Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 23

by Story With Sanjana August 15, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 23

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गोलू और मंगल फूफा घर के बाहर बनी सीढ़ियों पर बैठकर घर का दरवाजा खुलने का इंतजार कर रहे थे। पिंकी जो सोई तो उठी ही नहीं ऊपर से गोलू का फोन भी घर के अंदर सोफे पर पड़ा था बेचारा फोन भी करे तो किस से करे ? सीढ़ी पर बैठे गोलू ने बगल में पड़ा तिनका उठाया और उसे तोड़कर सामने फेंकने लगा। गोलू को सोच में डूबा देख बगल में बैठे मंगल फूफा ने कहा,”गोलू ! एक ठो बात बताओ”
“पूछो”,गोलू ने कहा

“तुमहू पिंकिया से इत्ता डरते काहे हो ?”,मंगल फूफा ने पूछा
गोलू ने मंगल फूफा की तरफ देखा और एकदम से रोआँसा होकर कहा,”हमाये जख्मो पर नमक छिड़कने के लिए जे ही बख्त मिला तुमको फूफा ?”
“बहुते लम्बी कहानी है का ?”,मंगल फूफा ने पूछा
“अरे कहानी ही तो नहीं है फूफा हमाये प्रेम मा बस भसड़ ही भसड़ है। साला जब से पहली बार पिंकिया को देखे थे तब से लेकर आज तक बस चरस काट रहे है”,गोलू ने अपने पुराने दिनों को याद करके कहा

“हमे भी सुनाओ अपनी कहानी”,मंगल फूफा ने गोलू से चिपककर कहा
“काहे ! तुम का करोगे सुनकर ?”,गोलू ने चिढ़कर कहा
“अरे हमहू तो तुम्हे कम्पनी देने का सोच रहे थे , का है कि पिंकिया दरवाजा खोल नाही रही। तुम्हाये अम्मा बाउजी बाहर गए है , कब आएंगे कौन जाने ? तब तक हिया बैठकर खुद को कोसने से अच्छा है अपनी प्रेम कहानी ही सुनाय दयो। हमहू भी तुमसे थोड़ा कुछो सीख के अप्लाई करे अपनी जिंदगी मा”,मंगल फूफा ने कहा

मंगल फूफा की बात सुनकर गोलू फिर उन्हें घूरने लगा और कहा,”जित्ती तुम्हायी उम्र है ना फूफा तुमहू आधार कार्ड बनवाओ और पेंशन के लिए अप्लाई करो”
गोलू की बात सुनकर मंगल फूफा भड़क गए और जाकर दूर बैठकर कहा,”अरे जाओ नाही सुननी तुम्हायी प्रेम कहान,,,,,,,,,,,,तुमहू ऐसे हो तो तुम्हायी प्रेम कहानी भी ऐसी होइ,,,,,,,,!!”

गोलू ने सुना और मन ही मन खुद से कहा,”लगता है हमहू कुछो जियादा ही भाव खा लिए , अब जब तक अम्मा पिताजी नाही आते तब तक सुना देते है ना फूफा को अपनी कहानी हमारा भी टाइमपास हो जाएगा,,,,,,,,,,आवाज दे का उन्हें ? दे देते है”
“ए फूफा ! का नयी नवेली दुल्हिन के जैसे मुँह फुलाकर बैठ गए ,, आओ सुनाते है,,,,,,,,,,,,,!!!!”,गोलू ने कहा

मंगल फूफा ने एक नजर गोलू को देखा और फिर ख़ुशी ख़ुशी उसके बगल में आ बैठे और गोलू उन्हें अपनी और पिंकी की प्रेम कहानी सुनाने लगा। अच्छा मुझे अब तक लगता था कि इस कहानी में सबसे सीधा है गुड्डू जो किसी की बात का बुरा नहीं मानता लेकिन मंगल फूफा तो उस से भी सीधे निकले। कुछ देर पहले गोलू से फटकार खायी और उसके बुलाते ही वापस चले आये। डाकू बनकर सबको डराने वाले मंगल फूफा कानपूर आने के बाद खुद सबसे डरते घूम रहे थे और जब से रूपा मिली है तब से तो बस डाकू मंगल से पूकी मंगल बन गए थे।

