Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 3

Pasandida Aurat Season 3 – 32

by Story With Sanjana August 15, 2026
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Pasandida Aurat Season 3 – 32

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

सुरभि के घरवाले सुरभि को गलत समझकर जबरदस्ती उसे उदयपुर लेकर जा रहे थे। वाशबेसिन के सामने खड़ी सुरभि की नजर जैसे ही ट्रेन के दरवाजे पर खड़े अनिकेत पर पड़ी तो वह घबराकर पलटी ! अनिकेत को मुस्कुराते देखकर सुरभि को समझते देर नहीं लगी कि उसके घरवालों को यहाँ बुलाने वाला कोई और नहीं बल्कि अनिकेत है।

गुस्से के भाव सुरभि के चेहरे पर झिलमिलाने लगे और वह अनिकेत के सामने आकर बोली,”आखिर तुम चाहते क्या हो ? क्यों मेरे पीछे पड़े हो , मेरे घरवालों को सिद्धार्थ के बारे में बताने वाले तुम ही हो न ? तुमने ही उन्हें वो फोटोज भेजकर उन्हें यहाँ बुलाया है आखिर तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो अनिकेत ?”

“वैसे ही जैसे तुमने किया सुरभि ! सेल्फिश पहले तुम बनी थी मैं नहीं , तुमने अपनी नौकरी के लिए मुझे और मेरे प्यार को ठुकराया था तो अब मैं कैसे तुम्हे किसी और से प्यार करने दे सकता हूँ,,,,,,,,,,तुम्हारे उस आशिक़ की इतनी हिम्मत की वो मुझ पर हाथ उठाये,,,,,,,,,उसे तो सजा मिलकर रहेगी और उसकी सजा होगी ये कि वो तुम तक कभी पहुंच ही नहीं पायेगा”,अनिकेत ने सुरभि को लेकर अपने मन में भरे गुस्से को उजागर किया

सुरभि ने सुना तो हैरानी से अनिकेत को देखने लगी और कहा,”तो इसलिए तुमने ये सब किया क्योकि मैंने तुम्हारे प्यार के बजाय अपनी नौकरी को चुना,,,,,,,,,,तुम इतना कैसे गिर  अनिकेत ? और कौनसा प्यार अनिकेत ? ब्रेकअप के बाद तुम सबसे पहले अपनी जिंदगी में आगे बढे थे , शादी तुमने की थी मैंने नहीं ,, मैंने तो आखिर तक सब ठीक होने का इन्तजार किया लेकिन तुमने तुमने सब बर्बाद कर दिया और अच्छा ही किया क्योकि आज तुम्हारा ये रूप देखकर समझ आया कि तुम मेरे लायक कभी थे ही नहीं,,,,,,,,,,,,,,!!!”

सुरभि की बात सुनकर अनिकेत के चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये लेकिन सुरभि को तकलीफ में देखकर उसे ख़ुशी भी हो रही थी। सिद्धार्थ ने जो किया उसके बाद से ही अनिकेत के अंदर बदले की भावना थी और उसने ये बदला लिया सुरभि से,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
अनिकेत ने सुरभि की बात का कोई जवाब नहीं दिया और उसे एक भारी भरकम लुक देते हुए वहा से चला गया जिस से सुरभि और चिढ गयी और अपना हाथ जोर से ट्रेन के दरवाजे पर दे मारा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे ? कैसे अपने घरवालों को समझाए और कैसे सिद्धार्थ से बात करके उसे सब बताये ?

“सुरभि ! तुम यहाँ क्या कर रही हो ? जाओ तुम्हारी मम्मी तुम्हे बुला रही है”,सुरभि के कानो में उसके पापा की आवाज पड़ी तो सुरभि की तन्द्रा टूटी। उसने गले में पड़े स्कार्फ से अपना मुँह पोछा और अंदर चली गयी ! वह चुपचाप आकर अपनी सीट पर बैठ गयी और खिड़की से सर लगाकर बाहर देखने लगी। सुरभि का मन बहुत उदास था और इस वक्त उसके पास ऐसा कोई नहीं था जिस से वह अपनी परेशानी बाँट सके।

अवनि और पृथ्वी इस वक्त बाहर थे इसलिए सुरभि उन्हें कुछ बताना नहीं चाहती थी। खिड़की से सर लगाए सुरभि ने अपनी आँखे मूँद ली और उसे वो पल याद आने लगे जो उसने सिद्धार्थ के साथ बिताये थे। सिद्धार्त से बार बार टकराना , उसके साथ बैठकर खाना खाना , उसे परेशान करना , उस पर चिल्लाना सब सुरभि की आँखों में किसी फिल्म की तरह चल रहा था।

