Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 17

by Story With Sanjana February 16, 2026
written by Story With Sanjana February 16, 2026 0 comments
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Manmarjiyan Season 4 – 17

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

मंगल फूफा को तो गुप्ता जी घर से पहले ही निकाल चुके थे अब उनके चक्कर में गोलू का सामान भी उन्होंने बाहर फेंक दिया। गुप्ता जी अंदर चले गए और दरवाजा गुड्डू गोलू के मुँह पर बंद कर दिया। गुड्डू ने मायूसी से दरवाजे को देखा और फिर गोलू की तरफ देखकर कहा ,”अब , अब कहा जाओगे तुम ? कित्ती बार कहे है गोलू जे सब पचड़ो में ना पड़ा करो तुम , तुम्हरी दया का उलटा असर हुआ न तुम पे,,,,,,,,,,,साला उह्ह्ह मंगलवा के चक्कर मा घर से तो निकाले गए ही साथ ही साथ तुम्हाये बाप की नजर मा हमायी भी कोनो इज्जत नाही बची”

“कहा जायेंगे गुड्डू भैया ? आप है ना हमहू आपके साथ रहेंगे”, गोलू ने नीचे गिरा अपना बैग उठाकर मासूमियत से कहा
गुड्डू ने सुना तो घूरकर गोलू को देखा और कहा,”हमाये साथ काहे रहोगे बे , तुम का हमायी लुगाई हो ?”
गोलू ने सुना तो हंसा और कहा,”अरे नहीं नहीं गुड्डू आपके साथ से हमरा मतलब है आपके घर मा , उह्ह्ह भी बस तब तक जब तक गज्जू गुप्ता ना मान जाए”

“हमाओ घर कोनो धर्मशाला है गोलू और तुमको वहा साथ रखे ना तो पिताजी तुम्हरे चक्कर मा हमको भी हुआ से निकाल देंगे,,,,,,,,,,,नाही नाही हमहू अपने साथ नाही रखेंगे तुमको”,गुड्डू ने कहा
“बस क्या गुड्डू भैया ! हमरी दोस्ती का जे सिला दिया हमको , अरे हमहू का का नाही किये रहय आपके लिए , कित्ती मार खाये रहय आपके लिए ,

अरे हमहू आपसे उत्ता ही पियार करते है जित्ता हनुमान जी राम जी से किये रहय ! हाँ ! उह्ह्ह बात और है हमहू सीना चिर के नाही दिखाय सकते और आप कह रहे है आप हमे अपने साथ नाही रखेंगे,,,,,,,,,,,,वाह गुड्डू भैया वाह का रंग बदला है आपने”,गोलू ने ताली बजाकर कहा

गुड्डू ने देखा गोलू फिर नौटंकी करने लगा है तो वह उसके पास आया और उसकी गर्दन दबोचकर उसे वहा से ले जाते हुए कहा,”पहिले निकलो हिया से पता चले गज्जू गुप्ता अंदर लट्ठ धरे हो हमाये तुम्हाये लिए,,,,,,,,,दुकान चलो वही बैठकर सोचते है का करना है ?”
गोलू ने अपने बनावटी आँसू पोछे और मुस्कुराते हुए गुड्डू के साथ चल पड़ा।

 गुड्डू गोलू की दुकान के बाहर बेंच पर पेट के बल लेटे मंगल फूफा फुलवारी के ख्यालो खोये मिटटी पर बड़े प्यार से अपना और फुलवारी का नाम लिखते और फिर मिटा देते , फिर लिखते और फिर मिटा देते हालाँकि उनको इस बात का ना डर था ना ही खौफ की कुछ देर पहले वो कितना बड़ा कांड करके आये है।

गुड्डू और गोलू अपनी दूकान पहुंचे। सामान लादने वाली गाड़ी गोलू लेकर आया और गुड्डू मिश्रा जी की गाड़ी लेकर वहा पहुंचा। गुड्डू तो मिश्रा जी की गाड़ी साइड में लगाने लगा लेकिन गोलू में इतना सब्र कहा , उसने पिकअप को बीच में ही खड़ा किया और गुस्से से मंगल फूफा की तरफ बढ़ा। मंगल फूफा फुलवारी के ख्यालो में इतना खोये हुए थे कि उन्हें गोलू के आने का अहसास भी नहीं हुआ।