मिश्रा जी का घर , कानपूर
“अच्छा हमहू रखते है और जे हमाओ फोन नाही है , जे नंबर पर दोबारा फोन ना करना”,घर की सीढ़ियों के बगल में बने लॉन की तरफ खड़ी रूपा ने फोन पर दबे स्वर में कहा
रूपा को ढूंढते हुए गुड्डू वहा पहुंचा और जैसे ही नजर रूपा पर पड़ी वह उसकी तरफ चला आया। रूपा ने जैसे ही फोन काटा गुड्डू ने कहा,”का रूपा जी ? हमहू पुरे घर मा आपको ढ़ूंढ़त रहे और आप हिया है ?”
“काहे ! हमे काहे ढूंढ रहे थे ? कही मंगल और नवतरन की तरह तुमहू भी तो हमका,,,,!!!”,रूपा ने शर्माते हुए कहा

गुड्डू ने रूपा के हाथ से अपना फोन लिया और पीछे हटकर कहा,”हमायी बुद्धि अभी इतनी भ्रष्ट नाही हुई है जो हम अपनी पत्नी के होते किसी और महिला पर नजर डाले,,,,,,जे अपना रूपजाल मा किसी को और को फ़साना तुमहू”
रूपा ने सुना तो मुँह बनाया और वहा से चली गयी। गुड्डू ने उसे जाते देखा और फिर अपना फोन देखकर बड़बड़ाया,”इह रूपा हिया छुपकर किस से बात कर रही थी ? कुछ तो गड़बड़ है गोलु को बताना पडेगा”

गुड्डू ने अपने फोन से गोलू का नंबर डॉयल किया और फोन कान से लगाकर सीढ़ियों की तरफ चला आया। रिंग जा रही थी लेकिन गोलू महाराज फोन तब उठाये ना जब फोन उनके पास हो। गोलू का फोन तो घर के अंदर था और गोलू बाहर बैठकर मंगल फूफा को अपनी और पिंकी की कहानी सुना रहा था। गोलू ने फोन नहीं उठाया तो गुड्डू ने हाथ झटककर कहा,”छः ! जे साले गोलू को जब भी फोन करो गायब ही रहता है”

गुड्डू अपने फोन को हाथ में घुमाते हुए रूपा के बारे में सोचने लगा और धीरे से बड़बड़ाया,”रूपा कानपूर आयी मंगल फूफा के साथ और कानपूर आते ही नवरतन को देखकर फिसल गयी,,,,,,,,,,,जे का मेटर हमको कुछो ठीक नाही लग रहो”
“जे ही बात तो हम कहना चाहते थे लेकिन कहने से पहिले ही सब हमायी छाती पर चढ़ जात है”,आदर्श फूफा ने गुड्डू के पास आकर कहा तो गुड्डू की तन्द्रा टूटी और उसने हताश होकर कहा,”सब सुन लिया ?”

आदर्श फूफा ने आँखे बंद की और हामी में गर्दन हिलायी
“कुछो नाही छोड़ा ?”,गुड्डू ने फिर पूछा तो इस बार फूफा ने आँखे बंद करके ना में गर्दन हिला दी।
“जे रूपा हमको कुछो ठीक नाही लग रही फूफा,,,,,,,,,,,मतलब जे का चाल चलन , बात करने का तरिका हमको तो कुछो गड़बड़ लग रही है,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने दबे स्वर में कहा

“ल्यो हमहू तो कल से कह रहे है कि जे लड़की ठीक नाही है”,आदर्श फूफा ने आदतन मजबूर तेज आवाज में कहा तो गुड्डू ने उनकी बाँह पकड़कर उन्हें साइड करके कहा,”ए फूफा ! का गले मा भोंपू लेकर पैदा हुए थे ? इत्ता चिल्ला के काहे बोल रहे है ? पिताजी ने सुन लिया ना तो बत्ती बना देंगे”
“अरे उह्ह्ह हमहू जरा भावनाओ मा बह गए थे,,,,,,,,,,,,,!!!”,फूफा ने झेंपकर दाँत दिखाते हुए कहा

