Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 24

by Story With Sanjana August 18, 2026
written by Story With Sanjana August 18, 2026 0 comments
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Manmarjiyan Season 5 – 24

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

मंगल फूफा और गोलू को साथ देखकर गुप्ता जी ने गलत समझ लिया। उन्होंने गुप्ताइन को रुकने को कहा और खुद अपने कुर्ते की बाजू ऊपर चढ़ाते हुए गोलू के पीछे चले आये और खींचकर एक लात उसकी तशरीफ़ पर जमा दी। गोलू मंगल फूफा को लेकर नीचे जा गिरा और गोलू के होठ मंगल फूफा के होंठो से जा
मिले ! जो गलतफहमी गुप्ता जी को हुई थी वो यकीन में बदल गयी और अपनी आँखों से ये नजारा देखकर गुप्ता जी ने अपनी आँखों पर हाथ रख लिया और कहा,”छी छी छी लाज शर्म घोलकर पी गए है इह दोनों,,,,,,,,,,,!!!!”

गोलू ने देखा वह मंगल फूफा की छाती पर पड़ा है और उसके होंठो मंगल फूफा के होंठो को छू चुके है जल्दी से उठा और मुँह धोने के लिए इधर उधर पानी ढूंढने लगा। गोलू लात खाकर मंगल फूफा पर इतनी जोर से गिरा की बेचारे की छाती में दर्द उठा और वे खाँसते हुए उठकर बैठ गए। गोलू मुँह धोकर आया और  आकर मंगल फूफा से गुस्से में कहा,”हमको चुम्मा काहे दिए बे फूफा ? उह्ह्ह भी इंग्लिश चुम्मा,,,,अबे का हमको रूपा समझ लिए हो ?”
“उह्ह्ह तुमको चुम्मा दे नाही रहा था तुम्हरा चुम्मा ले रहा था , हमहू खुद देखत रहे अपनी आँखों से”,गुप्ता जी ने आकर गोलू से कहा

गुप्ताइन ने सुना लेकिन उनको समझ नहीं आया कौन किसको क्यों चुम्मा दे रहा है ? वे आयी गुप्ता जी के पास और कहा,”गोलू के पिताजी ! चुम्मा चाटी बाद मा करना पहिले घर की चाबी दयो,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे कहा ? हमाये जीवन मा तो कबसे सूखा पड़ो है”,गुप्ता जी जेब से चाबी निकालते हुए धीरे से बड़बड़ाये
“का कहे ?”,गुप्ताइन को लेकिन थोड़ी थोड़ी भनक लग गयी तो उन्होंने गुस्से से भंव चढ़ाकर कहा

“अरे हमहू कह रहे है , इह चाबी पकड़ो और अंदर जाओ हिया रुकने का कोनो फायदा नाही,,,,,,,,,,एक रंगबाज कम था जे घर मा जो दुसरा अपने जे फूफा को बुलाय ली हमायी छाती पर मूंग दलने”,गुप्ता जी ने गोलू और मंगल फूफा की हरकत याद करके भड़ककर कहा  

गुप्ताइन ने गुप्ता जी के हाथ से झटके से चाबी ली और दरवाजे की तरफ जाते हुए कहा,”हाँ तो हम कहे थे आधी रात को छोरी छिपे फुलवारी से मिलने के लिए,,,,,,,,,,,खुद की रंगबाजी नाही दिखती हमाये फूफा और बिटवा की दिख जाती है,,,,,,,,,,अरे आपहि से सीखे है जे सब”
“वाह अम्मा का डायलॉग मारी हो,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने गुप्ताइन की तरफ हवा में चुम्मा उछालकर कहा

गुप्ता जी गोलू के बगल में ही खड़े थे इसलिए एक थप्पड़ लगाकर कहा,”जियादा अपनी अम्मा के चमचे नाही बनो समझे,,,,,,,,,हमे इह बताओ जे मंगलू की चोंच से चोंच काहे मिला रहे थे ?”
“अरे हम कहा कुछो कर रहे थे ? हमायी जीभ दाँत के बीच मा आ गयी थी इहलीये मंगल फूफा को दिखा रहे थे”,गोलू ने चिढ़कर कहा
“तो ओह्ह्ह का , का दिखा रहे थे , उह्ह्ह का डाक्टर है ?”,गुप्ता जी ने कहा

