Sanjana Kirodiwal
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Manmarjiyan Season 5 – 29

by Story With Sanjana September 7, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 29

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गोलू को मिश्रा जी और मिश्राइन से थोड़ी परसादी तो मिल ही चुकि थी रही सही कसर उसने तब पूरी कर दी जब मिश्रा जी ने उस से बाटा की चप्पल मांगी और गोलू महाराज ने उनको बाटा की चप्पल ले जाकर भी दे दी। गुड्डू अब तक चुप था लेकिन ये देखकर वह उठा और गोलू की तरफ आते हुए कहा,”अबे का बौराय गए हो गोलू ! पिताजी को चप्पल काहे थमाय दिए ?”

गोलू ने गुड्डू की तरफ देखा और खिंसियाकर कहा,”हमको लगा चचा को पहननी होगी”
“जे बख्त चप्पल पहिनकर का पिताजी तुम्हायी छाती पर चढ़ने वाले है ?”,गुड्डू ने गुस्से से कहा
“तो ?”,गोलू ने भी चिढ़कर ऊँचे स्वर में पूछा
“तुम्ही बताय दयो बाटा की चप्पल का काम आती है जे घर मा ?”,गुड्डू ने दाँत पीसकर कहा

गोलू को समझने में थोड़ा वक्त लगा लेकिन जैसे ही उसे समझ आया उसके हाथ पैर काँपने लगे , आँखों के आगे चाँद सूरज तारे चमकने लगे , उसने मिश्राइन की तरफ देखकर रोते हुए कहा,”ए चाची ! हमका बचाय ल्यो हमहू कुछो नाही किये है,,,,,,,,,,,अरे बिंदिया भाभी को उठाने का आइडिआ हम दिए पर उह्ह पर बर्क इह पूरा मिश्रा मण्डली किये रहय”
“का पूरा मिश्रा मण्डली बे ? हमको तो मालूम भी नाही था चकिया मा का चक्कर चलाय रहे तुम और इह गुडडुआ मिल के”,गुप्ता जी ने अपनी जगह पर खड़े होकर गोलू से कहा

गोलू मार खाकर पहले ही गुस्से में था गुप्ता जी की बात सुनकर और चिढ गया और सबको साइड कर उनके सामने आकर कहा,”का चक्कर चलाएंगे हमहू गुड्डू भैया के साथ ? उह्ह्ह का हमायी सहेली है या सावन मा झूला झूले है ओह्ह्ह के साथ जो चक्कर चलाएंगे,,,,,,,,,,,,,,,अरे हमहू चकिया गए थे अपने काम से गुड्डू भैया अपने काम से बीच मा आपस मा टकरा गए,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“अच्छा तो हमको एक ठो बात बताओ बिटवा जे तुम्हायी गाडी हमेशा जाकर गुड्डू की गाडी से ही काहे टकराती है ?”,,गुप्ता जी ने कहा

“ए पिताजी ! आप का हमायी मर्दानगी सक कर रहे है ?”,गोलू ने तनकर कहा
“अरे हमको तो अपनी मर्दानगी सक है कि हमहू इत्ता खराब प्रोडक्ट मार्किट मा कैसे निकाल दिए ?”,गुप्ता जी ने कहा
गोलू ने गुस्से से अपनी आँखे मीची , दाँत भींचे , दोनों हाथो की मुट्ठिया कसी और हाथो को हवा में उठाकर  चिल्लाया,” पिताजीईईईईईई”
मिश्रा जी ने देखा गुप्ता जी की बातो में कोई फ़िल्टर नहीं है तो उन्होंने बिंदिया , शगुन , वेदी और रूपा से अंदर जाने को कहा

“रूपा जी को रहने दीजिये ना”,मिश्रा जी ने बगल में नीचे उकडू बैठे मंगल फूफा ने कहा तो मिश्रा जी ने उनके सर पर एक मुक्का मारकर कहा,”काहे ? ओह्ह्ह के बिना मन नाही ,  चुप करके बइठे रहो रूपा का हिसाब बाद मा करेंगे हम पहिले बाकि सब से निपट ले”

