Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4Story

Manmarjiyan Season 4 – 18

by Story With Sanjana February 18, 2026
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Manmarjiyan Season 4 – 18

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गोलू से मार खाकर मंगल फूफा उदास होकर वहा से चले गए। गुड्डू ख़ामोशी से उन्हें जाते हुए देखता रहा। गोलू ने मंगल फूफा को जाते देखा और कहा,”देखा गुड्डू भैया मार खा के भी अकड़ नाही गयी फूफा कि , साला दस रूपये की चाय भी बर्बाद किये इन पर , नहीं का लगा आपको आपकी उह्ह दूध कम पानी ज्यादा चाय पीकर फूफा आपको देवता समझ लेंगे,,,,,,,,,,,,अरे माफ़ी तक नाही मांगे आपसे अपनी गलती की,,,,,,,,चले गए”

गोलू बड़बड़बा ही रहा था कि तभी मंगल फूफा भागते हुए वापस आये और उनके पीछे गुड्डू के ड्राइवर की गुद्दी पकडे यादव जी। यादव जी के एक हाथ में लड़के की गर्दन थी तो दूसरे हाथ में बड़ी सी ईंट और आँखों में था खून सवार जो वो आज मंगल फूफा का करने वाले थे। गुड्डू और गोलू हैरानी से ये मंजर देख ही रहे थे कि मंगल फूफा भागते हुए आये और गुड्डू गोलू को चीरते हुए निकल गए और जाकर छुप गए गुड्डू की दूकान में।

यादव जी लड़के की गर्दन दबोचे गुड्डू गोलू के सामने आये और दोनों को देखकर गुस्से से कहा,”अच्छा तो जे आशिक़ो की फौज तुम दोनों ने इक्क्ठा कर रखी है”
“अबे का पगला गए हो ? कैसी फौज बे और कौन आशिक़ ? और बेताल बन के जे जुगनू के गले काहे पड़े हो ?”,गोलू ने कहा

“अपने जुगनू से कहो दिन मा हमाये घर के सामने जगमगाना बंद करे नहीं तो हमेशा के लिए चिराग बुझा देंगे जे का ? नहीं पूछो इनसे कर का रहे थे जे हमाये सामने ? अरे जे का बताएँगे हम बताते है , पहिले तुम्हाये बाप , फिर तुम्हाये उह्ह फूफा और अब जे नवा आशिक़ , हमको साला तुम लोग एक बात बताओ का पूरा खानदान हमायी फुलवारी को लेके उड़ेगा का ?”,यादव ने गुड्डू के ड्राइवर जिसका नाम जुगनू था को जमीन पर फेंककर कहा

गुड्डू ने सुना तो गुस्से से जुगनू को देखा , मारे शर्म के जुगनू जमीन कुचरने लगा लेकिन गोलू तो ठहरा गोलू यादव जी के सामने आया और कहा,”हमाये बाप और फूफा काहे लेकर उड़ेंगे चचिया को ? एक ठो बात बताये चचा आपकी फुलवारी ना इत्ती हलकी भी ना है कि उड़ जाए,,,,!!!”
“देखो गोलू तुम ना बदतमीजी नाही करो हमरे साथ”,यादव ने भड़ककर कहा

“अरे बदतमीजी तो आपके पिताजी ने की है कानपूर वालो के साथ आपको पैदा करके,,,,,,,,,,और का बात बात पर जोरू का गुलाम बन के हमसे और हमाये पिताजी से लड़ने चले आते हो , इत्ती भी सुन्दर नाही है आपकी फुलवारी जो हम और हमाये पिताजी उसको देखे”,गोलू ने चौडाकर कहा

“अच्छा तो फिर बीच मोहल्ला मा खड़े होकर काहे कह रहा था उह्ह्ह साला गुप्ता कि अगर किसी ने फुलवारी की तरफ आँख उठाकर भी देखा तो टाँगे काट देंगे”,यादव ने गुस्से से उबलकर कहा
“जे का लॉजिक हुआ बे ? किसी ने आँख उठाकर देखी तो टाँगे काहे काटेंगे ? आँख नहीं ना फोड़ते गुड्डू भैया,,,,,,,,,!!”,गोलू ने हैरानी से कहा और गुड्डू की तरफ देखा
“तुम्हाये पिताजी ने कही है जे बात तो लॉजिक भी ओह्ह ही जाने,,,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने कहा

