Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 4

by Story With Sanjana July 9, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 4

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गोलू की वजह से बेचारे मंगल फूफा की फिर धुलाई हो गयी और इस बार तो ऐसी वाली धुलाई हुई कि मंगल फूफा उठ ही नहीं पाए। मंगल फूफा और रूपा पिकअप में नहीं है ये जानकर मिश्रा जी ने गुप्ता जी से कहा,”ए गुप्ता ! तुमहू जाकर देखो उह्ह्ह मंगलू और रूपा कहा रह गए और रास्ते मा गोलुआ मिल जाए तो ओह्ह्ह का भी ले आना साथ पता चले मंगल मिला तो उह्ह्ह गायब हुई गवा”

गुप्ता जी पिकअप से नीचे उतरे और ढाबे की तरफ जाने लगे। आदर्श फूफा ने देखा मिश्रा जी ने गुप्ता जी को भेजा बाकि किसी को कहा तक नहीं तो मुँह फुलाकर बैठ गए।  
गोलू को भागते देखकर रूपा उसके पीछे भागी और गोलू के सामने आकर कहा,”ए कैसे मर्द हो बे तुम ?”
गुप्ता ने भी गोलू और रूपा को साथ देखा तो उनके पास चले आये। वे कुछ कहते इस से पहले गोलू ने रूपा से कहा,”मोहल्ले की सबसे सुंदर लड़की से सादी करके 1st ऐनिवर्सरी से पहिले माँ बना दिए ओह्ह्ह का,,,,,,,,,ऐसे स्पेसल टाइप के मर्द है समझी

गुप्ता जी वही खड़े थे , गोलू को ऐसी बातें करते देखकर उन्होंने गुस्से से दाँत पीसकर कहा,”गली का सूअर भी एक साथ चार-पांच बच्चे देता है तो का ओह्ह का घर मा बैठाय ले,,,,,,,,,,!!!”
“अरे पिताजी आप”,गोलू ने गुप्ता जी की तरफ पलटकर कहा
गुप्ता जी ने गोलू को एक चाँटा मारा और कहा,”साले लेडीज के सामने कैसे बात करते है बुद्धि नाही है तुम्हाये अंदर,,,,,,,,चुपचाप चलकर मंगल को उठाओ”

गुप्ता जी के एक थप्पड़ में ही गोलू को अकल आ गयी वह गाल से हाथ लगाए मंगल फूफा की तरफ बढ़ गया और गुप्ता जी ने रूपा से कहा,”बिटिया ! वहा आगे पिकअप खड़ा है तुमहू जाकर ओह्ह्ह मा बइठो हमहू मंगल को लेकर आते है”
गुप्ता जी की बात सुनकर रूपा चली गयी और पिकअप के पास पहुंची। लवली और बिंदिया ने आगे रूपा के लिए भी जगह बना ली और सब जैसे तैसे करके बैठ गए क्योकि पीछे मर्दो में रूपा का बैठना सही नहीं लगता।  

गुप्ता जी से चाँटा खाकर गोलू ढाबे के सामने नीचे गिरे मंगल फूफा के पास आया। मंगल फूफा मार खाकर नीचे गिरे कराह रहे थे। गोलू को देखा तो जैसे तैसे करके उठकर बैठे और खाँसते हुए कहा,”अबे गोलू ! अबे साले हमको हिया फसाकर कहा भाग गए थे बे ? जानते हो कित्ता मारे है उह्ह्ह लोग हमे ,, एक आदमी पर 7-8 मुस्टंडे छोड़ दिए उह्ह्ह ढाबे के मालिक ने,,,,,,,,,हमरे शरीर का पुर्जा पुर्जा जे बात की गवाही दे रहा है गोलू कि साला गली के कुत्ते पर भरोसा कर लेना लेकिन गोलू गुप्ता पर नाही,,,,,,,,,!!!”

