Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 57

by Story With Sanjana May 29, 2026
written by Story With Sanjana May 29, 2026 1 comment
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Manmarjiyan Season 4 – 57

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू भाड़े की जो गाड़ी लेकर आया था गोलू और मंगल फूफा ने मिलकर उसका कबाड़ा कर दिया था। आगे का शीशा गायब था , गाड़ी की आगे की दोनों हेडलाईट गायब थी , पिछली सीट के दोनों दरवाजे के शीशे गायब थे , एक दरवाजा भी गायब था , पीछे की डिग्गी का ढांचा गायब था और रही सही कसर बकरियों ने पूरी कर दी गाडी की सीट का फोम फाड़कर,,,,,,,,,,,,,गोलू ने देखा तो अपना सर पकड़ लिया लेकिन रवि ने उसे दिलासा दिया और शांत किया। मंगल फूफा का रात से कोई अता पता नहीं था हालाँकि मंगल फूफा वही रातभर झाड़ियों में बेहोश पड़े रहे।

रवि ने गोलू को उठाया और गाडी की तरफ बढ़ा तो गोलू ने रोआँसा होकर कहा,”अबे रवि ! उह्ह्ह मंगल फूफा कहा है बे ? ओह्ह्ह का भी तो साथ लेकर जाना है,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा का नाम सुनकर रवि आ मुँह बन गया और उसने कहा,”एक बात कहे गोलू भैया , जे सारे फसाद की जड़ ना हमे तो उह्ह आपके मंगल फूफा ही लगते है। अरे शुरू से देखे है आपको और गुड्डू भैया को छोटे मोटे कांड करते लेकिन इत्ती बत्ती कबो ना लगी थी आपकी जित्ती जे मंगल फूफा के आने से लगी है।

साला जब से आये है तब से ये नुकसान वो नुकसान , ये तोडा वो फोड़ा यही सब हो रहा है। खुद साढ़े चार फुट के है लेकिन आपके जीवन मा मुसीबत पुरे छ फुट की लेकर आते है। सच बताये तो गोलू भैया आपके और गुड्डू भैया के जीवन मा सबसे ज्यादा चरस ही जे मंगल फूफा ने बोई है ,, अरे एक नंबर के मनहूस और पनौती आदमी,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

कहकर रवि ने जैसे ही पलटकर देखा एकदम से उसके शब्द बदल गए और उसने गोलू को साइड में धक्का देकर कहा,”आपको लगता है हम मंगल फूफा जी के लिए ऐसा कुछो कहेंगे तो माफ़ करना गोलू भैया , भले ही हमने आपका नमक खाया हो लेकिन मंगल फूफा के लिए एक ठो गलत शब्द ना कहेंगे ना सुनेंगे,,,,,,,,,अरे इतने महान , होनहार ,बलवान , शैतान मतलब सही इंसान के बारे में हमहू इतना घटिया बोलेंगे , अरे बिल्कुल नाही जे बोलने से पहिले हमायी जबान ना कट जाए,,,,,,,,,,,,,,,,,ना ना ना ना गोलू भैया घणी ओछी कह दी थाम ने”

गोलू हैरानी से मुँह फाड़े रवि को देखने लगा उसने ध्यान ही नहीं दिया कि वही उन दोनों के बगल में कीचड़ मिटटी से सने मंगल फूफा हाथ में ईंट उठाये खड़े है और गुस्से से रवि को घूर रहे है। अगर ऐसे हालत में रवि कुछ भी उलटा सीधा बोलता है तो मंगल फूफा के हाथ में पकड़ी ईंट का उसके सर पर आना तय है।
रवि को अजीबो गरीब बातें करते देखकर गोलू ने उसे एक  थप्पड़ मारा और कहा,”अबे UP से होकर राजस्थानी काहे बोल रहे हो बे ?”

