Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 48

by Story With Sanjana May 11, 2026
written by Story With Sanjana May 11, 2026 2 comments
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Manmarjiyan Season 4 – 48

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

लवली ने भुआ और फूफा को जो दवा दी उसे खाकर भुआ और फूफा कुछ देर बाद ही गहरी नींद में सो गए। लवली मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर आया और नजर सामने से आती शगुन पर पड़ी। शगुन लवली के पास आयी और कहा,”लवली भैया ! आपने भुआजी और फूफा जी को अच्छा सबक सिखाया लेकिन मुझे अब उन्हें लेकर चिंता हो रही है। बार बार वाशरूम जाकर कैसे उनकी हालत खराब हो गयी थी। वे लोग कहा है मैं उन्हें ये दवा देकर आती हूँ”

“अरे शगुन रुको ! मैंने उन्हें दवा दे दी है अभी वो दोनों खाकर आराम कर रहे है। तुम खामखा उन्हें लेकर परेशान हो रही हो”,लवली ने कहा तो शगुन रुक गयी और लवली की तरफ देखकर कहा ,”अच्छा ! आप बिंदिया भाभी से मिलने जाने वाले थे ,उसके बारे में आपने पापा जी से बात की ?”
“नहीं शगुन ! पिताजी से कहा तो वो मुझे वहा नहीं जाने देंगे इसलिए मैंने,,,,,,,”,लवली कहते कहते रुक गया
“इसलिए आपके क्या भैया ? कही आपने गुड्डू जी को तो वहा नहीं भेज दिया ?”,शगुन ने चौंककर कहा

शगुन के मुँह से लवली का नाम सुनकर लवली ने धीरे से हामी में गर्दन हिला दी और ये देखकर शगुन के चेहरे पर चिंता की लकीरे उभर आयी और उसने कहा,”ओह्ह्ह लवली भैया ये आपने क्या किया ? आपने उन्हें वहा क्यों भेज दिया आप तो जानते है ना गुड्डू जी खुद ना भी चाहे तब भी किसी ना किसी मुसीबत में फंसते ही है,,,,,,,,मुसीबत गुड्डू जी के पास नहीं आती बल्कि गुड्डू जी खुद मुसीबत के पास जाते है और इस बार तो वो अकेले चकिया गए है पता नहीं क्या होगा उनके साथ ?”

“अकेला नहीं है है उह्ह्ह,,,,,,,,,,,!!”,लवली ने धीरे से कहा
“मतलब ?”,शगुन ने पूछा
“गोलू भी साथ में है”,लवली ने अपना नाख़ून चबाते हुए धीरे से कहा

शगुन ने जैसे ही सुना अपना सर पकड़ लिया , वह वही पास रखे सोफे पर आ बैठी और कहा,”लवली भैया ये क्या किया आपने ? गुड्डू जी फिर भी कोई गड़बड़ करने से बच जाए लेकिन गोलू जी गोलू जी का तो जन्म ही जैसे गड़बड़ करने के लिए हुआ है।  आपने नहीं देखा था अम्मा के दिनों में कैसी उलझन पैदा कर थी इन सबने मिलकर और आपने उन्हें गुड्डू जी के साथ बिंदिया भाभी से मिलने भेज दिया।”

अरे शगुन मुझे लगा ये दोनों सम्हाल लेंगे इसलिए बस हम उन दोनों की बातो में आ गए”,लवली ने शगुन की तरफ आकर कहा  
शगुन ने सुना तो अफ़सोस भरे स्वर में कहा,”लवली भैया ! लगता है अभी आप गुड्डू जी और गोलू जी के किये कांडो से वाकिफ नहीं है”
“हम समझे नहीं”,लवली ने असमझ की स्तिथि में कहा

शगुन ने लवली से बैठने का इशारा किया और फिर लवली को गुड्डू गोलू के वो सब कांडो के बारे में बताया जो शादी के बाद मिश्रा जी ने शगुन को बताये थे। सब सुनने के बाद लवली ने मायूसी भरे स्वर में कहा,”अब का होगा शगुन ?”
“होना क्या है लवली भैया ! अब तक सिर्फ गोलू जी और गुड्डू जी पापाजी से पिटते थे अब आपकी बारी”,कहकर शगुन उठी और वहा से चली गयी
“शगुन,,,,,,,,,!!!”,लवली ने मरे हुए स्वर में कहा

