Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 3

by Story With Sanjana January 23, 2026
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Manmarjiyan Season 4 – 3

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी से चप्पल खाकर गुड्डू और गोलू वहा से चले गए और मिश्रा जी ने पडित जी की तरफ पलटकर होकर कहा,”जे गुड्डू और गोलू की बातो का बुरा ना  
मानियेगा पंडित जी , बाप बनने वाले है लेकिन दिनभर ऐसे ही बकैती करते रहेंगे,,,,,,,आप लवली के बारे में कुछो बताईये”

केशव पंडित ने लवली के लिए बनायीं कुंडली देखी और फिर उसका हाथ देखा और मुस्कुरा कर कहा,”लवली के ग्रह नक्षत्र बहुते शुभ है मिश्रा जी , आपके कारोबार को आगे यही बढ़ाएगा और खूब तरक्की भी होगी ऐसा कुंडली में योग आ रहा है।  स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक रहेगा और पैसे की कोनो कमी नहीं होगी,,,,,,,,बस एक ठो समस्या है”
“कैसी समस्या पंडित जी ?”,मिश्रा जी ने पूछा
“जे कि शादी मा थोड़ी दिक्कत आएगी , कोनो बड़ी समस्या कह सकत हो पर अगर सूझ बुझ से काम लिया तो उह्ह टल भी सकती है”,केशव पंडित ने गंभीर स्वर में कहा

“इह बरस मा लवली का शादी का योग बन रहा है का ?”,मिश्रा जी ने पूछा
“हाँ प्रेम विवाह के योग है,,,,,,पर इह साल जे की सादी ना ही करो तो सही है अभी सही समय नाही है”,केशव पंडित ने कहा
प्रेम विवाह का नाम सुनकर मिश्रा जी चिंता में पड़ गए और लवली को बिंदिया का ख्याल आया। जब से बिंदिया कानपूर से वापस गयी थी तब से उसने एक बार भी लवली की थी ना ही लवली को उसकी कोई खबर थी। बिंदिया के पिताजी ने बृजेश की जान ली है ये जानने के बाद ना जाने क्यों लवली ने खुद को बिंदिया से दूर कर लिया लेकिन दिल से दूर नहीं कर पाया।

मिश्रा जी चिंतित थे क्योकि कुछ साल पहले गुड्डू भी प्रेम विवाह करना चाहता था और उस वक्त भी मिश्रा जी ने उसकी शगुन से शादी करवा दी अब जब लवली के प्रेम विवाह की बात आयी तो उन्हें चिंता होने लगी क्योकि लवली जिस से प्रेम करता है वो बिंदिया है और बिंदिया के पिताजी इस शादी के लिए कभी नहीं मानेंगे।
मिश्रा जी पंडित जी से आगे कुछ पूछ पाते इस से पहले मिश्राइन वहा आयी और कहा,”सुनिए जी ! आपकी पंडित जी से बात-चीत हो गयी हो तो इन्हे भेज दीजिये , हमने इनके लिए थाली परोस दी है”

“हाँ , हाँ हां बिल्कुल आईये पंडित जी पहले कुछो खा पी लीजिये”,मिश्रा जी ने कहा तो केशव पंडित की आँखे ख़ुशी से चमक उठी। सुबह से तो बेचारे धक्के ही खा रहे थे अब जाकर उन्हें खाना नसीब होने वाला था उन्होंने लवली के लिए बनायीं कुंडली समेटकर कहा,”जे हम घर पर अच्छे से देखकर बना देंगे”
“जी बिल्कुल आईये”,मिश्रा जी ने कहा और केशव पंडित के साथ वहा से चले गए
लवली अभी भी वही खड़ा सोच में डूबा था। मिश्राइन ने देखा तो उसके पास आयी और कहा,”लवली ! का हुआ बिटवा किस उलझन मा हो ?”

