Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 1

Manmarjiyan – 28

by Story With Sanjana October 31, 2020
written by Story With Sanjana October 31, 2020 14 comments
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Manmarjiyan – 28

Manmarjiyan
Manmarjiyan by Sanjana Kirodiwal

शगुन के लिए शादी का जोड़ा ओर साड़ियां पसन्द कर ली गयी । मिश्राईन ने चाची ओर प्रीति के लिए भी शोरूम से कुछ कपड़े पैक करवा दिए । कपड़ो की खरीदारी हो चुकी थी , ये सब करते करते दोपहर के 2 बज चुके थे मिश्रा जी ने सबको घर चलने को कहा तो विनोद ने कहा,”माफ कीजियेगा भाईसाहब हमारे यहां शादी से पहले बेटियों को ससुराल जाने की इजाजत नही है”


“कोई बात नही आज का खाना बाहर खा लेते है”,मिश्रा जी ने कहा तो सब तैयार हो गये ओर शोरूम से बाहर चले आये दो गाड़िया थी मिश्रा जी अपने परिवार के साथ अपनी गाड़ी में ओर विनोद जी अपने परिवार के साथ अपनी गाड़ी में सवार हो गए । गाड़ी में बैठा बैठा गुड्डु समझ गया कि आज उसकी रेल बनने वाली है । मिश्रा जी सबको लेकर फैमिली रेस्टोरेंट पहुंचे और एक फैमिली टेबल बुक करवाई । सभी साथ आ बैठे गुड्डु ने देखा बस एक कुर्सी खाली है वो भी शगुन की बगल में गुड्डु को आकर वही बैठना पड़ा ।

बढ़िया लजीज खाना आर्डर किया गया सब बातें करते हुए खाने लगे बस गुड्डु ओर शगुन ही खामोश थे , सबके बीच शगुन बात भी क्या करती ?
खाना खाने के बाद सभी वही बैठकर बाते करने लगे प्रीति ने शगुन को उठाया और अपने साथ लेकर रेस्टोरेंट के लॉन की ओर चली आयी और कहा,”जीजू ने तुम्हे क्या गिफ्ट दिया ?”
“वो खुद मेरे लिए गिफ्ट की तरह है”,शगुन ने कहा
“दी बात को ना गोल गोल मत घुमाओ ओर बताओ जीजू ने आपको गिफ्ट दिया ?”,प्रीति ने कहा


“कुछ भी नही”,शगुन ने कहा
“कंजूस है”,प्रीति ने मुंह बनाया
“ऐसा कुछ भी नही है प्रीति भूल गए होंगें”,शगुन ने गुड्डु की साइड लेकर कहा
“वाह वाह अभी से साइड ली जा रही है , सही है”,प्रीति ने ताना मारते हुए कहा
“प्रीति उन्होंने मुझे बहुत अनमोल तोहफा दिया है और वो था आज के वो 10 मिनिट जब हम साथ थे , वो पल मैं कभी नही भूल सकती ,,,

पता जैसे फिल्मो में होता है ना वैसा ही लग रहा था उस वक्त उनके साथ”,शगुन ने कहा
“दी आप खुश हो ना ?”,प्रीति ने शगुन के कंधों को थामते हुए कहा
“हा मैं बहुत खुश हूं जो मुझे ऐसा ससुराल मिलने जा रहा है”,शगुन ने मुस्कुरा कर कहा तो प्रीति ने उसे गले लगा लिया दोनो बहने अंदर चली आयी । कुछ देर बाद मिश्रा जी सभी के साथ ज्वेलर्स के यहां चले आये । कानपुर का सबसे बड़ा शोरूम था वो जिसे देखकर विनोद ओर चाची की तो आंखे ही चुंधिया गयी ।

