Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 9

by Story With Sanjana July 16, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 9

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

मंगेश गुस्से में हथियार लेकर घर से निकल गया , उसे रोकने के लिए बिंदिया की अम्मा भी भी पीछे पीछे आयी लेकिन मंगेश बहुत आगे निकल गया। गुस्से से भरा मंगेश चला जा रहा कि चलते चलते उसकी चाल धीमी हो गयी और वह घुटनो के बल मिटटी पर गिर पड़ा। मंगेश के दिल में मिश्रा जी और लवली को लेकर गुस्सा था लेकिन सहसा ही उसे याद आया लल्लन का दिया धोखा। मंगेश ने लल्लन पर भरोसा किया और लल्लन ने उसे धोखा दिया , ऋतिक जैसे लड़के के साथ बिंदिया की शादी करवा रहा था।

मंगेश का गुस्सा तकलीफ में बदल गया और वह अपना चेहरा अपने हाथो में स हाथो में छुपाया और फूट फूट कर रो पड़ा। बिंदिया लवली के साथ चली गयी मंगेश को इसका दुःख था लेकिन इस से भी ज्यादा तकलीफ उसे इस बात से हो रही थी कि उसके सबसे जिगरी दोस्त लल्लन ने उसे धोखा दिया। अगर लल्लन धोखेबाज नहीं होता तो वो ऐसे मुँह छुपाकर नहीं भागता।

मंगेश अपने चेहरे से अपने हाथो को लगाए रोता रहा तभी उसे ढूंढते हुए बिंदिया की अम्मा वहा चली आयी। उन्होंने जब मंगेश को रोते देखा तो जल्दी से उसके पास आयी और सम्हालकर कहा,,”बिंदिया के बापू ! का हुआ आप रो काहे रहे है ? ए बिंदिया के बापू आप ठीक तो है ना,,,,,,,,,का हुआ है आपको बताईये हमे , काहे इतना परेशान है ?”
अपनी पत्नी को वहा देखकर मंगेश ने उसके सीने में अपना चेहरा छुपाया और रोते हुए कहने लगा,”जिस पर हमने सबसे जियादा भरोसा किया ओही लल्लन हमे धोखा दिया रे बिंदिया की अम्मा ,

हमायी फूल सी बिटिया की जिंदगी हमहू अपने ही हाथो बर्बाद करने चले थे,,,,,,,,,,,,,,महादेव हमका कबो माफ़ नाही करे है रे लक्ष्मी कबो माफ़ नाही करे है”
बिंदिया की अम्मा ने मंगेश को सम्हाला और उसे चुप करवाया। वह उठी और मंगेश को अपने साथ लेकर घर की तरफ चल पड़ी। मिश्रा जी को लेकर जो आंधी मंगेश के मन में उठी थी वह कुछ पल के लिए शांत हो गयी और वह थका हारा सा अपनी पत्नी के साथ चल पड़ा।  

गुप्ता जी का घर , कानपूर
गोलू लोटे की मार से बेहोश हो गया और शर्मा जी को लेने आयी एम्बुलेंस उसे लेकर चली गयी। एम्बुलेंस की आवाज सुनकर सब बाहर भी आये लेकिन बाहर ना गोलू था ना ही एम्बुलेंस इसलिए सब वापस अंदर चले आये। मिश्रा जी और गुप्ता जी सोफे पर बैठे थे। शर्मा जी तख्ते पर बैठे थे और शर्माईन उनके बगल में खड़ी थी। आदर्श फूफा मिश्रा जी के बगल में पड़े सिंगल सोफे पर पसर कर बैठे थे और मंगल फूफा उनके बगल में जमीन पर उकडू बैठे थे और साथ ही गुस्से से लाल भी थे। पिंकी गुप्ताइन के साथ एक तरफ खड़ी थी 

गुड्डू हाथ बांधे किसी सोच में डूबा एक तरफ खड़ा था , सोच में क्या डूबा था बल्कि गोलू को दो दिन का जो आश्वासन दिया था बेचारा उसी के बारे में सोच रहा था 

मनोज को तो अभी तक कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यहाँ हो क्या रहा है इसलिए वह मिश्रा जी के पास आया और कहा,”चचा ! हमरा काम था लवली भैया और बिंदिया को हिया तक सही सलामत पहुंचाने का उह्ह्ह हमने कर दिया , अब हमहू आप सबसे अपने घर जाने की इजाजत चाहते है”

