Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 12

by Story With Sanjana February 4, 2026
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Manmarjiyan Season 4 – 12

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गोलू गुड्डू के पास मंगल फूफा की उलझन लेकर आया था और यहाँ आकर खुद ही उलझ गया। मंगल ने जब गुड्डू गोलू को आपस में उलझते देखा तो दोनों के पास आये और उन्हें एक दूसरे से अलग करके कहा,”अरे का कर रहे हो यार दोनों छोडो एक दूसरे को”
गोलू जो कि गुड्डू से इतनी मार खा चुका था अब कहा किसी की सुनने वाला था उसने फूफा को ही एक लात मारकर दूर फेंक दिया और गुड्डू से कहा,”गुड्डू भैया हमायी बात सुनो”


“काहे सुने हमहू तुम्हायी बात ? साले हमहू तुमसे कहे रहय कि सुबह मा जल्दी दुकान आ जाना सोनू भैया के फंक्शन का इंतजाम देखना है पर नहीं तुमको करनी है बकैती,,,,,,,,,,और जे फूफा को हिया काहे लेकर आये हो हमाये सर पर ?”,गुड्डू ने गोलू को दूर धकियाकर कहा तो गोलू नीचे जा गिरा।
गोलू उठा और अपने कपडे झाड़ते हुए गुड्डू की तरफ आकर कहा,”अरे यार गुड्डू भैया फूफा ना बेचारे बहुते परेशानी मा है पिताजी ने ना घर से निकाल दिया है इन्हे,,,,,,,,,!!!”


“तो हम का करे ब्याह कर ले इनसे ?”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा
“का गुड्डू भैया कैसी बाते कर रहे है अरे हमहू बस जे कह रहे है कि अगर आप इनके रहने का इंतजाम,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने शब्दों को चबाते हुए कहा क्योकि उसे पता था इसके बाद गुड्डू भड़कने वाला है और वही हुआ गोलू ने अपनी बात भी पूरी नहीं की थी कि गुड्डू ने कहा,”इंतजाम ! कैसा इंतजाम बे ? हमने का हिया धर्मशाला खोल रखी है,,,,,,,,,ए गोलू कान खोल कर सुन ल्यो तुम्हायी हमायी जिंदगी मा पहिले से बहुते भसड़ है तुमहू जे फूफा को बीच मा लाकर हमायी अमावस जैसी जिंदगी मा ग्रहण ना लगाओ समझे”

गोलू ने अपना सर खुजाया और गुड्डू की बाँह पकड़कर साइड में लाकर कहा,”अरे गुड्डू भैया जरा सोचो ! शादी का सीजन शुरू होने वाला है और हमको मिलेंगे टेंडर पर टेंडर तो लड़को की जरूरत पड़ेगी ना , आप चाहे तो मंगल फूफा को काम मा ले सकते हो और इनको पैसा भी नाही देना पडेगा , दो वक्त का खाना दो जोड़ी कपडे और रहने को एक छत,,,,,,,,,जरा सोचो गुड्डू भैया जरा सोचो”


गुड्डू गोलू की बातों में आ गया और सोच में पड़ गया बिना ये सोचे कि मंगल फूफा की वजह से पहले भी कितनी गड़बड़ हुई है। गुड्डू कश्मकश में था लेकिन गोलू ने वो भी दूर कर दी और गुड्डू को मना लिया। 
“अच्छा ठीक है लेकिन कोई गड़बड़ तो नहीं होगी न गोलू ?”,गुड्डू ने शकभरे स्वर में पूछा क्योकि उसे गोलू और मंगल फूफा पर जरा भी विश्वास नहीं था


“अरे चिंता काहे करते हो गुड्डू भैया , फूफा हमायी छत्र छाया में रहेंगे कोनो गड़बड़ नाही होगी”,गोलू ने कहा
“तुम्हरी छत्र छाया में रहेंगे मतलब तुम दोनों मिल के जे धंधा बंद करवा के मानोगे”,गुड्डू ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा
“अरे काहे इत्ता नेगेटिव सोच रहे हो गुड्डू भैया,,,,,,जबान दे रहे है हमहू कि फूफा कुछो गड़बड़ नही करेंगे”,गोलू ने कहा


“अच्छा और अगर गड़बड़ हुई तो ?”,गुड्डू ने पूछा
“तो फूफा के साथ साथ हमे भी लात मार देना आप,,,,,,,अब खुश , अब चलो फूफा को तसल्ली दो”,गोलू ने कहा और गुड्डू की बाँह पकड़कर मंगल की तरफ चल पड़ा

