Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 22

by Story With Sanjana February 24, 2026
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Manmarjiyan Season 4 – 22

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

लवली फोन कान से लगाये खड़ा था , उसकी आँखों में आँसू थे जब उसे पता चला कि फोन के उस तरफ बिंदिया है। वह बिंदिया से कुछ कहता या उस से कुछ पूछ पाता इस से पहले मिश्रा जी लवली के पास आये और कहा,”लवली ! हम जे कह रहे थे कि,,,,,,,,,,,,,,का किसी से बात कर रहे हो , हम बाद में आये का ?”
”नहीं पिताजी ! कहिये ना”,लवली ने जल्दी से फोन काटकर जेब में रखते हुए कहा

“अरे वो हम जे कह रहे थे कि कल शाम मा शगुन के घरवाले आ जायेंगे , दुइ दिन हिया रुके है तो उनके रहने का इंतजाम करना था। अभी गुड्डू से कुछ कहेंगे तो उह्ह्ह चिढ जाएगा का है कि कल शाम मा उसको सोनू के हिया कोनो फंक्शन देखना है तो बिटवा हम जे कह रहे तुम कल शोरूम से जल्दी घर आ जाना तो सारा बंदोबस्त मिलकर कर लेंगे,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने कहा
“आप चिंता नाही कीजिये हम सब देख लेंगे बस आप बताईये कितने लोग आ रहे है और का का सुविधा चाहिए ?”,लवली ने कहा

“कल सुबह गुप्ता जी घर से निकलने से पहिले फोन करके बताएँगे तब हम तुम्हे बता देंगे”,मिश्रा जी ने कहा
“हम्म्म ठीक है,,,,,,,;अभी हम जाये ?”,लवली ने कहा
“हाँ हाँ ! तुम अपने कमरे मा जाकर आराम करो,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने लवली की बाँह थपथपाकर कहा
लवली सीढ़ियों की तरफ बढ़ गया और ऊपर अपने कमरे में चला आया। कमरे में आकर लवली ने एक बार फिर मनोज का नंबर डायल किया।

दो चार रिंग जाने के बाद मनोज ने फोन उठाया तो लवली ने जल्दबाजी में कहा,”हेलो बिंदिया ! बिंदिया हम लवली बात कर रहे है , तुम तुम कहा हो और तुम ठीक हो न बिंदिया,,,,,,,,,बिंदिया चुप काहे हो बोलती काहे नहीं , हमसे नाराज हो का ?”
“गुड्डू भैया हम मनोज बात कर रहे है , आपने फोन काट दिया तो बिंदिया हिया से चली उसके पिताजी आये थे डाँटते हुए ले गए उसे हिया से,,,,,,,!!”,मनोज ने कहा  

 लवली ने जैसे ही सुना गुस्से और हैरानी से उसकी भँवे तन गयी। मंगेश तो जेल में था फिर वह बिंदिया के पास कैसे पंहुचा ? लवली ने थोड़ा गुस्से से लेकिन थोड़ा धीमे स्वर में कहा,”मंगेश हुआ कैसे पहुंचा और बिंदिया , बिंदिया तुम्हाये पास काहे आयी थी ? कुछो कहा उसने तुमसे”

“नहीं भैया कहा तो कुछ नहीं बस बहुते परेशान और जल्दबाजी मा थी , हमसे कहा आपसे बात करवाने को तो हमने फोन लगा दिया,,,,,,,,,भैया हमको तो हिया मामला कुछो गड़बड़ लग रहा है,,,,,,,आप भी कानपूर के ही होकर रह गए हिया आकर देखा तक नहीं”,मनोज ने शिकायती लहजे में कहा
किसी अनहोनी के डर से लवली का दिल धड़कने लगा और उसने कहा,”मनोज हमायी बात सुनो ! कल सुबह जाओ बिंदिया के घर और हमका बताओ का हुआ है ? हो सके तो बिंदिया से हमायी बात भी करवाना , हम जल्दी ही चकिया आने का ट्राय करते है”

