Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 3

Pasandida Aurat Season 3 – 34

by Story With Sanjana August 19, 2026
written by Story With Sanjana August 19, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat Season 3 – 34

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

मिस्टर शर्मा ने भरत के सामने एक ऐसी शर्त रख दी जिसमे भरत का दांव उस पर ही उलटा पड़ गया। मिस्टर शर्मा के साथ भरत ने जो डील की थी और एडवांस लिया था उसके बदले अब भरत को दुगुनी रकम चुकानी थी और ये बात वह मिस्टर देसाई को भी नहीं बता सकता था क्योकि एडवांस उसने अपने पर्सनल खाते में जो लिया था। भरत बुरी तरह से फंस चुका था उसके पास मिस्टर शर्मा की बात मानने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था। भरत नहीं चाहता था कि किसी भी हाल में ये बात मिस्टर देसाई तक पहुंचे।

भरत ने पानी पीया और गिलास टेबल पर रखकर जेब से रुमाल निकाला , उसने ललाट पर आये पसीने को पोछा और मिस्टर शर्मा की तरफ देखकर कहा,”ठीक है मुझे आपकी ये शर्त मंजूर है”
मिस्टर शर्मा मुस्कुराये और अपनी कुर्सी की तरफ जाते हुए कहा,”बहुत बढ़िया मिस्टर भरत ! तो फिर मैं ये बोर्ड मीटिंग केंसल कर देता हूँ और मिस्टर देसाई से मिलकर उन्हें कह दूंगा कि मुझे आपकी डील कुछ समझ नहीं आयी इसलिए मैंने इसे केंसल कर दिया”

“आप मिस्टर देसाई से नहीं मिलेंगे ना ही इस बारे में कुछ बात करेंगे”,भरत ने थोड़ा कठोर स्वर में कहा
मिस्टर शर्मा ने सुना तो समझ गए कि कम्पनी के बहाने भरत ने ये डील अपने निजी स्वार्थ के लिए की थी उन्होंने हामी में गर्दन हिला दी। भरत ने अपनी चेक बुक निकाली और 10 लाख का एक चेक काटकर मिस्टर शर्मा को थमा दिया !
“ये तो सिर्फ 10 लाख है बाकि के 10 लाख ?”,मिस्टर शर्मा ने चेक देखकर कहा
“वो मैं आपको एक दो दिन में दे दूंगा”,भरत ने कहा

“भरत मैं तुम्हे 24 घण्टे का वक्त देता हूँ,,,,,,,,,,,,कल इस टाइम तक बाकि के पैसे मेरी टेबल पर होने चाहिए वरना तुम जानते हो वाशी नवी मुंबई से ज्यादा दूर नहीं है,,,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर शर्मा ने धमकीभरे स्वर में कहा
भरत ने हामी में गर्दन हिला दी और उठकर केबिन से बाहर निकल गया। भरत जानता था कि मिस्टर शर्मा की बात मानने के अलावा उसके पास दूसरा कोई चारा नहीं है। वह ऑफिस से बाहर आकर गाड़ी में आ बैठा और वहा से निकल गया। रास्तेभर वह बस 10 लाख के बारे में ही सोचता रहा।

सब सही और भरत के मुताबिक चल रहा था लेकीन एकदम से उस पर मुसीबतो का पहाड़ टूट पड़ा ! ऑफिस पहुँचते पहुंचते अँधेरा हो चुका था। स्टाफ जा चुका था बस ऑफिस के बाहर गार्ड और ऑफिस के अंदर चेतन मौजूद था जो कि भरत का ही इंतजार कर रहा था ताकि उसे आज की सभी रिपोर्ट दे सके।
भरत का चेहरा मुरझाया हुआ था उसने चेतन से एक कप कॉफी लेकर आने को कहा और अपने केबिन की तरफ बढ़ गया।

सुबह के निकले अवनि और पृथ्वी शाम को रिसोर्ट लौटे। दोनों बहुत खुश थे और अवनि पृथ्वी की बाँह थामकर चल रही थी। उसके हाथ की ऊँगली में पड़ी रिंग चमक रही थी जो आज पृथ्वी ने उसे पहनाई थी। अवनि ने कभी सोचा नहीं था कोई उस से इतना प्यार करेगा और उसे अपनी जिंदगी में इतनी अहमियत देगा। रिसोर्ट आकर दोनों अपने कमरे की तरफ जा ही रहे थे कि एंथनी उनके पास आया और कहा,”हेलो पृथ्वी ! कैसा रहा आज का दिन ?”