मिश्राइन की आवाज से लवली की तंद्रा टूटी और उसने उनकी तरफ पलटकर कहा,”नहीं किसी भी उलझन में नहीं है”
“तो फिर तुम्हरा चेहरा इतना बुझा बुझा काहे है ?”,मिश्राइन ने कहा
“कुछ नहीं अम्मा वो बस घर की याद आय रही”,लवली ने कहा
“हम्म्म समझ सकते है बिटवा , इत्ते साल तक तुमहू चकिया मा रहे अब एकदम से सब छोड़ छाड़ के हिया चले आये वक्त तो लगेगा ना नवा शहर , नवा घर , नए लोगो के साथ घुलने मिलने मा,,,,,,,!!”,मिश्राइन ने प्यार से कहा

“ऐसी बात नाही है अम्मा , इह घर और इह मा रहने वाले लोग सब बहुते अच्छे है। का हम कुछो दिन के लिए अपने घर जा सकते है ?”,लवली ने उम्मीदभरे स्वर में कहा
घर जाने की बात सुनकर ही मिश्राइन के चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे और उन्होंने कहा,”उह्ह बताये रहय कि अभी हुआ का माहौल ठीक नाही है , मंगेश और लल्लन जेल मा है और ओह्ह की वजह से बिंदिया के घरवाले कही तुम्हे गलत समझकर तुम्हरे साथ कुछो,,,,,,,,,,नाही नाही लवली हम तुमको हुआ जाने नाही देंगे,,,,,,,हम नाही चाहते तुम्हरे साथ कोनो दुर्घटना हो”

“हम आपकी परेशानी समझ सकते है अम्मा लेकिन हमरा वहा जाना बहुते जरुरी है,,,,,,,,,!!”,लवली ने कहा
“लवली हम तुम्हरी हर बात मानने को तैयार है पर जे नाही,,,,,,उनको पता चला तो उह्ह बहुते गुस्सा होंगे , जब तक मामला शांत नाही हो जाता तुम यही रहो हम लोगन के साथ”,मिश्राइन ने कहा

“लेकिन यहाँ रहकर हम करेंगे क्या ?”,लवली ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“करना का है मिश्रा जी के शोरूम मा जाईये और डेबिट क्रेडिट की एंट्री मिलाइये”,गुड्डू के साथ आते हुए गोलू ने कहा
लवली ने सुना तो गोलू की तरफ देखा और कहा,”वो हम करेंगे तो गुड्डू का करेगा ?”

“हम अपना बिजनेस सम्हालेंगे भैया,,,,,,वैसे भी पिताजी का शोरूम सम्हालने के लिए आप ही सही है , बताये रहा गोलू हमे कैसे उह्ह दिन अकाउंट्स डिपार्टमेंट वाले लड़के को सबक सिखाये रहय आप,,,,,,!!”,गुड्डू ने लवली के पास आकर कहा
“वो सब तो ठीक है गुड्डू लेकिन हम दोनों साथ साथ यहाँ रहेंगे और हमरे बारे में लोग पूछेंगे तब हम का कहेंगे ?”,लवली ने कहा
“अरे कहना का है जैसे हम कहते है कि हम है गुड्डू मिश्रा , आनंद मिश्रा के लड़के वैसे आप कहना,,,,,,,,,,हाँ लेकिन जे कहने के लिए आपको अपना सरनेम बदलना पड़ेगा”,गुड्डू ने कहा

“अरे लवली भैया काहे चिंता करते है , वैसे भी कानपूर बहुते बड़ा है , आप और गुड्डू भैया कौनसा साथ साथ रहेंगे। वहा आप दिनभर मिश्रा जी के साथ रहेंगे और गुड्डू भैया अपने बिजनेस मा ,, कभी कभार शाम मा मुलाकात हो जाया करेगी,,,,,,,जियादा ना सोचिये”,गोलू ने कहा
लवली गोलू और गुड्डू के मुँह से कई बार बिजनेस नाम सुन चुका था इसलिए गुड्डू गोलू की तरफ पलटा और कहा,”वैसे किस चीज का बिजनेस है तुम्हारा ?”

