Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 30

by Story With Sanjana September 9, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 30

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी के प्रोग्राम में बाकि सब लोग तो उनके अपने थे और सबके पास प्रोग्राम में आने का अपना अपना रीजन भी था लेकिन नवरतन बिन बुलाये मेहमान की तरह वहा आ पहुंचा था और जब उसने अपने वहा आने की वजह बताई तो मिश्रा जी ने उसे भी थोड़ी परसादी दे ही दी। नवरतन को मारने का मौका मिले और मंगल फूफा हाथ साफ़ ना करे ऐसा भला कैसे हो सकता था ? मंगल फूफा नवरतन पर कूद पड़ा तो रूपा चिल्लाई,”नवरतन जी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

रूपा के मुँह से नवरतन का नाम सुनकर , उसकी आँखों में नवरतन के लिए दर्द देखकर मंगल फूफा ने अपने सीने पर हाथ रखा और दो कदम पीछे हटकर आसमान को देखा लेकिन अगले ही पल रूपा की आवाज उनके कानों में पड़ी,”नवरतन जी ! हमाये कपडे छोड़कर आप हिया का कर रहे है ? अरे बख्त से सिलेंगे नाही तो कल सुबह सुबह हम पहिनेंगे का ?”
गोलू ने मंगल फूफा का कंधा थपथपाया और कहा,”ए फूफा ! साँस ल्यो साँस ल्यो , रूपा सिर्फ अपने कपड़ो के बारे मा पूछ रही है”

गोलू की बात सुनकर मंगल फूफा की जान में जान आयी। रूपा की बात सुनकर आदर्श फूफा बड़बड़ाये,”हिया बेचारे नवरतन का बेंड बज गवा और इह महारानी को कपड़ो की पड़ी है”
“तुमको ओह्ह्ह के कपड़ो की बड़ी चिंता है”,आदर्श फूफा का बगल में खड़े गुप्ता जी ने कहा तो आदर्श फूफा मुँह बनाकर दूसरी तरफ चले गए।

नवरतन को अच्छी खासी मार पड़ चुकी थी इसलिए मिश्रा जी ने कहा,”ए नवरतन सुनो ! जे हमाये घर का मामला है हिया तुम्हरा कोनो काम नाही , जाओ अपने घर जाओ”
“मिश्रा जी ! अब जब आ ही गए है तो हमाओ फैसलों भी कर देओ , जे रूपा से पूछ ल्यो इह हमसे ब्याह करि है कि जे 2 बच्चो के बाप मंगलू से,,,,,,,,,,!!!”,नवरतन ने कराहते हुए कहा

“हाँ हाँ तुमहू तो बड़े कोनो रियासत के राजकुमार हो ना,,,,,,,,,,,और दो बच्चो के बाप से का मतलब है बे तुम्हरा”,कहते हुए मंगल फूफा आगे आये और साँस अंदर खींची तो उनका टंकी जैसा पेट भी थोड़ी देर के लिए अंदर चला गया लेकिन अगले ही पल साँस बाहर भी छोड़ी तो शर्ट का बटन टूटकर सीधा जाकर लगा गुप्ता जी की आँख में और उन्होंने मंगल को दबोचकर दो घुसे मारते हुए कहा,”अबे कौन बोला था तुमको इतना चुस्त कमीज पहिनकर आने को,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

मंगल फूफा को मार पड़ते देखकर नवरतन के दिल को सुकून मिला लेकिन मिश्रा जी ये देखकर कंटाल गए उन्होंने गोलू से बाटा की चप्पल उठाकर लाने का इशारा किया तो गोलू को कुछ देर पहले पड़ी मार याद आ गयी और उसने घबराकर ना में गर्दन हिला दी। मिश्रा जी ने घूरकर देखा तो गोलू चप्पल लेकर आया और दूर से ही मिश्रा जी को थमा दी। मिश्रा जी ने खींचकर एक चप्पल फेंकी गुप्ता जी पर और चिल्लाकर कहा,”अबे का भांग खाकर आये हो गुप्ता ? साला हमहू हिया मामला सुलटाने बइठे है पर तुम लोगन का टंटा ही खत्म नाय हो रहा,,,,,,,,!!!!”

