Sanjana Kirodiwal
Aur Pyar Ho Gaya

और प्यार हो गया – 25

by Story With Sanjana May 8, 2022
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Aur Pyar Ho Gaya – 25

Aur Pyar Ho Gaya
Aur Pyar Ho Gaya by Sanjana Kirodiwal

रात के 11 बजे , खुली सड़क किनारे कार्तिक अकेला बैठा अपनी दास्तान सुना रहा था l उस वक्त उस कुत्ते के अलावा वहा कोई नहीं था और पिछले एक घंटे से वह कुत्ता बिना िकसी शिकायत के कार्तिक की बाते सुन रहा था l ठंडी हवाएं चलने लगी शराब का नशा कार्तिक के सर चढ़ने लगा था l कुत्ते को वह इंसान समझ बैठा था और कहने लगा
“वो जो सोफिया है न , बड़ी खतरनाक लड़की है एक बार ऐसे ही उसने मुझे शराब पीला दी थी और मैं ऐसे ही सड़को पर घूम रहा था तब नंदिनी मुझे ढूंढते हुए आई l शी इज सो केयरिंग , उसे बहुत फ़िक्र है मेरी l तब ऐसी ही रात में खाली पड़ी सड़क पर मैंने उसके साथ डांस किया था वो मेरे बहुत करीब थी , बहुत मतलब इतना की उसकी सांसो को मैं अपनी सांसो में महसूस कर सकता था उस वक्त !! उसने मुझे घर भी छोड़ा , वो हमेशा मेरी हेल्प के लिए कही से भी निकलकर आ जाती थी डोरेमॉन की तरह ,, नहीं नहीं डोरेमॉन नहीं वो मेरी शिजुका है l मैंने उसे बहुत परेशान किया है , बहुत बार दिल दुखाया पर वो कभी मुझसे शिकायत नहीं करती है l शी इज रियली सो नाइस l लेकिन उसने मुझसे कहा क्यों नहीं देन शी लव्ज मी l मुझे क्यों जाने दिया उस सोफिया के पास ? ऐसे तो इतने थप्पड़ मारती है एक थप्पड़ और मार लेती और खींचकर ले आती मुझे वहा से l अब मैं तो सॉफ्ट बंदा हु ना यार फिसल जाता हु कही भी कभी भी उसको तो मुझे सम्हालना चाहिए था l उसने मुझे नहीं बताया कुछ भी ,, क्यों नहीं बताया ? क्यों ? क्यों ? क्यों ? क्यों नहीं बताया ? “
कहते हुए कार्तिक पैर पटकने लगा और बच्चो की तरह करने लगा l बेचारा कुत्ता उसे अधखुली आँखों से देखता रहा कार्तिक की बातें कम थी जो वह अब उसके सामने ये सब नौटंकी भी करने लगा l कुत्ते ने उबासी ली और वही पसरकर लेट गया जैसे कार्तिक से कहना चाह रहा हो ,”बस कर पगले रुलाएगा क्या ?”
पर कार्तिक उसे किसी से कोई मतलब नहीं था वह बस बोले जा रहा था जब उसने कुत्ते को पसरे हुए देखा तो कहने लगा,”हां हां सो जा तू तेरे तो मजे है , तुझे कोनसा किसी ने प्यार में धोखा दिया होगा , झूठ बोला होगा या फिर बातें छुपाई होगी l तुम लोगो की जिंदगी अच्छी है ना किसी के आने की ख़ुशी न किसी के जाने का गम बस वक्त बेवक्त भोंककर अपना वक्त काट लेते हो l तुम क्या समझोगे मेरे प्यार को ?