अब विनोद ओर चाची को पता चला कि शगुन का रिश्ता कितने रईस घर मे होने जा रहा था । सभी अंदर आये शगुन के लिए शादी के गहने ख़रीदे गए। वेदी ने भी अपने लिए कानो की बालिया ली। मिश्रा जी ने एक चेन और पेंडेंट लिया और गुड्डू को बुलाकर कहा,”इह बहु को अपने हाथ से देकर आओ , तोहफा है तुम्हायी तरफ से”
“इसकी का जरूरत है ?”,गुड्डू ने कहा


“जितना कहे है उतना करो बाप से बकैती ना करो समजे , चलो जाओ”,मिश्रा जी ने कहा तो गुड्डू ने मन ही मन उन्हें कोसते हए कहा,”उस दिन पिंकिया को 1200 का ड्रेस देने में कैसे घर सर पर उठा लिया और आज इनको इतना महंगा तोहफा , पिताजी भी ना हमायी समझ से बाहर है”
गुड्डू शगुन के पास आया और बॉक्स उसकी और बढाकर कहा,”इह आपके लिए है”


शगुन ने बॉक्स ले लिया तो गुड्डू वहा से चला गया। शगुन ने खोलकर देखा उसमे सोने की बहुत सुंदर चैन और पेंडेंट था। शगुन को गुड्डू का वह तोहफा बहुत पसंद आया। ख़रीदारी करते करते शाम के 5 बज चुके थे। विनोद जी ने मिश्रा जी से वापस जाने की इजाजत मांगी तो मिश्रा जी ने कहा,”विनोद जी आप परिवार के साथ यहाँ आये बहुत अच्छा लगा बस एक छोटी सी गुजारिश है आपसे”
“अरे कहिये ना भाईसाहब”,विनोद ने उनका हाथ थामते हुए कहा


“यही कानपूर में श्री राधा-कृष्ण का मंदिर है तो हमहू चाहते थे की आप लोगो के जाने से पहले गुड्डू और शगुन को उनका आशीर्वाद दिलवा दे। आप लोग भी दर्शन कर लीजियेगा”,मिश्रा जी ने अपनी इच्छा जाहिर की तो विनोद ने खुश होकर कहा,”ये तो बहुत अच्छी बात है भाईसाहब , वैसे भी कानपूर आकर अगर उनके दर्शन नहीं किये तो कानपूर आना बेकार है ,, चलिए चलते है”
विनोद जी की सहमति मिलते ही मिश्रा जी ने सबको चलने को कहा। सुबह 6 बजे का उठा गुड्डू चक्क्रघिन्नी बना हुआ था। उसे लगा अब जाकर इन सबसे पीछा छूटेगा लेकिन मिश्रा जी ने फिर नया बखेड़ा कर दिया।

सभी मंदिर के लिए निकल गए इस बार मिश्रा जी विनोद जी वाली गाड़ी में चले आये और शगुन को गुड्डू , मिश्राइन और वेदी के साथ अपनी गाड़ी में भेज दिया। सभी मंदिर पहुंचे शाम के वक्त ये मंदिर और भी खूबसूरत नजर आ रहा था कितनी शांति कितना सुकून था यहाँ। सभी मंदिर के अंदर आये। मिश्रा जी और विनोद जी बातें करते हुए सबसे आगे चल रहे थे। मिश्राइन और चाची भी बतियाते हुए साथ चल रही थी , वेदी प्रीति का हाथ थामे उसे वहा के बारे में बताते हुए चल रही थी सबसे आखिर में चल रहे थे शगुन और गुड्डू , खामोश ! शगुन ने चलते चलते गुड्डू से कहा,”थैंक्यू”


“काहे ?”,गुड्डू ने कहा
“उस तोहफे के लिए”,शगुन ने कहा
“हम्म्म कोई बात नहीं इसमें थैंक्यू की का बात है”,गुड्डू ने कहा
“सुबह से हम सबके लिए यहाँ वहा घूम रहे है आप , थक गए होंगे ना”,शगुन ने गुड्डू का उतरा हुआ चेहरा देखकर कहा
“हम्म थोड़े से , आदत नहीं है ना ऐसे”,गुड्डू ने कहा


