Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 4

by Story With Sanjana January 24, 2026
written by Story With Sanjana January 24, 2026 3 comments
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Pasandida Aurat Season 2 – 4

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी की बात सुनकर लता ने सबके सामने उसे थप्पड़ जड़ दिया। अवनि ने देखा तो उसकी आँखों में आँसू भर आये और उसका दिल भर आया लेकिन पृथ्वी अब भी अवनि का हाथ थामे लता के सामने खड़ा उन्हें देख रहा था ये देखकर रवि जी आये और कहा,”आँखे नीची करो पृथ्वी , एक तो तुम इस लड़की को अपने साथ यहाँ ले आये और अब बेशर्मो की तरह अपनी आई से आँखे मिलाकर बात कर रहे हो , मैं कहता हूँ आँखे नीची करो”

“बाबा ! कम से कम आप तो मेरी बात समझने की कोशिश कीजिये,,,,,,,मैं इन्हे अकेला नहीं छोड़ सकता मैंने इनके पापा से वादा किया है”,पृथ्वी ने दुखी स्वर में कहा तो लता की आँखों में गुस्से और अफ़सोस के भाव तैरने लगे और उन्होंने कहा,”और मुझसे किये वादे का क्या पृथ्वी ? उसे तो तुमने इस लड़की के लिए कब का तोड़ दिया”
“इन सब में पृथ्वी की कोई गलती नहीं है आप लोग उसे गलत समझ रहे है मैं,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा

“ए लड़की ! मुँह बंद रखो अपना , एक तो मेरे बेटे को अपने प्यार के जाल में फंसाया और उसके साथ यहाँ तक चली आयी”,लता ने अवनि को झिड़क दिया तो अवनि की आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये।
“आई ! ये कैसे बात कर रही है आप ? मैंने कहा ना इन सब में इनकी कोई गलती नहीं है। मैं प्यार करता हूँ इनसे मैंने शादी की है इनसे आप लोग समझ क्यों नहीं रहे ?”,पृथ्वी ने इस बार थोड़ा ऊँचे स्वर में कहा

पृथ्वी को अपने माँ बाप के सामने ऐसे बात करते देखकर बड़े पापा ने खींचकर उसे एक थप्पड़ मारा और गुस्से से कहा,”क्या इसी दिन के लिए इन्होने तुम्हे पैदा किया था , शर्म नहीं आ रही तुम्हे अपने आई-बाबा से इस तरह बात करते हुए। एक लड़की के लिए तुम क्या अब हम सबके खिलाफ जाओगे ?”

बेगुनाह होते हुए भी पृथ्वी अब तक दो थप्पड़ खा चुका था इसलिए गुस्से से चिल्लाकर कहा,”हाँ जाऊंगा मैं , आप सबके क्या पूरी दुनिया के खिलाफ जाऊंगा मैं और वो कोई लड़की नहीं मेरी बायको है समझे आप लोग,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी का गुस्सा देखकर एक बारगी लता भी सहमकर पीछे हट गयी और फिर रोने लगी। बड़ी मम्मी और चाची ने देखा तो उन्होंने उन्हें सम्हाला , गुस्से से भरे रवि जी बस पृथ्वी को घूरे जा रहे थे और बाकि सब के चेहरो पर भी शिकायत के भाव थे।

“ऐ पृथ्वी ! तू वेडा आहेस का ? तू असं कसं बोलू शकतोस ? ( ए पृथ्वी ! तू पागल हो गया है क्या , तुम ऐसा कैसे कह सकते हो ?) “,नीलम भुआ ने गुस्से से पृथ्वी की तरफ आकर कहा
“मला समजून घेण्याचा प्रयत्न करा, मी काहीही चूक केलेली नाही ( मुझे समझने की कोशिश करो मैंने कुछ गलत नहीं किया है )”,पृथ्वी ने रोआँसा होकर कहा