ये सब याद करते हुए सुरभि का मन भारी हो गया और उसकी आँखों में आँसू भर आये लेकिन सुरभि ने उन आँसुओ को अपनी आँखों में ही रोक लिया। अपने घरवालों के सामने आँसू बहाकर सुरभि कमजोर पड़ना नहीं चाहती थी बल्कि अभी उसे और ज्यादा मजबूत रहने की जरूरत थी क्योकि उदयपुर जाकर उसे सिद्धार्थ के लिए एक बार फिर सबसे लड़ना जो था।

सिरोही , राजस्थान
“सो टीम दिस इज आवर फाइनल ड्राफ्ट,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने मीटिंग में अपने सामने बैठे लोगो से कहा और स्क्रीन के सामने से हटकर अपनी कुर्सी पर आ बैठा।
सिद्धार्थ की प्रेजेंटेशन से सभी बहुत खुश हुए और सब उस से एग्री भी थे। सिद्धार्थ खुद अपनी कम्पनी में मैनेजर था और कम्पनी का बॉस भी वहा मौजूद था। आज सिद्धार्थ की परफॉर्मेंस से वह भी बहुत खुश हुआ। सभी साथ बैठकर डिस्कस करने लगे।

एकदम से सिद्धार्थ का फोन बजा उसे लगा सुरभि का होगा इसलिए उसने स्क्रीन देखे बिना ही अपनी कुर्सी से उठकर कहा,”एक्सक्यूज मी प्लीज”
“सिद्धार्थ वी आर इन अ इम्पोर्टेन्ट मीटिंग,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ के बॉस ने कहा
“सर दिस कॉल इज मोर इम्पोर्टेन्ट,,,,,,,,,सो एक्सक्यूज मी”,कहकर सिद्धार्थ मीटिंग रूम से बाहर चला आया। उसने जल्दी से फोन उठाया और कान से लगाकर कहा,”हेलो सुरभि ! कहा हो तुम ? सुबह से कॉल कर रहा हूँ तुम्हे , तुम मेरा फोन क्यों नहीं उठा रही हो ?”

“सर ! मैं टीना ऑफिस से,,,,,,,,,,,मैंने आपको कुछ जरुरी रिपोर्ट्स मेल की है प्लीज चेक कर लीजिये”,दूसरी तरफ से सिद्धार्थ की टीम मेंबर टीना की आवाज उभरी। टीना की आवाज सुनकर सिद्धार्थ ने अपने फोन की स्क्रीन देखी और अपना ललाट सहलाया ! वह सुरभि के फोन का इतनी बेसब्री से इंतजार कर रहा था कि उसने ध्यान ही नहीं दिया फोन के उस तरफ कौन है ? सिद्धार्थ को खामोश पाकर टीना ने कहा,”हेलो सर ! आर यू देयर ?”
“हाँ टीना ! मैं सुन रहा हूँ बोलो”,सिद्धार्थ ने बुझे स्वर में कहा

“सर वो मेल ! एक बार चेक करके उसे कन्फर्म कर दीजिये बस,,,,,,,,,,,,एंड सॉरी टू डिस्टर्ब यू”,टीना ने कहा
“इट्स ओके ! मैं थोड़ी देर में तुम्हे अपडेट देता हूँ”,सिद्धार्थ ने कहा
“स्योर सर,,,,,,,,!!!”,कहकर टीना ने फ़ोन काट दिया
सिद्धार्थ ने अपने फोन को देखा और एक गहरी साँस ली। उसने देखा सुरभि का कोई मैसेज कोई कॉल नहीं था और ये देखकर सिद्धार्थ उदास हो गया।

उसने  इस उम्मीद के साथ कि शायद सुरभि इस बार उसका फोन उठा लेगी , सुरभि का नंबर डॉयल किया लेकिन सुरभि का फोन बजता रहा और इस बार भी सुरभि ने फोन नहीं उठाया। निराश होकर सिद्धार्थ ने फोन जेब में रख लिया और वापस मीटिंग रूम की तरफ चला आया।
मीटिंग रूम में आकर सिद्धार्थ सबके बीच आ बैठा और एक लम्बी डिस्कशन के बाद मीटिंग खत्म हुई ! सिद्धार्थ ने टीना का भेजा मेल चेक किया और उसे अप्रूव करके वापस भेज दिया।

सभी एक एक करके वहा से चले गए लेकिन सुरभि के बारे में सोचते हुए सिद्धार्थ वही बैठा रहा। सिद्धार्थ के बॉस ने देखा तो उसके पास आया और उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”सिद्धार्थ ! सब ठीक है ना ?”
सिद्धार्थ की तंद्रा टूटी और उसने सामने रखे लेपटॉप को बंद कर बैग में रखते हुए कहा,”हाँ , सब ठीक है बस वो नए प्रोजेक्ट को लेकर थोड़ा स्ट्रेस है बाकि कुछ नहीं,,,,,,,,,,,,!!!”