“लॉजिक गवा भाड़ मा आखरी बार कह रहे है गोलू अपने बाप और फूफा को कंट्रोल मा रख ल्यो वरना अभी इसी बख्त कानपूर मा नवा गुंडा पैदा होगा,,,,,,,,,समझा रहे है और तुम भूतनी के , आज के बाद हमाये घर तो का मोहल्ला मा भी दिखे ना तो साले नीम की संटी से ऐसी सुताई करेंगे ना बैठ पाओगे ना लेट पाओगे,,,,,,,,,,!!!”,यादव ने गुस्से से कहा और हाथ में पकड़ी ईंट साइड में फेंक दी
“जे यादववा तो हमको बहुते हलके मा ले रहा है भैया,,,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने दबे स्वर में गुड्डू से कहा

“अबे जाय दयो , बीवी का मामला है गुस्सा तो आएगा न,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने भी दबे स्वर में ही कहा
“हाँ हाँ ठीक है समझा देंगे पिताजी को , अब आप छाती पर काहे खड़े है जाईये हिया से हमको और गुड्डू भैया को और भी बहुते काम है”,गोलू ने इतरा कर कहा
“हाँ टेंट लगाने और उखाड़ने के अलावा का ही काम है तुम दोनों को , जे आखरी बार है गोलूआ आज के बाद इनमे से किसी को भी हमरी फुलवारी के आस पास भी देखे न इनका खून करके जेल चले जायेंगे”,कहकर यादव वहा से चला गया

ये सब तमाशा देखकर गुड्डू ने अपना सर पकड़ा और वही बैठ गया। गोलू ने जुगनू को देखा और दो चार लात घुसे उस पर जमाते हुए कहा,”अबे का बुद्धि भ्रष्ट हो गयी है तुम सबकी , उह्ह्ह साला फूफा तो रंगबाज था ही तुम भी उसकी पूछ पकड़ लिए ,, इत्ती मुश्किल से साला एक ठो आर्डर मिला था उसमें भी हमायी और गुड्डू भैया की नाक कटवाय दिए,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे गोलू भैया माफ़ कर दीजिये ना गलती हो गयी,,,,,,,,,हम बहक गए थे”,जुगनू ने मिमियाते हुए कहा

“बहक गए थे , अबे 25 साल के जवान लौंडे हो तुमहू 16 साल के बच्चे नाही जो बहक गए थे , और बहकना ही था तो कही और बहकते साले कंवारी लड़की और शादीशुदा औरत मा फर्क नाही समझ आता तुमको,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा और दो चार थप्पड़ और जमा दिए
गुड्डू ने जब ये सब सुना तो रोआँसा होकर कहा,”साला तुम सब ने कसम खा ली है कि हमाओ काम नाही चलन दोगे , जे बेडिंग प्लानर का काम शुरू करने के लिए कित्ते हाथ पैर जोड़े रहे अब लगता है तुम सब जे का बंद करवा के मानोगे,,,,,,,,,,और जब बंद हो जाए ना तो एक आखरी टेंट गाड़ना हिया हमायी तेहरवी पर,,,,,,,,,,,,,!!!”

गुड्डू की बाते सुनकर गोलू ने जुगनू को छोड़ा और गुड्डू के पास आकर कहा,”ए गुड्डू भैया ! जे का कह रहे है आप ? अरे तेहरवी का टेंट लगाए हमहू आपके दुश्मन के घर का अशुभ अशुभ बोल रहे है आप,,,,,,,,,,!!!”
“तो तुम्ही बताओ जब से हमहू जे दुकान खोले है साला शुभ का हुआ है हमरे साथ , हम मर तर कर एक ठो आर्डर लेते है और तुम सब मिलके ओह्ह्ह का सत्यानाश कर देते हो,,,,,,,,,,,नहीं तुम बताओ ऐसे काम करेंगे तो साला कौन देगा हमको काम और पिताजी को पता चला ना तो तुम्हाये बाप की तरह घर से नाही सीधा कानपूर से बाहिर फेंक देंगे हमे,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने लगभग रोते हुए कहा

“अरे गुड्डू भैया आप रोईए नाही , हम है ना हम सब ठीक कर देंगे”,कहकर गोलू जुगनू की तरफ पलटा और कहा,”ए जुगनू ! तुमहू साले उठो और फुटो हिया से और कल से काम पर नाही आना,,,,,,,,,!!”
”हम नाही आएंगे तो जे पिकअप कौन चलाएगा ?”,जुगनू ने उठकर खुद को झाड़ते हुए कहा
गोलू ने जुगनू को घूरकर देखा और अपने हाथो को आगे करके कहा,”भगवान् ने जे दो दो हाथ दिए है ना,,,,,,,,हम चला लेंगे , तुम निकलो”

