Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 3

Pasandida Aurat Season 3 – 50

by Story With Sanjana September 26, 2026
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Pasandida Aurat Season 3 – 50

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

अवनि जयदीप के ऑफिस से बाहर आयी। उसके जहन में बस अंकित की कही बात चल रही थी। पृथ्वी ने नौकरी छोड़ दी ये बात उसने अवनि को अब तक नहीं बताई और ना ही अपनी नयी नौकरी के बारे में बताया। नौकरी छोड़ने से भी ज्यादा अवनि इस बात से हैरान थी कि पृथ्वी ने मौर्या ग्रुप छोड़कर देसाई ग्रुप को ज्वाइन क्यों किया ? चेहरे पर परेशानी के भाव लिए अवनि ऑफिस के बगल में बने रेस्त्रो में चली आयी जहा नीलम भुआ उसका इंतजार कर रही थी।

अवनि को देखकर नीलम भुआ ने कहा,”अरे इतनी जल्दी वापस आ गयी , अब आ ही गयी हो तो बताओ क्या खाओगी ? वैसे तुम्हारे आने से पहले मैंने अपने लिए ये कोल्ड कॉफी आर्डर कर ली थी”
“भुआ जी ! यहाँ से चलिए , हम कही और खा लेंगे”,अवनि ने कहा
नीलम भुआ उठकर अवनि के बगल में आयी और उसकी बाँह छूकर कहा,”क्या हुआ अवनि ! तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना ?”

“भुआ जी ! मुझे ठीक नहीं लग रहा , क्या हम यहाँ से चल सकते है ?”,अवनि ने उदासी भरे स्वर में कहा
“हाँ हाँ क्यों नहीं , तुम यही रुको मैं बिल पे करके आती हूँ”,नीलम भुआ ने कहा और कॉफी का बिल भरने चली गयी।
अवनि बस बेचैनी से यहाँ वहा देख रही थी और कभी अपने गले को छू रही थी। बिल पे करते हुए नीलम भुआ ये सब देख रही थी। उन्होंने एक पानी का बोतल
 लिया और अवनि के पास आकर कहा,”अवनि ! ये लो थोड़ा पानी पी लो”

अवनि ने पानी पीया तो उसकी बेचैनी थोड़ी कम हुई। वह नीलम भुआ के साथ रेस्त्रो से बाहर चली आयी। बाहर आकर नीलम भुआ ने घर के लिए कैब बुक कर लिया और अवनि से कहा,”अवनि ! मैं पृथ्वी को कॉल करू ?”
“नहीं नहीं भुआ जी उन्हें कॉल मत कीजिये प्लीज ! वो अभी मीटिंग में है उन्हें डिस्टर्ब नहीं करते है। मैं ठीक हूँ हम घर चलते है बस”,अवनि ने नीलम भुआ का हाथ थामकर कहा
“अच्छा ठीक है , मैंने कैब बुक कर दिया है अभी आ जाएगी”,नीलम भुआ ने कहा तो अवनि ने हा में गर्दन हिला दी

 नीलम भुआ को नहीं पता था अवनि क्यों परेशान है ? उन्हें लगा अवनि की तबियत ठीक नहीं है इसलिए वह घर जाने की जिद कर रही है। अवनि ने भी नीलम भुआ को कुछ नहीं बताया क्योकि उन्हें कुछ भी बताने से पहले अवनि पृथ्वी से बात करना चाहती थी। उसके जहन में बहुत से सवाल चल रहे थे जिनका जवाब उसे पृथ्वी से चाहिए था। कैब आ चुकी थी , नीलम भुआ और अवनि अंदर आ बैठे और घर के लिए निकल गए।

“तुम्हारा दिमाग खराब है क्या ? तुमने अवनि के सामने एकदम से पृथ्वी की नौकरी छोड़ने की बात क्यों कह दी ?”,जयदीप ने अंकित के पास आकर थोड़ा गुस्से से कहा
“मुझे लगा पृथ्वी ने उन्हें अपनी नौकरी छोड़ने के बारे में बताया होगा”,अंकित ने उलझन भरे स्वर में कहा
जयदीप जैसे ही कुछ बोलने को हुआ उसने देखा ऑफिस के सब लोग वहा जमा है। जयदीप ने अंकित से वहा से जाने को और फिर सबको अपना काम करने को कहकर अपने केबिन में चला गया !