“ओह्ह्ह कम ऑन सिद्धार्थ ! आज की  प्रेजेंटेशन कमाल की थी और मुझे भरोसा है तुम कर लोगे। मैं कल तुम से ऑफिस में मिलता हूँ”,बॉस ने कहा और वहा से चले गए
सिद्धार्थ ने भी अपना बैग , लेपटॉप उठाया और मीटिंग रूम से बाहर निकल गया।

पृथ्वी अवनि के साथ क्रूज पर अच्छा वक्त बिता रहा था। दोनों साथ में बहुत खुश थे ! पृथ्वी अवनि को गोद में उठाये क्रूज के उस हिस्से में आया जहा कुछ कपल्स डांस कर रहे थे। पृथ्वी अवनि को लेकर सबके बीच आया और कहा,”अटेंशन प्लीज”

पृथ्वी को देखकर म्यूजिक सिस्टम वाले ने आवाज थोड़ी कम कर दी। वहा मौजूद सभी लोग मुस्कुराते हुए अवनि और पृथ्वी को देख रहे थे। पृथ्वी ने सबके सामने अवनि को अपनी गोद में उठाया हुआ था और अवनि का चेहरा सबके सामने शर्म से लाल हो रहा था। पृथ्वी ने देखा तो अवनि को नीचे उतारकर अपने बगल में खड़ा किया और उसका हाथ थामकर कहा,”अटेंशन प्लीज ! कुछ दिन पहले ही हमारी शादी हुई है एंड इट्स अ लव मैरिज बट आई रियलाइज कि मैंने अभी तक अपनी वाइफ को प्रपोज नहीं किया है सो,,,,,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी की बात सुनकर वहा मौजूद सभी लोग एक्साइटेड हो गए और अवनि थोड़ी हैरान-परेशान कि अब पृथ्वी क्या करने वाला है ? वह बस ख़ामोशी से एकटक पृथ्वी को देखे जा रही थी। पृथ्वी ने अवनि के हाथ को थामे रखा और उसके सामने घुटनो पर बैठकर दूसरे हाथ से अपने जेब में रखी एक रिंग निकाली और अवनि की तरफ बढाकर कहा,”अवनि ! क्या तुम अपनी पूरी जिंदगी मेरे साथ बिताओगी ?”

अवनि ने सुना तो उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी और ख़ुशी के मारे दिल धड़कने लगा। पृथ्वी ने कई बार अवनि से अपने प्यार का इजहार किया था लेकिन ये अब तक का सबसे बेस्ट प्रपोजल था। अवनि भला इसके लिए ना कैसे बोल सकती थी ? लेकिन उसे इस वक्त पृथ्वी इतना प्यारा लग रहा था कि वह कुछ बोल ही नहीं पायी बस प्यार भरी नजरो से उसे देखती रही।
अवनि को खामोश देखकर वहा मौजूद सभी लोग चिल्लाने लगे,”से यस , से यस , हाँ बोल दो”