“भुआ के इकलौते पति नहीं होते ना तो अभी यही पटक के पेल देते,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने खीजकर कहा
“इकलौते से का मतलब है बे तुम्हरा ? बाकि औरतों के का चार पति होते है ? साला भगवान् ने जबान दी है तो कुछ भी बोलोगे ?”,आदर्श फूफा भड़क गए
“अरे सांत हो जाओ ! हमसे काहे लड़ रहे हो इह बताओ रूपा मा का गड़बड़ लगती है आपको ?”,गुड्डू ने कहा

आदर्श फूफा ने गुड्डू के कंधो पर अपनी बाँह रखी और कहा,”गुड्डू हमको तो लगता है इह ससुरा मंगलवा रूपा के चक्कर मा कही रूपचंद को तो नाही उठा लाया”
गुड्डू ने सुना तो खा जाने वाली नजरो आदर्श फूफा को देखा और कहा,”कल से बस जे ही देख पाए आप ?”

“अरे डोले देखो ओह्ह्ह के और चलती ऐसे है साला तुमको हमको मात दे दे और जबान तो इतनी कड़वी तौबा तौबा तौबा , कबो किसी लड़की को इत्ता कड़वा बोलते देखे हो,,,,,,,,,,,हमको तो जे ही गड़बड़ लगती है गुड्डू”,आदर्श फूफा ने विश्वास से भरकर कहा
“फूफा एक काम करो अंदर जाकर थोड़ी देर के लिए सो जाओ , का है की आपको और आपके दिमाग को ना रेस्ट की बहुते जरूरत है ,, साला इत्ता सोचेंगे ना तो किसी भी बख्त रेस्ट इन पीस हो जायेंगे”,गुड्डू ने कहा और वहा से अंदर चला गया  

“ए गुड्डू ! ए हमरी बात सुनो ! अरे रूपचंद नाही तो रूपलाल समझ ल्यो,,,,,,,,अरे सुनो”,कहते हुए आदर्श फूफा भी गुड्डू के पीछे अंदर गए लेकिन ता लेकिन तब तक गुड्डू अपने कमरे में जा चुका था और उसके पीछे उसके कमरे में जाना आदर्श फूफा को शोभा नहीं देता क्योकि उसी कमरे में शगुन भी थी इसलिए वे वापस अपने कमरे में चले आये।

“अब जाने दो ना मिश्राइन ! जो हुआ उसे भूलकर आगे बढ़ो। हमहू जानते है कि गलती हुई है लेकिन उह्ह बख्त हालात ऐसे थे कि बिंदिया को हुआ से निकालना ही पड़ा”,अपने कमरे में बिस्तर पर बैठे मिश्रा जी ने मिश्राइन से कहा

“गुड्डू के पिताजी ! गुड्डू गोलू या लवली में से कोनो इह सब करता तो हमहू एक बार के लिए भूल समझकर सब स्वीकार भी कर लेते पर आप , आप जे सब से जियादा समझदार है ना फिर आप काहे ऐसो कदम उठाये। सबका समझाने के बजाय आप इह सब किये,,,,,,,,,,,,,,हालात चाहे जैसे भी हो सबको समझाना था। अरे अब का जवाब देंगे हम बिंदिया के अम्मा-बाउजी को ?”,मिश्राइन ने दुखी स्वर में कहा

“अरे हमहू सब समझते है मिश्राइन पर बात जब औलाद की ख़ुशी की आती है तो कुछो समझ नाही आता। गुडडु और वेदी हमेशा से हमाये साथ रहे है जे घर मा उह्ह्ह दोनों को कबो कुछो कमी नाही हुई लेकिन लवली उह्ह्ह बेचारा तो बचपन से एक एक चीज को तरसा है और जे ही बख्त था जब हम ओह्ह्ह के लिए  कुछो कर सकते थे और तुमको का लगता है हमहू समझाए नाही होंगे ? अरे हमहू खुद मंगेश को जेल से छुड़ाए , उसे समझाया बुझाया , गुड्डू और बिंदिया के रिश्ते की बात भी की लेकिन उह्ह्ह ससुरा तो हमसे खार खाकर बैठा था।