चप्पल खाकर और मिश्रा जी की डांट सुनकर गुप्ता जी ने मंगल फूफा को छोड़ दिया।
“कान खोलकर सुन ल्यो हमायी बात ! तुम्हरा और इह हाफ टिकट का जोन मेटर है उह्ह्ह घर जाकर निपटना , हिया चरस बोई ना तो साला हम तुम दोनों की जिंदगी माँ चरस बो देंगे,,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने गुस्से से कहा तो गुप्ता जी चुपचाप खड़े हो गए।

मिश्रा जी ने रूपा की तरफ देखा और कहा,”सुनो बिटिया ! तुम्हाये चक्कर मा जे दोनों गली के कुत्तो जइसन लड़ रहे है , तुमहू अपना फैसला सुनाय के हम पे अहसान करो”
रूपा ने एक नजर नवरतन की तरफ देखा , एक नजर मंगल फूफा की तरफ देखा और फिर मिश्रा जी की तरफ बोली,”हम अपना फैसला कल सुबह सुनाई है”

“ठीक है तुमहू अंदर जाओ”,मिश्रा जी ने रूपा से अंदर जाने को कहा और फिर पलटकर नवरतन से बोले,”सुन लिया ! चलो अब अपने घर का रास्ता नापो सुबह आ जाना नहा धो के,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“सुबह होने मा कितनो ही बख्त है मिश्रा जी , हमहू हिया बैठकर ही इन्तजार कर लेते है , कल सुबह रूपा को साथ लेकर ही चले जाही है अपने घर नई”,नवरतन ने झेंपते हुए कहा

मंगल फूफा ने सुना तो गुस्से से नवरतन को देखा लेकिन मिश्रा जी के सामने कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई इसलिए गुस्से का घूंठ पीकर रह गया।
“तुमको कैसे पता कल सुबह तुमहाओ नाम लेही है ? चुपचाप अपना मनहूस सरीर उठाओ और निकलो वरना तुम्हरे इंचटेप से तुम्हे ही नाप देंगे”,मिश्रा जी से पहले गोलू बोल पड़ा

गोलू बात सुनकर नवरतन भड़क गया और गोलू के करीब आकर कहा,”अगर रूपा ने कल हमको ना कहा ना तो हमाये 25 हजार तैयार रखना तुमहू समझे”
25 हजार का नाम सुनकर गोलू को पसीने आ गए हालंकि पैसे उनसे पिंकी को दिए थे और सम्हालकर रखने को भी कहा था लेकिन जो हो रहा था उसकी वजह भी तो गोलू ही था ना।

नवरतन गोलू को धमकाए और गुड्डू सुन ले ऐसा भला कैसे हो सकता था ? उसने नवरतन को साइड किया और कहा,”ओह्ह्ह चचा ! पिताजी ने कहा ना सुबह आने को फिर गोलू पर काहे चढ़ रहे है ? और का 25 हजार 25 हजार कर रहे है ,, दे देंगे तुम्हाये पैसे अभी निकलो तुम”
“गुड्डू,,,,,,,,,,,!!!”,मिश्रा जी ने कड़क स्वर में कहा तो गुड्डू नवरतन से पीछे हट गया
नवरतन ने भी गुड्डू और गोलू को घुरा और वहा से चला गया। नवरतन के जाने से मंगल फूफा की जान में जान आयी।

मिश्रा जी शर्मा जी और गुप्ता जी की तरफ पलटे और कहा,”मानते है तुम दोनों को चकिया ले जाने वाले हम थे पर का हम कहे थे हुआ हमायी छीछा लेदर करवाने को,,,,,,,,काहे हमायी पूछ पकड़ के पीछे पीछे चल दिए , अरे मना भी तो का सकते थे। तुम लोगन के चक्कर मा का का नहीं देखे हम,,,,,,,,,,और अब हिया हमायी छाती पर चढ़कर फिर तांडव कर रहे हो,,,,,,कोई पिरोगराम नाही है हिया , अपनी अपनी घरवाली को साथ लो और घर जाओ”