गोलू मंगल के पास आया और खींचकर एक लात मारी उनके पीछे और मंगल फूफा बेंच से लुढ़ककर नीचे जा गिरे। नीचे गिरे मंगल फूफा ने जैसे ही गोलू को वहा देखा तो उन्हें कुछ देर पहले किया अपना कांड याद आ गया। गोलू ने झुककर अपनी चप्पल निकाली और गुस्से से कहा,”साले मंगलू ! आज तो हमहू तुमको छोड़ेंगे नाही , 4 फुट से तुमको 2 नहीं किया ना तो हमरा नाम भी गोलू गुप्ता नाही,,,,,,,,,,!!”

गोलू चप्पल हाथ में उठाये जैसे ही मंगल की तरफ बढ़ा मंगल फूफा उठे और भागे। आगे मंगल और पीछे चप्पल हाथ में उठाये गोलू , दोनों यहाँ से वहा भाग रहे थे। गुड्डू गाड़ी साइड में लगाकर आया तो गोलू को मंगल के पीछे भागते देखकर अपना सर पीट लिया और बड़बड़ाया,”जे ससुरा गोलू आखिर चाहता का है ? अबे बैठ के बात कर ल्यो महाराज”
गुड्डू पहले बड़बड़ाया और फिर गोलू की तरफ देखकर चिल्लाया

गोलू ने सुना तो भागते भागते गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”बैठकर बात तो अब तो जे मंगलू की बैठकर मा ही करेंगे गुड्डू भैया , जे के चक्कर मा मार खाये हम , जे के चक्कर मा मोहल्ला मा छीछा लेदर करवाए हम , जे के चक्कर मा साला घर से निकाले गए हम , आज तो हमहू जे डाकू की औलाद को छोड़ेंगे नाही गुड्डू भैया ! साला घंटा के डाकू है , शादीशुदा औरत पर बुरी नजर डालते है,,,,,,,,,,!!!”
“अरे हमहू प्रेम करते है ओह्ह्ह से,,,,,,,!!”,गोलू के आगे भागते मंगल फूफा ने कहा

“तुम्हरे प्रेम की बत्ती बनाकर तुम्हाये गले मा घुसेड़ देंगे हम समझे,,,,,,,,तुमको कोनो और नाही मिली शादीशुदा औरत से प्रेम का मतलब ही है बर्बादी,,,,,,आज हमहू तुमको छोड़ेंगे नाही फूफा , तुमको मारेंगे और मार के जेल चले जायेंगे लेकिन तुम्हरा मर्डर पक्का समझो,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने गुस्से से कहा
मंगल फूफा भागते भागते गुड्डू के सामने चले आये तो गोलू चिल्लाया,”ए गुड्डू भैया ! पकड़ो ससुरे को छोड़ना नाही”

गुड्डू ने मंगल को जाने नहीं दिया तो मंगल गुड्डू के आगे खड़े होकर इधर उधर बचने का रास्ता देखने लगा तभी गोलू ने हाथ में पकड़ा चप्पल खींचकर मंगल की तरफ फेंका और मंगल साइड हो गया। चप्पल आकर लगा सीधा गुड्डू के मुँह पर , गुड्डू ने गुस्से से गोलू को देखा और कहा,”गोलूउउउउउउ ! तुमको छोड़ेंगे नहीं हम”
कहते हुए गुड्डू ने नीचे गिरी गोलू की चप्पल को उठाया और उसके पीछे भागा। अब गोलू आगे और गुड्डू उसके पीछे , कुछ देर पहले मंगल फूफा गोलू से रिक्वेस्ट कर रहा था अब गोलू कर रहा था।