मुझे इस मामले में कोई उम्मीद मत कीजियेगा भैया ! पापाजी के खिलाफ तो आज तक माजी भी नहीं जा पायी है”,कहकर शगुन वहा से चली गयी और लवली एक बार फिर सोफे पर आ बैठा। उसे अपनी आँखों के सामने सुबह वाला सीन नजर आने लगा जब मिश्रा जी गुड्डू और गोलू की क्लास लगा रहे थे और अगले ही पल उनके साथ नजर आया लवली को खुद लवली भी जो गुड्डू और गोलू के साथ खड़ा मिश्रा जी के गुस्से का सामना कर रहा था।

“जे साला गुड्डू और गोलू पर भरोसा करके हमने कही गलती तो नाही कर दी , शगुन कबो झूठ नाही बोलती अगर जे दोनों ऐसे है तो फिर चकिया मा तो कांड होना तय है उस पर कही गुड्डू वहा हमेशा के लिए ना फंस जाए,,,,,,,,,हमे उन दोनों पर भरोसा करना ही नहीं था इस से अच्छा खुद जाते और बिंदिया को हिया ले आते ओह्ह्ह के बाद जो होता देखा जाता ,पता नहीं इह बख्त उह्ह्ह लोग कहा होंगे और का कर रहे होंगे ?”,लवली गाल से हाथ लगाकर बड़बड़ाया

चाय नाश्ते के बाद गुड्डू पैसे चुकाने चला गया और गोलू ने उठकर अंगड़ाई लेते हुए कहा,”ए फूफा ! तुमहू चलकर गाडी मा बइठो हमहू जरा हलके होकर आते है,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा ने उठे तभी उनकी नजर टेबल पर साइड में रखे कुछ बिस्कुट पर चली गयी। ये वही बिस्कुट थे जो गोलू ने कुत्ते के सामने से उठाकर टेबल पर रखे थे।

 गोलू के जाते ही मंगल फूफा ने जल्दी जल्दी बिस्कुट उठाये और उन्हें अपनी जेब में भरकर गाड़ी की तरफ बढ़ गया। पीछे सोते सोते मंगल फूफा थक गए थे इसलिए आगे गुड्डू के बगल वाली सीट पर आकर बैठ गए और गाड़ी की खिड़की खोल ली।

गुड्डू गाड़ी के पास आया और देखा मंगल फूफा पहले से गाड़ी में बैठे है और गोलू गायब है तो उसने कहा,”अब जे गोलू कहा गया ?”
“वो हल्का होने गया है”,मंगल फूफा ने कहा
“अच्छा ठीक है , वो आता है तब तक गाड़ी की पिछली सीट पर गिरा शीशा साफ कर देते है वरना बैठेगा कहा”,कहते हुए गुड्डू ने गाड़ी का पिछला दरवाजा खोला और बाहर से ही सीट पर गिरा शीशा उठाने लगा।

गोलू वाशरूम से बाहर आया और वाशबेसिन में हाथ धोने लगा तभी उसे महसूस हुआ जैसे कोई उसकी पेंट खींच रहा है। उसने हाथ धोते धोते नीचे देखा तो पाया वही मरियल कुत्ता गुस्से से भरकर गोलू को देख रहा था। इंसान तो इंसान गोलू की किस्मत तो जानवरो के साथ भी बिगड़ी हुई थी। वहा कानपूर में यादव जी की भैंस उसके पीछे पड़ी थी और अब यहाँ ये कुत्ता। गोलू ने भी हिम्मत से काम लिया वह डरा नहीं और कुत्ते को घूरकर देखा।

गोलू को घूरते देखकर कुत्ता साइड हट गया तो गोलू इसे अपनी जीत समझकर मुस्कुराया और कहा,”पिंकेश गुप्ता के सामने बड़े बड़े पीछे हट जाते है,,,,,,,,,,,,,,,,,,ए गुड्डू भैया बचाओ”
गोलू ने जैसे ही अपनी तारीफ की कुत्ता भौंका और गोलू को काटने के लिए उस के पीछे भागा और गोलू के सुर ही बदल गए।