जयदीप अपने केबिन में आया और सर से हाथ लगाकर बैठ गया। नीलेश उसी केबिन में रखे सोफे पर बैठा कोई रिपोर्ट तैयार कर रहा था उसने अपने लेपटॉप की तरफ देखते हुए कहा,”अब आपको क्या हुआ ?”
जयदीप ने सर उठाया और सोफे पर बैठे नीलेश को देखकर कहा,”बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो गयी है , आज तो पृथ्वी गया काम से”
“क्यों , उसने ऐसा क्या कर दिया ?”,नीलेश ने कहा उसकी नजरे अभी भी लेपटॉप स्क्रीन पर थी

“उस गधे ने अपने नौकरी छोड़ने के बारे में अपने घर पर अभी तक नहीं बताया , अवनि यहाँ आयी थी उसका लंच लेकर और अंकित ने उस से कह दिया कि पृथ्वी को नौकरी छोड़े दो हफ्ते हो चुके है और वो अब देसाई ग्रुप में काम करता है,,,,,,,,,,,,,हाह ! ये सुनकर ना जाने बेचारी अवनि पर क्या गुजरी होगी ? आज तो वो पृथ्वी से बहुत गुस्सा होने वाली है,,,,,,,!!!!”,जयदीप ने अपनी कुर्सी से उठकर सोफे के दूसरे किनारे बैठते हुए कहा
नीलेश ने इस बार स्क्रीन से नजरे हटाई और जयदीप की तरफ देखकर कहा,”होना भी चाहिए ! पृथ्वी को भी तो शादीशुदा जिंदगी का थोड़ा टेस्ट मिले”

“क्या मतलब ?”,जयदीप ने कहा
“मेरा मतलब आप अच्छे से जानते है क्योकि आप भी शादीशुदा है”,नीलेश ने कहा और अपनी नजरें वापस लेपटॉप की स्क्रीन पर जमा ली। जयदीप सोच में पड़ गया और जब उसे नीलेश की बात का मतलब समझ आया तो उसने नीलेश को घुरा और कहा,”क्या पृथ्वी अब तुम से ऑफिस के काम के साथ साथ मेरी पर्सनल लाइफ भी शेयर करने लगा है ?”

नीलेश अपनी रिपोर्ट तैयार कर चुका था उसने लेपटॉप बंद किया और जयदीप की तरफ देखकर सधे हुए स्वर में कहा,”उसने मुझसे कुछ शेयर नहीं किया है , आप इतने साल से उसके साथ है आपसे बेहतर ये बात कौन जान सकता है कि वो कितना इंट्रोवर्ट है”
“हाँ ये तो है लेकिन उसकी शादीशुदा जिंदगी में कोई मिसअंडरस्टेंडिंग हो उस से पहले मुझे उसे ये बताना होगा कि अवनि यहाँ आयी थी”,जयदीप ने अपनी  जेब से फोन निकालकर कहा

“उसकी जरूरत नहीं है वो बस आता ही होगा”,नीलेश ने कहा
“क्या तुमने उसे बता दिया है ?”,जयदीप ने हैरानी से पूछा
“हाँ मैंने  उसकी वाइफ को अंदर आते हुए देख लिया था”,नीलेश ने कहा
“तुम मेरे ऑफिस के लिए काम करते हो या पृथ्वी के लिए ?”,जयदीप ने कहा
“मैं पृथ्वी के कहने पर आपके ऑफिस के लिए काम करता हूँ”,नीलेश ने कहा