गुड्डू और गोलू मंगल फूफा के सामने आये , सफ़ेद सीमेंट से भरे मंगल फूफा बर्फ के गोले कम नहीं लग रहे थे। गुड्डू गोलू को साथ देखकर मंगल फूफा को तसल्ली मिली कि दोनों ने झगड़ा तो बंद किया।
“हाँ फूफा ! गुडू भैया के साथ सेटिंग कर दिए है आपकी”,गोलू ने अपने दोनों हाथो की उंगलियों को आपस में फंसाकर कहा  


गुड्डू ने देखा तो गोलू के सर पर एक चपत लगायी और कहा,”जे गंदे गंदे इशारे का कर रहे हो बे ? और सेटिंग से का मतलब है तुम्हरा,,,,,,,,,,,,!!
कहकर गुड्डू मंगल की तरफ पलटा और कहा,”सुनो फूफा ! हमहू आपको हिया रखने को तैयार है , सबकी तरह आपको भी काम करना होगा। टेंट लगाने से लेकर टेंट उठाने तक का काम देखना होगा कर लोगे ना,,,,,,,,,,!!”


“का बात कर रहे हो गुड्डू ! डाकू मंगल फूफा होकर हमहू टेंट उखाड़ेंगे ?”,मंगल फूफा ने भड़ककर कहा
गोलू ने सुना तो मंगल फूफा के दोनों कान पकडे और उनकी गर्दन झुलाकर कर कहा,”तो डाकू बनकर का उखाड़ लिए अब तक ? गुड्डू भैया नौकरी दे रहे है तुमको चुपचाप से करते काहे नाही ?”
“जे काम हमहू नाही करेंगे गोलू अरे हमायी भी कोनो इज्जत है,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने तुनक कर कहा

गुड्डू ने सुना तो गोलू की तरफ देखकर उसे घुरा और कहा,”देख ल्यो तुम्हाये मंगल फूफा के नखरे इनको जे काम नाही करना , टेंट लगाने के काम मा इनकी इज्जत घट रही है,,,,,,,,,,,,तो जाओ फिर HDFC बैंक मा मैनेजर लगवाय दयो जे का”


“अरे यार गुड्डू भैया आप रुकिए हम समझाते है फूफा को,,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू से कहकर गोलू मंगल फूफा को लेकर साइड में आया और दबे स्वर में कहा,”अरे यार फूफा का कर रहे हो ? अरे कित्ती मुश्किल से मनाये रहय गुड्डू भैया को और आप मना कर दे रहे है,,,,,,,,,,,,अरे मान जाईये ना आपके रहने खाने का इंतजाम हो जाएगा वरना उह्ह्ह घर मा बैठा हमारा बाप घर तो दूर मोहल्ला मा नाही घुसने देगा आपको,,,,,,,,,,

समझो हमायी बात को थोड़े दिन एडजस्ट कर लो फिर जैसे ही गुप्ता जी का गुस्सा शांत हो आ जाना घर वापस,,,,,,,,,,,आपको कौनसा जिंदगीभर टेंट गाड़ना उखाड़ना है ? नई,,,,,,,,,,,,,मान जाओ यार इत्ता तो कबो पिंकिया को नाही मनाये हमहू,,,,,,,,,,,,!!”
मंगल फूफा उलझन में पड़ गए और फिर मजबूर होकर उन्होंने हामी भर दी। गोलू ख़ुशी ख़ुशी उन्हें लेकर गुड्डू भैया के सामने आया और कहा,”गुड्डू भैया फूफा मान गए है,,,,,,,अब बताओ का करना है ?”


“फूफा को रवि के साथ भेजो सोनू भैया के हिया लोडिंग का सामान उतरवा के आने में उसकी मदद करेंगे”,गुड्डू ने कहा
“हम नाही जायेंगे”,फूफा ने मुँह बनाकर कहा
“अब का हो गवा ?”,गोलू चिल्लाया
“अरे हमको एक ठो चाय चाहिए भाई सुबह से कुछो खाया पीया नाही है”,फूफा ने रोआँसा होकर कहा
“बात तो सही है,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने फूफा को देखकर कहा