करती की बात पर कुत्ते ने अपनी गर्दन थोड़ी सी उठाई और झटक कर वापस लेट गया जैसे कह रहा हो ,”हां हां तुमने तो जैसे प्यार में खूब झंडे गाड़े हो l तुम्हारी हरकते ही ऐसी है की लड़की तो छोड़कर जाएगी ही तुझे !! बड़ा आया प्यार समझाने वाला !! “
“तुझे पता है हम लड़को की गलती कहा होती है हम किसी के एक बार i love you बोलते ही पिघल जाते है l और ये लड़कीया इनको तो अगर स्वयं ब्रह्मा जी भी आकर बोले ना की i love you तो पहली बात तो इनको भरोसा ही नहीं होगा दुसरा अगर प्यार होगा भी तो सामने से खुद नहीं कहेगी इंतजार करेगी की वो आकर कहे l बस इसी वजह से देर हो जाती है , नंदू ने भी तो यही किया ना वो इन्तजार करती रही पर खुद से चलके नहीं कहा , कह देती तो इतना सब होता ही नहीं l कितनी हैप्पी लाइफ थी मेरी इन सबने मिलकर इसकी बेंड बजा दी l सोफिया भी गयी और देख अब न नंदू भी मेरे साथ नहीं है l”,कार्तिक ने अफ़सोस जताते हुए कहा
रात गहराने लगी कुत्ते को अब कार्तिक की बातो से इरिटेशन होने लगी थी उसने एक नजर कार्तिक को देखा चेहरा दूसरी तरफ घुमाकर जमीं से लगा लिया जैसे कह रहा हो,”भाई जा ना अब तू यहाँ से , तेरी बाते सुन सुन कर अब तो मैं भी तेरी नंदिनी को मिस करने लगा हु”
कार्तिक को कुत्ते की ये हरकत नागवार गुजरी उसने उसकी तरफ देखते हुए कहा,”देख तूने भी मुंह मोड़ लिया l अब चलता हु यार खामखा तुझे इतना सब सुना दिया पर जाते जाते एक बात कहनी है तुझसे कभी किसी लड़की को अपनी बेस्ट फ्रेंड मत बनाना , नहीं मतलब बिल्कुल नहीं क्योकि कब वो बेस्टफ्रेंड तुमसे प्यार करने लग जाये ये कोई नहीं जानता l “
कुत्ता अपनी जगह से उठा और अपनी गर्दन को दो चार बार झटका , कानो को हिलाया , उँघते हुए उसने एक नजर कार्तिक पर डाली और आँखों ही आँखों में कहने लगा,”तू तो जायेगा नहीं मैं ही चलता हु , कही तू मुझे अब कुत्ते से इंसान बनने पर मजबूर ना कर दे और मेरे मुंह से गाली ना निकल जाये”
कुत्ते को अपनी और घूरता पाकर कार्तिक ने भोंहे ऊपर निचे की तो कुत्ते ने हल्का सा भोंककर उसे झिड़का और वहा से चला गया कार्तिक को लगा जैसे जाते जाते कुत्ता उसे शुद्ध हिंदी में अच्छी वाली गाली देकर गया है l उसे जाते हुए देखकर कार्तिक भी दूसरी और आगे बढ़ गया घर जाने के लिए और चलते चलते गाने लगा
“दोस्त दोस्त ना रहा , प्यार प्यार ना रहा ! जिंदगी हमे तेरा , ऐतबार ना रहा”
ठंडी हवाएं उसके बदन पर थपेड़े मारती हुई गुजर जाती l अपनी धुन में गाता हुआ कार्तिक लड़खड़ाते कदमो से घर आ गया l उसे अब भी होश नहीं था उसने दरवाजा खटखटाया l दरवाजा खुला सामने अखिलेश जी खड़े थे कार्तिक ने उन्हें एक नजर देखा और फिर चुपचाप अंदर चला गया l
“आपने उसे कुछ कहा क्यों नहीं ?”,पास खड़ी रंजना ने अखिलेश जी से कहा
“उस से बात करने का ये सही वक्त नहीं है रंजू , अभी वो नशे में है मेरे सवालों का जवाब नहीं दे पायेगा l बेहतर होगा हम उस से सुबह बात करे , वो सुरक्षित घर आ गया अभी के लिए ये ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है”,अखिलेश जी ने कहा
“हां लेकिन उसका इस तरह इतनी रात को घर में शराब पीकर आना , क्या ये सही है ? हम इस तरह उसकी गलतियों पर पर्दा तो नहीं डाल सकते है ना”,रंजना ने परेशान होते हुए कहा l
”मैं तुमसे पर्दा डालने के लिए नहीं कह रहा हु रंजू , इस वक्त कार्तिक नशे में है उस से कुछ पूछना ना पूछना एक जैसा है l अभी वो परेशान है और उस से सवाल करके मैं उसकी परेशानी और नहीं बढ़ाना चाहता l हमे उस से सुबह बात करनी चाहिए “,अखिलेश जी ने सहजता से रंजना को समझाते हुए कहा