“ठीक है भैया हम सुबह चले जायेंगे,,,,,,,,अभी रखते है”,मनोज ने कहा
“हम्म्म ठीक है”,लवली ने कहा और फोन काट दिया। उसने फोन साइड में बिस्तर पर रखा और सोच में पड़ गया। पहला ख्याल उसके दिमाग में यही आया कि आखिर मंगेश जेल से बाहर आया कैसे ? हालाँकि मिश्रा जी ने मंगेश के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की थी उसे बस लल्लन और उसके आदमियों के साथ पुलिस ने पकड़ा था। लवली को अब बिंदिया की और ज्यादा चिंता होने लगी वह चकिया जाने के बारे में सोचने लगा और बिस्तर पर लेट गया।

गुड्डू शगुन के लिए खाना लेकर आया लेकिन खाना देखकर ही शगुन को उबकाई आ रही थी उसने नहीं खाया। गुड्डू वही बैठकर शगुन से बाते करते हुए खाना खाने लगा। मिश्राइन ने देखा शगुन का कुछ भी खाने का मन नहीं है तो उन्होंने शगुन के लिए कुछ सब्जियाे को पानी में उबालकर उसमे नमक , कालीमिर्च , निम्बू का रस और कुछ मसाले मिलाकर झोल बनाया और लेकर कमरे में चली आयी। शगुन ने उसे चखकर देखा तो उसे अच्छा लगा अब खाने की जगह वह गुड्डू के सामने बैठकर उस झोल को पीने लगी।

मिश्राइन ने देखा गुड्डू आराम से बैठकर खाना खा रहा है तो मिश्राइन बिस्तर के कोने पर आ बैठी और कहा,”ए गुड्डू ! शगुन को थोड़ा बख्त दिया करो बेटा , जे समय मा इह का सबसे जियादा जरूरत तुम्हायी है,,,,,,,!!!”
“अरे अम्मा ! हम तो देना चाहते है पर का करे हमाये पास काम ही इतना है कि सुबह निकले तो शाम मा घर मा घुसे ऊपर से उह्ह्ह गोलू जब देखो तब कुछो न कुछो गड़बड़ करता ही रहता है,,,,,,,,,अब हम उसको सम्हाले कि अपना काम देखे समझ नहीं आता”,गुड्डू ने कहा

“अब जे गोलू को का हुआ है ? अभी दो दिन पहले तक तो ठीक था उह्ह्ह अब फिर से कोनो कांड किया का उसने ?”,मिश्राइन ने हैरानी से कहा

“का बताये अम्मा ? कभी कभी तो हमको लगता है उस बेचारे की भी कोनो गलती नाही है ,, करने सही जाता है होता उलटा है,,,,,,खैर उसको तो हम सम्हाल लेंगे बस जब तक हमाओ काम सम्हले तब तक शगुन को तुमहू सम्हाल ल्यो,,,,,,,,,!”,गुड्डू ने कहा
“हम्म्म्म ! वैसे कल तो शगुन के घरवाले आ रहे है एक ठो काम करते है कुछ दिन के लिए शगुन को बनारस भेज देते है , हवा पानी बदलेगा तो मन को अच्छा लगेगा और इह भी अपने घरवालों के साथ थोड़ा बख्त बिता लेगी,,,,,,,,!!!”,मिश्राइन ने कहा

शगुन ने सुना तो मुस्कुरा उठी , प्रीति की शादी के बाद से ही शगुन कानपूर में थी बनारस गयी ही नहीं,,,,,,,,बनारस जाने के नाम से ही शगुन का चेहरा खिल उठा तभी गुड्डू ने कहा,”कोई जरूरत नाही है अम्मा , शगुन के घरवाले कल यही तो आ रहे है मिल लेंगी ये उनसे और वक्त बिताना है तो हमहू पापा जी से कह देंगे कि सबके साथ कुछ दिन यही रुक जाये,,,,,,,,,,,!!!”