“हम्म”,शगुन ने कहा और एक बार फिर उसके और गुड्डू के बीच ख़ामोशी छा गयी। सभी मंदिर में आये और राधा कृष्ण के दर्शन किये। मिश्रा जी ने गुड्डू और शगुन को आगे बुलाया और पंडित जी से दोनों के लिए पूजा करने को कहा। शगुन ने अपने दुपट्टे को सर पर ओढ़ा और गुड्डू के बांयी और आकर खड़ी हो गयी। पंडित जी ने गुड्डू और शगुन के नाम से पूजा की और फिर दोनों को आशीर्वाद देते हुए कहा,”तुम दोनों का साथ सदा यु ही बना रहे”


गुड्डू ने सूना तो मन ही मन कहा,”ऐसा आशीर्वाद ना देओ पंडित हमहू इनको निकालने का सोच रहे है और तुमहू हो के” गुड्डू को बड़बड़ाते देख पंडित जी ने कहा,”बहुते भाग्यशाली हो बेटा जो इह तुम्हारी जीवनसंगिनी बनने वाली है। साक्षात् शिव-गौरी की जोड़ी है दोनों की मिश्रा जी”
पंडित जी की बात से खुश होकर मिश्रा जी ने उन्हें 500 की दक्षिणा दी और उसके बाद सभी मंदिर में विराजमान देवताओ के एक एक करके दर्शन करने लगे। शगुन और गुड्डू साथ साथ ही परिक्रमा कर रहे थे।

प्रीति और वेदी अब तक अच्छी दोस्त बन चुकी थी इसलिए दोनों वही मंदिर में साथ साथ घूमते हुए बातें कर रही थी। गुड्डू मंदिर के पीछे बनी सीढ़ियों पर आकर बैठ गया , दिनभर के टॉर्चर से वह बुरी तरह थक चुका था। शगुन को जब गुड्डू कही दिखाई नहीं दिया तो उसे ढूंढते हुए वह भी पीछे चली आयी सीढ़ियों पर गुड्डू को देखकर शगुन भी आकर वहा कुछ दूर बनाकर बैठ गयी और कहा,”आपसे एक बात कहे”
“हम्म्म कहो”,गुड्डू ने सामने देखते हुए कहा


“आप इतना कम बात क्यों करते है ? मेरा मतलब क्या हमेशा ऐसे ही रहते है चुप चुप ?”,शगुन ने कहा तो गुड्डू शगुन की और देखने लगा और फिर सामने देखते हुए कहा,”हमे आजतक ऐसा कोई मिला ही नहीं जो हमे समझ पाए , पिताजी जो फैसले लेते है वो हमहू मान लेते है। बात करने का मजा तब है जब सामने वाला इंसान हमाये जैसा हो”
“कोशिश कर रहे है धीरे धीरे समझ जायेंगे”,शगुन बड़बड़ाई
“कुछ कहा तुमने ?”,गुड्डू को साफ सुनाई नहीं दिया


“ये जगह बहुत खूबसूरत है , एकदम शांत”,शगुन ने बात पटलते हुए कहा
“हमारा कानपूर पुरा ही खूबसूरत है”,गुड्डू ने कहा
“यहाँ के लोग भी काफी दिलचस्प है और यहाँ की भाषा सीधे दिल में उतरती है”,शगुन ने गुड्डू को प्यार भरी नजरो से देखते हुए कहा
गुड्डू ने सूना तो शगुन को देखे बिना ना रह सका , उसने पाया की शगुन उसे ही देख रही है तो गुड्डू ने नजर घुमा ली। दोनों फिर खामोश हो गए और बैठकर सामने देखने लगे।