गुड्डू ने भागते हुए चप्पल फेंका और चप्पल जाकर लगा सीधा गोलू की पीठ पर , बेचारा गोलू कुछ पल के लिए दर्द से बिलबिला उठा। गुड्डू उसके पास आया और कहा,”किसने कहा तुमको आते ही जानवरो की तरह टूट पड़ो उन पर , बैठकर बात कर सकते थे ना उनसे और पहिले पता तो कर ल्यो आखिर सच है का ? पर नहीं नाली में लौटने वाले सूअर की तरह कीचड़ देखा नाही कि कूद पड़े”

गोलू ने सुना तो गुस्से से गुड्डू की तरफ देखा लेकिन गुड्डू से कुछ कहने का मतलब था दुसरा चप्पल भी खाना,,,,,,,,गोलू ने चुप रहना ही बेहतर समझा , गोलू को चुप देखकर गुड्डू ने कहा,”का हुआ ज्यादा जोर से लगी का , अच्छा सॉरी पर तुमहू भी ना यार हद करते हो गोलू,,,,,,,,चलो अब गुस्सा थूक दयो”
गुड्डू गोलू से बचने के लिए मंगल फूफा पिकअप के पीछे जा छुपे , रवि ने उन्हें देखा और गुड्डू को आवाज दी,”गुड्डू भैया ! जे रहे मंगल”

“ज़रा ओह्ह्ह का हिया लेकर आओ हमहू अभी अमंगल करते है ओह्ह्ह का”,गोलू ने गुस्से से कहा
“गोलू शांत हो जाओ,,,,,,,,,,,हम बात करते है”,कहकर गुड्डू ने गोलू को वही रुकने को कहा और खुद पिकअप की तरफ चले आये।

गुड्डू मंगल के सामने आये और कहा,”हमने आपको गोलू के कहने पर काम पर रखा और पहिले ही दिन आप इत्तो बड़ो काण्ड कर देओ , हमका जे बताओ जब हमहू आपको लड़के के साथ सोनू भैया के फंक्शन मा भेजे रहे तो आप हुआ पटकापुर मा का कर रहे थे ?”
“अरे गुड्डू हमहू समझाते है,,,,,,,,उह्ह्ह लड़के के साथ बातों बातों मा बहस हुई , उह्ह्ह मानने को तैयार ही नहीं था कि हमायी भी कोनो गर्लफ्रेंड है बस वही दिखाने पटकापुर लेकर गए रहय ओह्ह्ह का पर हुआ साला उह्ह गुप्ता जी मिल गए तो भागना पड़ा हमको”,मंगल फूफा ने मुँह बनाकर कहा

गुड्डू ने सुना तो दाँत पीसते हुए कहा,”उह्ह्ह फुलवारी आपकी गर्लफ्रेंड कब से हो गयी ? और काम के बख्त काम होता है रंगबाजी नहीं,,,,,,,,,,,!!”
“तुम जिसको रंगबाजी कह रहे हो उह्ह्ह हमारा पहला और सच्चा पियार है गुडडु,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने अपना हाथ सीने पर मारकर कहा
“मतलब आप फुलवारी का चक्कर नाही छोड़ेंगे ?”,गुड्डू ने हताश होकर कहा

सवाल ही पैदा नाहीं होता , आखरी साँस तक पियार करेंगे ओह्ह्ह से , तुमको कोनो डाउट है ?”,मंगल फूफा ने चौड़ में आकर कहा
गुड्डू ने गोलू की तरफ देखा और रोआँसा होकर कहा,”ए गोलू ! ए यार मारो इनको , साला जे ना सुधरे है”
गोलू तो बस इसी इंतजार में था जैसे ही गुड्डू ने कहा वह आकर मंगल फूफा पर टूट पड़ा और तबियत से उसकी सुताई करके गुड्डू की तरफ चला आया। कुछ देर बाद टूटे फूटे मंगल फूफा पिकअप के पीछे से बाहर आये। मुँह लाल , बाल उलझे , एक आँख काली और कुर्ता फटा हुआ।

वे लंगड़ाते हुए गुड्डू गोलू की तरफ चलकर आये और गोलू से कहा,”गुड्डू का तो समझ आता है पर तुमहू हमको काहे मारे ? तुम्हरी अम्मा के रिश्तेदार रहे हम हमको इत्ता काहे तोड़े बे ?”
गोलू ने सुना तो घूरकर मंगल फूफा को देखा और कहा,”रिश्तेदार नाही तुमहू अत्याचार हो फूफा जबसे हम सबकी जिंदगी मा आये हो चरस बो दी है। नाम मंगल है लेकिन जहा भी जाओगे अमंगल ही करोगे,,,,,,,,,,,,और हमायी तो जो फील्डिंग सेट हुई है तुम्हाये कारण साला पिताजी ने घर से ही बाहर कर दिया हमको,,,,,,,,,,,!!!”