ऐसे कैसे उह्ह्ह बिंदिया का रिश्ता जे घर मा कर देता इहलीये उह्ह्ह बिंदिया की सादी इत्ती जल्दी लल्लन के साले के करने जा रहा था”,कहकर मिश्रा जी कुछ देर रुके और मिश्राइन की तरफ देखने लगे
मिश्राइन ख़ामोशी से उन्हें देखती रही तो मिश्रा जी ने आगे कहा,”लेकिन एक बात बताये मिश्राइन , उह्ह्ह लल्लन ना धोखा किया मंगेश के साथ मा,,,,,,,,,,बिंदिया की सादी ऐसे लड़के से करवा रहा था जो उसके लायक ही नाही था और सच बताये इह देखकर तो मंगेश का भी दिल टूट गवा था। बिंदिया ने उह्ह्ह सादी तोड़कर  की,,,,,,,,,,,,,!!!”

“उह्ह्ह सब तो ठीक है गुड्डू के पिताजी पर अब आगे का ? हमायी बात मानिये तो एक बार जाकर बिंदिया के घरवालों से बात कर लीजिये,,,,,,,,,,,आप समझायेंगे तो उह्ह्ह जरूर समझे है,,,,,,,,,,,दोनों बच्चो की ख़ुशी इसी मा है कि ओह्ह्ह का घरवालों से ख़ुशी ख़ुशी आशीर्वाद मिले”,मिश्राइन ने मिश्रा जी के सामने अपने मन की बात रखी
मिश्रा जी मुस्कुराये और मिश्राइन के हाथ को अपने हाथो में लेकर कहा,”अरे तुम काहे चिंता करती हो गुड्डू की अम्मा हम है ना हम सब ठीक कर देंगे,,,,,,,,,,मामला थोड़ा ठंडा हो जाए ओह्ह के बाद हम खुद एक दो दिन मा मंगेश से मिलकर इह सब सुलझा देंगे”

“पक्का ?”,मिश्राइन ने पूछा
“का मिश्राइन ! आजकल बहुते सक करने लगी हो हम पे ? का हम पे भरोसा नाही है ?”,मिश्रा जी ने पूछा
मिश्राइन उतरकर बिस्तर से नीचे आयी और दरवाजे की तरफ जाते हुए कहा,”जब से गुड्डू गोलू की मण्डली मा सामिल हुए है ना आप तब से हमाओ भरोसा उठ चुको”

मिश्रा जी मुँह लटकाकर मिश्राइन को जाते हुए देखते रहे और फिर अफ़सोस भरे स्वर में कहा,”जे साला गोलुआ के चक्कर मा हमहू भी बदनाम हुई गए ,, आज बस घर आ जाओ तुम ओह्ह्ह के बाद तुम्हाये कर्म कांड की तेहरवी ही कर देंगे हम”

गुप्ता जी का घर , कानपूर
उधर मिश्रा जी ने गोलू को याद किया और इधर मंगल फूफा को अपनी प्रेम कहानी सुनाते हुए गोलू महाराज की जीभ दाँतो तले आ गयी और गोलू महाराज चिल्लाये,”आइआइआइआइ ए फूफा,,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा कुछ समझ पाते इस से पहले गोलू उठा और आँगन में यहाँ वहा भागने लगा। दर्द के मारे वह जीभ मुँह से बाहर निकाल कर भाग रहा था। मंगल फूफा ने देखा तो गोलू के आगे आगे भागने लगे नजारा देखने लायक !