अवनि ने मुस्कुराते हुए सबको देखा और फिर पृथ्वी की तरफ देखकर अपना बांया हाथ उसकी तरफ बढ़ाया और ख़ुशी से हामी में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने उसे अंगूठी पहनाई और खड़े होकर अवनि के करीब आकर कहा,”थैंक्यू,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
अवनि जो पृथ्वी के सामने अपना प्यार कम ही जहीर किया करती थी , आज उसने सबके सामने खुद से आगे बढ़कर पृथ्वी के गाल को अपने होंठो से छुआ और कहा,”थैंक्यू ! मिस्टर उपाध्याय मेरी जिंदगी में आने के लिए,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि पीछे हट गयी और पृथ्वी अपने गाल से हाथ लगाकर मुस्कुराते हुए पीछे जा गिरा लेकिन नीचे गिरने से पहले उसके पीछे खड़े लड़को ने आगे बढ़कर उसे थाम लिया। माहौल काफी रोमंटिक और खुशमिजाज हो चुका था इसलिए म्यूजिक सिस्टम वाले ने भी आवाज तेज कर दी और सब थिरकने लगे। पृथ्वी , अवनि और वहा मौजूद सभी लोग खुशिया मना रहे थे , नाच गा रहे थे और खुश थे,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
भरत को शर्मा ग्रुप की तरफ से एक लीगल नोटिस मिला था जिसके लिए आज शाम में कॉन्फ्रेंस मीटिंग थी ! अपने लालच के चलते भरत बुरी तरह फंस चुका था लेकिन फिर भी उसने एक नयी चाल सोची और लीगल नोटिस को फाड़कर डस्टबिन में डाल दिया। उसकी इस नयी मुसीबत की वजह था जयदीप और अब वह जयदीप को ही खरीदना चाहता था इसलिए अपने लेपटॉप के सामने आ बैठा और आज के काम की डिटेल्स देखने लगा ताकि वक्त निकालकर वह लंच टाइम में जयदीप से मिलने जा पहुंचे।

मिस्टर देसाई अपने केबिन में बैठे काम कर रहे थे। उन्हें इस बात की खबर तक नहीं थी कि उनकी पीठ पीछे भरत क्या कर रहा है बल्कि वे तो आँख बंद करके भरत पर भरोसा करके बैठे थे। मिस्टर देसाई ने कुछ प्रिंटआउट निकाले और उन्हें एक फाइल में जमाकर चेक करने लगे तभी उनके केबिन का दरवाजा खुला और प्राची अंदर आयी। इतने दिनों बाद प्राची को अपने ऑफिस में देखकर मिस्टर देसाई काफी खुश हुए और फाइल बंद करके साइड में रखते हुए कहा,”व्हाट अ प्लेजेंट सरप्राइज प्राची ! तुम आज यहाँ कैसे ?”

प्राची मिस्टर देसाई की टेबल की तरफ आयी और अपने दोनों हाथो को टेबल पर रखकर मिस्टर देसाई को घूरते हुए कहा,”डेड ! आप फिर भूल गए ना”
देसाई सर सोच में पड़ गए कि आखिर वे क्या भूल रहे है लेकिन उन्हें ऐसा कुछ याद नहीं आया ! ना उन्होंने आज के दिन के लिए प्राची से कोई वादा किया था ना ही कुछ ऐसा कहा जिसे उन्हें याद रखना पड़े।

मिस्टर देसाई को सोच में डूबे देखकर प्राची ने कहा,”डेड ! आज आपकी और मॉम की वेडिंग एनिवर्सरी है,,,,,,,,,,आप फिर भूल गए ना डेड”
मिस्टर देसाई ने सुना तो उन्हें याद आया आज से 32 साल पहले उन्होंने प्राची की माँ से शादी की थी। वे मुस्कुराये और कहा,”अरे ये मैंने कैसे भूल सकता हूँ मुझे बिल्कुल याद है , मैं तो बस तुम्हे टेस्ट कर रहा था”
“वैरी फनी डेड,,,,,,,,,,चलिए अब जल्दी से ये सब काम ख़त्म कीजिये और चलिए”,प्राची ने कहा

“कहा ?”,मिस्टर देसाई ने कहा
“आज मैंने आपके लिए लंच प्लान किया है , आपके और मॉम के फेवरेट रेस्त्रो में,,,,,,,,,,अब मॉम तो आपके साथ नहीं है इसलिए हर साल की तरह मैं आपको कम्पनी दूंगी,,,,,,,,,,,चलिए उठिये”,प्राची ने कहा
मिस्टर देसाई ने सुना तो बुझे स्वर में कहा,”आई ऍम सो सॉरी बेटा ! आज का लंच तुम्हे अकेले ही करना पडेगा,,,,,,,,,,,,दरअसल लंच के बाद मेरी ठाणे में एक क्लाइंट के साथ इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है और मुझे अभी निकलना होगा”

“डेड ! मीटिंग भरत अटेंड कर लेगा वैसे भी उसके पास क्या ही काम है ? जब से उसे MD की पोजीशन मिली है मैंने उसे कुछ बेटर करते नहीं देखा। ये नयी मीटिंग आप उसे अटेंड करने दीजिये और आप मेरे साथ लंच पर चलिए,,,,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने कहा
“लेकिन बेटा,,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने कहा

