Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 22

by Story With Sanjana August 13, 2026
written by Story With Sanjana August 13, 2026 0 comments
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Manmarjiyan Season 5 – 22

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू रूपा को लेकर घर आया था और रूपा ने आते ही गुड्डू की जिंदगी में आग लगा दी। भुआ के कान भरके रूपा तो अंदर चली गयी लेकिन बेचारे गुड्डू को फसा गयी। राजकुमारी भुआ ने भी रूपा की बात को मानकर रोना शुरू कर दिया और शगुन के नाम का राग अलापते हुए अंदर चली आयी। मिश्राइन मिश्रा जी अपने कमरे में थे। बिंदिया वेदी के कमरे में आराम कर रही थी और शगुन अपने कमरे में , भुआ साड़ी का पल्लू मुँह में खोंसे रोते हॉल से होकर शगुन के कमरे की तरफ जाने लगी तो रास्ते में आदर्श फूफा उन्हें मिले और कहा,”अरे अब का हो गवा , अब काहे गंगा जमना बहाय रही हो ?”

“अनर्थ हुई गवा कोमलिया के पिताजी,,,,,,,,,,इह घर का चिराग बिगड़ गवा है”,भुआ ने कहा और आदर्श फूफा को साइड करके शगुन के कमरे की तरफ बढ़ गयी। आदर्श फूफा को ना भुआ की बात समझ आयी ना ही उनके रोने की वजह तो वे बाहर चले गए।

भुआ शगुन के कमरे में आयी और देखा बिस्तर पर बैठी शगुन कोई किताब पढ़ रही है तो भुआ ने उसके पास आकर किताब उसके हाथ से ली और साइड में रखकर कहा,”अरे शगुन बिटिया ! तुमहू हिया किताब पढ़ रही हो , हुआ तुमहाओ गुड्डू शादी के इम्तिहान मा फ़ैल भये”
“ये क्या कह रही है आप भुआजी ?”,शगुन ने हैरानी भरे स्वर में कहा

“अरे वही कह रहे है जो अपनी आँखों से देख के आ रहे है। तुम्हाये गुड्डू जी उह्ह्ह रूपा को अपनी फटफटिया पे घुमाय रहे है और उह्ह रूपा इतरा इतरा कर हमे जे बताय रही है,,,,,,,,,,,,हमका तो बहुते टेंशन होय रही है शगुन , पहिले तुम्हाये फूफा पर नजर डाल के बैठी थी और अब गुडडुआ के पीछे,,,,,,,,,,तुमहू ज़रा ध्यान दयो , इह हालत मा जब घरवाली पेट से हो मर्द का पैर फिसलते देर नाही लगती है”,राजकुमारी भुआ ने दबे स्वर में कहा

शगुन ने सुना तो हसने लगी। हंसी इसलिए क्योकि एक तो उसे अपने गुड्डू जी पूरा भरोसा था और दूसरा राजकुमारी भुआ जो कुछ भी सुनकर सच मान लेती थी। शगुन को हँसते देखकर भुआ हैरान रह गयी और कहा,”ल्यो ! हमहू तुमको इत्ती बड़ी बात बताय रहे और तुमहू हंस रही हो,,,,,,,,,,,,अरे अभी से ध्यान नहीं न दी हो गुड्डू पर तो हाथ से निकल जाहि है उह्ह्ह”

शगुन ने हँसते हुए राजकुमारी भुआ का हाथ पकड़ा और कहा,”अरे भुआ जी ! आप खामखा इतना परेशान हो रही है। रूपा को साथ लेकर जाने के लिए गुड्डू जी से पापा जी ने कहा था ताकि वह नवरतन चाचा के यहाँ अपने कपड़ो का नाप दे आये। उसने आपसे जो भी कहा वो बस मजाक में कहा और फिर गुड्डू जी ऐसे लड़के नहीं है , मुझे उन पर पूरा भरोसा है”