“हम्म्म ! पता नहीं किसकी नजर लग गयी है मेरे बच्चे को ? हमेशा हसने मुस्कुराने वाला पता नहीं कहा उलझकर रह गया है l मुझे तो अब डर सा लगने लगा है”,रंजना ने भावुक होकर अखिलेश जी कंधे पर सर रखते हुए कहा
“परेशान मत हो रंजू सब ठीक हो जाएगा l”,अखिलेश जी ने रंजना का सर सहलाते हुए कहा l
अगली सुबह नंदिनी हाथ में बड़ा सा बॉक्स लिए आई जिसे उसने लाल रंग के सुनहरे कागज से पैक किया हुआ था l अंदर आकर उसने बॉक्स को टेबल पर रखा और किचन में आकर रंजना को पीछे से गले लगाते हुए कहा,”गुड मॉर्निंग आंटी”
“अरे बेटा तुम कब आई ?”,रंजना ने नंदिनी को वहा देखकर चौंकते हुए कहा
“बस आंटी अभी अभी आई हु , आपके हाथ से बनी एक कप चाय पीनी है”,नंदिनी ने वही किचन के प्लेटफॉर्म पर बैठते हुए कहा
“हां बिल्कुल अभी मैं सबके लिए चाय बनाने ही जा रही थी , चाय के साथ कुछ और लोगी बेटा ?”,रंजना ने गैस पर चाय का पतीला रखते हुए कहा l
“नहीं आंटी सिर्फ चाय”,नंदिनी ने मुस्कुराते हुए कहा
“ठीक है , नंदिनी तुमने कार्तिक को बताया ?”,रंजना ने चाय बनाते हुए कहा
“क्या आंटी ?”,नंदिनी ने अनजान बनते हुए कहा l
“यही की तुम कार्तिक से प्यार करती हो”,रंजना ने नंदिनी की आँखों में देखते हुए कहा
“छोड़िये ना आंटी ये सब , ये बताईये आपकी तबियत कैसी है ?”,नंदिनी ने रंजना की बात टालते हुए कहा l
“नंदिनी बात को घुमाओ मत , तुमने कार्तिक से कहा या नहीं ?”,रंजना ने चाय कप में छानते हुए कहा l
“आंटी मैंने उसे नहीं कहा”,नंदिनी ने धीरे से कहा
“पर क्यों ? “,रंजना में हैरानी से कहा
“अब कहने का कोई मतलब नहीं है आंटी , बन्नी अपना प्यार चुन चुका है , सोफिया !! हां आंटी वो सोफिया को पसंद करता है , बहुत पसंद करता है l कार्तिक के लिए वही सही है”,नंदिनी ने उदास स्वर में कहा
“तू क्या कह रही है मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा , मैं बस इतना जानती हु की कार्तिक के लिए तुम्हारे अलावा और कोई लड़की सही नहीं हो सकती”,रंजना ने दर्दभरे स्वर में कहा

नंदिनी ख़ामोशी से दूसरी तरफ देखने लगी रंजना ने चाय का कप उठाया और नंदिनी के सामने आकर कहा,”नंदिनी ये जिंदगी भी एक चाय के कप की तरह है और प्यार इसमें चीनी का काम करता है l बिना चीनी की चाय अच्छी नहीं लगती इसी तरह बिना प्यार के जिंदगी भी बेस्वाद लगने लगती है l जैसे ये चीनी इस चाय में घुलकर गायब हो जाती है दिखाई नहीं देती पर इसका अस्तित्व उसमे बना रहता है , मैं चाहती हु वैसे तुम्हारा प्यार कार्तिक की जिन्दगी में घुले l “
नंदिनी डबडबाई आँखों से रंजना को देखने लगी l
“तुम्हारी चाय , पीकर देख लो मीठा सही तो है ना l और अगर कम हो तो एक चम्मच ऊपर से घोल लेने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए”,रंजना ने कहते हुए कप नंदिनी की और बढ़ाया और अखिलेश जी के लिए चाय लेकर किचन से बाहर निकल गयी
रंजना ने बहुत ही कम शब्दों में अपनी बात कह दी जिसका मतलब बहुत गहरा था l नंदिनी ने चाय पी और किचन से बाहर आ गयी l वह कार्तिक के कमरे की तरफ बढ़ी दरवाजा खुला हुआ था कार्तिक दरवाजा की और पीठ किये हुए अपने बेड पर बैठा था शायद रातभर से सोया नहीं था l नंदिनी ने कमरे में चारो और नजर दौड़ाई सारा कमरा अस्त व्यस्त था l
“bunny……………!!”, नंदिनी ने धीरे से कहा
कार्तिक जो की नंदिनी से पहले से इतना ख़फ़ा था नंदिनी की आवाज सुनकर और ज्यादा भड़क गया और कहा,”नंदू क्यों आई हो यहां ?