मिश्रा जी की फटकार सुनकर गुप्ता जी ने बिना देखे गुप्ताइन समझकर शर्माईन का हाथ पकड़ा और जाने लगे तो मिश्रा जी ने हाथ में पकड़ा दूसरा चप्पल फेंककर कहा,”अबे अपनी वाली को लेकर जाओ”
“जे ससुरे पर तो हमको सुरु से भरोसा नाही है,,,,!!!”,शर्मा जी ने गुप्ता जी के हाथ से शर्माईन का हाथ छुड़ाकर कहा
“भरोसा करके का हमाये साथ बैंक मा जॉइन्ट अकाउंट खुलवाना है तुमको,,,,,,,,,,,,,,ए गुप्ताइन चलो”,गुप्ता जी ने कहा और आगे बढ़ गए।

गुप्ता जी और गुप्ताइन को वहा से जाते देखकर गोलू भी चुपके से खिसकने लगा तो मिश्रा जी ने कहा,”तुम कहा चले महाराज ? तुमहाई खातिरदारी तो अभी बाकि है”
गोलू ने सुना तो रोआँसा होकर वापस अपनी जगह पर खड़ा हो गया , उसे देखकर मंगल फूफा ने दबे स्वर में कहा,”अरे गोलू सेड काहे होते हो खातिरदारी बाकि है मतलब इति मार के बाद कुछो बढ़िया खाने को मिलेगा”

गोलू मंगल फूफा की बात का भला क्या जवाब देता उसने मायूसी से गुड्डू की तरफ देखा तो गुड्डू ने कहा,”जान दयो गोलू जे बेचारा इह कहानी मा नवा है”  

शर्मा जी , शर्माईन , गुप्ता जी और गुप्ताइन वहा से चले गए बचे मिश्रा जी , मिश्राइन , लवली , गुड्डू , आदर्श फूफा , राजकुमारी भुआ , मंगल फूफा और रोनी सूरत लिए गोलू महाराज ,, गोलू ने अपनी पूरी बुद्धि लगा ली लेकिन उसे नहीं याद आया कि मिश्रा जी किस कांड की बात कर रहे है , थककर उसने मिश्रा जी की तरफ देखा और कहा,”चचा ! अब हम कौनसा कांड किये ?”
“हिया आवा जरा”,मिश्रा जी ने प्यार से कहा

“ए चचा ! हमहू इत्ते भी पगलेट नाही है , हमको पता है हुआ बुलाकर फिर हमे मारोगे”,गोलू ने उछलकर कहा
“वो तो हम वहा आकर भी कर सकते है , हमहू तो तुमको कुछो दिखाना चाहते है”,कहते हुए मिश्रा जी बगल में पड़ा फोन उठाया जो कि राजकुमारी भुआ का था।

गोलू सर खुजाते हुए मिश्रा जी की तरफ बढ़ गया। मिश्रा जी के हाथ में फोन देखकर गुड्डू को याद आ गया कि मिश्रा जी किस काण्ड की बात कर रहे थे , जिसकी वजह से गोलू फिर पिटने वाला था। गुड्डू गोलू को रोक पाता इस से पहले तो गोलू महाराज लपक कर मिश्रा जी के पास

मिश्रा जी ने फोन में व्हाट्सप्प ग्रुप खोलकर गोलू को एक चुटकला दिखाया और कहा,”इह पढ़ो जरा”
गोलू ने चुटकला पढ़ा और ताली मारकर हँसते हुए कहा,”का गजब का चुटकला है हमायी तो हंसी नाही रुक रही”
“जानते हो इह बाटसप्प ग्रुप कौन बनाया ?”,मिश्रा जी ने पूछा
“जिसने भी बनाया है चचा ओह्ह का हमायी तरफ से 21 तोपों की सलामी,,,,,,वैसे बनाया किसने है ?”,गोलू ने हँसते हुए कहा

मिश्रा जी ने गोलू को एडमिन का नाम दिखाया तो गोलू ने पढ़ा,”पिंकेश , पिंकेश गुप्ता ! अरे इह तो हम है चचा ,, आप कहो तो आपको भी ऐड कर ले इह मा”
मिश्रा जी ने फोन साइड में रखा और गोलू की गुद्दी पकड़कर उसे झूला झुलाते हुए कहा,”कौन बोला तुमको इह बाट्सअप्प ग्रुप बनाने को और बनाया तो बनाया जे मा राजकुमारी को ऐड करने का ज्ञान किसने दिया और राजकुमारी को ऐड किया तो किया साला ओह्ह्ह का जे घर की खबर देने को किसने बोला ?”