“इसे कुछ मत समझाओ नीलम इसका दिमाग ख़राब हो गया है , एक लड़की के लिए आज पुरे परिवार को शर्मिंदा करने पर उतर आया है , कहा तक साथ देगी ये लड़की इसका , अरे एक ऐसी लड़की जो अपनी शादी के मंडप से उठ गयी वो कहा तक साथ निभाएगी इसका,,,,,,,,,,,,प्यार में अंधा हो गया है लड़का”,रवि जी ने कहा , उनके कहे एक एक शब्द अवनि के सीने में तीर की भांति चुभ रहे थे।
लता ने अपने आँसू पोछे और पृथ्वी के सामने आकर कहा,”तुझे फैसला करना होगा पृथ्वी या तो हम सब या ये लड़की ?”

“आई,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने दर्द भरे स्वर में कहा लेकिन इस वक्त कोई उसकी बात सुनने समझने को तैयार नहीं था
“ये लड़की मेरे घर में नहीं आएगी पृथ्वी , और अगर तुझे ये लड़की अपने परिवार से ज्यादा प्यारी है तो जा चला जा मेरी नजरो से दूर,,,,,,,मेरे घर में तेरे और इस लड़की के लिए कोई जगह नहीं है”,लता ने कठोरता से कहा
अवनि ने ये सब सुना तो वह पूरी तरह से टूट गयी , उसने रोते हुए अपनी गर्दन झुका ली।

पृथ्वी नम आँखों से अपने सामने खड़ी लता को देख रहा था उसकी आँखों के सामने वो पल आया जब सबके सामने अवनि ने उसका हाथ थामकर उसे चुना था और अब बारी थी पृथ्वी की , वह कुछ देर खामोश रहा और फिर कठोरता से कहा,”अगर आप सबको लगता है मैंने कुछ गलत किया है तो फिर गलत ही सही आई,,,,,,,,,,,मैं जीते जी इनका साथ नहीं छोड़ सकता”

लता ने सुना तो उनका गुस्सा दुःख में बदल गया और वे पृथ्वी को घूरने लगी। हालांकि लता की जगह कोई और माँ होती तब भी शायद इतना ही दुखी होती , बच्चे जब माँ बाप के खिलाफ खड़े हो जाये तो माँ बाप के लिए इस से बड़े दुःख की बात और कुछ नहीं होती। बड़े पापा और चाचा ने सुना तो गुस्से से वहा से चले गए , नीलम भी उनके पीछे पीछे वहा से चली गयी जिसका मतलब था कि वे लोग पृथ्वी से रिश्ता तोड़ चुके है।

रवि जी ने देखा लता वही खड़ी पृथ्वी को देख रही है तो रवि जी उनके पास आये और उनके कंधो को थामकर उन्हें वहा से ले जाते हुए कहा,”चलो लता घर चलो”

“आप आपने सुना ना इसने क्या कहा ? इसने कहा ये इस लड़की का साथ नहीं छोड़ सकता,,,,,,,,,ये ऐसा कैसे कर सकता है ?”,लता ने आँखों में आँसू भरकर कहा तो रवि जी ने अपना दिल मजबूत करके कहा,”कहने सुनने को अब रह ही क्या गया है लता आओ चलते है,,,,,,,,,,!!”

रवि जी लता को लेकर वहा से चले गए और पृथ्वी ने गहरी साँस के साथ अपना सर आसमान की तरफ उठा लिया। वह मजबूत लड़का था लेकिन ऐसे वक्त में कमजोर पड़ ही गया। उसकी आँखों में भरे आँसू उसकी कनपटी पर बह गए , उसका मन बहुत भारी हो रहा था और धड़कने बहुत ही धीमी चल रही थी। पृथ्वी के घरवाले उसे समझना ही नहीं चाह रहे थे , पृथ्वी की नजर में जो सही था वो घरवालों की नजरो में एकदम से गलत हो गया और पृथ्वी चाहकर भी उन्हें समझा नहीं पाया उलटा अवनि के लिए सबसे कितना कुछ सुनना पड़ा उसे,,,,,,,,