नंदिनी – bunny मैं सिर्फ तुम्हे……………………!!”
कार्तिक ने नंदिनी की बात पूरी ही नहीं होने दी वह गुस्से से उठा और नंदिनी के सामने आकर कहा,”मैं जानता हु की तुम मुझे यहाँ क्या कहने आई हो ? देखो नंदू अगर तुम यहाँ सोफिया को लेकर मुझे कुछ समझाने या कहने आयी हो तो मैं तुम्हारी एक भी बात नहीं सुनने वाला l
“bunny मैं ………………..!!!”,नंदिनी ने बोलना चाहा पर बोल नहीं पाई
“क्या मैं नंदू ? तुम भी बाकि सब की तरह निकली धोखेबाज , झूठ बोला तुमने मुझसे , मेरी बेस्ट फ्रेंड होकर मुझसे सच छुपाया तुमने l मैं मैं तुम्हे अपनी हर बात बताता था ना , पर तुमने ? तुमने मुझसे हर बात छुपाई क्यों किया ऐसा ? क्यों ?”,कार्तिक चिल्ला उठा
कार्तिक का आज ये रूप नन्दिनी ने पहली बार देखा था l वह सहम गयी l कार्तिक उसके पास आया और उसके कंधो को अपने मजबूत हाथो मे थामते हुए गुस्से से कहा,”तुम मुझसे प्यार करती हो ये बात भी मुझे किसी और से पता चली , क्यों छुपाई मुझसे ये बात ? क्यों झूठ बोला मुझसे की तुम सिर्फ मेरी बेस्ट फ्रेंड हो ? क्यों किया ऐसा नंदू ?”
“मैं तुम्हारे और सोफिया के बिच नहीं आना चाहती थी”,नंदिनी के मुंह से मुश्किल से निकला l
“ऐसा सिर्फ तुम सोचती हो की तुम किसी के बिच आ रही हो , नंदू तुम नहीं जानती तुमने क्या किया है ? सोफिया…………सोफिया………….?”कहते हुए कार्तिक गुस्से से नंदिनी से दूर हो गया और उसकी तरफ पीठ घुमा ली
“सोफिया तुमसे बहुत प्यार करती है कार्तिक”,नंदिनी ने अपनी आँखों में आंसू भरकर कहा
“तुम सबने मेरा मजाक बनाकर रख दिया है l सब किसी ना किसी से प्यार करते है पर कोई नहीं जानना चाहता की मैं क्या चाहता हु , क्या से क्या बन गया हु मैं जिससे प्यार नहीं है उसे समझा नहीं पा रहा हु मैं और जिससे प्यार करने लगा हु वो समझना नही चाहती l मैं आखिर करू तो क्या करू ?”,कार्तिक एक बार फिर चिल्ला उठा
नंदिनी की आँखों से आंसू बहने लगे l कार्तिक ने दर्दभरे स्वर में कहना जारी रखा,”मेरी जिंदगी अब मेरी नहीं रही है उसे दो हिस्सों में बाट दिया है l एक कहती है प्यार है दूसरी प्यार होकर भी जताना नहीं चाहती है l मेरी जिंदगी मेरे शौक मेरी सोच यहाँ तक के मेरी सांसे भी बट चुकी है l सबको अपना अपना प्यार चाहिए लेकिन कोई मेरे दिल मे झांककर नहीं देखता की मैं क्या चाहता हु ? मेरे चाहने या ना चाहने किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता नंदू l सोफिया नहीं समझ रही तुम समझना नहीं चाह रही l कितनी आसानी से कह दिया तुमने ये सब l मुझे लगता था नंदू तुम मुझे समझती होगी पर तुमने भी मुझसे इतना बड़ा सच छूपाया , मुझे सोफिया के साथ जाने दिया ये जानते हुए भी की वो मेरे लिए सही नहीं है , तुमने एक बार भी मुझे रोकने की कोशिश नहीं की , तुम्हे अहसास भी है बीते दिनों किस नर्क से गुजरा हु मैं सिर्फ तुम्हारी वजह से l नंदू की किया ये सब”