“फिर उह्ह हमसे जे सब काहे कही ?”,भुआ ने पूछा
“जब से वो इस घर में आयी है तब से आप और फूफा जी उस से चिढ रहे है ना इसलिए उसने आपको चिढ़ाने के लिए ऐसा कहा,,,,,,,,,,,,,,,और आप ना बहुत मासूम है भुआ जी कोई कुछ कहता है और आप तुरंत सच मान लेती है”,शगुन ने बड़े प्यार से भुआ जी को समझाया

“हाँ जे बात तो तुमने ठीक कही शगुन ! का करे हमाओ स्वभाव ही ऐसो है। कोई कुछ कहता है और हम मान लेते है। अच्छा हुआ तुमहू हमका इह बात अच्छे से समझाय दी नहीं तो दिनभर हमाये दिमाग में जे ही सब चलता रहता”,भुआ जी ने कहा

“आप परेशान मत होईये ! रूपा बस जे घर मा कुछ दिन की मेहमान है फिर अपने घर चली जाएगी”,शगुन ने कहा
भुआ जी शगुन के सामने से उठी और जो किताब उसके हाथ से छीनी थी वह वापस शगुन की तरफ बढाकर कहा,”हमहू खामखा तुमको डिस्टेकट कर दिए तुमहू पढ़ो हमहू चलते है”

शगुन ने सुना तो हंसी और कहा,”डिस्टेक्ट नहीं भुआजी डिस्टर्ब,,,,,,,,,,कोई बात नहीं आप जाकर अपने कमरे में आराम कीजिये”
शगुन की बात सुनकर भुआ वहा से चली गयी और शगुन एक बार फिर अपनी किताब पढ़ने लगी।

वेदी अपने कमरे में बैठकर बिंदिया से बातें कर रही थी कि तभी रूपा दनदनाते हुए कमरे में आयी और वेदी से कहा,”जे तुम्हायी भुआ को हमसे का तकलीफ है ? जब देखो तब हमाओ रास्ता रोक के खड़ी हो जाती है”

वेदी को रूपा शुरू से ही पसंद नहीं आयी लेकिन घर में मेहमान थी इसलिए वेदी ने कुछ नहीं कहा पर जैसे ही रूपा ने भुआ के लिए दो शब्द कहे वेदी उठकर उसके सामने आयी और कहा,”हमायी भुआ को तुमसे काहे तकलीफ होगी ? तुमहू तो फिर भी जे घर मा मेहमान हो भुआ तो जे घर की बिटिया है ओह्ह्ह का हक़ है घर मा आने जाने वालो से सवाल करने का , जे मा इत्ता का उछल रही हो तुम ?”

रूपा थी गाँव की ठेठ औरत वह भला वेदी की कहा सुनने वाली थी उसने भी गुस्से से कहा,”हाँ तो अपनी भुआ से कहो अपने काम से काम रखे हमसे जियादा सवाल जवाब ना करे,,,,,,,,,,,,और हमहू मेहमान है तो हम कौनसा परमानेंट हिया बसने के लिए आये है। कल सुबह चले जायेंगे बस आज आज की बात है”

“तुमको तो हमहू आज आज भी ना झेल पाही है,,,,,,,,!!”,कहकर वेदी बिंदिया की तरफ पलटी और कहा,”भाभी ! हमहू शगुन भाभी के कमरे मा जा रहे है , आप और आपकी इह सहेली यहाँ रुकिए”
रूपा का वेदी से इस तरह बात करना बिंदिया को भी अच्छा नहीं लगा लेकिन इस वक्त कुछ बोलकर वह बात को बढ़ाना नहीं चाहती थी इसलिए वेदी के सामने  धीरे से हामी में सर हिला दिया। वेदी रूपा को घूरते हुए वहा से चली गयी।  