नकुल पृथ्वी के पास आया और उसके कंधे पर हाथ रखा तो पृथ्वी की तंद्रा टूटी उसने गर्दन घुमाकर पास ही खड़ी अवनि को देखा तो पाया कि अवनि अपना चेहरा अपने हाथो में छुपाकर रो रही है। पृथ्वी ने अपनी आँखों में आये आँसुओ को पोछा और अवनि के सामने आकर उसके हाथो को हटाकर कहा,”आप क्यों रो रही है मैडम जी ? कुछ नहीं हुआ है मैं हूँ ना मैं सब ठीक कर दूंगा”

“मैंने तुमसे कहा था पृथ्वी कुछ ठीक नहीं होगा , मेरी वजह से तुम्हारे घरवाले तुम से नाराज है उन्होंने तुम पर हाथ तक उठा दिया,,,,,,,,,ये सब मेरी वजह से,,,,,,,,,!!”,अवनि ने रोते हुए कहा
“आप खुद को दोष मत दीजिये , इसमें आपकी कोई गलती नहीं है मैडम जी और थप्पड़ का क्या है ? थप्पड़ मारने वाले भी तो अपने ही थे। ऐसे थप्पड़ तो बहुत बार खा चुका हूँ मैं,,,,,और अगर आपके लिए ऐसे 100 थप्पड़ भी खाने पड़े तो मैं ख़ुशी ख़ुशी खा लूंगा”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि नम आँखों से उसे देखने लगी

जयदीप पृथ्वी के पास आया और कहा,”सच में तुम्हारे जैसा लड़का मैंने आज तक नहीं देखा,,,,,,,,इतनी हिम्मत कहा से आ गयी तुम में ? हाँ मुझे तुम्हारे घरवालों के लिए बुरा लगा लेकिन अब ये तुम्हारी जिम्मेदारी है पृथ्वी कि तुम उनकी नजरों में अपने इस फैसले को सही साबित करो,,,,,,,!!”
“अंकल आंटी अभी गुस्से में है इसलिए ये सब,,,,,,,भाभी आप परेशान मत होईये वो सब मान जायेंगे और उनकी बातो का तो बिल्कुल बुरा मत मानिये,,,,,,,,गुस्से में इंसान को होश नहीं रहता वह क्या कह रहा है ?”,नकुल ने अवनि को दिलासा देते हुए कहा

“अवनि इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है , दो प्यार करने वालो को ऐसी परीक्षाएं अक्सर देनी ही पड़ती है,,,,,,,,सब ठीक हो जाएगा”,जयदीप की पत्नी ने कहा
अवनि की आँखों से आँसू बहकर अभी भी उसके गालों पर आ रहे थे ये देखकर पृथ्वी ने अपनी जेब से रुमाल निकाला और अवनि की तरफ बढ़ा दिया ,अवनि ने रूमाल लिया और अपने आँसू पोछ लिए,,,,,,,,,,!!!”

जयदीप पृथ्वी को अपना और अवनि का ध्यान रखने को कहकर अपनी पत्नी के साथ वहा से चला गया। नकुल भी पृथ्वी और अवनि को साथ लेकर वहा से निकल गया। लता ने पृथ्वी से घर आने को मना किया था लेकिन पृथ्वी के पास एक घर अभी भी था जहा वह अवनि को लेकर जा सकता था और वो था उसका फ्लेट जहा वह पिछले कुछ सालों से रह रहा था। पृथ्वी ने नकुल से अपने अपार्टमेंट चलने को कहा।

रास्तेभर अवनि खामोश रही उसके जहन में बहुत कुछ चल रहा था जिसके लिए वह पृथ्वी से बात करना चाहती थी लेकिन अभी ना सही वक्त था ना ही सही जगह ,,वही पृथ्वी इस सोच में डूबा था कि वह कैसे अवनि को इस शहर में सहज करे और मजबूत बनाये।

