गमले के पास पड़ी छड़ी उठाकर वापस चले आये। उन्होंने लवली को अपने सामने आने को कहा। लवली उनके सामने आ खड़ा हुआ तो मिश्रा जी ने कठोरता से कहा,”हाथ आगे करो”
लवली ने ख़ामोशी से अपना हाथ आगे कर दिया। मिश्रा जी ने खींचकर एक छड़ी लवली के हाथ पर दे मारी। एक आह लवली के मुँह से निकली और चेहरे पर दर्द उभर आया लेकिन लवली वही खड़ा रहा।

लवली को मार खाते देखकर शगुन और वेदी के चेहरे पर उदासी के भाव थे और मिश्राइन की आँखों में नमी लेकिन तीनो में से किसी ने भी मिश्रा जी को रोकने की कोशिश नहीं की। शगुन से लवली का दर्द देखा नहीं गया इसलिए वह वहा से चली गयी। सबके चेहरे पर उदासी और दर्द के भाव थे खुद मिश्रा जी के भी लेकिन आदर्श फूफा मुस्कुरा रहे थे।

मिश्रा जी ने लवली को चार पाँच छड़ी और मारी और गुस्से से कहा,”जे पहली बार है लवली आइंदा ऐसा कुछो किया तो हमहू माफ़ नाही करेंगे,,,,,,,,,,,जाओ जाकर आदर्श फूफा से माफ़ी मांगों”
लवली अपने हाथो को मसलते हुए आदर्श फूफा के पास आया और कहा,”हमे माफ़ कर दीजिये फूफा आइंदा से हमहू ऐसा कुछो नाही करेंगे”

आदर्श फूफा ने एक तिरछी मुस्कान दी और लवली वहा से जाने लगा तो मिश्रा जी की आवाज फिर उसके कान मे पड़ी,”मिश्राइन ! आज रात का खाना नाही देना हिअ ओह्ह्ह का , एक रात भूखे रहेंगे तो अकल अपने आप ठिकाने आ जाएगी”
लवली ने कुछ नहीं कहा बस चुपचाप वहा से चला गया। उसे आदर्श फूफा पर बहुत गुस्सा आ रहा था और साथ ही दर्द भी हो रहा था। वह कमरे में चला आया और सुबकने लगा।

लवली के जाने के बाद भुआ अम्मा के कमरे से बाहर आयी और अंगड़ाई लेकर कहा,”सब हिया कहे जमा है ?”
“पंजीरी बट रही है”,फूफा ने कहा
“ल्यो हिया पंजीरी बट रही है और हमे किसी ने बताया तक नाहीं , हमहू भी थोड़ी ले लेते”,भुआ ने कहा उन्हें लगा सच में पंजीरी ही बट रही थी।

मिश्राइन ने सुना तो अपना सर पीट लिया और मिश्रा जी ने उठते हुए अफ़सोस भरे स्वर में कहा,”राम मिलाई जोड़ी , एक गधा एक घोड़ी”
आदर्श फूफा को मिश्रा जी की बात समझ आती इस से पहले मिश्रा जी वहा से चले गए।  

 भुआ की बात सुनकर मिश्राइन ने भी अफ़सोस में अपना सर हिलाया और मिश्रा जी के पीछे चली गयी। वेदी और शगुन पहले ही वहा से जा चुकी थी। आदर्श फूफा भुआ की तरफ पलटे और कहा,”हमे लेकर जे घर मा बहुते बड़ी साजिश की जा रही है राजकुमारी , जरा सम्हलकर रहना”
“अरे हमहू कबो सोचे नाही थे अपने ही घर मा हमाये साथ गैरो जैसा बर्ताव किया जाएगा , काश हमाओ गोलू हिया होते तो हमे जे सब नाही देखना पड़ता”,भुआ ने  उदास होकर कहा

भुआ के मुँह से हमाओ गोलू सुनकर फूफा का माथा ठनका और उन्होंने कहा,”का हमाओ गोलू ? उह्ह्ह तिकड़मबाज गोलू कब से तुम्हाये हो गए राजकुमारी ,, भूलो नाही उह्ह्ह गुडडुआ का दोस्त है और मिश्रा का ख़ास , उह्ह ससुरा बिना मतलब के कुछो नाही करता”
“हुंह ! हटो जो आप तो तब देखो तब उह्ह बेचारे के पीछे पड़े रहते हो,,,,,,,लाखो मा एक है हमाओ गोलू”,भुआ ने गोलू की तारीफ के पूल बांधकर कहा

“हाँ लाखो मा एक ही नमूना है जो अपनी लंका खुद लगाने मा विश्वास रखते है,,,,,,,,,,,,अब जे गोलू पुराण बंद करो और जाकर हमाये लिए एक कप चाय बनाओ”,फूफा ने उखड़े स्वर में कहा और सोफे की तरफ चले गए