सीढ़ियों से निचे कुछ ही दूर एक छोटा सा तालाब था जिसका पानी चमक रहा था। ठंडी हवाएं चल रही थी जिसमे शगुन के बालो की लट उड़कर बार बार उसके गालो पर आ रही थी। शगुन और गुड्डू दोनों के दिल में ना जाने कितना कुछ था एक दूसरे से कहने के लिए लेकिन शब्दों ने उनका साथ नहीं दिया। ख़ामोशी से दोनों सामने तालाब में भरे पानी को निहारते रहे


“भैया चाय लेंगे”,एक छोटे लड़के की आवाज से गुड्डू की तंद्रा टूटी उसने देखा हाथ में चाय की केतली और कप लिए एक लड़का खड़ा है। गुड्डू ने शगुन की और देखा और पूछा,”चाय पियेंगी ?’
“जी पीला दीजिये”,शगुन ने प्यार से कहा
गुड्डू ने लड़के से दो चाय देने को कहा , गुड्डू की खुशकिस्मती थी की केतली में आखरी दो चाय ही बची थी , लड़के ने दो चाय गुड्डू को दी और पैसे लेकर चला गया। गुड्डू ने एक कप शगुन की और बढ़ा दिया सहसा ही उसकी उंगलिया गुड्डू की उंगलियों से टकरा गयी।

गुड्डू वही शगुन की बगल में बैठ गया , शगुन को अच्छा लगा गुड्डू ने जैसे ही चाय पीने के लिए हाथ अपने मुंह की और बढ़ाया उसके हाथ से कप छूट गया और चाय नीचे जा गिरी !
“आप ये पि लीजिये”,शगुन ने अपनी चाय गुड्डू की और बढाकर कहा
“अरे नहीं तुमहु पीओ हम दूसरी ले लेते है”,कहते हुए गुड्डू ने लड़के को आवाज लगाई लड़का आया और कहा,”भैया चाय तो खत्म हो गयी”


“भैया एक खाली कप दे दीजिये”,शगुन ने कहा तो लड़के ने एक खाली कप शगुन की और बढ़ा दिया और वहा से चला गया। शगुन ने अपने कप से आधी चाय दूसरे कप में डालकर गुड्डू की और बढ़ा दी। गुड्डू ने चाय ली और पीने लगा , ये देखकर शगुन को अच्छा लगा की धीरे धीरे ही सही गुड्डू और उसके बीच अंडरस्टेंडिंग बन रही है। गुड्डू ने चाय पीकर खाली कप पास पड़े डस्टबिन में डाल दिया और शगुन से कहा,”आधी चाय हमे काहे दी , खुद पि सकती थी ना तुम”


“बाटने से चीजे भले कम हो पर अच्छा लगता है , और जब किसी अपने के साथ बाटनी पड़े तो वो ख़ुशी अलग ही होती है”,शगुन ने कहा तो गुड्डू उसकी और देखने लगा गुड्डू को अपनी और देखता पाकर शगुन ने कहा,”चले ?”
“हम्म्म”,कहते हुए गुड्डू उठा और शगुन के साथ मंदिर से बाहर चला आया। बाकि सभी पहले से बाहर थे मिश्रा जी ने सबसे खाना खाने का आग्रह किया लेकिन विनोद ने मना कर दिया क्योकि उन्हें बनारस भी जाना था।

लम्बे सफर को देखते हुए मिश्रा जी ने सबको हल्का फुल्का खाने को कहा और सभी वही पास ही बन रहे पावभाजी सेंटर पर चले आये। शगुन को पावभाजी बहुत पसंद थी इसलिए उसने भी हामी भर दी। सभी वहा रुककर पावभाजी खाने लगे ,,प्रीति ने शगुन को अपने पास देखा तो कहा,”दी आप यहाँ क्या कर रही है ? वाह जाईये ना गुड्डू जीजू के पास”
“नहीं मैं नहीं जा रही सब खड़े है यहाँ”,शगुन ने कहा
“अरे तो क्या हुआ वैसे भी थोड़ी देर बाद तो हम सब यहाँ से चले ही जायेंगे , गुड्डू जीजू के साथ ये थोड़ा सा वक्त और बचा है जाईये ना”,प्रीति ने पाव भाजी खाते हुए कहा