मंगल फूफा को तब तक साँस आ चुका था इसलिए वे उठे और गुप्ता जी , गोलू के पास आकर कहा,”अरे गुप्ता जी ! गोलू तो हमे अपनी और पिंकी की प्रेम कहानी सुना रहा था , कैसे गुड्डू की गर्लफ्रेंड से इनको पियार हुई गवा और बाद मा सादी की,,,,,,,,,,,,,!!!”
गुप्ता जी ने सुना तो गोलू को घूरकर देखा और कहा,”हाँ हाँ दुसरो के माल पर बहुते पहिले से नजर है जे कि”

“आपके कौनसे माल पर नजर डाले हमहू बताना ज़रा ?”,गोलू ने भी भड़ककर कहा और लगभग गुप्ता जी पर चढ़ ही गया तो गुप्ता जी ने उसकी गर्दन पकड़कर उसे पीछे धकेला और कहा,”अब का हमायी गोद मा चढ़ोगे ? और सुबह का हमाये हिस्से की चाय नाही पिए थे ?”
“पिए तो थे हमहू भी देखे थे”,मंगल फूफा ने सुबह वाली बात याद करके कहा
गोलू ने सुना और मंगल फूफा को घूरकर कहा,”अबे फूफा ! तुमहू हमायी तरफ हो के जे कि तरफ ?”
मंगल फूफा को समझ आया तो झेंपते हुए दाँत दिखाने लगे।

“दाँत का दिखाय रहे हो अंदर जाकर अपना सामान बांधो और रवानगी लो , बहुते झेल लिए हमहू तुम्हे और तुम्हायी प्रेम कहानी को , साला तुम्हरे चक्कर मा मोहल्ला मा अपनी छीछा लेदर नाही करवा सकते,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने मंगल फूफा से कहा और वहा से चले गए
मंगल फूफा मुँह फाडे गुप्ता जी को जाते हुए देखते रहे और फिर पलटकर गोलू से मायूसी भरे स्वर में कहा,”अबे गोलू ! अबे हम का किये बे ? इह तुम्हाये पिताजी हमायी बत्ती काहे बनाय दिए ?”

“जाने दो फूफा जियादा ध्यान नाही दयो और पिताजी की बात को इत्ता सीरियस नाही ल्यो”,गोलू ने कहा
“काहे ?”,मंगल फूफा ने कहा
गोलू ने मंगल फूफा के कंधे पर अपनी बाँह रखी और उन्हें अंदर ले जाते हुए कहा,”अरे अगर हमहू उनकी बात को ऐसे सीरियस लेते ना तो अब तक 250 बार घर से बाहिर पड़े होते,,,,,,,,,,,,,चिल करो”
“कैसे चिल करे गोलू ? हमायी फूल सी नाजुक रूपा हुआ मिश्रा जी के घर मा है और उह पर उह्ह्ह चांडाल फूफा की गन्दी नजर है,,,,,,,,,,पतो नाही कौन हाल मा होगी हमायी रूपा ?”,मंगल फूफा ने रोआँसा होकर कहा

“बस आज रात की बात है फूफा कल या तो रूपा तुम्हाये पास या फिर,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू कहते कहते रुक गया क्योकि आगे क्या डायलॉग मारना है ये उसको भी नहीं पता था
“या फिर ?”,मंगल फूफा ने धड़कते दिल के साथ कहा
“या फिर , या फिर तुमहू रूपा के पास,,,,,,,,!!”,गोलू ने कहा तो मंगल फूफा के दिल को थोड़ी तसल्ली मिली और उन्होंने गोलू से चिपकते हुए कहा,”बस एक बार रूपा से हमायी सादी हो जाये गोलू फिर जिंदगीभर हमाये बच्चे तुमको दुआ देंगे”

“पहिले ब्याह तो हो जान दयो,,,,,,,,और जियादा चिपको नाही पिताजी पहिले हमको ना जाने का का समझ रहे है,,,,,,,,,,,,,,एक बार साला रूपा से तुमहाओ ब्याह करवाय दे ओह्ह्ह के बाद नजर नाही आना हमे”,गोलू ने मंगल फूफा को खुद से दूर करके कहा
“अरे नहीं आएंगे नहीं आएंगे बस रूपा मिल जाये हमे|.मंगल फूफा ने ख़ुशी के मारे अपनी उंगलियों को तोड़ते मोड़ते कहा और गोलू के साथ अंदर चले आये।