शाम के 7 बज रहे थे और अँधेरा हो चुका था। गाड़ी अपार्टमेंट के बाहर आकर रुकी। नकुल ने गाडी साइड में लगाई और पृथ्वी अवनि के साथ नीचे उतरा।
“तुम भाभी को लेकर चलो मैं आता हूँ”,नकुल ने पृथ्वी से कहा

पृथ्वी ने कुछ नहीं कहा बस आगे बढ़कर नकुल को गले लगाया और कहा,”थैंक्स यार , सबने मेरा साथ छोड़ दिया लेकिन तुमने नहीं”
“पृथ्वी तूने कुछ गलत नहीं किया है यार और हमारे माँ-बाप जिस जेनेरेशन में है वो ये कभी समझ नहीं पाएंगे,,,,,,,,चल अब जा मैं आता हूँ”,नकुल ने पृथ्वी की पीठ थपथपाकर कहा

पृथ्वी अवनि को साथ लेकर लिफ्ट की तरफ बढ़ गया और नकुल गाड़ी लेकर वापस चला गया। लिफ्ट में आकर अवनि एक तरफ खड़ी हो गयी और पृथ्वी अवनि से कुछ दूरी बनाकर खड़ा हो गया। उसने 7 नंबर दबाया और लिफ्ट ऊपर जाने लगी। अवनि का चेहरा उदासी से घिरा हुआ था और पृथ्वी के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। आज अवनि हमेशा के लिए उसकी जिंदगी में आयी थी और वह ठीक से इस बात की ख़ुशी तक नहीं मना सका। लिफ्ट सातवे माले पर आकर रुकी , दोनों लिफ्ट से बाहर आये और गनीमत था किसी ने देखा नहीं।

फ्लेट के दरवाजे के सामने आकर पृथ्वी ने चाबी निकाली और दरवाजा खोला। उसने अवनि से बाहर ही रुकने को कहा और खुद अंदर चला गया। अवनि बाहर ही खड़ी रही , दिमाग में अनगिनत विचार चल रहे थे और अवनि बस उनमे उलझते जा रही थी। कुछ देर बाद पृथ्वी आया उसके हाथ में प्लेट थी जिसमे जलते दीपक के साथ एक छोटा कलश , रोली और चावल रखा था। अवनि बस बुझी आँखों से उसे देखे जा रही थी।

पृथ्वी मुस्कुराया और रोली में अपने सीधे हाथ की तीसरी ऊँगली घुमाकर अवनि के ललाट पर तिलक लगाया , चावल लगाए , उसकी आरती उतारी और फिर कलश नीचे रख दिया। हाथ में पकड़ी प्लेट को साइड में रखा और खुद अवनि के बगल में चला आया। अवनि ने नम आँखों से पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी ने कहा,”अपना दाहिना पैर आगे बढाकर कलश के चावल गिराओ अवनि”

अवनि ने सुना तो उसका दिल भर आया। ये रस्म ससुराल में गृह प्रवेश के दौरान की जाती है और पृथ्वी खुद उसके लिए ये सब कर रहा था। अवनि हैरान थी कि किसी इंसान का दिल इतना मजबूत कैसे हो सकता है ? कुछ देर पहले ही पृथ्वी सबकी बातो से कितना हर्ट होकर आया था और अब उसके लिए ये सब कर रहा था। अवनि को अपनी ओर देखते पाकर पृथ्वी ने आगे बढ़ने का इशारा किया। अवनि ने अपना दाहिना पैर आगे बढ़ाकर कलश में भरे चावल गिराए और पृथ्वी के साथ अंदर चली आयी।