गोलू ने सुना तो मंगल फूफा के पास बैठा और उनके कंधे पर हाथ मारकर कहा,”बस का फूफा,,,,,,,!!!”
“आईईए ! हमको छुओ नाही गोलू हमहू जगह जगह से पंचर हो चुके है,,,,,,,,हमहू डाकू मंगल ही ठीक थे , जबसे तुम्हाये फूफा बने है साला हमायी फू फा निकल चुकी है,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने दर्द से कराहते हुए कहा
“अरे फूफा हम का किये ? सारी गलती उह्ह्ह आदर्श फूफा की है ,, उह्ह ढाबे के मालिक को मारे तो ढाबे के मालिक ने आपको मारा,,,,,,,फूफा शब्द ही ऐसो है साला जो भी सुने मारने को दिल करे”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा

“अबे लेकिन हमे काहे तोडा ?”,मंगल फूफा ने कहा
“तुमहू चिंता नाही करो फूफा ! एक बार कानपूर पहुंचने दयो उह्ह्ह मिश्रा जी के जीजा का जनाजा नहीं निकाला तो हमाओ नाम गोलू नाही,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने जोश में आकर शेरवानी की बाजू चढ़ाकर कहा
गोलू मंगल फूफा को भड़का ही रहा था कि गुप्ता जी वहा पहुंच गए और कहा,”तो का रखे तुमहाओ नाम सूअर रख दे , का है कि बात बे बात गंध फ़ैलाने की आदत जो हो गयी है तुमको”

गुप्ता जी की बात सुनकर गोलू उठा और कहा,”आप हमाओ नाम सूअर रखो चाहे नेवला , बात इह है पिताजी की काण्ड किये उह्ह्ह आदर्श फूफा और मार खाये बेचारे हमाये मंगल फूफा,,,,,,,,,,इत्ते ही तो थे साढ़े चार फुट के मार खा के बस ढाई फुट के रह गए है। आप कुछ भी कहो पिताजी इह बार आदर्श फूफा से बदला ले के रहे है हम”

“का बदला ले के रहे है हम ? भूलो मत उह्ह्ह मिश्रा का जीजा है , साला मिश्रा आज तक ओह्ह्ह का कुछो उखाड़ ना पाए तुमहू कर लोगे,,,,,,,,,,,,,देखो गोलुआ बहुत हुई बकैती अब चुपचाप चलो कानपूर,,,,,,,,,,,वरना इह न हो कानपूर तुम्हायी जगह तुम्हायी खबर पहुंचे”,गुप्ता जी ने कहा
गुप्ता जी की बातो से गोलू को थोड़ी थोड़ी घबराहट होने लगी उसने मंगल फूफा को सहारा देकर खड़ा किया और लेकर आगे बढ़ गया। गुप्ता जी भी जाने लगे तो ढाबे के मालिक ने उनके कंधे पर हाथ रखकर उन्हें रोक लिया और कहा,”खाने का पैसा कौन देगा ?”

अब देखो गुप्ता जी थे तो गोलू के बाप ही इसलिए उनका दिमाग गोलू से भी तेज चलता था लेकिन उलटा नहीं बल्कि चालाकी वाला , उन्होंने काउंटर की तरफ खड़े आदमी की तरफ इशारा करके कहा,”उह्ह्ह हमरा आदमी पैसा दे तो रहा है अब का सबसे अलग अलग पैसा लोगे,,,,,,,,,,,,!!”
ढाबे के मालिक ने काउंटर के पास खड़े आदमी को देखकर उलझन भरे स्वर में कहा,”उह्ह्ह तुम्हरा आदमी है ?”

गुप्ता जी ने सुना तो चिढ़कर कहा,”नाही ! उह्ह्ह हमरी औरत है , साड़ी पहननी नाही आती इहलीये पेंट शर्ट पहिना के रखते है ओह्ह्ह का,,,,,,,,,,अबे दिखाई नाही देता आदमी है उह्ह्ह,,,,,,,,,,और हिया खड़े होकर हमसे का पंचायती कर रहे हो जाकर ओह्ह से पूछो ना बिल दिया के नाही”

“हाँ हाँ जा रहा हूँ चिल्लाता काहे है ?”,ढाबे के मालिक ने कहा और वहा से चला गया। गुप्ता जी ने ललाट पर आये पसीने को ऊँगली से पोछकर झटका और वहा से पिकअप की तरफ भाग गए। ढाबे का मालिक गुस्से से वापस आया तो ना गुप्ता जी वहा थे ना ही मंगल,,,,,,,,,,,,,,!!!”