पृथ्वी ने प्यार से नजर भरकर अवनि को देखा और फिर एंथनी की तरफ देखकर कहा,”यादगार,,,,,,,,,,,,!!”
“इंट्रेस्टिंग ! वैसे आज रात आप दोनों के लिए एक इंट्रेस्टिंग चीज और है”,एंथनी ने ख़ुशी से चहककर कहा
“क्या ?”,पृथ्वी ने पूछा
“आज रात गार्डन एरिया में सबके लिए बॉर्नफायर का अरेंजमेंट किया गया है एंड इंट्रेस्टिंग ये कि एक सुकूनभरे म्यूजिक के साथ वहा डिनर का भी अरेंजमेंट है जिसमे बार्बिक्यू स्पेशल है ! सो मैं आप दोनों को इन्वाइट करने आया हूँ”,एंथनी ने कहा

पृथ्वी ने सुना तो उसे ये सब बहुत दिलचस्प लगा लेकिन सहसा ही उसे कुछ याद आया और उसने एंथनी की तरफ देखकर कहा,”कही ये उस दिन वाले क्रिकेट मैच की तरह तो नहीं ?”
“हा हा हा नॉट एट आल ! उस दिन तो बस मैंने एक खूबसूरत लड़की की छोटी सी हेल्प की थी”,एंथनी ने अवनि की तरफ देखकर कहा तो अवनि दूसरी तरफ देखने लगी और पृथ्वी ने कहा,”ठीक है हम लोग आ जायेंगे”
“थैंक्यू,,,,,,,,,,,,!!!”,एंथनी ने कहा और वहा से चला गया

पृथ्वी अवनि के साथ अंदर चला आया। पृथ्वी आकर बिस्तर पर गिर गया क्योकि वह काफी थक गया था और अवनि हाथ मुँह धोने बाथरूम में चली आयी। बिस्तर पर लेटे लेटे पृथ्वी फोन की तरफ पलटा और दो कप चाय के साथ कुछ स्नेक्स भिजवाने को कहा। उसने रिसीवर रखा और मुस्कुराते हुए आज के दिन के बारे में सोचने लगा। गोआ आये हुए उन्हें चार दिन हो चुके थे और कल गोआ में उनका आखिरी दिन था

शाम में मुंबई के लिए फ्लाइट,,,,,,,,,,,,,जाने के ख्याल से पृथ्वी थोड़ा उदास हो गया इसलिए नहीं कि इतने अच्छे पलो को छोड़कर उसे अपनी पुरानी जिंदगी में वापस जाना था बल्कि उसे ये चिंता सता रही थी कि मुंबई जाकर वह अवनि से अपनी नौकरी के बारे में क्या कहेगा ?
पृथ्वी ये सब सोच ही रहा था कि कमरे की बेल बजी और पृथ्वी उठकर दरवाजे के सामने चला आया। उसने दरवाजा खोला और ट्रे लिया जिसमे दो कप चाय और कुछ स्नेक्स थे।

पृथ्वी ने लड़के को थैंक्यू कहा और दरवाजा बंद कर अंदर चला आया। पृथ्वी ट्रे बिस्तर की तरफ ही ले आया। अवनि अपना मुँह पोछते हुए बाथरूम से बाहर आकर बिस्तर की तरफ चली आयी। अवनि ने हाथ में पकड़ा तौलिया साइड में रखा और जैसे ही नजर बिस्तर पर रखी ट्रे पर गयी उसकी आँखों में चमक और होंठो पर मुस्कराहट तैर गयी। वह आकर पृथ्वी के सामने बैठी और ख़ुशी भरे स्वर में कहा,”ये सब ?”

पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”तुम्हारे लिए , यहाँ कि कॉफी और पास्ता पिज्जा खाकर तुम बोर हो गयी होगी ना इसलिए ये गरमा गर्म चाय और पकोड़े,,,,,,,,,खाओ”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराकर प्यार से पृथ्वी को देखने लगी , उसे याद आया आज ही उसने पृथ्वी से कहा था कि उसे प्याज के पकोड़े खाने है लेकिन ये गोआ था और यहाँ ये सब मिलना थोड़ा मुश्किल था लेकिन पृथ्वी ने फिर भी उसकी ख्वाहिश पूरी कर दी।