“हां भाभी प्रीति ठीक कह रही है आप जाईये ना भैया के साथ खाइये , माँ पिताजी बहुत फ्रेंक है कुछ नहीं सोचेंगे”,वेदी ने भी प्रीति की हां में हां मिलाते हुए कहा तो शगुन अपनी प्लेट लेकर गुड्डू के पास चली आयी। गुड्डू ने शगुन को वहा देखा तो कहा,”और चाहिए ?”
“नहीं थैंक्यू , आप नहीं खा रहे ?”,शगुन ने पूछा
“नहीं वो हमहू थोड़ी देर पहले ही खाये थे , अभी भूख नहीं है”,गुड्डू जो की एक नंबर का फूडी था उसने मना कर दिया


शगुन वही खड़ी रही तो गुड्डू ने कहा,”हम आते है”
शगुन के सामने आते ही गुड्डू की उलझने और बढ़ जाती थी। गुड्डू वहा से निकल कर गाड़ी के पास चला आया। सबने पावभाजी खायी और फिर गाड़ियों के पास चले आये। मिश्रा जी विनोद जी से गले मिले , मिश्राइन भी चाची , शगुन और प्रीति से मिली उन्हें दोबारा कानपूर आने को कहा और शगुन को जल्दी से बहू बनकर आने को कहा। प्रीति ने अपना फोन निकाला और गुड्डू के पास आकर कहा,”जीजू एक सेल्फी तो बनती है आपके साथ”


“हम्म्म”,कहकर गुड्डू ने हामी भर दी ,, प्रीति ने शगुन और वेदी को भी बुला लिया और चारो ने साथ में सेल्फी ली। शगुन गुड्डू के बगल में ही खड़ी थी जाते जाते प्रीति ने उसे गुड्डू की और धकिया दिया। शगुन गुड्डू से जा टकराई उसके गले में पहनी चैन गुड्डू की शर्ट के बटन से उलझ गयी
और दोनों एक दूसरे के थोड़ा करीब आ गए। शगुन ने गुड्डू के चेहरे की और देखा मासूम चेहरा जिस पर बहुत ही खूबसूरत आँखे थी और बाल बार बार उसकी आँखों पर आ रहे थे।

शगुन उस चेहरे में खोकर ही रह गयी , जब उसने चैन निकालने के लिए गुड्डू के सीने की और अपने हाथ बढ़ाये उसी वक्त गुड्डू ने भी अपने हाथ बढ़ाये और दोनों की उंगलिया आपस में टकरा गयी एक खूबसूरत और दिल में उतरने वाला अहसास दोनों को महसूस होने लगा
बैकग्राउंड म्यूजिक –
होश अब हमको कहा है ? देखके आँखे तेरी
दिल में है तूफान सा , सुनके अब बाते तेरी
रास्ते भी एक ही है , मंजिले भी एक है
तेरे संग सारा सफर है , तेरे संग राहे मेरी


छू लिया तेरे अहसास ने
सांसे भी अब तो महकती है
आँखों में तुझे भर लू अपने
आज की ये रात कहती है
होश हमे , अब है कहा , अपना लगे , सारा जहाँ
दिल चाहे अब तेरा होना,,,,,,,,,,,,,,,,,
मनमर्जियाँ , मनमर्जियाँ , मनमर्जियाँ ,,,, कैसी ये मर्जियाँ ?
मनमर्जियाँ , मनमर्जियाँ , मनमर्जियाँ ,,,, कैसी ये मर्जियाँ ?

Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28Manmarjiyan – 28

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शगुन उस चेहरे में खोकर ही रह गयी , जब उसने चैन निकालने के लिए गुड्डू के सीने की और अपने हाथ बढ़ाये उसी वक्त गुड्डू ने भी अपने हाथ बढ़ाये और दोनों की उंगलिया आपस में टकरा गयी एक खूबसूरत और दिल में उतरने वाला अहसास दोनों को महसूस होने लगा
बैकग्राउंड म्यूजिक –
होश अब हमको कहा है ? देखके आँखे तेरी
दिल में है तूफान सा , सुनके अब बाते तेरी
रास्ते भी एक ही है , मंजिले भी एक है
तेरे संग सारा सफर है , तेरे संग राहे मेरी

शगुन उस चेहरे में खोकर ही रह गयी , जब उसने चैन निकालने के लिए गुड्डू के सीने की और अपने हाथ बढ़ाये उसी वक्त गुड्डू ने भी अपने हाथ बढ़ाये और दोनों की उंगलिया आपस में टकरा गयी एक खूबसूरत और दिल में उतरने वाला अहसास दोनों को महसूस होने लगा
बैकग्राउंड म्यूजिक –
होश अब हमको कहा है ? देखके आँखे तेरी
दिल में है तूफान सा , सुनके अब बाते तेरी
रास्ते भी एक ही है , मंजिले भी एक है
तेरे संग सारा सफर है , तेरे संग राहे मेरी

#Banaras#haanYeMohabbatHai#Love-You-Jindgi#Lovestory#Manmarjiyan#Romantic_novel#romanticLoveStory#SanjanaKirodiwalsanjanakirodiwal
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14 comments

Preeti October 31, 2020 - 10:50 am

Bhut hi pyaara part tha lgta h dheere 2 guddu shagun ko samajhne lagega usse bhi pyaar ho jaayega

Reply
शैलेंद्र+कुमार October 31, 2020 - 11:51 am

मैम मिश्रा जी ने आज दिल खुश कर दिया…गुड्डू से गिफ्ट दिलवाकर बहुत अच्छा किया…..मैम राधाकृष्ण का मंदिर आप घुमा रहीं थी…जेके मंदिर भी घुमा देंती… कानपुर का सबसे फेमस मंदिर हैं…. गुड्डू शगुन की मासूमियत से कब तक बचा रहेगा…अब तो चाय भी शेयर हो गई😊 lajwab part👌👌👌👌👌

Reply
Seema srivastava October 31, 2020 - 12:03 pm

Very beautiful

Reply
Rachna aggarwal October 31, 2020 - 1:18 pm

Beautiful part 😍

Reply
Doman singh October 31, 2020 - 2:26 pm

Nice part…..🌹🌹🌹🌹

Reply
Praptee October 31, 2020 - 2:49 pm

so beautiful amzing very nice

Reply
Pooja+Agnihotri October 31, 2020 - 3:20 pm

Beautiful

Reply
Aarti+Srivastava October 31, 2020 - 4:17 pm

Amazing part…..😍😍😍😍😍 Guddu shagun ki love story…. Ek dum kamal ,dhamal …….bawal hi hogi….😜😜😍😍😍😍😍😍😍❤️❤️❤️❤️❤️❤️

Reply
Anjali Bankar October 31, 2020 - 6:27 pm

गजब यार,,, ! मतलब बवाल था ।
में तो केहती हु गुड्डु को ना जिंदगी भर बड़े मिश्रा के पैर धो कर पिना चाहिए । कहा उसकी image प्रिती के सामने कम होनेवाली थी , पर मिश्रा जी की वजह से वही image खराब होने से बच गई । 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Reply
Anjali Bankar October 31, 2020 - 6:27 pm

❤

Reply
Saroj October 31, 2020 - 11:45 pm

Wow waiting for next part

Reply
Sangeeta November 1, 2020 - 7:02 pm

aaj ka part aabtak aaya nhi ???

Reply
anamika mathur November 2, 2020 - 10:48 am

Lovely…..As usual hats off… Waiting for next…Part…

Reply
Dr. Shilpa Sharma November 4, 2020 - 6:08 am

😍

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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