मिश्राइन मिश्रा जी के पीछे पीछे अपने कमरे में आयी और कहा,”जे आपने ठीक नाही किया गुड्डू के पिताजी , जिज्जी और आदर्श बाबू की बातों मा आकर लवली को मारा , अरे कित्ता दुखा होगा ओह्ह्ह को,,,,,,,,,,,और का गलत किया लवली ने , जिज्जी और आदर्श फूफा हिया आकर हम सबके नाक मा जो दम किये है ओह्ह्ह के सामने तो लवली की गलती कुछो नाही है। लवली ने जो किया उह्ह मा हम भी ओह्ह्ह के साथ ही थे फिर जब सजा देनी ही है तो हमे भी दीजिये , अकेले लवली को काहे दिए ?”

मिश्रा जी ने सुना तो मिश्राइन की तरफ पलटे और कहा,”हम लवली को सजा दिए ताकि वह गुड्डू जैसा ना बने , हमाओ गुड्डू सीधो है मिश्राइन और सीधे लोगो का जे समाज मा गुजरा मुश्किल है,,,,,,,,,,,,आदर्श बाबू और राजकुमारी अभी अपनी जिद मा अंधे हो गए है उन्हें सही गलत समझ नाही आएगा पर जे दोनों बैल बुद्धियो के चक्कर मा लवली काहे अपनी अहमियत खराब करे इहलीये हमहू ओह्ह्ह का सजा दिए रहय ताकि आगे से उह्ह्ह ऐसे लोगो से दूर रहे”
मिश्रा जी की बात सुनकर खामोश हो गयी , आखिर कही न कही मिश्रा जी का कहना सही था।

अँधेरा होने से पहले आख़िरकार गुड्डू की गाडी चंदौली स्टेण्ड पर पहुंच ही गयी। गोलू ने देखा तो खुश होकर मंगल फूफा के कंधे पर मारकर कहा,”का फूफा ! कहे थे ना अँधेरा होने से पहले गाड़ी चंदौली पहुंचा देंगे”
मंगल फूफा बेचारे दरवाजा खोलकर उतर ही रहे थे कि उसी वक्त गोलू ने उनके कंधे पर मार दिया और मंगल फूफा गाड़ी के दरवाजे समेत गाडी के बाहर। गुड्डू ने देखा तो जल्दी से गाड़ी से नीचे उतरकर पीछे आया और देखा गाड़ी के एक साइड का दरवाजा निकल चुका है और मंगल फूफा के साथ नीचे पड़ा है।

गुड्डू ने गाडी के अंदर बैठे गोलू को देखा तो गोलू खिंसिया कर मुस्कुरा दिया। गुड्डू ने इधर उधर देखा उसे ईंट का आधा टुकड़ा नजर आया उसने उसे उठाया और जैसे ही गोलू की तरफ फेंका गोलू दूसरा दरवाजा खोलकर गाड़ी से बाहर और ईंट सीधा जाकर लगा गाड़ी के दरवाजे के शीशे पर और पिछली सीट के दरवाजे का शीशा भी बर्बाद,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!

गुड्डू भागकर आया और शीशा देखकर कहा,”जे का शीशा कहा गया ?”
“अभी आपने ही तो ईंटा मारकर तोडा था”,कुछ ही दूर खड़े गोलू ने कहा
“अरे वो तो हम तुमको मार रहे थे ना”,गुड्डू ने रोआँसा होकर कहा
गोलू ताली बजाते हुए गुड्डू की तरफ आया और कहा,”वाह वाह वाह गुड्डू भैया ! हमे मारना चाहते थे , बहुत सही हम साला हिया अपनी जान पर खेलकर आपके साथ आये है और आप हमे मारना चाहते थे ,अपने चंदन जैसे भाई को मारना चाहते थे”

गाडी का दरवाजा और शीशा टूटने से गुड्डू पहले ही गुस्से में था , गोलू की बात ने आग में घी का काम किया तो गुड्डू ने झुककर अपना जूता निकाला और गोलू के पीछे भागते हुए चिल्लाया,”साले तुमहू चंदन नाही कलंक हो हमाये माथे का,,,,,,,,,,,,,!!”
उधर बेचारे जब मंगल फूफा ने देखा गुड्डू पगला गया है तो उन्होंने बेहोश होने का नाटक किया और आँखे बंद कर अपनी गर्दन लुढ़का दी।

क्या मिश्रा जी की मार से आहत होकर लवली चला जाएगा घर छोड़कर ? क्या मिश्रा जी रोक पाएंगे लवली को गुड्डू बनने से ? क्या बिंदिया की शादी तक गोलू जिन्दा बच पायेगा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ

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संजना किरोड़ीवाल 

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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1 comment

Nency Patel May 17, 2026 - 2:06 pm

In tino ke kand sunke has has ke pet dukh raha hai mera

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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