“अरे जे का बात हुई ? शगुन का भी तो मन होगा घर जाने का , क्यों बिटिया सही कहा ना हमने ?”मिश्राइन ने गुड्डू से कहा और फिर शगुन की तरफ देखा तो शगुन ने हामी में गर्दन हिला दी
“मन है ठीक है लेकिन फिर हम हिया अकेले कैसे रहेंगे इसके बिना ?”,गुड्डू ने एकदम से कहा , वह भूल गया सामने उसकी पत्नी और माँ दोनों बैठी है और उसे अपनी माँ के सामने एकदम से ऐसी बात नहीं करनी चाहिए। गुड्डू झेंप गया और दूसरी तरफ देखने लगा वही शगुन ने भी अपना ध्यान झोल पर लगा लिया।

मिश्राइन उठी और कहा,”उह्ह्ह हम नाही जानते अगर शगुन का मन है तो उह्ह्ह कानपूर जाएगी,,,,,,,,तुमको हिया रहना है रहो वरना अपना बस्ता बाँधो और तुम भी जे साथ निकल जाओ,,,,,,,,,!!”
मिश्राइन वहा से चली गयी। गुड्डू ने शगुन की तरफ देखा तो शगुन ने अपना हाथ अपने ललाट पर मारकर धीरे से कहा,”आप भी ना गुड्डू जी ! माजी के सामने कुछ भी कह देते है,,,,,,,,,,!!”

गुड्डू खाना खा चुका था इसलिए अपनी प्लेट लेकर उठा और शगुन की प्लेट और कटोरी भी लेकर अपनी प्लेट में रखते हुए कहा,”अरे तो का गलत कहे हम ? नहीं रह सकते तुम्हाये बिना,,,,,,,,,और अभी तुमहू जोन हालत मा हो ना ओह्ह्ह मा तो बिल्कुल भी नाही,,,,,,,,,!!!”
“अच्छा और ऐसा क्यों ?”,शगुन ने गुड्डू की तरफ देखकर पूछा
 “उह्ह्ह हम वापस आकर बताएँगे , पहिले जे रख आये”

“ठीक है जाईये,,,,,,,,!!”,शगुन ने मुस्कुरा कर कहा तो गुड्डू वहा से चला गया। किचन में आया तो देखा वेदी सब बर्तन धो चुकी थी और मिश्राइन गैस के पास खड़ी होकर तेल गर्म कर रही थी।
“जे बर्तन सिंक मा रख दो हमहू धो देही , तुम जे तेल ले जाकर शगुन को देइ दयो और कहो अपने पैरों के तलवो पर घिस ले जे से नींद अच्छी आएगी और सर मा भारीपन भी नहीं लगेगा , आज तबियत कुछो जियादा ही खराब है ओह्ह्ह की,,,,,,,,,,!!!”,मिश्राइन ने तेल कटोरी में छानते हुए कहा

गुड्डू ने देखा बर्तन मिश्राइन को धोने पड़ेंगे तो खुद ही सिंक के सामने खड़े होकर बर्तन धोने लगा। मिश्राइन ने देखा तो कहा,”अरे रहन दयो गुडडुआ हमहू कर लेंगे”
“कोई बात नहीं अम्मा हमहू धो देंगे तो कौनसा छोटे हो जायेंगे,,,,,,,,,ल्यो हुई गवा”,गुड्डू ने बर्तन धोकर साइड में रखते हुए कहा

वह मिश्राइन की तरफ आया तो मिश्राइन ने कहा,”कल तुम्हाये ससुराल वाले आ रहे है , बख्त से घर पर आ जाना”
“पहुँच जायेंगे और बताओ ?”,गुड्डू ने तेल की कटोरी लेकर कहा
“और अपना थोड़ा ख्याल रखा करो , इत्तो टेंशन नाही लिया करो काम का,,,,,,!!”,मिश्राइन ने गुड्डू का गाल छूकर बड़े प्यार से कहा

गुड्डू ने सुना तो मुस्कुरा उठा मिश्रा जी से भले वह चाहे जितनी डांट खा ले मिश्राइन का प्यार हर बार उस डांट का असर कम कर देता था। गुड्डू ने मिश्राइन से सोने को कहा और खुद कटोरी लेकर अपने कमरे में चला आया।