गुप्ताइन ने गोलू और मंगल फूफा के लिए खाना लगाया और गुप्ता जी को चाय का कप दिया। पिंकी भी सोकर उठ चुकी थी इसलिए बाहर आयी और गुप्ताइन की मदद करने रसोई की तरफ चली गयी।
“अरे इह का गोलू सिर्फ चार रोटी खाये तुमहू , दुइ रोटी और ल्यो”,गुप्ताइन ने गोलू को खाने की थाली में हाथ धोते देखकर कहा

“अरे नाही अम्मा ! शाम मा गुड्डू भैया के हिया पिरोगराम है ना तो हुआ भी तो खाना है,,,,,,,,,!!!”
गोलू की बात सुनकर गुप्ताइन वापस चली गयी और गुप्ता जी मंद मंद मुस्कुराने लगे।
खाना खाकर गोलू वही आँगन में पड़े तख्ते पर आकर लेट गया और मंगल फूफा से भी थोड़ा आराम करने को कहा क्योकि शाम में दोनो को मिश्रा जी के घर भी तो जाना था। गोलू तो लेटते ही खर्राटे भरने लगा लेकिन मंगल फूफा को रूपा की याद सता रही थी वे उदास से आकर घर के बाहर सीढ़ियों पर आ बैठे और रूपा के बारे में सोचने लगे।

गुड्डू को उसका फोन देकर रूपा चहकते हुए वेदी के कमरे में आयी जहा बिंदिया और लवली मौजूद थे। लवली बिंदिया का हाथ थामे बिस्तर पर बैठा था। रूपा कमरे में आयी और जब नजर बिंदिया और लवली पर पड़ी तो एकदम से पलट गयी और कहा,”भगवान् कसम ! हमने कुछो नाही देखा”
रूपा को कमरे में देखकर लवली ने बिंदिया का हाथ छोड़ा और बिस्तर से उठकर रूपा की तरफ आकर चला आया।

रूपा पलटी और कहा,”का लवली ! बिंदिया के बिना दिल नाही रहा तोह का ? अपने बापू से कहकर बिंदिया से ब्याह काहे नाही कर लेते ?”
“ब्याह भी कर लेंगे रूपा बस एक बार सब मान जाये,,,,,,,,,,वैसे तुम कहा गयी थी ?”,रूपा के चेहरे की ख़ुशी देखकर लवली ने पूछा
“हम , हम , हम तो बस ऐसे ही बाहर घूम रहे थे। का है कि गांव मा खुले खुले रहे है तो हिया बंद मकान मा घुटन सी होने लगती है”,बिंदिया ने कहा

“अच्छा तुमने का सोचा फिर ?”,लवली ने सवाल किया
“किस बारे में ?”,रूपा आकर बिस्तर पर बैठी और अपने पैरों को हिलाकर कहा
“मंगल और नवरतन में से किसे चुनने वाली हो तुम ? देखो रूपा कोई भी फैसला करो तो सोच समझ के करना। नवरतन को हमहूँ इतना जानते नाही है लेकिन हाँ उह्ह्ह मंगल फिर भी दिल का अच्छा इंसान है”,लवली ने कहा

रूपा ने सुना तो मंद मंद मुस्कुराने लगी उसके दिमाग में क्या चल रहा था ये तो सिर्फ वही जानती थी इसलिए लवली की तरफ देखकर कहा,”वो हम कल सुबह मिश्रा जी को बता देंगे,,,,,,,,,,,वो सबसे बड़े है और समझदार भी तो हमहू अपनी पसंद उन्हें बता देंगे और आगे का फैसला भी उन्ही पर ही छोड़ देंगे”
लवली ने सुना तो रूपा की तरफ देखा और कहा,”इह भी सही है ! हमने पिताजी को हमेशा सही फैसले करते ही देखा है,,,,,,,मंगल और नवरतन में से कौन तुम्हारा जीवनसाथी बनने के लायक है इह वही तय करेंगे लेकिन तुम्हाये अम्मा बाउजी ?”