जयदीप बस ख़ामोशी से नीलेश को देखता रहा तभी केबिन का दरवाजा खुला और पृथ्वी अंदर आया।
“अवनि कहा है ?”,पृथ्वी ने पूछा
जयदीप उठकर पृथ्वी के सामने आया और उसे सब बात बता दी। परेशानी के भाव उसके चेहरे पर झिलमिलाने लगे ये देखकर जयदीप ने कहा,”तुमने उसे बताया क्यों नहीं कि तुमने यहाँ से नौकरी छोड़ दी है और तुम अब देसाई ग्रुप में हो ?”

“मैं उसे ये सब बताकर परेशान करना नहीं चाहता था”,पृथ्वी ने निराश होकर कहा
“लेकिन तुम उसे परेशान कर चुके हो पृथ्वी , जानते हो वो आज ऑफिस में तुम्हारे लिए लंच लेकर आयी थी और उस वक्त उसके चेहरे पर ख़ुशी साफ़ दिखाई दे रही थी लेकिन जैसे ही उसने सुना कि तुम अब यहाँ काम नहीं करते तो उसका चेहरा उतर गया और वह टिफिन रखकर चली गयी। तुम्हे अवनि से ये सब छुपाना नहीं चाहिए था , उसे सच में ये सब जानकर बहुत बुरा लगा है”

जयदीप की बातो ने पृथ्वी को और गिल्ट में डाल दिया उसे अब अवनि की फ़िक्र होने लगी ! गोआ से लौटने के बाद वह कितना खुश थी लेकिन पृथ्वी का सच जानकर उदास हो गयी।
“तुम्हे घर जाकर उस से बात करनी चाहिए”,पृथ्वी को खोया देखकर जयदीप ने कहा
पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने कहा,”मैं अभी नहीं जा सकता , आज मिस्टर शर्मा के साथ एक जरुरी मीटिंग है जिसमे भरत भी होगा और वहा मेरा होना बहुत जरुरी है। मैं अवनि से शाम में मिल लूंगा”

जयदीप ने सुना तो उसे हैरानी हुई , पहली बार पृथ्वी ने अपने काम को अवनि से ऊपर रखा था और ऐसा पृथ्वी ने क्यों किया जयदीप नहीं जानता था।
“जैसी तुम्हारी मर्जी,,,,,,,,मुझे एक मीटिंग अटेंड करने बाहर जाना है , मैं चलता हूँ”,जयदीप ने कहा और पृथ्वी का कंधा थपथपाकर वहा से चला गया।
जयदीप के चले जाने के बाद केबिन में सिर्फ पृथ्वी और नीलेश थे और दोनों एक दूसरे के आमने सामने खड़े थे।
नीलेश ने पृथ्वी को देखा और कहा,”क्या तुम ठीक हो ?”

“हम्म ! आई ऍम फाइन , तुम बताओ तुम क्यों परेशान हो ?”,पृथ्वी ने खाली सोफे पर बैठते हुए कहानीलेश कुछ देर खामोश रहा और फिर बीती रात हुई सारी बाते उसने पृथ्वी को बता दी जब वह अपने पिता भरत से मिला था। पृथ्वी ने ध्यान से नीलेश की बात सुनी और फिर सधे हुए स्वर में कहा,”समझ सकता हूँ नीलेश , अपने ही पिता को ऐसे हाल में देखना कोई भी औलाद बर्दास्त नहीं कर पायेगी।

मेरी उनसे कोई दुश्मनी नहीं है लेकिन मिस्टर देसाई के साथ वो जो कर रहे है वो गलत है , उन्होंने तुम्हारे साथ जो किया वो गलत है , प्रवीण और ऑफिस के ईमानदार एम्पलॉयज के साथ जो किया वो गलत है , प्राची के कहने पर मेरे साथ जो किया वो गलत है और गलत है उनकी नियत जिसके चलते आज उनकी ये हालत है।  