वेदी के जाने के बाद बिंदिया ने रूपा से कहा,”इह सब का है रूपा ? वेदी से इतना बदतमीजी से बात काहे की ?”
रूपा बिंदिया की तरफ आयी और उसके सामने बैठकर कहा,”हमको एक ठो बात बताओ बिंदिया ! हमहू हिया आकर कोनो गलती किये का ? अरे हमहू चकिया  से तुम्हाये साथ आये है तो तुम्हाये साथ ही रहेंगे ना और कोनसा हमेशा के लिए जैसे ही हमाओ फैसलों हो जाही है ,  हमहू चले जायेंगे”

“और मंगल फूफा ? ओह्ह्ह का अकेले छोड़कर तुमहू हिया चली आयी , ओह्ह्ह के बारे मा का सोची हो तुमहू ?”,बिंदिया ने चिंतित स्वर में पूछा
“फिलहाल हमहू कुछो नाही सोचे है बिंदिया , हमे बस कल सुबह का इंतजार है जब हमहू अपना फैसला सुनाय दी है”,रूपा ने उखड़े स्वर में कहा
“अच्छा कोई बात नहीं लेकिन रूपा , हमयी बात सुनो कल सुबह तक किसी से कोनो तरह की बदतमीजी नाही करना बस,,,,,,,,,,,,,,,इह हमाओ ससुराल है अच्छा थोड़े लगता है”,बिंदिया ने रूपा से विनती करके कहा

“हम काहे करेंगे बदतमीजी ? उह्ह तो गुड्डू की भुआ खामखा हमाये पीछे पड़ी थी। अरे हमहू का पगलेट है जो उह्ह्ह अधेड़ उम्र के फूफा के साथ चक्कर चलाएंगे , खामखा हमाये पीछे पड़ी है उह्ह्ह”,रूपा ने चिढ़कर कहा
“अच्छा ठीक है ! जाने दो ,, घरवालों से बात हुयी तुम्हायी ? हमाये अम्मा पिताजी कैसे है , कुछो पता चला ?”,बिंदिया ने उदास होकर पूछा

रूपा ने सुना तो मायूस होकर कहा,”कहा बिंदिया ? हमाओ फोन हमाये पास नाही है , पता करे भी तो कैसे करे ?”
बिंदिया ने सुना तो इधर उधर देखा तभी कमरे के सामने से गुजरता गुड्डू उसे दिखाई दिया तो उसने उसे आवाज दी,”गुड्डू,,,,,,,,,,,,,रुको”
गुड्डू कमरे के अंदर ना आकर बाहर ही रुक गया। बिंदिया गुड्डू के पास आयी और कहा,”उह्ह्ह ! हमे एक ठो जरुरी फोन करना है , दुइ मिनिट के लिए आपका फोन मिलेगा ?”
“अरे इसमें इतना पूछने की का बात है , लीजिये ना”,गुड्डू ने जेब से अपना फोन निकालकर बिंदिया को थमा दिया
“शुक्रिया”,बिंदिया ने कहा

“मेंशन नॉट”,गुड्डू ने कहा तो बिंदिया उसे एकटक देखने लगी और गुड्डू ने हँसते हुए कहा,”हमायी मास्टरनी ने सिखाया है , कोई थैंक्यू बोले तो जवाब मा इह कहो,,,,,,,,,,,,मास्टरनी को नाही जानते ? अरे शगुन ! का है न सादी से पहिले बनारस के कॉलेज मा नौकरी थी ओह्ह्ह की और फिर हमको बात बात पर बहुते लेक्चर देती है ना इहलीये हमहू ओह्ह्ह का नाम मास्टरनी रख दिए,,,,,,,,,,,,,,आप आराम से बात कीजिये बाद में दे देना फोन”

 बिंदिया ने सुना तो मुस्कुरा उठी और गुड्डू का फोन लेकर अंदर चली आयी। जितना प्यारा गुड्डू था उतनी ही प्यारी थी उसकी बातें। बिंदिया ने फोन लाकर रूपा को दिया और रूपा फोन लेकर मनोज को फोन लगाने लगी ताकि बिंदिया के घरवालों का हाल चाल ले सके लेकिन मनोज ने फोन नहीं उठाया। बिंदिया उदास हो गयी तो रूपा ने कहा,”अरे उदास काहे होती हो , मनोज जब देखेगा तो फोन जरूर करेगा। मैं गुड्डू को उसका फोन दे आती हूँ और उसे कह दूंगी मनोज का फोन आये तो बात करवा दे”