मिश्रा जी ने चारो को अंदर जाने को कहा तो मिश्राइन ने कड़कदार आवाज में कहा,”कोई कही नहीं जाएगा ! सब यही बैठेंगे अब जब तमाशा हो ही रहा है तो सब देखो,,,,,,,,,,आखिर गलती तो सबकी है ना फिर सजा अकेले गोलुआ को काहे ?”
गोलू ने जैसे ही सुना गुप्ता जी के सामने से हटा और मिश्राइन के कदमो में दण्डवत प्रणाम करके कहा,”अरे चाची ! इह डायलॉग इत्ता लेट से काहे बोली तुमहू , का हमायी बत्ती बनने का इन्तजार कर रही थी ?”

मिश्राइन गोलू के सामने से हटकर साइड चली गयी , गोलू ने सर उठाकर देखा तो पाया सामने कोई नहीं है वह उठा और मिश्रा जी के सामने आकर बड़े हो घमंड से कहा,”क्यों चचा ! सुने ना चाची का कही हमायी अकेले की गलती नाही थी , हिया बैठे जे सब मर्द इह काण्ड मा शामिल है , सजा देनी ही है तो सबको दो,,,,,,,,,,,!!!”

“हिया आवा”,मिश्रा जी ने गोलू को अपने पास आने का इशारा किया तो गोलू ख़ुशी ख़ुशी उनके करीब आया और इतराकर कहा,”देखो चचा ! अब माफ़ी वाफी नाही मांगना हमसे , का है कि सुताई तो हमायी हो चुकी है अब हमहू कोम्प्रोमाईज़ नाही करेंगे”
मिश्रा जी ने गोलू के दोनों कान पकडे और उसे आगे पीछे करके झूला झुलाते हुए कहा,”तुमसे माफ़ी माँगे हमायी जुत्ती , तुमको का लगता है गोलू तुम्हरे जे चकिया वाले काण्ड की वजह हमहू तुमको हिया न्योता दिए है ?”

“उसके अलावा हम का किये ?”,गोलू ने घबराटभरे स्वर में कहा क्योकि मिश्रा जी के रूप में उसे साक्षात् मौत नजर आ रही थी।
“तुमहू जो किये हो ना बिटवा उह पिछले एक हफ्ते से हमायी छाती पर मूंग दल रहा है। इह जो तुम्हायी जबान है ना इह है सारे फसाद की जड़,,,,,,,,,,,,,!!!”,मिश्रा जी ने गुस्से से दाँत पीसकर कहा
मंगल फूफा वही बैठे थे तपाक से बोल पड़े,”तो काट दयो”

“जरा एक मिनिट हमको छोड़ेंगे”,गोलू ने मिश्रा जी से रिक्वेस्ट की तो मिश्रा जी ने उसके कान छोड़ दिए और अगले ही पल गोलू ने मंगल फूफा को दबोचकर दो चार घुसे उन्हें जमा दिए और कहा,”का काट दयो ? फूफा तुमहू हमाये साथ होकर हमाये खिलाफ बात कर रहे हो तुमको आज छोड़ेंगे नाही हम,,,,,,,,,,!!!”
“अरे गोलू हम तो उनको समझा रहे थे”,मंगल फूफा ने मरे हुए स्वर में कहा क्योकि उनकी गर्दन गोलू की बाँहो में फंसी थी

“समझाय रहे थे कि हमे मरवाय रहे थे,,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने मंगल फूफा के टकले पर मुक्के मारकर कहा
गुड्डू ने मंगल फूफा को छुड़वाया और कहा,”का कर रहे हो गोलू ?”
“दिखाई नाही देता सुअरो की तरह लड़ रहे है दोनों”,बहुत देर से शांत बैठे आदर्श फूफा ने कहा तो गुड्डू चिढ गया और आदर्श फूफा की तरफ आकर कहा,”आप चुप रहिये फूफा,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“काहे चुप रहे ? हमहू का गोलू है जो तुम्हायी बात सुनकर चुप रहे हम तो बोलेंगे”,आदर्श फूफा ने हाथो को नचाकर कहा  

