Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 3

Pasandida Aurat Season 3 – 5

by Story With Sanjana July 6, 2026
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Pasandida Aurat Season 3 – 5

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी अवनि को लेकर घर पंहुचा। दोनों अंदर आये और पृथ्वी ने फ्लेट का दरवाजा बंद कर दिया। अवनि पानी लेने चली गयी और पृथ्वी अपने शर्ट की बाजू फोल्ड करते हुए सोफे पर आ बैठा। उसने दिवार पर लगी घडी में समय देखा जो कि रात के 11.30 बजा रही थी। अवनि ने पानी का गिलास लाकर पृथ्वी को दिया। पृथ्वी ने पानी पीया और गिलास सामने टेबल पर रख दिया। अवनि ने गिलास उठाया और जैसे ही जाने लगी पृथ्वी ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और कहा,”अवनि ! थोड़ी देर मेरे पास बैठो ना”

अवनि पलटी , गिलास वापस रखा और पृथ्वी के बगल में आ बैठी। उसने देखा पृथ्वी कुछ बुझा बुझा सा है तो उसने उसके कंधे पर हाथ रखा और बड़े प्यार से कहा,”क्या हुआ पृथ्वी , आप ठीक है ना ?”
पृथ्वी ने अवनि का हाथ अपने हाथो में लिया और कहने लगा,”हाँ मैं ठीक हूँ , बस कभी कभी मन एकदम से भारी हो जाता है तो समझ नहीं आता क्या करू ?”
“क्या कुछ ऐसा है जो आप मुझे बताना चाहते है लेकिन नहीं बता रहे ? हो सकता है वही बात आपको परेशान कर रही हो”,अवनि ने प्यार से कहा

“ऐसा कुछ नहीं है अवनि ! मुझे तुम्हारे सामने फेक बनने की जरूरत नहीं है मैं असल में जैसा हूँ वैसा तुम्हारे साथ रह सकता हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“तो फिर क्या बात है ? मैंने देखा आज शाम आप जयदीप भैया के घर में भी चुप चुप थे। पृथ्वी क्या मुझसे कोई गलती हुई है ? मैं तुम्हारी भावनाये समझ सकती हूँ पृथ्वी बस,,,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह तुम समझ रहे हो मैं क्या ?”,अवनि ने झिझकते हुए कहा

“बैडरूम में चलो मुझे तुम से कुछ जरुरी काम है”,पृथ्वी ने सोफे से उठते हुए कहा
“कैसा काम ?”,अवनि ने धड़कते दिल के साथ कहा
पृथ्वी अवनि के थोड़ा करीब आया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”शादी के बाद , घर में पति पत्नी अकेले हो , रात का वक्त हो , रोमांटिक मौसम हो तो ऐसे में पति को अपनी पत्नी से क्या काम हो सकता है ?”

पृथ्वी की बहकी बहकी बाते सुनकर अवनि का दिल धड़कने लगा , उस पर पृथ्वी का शरारत से उसकी आँखों में देखना उसे और बैचैन कर गया। वह कुछ बोल ही नहीं पायी।

 पृथ्वी कुछ देर अवनि की आँखों में देखता रहा फिर एकदम से पीछे हटा और कमरे की तरफ जाते हुए कहा,”जल्दी”
अवनि की तन्द्रा टूटी वह हड़बड़ा कर पृथ्वी के पीछे कमरे में चली आयी। अवनि के कमरे में आते ही पृथ्वी ने दरवाजा बंद किया। बिस्तर के किनारे खड़ी अवनि के ललाट पर पसीने की बुँदे झिलमिलाने लगी उसे देखकर ही समझ आ रहा था कि वह थोड़ा घबराई हुई है। पृथ्वी ने उसे इस तरह कमरे में क्यों बुलाया होगा ? सोचकर अवनि मन ही मन परेशान हो रही थी।

दरवाजा बंद कर पृथ्वी अवनि की तरफ पलटा और उसकी तरफ अपने कदम बढ़ाते हुए कहा,”मैं सोच रहा हूँ क्यों ना आज रात ना मैं खुद सोऊ और ना तुम्हे सोने दू”
अवनि ने सुना तो शर्म और घबराहट के मारे अपने हाथो की उंगलियों को तोड़ने मरोड़ने लगी। पृथ्वी उसके सामने चला आया। उसने अवनि की आँखों में देखते हुए अवनि के गाल पर झूल रही लट को बड़े प्यार से कान के पीछे कर दिया। पृथ्वी की छुअन उसे सिहरन का अहसास दे रही थी।