बिंदिया ने हामी में गर्दन हिला दी। रूपा वहा से चली गयी।  रूपा के जाने के बाद लवली वहा आया और दरवाजा खटखटाया तो बिंदिया ने पलटकर दरवाजे पर खड़े लवली को देखा। बिंदिया को अकेले देखकर लवली कमरे में आया और बिंदिया के सामने आकर कहा,”का बात है बिंदिया , तुमहू इतनी उदास काहे हो ? किसी ने कुछो कहा तुमसे या फिर हिया मन नाही लग रहा तुम्हरा ?”

“नहीं लवली ! किसी ने हमसे कुछो नाही कहा और मन का का है उह्ह्ह तो धीरे धीरे लग ही जाता है। हमायी उदासी की वजह कुछो और है लवली”, बिंदिया ने बुझे स्वर में कहा
“का वजह है ? हमे बताओ”,लवली ने प्यार से पूछा
“अम्मा पिताजी की बहुते याद आ रही है , हमने जो किया ओह्ह्ह के बाद उह दोनों का हाल मा होंगे जे ही सोचकर मन बहुते दुःख रहा है।”,बिंदिया ने उदासी भरे स्वर में कहा

बिंदिया की तकलीफ लवली अच्छे से समझ सकता था इसलिए उसने बिंदिया के चेहरे को अपने दोनों हाथो में थामा और कहा,”चिंता नाही करो बिंदिया ! हम बहुत जल्द उनसे मिलने चकिया जायेंगे और देखना उह तुम्हे माफ़ भी कर देंगे”
बिंदिया ने सुना तो लवली के सीने से आ लगी और कहा,”हमे बहुत घबराहट हो रही है लवली , बहुते डर लग रहा है पिताजी हमको माफ़ तो कर देंगे ना”

“अरे पगली ! हम है ना तुम्हाये साथ फिर काहे डर रही हो ?”,लवली ने बिंदिया का सर सहलाते हुए कहा
“और हम भी है आपके साथ फिर काहे डरना ?”,गुड्डू की आवाज लवली और बिंदिया के कानो में पड़ी तो लवली ने गर्दन घुमाकर देखा कमरे के दरवाजे पर गुड्डू खड़ा था। गुड्डू को देखकर लवली जल्दी से बिंदिया से दूर हटा तो गुड्डू ने अंदर आते हुए कहा,”अरे माफ़ करना लवली भैया हमहू तो बस अपना फोन लेने आये थे , उह्ह्ह का है ना हमे एक ठो जरुरी फोन करना था”

लवली इधर उधर देखने लगा उसे ना जाने क्यों गुडडू से नजरे मिलाने में शर्म आ रही थी। गुड्डू मुस्कुराते हुए बिंदिया की तरफ आया और कहा,”भाभी ! हो गयी आपकी बात तो हमाओ फोन देइ दयो”
“अभी कुछ देर पहले रूपा आपका फोन देने गयी थी , मिली नहीं आपको ?”,बिंदिया ने कहा
“अच्छा ! लगता है हमहू ध्यान नाही दिए हम जाते है”,गुड्डू ने कहा और वहा से जाने लगा। जाते जाते वह लवली के बगल में रुका और धीरे से दबे स्वर में कहा,”कोई बात नाही लवली भैया , इह सब तो प्यार के पल है। हमहू भी शगुन से मिलने का मौका ढूंढते रहते थे , कन्टीन्यूए कीजिये”

लवली ने सुना तो गुड्डू को प्यार से एक चपत लगायी और गुड्डू मुस्कुराते हुए वहा से चला गया लेकिन जाते जाते कमरे का दरवाजा भी बंद कर गया जिस से लवली और बिंदिया के इन प्यारभरे पलों में फिर से कोई बाधा ना डाले।