“हमाये अम्मा बाउजी को हमरे फैसले से कोनो ऐतराज नाही है , सादी करके जब उनके सामने जायेंगे तो उह्ह हमे और हमाये उनको अपना ही लेंगे”,रूपा ने कहा
रूपा की बात सुनकर बिंदिया उठी और रूपा के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”इह तो बहुते ख़ुशी की बात है रूपा ! तुम्हाये अम्मा बाउजी के जैसे हमाये बापू भी मान जाये तो कितना अच्छा हो ?”

बिंदिया की बात सुनकर लवली ने उसकी तरफ देखा और कहा,”उह्ह मान जायेंगे बिंदिया ! हम मिलकर मनाएंगे उन्हें और देखना उह्ह खुद तुम्हरा हाथ हमाये हाथ मा सौंपेंगे,,,,,,,,,,,,,,तुम बस हम पर भरोसा रखो”
“हमे तुम पर भरोसा है लवली”,बिंदिया ने नम आँखों से लवली को देखकर कहा
“तुम दोनों आराम करो हमहू जाते है,,,,,,,,,,,किसी ने हमे हिया देखा तो अच्छा नाही लगेगा”,लवली ने कहा और कमरे से बाहर चला गया

रूपा ने बिंदिया को उदास देखा तो गले लगाया और कहा,”चिंता काहे करती हो बिंदिया ? इतना पियार करने वाला लड़का तुमको मिला है देखना सब ठीक हो जाएगा”

उसी शाम नवरतन का घर
“सजना है मुझे , सजना के लिए,,,,,,,,,हट्ट सजना नाही ओह्ह का नाम तो रूपा जी है , हमायी रूपा जी,,,,,,,,सजना है हमे , रूपा जी के लिए,,,,,,,,,!!!”,शीशे के सामने खड़े नवरतन ने गाना गाते हुए कहा
इसमें कोई शक नहीं था कि नवरतन एक ही दिन में हुई दो मुलाकातों के बाद रूपा का दीवाना बन चुका था। उसने अपनी दूकान में सिलकर रखा हुआ सबसे महंगा सूट उठाया और पहन लिया ! कई महीनो से बहुत पुराना गुलाब का इत्र पड़ा था उसे भर भर कर सूट पर छिड़क लिया।

बाल इस उम्र में भी घने काले थे इसलिए उन्हें भी कंघी करके अच्छे से जमा लिया। आज से पहले नवरतन किसी के लिए भी इतना सजा संवरा नहीं था ये बस रूपा के लिए था। तैयार होकर उसने घडी में समय देखा जो कि शाम के 5 बजा रही थी। मिश्रा जी के घर शाम 6 बजे प्रोग्राम है ये बात नवरतन को गोलू और मंगल फूफा की बातो से पता चली जहा मंगल फूफा रूपा से मिलने आने वाला था इसलिए नवरतन कोई रिस्क लेना नहीं चाहता था और बिना बुलाये ही मिश्रा जी के घर के लिए निकल गया ! नुक्कड़ पर आकर उसने रूपा के लिए एक बढ़िया सा गुलाब का फूल लिया और आगे बढ़ गया।

गुप्ता जी का घर , कानपूर
“अरे यार पिंकिया हमायी उह्ह्ह गुलाबी शर्ट कहा रखी हो ? तुमको पता है ना आज गुड्डू भैया के हिया पिरोगराम है , हमको उह्ह्ह शर्ट कोट पेंट के साथ पहिनकर जाना है,,,,,,,,,,,,अरे बताओ यार देर हो रही है हमका”,गोलू ने पिंकी की अलमारी में कपड़ो को खंगालते हुए कहा
पिंकी कमरे में आयी और गोलू को साइड करके शर्ट निकालकर गोलू के हाथ में देकर कहा,”इह का है ? रखी तो है हिया सामने,,,,,,,,!!!”