पृथ्वी अवनि के चेहरे को देखता रहा उसे अवनि के होंठो से बड़ा प्रेम था। जैसे ही नजर अवनि के होंठो पर पड़ी पृथ्वी के मन में उमंगे जगने लगी। उसने अपनी गर्दन को थोड़ा सा झुकाया और अपने होंठो को जैसे ही अवनि के होंठो की तरफ बढ़ाया अवनि ने अपनी आँखे मूँद ली। वह मारे शर्म के खुद में ही सिमटी जा रही थी और उसका चेहरा लाल हुए जा रहा था। होंठो काँप रहे थे और दिल तेजी से धड़क रहा था।

पृथ्वी और अवनि के होंठो के बीच अभी भी फ़ासला था। अवनि को घबराया देखकर पृथ्वी मुस्कुराया और पीछे हट गया। वह बिस्तर पर जा बैठा और बिस्तर के बगल में पड़े ड्रॉवर को खोलकर वो खत निकाले जो अवनि ने उसे दिए थे।

अवनि ने जब महसूस किया कि पृथ्वी उसके करीब नहीं है तो उसने धीरे से अपनी आँखे खोली और देखा पृथ्वी सच में उसके सामने नहीं है। उसने गर्दन घुमाकर देखा तो पाया पृथ्वी बिस्तर पर बैठा उन खतों को देख रहा है जो अवनि ने उसे दिए थे। अवनि पृथ्वी की तरफ चली आयी तो पृथ्वी ने कहा,”बैठो”
अवनि पृथ्वी के ठीक सामने बिस्तर के दूसरे कोने पर आ बैठी।
“आराम से बैठो,,,,,,,,,,,और तुम डर क्यों रही हो ?”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर कहा

“आपने कहा , मैं सोच रहा हूँ क्यों ना आज रात ना मैं खुद सोऊ और ना तुम्हे सोने दू ,, आपने ऐसा क्यों कहा ?”,अवनि ने डरते डरते कहा
“अरे बेटा ! क्योकि मुझे तुम्हारे दिए खत पढ़ने है ,, अब इन्हे पढ़ने के लिए आज की रात मुझे जागना पड़ेगा और अकेले पढूंगा तो बोर हो जाऊंगा इसलिए सोचा अपने साथ तुम्हे भी जागकर रखू”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो उसने एक गहरी साँस ली और उसका हाथ उसके सीने पर चला गया। उसने धीरे से कहा,”मुझे लगा आप,,,,,,,,,,,,!!!!”

पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”हाआआआ अवनि ! मैं देख रहा हूँ आजकल तुम कुछ ज्यादा ही नॉटी हो गयी हो। मुझे तुम्हारे इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे है , देखो मैं बहुत शरीफ लड़का हूँ”
कहते हुए पृथ्वी अपने शर्ट का बटन बंद करने लगा

पृथ्वी की बातें सुनकर अवनि खिलखिलाकर हंस पड़ी ये देखकर पृथ्वी भी मुस्कुराया और खत अवनि को दिखाकर कहा,”मैं इन्हे पढू ?”
“हम्म्मम”,अवनि ने अपने पैरों को मोड़कर बैठते हुए कहा

पृथ्वी ने देखा 13 ख़त थे और हर ख़त पर एक तारीख लिखी थी। पृथ्वी ने उस ख़त को उठाया जो सबसे पहले लिखा गया था। उसने लिफाफा फाड़ा और उसमे रखा खत निकाला तो स्याही की एक बहुत ही प्यारी भीनी सी महक आयी। पृथ्वी ने लिफाफे को साइड में रखा और ख़त पढ़कर अवनि को सुनाने लगा !

“प्रिय पृथ्वी !
आज पहली बार मैं किसी के लिए ख़त लिखने जा रही हूँ। कभी सोचा नहीं था मैं तुम्हारे लिए इस तरह खत लिखूंगी। ये खाली ख़त ना जाने कब से मेरी टेबल के दराज में रखे थे जिन्हे मैं अपने “पसंदीदा मर्द” के लिए लिखना चाहती थी लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर है ! आज ये पहला खत मैं तुम्हारे लिए लिख रही हूँ। जानती हूँ इस खत को पढ़कर तुम्हे ख़ुशी के साथ साथ हैरानी भी होगी वैसे ही जैसे इसे लिखते हुए मुझे हो रही है।