तुम भी तो यही चाहते थे न कि उनका सच मिस्टर देसाई के सामने आ जाये और इसलिए तुमने उस शाम एयरपोर्ट पर उनके खिलाफ मुझे सबूत दिए थे फिर आज तुम्हे एकदम से उनकी परवाह कैसे होने लगी ?”
“क्योकि मैं उन्हें कोई तकलीफ देना नहीं चाहता”,नीलेश ने तड़पकर कहा

पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”तुम्हे क्यों लगता है तुम उन्हें तकलीफ दे रहे हो ? तुम उन्हें कोई तकलीफ नहीं दे रहे बल्कि उलटा उन्हें आने वाली कई मुसीबतो से बाहर निकाल रहे हो। मुझे देसाई ग्रुप में देखकर उनकी आधी हिम्मत टूट चुकी है वो जल्दी ही हार मान लेंगे और अपने इरादे बदल देंगे एक बार मेरे हाथ वो पेपर्स लग जाए”
“कौनसे पेपर्स ?”,नीलेश ने हैरानी भरे स्वर में कहा

“वही जिन्हे आज शाम मिस्टर शर्मा साइन करने वाले है,,,,,,,,,,,,,,डोंट वरी नीलेश , देसाई ग्रुप में कल का दिन भरत देशमुख का आखरी दिन होगा”,पृथ्वी ने विश्वास से भरकर कहा
“इन सब में प्राची को तो कोई नुकसान नहीं होगा न ?”,नीलेश ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
“क्या तुम अब भी उसे चाहते हो ?”,पृथ्वी ने नीलेश की आँखों में देखकर पूछा

नीलेश फीका सा मुस्कुराया और कहा,”मेरे चाहने न चाहने क्या होता है ? मैं बस उसे खुश देखना चाहता हूँ,,,,,,,,,,,,और किसी तकलीफ में देखना नहीं चाहता,,,,,,,,,बस इस से ज्यादा कुछ नहीं”
पृथ्वी ख़ामोशी से नीलेश को देखता रहा , नीलेश की आँखों में प्राची के लिए प्यार साफ़ नजर आ रहा था और साथ ही नजर आ रही थी प्राची के लिए परवाह

“मैं ख्याल रखूंगा”,पृथ्वी ने कहा और रिसीवर उठाकर केंटीन में फोन किया और दो कप कॉफी भेजने को कहा।
कॉफी आने के बाद पृथ्वी नीलेश से आगे की बाते करने लगा जबकि उसके जहन में चल रही थी अवनि,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि नीलम भुआ के साथ अपने फ्लेट पर चली आयी। अवनि ने नीलम भुआ से बैठने को कहा और खुद किचन में जाकर उनके लिए खाना ले आयी।
“तुमने तकलीफ क्यों की ? तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है तुम्हे आराम करना चाहिए”,नीलम भुआ ने अवनि के हाथ से खाने की प्लेट लेकर उसे सामने टी टेबल पर रखकर कहा।
“मैं ठीक हूँ भुआ जी ! आप खाना खाइये , मेरी वजह से आपको इतनी देर भूखा रहना पड़ा”,अवनि ने उदासी भरे स्वर में कहा

नीलम भुआ ने अवनि की कलाई पकड़कर उसे साइड में पड़े सोफे पर बैठाया और कहा,”तुम इतना क्यों सोचने लगती हो अवनि ? मुझे इतनी भूख भी नहीं थी वहा तो मैं बस तुम्हारे लिए गयी थी”
अवनि ने सुना तो फीका सा मुस्कुरा दी , उसकी मुस्कुराहट देखकर नीलम भुआ समझ गयी कि कुछ तो बात है जो अवनि को परेशान कर रही है। उन्होंने बड़े प्यार से अवनि से पूछा,”अवनि ! पृथ्वी ने तुमसे कुछ कहा क्या ?”
अवनि की तंद्रा टूटी उसने चौंककर कहा,”हाँ ! नहीं तो , उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा”