“अरे पुरे कानपूर के कपडे तुमहू अपनी जे अलमारी मा ठूस रखी हो हमाओ एक शर्ट कहा से मिली है ? अच्छा उह्ह्ह अपना महंगा वाला परफ्यूम देओ ज़रा”,गोलू ने शर्ट पहनते हुए कहा
“महंगा वाला परफ्यूम लगाकर कहा जाओगे ? और गुड्डू के घर ही तो जा रहे हो ना तुमहू फिर इत्ता तैयार होने की का जरूरत है ?”,पिंकी ने कहा

“अरे तुमको नाही पता पिंकिया ! मिश्रा जी ने आज घर में पिरोगराम रखा है , महंगा वाला डीजे भी आएगा , अब हमहू हुआ ऐसे मुँह उठा के चले गए तो का अच्छा लगेगा,,,,,,,,,,,,लाओ फटाफट परफ्यूम छिड़को हम पर,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने शर्ट के बटन बंद करके अपनी बांहो को फैलाकर कहा
पिंकी ने गोलू की दोनों बाँहो को नीचे किया और कहा,”जे कौनसा पिरोगराम है गोलू ? मिश्राइन आंटी ने हमे और अम्मा को तो बुलाया भी नाही और ना ही शगुन ने हमे जे की खबर दी ?”

“अरे पिंकिया इह मर्दो का पिरोगराम है , हो सकता है मिश्रा जी मेन टू मेन बात करना चाहते हो,,,,,,,,,तुमहू यार सवाल बहुत करती हो परफ्यूम दो”,गोलू ने झुंझलाकर कहा क्योकि उसे देर हो रही थी
पिंकी ने मुँह बनाया और अलमारी में रखा परफ्यूम लाकर गोलू को थमा दिया। गोलू ने परफ्यूम छिड़का नहीं बल्कि उस से नहाकर पिंकी को वापस कर दिया।

पिंकी खा जाने वाली नजरो से गोलू को देखने लगी तभी बाहर खड़े मंगल फूफा ने दरवाजा खटखटाया और कहा,”गोलू ! तैयार हो तुमहू ?”
गोलू कमरे से बाहर आया , उसने कुछ कहने के लिए जैसे ही मंगल फूफा को देखा उसके शब्द गले में ही अटक गए और मुँह हैरानी से खुला का खुला रह गया।

गोलू के सामने खड़े मंगल फूफा ने सफ़ेद काली धारियों वाली चुस्त पेंट पहनी थी , उस पर चटख लाल रंग का शर्ट जो कि इतना फिट था कि शर्ट के बंद बटनों के बीच से मंगल फूफा का पेट बाहर झांक रहा था। शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले जिनसे छाती के बाल नजर आ रहे रहे थे। गले में पड़ी सोने की मोटी सी चेन और हाथ की दस में से आठ उंगलियों में सोने की अँगूठिया। सर पर जो चार बाल थे उनमे भी तेल चुपड़कर उन्हें एक तरफ झुकाया हुआ था।

आँखों पर धुप वाला काला चश्मा ! गोलू ने मंगल फूफा को ऊपर से लेकर नीचे तक देखा तो मंगल फूफा ने अपने छोटे छोटे हाथो की हथेलियों पर थू थू किया और दोनों हथेलियों को आपस में रगड़कर कनपटी से लगाकर स्टाइल से पीछे करके कहा,”का गोलू ! लग रहे है ना एकदम लल्लन टाप , आज तो रूपा हमको देखकर दौड़ते हुए आएगी और हमाये गले लग जाएगी,,,,,,,,,,,,!!!”
“कतई चमन चू,,,,,,,,,,,,,,,,चुलबुल पांडे का थूका हुआ पान लग रहे हो,,,,,,,,,,,,,इह का भेस बनाये हो ?”,गोलू ने दाँत पीसकर कहा    

“रूपा का तो पता नाही पर तुमको जे भेस मा देखकर कानपूर के सारे सुवर जरूर तुम्हाये पीछे पड़ जायेंगे”,बगल से गुजरते गुप्ता जी ने कहा जो हाथ में ताम्बे का लोटा उठाये दरवाजे पर शाम की कलसी देने जा रहे थे।
“काहे ?”,गोलू और मंगल फूफा ने गुप्ता जी की तरफ देखा और एक साथ कहा
गुप्ता जी कलसी देकर वापस आये और कहा,”नाराज जो हो जायेंगे कि हम साला हिया कीचड़ मा पड़े है और जे हमाओ भाई पेंट शर्ट पहिन के घूम रहे है”