“गोलू भैया उधर देखिये , उधर”,रवि ने गोलू को आँख मारकर कहा जिस से गोलू और चिढ गया उसने रवि की कोलर दोनों हाथो से पकड़ी और कहा,”आँख का मार रहे हो बे ? हमहू का तुम्हायी प्रेमिका है , अबे शादीशुदा है और एक बीवी भी है हमायी,,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ तो का चार चार बीवी रखोगे ?’,मंगल फूफा की आवाज गोलू के कानो में पड़ी तो गोलू चौंका और रवि से कहा,”ए रवि ! हमको मंगल फूफा की आवाज सुनाई दी , कही फूफा हुआ श्मशान मा गिरकर सच मा भूत तो नाही बन गवा ?”

रवि ने सुना तो गोलू का मुँह मंगल फूफा की तरफ घुमाया तो गोलू ने मारे ख़ुशी के उछलकर कहा,”अरे मंगल फूफा तुमहू ज़िंदा हो ?”
मंगल फूफा ने ईंट साइड में फेंकी और कहा,”काहे के मंगल फूफा बे गोलू ? साले तुमहू तो हमको मारने का पूरा बंदोबस्त कर लिए थे हम जानते है कैसे ज़िंदा बचे है ? साले बिना दरवाजे की गाडी मा पीछे बैठाकर गाड़ी को जो भगाये हो तुम लोग , सीधा झाड़ियों मा जाकर गिरे है और सुबह सुबह कुत्ते हमाओ मुँह चाटकर गए सो अलग,,,,,,,,,,,,,

तुमने तो हमको ढूंढने की कोशिश तक नाही की बे गोलू ,,,,,,,,,,,,, और इह साला चिरकुट का कह रहा था तुमसे सारे फसाद की जड़ हम है , अरे फसाद की जड़ है उह्ह भाड़े की गाड़ी ,, जब से इह मा बइठे है साला तब से कुछो न कुछो गड़बड़ होय रही है,,,,,,,,,,,,,!!!!”
कहते हुए मंगल फूफा ने इधर उधर देखा एक मोटा सा डंडा मंगल फूफा के हाथ लगा और वे उसे उठाकर भागे गाडी की तरफ और चिल्लाये,”साला जे गाड़ी ही मनहूस है”

गोलू ने देखा तो मंगल फूफा को रोकने भागा और रवि को देखकर चिल्लाया,”अबे रवि रोक उसे”
गोलू और रवि मंगल फूफा को रोक पाते तब तक मंगल फूफा गाड़ी के पास पहुंच चुके थे। उन्होंने गाडी पर डंडा मारने के लिए हाथ उठाया और अगले ही पल डंडे को साइड में फेंक दिया और ड्राइवर सीट का दरवाजा खोलकर ड्राइवर सीट पर अंदर बैठ गया। गोलू रवि ने हैरानी से एक दूसरे को देखा और फिर मंगल फूफा की तरफ आकर कहा,”अबे जे का था बे फूफा ?”

“अब जे गाडी हम चलाएंगे”,फूफा ने गाड़ी का स्टेयरिंग सम्हालकर सामने देखते हुए कहा
गोलू ने सुना तो उसका माथा ठनका इतने में उसने देखा रवि मंगल फूफा के बगल वाली सीट पर आ बैठा है। रवि को घूरकर देखा तो रवि खिड़की के बाहर देखने लगा ,गोलू ने मंगल फूफा को देखा और कहा,”कैसे चलाई हो गाडी ? ब्रेक तक पाँव तो पहुंचते नाही तुम्हाये”

“अब ब्रेक सीधा लोकेशन पर जाकर ही लगी है गोलू , तुमको बैठना है तो पीछे बइठो वरना पैदल आ जाना”,मंगल फूफा ने कहा और गाड़ी स्टार्ट की।
कही मंगल फूफा सच में फूफा को छोड़कर ना चले जाए सोचकर गोलू पीछे आ बैठा जिसका एक दरवाजा गायब था और दूसरे दरवाजे की खिड़की का शीशा। मंगल फूफा ने हाथ जोड़कर ऊपर देखा तो पीछे बैठे गोलू ने कहा,”अब जे का कर रहे हो ?”