गोलू ने मंगल फूफा को पिकअप में डाला और खुद भी अंदर आकर मनोज के बगल में बैठ गया। गुप्ता जी भागते हुए आये और पिकअप में चढ़कर कहा,”ए गुड्डू ! जल्दी निकलो हिया से,,,,,,,,,,,,,साला जे ढाबा ही मनहूस है”
मिश्रा जी गुप्ता जी के बगल में ही बैठे थे उन्होंने गुप्ता जी की बात सुनी और कहा,”अच्छा ढाबा मनहूस है , और तुम सब मिलकर हुआ जो मनहूसियत फैलाये ओह्ह्ह,,,,,,,,,,,अपनी गलतियों के लिए दुसरो को दोष की आदत गयी नहीं तुम्हायी गुप्ता”
बेचारे गुप्ता जी चुपचाप पीछे खिसककर बैठ गए।

गुड्डू ने स्पीड बधाई और पिकअप सड़क पर दौड़ने लगी। रात के 10 बजे तक पिकअप सड़क पर दौड़ती रही और अब गुड्डू पिकअप चलाते चलाते थक चुका था। गाड़ी चाय की टपरी के पास रुकी गुड्डू को चाय की तलब हुई तो उसने लवली की तरफ देखा। लवली ने पलटकर पीछे बैठे बाकी लोगो को देखा। सब सो रहे थे। वह गुड्डू की तरफ पलटा और इशारे से उसे जाकर चाय पीने को कहा ताकि बाकि सबको पता ना चले और ढाबे वाला सीन फिर से ना हो।  

गुड्डू नीचे उतरा चार कप लेकर लवली के पास आया। एक एक कप रूपा , लवली और बिंदिया को दिया और एक कप खुद लेकर वही खड़े होकर पीने लगा। चाय पीने के बाद लवली ने गुड्डू से जाकर पीछे बैठने को कहा और खुद ड्राइवर सीट पर चला आया। गुड्डू चाय के पैसे देने टपरी वाले के पास आया लेकिन उसने पैसे पाँच चाय के दिए और एक कप चाय लेकर पिकअप के पीछे चला आया।  

 गुड्डू बहुत ही सम्हलकर पिकअप में चढ़ा और गोलू के बगल में आ बैठा। गोलू नींद में ऊंघ रहा था गुड्डू ने गोलू का कंधा थपथपाया और दबे स्वर में कहा,”गोलू ! गोलू , अबे उठो चाय लाये है तुम्हाये लिए”
गोलू उबासी लेते हुए उठा और देखा बगल में गुड्डू बैठा है तो मारे ख़ुशी के उसने 10-20 बातें कही लेकिन उसके मुँह से कोई आवाज नहीं निकली ये देखकर गुड्डू ने चाय उसके सामने की और कहा,”पहिले फटाफट जे पी ल्यो ओह्ह्ह के बाद बोलना”

चाय देखकर गोलू की जान में जान आयी क्योकि दाल रोटी खाकर उसका मूड पहले ही ख़राब जो हो चुका था। गोलू ने कप लिया और जल्दी जल्दी सुड़ककर कप पिकअप से बाहर फेंका लेकिन हवा की वजह से कप और कप में बची चाय के छींटे सोये हुए आदर्श फूफा के मुँह पर गिरे वे हड़बड़ाकर उठे और अपने होंठो पर अपनी जीभ घुमाकर कहा,”स्वाद तो बढ़िया है,,,,,,,,,,!!!”

आदर्श फूफा चाय ना मांग ले सोचकर गुड्डू ने लवली से चलने को कहा और पिकअप आगे बढ़ गई। आदर्श फूफा गुड्डू और गोलू की तरफ पलटे तो गुड्डू और गोलू ने एक दूसरे के सर से सर लगाकर ऐसे आँखे बंद की जैसे बेचारे सो रहे हो।
आदर्श फूफा ने अपना सर खुजाया और खुद में ही बड़बड़ाये,”लगता है हमहू चाय का सपना देखे रहे,,,,,,,,,,,जे ससुरा गोलुआ तो एक नंबर का भिखमंगा है उह्ह ना पिलाये पर गुड्डू ऐसा नाही करता उह्ह्ह हमरे बिना चाय थोड़े पीता,,,,,,,,,,!!”