गोलू को कुछ बाते देर से समझ आती थी इसलिए वह सोच में पड़ गया लेकिन मंगल फूफा ने तुरंत गुप्ता जी की बात को पकड लिया और गुप्ता जी के बजाय सोफे की तरफ पलटकर गुस्से से उबलकर कहा,”जे का मतलब आप हमे सूअर कह रहे है ?”
गोलू ने देखा मंगल फूफा सोफे की तरफ मुँह करके बोल रहे है तो उनको गुप्ता जी की तरफ घुमाया और कहा,”कहा देख रहे हो फूफा ? पिताजी तो हिया है”

“आँखों से इह चश्मा हटाए तो हमहू दिखे जे का,,,,,,जब कुछो दिख नाही रहा तो लगाए काहे हो ?”,गुप्ता जी ने मंगल फूफा की आँखों से चश्मा उतारकर कहा
“ताकि आप हमायी आँखों मा धूल नाही झोंक सको,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने सीना फुलाकर गुप्ता जी के सामने अकड़कर कहा

गुप्ता जी ने धीरे से एक मुक्का मंगल फूफा के सीने पर मारा और कहा,”अरे हम का तुम्हायी आँखों मा धूल झोंकेंगे तुमहू तो पहिले ही अपनी आँखो मा रूपा के नाम का सुरमा डाल के बइठे हो,,,,,,,,,,,,,!!!!”,कहकर गुप्ता जी ने मंगल फूफा का चश्मा फिर उनकी आँखों पर लगा दिया और वहा से चले गए
मंगल फूफा ने गोलू के बजाय फिर दूसरी तरफ देखा और कहा,”हुँह ! साला जलता है हमायी बूटी से”
“अबे हमहू हिया है”,गोलू ने मंगल फूफा को अपनी तरफ करके चिढ़े हुए स्वर में कहा

मंगल फूफा समझ गए कि अगर उन्होंने ये चश्मा लगाए रखा तो ऐसे ही गड़बड़ करते रहेंगे इसलिए चश्मा उतारकर शर्ट की जेब में डाल लिया और गोलू से कहा,”चले फिर ?”
“अब तुमको भांड बनकर चलने का सोक है तो चलो फिर,,,,,,,,,,,तुमहू स्कूटी की चाबी लेकर चलो हमहू आते है”,गोलू ने कहा और गुप्ता जी के कमरे की तरफ चला गया।
मंगल फूफा ने भी चाबी ली और गुनगुनाते हुए बाहर चले गए।

गुप्ता जी अपने कमरे में थे और शाम की पूजा करने के लिए जा ही रहे थे कि गोलू ने आकर कहा,”पिताजी ! आप काहे बेचारे मंगल फूफा के पीछे पड़े रहते है ! अरे पहली बार ओह्ह्ह की जिंदगी मा एक ठो औरत आयी और आपको उह्ह भी बर्दास्त नाही,,,,,,,,,,,अरे हमे बताओ का दिक्कत है आपको रूपा से ? कही उह्ह्ह आदर्श फूफा के जैसे आप भी तो रूपा के चक्कर मा नाही पड़ गए ?”

कोट पेंट पहन के गोलू आज सुन्दर लग रहा था ऐसे में गुप्ता जी उसे मारना तो नहीं चाहते थे लेकिन फिर भी गोलू के गाल पर एक थप्पड़ रसीद करके कहा,”हमहू जबान से ढीले है लंगोट से नाही,,,,,,,,,,और का रूपा रूपा रूपा लगा रखा है तुम सबने ? देखना बहुते बुरा काट के जाएगी उह्ह्ह मंगलू का फिर ओह्ह्ह का कंधा देते घूमना तुमहू,,,,,,,,,,,!!!!”
गोलू ने सुना तो हैरानी से गुप्ता जी को देखने लगा और फिर अपना सर खुजाते हुए बाहर चला आया।

( क्या लवली मना पायेगा बिंदिया के घरवालों को ? आखिर क्या है रूपा के दिल में और किसे चुनेगी वह मंगल फूफा या फिर नवरत्न को ? आखिर गुप्ता जी को क्यों लगता है रूपा देगी मंगल फूफा को धोखा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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Sanjana Kirodiwal