गोलू को काटो तो खून नहीं अब उसे समझ आया कि पिछले सीजन का सबसे बड़ा कांड तो उसने ये किया था।
शब्द गोलू के गले में ही अटक गए मिश्रा जी ने उसे दो तीन घुसे मारे और बाल पकड़कर गुड्डू की तरफ फेंका तो गोलू रोते हुए गुड्डू से जा चिपका और कहा,”ए गुड्डू भैया हमका बचाय ल्यो,,,,,,,,,!!!!”

“हमने तुमसे पहिले ही कहा था गोलू कि इह सब लफड़ा मा नाही पड़ो लेकिन तुमहू हमायी सुने नाही , अरे का जरूरत थी भुआ के साथ बाटसप्प ग्रुप बनाने की ?”,गुड्डू ने दबे स्वर में गोलू को झिड़ककर कहा तो गोलू और जोर से रोने लगा
“ए गुड्डू भैया गलती हो गयी ! हमहू साला अपना बाटसप्प ही डिलीट कर देंगे इह बार बचाय ल्यो , मिश्रा जी का गुस्सा देखकर तो लग रहा है कल का सूरज नाही देख पाएंगे हम”,गोलू ने रोते हुए कहा

गुड्डू बेचारा क्या करता ? गलती तो गोलू ने की थी वो भी बड़ी वाली क्योकि उसके व्हाट्सप्प ग्रुप के चक्कर में ही भुआ और फूफा पिछले एक हफ्ते से मिश्रा जी की छाती पर मूंग दल रहे है और तो और आदर्श फूफा मिश्रा जी के साथ चकिया भी पहुंच गए और वहा जो तमाशा हुआ उस से अनजान तो गोलू भी नहीं था !

अब गोलू जैसा भी हो है तो गुड्डू का दोस्त ही न इसलिए गुड्डू ने गोलू को अपने पीछे करके मिश्रा जी से कहा,”पिताजी ! जाने दीजिये ना उह्ह तो पुरानी बात है”
“जाने दे ? इह ससुरे के चक्कर मा का का सुननो पड़ रहो हमे उह्ह्ह भी तुम्हरी भुआ और तुम्हरे फूफा से,,,,,,,,,,,,,,साला हमाये घर मा आकर हमहि को सुनाय दे रहे और इह सब जे महमूर्ति की वजह से हुआ,,,,,,,,,,,,अरे कानपुर मा का लड़किया मर गयी है जो राजकुमारी के साथ बाट्सअप्प ग्रुप बनाये रहे ,

ऊपर से घर की बात बताय रहे उह्ह्ह अलग,,,,,,,,,,, इसी को कहते है घर का भेदी लंका ढहाये , अपनी लगायी बुझती नाही दुसरो के घर मा आग लगाय , और तुमको जियादा पियार आय रहा है जे पर तो आओ तुमहू भी लेइ ल्यो थोड़ी परसादी”,मिश्रा जी ने गुस्से से कहा क्योकि इन दिनों आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ ने उन्हें कुछ ज्यादा ही तंग किया था

गुड्डू ने सुना तो मिश्रा जी से आगे कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई , उसने गोलू की बाँह पकड़ी और उसे अपने पीछे से निकालकर आगे खड़ा कर दिया
“बस का गुड्डू भैया ! जे ही थी आपकी दोस्ती ?”,गोलू ने रोआँसा होकर कहा
“तुम्हायी दोस्ती के चक्कर मा हमहू मार नाही खाएंगे , साला फैलाओ तुम समेटे हम ,, का जिंदगीभर जे ही करते रहेंगे”,गुड्डू ने गोलू को फटकार लगायी

आदर्श फूफा ने जब सुना कि गोलू भुआ के साथ मिलाकर व्हाट्सप्प ग्रुप बनाया तो आकर गोलू की कोलर पकड़ी और कहा,”का रे छछूंदर ! लाइन मारने के लिए तुमको हमायी राजकुमारी ही मिली ! लाज शरम भूल गए का ? अरे भुआ है उह्ह्ह तुम्हायी , उमर और सरीर मा तुमसे डबल , ओह्ह्ह के बाद भी जे नीच हरकत,,,,,,,,,,,,,अरे तुम पर तो हमको पहिले से सक था”

कहकर आदर्श फूफा ने गोलू को पीछे धकियाया और राजकुमारी की तरफ आकर बोले,”लेकिन तुम , तुम्हरी चॉइस को का हुई गवा राजकुमारी , जे गोलू मिला तुमको,,,,,,,,,अरे जे ससुरे ने तुम्हरी दुइ चार मीठी मीठी तारीफ का कर दी तुमहू जे के चक्कर मा पड़ गयी ! तबही ना दिन दिन भर चुटकले पढ़कर हंसती थी,,,,,,,,,,,,!!!”