“i am sorry bunny”,नंदिनी ने रोते हुए कहा l
“चली जाओ यहाँ से !”,कार्तिक ने नंदिनी की तरफ देखे बिना गुस्से से कहा उसे लगा नंदिनी फिर से उसे सोफिया के लिए कन्विंस करेगी इसलिए कार्तिक ने जानबूझकर उसे वहा से जाने को कहा l वह नहीं चाहता था गुस्से में कही उसकी कोई बात नंदिनी को हर्ट कर जाये l
“bunny …………….!!”,नंदिनी ने कहा
“नंदिनी जाओ यहाँ से , आई से गो”,कार्तिक ने चिल्लाकर कहा
नंदिनी की आँखों से आंसू बहते जा रहे थे पर कार्तिक का पहली बार उसे नंदिनी कहकर बुलाना चुभ सा गया l उसे लगा जैसे कार्तिक ने एक पल में उसे पराया कर दिया हो l नंदिनी वहा से बाहर चली आई l कार्तिक के दिल में दबा गुस्सा आँखों से आंसू बनकर बहने लगा l उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था उसने दरवाजा बंद किया और आकर बिस्तर पर गिर पड़ा l आँखों से बहते आंसू तकिये को भिगाने लगे l

नंदिनी तेजी से घर से निकल गयी l रंजना जो की कार्तिक के कमरे के बाहर ही खड़ी थी जिसे नंदिनी ने देखा नहीं था l रंजना ने कार्तिक की बाते सुनी तो उसे नंदिनी के लिए बहुत बुरा लगा वह नंदिनी को रोकने गई लेकिन तब तक नंदिनी जा चुकी थी l दिल दोनों का दुखा था नंदिनी का भी और कार्तिक का भी लेकिन इसका खामियाजा रंजना भुगत रही थी एक तरफ वह नंदिनी का टूटता दिल देख रही थी जिसके एक एक टुकड़े में सिर्फ कार्तिक के लिए प्यार भरा था और दूसरी तरफ अपने बेटे का दर्द l
रंजना आकर सोफे पर बैठ गयी और कार्तिक के बाहर आने का इंतजार करने लगी l अखिलेश जी आकर रंजना के पास बैठ गए तो रंजना की आंखे छलक पड़ी और उसने सारा किस्सा अखिलेश जी को कह सुनाया l 3-4 घंटो के बाद जब कार्तिक का मन शांत हुआ तो वह बाहर आया l उसकी आँखे लाल हो गयी थी , चेहरा उदासी से घिरा हुआ था l कार्तिक वाशबेसिन के सामने आकर मुंह धोने लगा l मुंह धोकर जैसे ही पलटा सामने रंजना खड़ी थी l रंजना की आँखों से बेबसी और चेहरे से गुस्सा साफ झलक रहा था l
“मॉम………….!!”,कार्तिक ने धीरे से कहा
“सटाक……………….!!”,एक जोरदार थप्पड़ रंजना ने कार्तिक के गाल पर मारा
अखिलेश जी सोफे से उठ खड़े हुए ऐसा पहली बार हुआ था जब रंजना ने कार्तिक पर हाथ उठाया था l कार्तिक कुछ कहता इस पहले ही रंजना बोल पड़ी,”समझता क्या है तू अपने आप को ? तेरा जो मन करेगा तू करेगा l बचपन से लेकर आज तक तेरी हर शरारत , हर मस्ती बर्दास्त की मैंने पर तुझे एक लड़की का दिल तोड़ने का हक़ किसने दिया ? क्या कमी रह गयी थी मेरी परवरिश में l “