“ठीक है मनोज तुमने हम सबकी बहुते मदद की जे अहसान का हमहू का बदला चुकाएंगे पर हाँ कबो हमायी जरूरत पड़े तो बेझिझक हमसे कहना , एकमिनिट “,कहकर मिश्रा जी ने अपने कुर्ते की जेब में रखे कुछ नोट निकाले और मनोज की तरफ बढ़ाकर कहा,”इह रखो ! रास्ते मा काम आएंगे और हाँ मंगेश को पता नाही चलना चाहिए कि तुमहू हमायी मदद किये वरना उह्ह्ह तुम्हाये पीछे पड़ जाएगा”

मनोज ने पैसे लेने से मना किया लेकिन मिश्रा जी के जोर देने पर उसने वो पैसे लिए और एक तरफ खड़ी रूपा के पास आकर कहा,”अच्छा रूपा हमहू जाते है , अपना ख्याल रखना,,,,,,,,,,बिंदिया के जइसन तुमहू भी अपना हमसफ़र चुनकर अच्छा की। तुम्हाये अम्मा बाबूजी को खबर कर देंगे कि तुमहू हिया सही सलामत हो,,,,,,,,,,,बस अब जल्दी से ब्याह करके हम सबसे मिलने चकिया आना”

रूपा ने सुना तो मनोज को देखकर हामी में गर्दन हिला दी लेकिन उसके चेहरे के भाव तो कुछ और ही बयां कर रहे थे। चकिया से वह आयी तो मंगल फूफा के साथ थी लेकिन कानपूर आकर उसका मन धीरे धीरे बदल रहा था।
मनोज वहा से चला गया और घर के हॉल में एक बार फिर शांति छा गयी। सब ख़ामोशी से एक दूसरे को देख रहे थे तो कभी इधर उधर लेकिन मंगल फूफा अपना हाथ अपने सर से लगाये मनहूस शक्ल बनाये बैठे थे ये देखकर आदर्श फूफा ने कहा,”अब तुमको का हुआ , काहे मातम मनाये बैठे हो ?”

मंगल फूफा ने सुना तो उछलकर गुप्ता जी और मिश्रा जी के सामने आये और कहा,”अरे मातम ना मनाये तो और का करे ? उह्ह्ह ससुरा आपका लौंडा गोलू उह्ह्ह हमायी खुशहाल जिंदगी मा नवरतन नाम की आग जो लगाय दिए है,,,,,,,अरे हम पूछते है कि उह्ह्ह साला होता कौन है हमायी रूपा को उह्ह्ह नवरत्न को सौंपने वाला ?”
“हमायी रूपा ?”,आदर्श फूफा ने अपने हमायी पर कुछ ज्यादा ही जोर देकर कहा

मंगल फूफा पलटे और आदर्श फूफा और खुद की तरफ ऊँगली करके गुस्से से कहा,”हमायी तुम्हायी नहीं बे सिर्फ हमायी हमायी रूपा और तुमहू बीच मा नाही बोलो , मिश्रा जी के जीजा हो हमाये नाही समझे,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा की बात सुनकर आदर्श फूफा भी भड़क गए और कहा,”काहे नाही बोले ? तुम्हायी उह्ह्ह रूपा से अब तक 150 थप्पड़ खाये है हमने , हमे भी बोलने का हक़ है”
“परायी औरत पर नजर डालोगे तो का आरती उतारेंगे तुम्हायी , थप्पड़ ही नही न खाओगे”,रूपा ने आदर्श फूफा को घूरकर कहा  

“अरे परायी औरत पर तो बहुते गन्दी नजर है जे कि,,,,,,थोड़ी देर पहिले हमाये से भी परसादी लिए है”,गुप्ताइन ने मुँह बनाकर कहा
“का गुप्ताइन जे आशिक़ बाबू ने तुम्हाये पर भी गन्दी नजर डाली ?”,गुप्ता जी ने पूछा
“और नहीं तो का,,,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ताइन ने कहा  
गुप्ता जी आदर्श फूफा की तरफ झुके और कहा,”का बे आदर्श्वा डाका डालने के लिए तुमको हमारा ही घर मिला ?”