“भगवान् को याद कर रहे है”,मंगल फूफा ने कहा
“याद का करना अभी थोड़ी देर मा फेस टू फेस मीटिंग ही कर लेंगे”,गोलू ने चिढ़े हुए स्वर में कहा
“राम राम राम राम गोलू माँ कसम बहुते नेगेटिव इंसान हो तुमहू ,तबही ना तुम्हायी लंका लगी रहती है,,,,,,,,,,,अरे इंसान के जीवन मा कुछो अच्छा ना हो तो ओह्ह का कम से से कम बात तो,,,,,,,,!!!”,फूफा इतना ही कह पाया कि पीछे बैठे गोलू ने उठकर अपने हाथ से फूफा का मुँह बंद किया और गुस्से से कहा,”अब बंद करो तुमहाओ जे ज्ञान और गाडी चलाओ,,,,,,,,,,,,,साला सादी का टेंट का सादी के बाद लगाओगे ?”

फूफा ने हामी में गर्दन हिलायी तो गोलू ने उसे छोड़ दिया और पीछे आ बैठा। फूफा ने गाड़ी आगे बढ़ाई और जिस स्पीड में गाडी को भगाया फूफा ने सच ही कहा था कि अब ब्रेक लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एक तो ये लोग गूगल मेप देखकर जा रहे थे और गूगल मेप भी इंडियन भुआ से कम नहीं है वह सीधा सीधा किसी को उसकी मंजिल  तक पंहुचा दे ये आज तक नहीं हुआ इसलिए गूगल मेप ने जो जो रास्ता बताया फूफा उस रस्ते पर गाडी दौड़ाते रहे।

अब चाहे सामने खेत आये या सड़क फूफा ने भाड़े की गाड़ी को बना दिया था ऐरोप्लेन और पीछे बैठा गोलू मजबूती से बचे हुए दरवाजे को पकड़कर बैठा था फूफा को गालियाँ दे रहा था।

मनोज का घर , चकिया
गुड्डू भेस बदलकर बिंदिया से मिलने उसके घर गया लेकिन बिंदिया ने उसे लवली समझकर उसकी बात तक नहीं सुनी और उसे वहा से भगा दिया। वही बिंदिया की सहेली रुपए ने गुड्डू को ये आश्वासन दिया कि वह कल सुबह बिंदिया को उस से मिलवा देगी। इसी आस में गुड्डू वापस मनोज के घर चला आया और जो कपडे पहने थे वही पहनकर सो गया। मनोज मंगेश के कहने पर रातभर अपने नाचने गाने वालो के साथ बिंदिया के घर में था। सुबह वह घर आया और कमरे में आकर देखा तो पाया कि गुड्डू तो नहीं है लेकिन एक हट्टी कट्टी लड़की लहंगा चुन्नी पहने सो रही है।

मनोज का तो सर ही घूम गया। उसी तो अभी तक शादी भी नहीं हुई थी फिर उसके घर में लड़की ,वह समझने की कोशिश कर ही रहा था कि तभी उसकी पहचान आ एक लड़का आया और उसे आवाज दी। मनोज बाहर आया तो लड़के ने घबराये हुए स्वर में कहा,”मनोज भैया ! कल रात हमने लवली भैया को मंगेश के आदमियों के साथ देखा था ,लगता है लवली भैया पकडे गए”
मनोज ने सुना तो उसके चेहरे का रंग उड़ गया , जिसका डर था वही हुआ।

अंदर सोये गुड्डू की आँख खुली उसने बाहर झांककर देखा मनोज किसी से बात कर रहा था ये देखकर गुड्डू को याद आया कि सुबह उसे बिंदिया से मिलने जाना था तो वह खुद में ही बड़बड़ाया,”अगर हमहू सीधा जायेंगे तो घर से बाहिर जे मनोज हमको जाने नहीं देगा और बाहर गए तो उह्ह्ह मंगेश के आदमी हमे फिर से धर लेंगे,,,,,,,,,,,,,,एक काम करते है जे लहंगा चुन्नी पहनकर ही जाते है”