कार्तिक ने कुछ नहीं कहा बस सर झुकाये चुपचाप सुनता रहा उसे अहसास था की उस से गलती हुई वरना रंजना को पहले उसने ऐसे कभी नहीं देखा था l रंजना की आँखों में आंसू झिलमिला उठे उसने दुखी स्वर मे कहा,”वो बच्ची यहाँ सिर्फ तुमसे मिलने आई थी , तुम्हे जन्मदिन विश करने आयी थी पर बदले में उसकी आँखों में आंसू देकर बहुत अच्छा रिटर्न गिफ्ट दिया है तूने उसे “
“क्या ? नंदिनी यहा इसलिए आयी थी ? तो क्या वो सोफिया के लिए……………………”,कार्तिक ने हैरानी से कहा
“हां वो सिर्फ तुम्हे बर्थडे विश करने आई थी वो रहा उसका लाया हुआ तोहफ़ा l नंदिनी से अच्छी दोस्त , प्रेमिका और हमसफ़र तुम्हे नहीं मिल सकती कार्तिक l बहुत प्यार है नंदिनी तुमसे और तुम्हारी ख़ुशी के लिए हर बार उसने अपने जज्बातो की क़ुरबानी दी है l नंदिनी जैसा प्यार तुझे कोई नहीं कर सकता सोफिया भी नहीं”,कहते हुए रंजना की आँखों से आंसू बहने लगे l
कार्तिक अवाक् सा खड़ा सुनता रहा और खुद से कहने लगा,”ये मुझसे क्या हो गया ? नंदू आज मुझसे अपने दिल की बात कहँने आई थी और मैंने उसे…………………..सह ये मैंने क्या कर दिया l
कार्तिक टेबल पर रखे हुए उस तोहफे की और बढ़ा और उसे जल्दी जल्दी खोलकर देखने लगा l उसका दिल तेजी से धड़क रहा था बार बार एक ही ख्याल की उसने आज फिर से नंदिनी का दिल दुखाया है l कार्तिक ने डिब्बा खोला तो उसकी आँखो में आंसू आ गए l दर्द को रोकने के लिए उसने अपने निचले होंठ को दांतो तले दबा लिया और आँखे बंद कर ली l अगले ही पल उसने आँखे खोली और डिब्बे में पड़े उस गिटार को निकाला जो नंदिनी ने उसके लिए खरीदा था l गिटार के साथ एक चिट भी थी कार्तिक ने उसे जल्दी जल्दी खोला और पढ़ने लगा
“happy birthday bunny !!
तुम्हारे जन्मदिन का तोहफा ,, कैसा लगा ? मैं चाहती हु तुम अपने सपने की शुरुआत इस से करो l don’t worry पापा से मैंने बात कर ली है उन्ही के कहने पर ये ख़रीदा है l अब ये मत सोचना की मेरे पास इतने रूपये कहा से आये ? , दरअसल मैंने अपनी पॉकेट मनी से कुछ कुछ बचाया और सब इक्कठा करके खरीद लिया l अब तो तुम मुझे गाना सुनाओगे ना …………………….. नंदू !! “
पढ़ते हुए कार्तिक की आँख से आंसू बहकर उस कागज पर बहने लगे l कार्तिक ने उस कागज को चुम लिया l अखिलेश जी और रंजना दोनों ही कार्तिक की आँखों में नंदिनी के लिए प्यार देख रहे थे l अखिलेश जी कार्तिक के पास आये और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा,”उसे रोक ले बेटा , कही देर ना हो जाये ! “
कार्तिक अखिलेश जी के गले लग गया l उसने कागज टेबल पर रखा और बाइक की चाबी उठाकर घर से निकल गया l रंजना नम आँखों से अखिलेश जी की तरफ देखकर मुस्कुरा उठी l
कार्तिक जितनी तेज बाइक चला सकता था उसने चलाई और नंदिनी के हॉस्टल पहुंचा l नंदिनी की क्लासमेट स्वाति उसे बाहर ही मिल गयी कार्तिक तेजी से उसके पास आया और कहा,”स्वाति , नंदू कहा है ?