आँखे बंद किये गोलू सब सुन रहा था और आदर्श फूफा पर गुस्सा भी आ रहा था लेकिन अपने गुस्से को चाय पीकर पी गया। आदर्श फूफा फिर आँखे मूँदकर लेट गए। गुड्डू गोलू ने आँखे खोली और गोलू आदर्श फूफा का गला दबाने के लिए अपने दोनों हाथो को उठाकर जैसे ही उनकी तरफ जाने लगा गुड्डू ने उसे  पीछे खींच लिया और दबे स्वर में कहा,”अबे का कर रहे हो गोलू ?”
“सुने नाही गुड्डू भैया ! उह्ह्ह आपका चांडाल फूफा हमे भिखमंगा कह रहा है,,,,,,,,हम का भिखमंगे है ?”,गोलू ने चिढ़कर दबे स्वर में कहा

“अबे यार गोलू ! तुमहू काहे उनकी बात पर ध्यान दे रहे हो जाने दो ना,,,,,,,,,वैसे भी इत्ती भसड़ के बाद आदमी का दिमाग काम करना बंद कर देता है। कानपूर पहुंचते है फ्रेश होते है ओह्ह्ह के बाद कल से कोई कांड नाही चुपचाप दूकान जायेंगे और सांति से अपना काम करेंगे,,,,,,,,,बस कानपुर मा अब कोनो काण्ड ना हो”,गुड्डू ने गोलू को समझाते हुए कहा
“अरे गुड्डू भैया टेंसन नाही लीजिये ! कानपूर मा सब ठीक है हुआ का कांड होगा अब ? आप तो ऐसे कह रहे है जैसे चकिया आने से पहिले हमहू कानपूर मा कोनो नवे कांड का उद्घाटन करके आये हो”,गोलू ने बेफिक्र होकर कहा

गुड्डू ने सुना तो गोलू की तरफ देखा और कहा,”गोलू ! जैसो तुमहाओ ओवरकॉन्फिडेंस है ना हमे पुरो यकीन है कोई न कोई काण्ड तो पक्का होइ है”
गुड्डू की बात सुनकर गोलू का मुँह बन गया और उसने कहा,”माँ कसम गुड्डू भैया ! इत्ते नेगेटिव इंसान हो आप,,,,,,,,,,,,हम कह रहे है सब ठीक है तो आप कह रहे है काण्ड होगा , का आपको हम पर बिस्वास नहीं है का ?”

“तुम पर विस्वास है गोलू पर इह जो तुम्हायी जबान है ना सारे फसाद की जड़ यही है। पिछले तीन सीजन से तुम्हायी जे ही जुबान की वजह से हम सब धक्के खा रहे है,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने मुँह बनाकर कहा
गोलू ने सुना तो गुड्डू से थोड़ा दूर खिसककर बैठा और कहा,”हाँ तो जिन लोगो के बीच बैठे हो ना गुड्डू भैया उनके साथ गुलाब जामुन इमरती तो खाने से रहे,,,,,,,,,,,,हमायी जबान थी तो इन सबका तो उह्ह्ह भसड़ मा पूरा हाथ है और आप तो पुरे के पुरे सामिल है लेकिन कुछ भी गलत हो तो बिल किसपे फटेगा गोलू पे ,

का है कि गोलू तो पगलेट है सबका भला करने के चक्कर में अपना ही बुरा कर बैठता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
कहते कहते गोलू शुरू हुआ तो फिर बोलते ही चला गया और गुड्डू ने ध्यान नहीं दिया दरअसल गुड्डू को लगी थी भूख लेकिन खाये क्या ? और इस वक्त रास्ते पर कुछ मिलना भी मुश्किल और लवली से पिकअप रोकने को बोल नहीं सकता था।