गुड्डू उठा जल्दी जल्दी अपने कपडे सही किये और चुन्नी को सर पर डालकर बड़ा सा घूंघट निकाल लिया और बचे पल्लू को कमर में खोंसकर बाहर आया और कमर मटकाते हुए मनोज और लड़के के सामने से निकला तो मनोज ने कहा,”ए तुमहू का जाय रही हो ?”
गुड्डू ने सुना तो रुका और मनोज की तरफ पलटकर उसके पास आया एक हाथ उसके कंधो पर रखा और दूसरे हाथ से उसके सीने पर धीरे से मुक्का मारकर लड़की की आवाज में कहा,”हाह ! रातभर तो तुम्हाये साथ ही रहे अब हमहू अपने घर भी ना जाये ? नॉटी”

लड़के ने सुना तो मनोज की तरफ देखकर मुस्कुराने लगा ,बेचारा मनोज कुछ समझ ही नहीं पाया और गुड्डू वहा से चला गया।
मनोज ने देखा लड़का उसे देखकर मुस्कुरा रहा है तो अगले ही पल उसे लड़के के मुस्कुराने की वजह समझ आयी और उसने कहा,”भक्क साला ! भागो यहाँ से”
लड़का वहा से चला गया और मनोज भी लवली को ढूंढने निकल पड़ा।  

मिश्रा जी का घर ,कानपूर
रातभर मिश्रा जी को लवली और बिंदिया के बारे में सोचकर नींद नहीं आयी और सुबह मिश्रा जी जल्दी उठ गए। वे अपने कमरे से बाहर आये और आँगन से बाहर सीढ़ियों के नीचे टहलते हुए दातुन लेकर अपने दाँत घिसने लगे। मिश्रा जी अभी टहल ही रहे थे कि तभी उन्हें गली में गज्जू गुप्ता आते दिखाई दिए। मिश्रा जी हैरान कि सुबह सुबह गज्जू गुप्ता यहाँ क्या कर रहे है ? गज्जू गुप्ता यानि गोलू के पिताजी वे दरवाजा खोलकर आये सीधा मिश्रा जी के घर और मिश्रा जी से दबे स्वर में कहा,”चिंता नाही करना मिश्रा जी हमहू है आपके साथ,,,,,,,,,,,,,!!”

अब तो मिश्रा जी और परेशान भला उन्हें किस बात की चिंता होगी ? और ऐसा तो क्या हुआ होगा जो गज्जू गुप्ता सुबह सुबह खुद उन्हें दिलासा देने आये है। मिश्रा जी गुप्ता जी से कुछ पूछ पाते या कुछ समझ पाते इस से पहले घर के बाहर स्कूटी आकर रुकी। गुप्ता जी और मिश्रा जी ने दरवाजे की तरफ देखा तो कुछ देर बाद दरवाजा खोलकर शर्मा जी अंदर आये ये देखकर इस बार मिश्रा जी और गुप्ता जी दोनों हैरान , दोनों ने एक दूसरे को सवालिया नजरो से देखा इतने में शर्मा जी उनके पास आये और मिश्रा जी से कहा,”टेंशन नाही लीजिये मिश्रा जी हम भी आपके साथ है,,,,,,,,,,,,!!!”