तुम्हारा मेरी जिंदगी में आना महज एक इत्तेफाक है लेकिन इस इत्तेफाक को ना जाने क्यों तुमने हकीकत समझ लिया है और वो भी ऐसी हककीत जो शायद कभी पूरी नहीं सकती। पृथ्वी तुम एक बहुत अच्छे इंसान हो और मेरे अच्छे दोस्त हो लेकिन तुम्हारी बातें अक्सर मुझे डरा देती है। मेरा और तुम्हारा कोई मेल नहीं है पृथ्वी हम एक दूसरे के लिए नहीं बने है। मै जितना तुम्हे खुद से दूर रहने के लिए कहती हूँ तुम उतना ही मेरे करीब आ रहे हो ,, ये नजदीकियां तुम्हे बर्बाद कर देगी पृथ्वी,,,,,,,,,,,

मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ , मैं किसी के लायक नहीं हूँ पृथ्वी। मैं प्यार और शादी जैसे बंधनो के लिए नहीं बनी। मेरा साथ तुम्हे ख़ुशी नहीं बल्कि तकलीफ देगा और मैं तुम्हारी तकलीफे बढ़ाना नहीं चाहती !
अब तक मुझे तुम्हारी बाते , तुम्हारा फ्लर्ट सब मजाक लगता था , मुझे लगा वक्त के साथ तुम सब भूल जाओगे लेकिन आज तुमने जो किया उसे देखकर ना जाने क्यों मुझे तकलीफ हुई ?  मुझसे माफ़ी मांगने के लिए तुमने 100 बार सॉरी नोट लिखा वो भी ऐसे हालातों में जब तुम्हे ये नहीं करना चाहिए था।

वो Sorry नोट देखकर जितनी ख़ुशी हुई उतनी ही तकलीफ तब हुयी जब तुमने ये कहा कि “इतने Efforts तो आज तक मैंने कभी रुषाली के लिए भी नहीं किये”
ना जाने क्यों पर उस वक्त ये शब्द मुझे चुभे , एक अजीब सा दर्द हुआ , जो तुमने किसी के लिए नहीं किया वो तुम ऐसे इंसान के लिए कर रहे थे जिसे तुम से मोहब्बत भी नहीं थी। तुमने कहा ये तुम्हारे लिए सजा है पर सच कहू तो मुझे तुम्हे सजा देने का कोई हक़ नहीं है पृथ्वी !!
तुम्हे परेशान करने के बदले मैं खुद को सजा देना चाहूंगी और वो सजा पीछे है”

पढ़कर पृथ्वी ने ख़त को पलटा तो हैरान रह गया। पीछे 100 बार अवनि की हेंडराइटिंग में वही सॉरी नोट लिखा था जो उस शाम अवनि की जगह सुरभि ने पृथ्वी से लिखने को कहा था लेकिन अवनि ने कभी ये सच पृथ्वी को नहीं बताया।  
अवनि का लिखा Sorry Note देखकर पृथ्वी मायूस हो गया उसने सामने बैठी अवनि को देखा और कहा,”तुमने ऐसा क्यों किया अवनि ?”

“इसका जवाब खत में मैं पहले ही दे चुकी हूँ , उस वक्त मुझे आपको सजा देने का कोई हक़ नहीं था पृथ्वी। जिन मुश्किल हालातों में आपने उसे लिखा वो मेरी वजह से बने इसलिए मैंने खुद को सजा दी”,अवनि ने प्यार से कहा
पृथ्वी की आँखों में नमी उभर आयी उस ने खत को साइड में रखा अवनि के पास आया और उसे गले लगाकर कहा,”दोबारा ऐसा कभी मत करना ! तुम्हारा मुझ पर हक़ उस दिन से है जब मेरे दिल और दिमाग ने ये तय किया कि मुझे तुमसे शादी करनी है,,,,,,,,,!!”

अवनि ने सुना तो मुस्कुराई , पृथ्वी अवनि से दूर हटा उसका दाहिना हाथ अपने हाथो में लिया और उसे चार पाँच चूमकर कहा,”सच में पागल हो तुम”
अवनि ने कुछ नहीं कहा बस मुस्कुराती रही। पृथ्वी अवनि से दूर हटकर अपनी जगह वापस बैठा और दूसरा खत उठाया। ये खत अवनि ने तब लिखा था जब उसके कहने पर पृथ्वी ने नापसंद सब्जी “गंवार फली” खायी थी।
पृथ्वी ने लिफाफा खोला खत बाहर निकाला और पढ़ने लगा , हर खत की शुरुआत में अवनि हर हर महादेव जरूर लिखती थी।