गोलू ने गुड्डू को साइड में धक्का दिया तो गुड्डू जा गिरा रूपा की बाँहो में ये देखकर शगुन उठी और गुड्डू को घूरते हुए वहा से चली गयी। नवरतन ने गुड्डू को रूपा की बाँहो में देखा तो अपना कोट उतारकर फेंका और गुड्डू की तरफ आते हुए चिल्लाया,”ए गुड्डू ! हमायी रूपा से दूर रहना”
नवरतन गुड्डू तक पहुंच पाता इस से पहले मंगल फूफा ने उसे साइड में धक्का देकर कहा,”तुम्हायी कहा से हुई बे सारी रात जागकर दही जमाये हम और सुबह रायता खाओ तुम”

मंगल फूफा भी रूपा तक कहा ही पहुंच पाए , वे जैसे ही आगे बढे मिश्रा जी ने हाथ में पकड़ी बाटा की चप्पल फेंककर मंगल को मारी और मंगल मुँह के बल जमीन पर। गोलू आदर्श फूफा से उलझ गया और उधर गुड्डू रूपा की बाँहो से निकलकर साइड आया तो नवरतन ने उसे पकड़ लिया। लवली और बिंदिया मायूसी से एक दूसरे को देखने लगे और फिर लवली ने वेदी के साथ बिंदिया को अंदर भेज दिया। वह उठा और गोलू को समझाने आया तो गोलू ने उसे ही धक्का दे दिया और लवली मिश्राइन के कदमो में जा गिरा।

मिश्राइन ने तो ये तमाशा देखकर अपना सर ही पकड़ लिया और आकर मिश्रा पर चिल्लाई,”इह का तमाशा लगा रखा है गुड्डू के पिताजी , इह घर है कि कोई तबेला,,,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी ने मिश्राइन की तरफ देखा और कहा,”अब समझी कुछो मिश्राइन , जे ही दिखाने के लिए जे सबको हिया बुलाय रहे हमहू,,,,,,,,,,अब भी तुमको लगता है चकिया मा गलती हमायी थी”

मिश्राइन ने सुना तो साइड में चली गयी और सबको समझाने लगी लेकिन कोई उनकी सुने तब ना। इन सब में अगर कोई शांत बैठा था तो वो थे गुप्ता जी , गुप्ताइन , शर्मा जी और शर्माईन ,, क्योकि इस नए कांड का जो मास्टरमाइंड था वो था गोलू , अब गुप्ता जी और गुप्ताइन का वो इकलौता बेटा था और शर्मा जी शर्माईन का इकलौता दामाद इसलिए चारो ही चुप थे।

गोलू को मार खाते और रोते बिलखते देखकर शर्माईन का दिल पिघल गया और उन्होंने शर्मा जी से कहा,”ऐ जी पिंकिया के पापा ! बेचारे दामाद जी कित्ता परेशान होय रहे है ओह्ह का जे झंझट से बाहिर निकालिये ना। का हालत होय गयी है ओह्ह की”

शर्मा जी ने बगल में बैठे गुप्ता जी को देखा और मुँह बनाकर कहा,”जैसा खेत वैसी फसल,,,,,,,!!!”शर्मा जी कुछ बोले और गुप्ता जी ना भड़के ऐसा भला कैसे हो सकता है उन्होंने गुस्से से कहा,”तो तुमहू काहे सूअर की भांति जे खेत मा घुसकर फसल खराब कर रहे हो ?”