“तुम काहे साथ हो बे शर्मा ? हमरा तो समझ आता है जे के गुड्डू और हमाये गोलू आपस मा दोस्त है पर तुमहू कौन रिश्ते से हिया आये हो बे ?”,गुप्ता जी ने तुनककर कहा
अब गुप्ता जी कुछ बोले और शर्मा जी ना बिगड़े ऐसा भला कैसे हो सकता है ? शर्मा जी ने भी खीजकर कहा,”तुम्हाये जैसे नाही है कि कोनो रिश्ता हो तबही मुसीबत मा आदमी के काम आये”
“तुमहू कबो औरतों के काम नाही आये आदमियों के का काम आओगे बे शर्मा”,गुप्ता जी ने शर्मा जी का मजाक उड़ाकर कहा

“हाँ तो  तुम्हायी तरह लंगोट के ढीले नाही है हम , सब पिरोगराम देखे है हमहू तुम्हाये और उह्ह्ह फुलवारी के साथ,,,,,,,,,!!!”,शर्मा जी ने कहा
“का का का पिरोगराम देख लिए बे तुम हा ,गलतफहमी थी उह्ह्ह समझे ,, हमाये जैसे शरीफ आदमी का नाम नाही खराब करो तुम , लंगोट के पक्के है समझे गोलुआ की अम्मा के अलावा किसी पर बुरी नजर नाही डाले समझे”,गुप्ता जी ने भड़ककर कहा

“अबे जाओ गज्जू हमे ना सिखाओ”,शर्मा जी ने मुँह बिदकाकर कहा
मिश्रा जी दातुन हाथ में पकडे सुबह सुबह ये तमाशा देख रहे थे और फिर एकदम से कहा,”अबे हमे इह बताओ तुम दोनों सुबह सुबह हिया कर का रहे हो ?”
“अरे मिश्रा जी ! इन्हे हमने बुलाया है चकिया जाने के लिए”,सीढ़ियों पर खड़े आदर्श फूफा ने खुश होकर कहा
मिश्रा जी ने सुना तो उनका माथा ठनका उन्होंने अपना दातुन गज्जू को दिया और आदर्श फूफा को नीचे अपने पास बुलाकर उनकी गर्दन को अपनी बाँह में दबोचा और कहा,”आपकी अम्मा का ब्याह है हुआ जो इह बाराती इकठ्ठा किये हो,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

“अरे हमे लगा कही उह्ह्ह दिन के जैसे लल्लन और ओह्ह्ह के आदमी कही हम पर भारी नाही पड़ जाए बस इहलीये अपनी गेंग तैयार कर रहे थे”,मिश्रा जी की बाँह में दबे आदर्श फूफा ने मिमियाते हुए कहा
“काहे ! गुंडे है आप ? और आपसे किसने कहा मोहल्लेभर मा जे ढिंढोरा पीटने को ?”,कहकर मिश्रा जी ने आदर्श फूफा को छोड़ा और कहा,”साला हमहू खामखा गुड्डू गोलू को जुटियाते रहते है अब समझ आ रहा था सब के सब बकैत है हिया”

“मामला का है मिश्रा जी ?”,गज्जू गुप्ता ने मिश्रा जी की दी हुई दातुन से अपने दाँत घिसते हुए कहा
मिश्रा जी ने देखा तो गज्जू गुप्ता को घूरने लगे ये देखकर गुप्ता जी ने झेंपकर दातुन मिश्रा जी की तरफ बढ़ाया तो मिश्रा जी ने कहा,”एक ठो काम करो तुम्ही घिस ल्यो। साला तुमको देख के ना हमको पूरा यकीन है उह्ह्ह ससुरा गोलू तुम्हायी ही औलाद हो सकता है,,,,,,,,,,,,!!!”
“शांत हो जाईये मिश्रा जी और इह बताईये बात का है ? आपने हमे सुबह सुबह हिया काहे बुलाया है ?”,शर्मा जी ने अपनी चुप्पी तोड़ी

“अरे हम कहा बुलाये जे है ना भंड आदमी जे दारू पीकर रात मा फोन किये रहय होंगे आप दोनों को,,,,,,,,,,,,!”,कहकर मिश्रा जी आदर्श फूफा की तरफ पलटे और कहा,”आप फैलाये है अब आप ही समेटेंगे”