रूपा और रूपा के साथ अपने फोन को ढूंढते गुड्डू घर में यहाँ वहा चक्कर लगाने लगा लेकिन रूपा कही नजर ना आये। रूपा को ढूंढते हुए गुड्डू हॉल से गुजरा तभी सामने से भुआ आती दिखाई दी और गुड्डू ने उनसे ही पूछ लिया,”ए भुआ ! तुमहू रूपा को कही देखी हो ?”
भुआ ने जब देखा कि गुड्डू रूपा को ढूंढ रहा है तो अपनी साड़ी का पल्लू लिया और जैसे ही मुँह में खोंसने को हुई गुड्डू एकदम से चिल्लाया,”ए भुआ ! ए रोना नाही , हमहू बस ओह्ह्ह का इह वास्ते ढूंढ रहे है कि ओह्ह्ह से अपना फोन ले सके,,,,,,,,,,,,,,,,,,,हमाओ कोनो चक्कर नाही है ओह्ह्ह्ह के साथ”

“धत गुड्डू ! हम का तुमको इत्ते पगलेट दिखते है ? अरे पता है हमे तुम्हारा कोनो चक्कर नाही ओह्ह्ह के साथ”, भुआ ने साडी के पल्लू से अपना मुँह पोछकर कहा क्योकि वे अभी अभी लड्डू खाकर आयी थी।
गुड्डू ने सुना तो उसकी जान में जान आयी और उसने भुआ के सामने अपने दोनों हाथ जोड़कर कहा,”भगवान् तुम्हरा भला करे , थोड़ी तो बुद्धि लगाई तुमहू। अब इह बताओ रूपा को देखी हो ?”

“कुछ देर पाहिले हुआ सीढ़ियों के पास देखा था”,भुआ ने कहा और अपने कमरे की तरफ चली गयी।
गुड्डू सीढ़ियों की तरफ आया तो देखा रूपा तो नहीं है लेकिन हैरान परेशान किसी को ढूंढते आदर्श फूफा जरूर मिल गए। गुड्डू उनके पास आया और उनका कंधा थपथपाया तो आदर्श फूफा पलटे और गुड्डू को देखकर ऐसे चौंके जैसे किसी ने उनकी चोरी पकड़ ली हो।

“जे हमको देखते ही आपके चेहरे पर चील कौए काहे उड़ने लगे ?”,गुड्डू ने अपनी भंव चढ़ाकर पूछा
“नहीं नहीं हमहू तो बस ऐसे घूम रहे थे”,आदर्श फूफा ने झेंपते हुए कहा
“अच्छा इह सब छोडो और जे बताओ रूपा कहा है ?”,गुड्डू ने पूछा

“तुमहू रूपा के बारे मा काहे पूछ रहे हो ? उह्ह मंगलू और नवरतवा के साथ साथ कही तुमहू भी तो रूपा के रूपजाल मा नाही फंस गए ?”,इस बार आदर्श फूफा ने अपनी भंव चढ़ाकर पूछा  
गुड्डू ने सुना तो चिढ गया और कहा,”उह्ह भुआ और आपको दोनों को सेम बिमारी है का सक करने की ? ना हमहू रूपा के रूपजाल मा फंसे है ना ही आपके जे मायाजाल मा फसेंगे ,, हमको बस इह बताओ कि रूपा को देखे हो कि नाही ?’