गुड्डू ने गोलू के सर पर एक चपत लगाई और कहा,”का बात सही है बे ? जे चाय पानी का पइसा कौन भरेगा तुम्हाये पिताजी ?”
“अरे उह्ह्ह आदमी तो हमाये मरने पर कफ़न पैसा खर्च न करे उह्ह कहा से भरेगा चाय पानी का पइसा , अभी पिला दीजिये बाद मा एडजस्ट कर लेंगे,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
गुड्डू समझ गया कि बिना चाय पिए ये लोग मानेंगे नहीं इसलिए चाय वाले की तरफ बढ़ गया। गोलू और मंगल फूफा भी उस तरफ चल पड़े। चलते चलते मंगल फूफा ने गोलू से कहा,”चाय बोल ही रहे हो तो गुड्डू से कहो एक ठो बिस्कुट भी बोल दे”


“गद्दा भी लगवा दे तुम्हाये लिए फूफा , एक दिन हुआ नहीं काम पर आये और ये चाहिए वो चाहिए,,,,,,,,,,ठीक है बोलते है”,गोलू ने मंगल फूफा से कहा और फिर गुड्डू की तरफ देखकर चिल्लाया,”गुड्डू भैया एक ठो बिस्कुट भी,,,,,,,,,!!!”


गुड्डू एक तो पहले ही परेशान था अब गोलू ये मंगल फूफा नाम की परेशानी अपने साथ और ले आया लेकिन बेचारा क्या कर सकता था ? गोलू भी तो इस बिजनेस में 50 परसेंट का पार्टनर जो था। गोलू और मंगल फूफा बेंच पर आकर बैठे गुड्डू ने उनके सामने दो गिलास चाय और दो डिब्बे बिस्कुट रखे और कहा,”ल्यो ठूस ल्यो”  

गोलू ने सर उठाकर गुड्डू को देखा और कहा,”और कुछ है ?”
“हमाये प्राण है कहो तो निकालकर दे दे,,,,,,,,,,,अबे खाओ और चलो हमाये साथ का फंक्शन खत्म होने के बाद लगाओगे सोनू भैया के हिया टेंट ?”,गुड्डू ने पहले प्यार से कहा और फिर चिल्लाया तो गोलू चुपचाप चाय में बिस्कुट डुबोकर खाने लगा और मंगल फूफा तो अपनी चाय और बिस्कुट लेकर दोनों से दूर जा बैठे।

मिश्रा जी का शोरूम , कानपूर
लवली कुछ पेपर लेकर मिश्रा जी के केबिन में आया और कहा,”पिताजी जे चारो आर्डर का माल निकलवाकर हमने लड़को से पैक करने को कह दिया है। सब एंट्री अकाउंट्स में हो चुकी है और हमने सबके बिल तैयार करके मैनेजर साहब को दे दिए है। आर्डर डिलीवरी के टाइम वे साथ में भेज देंगे”


मिश्रा जी ने सुना तो खुश भी हुए और हैरान भी पहले ही दिन लवली ने उनके शोरूम के काम को कितनी जल्दी सीख लिया और वही एक गुड्डू था जिसे इस शोरूम और शोरूम के काम में कोई दिलचस्पी नहीं थी उलटा मिश्रा जी के डर से वह जब भी यहाँ आता था कोई ना कोई गड़बड़ जरूर करता था। मिश्रा जी अपनी कुर्सी से उठे और और लवली के पास चले आये। उन्होंने लवली के हाथ से पेपर लिए और उन्हें देखकर टेबल पर रख दिया।
मिश्रा जी लवली की बाँह पकड़कर उसे अपनी कुर्सी की तरफ लेकर आये और कहा,”बैठो,,,,,,,,,,,,!!!”


लवली ने सूना तो हैरानी से मिश्रा जी को देखने लगा , उसे वो पल याद आया जब एक बार वह गुड्डू बनकर यहाँ आया था और मिश्रा जी कि इस कुर्सी पर बहुत ही बेशर्मी के साथ बैठा था लेकिन आज मिश्रा जी खुद उसे यहाँ बैठने को कह रहे थे।
“जे आप का कर रहे है पिताजी ? जे आपकी जगह है हम हिया कैसे बैठ सकते है”,लवली ने कहा
“अरे बैठो बेटा ! हमरे बाद इह शोरूम की जिम्मेदारी तुमको ही सम्हालनी है , हमरे बाद भी तुमको हिया बैठना ही है तो हमरे सामने काहे नाही ? बइठो”,कहते हुए मिश्रा जी ने खुद ही लवली को अपनी जगह अपनी कुर्सी पर बैठा दिया।