“सिर्फ गुड्डू भैया का ही नहीं हमारा भी,,,,,,,,,,,,हम भी पार्टनर है इनके बिजनेस मा”,गोलू ने आगे आकर कहा
लवली ने गोलू को साइड करते हुए गुड्डू से पूछा,”वही पूछ रहे है किस चीज का बिजनेस है ?”
“अरे भैया वो हम और गोलू ना शादी करवाते है,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने खुश होकर कहा
“का बिचौलिये हो ?”,लवली ने कहा
“अरे आप का हमको ऐसा वैसा समझ लिए हो ?”,गोलू ने तुनककर कहा  

लवली ने गोलू को देखा तो लवली के चेहरे के भाव देखकर गोलू ने मिमियाते हुए कहा,”हम तो बस जे कह रहे कि पहिले गुड्डू भैया की पूरी बात तो सुन लो”
“अरे भैया बिचौलिये नहीं वो बिचौलिये के बाद जो सब काम होते है न,,,,,,,,,,,ए गोलू खड़े खड़े देख का रहे हो बताओ ना भैया को”

गुड्डू की बात सुनकर गोलू पहले हड़बड़ाया और फिर शेखी बघारते हुए कहा,”अरे लवली भैया जे समझ लयो कि दुल्हन के बिना सादी हो सकती है लेकिन हमरे बिना नाही , हल्दी से लेकर मेहँदी तक , संगीत से लेकर खाने तक , फेरो से लेकर विदाई तक सब अरेंजमेंट हमको और गुड्डू भैया को ही देखना होता है। हल्दी में कौनसा डेकोरेशन लगेगा , मेहँदी मा कौनसे रंग के परदे लगेंगे सब हम और गुड्डू भैया देखते है,,,,,,,,!!”

“मतलब शादी मा टेंट लगाने का काम है तुम दोनों का,,,,,,,,वैसे सूट भी करता है तुम्हायी पर्सनालिटी पर,,,,,,!!”,लवली ने गोलू का गाल थपथपाते हुए कहा और वहा से चला गया

गोलू ने सुना तो लवली का गला दबाने उसके पीछे गया लेकिन गुड्डू ने उसे रोक लिया और कहा,”अरे जाने दो गोलू , बड़े भैया है हमाये”
“अरे बड़े भैया है तो का ऐसे बेइज्जती करेंगे आपकी और हमायी , हम का उनको टेंट लगाने वाले दिखते है ?”,गोलू ने चिढ़कर कहा
“झंडे तो तुमने गाड़े नाही है गोलू,,,,,,,,टेंट ही गाड़े है अब तक”,गुड्डू गोलू की तरफ आते आदर्श फूफा ने कहा जो कि राजकुमारी को साथ लेकर वापस जौनपुर जा रहे थे।

“हमहू आदमी भी गाड़ देते है फूफा,,,,,,,,!!”,गोलू ने फूफा को घूरकर कहा
“अरे गोलू शुभ शुभ बोलो , भरी जवानी मा का हमको अकेला करोगे”,भुआ ने कहा
“एक ठो बात कहे भुआ तुमहू अगर जवान हो ना तो हमहू तो पैदा हुए है,,,,,,का कुछ भी बोलती हो , लगता है ददिया के जाने का सदमा लगा है तुमको,,,,,,जवान बताय रही है खुद को,,,,,,!!”,गोलू ने पहले प्यार से कहा और फिर भड़क गया ये देखकर गुड्डू ने उसे अपनी तरफ खींचा और मुँह बंद करते हुए कहा,”अबे का कर रहे हो गोलू ? चुपचाप खड़े रहो”

गुड्डू की बात सुनकर गोलू ने मुँह बनाया और चुपचाप खड़ा होकर दाँतो से अपने नाख़ून कुतरने लगा। गुड्डू आदर्श फूफा के पास आया उनके और भुआ के पैर छुए और कहा,”का फूफा इत्ती जल्दी जा रहे हो ?”
“नाही आपके नाती पोता देखकर जायेंगे,,,,,,,!!”,आदत से मजबूर गोलू बड़बड़ाया तो गुड्डू ने उसे घूरकर देखा और गोलू ने मुँह घुमा लिया।
“अरे गुड्डू जल्दी वापस आएंगे,,,,,,और ओह्ह्ह से पहिले तुम आओ शगुन को लेकर जौनपुर”,आदर्श फूफा ने प्यार से कहा