 “अरे फसल तो तुम्हरी पहिले से खराब है , हमको दोष नाही दयो समझे”,शर्मा जी भी भड़क गए
“दोष नाही तुमको हमहू डोज देंगे,,,,,,,,,,,तुम्हायी भैंस के बच्चे बेचू,,,,,!!!!”,कहकर गुप्ता जी शर्मा जी पर टूट पड़े
अब दोनो को लड़ते देखकर शर्माईन और गुप्ताइन भी उलझ गयी वो कहे गुप्ता जी गलत वो कहे शर्मा जी गलत और दोनों में तू तू में में शुरू हो गयी।

मिश्राइन भी सबको समझकर थक गयी तो मिश्रा जी उठे अपनी नीम की संटी उठायी और सबको नंबर से सुतने लगे। सबसे पहले हाथ लगे मंगल फूफा , मिश्रा जी ने उन्हें दो चार संटी मारी और उनकी गुद्दी पकड़कर उन्हें साइड में फेंककर कहा,”हिलना नाही वहा से”
नवरतन को पड़े दो तो वह तो भागकर एक कोने में खड़ा हो गया। गुड्डू गोलू को जो पड़े उनकी गिनती मिश्रा जी ने नहीं की और दोनों अपने हाथ पैर पीठ सहलाते एक तरफ खड़े हो गए।

आदर्श फुआ को मिश्रा जी मार नहीं सकते क्योकि वो ठहरे घर के दामाद लेकिन आदर्श फूफा की किस्मत इतनी बुरी की जैसे  नीचे पैर रखा रूपा का धक्का उनको लगा और आदर्श फूफा गुड्डू और गोलू के पैरों में
 शर्मा जी और गुप्ता जी को भी दो दो संटी पड़ी और दोनों सीधे हो गए। मिश्रा जी ने गुस्से से सबको घुरा और जाकर फिर अपनी जगह बैठ गए और कहा,”अब अगर किसी ने चू भी किया तो याद रखना हमसे बुरा कोई ना होगा,,,,,,,,,,,,!!!”

सब चुपचाप खड़े हो गए तभी भुआ रोते हुए आयी और आदर्श फूफा से कहा,”कैसे जालिम आदमी हो तुमहू कोमलिया के पिताजी , हमहू हुआ रोवत रहे और  
तुमहू हिया सबके साथ हंसी ठिठोली करत रहे , हमका मनाने भी नाही आये”
“अरे ! तुमको का कोनो होली दिवाली हो जो तुमको मनाये ?”,आदर्श फूफा ने बुरा सा मुँह बनाकर कहा क्योकि मुँह के बल गिरने से उनका होंठ सूज गया था

भुआ ने सुना तो और जोर से रोने लगी ये देखकर मिश्रा जी ने कहा,”चुप ! बिल्कुल चुप। आप का छोटी बच्ची है जो बात बात पर रोना सुरु कर देती है,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“बच्ची का तो पता नाही अभी भुआ का जे टंकी जैसा पेट चीर दो तो 20 किलो आटा जरूर निकलेगा”,गोलू ने दबे स्वर में गुड्डू से कहा तो गुड्डू ने भी गोलू की तरफ झुककर दबे स्वर में कहा,”और का खाने और रोने के अलावा आता ही का है जे का ?”

गुड्डू और गोलू को खुसर फुसर करते देखकर मिश्रा जी ने कहा,”जे चोंच से चोंच मिलाना बंद करो तुम दोनों,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी की फटकार सुनकर गुड्डू और गोलू सीधे खड़े हो गए। मिश्रा जी ने एक नजर सबको देखा और कहा,”का जिनावर हो का तुम सब लोग ? हुआ रामनगर की पहाड़ी और चकिया मा तमाशा करके चैन नाही मिला जो अब हिया सुरु हो गए,,,,,,,,,,,हमको बस इतना बताओ कि हमहू हिया सिर्फ गोलू को बुलाय रहे तो फिर तुम सब हिया कर का रहे हो ?”