“अबे का अंट शंट बक रहे हो गुप्ता हम काहे डाका डालेंगे तुम्हाये घर मा , उह्ह्ह तो पैर फिसल गवा था हमरा इहलिये जे मा जा गिरे हमहू,,,,,,,,हमायी बात पर यकीन नाही तो बहिन जी से पूछ ल्यो”
“उह्ह्ह कहा से तुम्हायी बहिन हुई राखी बंधवाते हो ओह्ह्ह से ? गोलू के ब्याह मा ममेरा लेकर आये रहे,,,,,,,,,,,,कान खोलकर सुन ल्यो मिश्रा जी के जीजा होंगे उनके घर मा हिया हमायी घरवाली से बदतमीजी किये ना तो पेल देंगे समझे”
“डाका डालने की बात कौन कर रहा है जो खुद दुसरो की घरवाली पर गन्दी नजर रखता है”,शर्मा जी ने गुप्ता जी को ताना मारकर कहा

शर्मा जी कुछ कहे और अपने गुप्ता जी ना चिढ़े ये भला कैसे हो सकता था ? गुप्ता जी उठे और शर्मा जी के सामने आकर कहा,”का बे ? कौनसी गन्दी नजर डाल दिए हमहू दुसरो की घरवाली पर ?”
“फुलवारी को भूल गए ? ऐसे ही तो यादव तुम्हारे पीछे नाही पड़ा होगा ?”,शर्मा जी ने भी गुस्से से कहा
“अरे उह्ह सब तो जे हमाये मंगल फूफा का किया धरा है,,,,,,,,,,,,फुलवारी के पियार मा बौराय घूम रहे थे जे और हमहू सक कर लिए बेचारे गोलू के पिताजी पर,,,,,,,,,!!!”,गुप्ताइन ने पहली बार गुप्ता जी की साइड लेकर कहा

तो गुप्ता जी ने प्यार भरी नजरो से गुप्ताइन को देखा और कहा,”आज शाम मा इमरती खिलाते है तुम्हे”
गुप्ताइन के मुँह से फुलवारी का नाम सुनकर रूपा मंगल फूफा को घूरने लगी क्योकि अब तक वह दो बार फुलवारी का नाम सुन चुकी थी वो भी मंगल फूफा के साथ , ये देखकर मंगल जल्दी से उठा और गुप्ताइन की तरफ आकर दबे स्वर में कहा,”अरे का कर रही हो ? काहे फुलवारी के नाम की फुलझड़ी जलाय रही हो,,,,,,,,,,,चुप हो जाओ”

मंगल फूफा क्या कहना चाहते है ये गुप्ताइन नहीं समझ पायी और कहा,”अरे काहे घबरा रहे है मंगल फूफा ? प्यार किया तो डरना का ? जे पिंकिया के पापा आपके चक्कर मा हमाये मिस्टर की छीछा लेदर कर रहे है हम नाही सुन पाएंगे बताय रहे है”
“अरे हम का छीछा लेदर करेंगे जे खुद ही काफी है अपनी इज्जत के छींटे उड़ाने में , अभी का कह रहे थे पिंकी की मम्मी से कि चिंता काहे करती है हम है ना,,,,,,,,!!”, शर्मा जी ने कहा और गुप्ता जी की तरफ पलटकर गुस्से से बोले,”तुम का कर लोगे बे ? हमहू सिर्फ बेहोश हुए मरे नाही जो तुमको अभी से इनकी चिंता होने लगी,,,,,,,,,,!!!”

शर्मा जी की बात सुनकर गुप्ता जी इधर उधर देखने लगे क्योकि रंगबाज तो वे भी कम नहीं थे। मंगल फूफा ने सुना तो गुप्ता जी से कहा,”वाह वाह वाह गुप्ता जी , पहिले गोलू की अम्मा , फिर फुलवारी , फिर इनकी घरवाली , अरे ब्रेक मारिये अपनी मोहब्बत की गाडी को अब का एक्सीडेंट करके मानेंगे ?”
गुप्ता जी ने मंगल फूफा को एक थप्पड़ मारा और कहा,”अबे साले ! इह हमरा दोस्त है इह कुछ भी कहे हमहू सुन लेंगे पर तुमहू का हमहू कानपूर चौक का भांड समझे हो जो लिबीर लिबीर बकना चालू हो गए,,,,,,,,,,,,,कायदे मा रहो वरना पेल देंगे”

“हाँ हाँ पेल दो सबको , कानपूर के गुंडे हो ना तुम,,,,,,,,,,साला तुम सबका ड्रामा ही नाही खत्म हो रहा है,,,,,,,,,,,,!!”,अब तक चुप बैठे मिश्रा जी ने उठकर गुस्से से कहा तो सब शांत हो गए
मिश्रा जी ने गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”ए गुड्डू ! जे आदर्श फूफा को साथ लेकर घर निकलो और शर्मा तुम , तुमको होश आ गवा ना अब तुमहू निकलो अपने घर और मंगल तुम , बहुत हो गयी बकैती ,, जे रूपा को तुमहू चकिया से अपनी जिम्मेदारी पर लाये हो ना तो जे का ख्याल रखो”

मिश्रा जी की बात सुनकर गुड्डू आदर्श फूफा के साथ वहा से चला गया , शर्मा जी शर्माईन का हाथ पकड़कर वहा से चले गए , मंगल फूफा भी रूपा की तरफ आये और उसे साथ लेकर चले गए। अब बचे गुप्ताइन , पिंकी और गुप्ता जी,,,,,,,,,,,,,,,,!!!