अवनि को प्यार से अपनी ओर देखते पाकर पृथ्वी ने कहा,”क्या हुआ तुम मुझे ऐसे क्यो देख रही हो ?”
“पृथ्वी ! अगर आप ऐसे ही मेरी बात मानते रहोगे तो मुझे आपसे फिर से प्यार हो जाएगा”,अवनि ने पृथ्वी की आँखों में देखते हुए कहा
“तुम्हारे चेहरे पर ये ख़ुशी देखने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ अवनि,,,,,,,,मैं न तुम्हे इस दुनिया की सारी खुशिया देना चाहता हूँ , चाहता हूँ दुःख की परछाई भी तुम्हे ना छू पाए”,पृथ्वी ने कहा

“बस पृथ्वी ! कभी कभी इतना प्यार देखती हूँ तो डर जाती हूँ,,,,,,,!!”,अवनि ने एकदम से उदास होकर कहा और उसका उदास होना जायज भी था आज से पहले उसे इतनी खुशिया एक साथ मिली ही कहा थी।
पृथ्वी ने देखा तो अवनि का सर थपथपाया और कहा,”डर कैसा ? मैं हूँ ना मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा और तुम्हारा ख्याल रखूंगा”

अवनि ने सामने रखे स्नेक्स से एक टुकड़ा उठाया और पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया तो पृथ्वी ने अवनि का हाथ अवनि की तरफ करके कहा,”पहले तुम खाओ”
अवनि ने ख़ुशी ख़ुशी खा लिया और फिर दोनों बाते करते हुए चाय पकोड़े खाने लगे , दोनों के पास एक दूसरे से कहने के लिए इतना कुछ था कि दोनों की बाते कभी खत्म ही नहीं होती थी।

सिटी हॉस्पिटल , सिरोही
एमर्जेन्सी वार्ड के बाहर बेंच पर बैठे जगदीश जी और सिद्धार्थ उदास थे। गिरिजा जी बाथरूम में फिसल कर गिर गयी जिस से उनके पैर की हड्डी में फेक्चर हो गया और उसी का इलाज होते होते शाम हो चुकी थी। सिद्धार्थ सुरभि को लेकर सुबह से परेशान था और अब गिरिजा जी के बारे में सुनकर वह और ज्यादा परेशान हो गया।
“अब आप उन्हें ले जा सकते है”,नर्स ने जगदीश जी के सामने आकर कहा तो सिद्धार्थ की तन्द्रा टूटी और वह उठकर नर्स के पास चला आया।
“अब वो कैसी है ?”,सिद्धार्थ ने पूछा

“वो बिल्कुल ठीक है बस पैर में फ्रेक्चर हुआ है उसके लिए कच्चा प्लास्टर कर दिया है , 7 दिन बाद पक्का प्लास्टर करवाना है। ये मेडिसिन आप स्टोर से ले लीजिये तब तक मैं उन्हें लेकर आती हूँ,,,,,,,,,,!!!”,कहकर नर्स ने दवाईयों की पर्ची सिद्धार्थ को दी और वहा से चली गयी
“सिद्धू ! तुम गाडी गेट पर ले आओ दवाईया मैं आता हूँ”,कहकर जगदीश जी ने सिद्धार्थ से पर्ची ली और वहा से चले गए। सिद्धार्थ भी गाड़ी निकालने पार्किंग की तरफ चला गया। उसने गाडी हॉस्पिटल के गेट के सामने लगा दी।

वार्ड बॉय गिरिजा जी को व्हील चेयर पर बैठाकर बाहर ले आया। जगदीश जी भी तब तक हॉस्पिटल का बिल चुकाकर दवा लेकर आ चुके थे। सिद्धार्थ ने जगदीश जी की मदद से गिरिजा जी को अदंर बैठाया और फिर खुद ड्राइवर सीट पर आ बैठा। जगदीश जी सिद्धार्थ के बगल में आ बैठे और तीनो वहा से निकल गए।

उदयपुर , राजस्थान
अपने कमरे में सुरभि बिस्तर पर तकिये में मुँह छुपाये लेटी थी तभी किसी ने कमरे का दरवाजा खटखटाया। सुरभि ने पहली बार में दरवाजा नहीं खोला और तकिये में मुँह गड़ाए लेटी रही। दरवाजा फिर बजा तो सुरभि झुंझलाकर उठी और दरवाजा खोला तो सामने खड़े अपने छोटे भाई को देखकर चिढ गयी।