गुड्डू मारे भूख के इधर उधर देखने लगा और भूख से हताश होकर जैसे ही अपने सीने पर हाथ मारा गुड्डू को अपने सीने पर कुछ सख्त सा महसूस हुआ। गुड्डू ने अपने ब्लाउज के अंदर झांककर देखा तो उसे अंदर दो सेब नजर आया ! ख़ुशी से गुड्डू की आँखे चमक उठी और होंठो पर मुस्कान तैर गयी। उसने एक सेब निकाला और पोछकर एक टुकड़ा खाया तो उसकी जान में जान आयी।

गोलू ने देखा कि वह पिछले 5 मिनिट नॉनस्टॉप बोले जा रहा है और गुड्डू कोई जवाब नहीं दे रहा तो उसने गुड्डू की तरफ देखा लेकिन गुड्डू को सेब खाते देखकर गोलू की भूख भी जाग गयी। वह धीरे से वापस गुड्डू की तरफ खिसका और रोआँसा होकर कहा,”अकेले अकेले खा रहे हो गुड्डू भैया ! इह नाही कि एक निवाला मुझ गरीब को भी दे दो,,,,,,,,,,,!!!”
“एक निवाला काहे इह ल्यो पूरा सेब खाओ”,कहकर गुड्डू ने दूसरा सेब निकालकर गोलू को दे दिया और अपने हाथ में पकडे सेब को खाने लगा।

हमारे राजस्थान में एक कहावत है “भूख क लगवाण कोनी” जिसका मतलब है इंसान को जब भूख लगती है तो जो मिलता है उसे खा लेता है ऑप्शन नहीं देखता। गोलू के साथ भी यही हुआ , उसने ध्यान नहीं दिया सेब कहा से आया वह तो सेब मिलते ही उस पर टूट पड़ा। गुड्डू और गोलू ने सेब खाया और दोनों वही पसर गए।

सुबह के 4 बजे पिकअप कानपूर पहुंची तब तक मिश्रा जी नींद से जाग चुके थे। लवली ने पिकअप किनारे लगयी और उतरकर मिश्रा जी के पास आकर कहा,”पिताजी ! कानपूर आ गवा , अब ?”
मिश्रा जी ने सुना तो सोच में पड़ गए क्योकि कानपूर तो वे लोग पहुंच चुके थे लेकिन ऐसी हालत में घर कैसे जाए ? घरवालों को क्या समझायेंगे ? लवली के साथ बिंदिया आयी थी और मंगल फूफा रूपा को साथ ले आये थे ऐसे में सुबह सुबह घर जाकर तमाशा होना तय था।

उन्होंने पास ही सो रहे गुप्ता जी को देखा और थपथपाकर कहा,”गुप्ता ! गुप्ता , ए गुप्ता अबे तुमसे कह रहे है”
“अरे गोलू की अम्मा सुबह सुबह काहे हमाये नाम की माला जप रही हो सो जाओ ना”,गुप्ता जी ने नींद में कुनमुनाकर कहा  
मिश्रा जी ने देखा गुप्ता जी नहीं उठ रहे तो उन्होंने एक लात गुप्ता जी की तशरीफ़ पर मारकर कहा,”अबे उठो बे”
गुप्ता जी हड़बड़ा कर उठे और कहा,”का का का कोनो भूचाल आ गवा का ?”

“ए गुप्ता हमायी बात ध्यान से सुनो”,कहकर मिश्रा जी ने गुप्ता जी को मना लिया ताकि वे पिकअप में भरे सब लोगो को लेकर अपने घर जा सके। पहले तो गुप्ता जी ने गुप्ताइन के डर से ना नुकर की लेकिन बाद में जैसे तैसे मान गए।
मिश्रा जी ने लवली से पिकअप गुप्ता जी के घर लेकर चलने को कहा। लवली ड्राइवर सीट पर आ बैठा और पिकअप आगे बढ़ा दी।

( इतनी मार खाने के बाद क्या मंगल फूफा रुकेंगे कानपूर में या अपनी रूपा को लेकर चले जायेंगे बीहड़ ?  पक्का गोलू ने चकिया जाने से पहले कानपूर में कोई कांड नहीं किया ना ? मिश्रा मण्डली को देखकर क्या होगा गुप्ताइन का रिएक्शन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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