मंगल फूफा ने सुना तो पहले उन्हें अफ़सोस हुआ और अगले ही पल उन्होंने थोड़ा खुश होकर कहा,”अरे तो कोई बात नाही हम दोनों हिया दुकान मा साथ मा रह लेंगे ना , बहुते जगह है अंदर,,,,,,,,,,!!”
गुड्डू ने सुना तो मंगल की तरफ पलटा और कहा,”ओह्ह्ह्ह मंगल 420 , साले दुकान के अंदर का हमायी दूकान के आस पास भी दिखाई दिए ना तो इत्ता मार मारेंगे ना मंगल से दंगल बना देंगे समझे,,,,,,,,,,,तुमको काम पे रख के एक गलती पहिले ही कर चुके है हम,,,,,,,,,,,!!”

मंगल फूफा ने सुना तो मायूसी से गोलू को देखा और गोलू ने चिढ़कर कहा,”हमे का देख रहे हो , उठाओ अपना बोरिया बिस्तर और भाग जाओ वापस ओही जंगलो मा जहा डाकू थे , चलिए गुड्डू भैया”
गुड्डू गोलू के साथ वहा से चला गया और मंगल फूफा उदास से उन्हें जाते देखते रहे।

गुड्डू का ये सब ड्रामा देखकर सर दुखने लगा तो वह गोलू के साथ निर्मल चाय वाले की तरफ चला आया। उसने दो चाय देने को कहा और बेंच पर आ बैठा। गोलू भी उसके बगल में आ बैठा और कहा,”हम का कह रहे थे गुड्डू भैया,,,,,,,,,,,,,,!!!”

गुड्डू मंगल फूफा की वजह से पहले ही चिढ़ा हुआ था गोलू की बात सुनकर उसकी तरफ देखा और कहा,”कुछो नाही कहोगे तुम , शांति से चाय पीने दो हमको फिर सोचेंगे आगे का करना है ,, साला जे सब चक्करो मा ना काम पर ध्यान दे पा रहे है ना शगुन को बख्त दे पा रहे है,,,,,,,,,,,,माँ बनने वाली है उह्ह्ह लेकिन हमरे पास इत्ता बख्त भी नाही कि दो पल ओह्ह्ह के साथ बैठे और हाल चाल ले ओह्ह्ह का,,,,,,,,,,,,,!!!!”

गुड्डू की बात सुनकर गोलू को पिंकी की याद आयी , पिंकी भी तो 6 महीना पेट से चल रही थी और गोलू भी उस पर ध्यान कहा दे पा रहा था। बीते कुछ दिनों में तो वह पिंकी को वक्त देना तो दूर उस से ठीक से बात भी नहीं कर पाया था।
“बात तो आपकी सही है गुड्डू भैया ! जे भागमभाग के चलते आप और हम दोनों ही अपनी घरवाली को बख्त नाही दे पा रहे लेकिन हम का करे हमायी किस्मत ही ऐसी है , साला जब भी कुछो सही करने जाते है उलटा हो जाता है,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने मायूसी से कहा

“उलटा तुम्हरी हीरोगिरी के चक्कर मा होता है गोलू , तुमको जो हर मसले मा अपनी टाँग जो घुसानी होती है,,,,,,,,,अगर तुम ये करना छोड़ दो ना तो सब सही हो जाये पर नाही जब तक गज्जू गुप्ता से दुइ थप्पड़ और चार गाली नाही खा लो तब तक चैन कहा आता है तुमको और अब तो हद हो गयी बाहिर वालो से भी मार खाने लगे हो तुम,,,,,,,,,कब सुधरोगे यार गोलू ?”,गुड्डू ने मायूस होकर कहा
“अरे यार गुड्डू भैया ! आप तो ऐसे कह रहे है जैसे हम जान बुझकर जे सब कर रहे है,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा

गुड्डू कुछ कहता इस से पहले लड़का उनके लिए चाय ले आया। गुड्डू ने चाय ली और जैसे ही गर्दन घुमाई नजर कुछ ही दूर खड़े मंगल फूफा पर पड़ी जो कि उदास बैठे अपने चेहरे पर लगी चोट को छूकर देख रहे थे। उन्हें ऐसे देखकर गुड्डू को अच्छा नहीं लगा तो उसने लड़के से कहा,”एक ठो चाय उनको भी देइ दयो”
गोलू ने सुना तो गुड्डू की तरफ देखा और थोड़ा गुस्से से कहा,”अभी आप हमसे कह रहे थे कि हमहू सुधर जाए , अभी आप खुद साँप को दूध पिलाय रहे है”

“तुम्हरी अम्मा का रिश्तेदार है उह्ह्ह , कोनो सांप नाही”,गुड्डू ने गोलू के सर पर एक चपत लगाकर कहा
 गोलू ने चाय का एक घूंठ भरा और कहा,”आधे से जियादा रिश्तेदार साँप ही होते है गुड्डू भैया,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने सुना तो फीका सा मुस्कुराया और सामने देखते हुए चाय पीने लगा। गोलू की बात में कितनी सच्चाई थी ये तो बस गोलू ही जानता था लेकिन गुड्डू का दिल सच में मक्खन ही था वरना मंगल फूफा के इतने बड़े कांड के बाद भी उसे माफ़ कर देना शायद ही गोलू कर पाए।

गुड्डू और गोलू चुपचाप बैठकर अपनी चाय पीते रहे और फिर गुड्डू ने चाय के पैसे दिए और मंगल फूफा की तरफ चले आये। मंगल फूफा ने गुड्डू गोलू को देखा तो बेचारे उठे और उन्हें देखने लगे।
“इत्ती मासूम शक्ल लेकर इत्ते बड़े कांड कैसे कर लेते हो यार फूफा ?”,गोलू ने कहा
मंगल फूफा ने सुना तो कुछ नहीं कहा और वहा से जाने से लिए आगे बढ़ गए।

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संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4
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मंगल फूफा को तो गुप्ता जी घर से पहले ही निकाल चुके थे अब उनके चक्कर में गोलू का सामान भी उन्होंने बाहर फेंक दिया। गुप्ता जी अंदर चले गए और दरवाजा गुड्डू गोलू के मुँह पर बंद कर दिया। गुड्डू ने मायूसी से दरवाजे को देखा और फिर गोलू की तरफ देखकर कहा ,”अब , अब कहा जाओगे तुम ? कित्ती बार कहे है गोलू जे सब पचड़ो में ना पड़ा करो तुम , तुम्हरी दया का उलटा असर हुआ न तुम पे,,,,,,,,,,,साला उह्ह्ह मंगलवा के चक्कर मा घर से तो निकाले गए ही साथ ही साथ तुम्हाये बाप की नजर मा हमायी भी कोनो इज्जत नाही बची”

मंगल फूफा को तो गुप्ता जी घर से पहले ही निकाल चुके थे अब उनके चक्कर में गोलू का सामान भी उन्होंने बाहर फेंक दिया। गुप्ता जी अंदर चले गए और दरवाजा गुड्डू गोलू के मुँह पर बंद कर दिया। गुड्डू ने मायूसी से दरवाजे को देखा और फिर गोलू की तरफ देखकर कहा ,”अब , अब कहा जाओगे तुम ? कित्ती बार कहे है गोलू जे सब पचड़ो में ना पड़ा करो तुम , तुम्हरी दया का उलटा असर हुआ न तुम पे,,,,,,,,,,,साला उह्ह्ह मंगलवा के चक्कर मा घर से तो निकाले गए ही साथ ही साथ तुम्हाये बाप की नजर मा हमायी भी कोनो इज्जत नाही बची”

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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