वह उसे कुछ बोलने जा ही रही थी कि तभी उसकी नजर भाई के हाथो में पकड़ी खाने की थाली पर पड़ी तो सुरभि ने कहा,”तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? जाकर कह दो मम्मी से कि मुझे नहीं खाना ,, जब उन्हें मेरी बात सुननी चाहिए थी तब तो सुनी नहीं और अब खाना भेजकर प्यार दिखा रही है,,,,,,,,,,,ले जाओ ये खाना मुझे नहीं खाना”

“ये खाना मम्मी ने नहीं भेजा है , मैं लेकर आया हूँ,,,,,,,,,,,,,आपने सुबह से कुछ नहीं खाया है”,सुरभि के भाई ने धीरे से कहा और फिर अपने होंठो को चबाने लगा क्योकि उसे डर था कही ये सुनकर सुरभि उस पर चिल्ला ना दे
सुरभि ने सुना तो उसकी आँखों में आंसू भर आये , हमेशा उस से झगड़ा करने वाला , उसे तंग करने वाले भाई को आज अपनी परवाह करते देखकर सुरभि का दिल भर आया उसने प्यार से अपने भाई के गाल को छुआ और कहा,”अंदर आ”

सुरभि का भाई अंदर चला आया और प्लेट हाथो में पकडे बिस्तर पर आ बैठा। सुरभि भी उसके बगल में आ बैठी। भाई ने खाने की प्लेट सुरभि की तरफ बढ़ाकर कहा,”खाना खा लो दीदी , मम्मी पापा से लड़ने के लिए ताकत भी तो चाहिए ना आपको”
सुरभि ने सुना तो नम आँखों से मुस्कुराई और अपने भाई के सर पर एक चपत लगाकर कहा,”मेरे घर से जाते ही इतना बड़ा हो गया तू,,,,,,,,,,,,!!!

भाई ने सुना तो मुस्कुराया। सुरभि ने खाना शुरू किया। एक दो निवाले खाकर सुरभि को अहसास हुआ कि उसे सच में कितनी तेज भूख भूख लगी थी। सुरभि ने खाना खाया और पानी पीकर प्लेट साइड टेबल पर रख दी तो उसके भाई ने अपनी जेब से अपना फोन निकालकर सुरभि की तरफ बढ़ा दिया  
सुरभि ने हैरानी से अपने भाई को देखा तो उसने कहा,”ऐसे क्या देख रही हो ? जिसकी वजह से इतना ड्रामा हुआ है उसे फोन करो और यहाँ आने के लिए बोलो”

सुरभि ने अपने भाई के हाथ से फोन लिया लेकिन किसी का नंबर डायल नहीं किया तो उसने भाई ने कहा,”अरे फोन मिलाओ ना”
सुरभि ने अपने होंठो को चबाया और मासूमियत भरे स्वर में कहा,”एक्चुली मुझे उसका नंबर याद नहीं है”
सुरभि के भाई ने सुना तो अपना हाथ अपने ललाट पर मारा और उठकर कहा,”आप इतनी पागल कैसे हो सकती है ? जिस से प्यार करती है उसका नंबर भी याद नहीं आपको,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“तुमसे किसने कहा मुझे उस से प्यार है ?”,सुरभि ने चौंककर कहा

“जिस तरह से आप पापा और सबसे लड़ रही थी उसे देखकर तो कोई भी समझ जायेगा आपको उस लड़के से प्यार है”,सुरभि के भाई ने कहा और वहा से चला गया। जाते जाते वह दरवाजा बंद करना भी भूल गया।
अपने भाई की बात सुनकर सुरभि मुस्कुराने लगी और खुद में ही बड़बड़ाई,”तो क्या मुझे सच में उस चिलगोजे से प्यार हो गया है,,,,,,,,,,!!!”

सुबह से उदास बैठी सुरभि अब अकेले में खुश हो रही थी मुस्कुरा रही थी। सुरभि के मम्मी पापा उस से बात करने उसके कमरे की तरफ ही आ रहे थे लेकिन जब उन्होंने सुरभि को अकेले में मुस्कुराते खुश होते देखा तो सुरभि की मम्मी ने कहा,”मन्ने तो लागे आ छोरी जमा बावली हो चुकी”
“जाने दो ! सुबह बात करते है”,सुरभि के पापा ने कहा और सुरभि की मम्मी को वहा से ले गए।  