“अरे हम काहे देखे रूपा को ? हमाये पास देखने के लिए हमायी राजकुमारी है,,,,,,,,,,,,,,!”,आदर्श फूफा ने कहा और गुड्डू को साइड कर गाना गाते हुए अंदर चले गए
“हे तुमसे कोई पियारा , कोई मासूम नाही है
का चीज हो तुम खुद तुम्हे मालूम नाही है” गुड्डू ने इधर उधर देखा लेकिन रूपा तो उसे कही नजर नहीं आयी और वह रूपा को ढूंढते हुए वहा से चला गया।

गुप्ता जी का घर , कानपूर
गोलू घूमते घामते मंगल फूफा को लेकर घर पहुंचा। गुप्ता जी और गुप्ताइन तो आज सज धज के घूमने निकले थे इसलिए अभी तक लौटे नहीं थे बची पिंकी तो वह अपने घर में खर्राटे मारकर सो रही थी और सोती भी क्यों नहीं दोपहर के 2 जो बज रहे थे। नवरतन के यहाँ गोलू को बस एक समोसा और दो इमरती खाने को मिला अब उस से भला गोलू का क्या होता ? घर आकर उसने दरवाजा खटखटाया लेकिन दरवाजा तो तब खुले जब पिंकी जागे।

गोलू दरवाजा बजा बजा के थक गया लेकिन पिंकी ने दरवाजा नहीं खोला तो मंगल फूफा ने कहा,”अरे लगता है पिंकी सो गयी है , तुम्हरे पास घर की दूसरी चाबी होगी ना ओह्ह से खोल ल्यो दरवजा”
गोलू दरवाजा ना खुलने पर पहले ही चिढ़ा हुआ था मंगल फूफा की बात सुनकर और चिढ गया और पलटकर कहा,”दो ही चाबी है जे घर के दरवाजे की एक अंदर है और दूसरी हमाये पूजनीय पिताजी अपने नाड़े से बांध के रखते है। हम कहा से लाये दूसरी चाबी ?”

“अरे ठीक है सांत हो जाओ भाई ! एक काम करते है हिया बाहिर बैठकर गुप्ता जी का इंतजार करते है थोड़ी देर मा आ ही जायेंगे उह्ह लोग”,मंगल फूफा ने कहा
“काहे ? तुमको चिट्टी भेजे है उह्ह्ह कि हमहू इत्ती बजे आ जायेंगे,,,,,,,,,,,,,,,अरे भूख लगी है हमे खाना कैसे खाएंगे ?”,गोलू ने पहले गुस्से से कहा और फिर रोते हुए बोला
“हमको चिट्टी पढ़नी आती तो हमहू साला का तुम्हरे साथ धक्के खाते ?”,मंगल फूफा ने मुँह बनाकर कहा
“हाँ ऐसे तो बहुत रूपा की बाँहो मा झूला झूलकर आ रहे है ना”,गोलू भी भड़क गया

“ए गोलू ! रूपा जी के बारे में कुछो नाही कहना , उनके बारे मा कुछो गलत नाही सुनेंगे समझे”,मंगल फूफा ने तनकर कहा तो गोलू ने धीरे से मंगल फूफा की छाती पर मुक्का दे मारा और मंगल फूफा की खांसी निकल गयी।
“हमहू कुछो ना कह रहे , जो कहना तुमहू कहना आज साम मिश्रा जी के सामने तब तो रूपा तुम्हे मिल जाहि है वरना नवरतन के ब्याह मा चलना हमाये साथ दाल भात खाने”,गोलू ने कहा और फिर दरवाजा पीटने लगा

मंगल फूफा ने गोलू को देखा और मुँह बनाकर कहा,”साला जब भी कुछो कहेंगे चरस ही बोयेंगे,,,,,,,,,,,,दाल भात तो हमहू खाएंगे गोलुआ लेकिन नवरत्न के ब्याह का नाहीं हमायी और रूपा की मिलन रात का,,,,,,,,,,,,,,,,,हाय सोच के ही ऐसे झुरझुरी सी होय रही है बदन मा,,,,,,,,,,,,,रूपा,,,,,,,,,,,,,,आ रहा है तेरा मंगल फूफा”

( क्या लवली मनाएगा बिंदिया के अम्मा पिताजी को और लेकर जाएगा वापस उसे चकिया ? ये गुड्डू का फोन लेकर आखिर कहा चली गई रूपा ? मंगल फूफा की जिंदगी में आएगी रूपा संग मिलन की रात या छा जायेगा उनकी जिंदगी में अंधेरा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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