“तो फिर तुम इतना परेशान क्यों हो ? देखो अगर कोई बात है तो तुम मुझसे शेयर कर सकती हो लेकिन ऐसे अंदर ही अंदर उलझना बंद करो”,नीलम भुआ ने कहा
अवनि ने सुना तो नीलम भुआ का ध्यान भटकाने के लिए कहा,”वो क्या है ना भुआ जी ! मैंने आपकी प्लेट में बहुत ही सिंपल खाना परोसा है इसलिए मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है। बाहर आपको इस से अच्छा खाने को मिलता मैं जिद करके आपको घर ले आयी”

नीलम भुआ ने सुना तो खाने की प्लेट की तरफ देखा जिसमे अच्छा लजीज खाना था और फिर अवनि के ललाट पर धीरे से अपनी उंगलिया मारकर कहा,”पगली कही की ! अरे इतना अच्छा खाना तो मुझे बाहर होटल में भी नहीं मिलेगा,,,,,,,,,और तुम्हारी खाने की प्लेट कहा है ? जाओ अपने लिए भी खाना लेकर आओ फिर हम साथ मिलकर खाते है”
“मैं बाद में खा लुंगी , आप खाइये ना”,अवनि ने कहा

“कोई बहाना नहीं चलेगा , जाओ अपनी प्लेट लेकर आओ”,नीलम भुआ ने अवनि की तरफ देखकर थोड़ा कठोर स्वर में कहा तो अवनि उठकर किचन में चली आयी।
अपने लिए प्लेट में खाना निकालते हुए अवनि मन ही मन खुद से कहने लगी,”आखिर पृथ्वी ने मुझसे ये बात क्यों छुपाई ? पिछले दो हफ्ते से वो अकेले ये सब झेल रहे है और मुझे खबर तक नहीं है और मैं समझती रही कि वो अपने काम में बहुत खुश है,,,,,,,,,,,,,,,क्यों पृथ्वी ?  आपने ऐसा क्यों किया ?”

अवनि की आँखों में आँसू भर आये उनसे जल्दी से अपनी आँखे साफ़ की और होंठो पर एक झूठी मुस्कान सजाकर किचन से बाहर आ गयी। उसने अपनी खाने की प्लेट नीलम भुआ की प्लेट के साथ रखी और दोनों बातें करते हुए खाना खाने लगी।

खाना खाने के बाद नीलम भुआ कुछ देर अवनि के साथ रुकी और फिर अपना सामान लेकर घर चली गयी ! अवनि ने दरवाजा बंद किया और हॉल में चली आयी। पृथ्वी को फोन लगाने का सोचकर अवनि ने टेबल पर रखा अपना फोन उठाया लेकिन अगले ही पल उसने फ़ोन साइड में रखा और कहा,”मैं उन्हें फोन क्यों करू ? गलती उनकी है , झूठ उन्होंने बोला , बाते उन्होंने छुपाई,,,,,,,,,,,,,मैं उन्हें फोन नहीं करुँगी”

ऐसा कहते हुए अवनि एक छोटी नाराज बच्ची लग रही थी लेकिन आज पृथ्वी को लेकर उसका गुस्सा जायज था। पृथ्वी के बारे में सोचते हुए अवनि मन ही मन कुढ़ती रही तभी उसका फोन बजा। पृथ्वी का होगा सोचकर अवनि ने जल्दी से फोन उठाया लेकिन स्क्रीन पर सुरभि का नाम देखकर मायूस हो गयी और फोन उठाकर कान से लगा लिया  !
– हेलो अवनि
“हाँ सुरभि बोलो”

– क्या हुआ तुम्हारी तबियत ठीक नहीं क्या ?
“मैं ठीक हूँ बस थकान की वजह से लग रहा होगा”
– हाँ थकान तो होगी ना , एक हफ्ते से बाहर थी और फिर मुंबई आते ही काम में बिजी हो गयी होगी”
“हम्म्म ! तुम बताओ तुम कैसी हो ?”
– मैं बिल्कुल ठीक हूँ , अभी उदयपुर में हूँ और बहुत खुश हूँ
“तुम उदयपुर में क्या कर रही हो ? वहा सब ठीक तो है न ?”