गुड्डू ने सुना तो मुस्कुराया , एक ही घटना के बाद सब कितना बदल चुके थे।
“हाँ आएंगे ना फूफा , चलिए हम आपको बस स्टेण्ड तक छोड़ देते है। ए गोलू जे भुआ से बैग तो लेइ ल्यो ज़रा”,गुड्डू ने आदर्श फूफा के हाथ से उनकी अटेची लेकर कहा और साथ में गोलू को भी भुआ का बैग लेने को कह दिया। मरता क्या न करता गोलू को बैग उठाने आना पड़ा। उसने भुआ से बैग लिया और गुड्डू के आगे से निकलते हुए बड़बड़ाया,”हाँ बस एक कुली बनना बाकि रह गया था गुड्डू भैया,,,,,,,,,जे दोस्ती ना बहुते महंगी पड़ रही है हमे बताय रहे है हम”

“अरे चलो ना यार पंडित के यहाँ छोले कुलचे खिला देंगे”,गुड्डू ने कहा
“दो प्लेट खाएंगे”,गोलू ने बच्चो की तरह मचलकर कहा जबकि अभी कुछ देर पहले ही उसने मिश्रा जी की अम्मा का भोज ठूस ठूस कर खाया था।

“का पिछले जन्म में का दानव थे ?”,गुड्डू ने कहा अटैची उठाकर आगे बढ़ते हुए कहा
गोलू ने सुना तो भुआ की बैग को नीचे फेंक दिया तो गुड्डू ने अपना सर पीटकर कहा,”अरे खिला देंगे यार चलो , जे बात बात पे हमायी सौतन ना बना करो तुम”
गोलू ने अपनी बत्तीसी दिखाई और बैग उठाकर आगे बढ़ गया।

आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ जौनपुर के लिए निकल गए। केशव पंडित खाना खाकर अपनी दक्षिणा लेकर घर निकल गए। शगुन और वेदी शगुन के कमरे में थी और लवली ऊपर अपने कमरे में बिस्तर पर बैठा सोच में डूबा था। मिश्राइन ने उसे चकिया जाने से मना कर दिया जबकि लवली का वहा जाना बहुत जरुरी था , उसे अब बिंदिया की चिंता होने लगी थी। लवली कभी दिखाता नहीं था लेकिन उसकी कठोरता के पीछे एक मासूम दिल भी था जिसमे बिंदिया के लिए असीम प्यार था।

बिंदिया कैसी होगी , किस हाल में होगी लवली नहीं जानता था। काफी देर सोच विचार के बाद लवली ने फोन उठाया और बिंदिया का नंबर लगाया लेकिन फोन बंद आ रहा था। लवली फिर उदास हो गया और बिस्तर पर लेट गया। ऐसा नहीं था कि मिश्रा जी के घर में उसे किसी चीज की कमी की कमी थी लेकिन फिर भी लवली का मन यहाँ बैचैन था। लेटे लेटे से नींद आ गयी और कुछ देर के लिए ही सही वह अपनी उलझन भूल गया

आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ को जौनपुर की बस में बैठाकर गुड्डू और गोलू पैदल ही चौक की तरफ चल पड़े। दोनों खुश थे , चलते चलते गोलू ने कहा,”यार गुड्डू भैया ! एकदम से सब कितना सही हो गया ना , ना कोई भसड़ ना कोई कांड , सब कितना अच्छा लग रहा है”

“हाँ यार गोलू वरना अम्मा के दिनों में कितना भागदौड़ मचाई थी सबने मिलके , अरे एक बार तो हमको लगा कही इस भागमभाग के चक्कर में अम्मा के पास ही ना चले जाए”,गुड्डू ने कहा
“अरे गुड्डू भैया ! मेरे होते ऐसा कुछो हो सकता है का ?”,गोलू ने इतरा कर कहा