गुड्डू ने कमरे का दरवाजा बंद किया और तेल की कटोरी लेकर शगुन के पैरों के पास आ बैठा और कहा,”जे अम्मा ने तुम्हाये लिए तेल भेजा है , पैरों के तलवे में लगाने को कहा है,,,,,,,,,,लाओ अपना पैर दो हम लगा देते है”
गुड्डू ने शगुन का पैर अपनी तरफ किया तो शगुन ने जल्दी से अपना पैर पीछे खींचा और कहा,”अरे नहीं नहीं गुड्डू जी ! आप मेरे पैरों को हाथ क्यों लगा रहे है ? लाईये मुझे दीजिये मैं लगा लूंगी , आप वैसे भी कितने थके हुए है आराम कीजिये,,,,,,,,,!!!”

गुड्डू ने सुना तो शगुन का पैर अपनी तरफ किया और उंगलियों पर तेल लेकर उसके तलवे पर लगाकर कहा,”शगुन हम कितना भी थके हुए हो लेकिन इतना कभी नाही थकेंगे कि तुम्हरे लिए प्यार ना जता पाए”
शगुन ने सुना तो मुस्कुरा उठी और प्यार से गुड्डू को देखने लगी। शगुन के पैरों में तेल लगाते हुए गुड्डू के चेहरे पर थकान या झुंझलाहट के भाव बिल्कुल नहीं थे।

गुप्ता जी का घर , कानपूर
सुबह सुबह घर के आँगन में गोलू मस्त उलटा पड़ा सो रहा था और बगल की खटिया पर लेटे थे गुप्ता जी तो वही नीचे गद्दे पर मुँह फाडे पड़े थे मंगल फूफा ,, मंगल फूफा और गुप्ता जी का आँगन में सोना हैरानी की बात नहीं थी जबकि गोलू भी उनके साथ आँगन में ही सो रहा था ये हैरानी की बात थी,,,,गोलू से नाराज पिंकी ने उसे कमरे से बाहर निकाल दिया और बेचारे गोलू को गुप्ता जी और मंगल फूफा के साथ आंगन में सोना पड़ा।

गोलू मस्त सो ही रहा था कि तभी उसने सपना देखा चार लोग उसकी अर्थी को कंधे पर उठाकर ले जा रहे है और आगे मटकी पकडे चल रहे है मंगल फूफा , गोलू ने जैसे ही ये सपना देखा चिल्लाकर उठा।
गोलू के चिल्लाने से बगल वाली खटिया पर सोये गुप्ता जी डरकर उठे उन्होंने आस पास देखा कुछ नहीं था बस सामने हैरान परेशान गोलू बैठा था।

“का हुआ बे , चिल्ला काहे रहे हो ?”,गुप्ता जी ने कहा
“पिताजी हमायी अंतिम यात्रा मा आप काहे नाही है , कही आपने ही तो हमायी फील्डिंग सेट नाही की ?”,गोलू ने हैरानी भरे स्वर में कहा
गुप्ता जी ने सुना तो खींचकर गोलू को एक थप्पड़ मारा और कहा,”होश मा आओ गोलू ज़िंदा हो तुमहू और हम का तुम्हायी फील्डिंग सेट करेंगे ? जैसी तुम्हायी हरकते है तुमहू खुद एक दिन अपनी लंका लगा लोगे”

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संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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“नहीं भैया कहा तो कुछ नहीं बस बहुते परेशान और जल्दबाजी मा थी , हमसे कहा आपसे बात करवाने को तो हमने फोन लगा दिया,,,,,,,,,भैया हमको तो हिया मामला कुछो गड़बड़ लग रहा है,,,,,,,आप भी कानपूर के ही होकर रह गए हिया आकर देखा तक नहीं”,मनोज ने शिकायती लहजे में कहा
किसी अनहोनी के डर से लवली का दिल धड़कने लगा और उसने कहा,”मनोज हमायी बात सुनो ! कल सुबह जाओ बिंदिया के घर और हमका बताओ का हुआ है ? हो सके तो बिंदिया से हमायी बात भी करवाना , हम जल्दी ही चकिया आने का ट्राय करते है”