गोलू चिल्लाये जाए और मंगल फूफा समझे ना कि मामला क्या है ? भागते भागते मंगल फूफा थक गए तो गोलू की तरफ पलटे और हाथ सामने करके कहा,”बस”
गोलू रुक गया लेकिन जीभ अभी भी बाहर तो मंगल फूफा ने हाँफते हुए पूछा,”अबे गोलू ! अबे का हुआ तुमको कोनो भूत प्रेत पकड़ लिया , इह जीभ बाहिर काहे निकाले हो ?”
“अले फूफा हमायी दिभ तत दई है”,गोलू ने मुश्किल से तुतलाकर कहा क्योकि अभी भी उसे जलन और दर्द का अहसास हो रहा था।

मंगल फूफा ने इधर उधर देखा एक बाल्टी दिखाई दी तो उसे लेकर आये और उलटी करके गोलू के सामने रखी और खुद उस पर चढ़कर बोले,”दिखाओ जरा कहा से कटी है ?”
गोलू दर्द ने मारे गर्दन कभी इधर करे कभी उधर करे ये देखकर मंगल फूफा ने उसके चेहरे को अपने दोनो हाथो में पकड़ा और कहा,”अरे एक जगह ठहरो ना काहे इधर उधर मुंडी घुमा रहे हो ?”

गोलू की जिंदगी हो और दो तीन घंटे बिना कांड के निकल जाये ऐसा भला कैसे हो सकता हैं ? यहाँ मंगल फूफा ने गोलू का चेहरा अपने हाथो में थामा और वहा गुप्ता जी गुप्ताइन को लेकर अंदर दाखिल हुए। अच्छा अंदर आते हुए उन्होंने ना गोलू को देखा ना मंगल को लेकिन स्कूटी को साइड में लगाकर जैसे ही दोनों नीचे उतरे सबसे पहले गुप्ता जी की नजर पड़ी गोलू और मंगल फुफा पर और ये देखकर उनका हाथ अपने सीने पर चला गया।

“अरे का हुआ गोलू के पिताजी ! ऐसो का देख लिए जो छाती पकड़ लिए ? जरा हमहू भी तो दे,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए गुप्ताइन जैसे ही गोलु और मंगल फूफा की तरफ पलटी गुप्ता जी ने गुप्ताइन की आँखों पर अपना हाथ रखकर कहा,”ना गुप्ताइन ना , अपने बिटवा का कार्यक्रम तुमहू ना देख पायी हो”
गुप्ताइन से इतना कहकर गुप्ता जी ने एक बार फिर गोलू और मंगल को देखा और मुँह बनाकर अपनी आँखे मीच ली

( क्या गोलू सुनाएगा मंगल फूफा को अपनी असली प्रेम कहानी या बदल देगा अपना इतिहास ? क्या आपको भी लगती है रूपा में कोई गड़बड़ या ये है सिर्फ गुड्डू और आदर्श फूफा का वहम ? क्या मिश्रा जी जायेंगे मंगेश को मनाने या उस से पहले होगा कोई बड़ा कांड ? और आज का सबसे इम्पोर्टेन्ट सवाल अगर आप गुप्ता जी की जगह होते तो मंगल और गोलू को इस सिटुअशन में देखकर क्या करते ? कमेंट सेक्शन खुला है वहा दिखाईये अपना टेलेंट और पढ़ते रहिये मनमर्जियाँ सीजन 5 )

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संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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गोलू चिल्लाये जाए और मंगल फूफा समझे ना कि मामला क्या है ? भागते भागते मंगल फूफा थक गए तो गोलू की तरफ पलटे और हाथ सामने करके कहा,”बस”
गोलू रुक गया लेकिन जीभ अभी भी बाहर तो मंगल फूफा ने हाँफते हुए पूछा,”अबे गोलू ! अबे का हुआ तुमको कोनो भूत प्रेत पकड़ लिया , इह जीभ बाहिर काहे निकाले हो ?”
“अले फूफा हमायी दिभ तत दई है”,गोलू ने मुश्किल से तुतलाकर कहा क्योकि अभी भी उसे जलन और दर्द का अहसास हो रहा था।

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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