– अह्ह्ह कल शाम तक तो कुछ ठीक नहीं था लेकिन अब सब ठीक है  
“सुरभि ये पहेलियाँ बुझाना बंद करो और बताओ मुझे क्या बात है ? जब से मैं यहाँ आयी हूँ तुमने तो मुझे फोन मैसेज करना ही बंद कर दिया। पता नहीं कहा बिजी रहती हो ?”
– यही बताने के लिए तो मैंने तुम्हे फोन किया है,,,,,,,,,,,,,,अवनि मुझे प्यार हो गया है और मैं शादी करने जा रही हूँ
अवनि ने सुना तो ख़ुशी से उसका चेहरा खिल उठा , वह एक पल के लिए ये भूल गयी कि सुरभि जिस से प्यार करती है वो शख्स कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ है उसने ख़ुशी भरे स्वर में कहा  

“ये कब हुआ और तुम मुझे अब बता रही हो नालायक ?”
– अरे यार बहुत लम्बी कहानी है जब तुम उदयपुर आओगी ना तब सब बताउंगी तुम्हे , फिलहाल तो मुझे तुम्हे ये बताना है कि मेरे मम्मी पापा कल सिद्धार्थ के मम्मी पापा से मिलने वाले है , हमारे रिश्ते को लेकर
सुरभि के मुंह से सिद्धार्थ का नाम सुनकर अवनि को सब याद आ गया जो पृथ्वी ने उसे बताया था ! हालाँकि अवनि को सुरभि की पसंद से कोई ऐतराज नहीं था लेकिन अतीत की यादे अभी भी कभी कभार अवनि को उदास कर जाती थी।

सुरभि के मुँह से सिद्धार्थ का नाम सुनकर अवनि थोड़ा उदास हो गयी
“सिद्धार्थ ?”
– हाँ सिद्धार्थ ! आई ऍम सॉरी अवनि मैंने तुमसे ये बात छुपाई , मैं तुम्हे बहुत पहले सब बता देना चाहती थी लेकिन मेरी कभी हिम्मत ही नहीं हुई , सब अचानक हुआ कि कुछ समझ नहीं आया। मैं जानती हूँ सिद्धार्थ तुम्हारा अतीत है लेकिन अब वो मेरा भविष्य बनना चाहता है,,,,,,,,,,,मैं उस से शादी करना चाहती हूँ अवनि

अवनि फीका सा मुस्कुराई उसकी सबसे अच्छी दोस्त ने अब तक उस से कितना कुछ छुपाया था , आज पृथ्वी की वजह से अवनि पहले ही उदास थी अब सुरभि की बातो ने उसकी उदासी को और बढ़ा दिया उसने मायूसी भरे स्वर में कहा,”सुरभि ! तुमने बेस्ट फ्रेंड होकर मुझसे ये सब छुपाया ?”
“अवनि मैं,,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि इतना ही कह पायी उसके शब्द गले में ही अटक गए

अवनि की आँखों में भरे आँसू की एक बूंद उसके गालों पर लुढ़क आयी और उसने कहा,”तुम दोनों अब मुझसे कितना कुछ छुपाने लगे हो”
“दोनों ?”,सुरभि ने हैरानी से कहा लेकिन अवनि ने उसकी बात का जवाब ना देकर फोन काट दिया !

आप अगर अवनि की जगह होते तो क्या होता आपका रिएक्शन ? कमेंट सेक्शन में बताईये और पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ

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संजना किरोड़ीवाल

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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