मिश्रा जी ने पिंकी और गुप्ताइन से अंदर जाने को कहा और गुप्ता जी के सामने आकर बोले,”अपना हुलिया सुधारो और आज शाम मा उह्ह गोलुआ और मंगल फूफा को लेकर हमाये घर पधारो,,,,,,,,,,,का है कि हमे ना जरा इत्मीनान से तुम सबसे बात करनी है,,,,,,,,,,,,,!!”
कहकर मिश्रा जी जैसे ही जाने के लिए दरवाजे की तरफ बढे गुप्ता जी ने कहा,”अब गोलुआ ने का किया ?”

मिश्रा जी पलटे और कहा,”तुमको लगता है गुप्ता उह्ह्ह बिना कांड किये ज़िंदा रहेगा,,,,,,,,,चकिया जाने से पहिले उह्ह्ह जोन सबसे बड़ा कांड किये है ना ओह्ह्ह के लिए ही शाम मा जे कार्यक्रम रखे है हमहू,,,,,,,,,,,,बख्त से पहुंच जाना वरना हम पहुंच जायेंगे”

मिश्रा जी की बात सुनकर गुप्ता जी खामोश हो गए और उनके जाने के बाद अपना सर खुजाकर कहा,”साला अब जे गोलुआ ने कौनसा कांड कर दिया ? मिश्रा इतना भड़का हुआ है मतलब कुछ तो किया है,,,,,,,,,,,,,हहहहहह करे मेरी बला से पिछवाड़े पर चार चप्पल पड़ी है तो खुद ही अक्कल आ जाही है ससुरे को,,,,,,,,,वैसे भी इन दिनों कुछो जियादा ही नाक मा दम किया है जे गोलू महाराज ने,,,,,,,,,,,अब तो इनकी बेंड बजे और हमहू नाचे नाच,,,,,,,!!!”
गुप्ता जी भी वहा से चले गए और अपनी हालत सुधारने लगे।

एम्बुलेंस में गोलू बेहोश पड़ा था कि एम्बुलेंस नाले पर जोर से उछली और गोलू को एकदम से होश आ गया लेकिन कितनी मुश्किल से बेचारे को शांति से सोने को मिला था इसलिए बेहोश होने का नाटक करके , आँखे बंद किये लाश की तरह पड़ा रहा। दो आदमी उसके अगल बगल बैठे थे। एक ने हथेली पर खैनी रगड़ते हुए दूसरे से कहा,”अबे जे ससुरे का का करे ?”

“का करे मतलब ? हॉस्पिटल लेकर चलते है , अभी सांसे चल रही है जे कि”,दूसरे ने पहले वाले की हथेली से खैनी उठाकर अपने मुँह में होंठ के नीचे रखते हुए कहा
“सांसे ही है तो का पतो हॉस्पिटल पहुंचते पहुंचते बंद हो जाए,,,,,,,,,,,,!!”,पहले वाले ने बहुत ही सस्पेंस भरे स्वर में कहा जिसे सुनकर गोलू का दिल मारे डर के  धड़कने लगा
“तो तुम का चाहते हो ?”,दूसरे आदमी ने पूछा

“हम का कह रहे है , इह ससुरा पहिले से मरियल जैसा है। हॉस्पिटल वाले का ही बचा लेंगे इसको , हुआ तक पहुंचते पहुंचते आधी जान निकल जाही है जे कि बाकी आधी डाक्टर निकाल देही है और डेथ सर्टिफिकेट बनाकर जे की लाश भेज देही है पोस्टमार्टम मा और सर्टिफिकेट घर,,,,,,,,,,,,,और बदल मा हमे का मिली है तम्बूरा,,,,,,,,,,,,इस से अच्छा इह का लेकर चलते है बंटी क्लिनिक हुआ बंटी जे ढांचे का 8-10 हजार तो हमे दे ही देगा”,पहले आदमी ने अपना प्लान बताया जिसे सुनकर गोलू की तो जान ही सूख गयी