“वो तो बहुत पहले यहाँ से चली गयी”,स्वाति ने कहा
“कहा चली गयी ?”,कार्तिक ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“पता नहीं पर उसने हॉस्टल छोड़ दिया और कहा की हमेशा हमेशा के लिए यहाँ से जा रही है”,स्वाति ने कहा
“मेरे लिए कोई मेसेज ?”,कार्तिक ने कहा
“हां उसने एक कागज छोड़ा है तुम्हारे लिए , तुम यही रुको मैं लेकर आती हु”,कहकर स्वाति अंदर चली गयी और कुछ देर बाद वापस आकर एक कागज कार्तिक की और बढ़ा दिया
कार्तिक ने कांपते हाथो से उस मुड़े हुए कागज को खोला और पढ़ना शुरू किया

“bunny !!
अनजाने में मैंने तुम्हारा बहुत दिल दुखाया है उसके लिए मुझे माफ कर देना l मैं कभी तुम्हारे और सोफिया के बिच नहीं आना चाहती थी पर क्या करू ? तुम्हारे साथ रहते , तुमसे बात करते , तुम्हे देखते देखते कब तुमसे प्यार हो गया पता नहीं चला l मैं जिंदगीभर इस अहसास को अपने दिल में रखना चाहती थी क्योकि तुम्हारी ख़ुशी से बढ़कर मेरे मेरे लिए कुछ भी जरुरी नहीं है , अपना प्यार भी नहीं l मेरी वजह आज तुम इतना दर्द में हो मैं ये नहीं देख पा रही bunny ! मैं हमेशा हमेशा के लिए तुमसे दूर जा रही हु ताकि तुम अपनी जिंदगी , अपने प्यार के साथ खुश रहो ……………. मैं अगर तुम्हारे सामने रही तो खुद को तुमसे प्यार करने से रोक नहीं पाऊँगी !!!
मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना !
तुम्हारी नंदू !

कार्तिक की आँख से फिर से आंसू बहने लगे l उसका चेहरा लाल हो गया l आँखों में आंसू के साथ साथ दर्द भी था l स्वाति से कार्तिक का दर्द देखा नहीं गया तो उसने कहा,”कार्तिक नंदिनी तुमसे बहुत प्यार करती है , इतना की मैं चाहु तब भी बता नहीं पाऊँगी l वो बहुत सीधी साधी लड़की है उसे अपनी बात कहना नहीं आता बस महसूस करती रहती है l तुम्हारी ख़ुशी के लिए उसने हमेशा अपना दिल दुखाया है l कभी कभी तो उसे देखकर जलन होने लगती है की कोई लड़की अपने बेस्ट फ्रेंड से इतनी मोहब्बत कैसे कर सकती है !! पर नंदिनी करती है …………….. तुम बहुत लकी हो कार्तिक जो तुम्हे नंदिनी जैसी दोस्त मिली उसे खोना तुम्हारी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल होगी l “
कार्तिक ने अपने आंसू पोछे और कागज को जेब में रखकर जाने लगा तो स्वाति ने कहा,”कार्तिक उसकी ट्रेन छूटने में अभी 10 मिनिट है , एक कोशिश करके देखो तुम उसे रोक सकते हो “
कार्तिक ने आँखों ही आँखों में स्वाति को थेंक्यू कहा और वहा से भागा l स्टेशन पहुँचते पहुंचते उसे वक्त लग गया ट्रेन चल पड़ी थी l कार्तिक तेजी से ट्रेन की तरफ भागा बदहवास सा वह एक एक खिड़की देख रहा था l नंदनी नहीं मिली l चेहरे पर परेशानी के भाव साफ झलक रहे थे l कार्तिक फिर भी भागता हुआ देखने लगा l ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली पर अभी प्लेटफॉर्म पर ही थी l कार्तिक को कुछ नहीं सुझा तो वह जोर से चिल्लाया
“नंदू $$$$$$$$$………………………!!”,
ट्रेन में बैठी नंदिनी ने जब कार्तिक की आवाज सुनी तो दौड़कर दरवाजे पर आयी l कार्तिक को नंदिनी दिख गयी वह ट्रेन के साथ भागने लगा,”नंदू , नंदू मत जाओ , नंदू एक बार मेरी बात सुनो !!