गुड्डू ने पूरी सीट साफ़ कर दी बस एक आखरी टुकड़ा बचा था जैसे ही वह उसे उठाने के लिए गाडी के अंदर झुका गोलू भागते हुए आया और गुड्डू को एक जोर का धक्का दिया। बेचारा गुड्डू मुँह के बल गाड़ी की पिछली सीट पर जा गिरा और ऐसा गिरा की उठ ही नहीं पाया गनीमत था वह काँच का टुकड़ा उसे लगा नहीं।

गोलू ने गुड्डू को नहीं देखा वह भागते हुए गाड़ी के गोल गोल चक्कर काटने लगा और कुत्ता उसके पीछे।
“अबे का चार बिस्कुट खाकर इत्ती ताकत आ गयी तुम्हरे अंदर जो हमे इत्ता भगाय रहे हो,,,,,,,,,,,,अबे रुक जाओ हमायी साँस फूलने लगी है”,गोलू ने भागते हुए कहा तभी उसे पिछली सीट का दरवाजा खुला दिखा और गोलू लपक कर अंदर बैठ गया और दरवाजा बंद कर लिया। वो इतनी भागमभाग में था कि उसने ये भी नहीं देखा कि पिछली सीट पर गुड्डू मुँह के बल पड़ा है।

उलटा उसने खिड़की से बाहर झाँककर कुत्ते को देखा और उसे चिढ़ाने के लिए जोर जोर से सीट पर कूदते हुए कहा,”क्यों ! अब आया न मजा ? बहुत भगा रहे थे ना हमको साले अब भगाओ ,, अब तुम हमरा कुछो नाही बिगाड़ सकते बस बाहिर से भौंक सकते हो हम पे,,,,,,,,,,,,भौ , भौ ,भौ ,हाहाहाहाहा हमसे पंगा ले रहे थे ससुरे”
गोलू सीट के बजाय गुड्डू पर कूद रहा था जिस से गुड्डू की बची खुची जान भी निकल गयी और वह बेचारा बोल तक नहीं पाया कोई गोलू सिर्फ दिखने में दुबला पतला था बाकि जान बहुत थी उसमे।

अच्छा इन सब में एक ख्याल ये भी मन में आ रहा होगा कि इतना सब हो रहा है लेकिन मंगल फूफा ने ध्यान क्यों नहीं दिया ? वो इसलिए क्योकि आगे वाली सीट पर बैठकर मंगल फूफा समझने लगे खुद को VIP ,इसलिए उन्होंने अपने पैर पसारे ,डेशबोर्ड पर रखा हेडफोन कानो पर लगाया और फूल वॉल्यूम में गाना चलाकर सर पीछे सीट से लगाया और आँखे मूँद ली। अब गाड़ी के अंदर और गाड़ी के बाहर क्या हो रहा था उस से बेखबर मंगल फूफा को गाना सुनते हुए फुलवारी की याद आने लगी।

गोलू को खुश देखकर कुत्ता वहा से चला गया। गोलू ने देखा मंगल फूफा आगे वाली सीट पर है लेकिन गुड्डू कही नजर नहीं आ रहा तो उसने कहा,”फूफा ! ओह्ह्ह फूफा ! अरे गुड्डू भैया कहा है ?”
मंगल फूफा को कुछ सुने तब ना वो जवाब दे लेकिन नीचे दबे गुड्डू को सुना तो उसने मरे हुए स्वर में कहा,”अबे हम यहाँ है गोलू , तुम्हाये नीचे”

गोलू ने सुना तो देखा वह सीट पर नहीं बल्कि गुड्डू पर बैठा है तो जल्दी से साइड हुआ और गुड्डू को उठाकर बैठाते हुए कहा,”अरे गुड्डू भैया ! आप का हिया लेटकर मसाज ले रहे है , चंदौली नाही जाना है का ?”