दूसरे आदमी ने ख़ुशी से पहले आदमी को ताली देकर कहा,”जे कही ना तुमने काम की बात पर सुनो पैसा फिफ्टी फिफ्टी रहेगा”
“अरे हाँ हाँ ! बस हॉस्पिटल जाकर हमे जे कहना है कि किसी ने गलत खबर दी थी वहा कोई पेशेंट था ही नहीं”,पहले आदमी ने जैसे ही कहा गोलू उठकर बैठ गया और कहा,”पेशेंट कैसे नहीं है ? हम है न , हम का तुमको अनारकली दिख रहे है ?”
गोलू को होश में आया देखकर दोनों आदमियों का गला सुख गया और चेहरे का रंग उड़ गया। उनमे से एक ने डरते डरते कहा,”तुमने कुछो सुना तो नाही ?”

गोलू ने आदमी की तरफ देखा और मुस्कुराकर बड़े प्यार से कहा,”सुना ना ! हॉस्पिटल , डाक्टर , डेथ सर्टिफिकेट , पोस्टमार्टम , तम्बूरा , बंटी का क्लिनिक और 8-10 हजार,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू की बात सुनकर दोनों आदमी घबराकर एक दूसरे की तरफ देखने लगे तो गोलू ने दोनों हाथो से दोनों की गर्दन दबोची और कहा,”सालों ! हमे लेकर बंटी क्लिनिक जा रहे थे ताकि हमायी किडनी बेच सको,,,,,,,,,,तुम्हायी ऐसी की तैसी,,,,,,,,,,अब तुमहू चलो सीधा पुलिस स्टेशन तुम्हायी किडनी का ढोल बजवाते है”

“अरे भैया माफ़ कर दयो गलती हो गयी ! हम तो बस ऐसे ही मजाक कर रहे थे,,,,,,,,,,,!!!”,एक ने मिमियाकर कहा
“हाँ हाँ भैया ! हम तो बस ऐसे ही टाइम पास कर रहे थे।  हमे पुलिस के हवाले मत करो हमायी नौकरी चली जाही है”,दूसरे ने भी रोते हुए कहा
“तुम तुम जो बोलोगे हमहू करने के लिए तैयार है बस हमे पुलिस के हवाले मत करो”,पहले वाला भी रो पड़ा
गोलू ने दोनों को छोड़ा और कहा,”हाँ तो बंटी के क्लिनिक से जोन 8-10 उठाने वाले थे वो हिया हमाये हाथ मा धर दयो हमहू किसी को कुछो नाही बताएँगे”

गोलू की बात सुनकर दोनों आदमी फिर एक दूसरे को देखने लगे और फिर एक ने कहा,”लेकिन हमाये पास इत्तेपैसे नाहै है”
“जो कुछ भी है हिया रखो,,,,,,,हमको बहुते जोर से पिसाब भी आया है , देर की तो तुम्हाये मुँह पे मूत देंगे”,गोलू ने घुड़ककर कहा
दोनों ने अपनी अपनी जेब से जो भी पैसे थे सब गोलू की हथेली पर रख दिए। गोलू ने पहले वाली की तरफ देखा और कहा,”जे शर्ट की जेब मा का है ?”

आदमी ने जेब में पड़ा पाउच निकाला और गोलू को दिखाकर कहा,”इह तो खैनी है भैया”
“जे का तुम का करि हो दाँत खराब हो जाही है,,,,,,,,,,अह्ह्ह पहिले से इत्ते खराब है”,कहकर गोलू ने बेचारे की खैनी भी छीन ली और चलती एम्बुलेंस के दरवाजे पर लात मारकर दरवाजा खोला और पलटकर कहा,”अबे रुकवाओ इसे , हम का सुपरमैन के खानदान से है जो चलती एम्बुलेंस से उतर जायेंगे”

एम्बुलेंस रुकी गोलू उतरा और कहा,”फिर मिलेंगे”
दोनों आदमियों ने जल्दी से दरवाजा बंद किया और ड्राइवर से चलने को कहकर खुद में ही बड़बड़ाये,”ऐसे बंडलबाज आदमी से तो भगवान् दुबारा कबो ना मिले”

( क्या धीरे धीरे मंगेश को हो रहा है अपनी गलतियों का अहसास ? क्या आप भी जानते है गोलू के सबसे बड़े कांड के बारे में जिसकी मीटिंग मिश्रा जी ने शाम में रखी है ? क्या आपको भी लगता है गोलू बंडलबाज ? कमेंट सेक्शन में बताईये और पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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