मिश्रा जी आदर्श फूफा को शर्मा जी और गुप्ता जी के पास छोड़कर अंदर चले गए। आदर्श फूफा उन दोनों के पास आये और कहा,”का आप दोनों भी , अरे हमहू तो बस आप दोनों से मजाक किये रहय”
“कैसा मजाक ?”,शर्मा जी ने पूछा
“अरे हमहू तो बस इह देखना चाह रहे थे कि आप तीनो की उह्ह सालों पहले वाली दोस्ती अभी भी है कि नाही , हमहू एक फोन किये और आप दोनों मिश्रा जी से मिलने सुबह सुबह चले आये, जे से पता चलता है आप तीनो की दोस्ती अभी भी मजबूत है।”,आदर्श फूफा ने कहा

“जे के लिए आप सुबह सुबह हमे हिया बुलाये , जानते है कित्ता इम्पोर्टेन्ट काम छोड़कर आये है हमहू ?”,शर्मा जी ने चिढ़कर कहा
“छत पर बैठे कबूतर उड़ाने के अलावा का ही काम है तुमको”,गुप्ता जी बड़बड़ये लेकिन पास खड़े शर्मा जी ने सुन लिया और जाते हुए गुप्ता जी से कहा,”तुमहू तो चुप ही रहो”
गुप्ता जी का शर्मा जी पर तो बस चला नहीं इसलिए खीजकर आदर्श फूफा से कहा,”उह्ह्ह गोलुआ न सही कहता है आपके बारे मा”

“का कहता है गोलू हमाये बारे मा ?”,आदर्श फूफा ने दाँत दिखाकर कहा
“यही कि आदर्श फूफा एक नंबर के चू#या आदमी है”,कहकर गुप्ता जी भी वहा से चले गए
आदर्श फूफा ने खुद के लिए इतना प्यारा नाम सुना तो चिल्लाकर कहा,”मुँह तोड़ देंगे तुम्हारा और तुम्हाये उह्ह नासपीटे गोलू का जो हमाये बारे मा अंट शंट कहे तो,,,,,,,,,,,,!!!”

गुप्ता जी तब तक मिश्रा जी के घर से बाहर आ चुके थे। अब बेचारे सुबह सुबह पैदल आये थे लेकिन जब शर्मा जी को स्कूटी स्टार्ट करते देखा तो शब्दों में चाशनी,”ए शर्मा ! हमका हुआ चौराहे तक छोड़ दोगे का ?”
शर्मा जी ने गुप्ता जी को देखा तो गुप्ता जी ने और प्यार से कहा,”अरे छोड़ दो ना यार , जे उम्र मा अब पैदल जियादा चला नहीं ना जाता है”
“आओ मरो”,शर्मा जी ने और गुप्ता जी उनके पीछे आ बैठे ,शर्मा जी ने अपनी स्कूटी आगे बढ़ाई और दोनों वहा से निकल गए।

ऊपर सो रहे लवली की नींद खुली , उसने ऊपर से झांककर देखा तो पाया आदर्श फूफा सुबह सुबह किसी से बहस कर रहे है। आँखे मसलते हुए लवली नीचे आया लेकिन तब तक सब जा चुके थे। लवली वापस जाने के लिए जैसे ही पलटा उसकी नजर सीढ़ियों के पास पड़े कागज पर पड़ी जिसे बीती शाम मिश्रा जी के हाथ से छीनकर आदर्श फूफा ने फेंका था। लवली ने उस कागज को उठाया और अंदर चला आया।

( गुड्डू ,गोलू , रवि के बाद अब क्या मंगल फूफा पंहुच पायेगा इस गाड़ी को लेकर चकिया ? क्या बिंदिया मिलेगी गुड्डू से या उस पहले ही गुड्डू पकड़ा जायेगा ? क्या लवली पढ़ेगा उस कागज को और जायेगा चकिया ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Manmarjiyan Season 4
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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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1 comment

Nency patel May 29, 2026 - 11:36 am

Chalo ab chakiya tamasha hona tay hai ab lovely bhi jayega apni bindiya ko lene

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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