“का कहा तुमने ? हमहू और गोलू के चक्कर मा , अरे उह्ह्ह बिटवा की उम्र का है हमरे हमहू ओह्ह्ह के साथ चक्कर चलाएंगे ? इह सुनने से पहिले हमहू मर काहे नाही गए रे अम्मा,,,,,,,,,,,,,,!!!”, भुआ ने रोते हुए कहा और छाती पीटते हुए अंदर चली गयी।
मिश्रा जी ने देखा तो अपना सर पकड़ लिया , इतना तो वे जान चुके थे कि इस घर के लोगो को सीधे ढंग से कोई भी बात समझ नहीं आती थी।

“इह का किये आदर्श बाबू ! का सोच के जिज्जी पर इत्तो बड़ो इल्जाम लगाय रहे,,,,,,,,,,,,अरे आपके अलावा आज तक कोनो दूसरे मर्द का नाम नाही सुने ओह्ह्ह के मुँह से और आप इत्तो गलत कहे रहे ओह्ह्ह से,,,,,,,,,,,,,छी”,मिश्राइन ने आदर्श फूफा को फटकारा और वहा से चली गयी

आदर्श फुफा ने मिश्रा जी की तरफ देखा जो सर पकड़कर बैठे थे , गुड्डू लवली की तरफ देखा तो उन्होंने बुरा सा मुंह बना दिया , यहाँ तक कि इस घर का सदस्य ना होते हुए भी मंगल फूफा ने उन्हें दुतकार दिया और इस बात का गुस्सा आदर्श फूफा ने उतारा गोलू पर
उन्होंने गोलू को मारते हुए कहा,”इह सब साले तुम्हरी वजह से हुआ है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

( अब आप ही बताओ राजकुमारी भुआ आदर्श फूफा से रूठ गयी इसमें बेचारे गोलू की क्या गलती ? आखिर उसकी गलती क्या है ? )

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संजना किरोड़ीवाल  

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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मंगल फूफा को मार पड़ते देखकर नवरतन के दिल को सुकून मिला लेकिन मिश्रा जी ये देखकर कंटाल गए उन्होंने गोलू से बाटा की चप्पल उठाकर लाने का इशारा किया तो गोलू को कुछ देर पहले पड़ी मार याद आ गयी और उसने घबराकर ना में गर्दन हिला दी। मिश्रा जी ने घूरकर देखा तो गोलू चप्पल लेकर आया और दूर से ही मिश्रा जी को थमा दी। मिश्रा जी ने खींचकर एक चप्पल फेंकी गुप्ता जी पर और चिल्लाकर कहा,”अबे का भांग खाकर आये हो गुप्ता ? साला हमहू हिया मामला सुलटाने बइठे है पर तुम लोगन का टंटा ही खत्म नाय हो रहा,,,,,,,,!!!!”

मंगल फूफा को मार पड़ते देखकर नवरतन के दिल को सुकून मिला लेकिन मिश्रा जी ये देखकर कंटाल गए उन्होंने गोलू से बाटा की चप्पल उठाकर लाने का इशारा किया तो गोलू को कुछ देर पहले पड़ी मार याद आ गयी और उसने घबराकर ना में गर्दन हिला दी। मिश्रा जी ने घूरकर देखा तो गोलू चप्पल लेकर आया और दूर से ही मिश्रा जी को थमा दी। मिश्रा जी ने खींचकर एक चप्पल फेंकी गुप्ता जी पर और चिल्लाकर कहा,”अबे का भांग खाकर आये हो गुप्ता ? साला हमहू हिया मामला सुलटाने बइठे है पर तुम लोगन का टंटा ही खत्म नाय हो रहा,,,,,,,,!!!!”

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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