नंदिनी ने कार्तिक को देखा और दरवाजे से हट कर दिवार से पीठ लगा ली l उसकी आँखों से आंसू बहने लगे l कार्तिक बदहवास सा दौड़ते हुए नन्दिनी से रुकने की रिक्वेस्ट करता रहा l ट्रेन तेजी से आगे निकल गयी कार्तिक वही रुक गया l ओर घुटनो के बल नीचे गिर पड़ा l उड़ता हुआ सफेद दुपट्टा आकर उसके चेहरे पर गिरा l कार्तिक ने दुपट्टा हटाया ट्रेन जा चुकी थीं l कार्तिक ने देखा वो सफेद दुपट्टा किसी ओर का नही बल्कि नन्दिनी का ही था l हताश सा वह उठा और दुपट्टे को अपने हाथ पर लपेट लिया l पास पड़ी बेंच पर आ बैठा l सुबह से दोपहर ओर दोपहर से शाम हो गयी कार्तिक खामोश सा वही बैठा रहा l शाम हो चुकी थी कार्तिक उठा और घर के लिए निकल गया l कार्तिक घर आ गया l उसे देखते ही अखिलेश जिर रंजना उसके पास आये अखिलेश जी ने कहा,”नन्दिनी से मिले , बात हुई तुम्हारी उस से कहा है वो ? उसे साथ क्यों नही लाये ?
“कार्तिक कुछ तो कहो बेटा नन्दिनी से बात हुई न तुम्हारी”,रंजना ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“नंदिनी यहां से हमेशा के लिए चली गयी है पापा”,कार्तिक ने उदास स्वर में कहा
“तुम चिंता मत करो मैं नन्दिनी को लेकर आऊंगा , हम मिलकर उसे ढूंढेंगे”,अखिलेश जी ने कार्तिक को हिम्मत देते हुए कहा
“नही पापा , नन्दिनी खोयी नही है जानबूझकर दूर हो गयी है”,कहते हुए कार्तिक ने जेब से कागज निकाला और अखिलेश जी की तरफ बढा दिया l
कार्तिक आगे बढ़ा टेबल पर रखा गिटार उठाया और अपने कमरे की ओर बढ़ गया l कार्तिक आकर बालकनी में बैठ गया और अपनी उँगलिया गिटार के तारो पर चलाने लगा l कितने सालो बाद उसने गिटार के तारो को झंझनाया था l लेकिन वो धुन बहुत दर्दभरी थी कार्तिक ने अपनी आंखें मूंद ली उसे नन्दिनी का चेहरा नजर आया तो बोल मुंह से अपने आप निकल पड़े और गिटार से निकली धुन से तालमेल बैठाने लगे
“तुम कभी ना कहोगे
प्यार है हम ही बोल दे
फिर कभी ना जाने देंगे ,
तुम दोबारा जो मिल जाओगे
पाके मैंने जो खो दिया तुझे
हो जाएगा तो दूर ये जान के
छोड़ा ही ना होता तुझे हाथ से
यू दोबारा …………..!!
मगर आया ना तू आया ना तू
नजर आया ना तू , आया ना तू
उस शाम कार्तिक की आवाज में एक दर्द जो सबकुछ अपने साथ समेट रहा था !!

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2 comments

Minha May 8, 2022 - 2:48 pm

Dii please iss story ki sad ending mt krna……🥺🥺🥺🥺🥺🥺
Please….please…..please…..

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Shriya Agarwal May 8, 2022 - 9:14 pm

Relax minha iss story ki happy ending hi hogi🥰aage wale parts mein mazaa ane wla hain🥰💖

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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