गुड्डू ने सुना तो गोलू की गर्दन दबोची और दो तीन घुसे मारकर कहा,”साले ! एक तो हमको धक्का मारकर अंदर गिरा दिए ऊपर से बकैती कर रहे हो हमाये साथ , जानते भी हो कित्तो वजन है तुम्हाये अंदर ,ऊपर से हमाये ऊपर ऐसे कूद रहे हो जैसे हमहू स्लीपवेल का गद्दा हो ! साले तुम्हाये जैसे दोस्त हो तो दुश्मन की का जरूरत है बे हमे , किसी दिन तुम्हयी हमायी बत्ती बनाय दोगे”

“अरे गुड्डू भैया सॉरी ! हमको नहीं ना पता था आप गाडी मा है , माँ कसम सच बोल रहे है उह्ह्ह साला मरियल कुत्ता हमरे पीछे पड़ा था इसलिए हम घई घई मा अंदर आ बैठे ,सच कह रहे है गुड्डू भैया”,गोलू ने मिमियाते हुए कहा
 गुड्डू ने गोलू को छोड़ा और साइड में होकर अपनी उखड़ी सांसो को ठीक करने लगा। उसने एक नजर गोलू को देखा और अपनी गर्दन की तरफ इशारा करके कहा,”साले जान हिया तक आ गयी थी हमायी,,,,,,,,,,ज़िंदा चकिया जाने दोगे के नाही हमे”

“अरे सॉरी ना गुड्डू भैया , हो जाती है गलती,,,,,,,,,,,अच्छा एक काम कीजिये आप पीछे बैठिये गाड़ी हमहू चलाते है ,आप थोड़ा रेस्ट कीजिये”,कहते हुए गोलू पीछे से आगे ड्राइवर सीट पर आया और देखा मंगल फूफा आराम से मस्त हेडफोन लगाकर गाना सुन रहे है तो गोलू ने बांये का उलटा साइड मंगल फूफा के गाल पर छाप दिया। मंगल फूफा हड़बड़ा कर उठे और कहा,”का हुआ ? हमको काहे मारे ?”

गोलू ने मंगल फूफा को घुरा और कहा,”हिया गाड़ी मा इत्ता सब हुई गवा और तुमहू हेडफोन लगाकर संगीत सुन रहे हो , वैसे का सुन रहे थे ?”
“एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा”,मंगल फूफा ने मुस्कुरा कर कहा
“कैसा लगा ?”,गोलू ने भी मुस्कुराकर फूफा की तरफ झुकते हुए कहा
मंगल फूफा मुस्कुराये और कहा,”जैसे खिलता गुलाब , जैसे शायर का खाब , जैसे उजली किरण , जैसे वन में हिरन , जैसे चाँदनी रात , जैसे नरमी की बात , जैसे उह्ह्ह शादीशुदा ना होकर बस हमायी होती तो कित्ता सही होता”

मंगल फूफा बताते बताते भावनाओ में बह गए और दिल की बात गोलू के सामने कह दी गोलू ने जैसे ही सुना उसकी मुस्कान गायब हुई और उसने गर्दन घुमाकर गुड्डू की तरफ देखकर कहा,”ए गुड्डू भैया ! जे फूफा साला फिर फुलवारी के सपने देख रहा है”

फूफा ने सुना तो तुरंत अपने खयालो से बाहर आया और हेडफोन कानो से हटाकर जल्दी से डेशबोर्ड पर रख दिया। गुड्डू ने सुना तो खीजकर बोला,”फूफा चाहे  देखे चाहे राजकुमारी के ,तुमहू अगर दुइ मिनिट मा हिया से नाही निकले ना गोलू तो तुम्हे दिन मा तारे दिखा देंगे हमहू,,,,,,,,,,,,,,साला नाक मा दम करके रखे हो दोनों,,,,,,,,,,,,,अब चलोगे के मुहूर्त निकलवाए तुम्हाये लिए”

गुड्डू को गुस्से में देखकर गोलू ने चुपचाप गाड़ी स्टार्ट की और वहा से निकल गए। दो घंटे के सफर और 4 घंटे की इस भसड़ में गुड्डू इतना थक गया कि अपनी आँखे बंद की और सर पीछे सीट से लगा लिया। इस उम्मीद के साथ कि अब कोई गड़बड़ ना हो।