“हाँ जा रहे है,,,,,,हमायी तनख्वाह के जो 12 हजार 4 सौ 65 रूपये है ना वो दे दो चले जायेंगे”,जुगनू ने भी अकड़कर कहा
“अच्छा और तुमहू जो हमाओ करोडो का नुकसान हो करवाए हो ओह्ह्ह का का ? साले तुम्हरे और उह्ह्ह मंगल फूफा के चक्कर मा घर से निकाले गए है अब का चाहते हो दुनिया छोड़ दे तुम्हाये लिए”,गोलू ने भड़ककर कहा
“ए जुगनू ! तुमहू जाओ अंदर जाकर रवि से कल के फंक्शन का सामान निकलवाओ,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा

क्योकि वह जानता था जुगनू को फुलवारी तक लेकर जाने वाले मंगल फूफा थे ये उसका खुद का दिमाग नहीं था। गुड्डू की सुनकर जुगनू वहा से चला गया।
“जे का किया गुड्डू भैया , ओह्ह्ह का वापस काम पर काहे रख लिए ?”,गोलू ने कहा
“हमको एक बात बताओ गोलू तुम्हरे घर मा अगर चूहा घुस जाए तो तुम चूहे को घर से निकलोगे या घर छोड़ दोगे ?”,गुड्डू ने पूछा

“घर काहे छोड़ेंगे , ससुरे चूहे को बाहिर निकालेंगे”,गोलू ने कहा
गुड्डू उठा और कहा,”हाँ तो फिर जाओ चूहे को बाहिर निकालो,,,,,,,,,!!”
“चूहा ?”,गोलू ने असमझ की स्तिथि में कहा
“अबे तुम्हाये मंगल फूफा , बाहिर निकालो उह्ह आशिक़ की औलाद को साला अब और नाही झेलेंगे हम ओह्ह्ह का”,गुड्डू ने गुस्से से कहा तो गोलू को याद आया कि मंगल फूफा यादव से बचने के लिए दूकान में जा घुसे थे।

गोलू गया गुस्से से दूकान की तरफ ये देखकर गुड्डू बड़बड़ाते हुए उसके पीछे गया,”साला इसका भरोसा नाही कही गुस्से मा आकर मार वार ही ना दे जे फूफा को,,,,,,जे कहा फंस गए है हम”

मिश्रा जी का शोरूम , कानपूर
लवली गुड्डू की बाइक लेकर शोरूम पहुंचा और अंदर आया। मिश्रा जी अपने केबिन में थे तो लवली वही चला आया।
“अरे लवली ! इत्ता बख्त लगा दिया ,, रास्ते मा कही रुक गए थे का बिटवा ?”,मिश्रा जी ने प्यार से पूछा
“अगर हमने इनको गुड्डू और गोलू की हरकत के बारे में बताया तो पिताजी खामखा उन पर गुस्सा हो जायेंगे”, लवली ने मन ही मन खुद से कहा

लवली को खोया देखकर मिश्रा जी ने कहा,”का हुआ ? कहा खोये हो ?”
“अह्ह्ह वो ! हमे भूख लगी थी तो रस्ते में कुछ खाने के लिए रुक गए थे”,लवली ने कहा
“ल्यो ! हमहू तुमको बताना भूल गए मिश्राइन ने तुम्हाये लिए खाने का डिब्बा भिजवाया है और तुमने बाहिर से खा लिया , चलो कोई बात नहीं”,मिश्रा जी ने कहा

“का ! अम्मा ने हमाये लिए डिब्बा भिजवाया है , कहा रखा है ?”,लवली ने आँखों में चमक भरकर कहा
“अरे बिटवा कोई बात नहीं तुमहू पहिले ही खाना खा चुके हो , मिश्राइन से कह देंगे हम की तुमको डांट ना लगाए बस,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने मुस्कुरा कर कहा
“इतने साल माँ के हाथ से बने खाने को तरसे है पिताजी , उनके भेजे डिब्बे का अपमान नहीं करेंगे,,,,,,बताईये ना कहा है डिब्बा हम खा लेते है”,लवली ने नम आँखों से मिश्रा जी की तरफ देखकर कहा

मिश्रा जी ने सुना तो उनका मन उदास हो गया ,बचपन से ही गुड्डू को मिश्रा जी का प्यार और मिश्राइन के हाथो से बना खाना खाने को मिला लेकिन लवली हमेशा इस प्यार और दुलार से दूर रहा ये सोचकर मिश्रा जी की आँखे भी नम हो गयी। उन्होंने सामने टेबल पर रखे टिफिन की तरफ इशारा करके कहा,”वहा रखा है,,,,,,जाओ खा लो”

लवली ने टिफिन उठाया और सोफे पर आ बैठा। उसने डिब्बा खोलकर सामने टेबल पर रखा और जैसे ही एक निवाला खाया सुकून के भाव उसके चेहरे पर दिखाई देने लगे। लवली ख़ुशी से खाना खाने लगा और मिश्रा जी फिर अपने हिसाब किताब में लग गए तभी उनका फोन बजा।
स्क्रीन पर गुप्ता जी का नंबर देखकर मिश्रा जी मुस्कुराये और फ़ोन उठाकर कान से लगाकर कहा,”नमस्ते समधी जी , कैसे है ?”