“प्रिय पृथ्वी !
सोचा तुम्हे खत नहीं लिखूंगी पर बार बार कोशिश करने के बाद भी खुद को नहीं रोक पायी और आज फिर तुम्हारे लिए खत लिखने जा रही हूँ। मैं नहीं जानती ये ख़त कभी तुम तक पहुंचेंगे भी या नहीं लेकिन इतना यकीन है एक दिन ये सब ख़त तुम्हारे हाथो में होंगे और इन्हे पढ़ते हुए तुम मुस्कुरा रहे होंगे। पृथ्वी मैंने आज से पहले तुम्हारे जैसे इंसान नहीं देखा , मैं तुम्हे समझ नहीं पा रही हूँ। मैंने बस मजाक किया और तुमने मेरे लिए सच में नापसंद सब्जी भी खा ली। ना जाने क्यों पर उस पल तुम्हारे लिए बुरा लगा।

मेरे लिए ये सब मत करो पृथ्वी , मेरे साथ जिस जिंदगी के सपने तुम देख रहे हो असल में वो बस एक नर्क है , एक ऐसी जिंदगी में जिसमे तुम कभी खुश नहीं रह पाओगे। तुम जानते हो पृथ्वी मेरी जिदंगी आसान नहीं है। मैं जिन हालातो से गुजर रही हूँ उसमे अच्छी जिंदगी के ख्वाब नहीं देख सकती। एक शख़्स पहले ही मेरा दिल तोड़ चुका है , मेरी आत्मा को झुलसा चुका है , मुझे खुद से नफरत करने की वजह दे चुका है फिर क्यों तुम मेरे उन जख्मो पर मरहम बनने की बात करते हो ?

क्यों मेरी बदनसीबी को अपनी जिंदगी में शामिल करना चाहते हो ? क्यों मेरे गुनाहो को अपने  बनाना चाहते हो ? मेरे पास सिर्फ सवाल है जिनका जवाब मैं तुम से नहीं माँग सकती क्योकि इन खतों मैंने वो लिखा है जो मैं तुम से कभी कह नहीं पाऊँगी। मैं नहीं जानती पृथ्वी मेरा भविष्य क्या है लेकिन मैं तुम पर अपने दुःख और तकलीफे थोपना नहीं चाहती।

मैं खुद नहीं समझ पा रही कि क्यों मैं रात के तीसरे पहर बैठकर तुम्हारे लिए ये खत लिख रही हूँ लेकिन तुम मेरी जिंदगी में आने वाले वो पहले और आखरी इंसान हो जिसके लिए मैंने खत लिखा है। मेरे लिए खुद को बदलना बंद करो पृथ्वी , तुम जैसे भी हो बहुत अच्छे हो बस इतना समझ लो कि मैं तुम्हारे लायक नहीं,,,,,,,,,,,,,,,कोशिश करुँगी इसके बाद तुम्हारे लिए कोई खत ना लिखू”

दूसरा खत पढ़कर पृथ्वी के चेहरे पर थोड़े गुस्से के भाव झिलमिलाये और उसने अवनि की तरफ देखकर खत को समेटते हुए कहा,”मैंने खुद को तुम्हारे लिए नहीं बदला अवनि , मैंने खुद को इसलिए बदला क्योकि मुझे तुमसे प्यार है और ये बार बार ‘मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ’ लिखना जरुरी है ? तुम बहुत लायक हो , वो लोग तुम्हारे लायक नहीं थे जिनके साथ तुम थी,,,,,,,,,!!”

पृथ्वी को थोड़ा गुस्से में देखकर अवनि ने उसे देखा तो पृथ्वी को अहसास हुआ कि ये खत सालभर पहले लिखा गया था , उसका गुस्सा तुरंत गायब हो गया और उसने खत को साइड में रखकर कहा,”आई ऍम सो सॉरी ! वो थोड़ा सा गुस्सा आ गया मुझे,,,,,,,,,,,,लेकिन अवनि तुम्हे जो कहना हो तुम मुझसे कह सकती हो बस आइंदा कभी ये मत कहना कि तुम किसी के लायक नहीं , तुम बहुत अच्छी हो अवनि और मेरे लिए तुम हमेशा अनमोल रहोगी”

अवनि ने सुना तो नम आँखों से मुस्कुरा दी। पृथ्वी ने देखा तो धीरे से खुद में ही बड़बड़ाया,”पागल लड़की ! हमेशा बस खुद को दोष देती है अरे सामने वाला भी तो नालायक हो सकता है”
“पृथ्वी”,अवनि ने पृथ्वी को बड़बड़ाते देखकर कहा
“हाँ,,,,,,,!!”,पृथ्वी की तन्द्रा टूटी
“क्या सोच रहे हो ?”,अवनि ने पूछा