चकिया , चंदौली
मंगेश और लल्लन पेड़ के नीचे रखे पलंग पर बैठे थे और चाय नाश्ता कर रहे थे। चाय नाश्ते के बाद लल्लन ने कहा,”कचौड़ी तो बहुते स्वाद बनी है मंगेश्वा पर का बारात के स्वागत मा भी जे ही कचौड़ी खिलाने वाले हो ?”
“अरे नाही नाही लल्लन ! बारातियो के लिए तो खास इंतजाम किया है”,मंगेश ने कहा
“का ख़ाक इंतजाम किये हो मंगेश ? हमे तो दूर दूर तक शादी को टेंट तक नाही नजर आ रहो,,,,,,,,,,का बारातियो के सामने हमायी इज्जत मिटटी मा मिलाओगे का ?”,लल्लन ने कहा

“अरे काहे चिंता कर रहे हो लल्लन ,शादी कल शाम मा है आज रात तक टेंट लग जायेगा और सारा बंदोबस्त भी हो जाएगा। बिरजू बताय रहा था अभी कुछ देर पाहिले कि उह्ह्ह बेडिंग प्लानर वाले रास्ते मा है ,अब कानपूर से चकिया का रास्ता भी तो कितना दूर है,,तुम परेशान ना हो बारातियो मा तुम्हरी नाक नाही कटने देंगे”,मंगेश ने कहा

“अरे तुम्हरे होते हमको काहे की टेंशन बस एक ही टेंशन है”,लल्लन ने कहा
“उह्ह्ह का ? उह्ह्ह भी बताय दयो अभी हल निकाल देते है”,मंगेश ने कहा
“तुमहू अपनी बिटिया का ब्याह तो कर रहे हो पर कल कही उह्ह्ह साला लवली हिया आ पंहुचा और उसने कोनो तमाशा किया तो ?”,लल्लन ने बहुत ही गंभीरता से कहा

“ओह्ह्ह की चिंता तुम नहीं करो लल्लन ,ओह्ह्ह के लिए पहिले ही पास के गांव से दर्जन भर लड़का लोग को बुला लिए है ,, उह्ह साला आएगा अपने दो पैरों पर और जायेगा चार कंधो पर,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगेश ने नफरत भरे स्वर में कहा तो लल्लन मुस्कुरा उठा

कुछ ही दूर अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी बिंदिया ने जब ये सुना तो डर के मारे उसने अपना हाथ अपने सीने पर रखा और कहा,”जे हमने का किया ?उह्ह्ह चिट्ठी भेजकर कही हमने लवली की जान को खतरे मा तो नाहीं डाल दिया ?”

( गुड्डू और गोलू से हाथ मिलाकर या अब लवली भी खाने वाला है मिश्रा जी से मार ? क्या गोलू , गुड्डू और मंगल फूफा सही सलामत पहुँच पाएंगे चकिया या रास्ते में होंगे और भी कांड ? क्या लवली की जान को है खतरा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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उलटा उसने खिड़की से बाहर झाँककर कुत्ते को देखा और उसे चिढ़ाने के लिए जोर जोर से सीट पर कूदते हुए कहा,”क्यों ! अब आया न मजा ? बहुत भगा रहे थे ना हमको साले अब भगाओ ,, अब तुम हमरा कुछो नाही बिगाड़ सकते बस बाहिर से भौंक सकते हो हम पे,,,,,,,,,,,,भौ , भौ ,भौ ,हाहाहाहाहा हमसे पंगा ले रहे थे ससुरे”
गोलू सीट के बजाय गुड्डू पर कूद रहा था जिस से गुड्डू की बची खुची जान भी निकल गयी और वह बेचारा बोल तक नहीं पाया कोई गोलू सिर्फ दिखने में दुबला पतला था बाकि जान बहुत थी उसमे।

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2 comments

Gauri May 11, 2026 - 11:11 am

Mam pasandida aurat ka b part daldo plss bina pdhe din adhura lggta h

Reply
Nency Patel May 11, 2026 - 12:29 pm

Yaar ab golu aur guddu ke liye dar lag raha hai kuch galat na ho jaye dono ke sath chakiya me

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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