“मैं ठीक हूँ , आप कैसे है ?”,गुप्ता जी यानि शगुन के पापा ने पूछा
“हम भी बढ़िया है , घर में सब कैसे है ? सब कुशल मंगल ना ?”,मिश्रा जी ने पूछा
“बस बाबा की मेहरबानी है मिश्रा जी , अच्छा हमने आपको ये बताने के लिए फोन किया है कि कल सुबह हम अपने परिवार के साथ कानपूर के लिए निकल रहे है शाम तक पहुंचेंगे,,,,,,,अमन भी आज रात बनारस पहुँच जाएगा”,गुप्ता जी ने कहा

मिश्रा जी ने सुना तो उन्हें याद आया कि वे तो ये बात भूल ही गए थे। उन्होंने ही तो गुप्ता जी से अमन और वेदी के रिश्ते की बात कही थी और अब उन्हें ही याद नहीं रहा लेकिन गुप्ता जी ने सही वक्त पर फोन करके उन्हें याद दिला दिया।
“हाँ हाँ ! आप लोग आईये हम यहाँ सब तैयारी करके रखे है,,,,,,,,,,,कोनो परेशानी की बात नाही है”,मिश्रा जी ने कहा
“जी , तो हम कल निकलने से पहले आपको एक बार फोन कर देंगे,,,,,,,,दामाद जी और शगुन बिटिया कैसी है ?”,गुप्ता जी ने पूछा

“दोनों बहुते बढ़िया है बाकि कल आप खुद आकर मिल लीजियेगा”,मिश्रा जी ने हँसते हुए कहा
लवली खाना खाते हुए बीच बीच में मिश्रा जी को देख रहा था। उन्हें इतना खुश लवली पहली बार जो देख रहा था। मिश्रा जी ने गुप्ता जी से बात की और फिर फोन रख दिया। लवली खाना खा चुका था वह हाथ धोकर मिश्रा जी की तरफ आया और कहा,”का बात है पिताजी , आप बड़े खुश नजर आ रहे है ?”

“गुड्डू के ससुर का फोन था , कल उह्ह अपने परिवार के साथ हिया आ रहे है कानपूर। उनके छोटे भाई का लड़का है अमन , उह्ह्ह अपनी वेदी को पसंद करता है तो हम सबने सोचा क्यों ना पसंद को रिश्ते मा बदल दिया जाए,,,,,,,,,,,,,तो कल शगुन के घरवाले हमायी वेदी को देखने आ रहे है”,मिश्रा जी ने कहा
“ये तो बहुत ख़ुशी की बात है पिताजी”,लवली ने मुस्कुराकर कहा लेकिन मन ही मन उसे बिंदिया का ख्याल आया और उदासी उसकी आँखों में तैर गयी

 मिश्रा जी को सबकी पंसद सबका प्यार नजर आ रहा था बस लवली का नहीं। मिश्रा जी ने लवली की तरफ देखा और कहा,”अच्छा लवली ! हम का कह रहे थे कि आज घर जल्दी चलेंगे , रास्ते मा मोहन हलवाई को ताज़ा मिठाई बनाने का आर्डर दे देंगे और केशव पंडित से भी मिल लेंगे,,,,,,,,,,,!!”
“जी पिताजी,,,,,,,,,,,!!”,कहकर लवली बाहर चला आया और काऊंटर पर आकर अपना काम करने लगा

गुप्ता जी का घर , कानपूर
“अरे यार गोलू की अम्मा हम तुम्हाये सर की कसम खाते है , हमाओ कोनो चक्कर नाही है फुलवारी के साथ। अरे ! हम तो उनको बहिन की नजर से देखते है,,,,,,,,,,हमायी बात का विश्वास करो काहे हमाये छाती के बाल नोचने पर तुली हो ?”,कमरे के दरवाजे के बाहर खड़े गुप्ता जी ने गुप्ताइन को मनाते हुए कहा
गुप्ताइन अंदर कमरे में बिस्तर पर गिरी तकिये में मुँह छुपाये रो रही थी , आखिर इस उम्र में उन्हें गुप्ता जी के कारनामे पता चल रहे थे और ये सब जो देखना पड़ रहा था।