“सोच रहा हूँ इन खतों को आगे पढू या नहीं ? दो खत पढ़कर ही मुझे कितना अजीब लग रहा है , सोचो तुम्हे इन्हे कैसे लिखा होगा ?”,पृथ्वी ने कहा
अवनि मुस्कुराई और कहा,”तीसरा खत लेकर यहाँ आओ”
पृथ्वी ने तीसरा लिफाफा उठाया और अवनि की तरफ चला आया तो अवनि ने पृथ्वी से अपनी गोद में सर रखने का इशारा किया। पृथ्वी ख़ुशी ख़ुशी अवनि की गोद में सर रखकर लेट गया।

अवनि उसके बालों में अपनी उंगलिया घुमाने लगी। पृथ्वी ने लिफाफा खोलकर खत बाहर निकाला और उसे पढ़ने लगा

“प्रिय पृथ्वी !
पिछले ख़त में मैंने लिखा था कि अब से मैं तुम्हारे लिए कोई खत नहीं लिखूंगी लेकिन चाहकर भी मैं खुद को रोक नहीं पायी और ये खत लिख रही हूँ। पृथ्वी सच कहू तो तुम्हारा मेरी जिंदगी में आना कोई इत्तेफाक नहीं है बल्कि महादेव की कृपा है। तुम उस वक्त मेरी जिंदगी में आये जब मुझे किसी अपने की सख्त जरूरत थी। अपने गलत फैसलों और गलत लोगो के बीच मैंने जैसे खुद को भुला दिया था लेकिन तुमने मुझे ये अहसास दिलाया कि असल में मैं कौन हूँ ? मेरी अपनी एक पहचान भी है और सबसे बड़ा अहसास ये कि मैं एक इंसान हूँ,,,,,,,,,,,,,,

मैंने अपनी जिंदगी में हमेशा गलत लोगो पर भरोसा किया है पृथ्वी पर ना जाने क्यों तुम पर भरोसा करने का दिल करता है। इन सब का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि मुझे तुम से प्यार है या मैं तुम्हे चाहती हूँ,,,,,,,,,,इस जिंदगी में मुझे अब दोबारा कभी प्यार नहीं हो सकता पृथ्वी , तुमसे तो क्या मैं किसी से भी नहीं होगा। ये खत मैंने तुम्हे कुछ बताने के लिए लिखा है। तुम हमेशा कहते थे ना कि मैं भरम की दुनिया से बाहर निकलू तो मैंने खुद को उस भरम से बाहर निकाल लिया है पृथ्वी।

जिस इंसान से मैंने मोहब्बत की उस इंसान को आज मैंने हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,थोड़ी तकलीफ जरूर हुई लेकिन मैंने कर दिखाया। ये जानकर आज तुम्हे बहुत ख़ुशी होगी कि अब वो शख़्स मेरी जिंदगी में नहीं है। मैं तुम्हारा शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ पृथ्वी , जब मैं पूरी तरह टूट चुकी थी , जब मेरा मन चोटों से जख्मी था , जब मुझे सही और गलत में से क्या चुनना है ये समझ नहीं आ रहा था , उस वक्त , उस वक्त महादेव ने तुम्हे मेरी जिंदगी में भेजा ,,,

Thankyou पृथ्वी तुम मेरी जिंदगी में उस वक्त आये जब मैं खुद से हार चुकी थी। सब बातो को अगर एक तरफ कर दिया जाये तो मैं बस इतना कहूँगी कि चाहे तुम कही भी रहो मेरे दिल में हमेशा तुम्हारे लिए एक सम्मान रहेगा ,, तुम्हे पढ़कर अजीब लग रहा होगा लेकिन तुम नहीं जानते तुमने मेरी जिंदगी में क्या चमत्कार किया है।! मैं तुम से कभी मोहब्बत नहीं कर पाऊँगी पृथ्वी लेकिन हाँ तुम हमेशा मेरे अच्छे दोस्त रहोगे एक ऐसे दोस्त जिसके लिए मैं खत लिख सकती हूँ”

( आज कोई सवाल नहीं बस पृथ्वी के लिए लिखे गए अवनि के खतों को पढ़िए और महसूस कीजिये उनकी मोहब्बत )

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संजना किरोड़ीवाल  

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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