“नहीं भैया कहा तो कुछ नहीं बस बहुते परेशान और जल्दबाजी मा थी , हमसे कहा आपसे बात करवाने को तो हमने फोन लगा दिया,,,,,,,,,भैया हमको तो हिया मामला कुछो गड़बड़ लग रहा है,,,,,,,आप भी कानपूर के ही होकर रह गए हिया आकर देखा तक नहीं”,मनोज ने शिकायती लहजे में कहा
किसी अनहोनी के डर से लवली का दिल धड़कने लगा और उसने कहा,”मनोज हमायी बात सुनो ! कल सुबह जाओ बिंदिया के घर और हमका बताओ का हुआ है ? हो सके तो बिंदिया से हमायी बात भी करवाना , हम जल्दी ही चकिया आने का ट्राय करते है”

“नहीं भैया कहा तो कुछ नहीं बस बहुते परेशान और जल्दबाजी मा थी , हमसे कहा आपसे बात करवाने को तो हमने फोन लगा दिया,,,,,,,,,भैया हमको तो हिया मामला कुछो गड़बड़ लग रहा है,,,,,,,आप भी कानपूर के ही होकर रह गए हिया आकर देखा तक नहीं”,मनोज ने शिकायती लहजे में कहा
किसी अनहोनी के डर से लवली का दिल धड़कने लगा और उसने कहा,”मनोज हमायी बात सुनो ! कल सुबह जाओ बिंदिया के घर और हमका बताओ का हुआ है ? हो सके तो बिंदिया से हमायी बात भी करवाना , हम जल्दी ही चकिया आने का ट्राय करते है”

“नहीं भैया कहा तो कुछ नहीं बस बहुते परेशान और जल्दबाजी मा थी , हमसे कहा आपसे बात करवाने को तो हमने फोन लगा दिया,,,,,,,,,भैया हमको तो हिया मामला कुछो गड़बड़ लग रहा है,,,,,,,आप भी कानपूर के ही होकर रह गए हिया आकर देखा तक नहीं”,मनोज ने शिकायती लहजे में कहा
किसी अनहोनी के डर से लवली का दिल धड़कने लगा और उसने कहा,”मनोज हमायी बात सुनो ! कल सुबह जाओ बिंदिया के घर और हमका बताओ का हुआ है ? हो सके तो बिंदिया से हमायी बात भी करवाना , हम जल्दी ही चकिया आने का ट्राय करते है”

“नहीं भैया कहा तो कुछ नहीं बस बहुते परेशान और जल्दबाजी मा थी , हमसे कहा आपसे बात करवाने को तो हमने फोन लगा दिया,,,,,,,,,भैया हमको तो हिया मामला कुछो गड़बड़ लग रहा है,,,,,,,आप भी कानपूर के ही होकर रह गए हिया आकर देखा तक नहीं”,मनोज ने शिकायती लहजे में कहा
किसी अनहोनी के डर से लवली का दिल धड़कने लगा और उसने कहा,”मनोज हमायी बात सुनो ! कल सुबह जाओ बिंदिया के घर और हमका बताओ का हुआ है ? हो सके तो बिंदिया से हमायी बात भी करवाना , हम जल्दी ही चकिया आने का ट्राय करते है”

“नहीं भैया कहा तो कुछ नहीं बस बहुते परेशान और जल्दबाजी मा थी , हमसे कहा आपसे बात करवाने को तो हमने फोन लगा दिया,,,,,,,,,भैया हमको तो हिया मामला कुछो गड़बड़ लग रहा है,,,,,,,आप भी कानपूर के ही होकर रह गए हिया आकर देखा तक नहीं”,मनोज ने शिकायती लहजे में कहा
किसी अनहोनी के डर से लवली का दिल धड़कने लगा और उसने कहा,”मनोज हमायी बात सुनो ! कल सुबह जाओ बिंदिया के घर और हमका बताओ का हुआ है ? हो सके तो बिंदिया से हमायी बात भी करवाना , हम जल्दी ही चकिया आने का ट्राय करते है”

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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