पहली बार जब लवली इस कुर्सी पर बैठा था तब घमंड में चूर था और मिश्रा जी से बदला लेने की आग में जल रहा था लेकिन आज इस कुर्सी पर बैठकर लवली को जिम्मेदारी का अहसास हो रहा था जैसे मिश्रा जी ने उसके सर पर कोई बहुत बड़ी जिम्मेदारी डाल दी हो। मिश्रा जी बगल में पड़ी कुर्सी पर आ बैठे और कहा,”हमहू हमेशा से चाहते थे कि हमरे बाद हमरा बेटा जे कुर्सी पर बैठे , गुड्डू को कितनी बार हिया काम सीखने बुलाया , कभी प्यार से तो कभी डाँटकर लेकिन ओह्ह का कबो जे काम मा दिल था ही नहीं उसे तो अपना ही कुछो करना था,,,,,,,,

पर आज तुमको जे कुर्सी पर बैठे देखकर हमको बहुते अच्छा लग रहा है बेटा ,, अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाना और कबो कोनो मुसीबत आये तो डटकर ओह्ह का सामना करना कबो पीछे नाही हटना”
लवली ने महसूस किया कि मिश्रा जी के मन में उसे लेकर कितना प्यार और कितना विश्वास था , रामनगर की पहाड़ी से लौटने के बाद से मिश्रा जी ने कभी उसमे और गुड्डू में भेदभाव नहीं किया।

लवली अपनी जगह से उठा और मिश्रा जी की तरफ आकर कहा,”पिताजी ! आप हम पर बहुते बड़ी जिम्मेदारी डाल रहे है हमहू वादा करते है कबो आपको शिकायत का मौका नाही देंगे , जैसे अब तक आपने जे शहर मा अपने नाम को बनाये रखा वैसे ही हमहू भी पूरी कोशिश करेंगे कि आपका नाम और मान सम्मान बना रहे और लोग हमे आपके नाम से जाने,,,,,,,,,जब तक आप है पिताजी इह कुर्सी पर हमरा नहीं आपका हक़ है और जे हक़ हमहू आपसे कबो नाही छीनेंगे,,,,,,,,,,,,,,,आईये हिया बैठिये”


मिश्रा जी ने सुना तो मुस्कुरा उठे , इस बार लवली उनकी उम्मीद और विश्वास पर खरा उतरा। मिश्रा जी अपनी कुर्सी पर आ बैठे और लवली सामने पड़ी कुर्सी पर आ बैठा और मिश्रा जी को आर्डर की जानकारी देने लगा। दोनों बाप बेटा मिलकर अपने शोरूम को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने लगे।

चाय नाश्ते के बाद गुड्डू गोलू और मंगल फूफा ने अपनी हालत सुधारी और दूकान से बाहर चले आये। गुड्डू ने लड़को से कहकर पिकअप में डेकोरेशन और टेंट का सामान लोड़ करवाया और मंगल फूफा पिकअप में जाने को कहा। गुड्डू ने ड्राइवर को सोनू भैया की फंक्शन लोकेशन का एड्रेस दिया और चलने को कहा।
“तुमहू टेंशन नाही ल्यो गुड्डू देखना हमहू सब सम्हाल लेंगे”,मंगल फूफा ने खिड़की से गर्दन निकालकर कहा
“पहिले हुआ पहुंचो तो सही हमहू गोलू को लेकर आते है”,गुड्डू ने कहा और देखते ही देखते पिकअप आँखों से ओझल हो गयी।


पिकअप जाने के बाद गुड्डू गोलू की तरफ पलटा और कहा,”का लगता है गोलू मंगलवा सम्हाल पायेगा”
गोलू ने अपने गले को चुटकी में पकड़ा और कहा,”माँ कसम गुड्डू भैया , इह बार बहुते सही इंसान पकड़ के लाये है हमहू आपके लिए , मंगलवा बिछ जाएगा लेकिन गड़बड़ नाही करेगा”
गोलू ने इतना ही कहा कि ऊपर तार पर बैठे कबूतर ने उसके मुँह पर बीट कर दी और गोलू का मुँह बन गया ये देखकर गुड्डू ने कहा,”देखो ! कबूतर को भी तुम्हरी बात पसंद नाही आयी,,,,,,,,,,,!!!”