“हमको तो आपने ही बुलाया था कुछो जरुरी बात करने के लिए , जे शर्माईन ने देखा तो इह भी चली आयी”,शर्मा जी ने कहा
“हमसे आप ही कहे रहे कि शाम मा पिरोगराम है , गोलू को भेज देना तो हमने सोचा खाली गोलू को काहे बुलाया तो हम भी चले आये , अब हम आएंगे तो गुप्ताइन भी आएँगी”,गुप्ता जी ने अपनी सफाई में कहा
“अरे हमहू कोनो पिरोगराम मा नाही आये है हमहू तो मिश्राइन को ताना देने आये है , छोटे मोटे हर फंक्शन में हमको बुलाया और इत्ते बड़े पिरोगराम की खबर तक ना दी”,गुप्ताइन ने मुँह बनाकर कहा

गुड्डू , लवली , आदर्श फूफा और रूपा तो उसी घर में रह रहे थे तो वो क्या कहते इसलिए चुप रहे। गोलू और मंगल फूफा को मिश्रा जी ने बुलाया था अब बचा नवरतन तो मिश्रा जी की नजरे उस पर जा ठहरी और उन्होंने कहा,”और का रे नवरतन ! तुमहू इत्ती रात मा किसका नाप लेने आये हो हिया ?”
“हमहू तो बस रूपा जी से मिलने आये थे”,नवरतन ने शर्माते हुए कहा

मिश्रा जी ने सुना तो गोलू की तरफ देखा और कहा,”ए गोलू ! पहिले जे ससुरे को मारो”
मिश्रा जी की बात सुनकर गोलू से पहले मंगल फूफा नवरतन पर कूद पड़ा और रूपा चिल्लाई,”नवरतन जी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
रूपा के मुँह से नवरतन का नाम सुनकर , उसकी आँखों में नवरतन के लिए दर्द देखकर मंगल फूफा ने अपने सीने पर हाथ रखा और दो कदम पीछे हटकर आसमान को देखा।

( तो क्या मिश्रा जी ने सबको इक्क्ठा इसलिए किया ताकि मिश्राइन को चकिया वाली सिटुअशन समझा सके ? क्या यही था गोलू का आखरी कांड या असली कांड सामने आना बाकि है ? क्या रूपा ने चुन लिया है सबके सामने अपना जीवनसाथी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan Season 5
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गोलू ने गुड्डू को साइड में धक्का दिया तो गुड्डू जा गिरा रूपा की बाँहो में ये देखकर शगुन उठी और गुड्डू को घूरते हुए वहा से चली गयी। नवरतन ने गुड्डू को रूपा की बाँहो में देखा तो अपना कोट उतारकर फेंका और गुड्डू की तरफ आते हुए चिल्लाया,”ए गुड्डू ! हमायी रूपा से दूर रहना”
नवरतन गुड्डू तक पहुंच पाता इस से पहले मंगल फूफा ने उसे साइड में धक्का देकर कहा,”तुम्हायी कहा से हुई बे सारी रात जागकर दही जमाये हम और सुबह रायता खाओ तुम”

गोलू ने गुड्डू को साइड में धक्का दिया तो गुड्डू जा गिरा रूपा की बाँहो में ये देखकर शगुन उठी और गुड्डू को घूरते हुए वहा से चली गयी। नवरतन ने गुड्डू को रूपा की बाँहो में देखा तो अपना कोट उतारकर फेंका और गुड्डू की तरफ आते हुए चिल्लाया,”ए गुड्डू ! हमायी रूपा से दूर रहना”
नवरतन गुड्डू तक पहुंच पाता इस से पहले मंगल फूफा ने उसे साइड में धक्का देकर कहा,”तुम्हायी कहा से हुई बे सारी रात जागकर दही जमाये हम और सुबह रायता खाओ तुम”

गोलू ने गुड्डू को साइड में धक्का दिया तो गुड्डू जा गिरा रूपा की बाँहो में ये देखकर शगुन उठी और गुड्डू को घूरते हुए वहा से चली गयी। नवरतन ने गुड्डू को रूपा की बाँहो में देखा तो अपना कोट उतारकर फेंका और गुड्डू की तरफ आते हुए चिल्लाया,”ए गुड्डू ! हमायी रूपा से दूर रहना”
नवरतन गुड्डू तक पहुंच पाता इस से पहले मंगल फूफा ने उसे साइड में धक्का देकर कहा,”तुम्हायी कहा से हुई बे सारी रात जागकर दही जमाये हम और सुबह रायता खाओ तुम”

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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