“अरे गुप्ताइन दरवाजा खोलो भाई,,,,,,,हमको बात तो करने दयो”,गुप्ता जी ने कहा
गुप्ताइन उठी और दरवाजा खोलकर गुस्से से कहा,”हमको आपसे कोनो बात नाही करनी है , आपसे बात तो अब हमाये शनि भैया ही करि है”
गुप्ता जी ने सुना तो उबलकर कहा,”तुम्हरे मंगल फूफा हमाओ कुछो नाही उखाड़ सके जे शनि का उखाड़ लेंगे गुप्ताइन,,,,,,,,!!!”

“जे तो आपको कल सुबह ही पता चलेगा,,,,,,,,,,!!”,गुप्ताइन ने कहा और दरवाजा गुप्ता जी के मुँह पर बंद कर दिया बेचारे गुप्ता जी अपना सा मुँह लेकर वापस सोफे पर आ बैठे। अब तक मंगल को झेल रहे थे अब शनि भी उनके जिंदगी में आने वाला था और क्या बवाल लाने वाला था ये तो वही बताएगा , अचानक से गुप्ता जी को गोलू की याद आने लगी , गोलू चाहे जैसा भी हो कम से कम ऐसी मुसीबत से उन्हें बाहर तो निकाल लेता था।
गुड्डू के कहने पर गोलू मंगल फूफा को बाहर निकालने दूकान की तरफ गया।

जैसे ही उसने दरवाजा खोलने के लिए हाथ बढ़ाया अंदर खड़े मंगल फूफा ने पहले ही दरवाजा खोला और गोलू के सामने आ गए। अचानक दरवाजा खुलने से गोलू का हाथ फिसला और वह मंगल फूफा को लेकर जा गिरा दुकान के अंदर , नीचे मंगल फूफा और ऊपर गोलू दोनों एक दूसरे की बांहो में , गोलू मंगल फूफा को ज्यादा कुछ ना बोल दे सोचकर गुड्डू उसके पीछे आया लेकिन जब उसने गोलू और मंगल फूफा को एक दूसरे की बाँहो में देखा तो उसका सर ही घूम गया और उसने कहा,”अबे गोलू ! हम तुमको इसे बाहर करने को कहे थे , आँखों में आँखे डाल के चुम्मा चाटी करने को नहीं,,,,,,,,!!!”

गोलू को होश आया उसने जब देखा की मंगल फूफा की बांहो में है तो उन्हें धकियाकर उठा और कहा,”अब का चुम्मा लेकर ही मानोगे”
गुड्डू ने गोलू की कोलर पकड़कर उसे साइड किया और कहा,”तुम का उलटे पैदा हुए थे , कोनो काम ठीक से नाही करने की कसम खायी है तुमने,,,,,,,,,,,,,कुछ नाही करोगे तुम अब जो करेंगे हम करेंगे,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू को साइड में कर गुड्डू ने मंगल फूफा की तरफ देखा और कहा,”सुनो बे परिमल”
“गुड्डू भैया मंगल , मंगल नाम है ओह्ह का , लगता है आपको भी हमाये वाली बीमारी हो गयी है,,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा

गुड्डू झुंझलाया और कहा,”हमको तो डर है गोलू साला तुम्हरे साथ रहते रहते हम गुड्डू से गोलू न बन जाए बस,,,,,,,,जे फूफा को हिया से निकालो और थोड़ी देर के लिए हमका अकेला छोड़ दयो बस,,,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू की बात सुनकर गोलू समझ गया कि अब गुड्डू का दिमाग गर्म हो चुका है और वह अब कोई बेवकूफी करके मुसीबत में पड़ना नहीं चाहता था इसलिए मंगल फूफा से बाहर चलने का इशारा किया और दरवाजा बंद कर गुड्डू को अकेला छोड़ दिया। गुड्डू पेट के बल आ गिरा और तकिये में मुँह छुपा के जो फूट फूट के रोया है इतना तो कानपूर की लड़किया अपनी विदाई में नहीं रोती,,,,,,,,,,,,,,,!!!!

( क्या यादव जी की धमकी का असर पडेगा मंगल फूफा पर या नहीं होगी इस कुत्ते की दुम सीधी ? क्या गुप्ता जी लेंगे गुप्ताइन को मनाने में गोलू की मदद ? क्या गुड्डू सम्हाल पायेगा ये सारी भसड़ ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 2” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल    

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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