गुड्डू चलते चलते रुका और गोलू की तरफ पलटकर कहा,”भूलो मत गोलू महाराज तुम्हरे होते ही इत्ते काण्ड हुए है,,,,,,,,अब भैया हाथ जोड़कर तुमसे बिनती है कि जे सीजन बिना कांड के निकल जाय दयो हाँ हमरी भी कुछो इज्जत बचे लोगन के बीच,,,,,,,,साला तुम्हरे चक्कर मा रंगबाज गुड्डू से भंडबाज गुड्डू बन गए है”
“हाँ तो ठीक है , सब ठीक तो है कहा कुछो कर रहे है हम,,,,,,,,,साला भसड़ सब मिलकर मचाते है और बिल हमरे नाम पर फटता है,,,,,,,,!!”,कहते कहते गोलू पंडित छोले कुलचे वाले के पास चला आया और उखड़े स्वर में कहा,”ए पंडित दुई पिलेट छोले कुलचे लगाओ बे”

“निम्बू निचोड़ दे का ?”,पंडित ने गोलू की तरफ देखा और अपनी भंव चढ़ाकर कहा
गोलू ने गुस्से से देखा तो पंडित ने भंव नीची की और मुस्कुराकर कहा,”अरे छोले की बात कर रहे है बबुआ,,,,,,,,,!!”
“हम्म्म,,,,,,,,,पियाज थोड़ा एक्स्ट्रा”,गोलू ने कहा और मार्किट का नजारा लेने लगा। अब ये तो सच था कि जब तक गोलू गुड्डू की जिंदगी में किसी तरह की भसड़ ना मची हो उन्हें जीवन सूना सूना लगता लेकिन इस बार गोलू के इरादे मजबूत थे कि वह कोई कांड नहीं करेगा।

छोले कुलचे की प्लेट तैयार हुई और गुड्डू गोलू अपनी अपनी प्लेट से खाने लगे। खाते खाते गुड्डू की नजर पड़ी फूलो वाली दूकान पर जहा उसने देखा एक कम हाइट का आदमी और गोलू से कहा,”अबे गोलू ! उह्ह्ह तुम्हरे मंगल फूफा है ना ?”
गोलू ने गर्दन घुमाकर देखा और कहा,”हाँ वही है पर जे फूलो की दुकान पर का कर रहे है ?”
“जे तो वही बताएँगे,,,,,,,कही यादव जी की मलाई खतरे मा तो नाही ?”,गुड्डू ने कहा

गोलू ने अपनी खाली प्लेट कचरे के डिब्बे में फेंकी और गुड्डू की प्लेट में बचा आधा कुलचा उठाकर मुँह में ठूसते हुए कहा,”ऐसा हुआ ना गुड्डू भैया तो उह्ह यादववा हम सबकी दही फाड़कर रख देगा”
गुड्डू और गोलू मंगल फूफा की तरफ बढ़े तो पंडित चिल्लाया,”ए गोल भैया ! हमरा पैसा”
“खाते मा लिख लो बे”,कहकर गोलू आगे बढ़ गया।

( क्या मिश्राइन के मना करने के बाद भी लवली जाएगा अपने गांव ? क्या मिश्रा जी करेंगे लवली के लिए बिंदिया के घरवालो से बात ? फूलो की दुकान पर क्या कर रहे है मंगल फूफा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

गुड्डू चलते चलते रुका और गोलू की तरफ पलटकर कहा,”भूलो मत गोलू महाराज तुम्हरे होते ही इत्ते काण्ड हुए है,,,,,,,,अब भैया हाथ जोड़कर तुमसे बिनती है कि जे सीजन बिना कांड के निकल जाय दयो हाँ हमरी भी कुछो इज्जत बचे लोगन के बीच,,,,,,,,साला तुम्हरे चक्कर मा रंगबाज गुड्डू से भंडबाज गुड्डू बन गए है”
“हाँ तो ठीक है , सब ठीक तो है कहा कुछो कर रहे है हम,,,,,,,,,साला भसड़ सब मिलकर मचाते है और बिल हमरे नाम पर फटता है,,,,,,,,!!”,कहते कहते गोलू पंडित छोले कुलचे वाले के पास चला आया और उखड़े स्वर में कहा,”ए पंडित दुई पिलेट छोले कुलचे लगाओ बे”

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संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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