“जे भी गज्जू गुप्ता के खानदान से ही होगा”,गोलू ने अपना गाल साफ करके कहा
“काहे ?”,गुड्डू ने पूछा
“अरे तो गज्जू गुप्ता को भी हमायी बात कहा समझ आती है ?”,गोलू ने चिढ़कर कहा
“कुछ नहीं हो सकता तुम्हरा आओ चले,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा और अपनी बाइक की तरफ बढ़ गया।
गोलू ने सर उठाकर कबूतर को देखा और कहा,”हगने के लिए और कोनो जगह नाही मिली ? अभी जल्दी मा है वरना बताते तुमको,,,,,,,,,,!!”


गोलू का इतना कहना था कि कबूतर के बगल में बैठे दूसरे कबूतर ने भी बीट की और वो सीधा गोलू के दूसरे गाल पर आ पड़ी तो गोलू गुस्से से चिल्लाया,”अबे तो का पुरे खानदान से हगवाओगे हम पे,,,,,,,,,साला किसी दिन जे तार ही काट देंगे हमहू फिर देखते है कहा बैठ के हगते हो तुम लोग”
गोलू सरकारी तार को काटने की बात कर रहा था कि तभी उसके सामने से हवलदार गुजरा और कहा,”का बे ? सरकारी चीजों को नुकसान पहुंचाने की बाते कर रहे हो ? जेल की हवा खिलाये का तुमको ?”


“जे कबूतर कब से सरकारी हो गए बे ?”,गोलू ने तुनककर कहा
“हमहू तार की बात कर रहे है,,,,,,,,,,,,तार काटने वाले थे तुमहू , हमहू भी देखे जरा कैसे काटते हो ?”,हवलदार ने अकड़कर कहा
गोलू ने सुना तो उसकी सिट्टी पिट्टी गुम कहे तो कहे क्या , करे तो करे क्या ? गुड्डू ने देखा गोलू वही खड़ा है तो वापस आया और कहा,”अरे हवलदार साहब इह बेचारा तो अचार काटने की बात कर रहा था”

गर्मियां आने वाली है तो घरवाली के लिए अचार बनाएगा केरी का,,,,,,,वही काटने की बात कर रहा था”
“अच्छा अच्छा बने तो एक आध किलो हमाये हिया भी भिजवा देना”,हवलदार ने कहा
“एक आध किलो का पूरा डिब्बा ही भेज देंगे हवलदार साहब अभी हम जाए का है बाजार से केरी भी तो लेनी है”,गुड्डू ने कहा
“ठीक है ठीक है जाओ”,हवलदार ने कहा और चाय की दूकान की तरफ बढ़ गया


गुड्डू गोलू को लेकर बाइक के पास आया और जैसे ही गोलू ने बोलने के लिए मुँह खोला गुड्डू ने पलटकर उसके सामने हाथ जोड़े और कहा,”ओह्ह्ह भाई गोलू हमहू तुम्हाये आगे हाथ जोड़ते है भाई कुछो ना ही बोलो तुम,,,,,,,,,,,एक दिन मा इत्ती बकैती हमहू नाही झेल पाए है,,,,,,,,,,,,चुप रहो”
गोलू ने मुँह बनाया और दूसरी तरफ देखने लगा। गुड्डू बाइक पर बैठा और चाबी घुमाकर बाइक को जैसे ही स्टार्ट किया बाइक नहीं चालू हुई , गुड्डू ने दो तीन बार कोशिश की नहीं चली , गुड्डू ने किक मारी नहीं चली , जो कर सकता था सब किया नहीं चली

गुड्डू बाइक से नीचे उतरा और देखा पीछे वाला टायर पंचर है तो उसने गुस्से से गोलू को देखा और कहा,”का मुँह मा दही जमाय लिए हो , बताते काहे नाही टायर पंचर है”
गोलू ने सुना तो गुड्डू को देखकर मुस्कुराया और फिर एकदम से चेहरे पर गंभीर भाव लाया और इशारो इशारो में गुड्डू को बताया कि गुड्डू ने ही उसे बोलने से मना किया था। गुड्डू ने देखा तो उसका दिल किया या तो वह गोलू को किसी गाडी के पहिये के नीचे दे दे या खुद किसी गाड़ी के पहिये के नीचे आ जाये।

( क्या लवली निभा पायेगा मिश्रा जी के शोरूम की जिम्मेदारियां या आगे जाकर हो जायेगा गुड्डू की तरह लापरवाह ? क्या मंगल फूफा सही सलामत पहुंचा पाएंगे पिकअप का सामान ? क्या कभी खत्म हो पायेगी गुड्डू और गोलू की ये नोकझोंक ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ Season 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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