“नो मर्सी ! मैं कुछ नहीं सुनूंगी ! आप मेरे साथ लंच पर चल रहे है एंड देट्स फाइनल,,,,,,,,,,,,,,डेड मेरे लिए ना सही मॉम के लिए तो आप आज का आधा दिन निकाल ही सकते है ना,,,,,,,,,प्लीज डेड , प्लीज प्लीज प्लीज ना मत कहिये”,प्राची ने मिस्टर देसाई को थोड़ा इमोशनल ब्लेकमैल करके कहा और आख़िरकार मिस्टर देसाई को मानना ही पड़ा।
“ओहके फाइन,,,,,,चलते है”,मिस्टर देसाई ने अपने दोनों हाथो को ऊपर उठाकर कहा जैसे वे प्राची के सामने सरेंडर कर चुके हो।

प्राची ने उनके पास आकर उन्हें साइड हग किया और कहा,”ओह्ह्ह थैंक्यू सो मच डेड ! थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू,,,,,,,,,,,!!!!”
“एक मिनिट ! मैंने तुम्हारी बात मानी है इसलिए तुम्हे भी मेरी बात माननी होगी,,,,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने अपनी कुर्सी से उठकर अपना कोट उठाते हुए कहा
प्राची ने उनकी बाँह में अपनी बाँह डाली और उनके साथ केबिन के दरवाजे की तरफ बढ़ते हुए कहा,”ओह्ह्ह डेड ! जो आप कहे,,,,,,,,,,,अब चलिए हमे ड्राइव करके बहुत दूर जाना है।”

मिस्टर देसाई प्राची के साथ अपने केबिन से बाहर निकले और उसी वक्त भरत भी अपने केबिन से बाहर निकला ताकि जयदीप से मिलने जा सके।
“अरे भरत,,,,,,,,,तुम कही जा रहे हो क्या ?”,मिस्टर देसाई ने भरत को आवाज दी
भरत रुका और मिस्टर देसाई के सामने आकर कहा,”अह्ह्ह नहीं सर बताईये”
भरत चाहकर भी मिस्टर देसाई के सामने जयदीप से मिलने जाने की बात नहीं बता सकता था !

“अच्छा हुआ तुम मुझे बाहर ही मिल गए , मैं तुम्हारे पास ही आने वाला था”,मिस्टर देसाई ने कहा
“क्यों सर ?”,भरत ने सहजता से कहा जबकि अंदर ही अंदर उसका दिल जोरो से धड़क रहा था कि कही मिस्टर देसाई के सामने उसकी कोई सच्चाई तो नहीं आ गयी
मिस्टर देसाई ने भरत को देखा और कहा,”दरअसल मैं प्राची के साथ बाहर जा रहा हूँ इसलिए मैं चाहता हूँ कि आज की ठाणे वाली मीटिंग तुम अटेंड करो। मीटिंग फाइल मेरे केबिन में रखी है तुम एक बार उसे देख लो”

भरत ने सुना तो जैसे उस पर बिजली सी गिर गयी। कहा वह जयदीप को खरीदने जा रहा था और कहा मिस्टर देसाई ने उसे फिर फंसा दिया। भरत ने मिस्टर देसाई की तरफ देखा और कहा,”अह्ह्ह्ह ! लेकिन सर ये मीटिंग तो आप अटेंड करने वाले थे मैं कैसे ?”
“ओह्ह्ह कम ऑन भरत ! डेड की जगह एक मीटिंग तुम अटेंड कर लो,,,,,,,तुम्हारे लिए नया एक्सपीरियंस हो जाएगा , क्यों डेड ?”,प्राची ने कहा

“हाँ भरत एंड इस मीटिंग से तुम्हे बहुत कुछ सीखने को भी मिलेगा,,,,,,,,,,,,मैं चलता हूँ , तुम थोड़ी देर में ठाणे के लिए निकल जाना मिस्टर आहूजा तुम्हे वहा मिल जायेंगे,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने कहा और भरत का कन्धा थपथपाकर वहा से चले गए।
भरत उन्हें जाते हुए देखता रहा और गुस्से से अपना पैर पटककर मिस्टर देसाई के केबिन की तरफ बढ़ गया , आख़िरकार मिस्टर देसाई उसके प्लान पर पानी फेरकर जो जा चुके थे।  

 ( क्या सुरभि और सिद्धार्थ मिल पाएंगे एक दूसरे से या हो जायेंगे उनके रास्ते अलग ? क्या आप लोगो ने देखा था पहले कभी पृथ्वी का ये रूप ? किसके पास जाएगा भरत मिस्टर आहूजा या फिर जयदीप मौर्या ?जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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