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
“सर ! आपकी कॉफी”,चेतन ने सोच में डूबे भरत के सामने कॉफी का मग रखकर कहा
चेतन की आवाज से भरत की तन्द्रा टूटी और उसने कप उठाकर चेतन से कहा,”थैंक्यू !”
“सर आप मिस्टर शर्मा से मिले ? आज की बोर्ड मीटिंग का क्या हुआ ?”,चेतन ने कहा

“वो शर्मा तो मेरी सोच से भी चार कदम आगे निकला , मुझे भरत देशमुख को ब्लैकमेल कर रहा है। एक बार ये कम्पनी मेरी हो जाये उसके बाद एक एक करके इन सबसे बदला लूंगा”,भरत ने गुस्से से कहा
“हो जाएगी सर आप क्यों इतना टेंशन ले रहे है”,चेतन ने चापलूसी करते हुए कहा
“चेतन ! वो तीन लाख रूपये मेरी गाडी में रखवा दो और ऑफिस बंद करके तुम भी घर जाओ।”,भरत ने कहा
“कौनसे तीन लाख सर ?”,चेतन ने हैरानी से कहा

“वही तीन लाख जो मैंने तुम्हे प्रवीण के केबिन में रखने को कहा था , चलो जल्दी लेकर आओ मुझे देर हो रही है इसके साथ अभी बाकि 7 लाख का इंतजाम और करना है”,भरत ने कॉफी खत्म कर अपनी कुर्सी से उठते हुए कहा
“लेकिन वो तीन लाख तो उसी दिन मिस्टर देसाई को हेंडओवर कर दिए थे”,चेतन ने कहा
“व्हाट ? ये क्या कह रहे हो तुम ? वो पैसे मेरी मेहनत के पैसे थे इस कम्पनी के नहीं,,,,,,,,,,,,,तुम इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकते हो चेतन ?”,भरत गुस्से से चिल्लाया

चेतन डर से कांपने लगा और कहा,”लेकिन सर उस दिन सबके सामने आपने ही प्रवीण सर का केबिन चेक करने को कहा और वो तीन लाख वही रखे थे। मुझे लगा कम्पनी के पैसे है इसलिए मैंने उन्हें मिस्टर देसाई को,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”


चेतन ने इतना ही कहा कि भरत ने गुस्से में आकर दोनों हाथो से चेतन की कोलर पकड़ी और कहा,”बेवकूफ आदमी ! वो पैसे मेरे थे और तुमने उन्हें उस देसाई को दे दिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,उस दिन मिस्टर चौधरी से पैसे लेने तुम ही गए थे ना फिर तुम ऐसी बेवकूफी कैसे कर सकते हो ?”

“आई ऍम सॉरी सर,,,,,,,,,,,,मुझे नहीं पता था”,चेतन ने गिड़गिड़ाकर कहा
भरत ने गुस्से से चेतन को पीछे धकियाया और चिल्लाकर कहा,”क्या करू मैं तुम्हारे सॉरी का हा ? तुमने मेरा लाखो का नुक्सान कर दिया जानते हो तुम , कल से मुझे इस ऑफिस में दिख मत जाना समझे,,,,,,,,,,,,,गेट आउट”


भरत को गुस्से में देखकर चेतन चुपचाप वहा से चला गया और भरत अपना सर पकड़कर कुर्सी पर आ बैठा। 24 घंटे पुरे होने से पहले उसे 10 लाख का इंतजाम करना था वरना उसका सच मिस्टर देसाई के सामने आने से कोई नहीं रोक सकता था।

( क्या बोर्नफायर में देखने को मिलेगा अवनि और पृथ्वी का रोमांस ? क्या सिद्धार्थ कर पायेगा अकेले इन मुसीबतों का सामना ? क्या सुरभि मना पायेगी अपने घरवालों को और बुलाएगी सिद्धार्थ को अपने घर ? क्या भरत कर पायेगा 10 लाख का इंतजाम या फूटने वाला है उसके पापो का घड़ा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal
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1 comment

Kshmata chauhan August 19, 2026 - 1:22 pm

Yeh Bhart to fas gaya hai…lakin mujhe lagta hai ki yeh paise ka intjaam kar dega…quki wo bahot shatir hai…usne Mr. Sharma ko hadka diya…ki wo mr. Desai se na mile…o wow…aur idhar Surbhi ka bhai bhi smart ho gaya hai…bina bole Surbhi ki baat ko samaj rha hai… umeed hai ki kaise bhi krke Surbhi ki Siddarth se baat ho jaye.

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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