ये घर अवनि के लिए अनजान नहीं था आज से पहले भी अवनि इस घर को पहले देख चुकी थी। पृथ्वी अवनि को लेकर हॉल में चला आया लेकिन हमेशा की तरह हॉल में आज भी यहाँ वहा सामान फैला हुआ था। पृथ्वी ने देखा तो सोफे पर पड़े कपडे , किताबे और हेडफोन उठाते हुए कहा,”अह्ह्ह्ह घर थोड़ा फैला हुआ है,,,,,,,आप खड़ी क्यों है बैठिये ना”

“मुझे तुमसे कुछ कहना है पृथ्वी”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा
पृथ्वी ने हाथ में पकड़ा सामान साइड में पड़े सोफे पर रखा और कहा,”कहिये ना मैडम जी”
“तुम मुझे वापस राजस्थान छोड़ दो पृथ्वी,,,,,,,,,!!”,अवनि ने हिम्मत करके कहा

पृथ्वी ने सुना तो उसे चुभन का अहसास हुआ लेकिन उसने खुद को सम्हाला और कहा,”और उस से क्या होगा मैडम जी ? क्या आपके वापस चले जाने से सब ठीक हो जाएगा,,,,,पहले थोड़ी उम्मीद थी मैडम जी लेकिन अब तो आप मेरी पत्नी है इस जिंदगी में तो आपको भूलना नामुमकिन है”

तुम समझ नहीं रहे हो पृथ्वी , आज तुम्हारे साथ जो कुछ हुआ वो ठीक नहीं था। मेरी वजह से तुम्हे कितनी तकलीफ उठानी पड़ रही है। सबके खिलाफ जाकर तुमने मुझे नहीं बल्कि अपनी जिंदगी में तकलीफो को चुना है , हर गुजरने वाले दिन के साथ मेरी जिम्मेदारियां तुम पर बढ़ती जाएगी और मैं बस तुम पर एक  बोझ बनकर रह जाउंगी”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा और इसी के साथ उसकी आँखों में आँसू भर आये

पृथ्वी ने सुना तो उसे बहुत तकलीफ हुई इसलिए नहीं कि अवनि ये सब कह रही थी बल्कि इसलिए कि अवनि अभी तक पृथ्वी के प्यार को समझ ही नहीं पायी थी। पृथ्वी एकटक अवनि को देखता रहा और कुछ देर खामोश रहने के बाद कहा,”आप मुझ पर बोझ नहीं है मैडम जी दोबारा ऐसा मत कहना , मैं मानता हूँ जो हो रहा है वो आपके और मेरे लिए आसान नहीं है लेकिन हम मिलकर एक साथ सब ठीक कर लेंगे। घरवाले गुस्सा है पर मैं जानता हूँ वो मान जायेंगे,,,,,,,,,,,आप इस सब के बारे में मत सोचिये”

अवनि ने सुना और दुःखी स्वर में कहा,”तुम समझ नहीं रहे हो पृथ्वी , हम साथ है एक घर में है एक छत के नीचे है ,, जो हालात है उन्हें देखते क्या हम खुश रह पाएंगे , क्या मैं तुम्हे हर ख़ुशी दे पाऊँगी , हमारी शादी हो चुकी है ये जानने के बाद क्या तुम अपने पति होने का हक नहीं जताओगे ? और अगर क्या हो मैं अगर तुम्हे अपने करीब,,,,,,,,,,,,,,,,!!”

अवनि अपनी बात पूरी करती इस से पहले पृथ्वी ने गंभीरता से कहा,”पूरी जिंदगी भी अगर आपने खुद को छूने नहीं दिया तब भी आपके लिए मेरा प्यार और सम्मान कम नहीं होगा मैडम जी”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी को देखने लगी और मन ही मन खुद से कहा,”आखिर किस मिटटी के बने हो तुम पृथ्वी ?”

( क्या अवनि और पृथ्वी के लिए कम होगा घरवालों का गुस्सा या वक्त के साथ और बढ़ जाएगा ?  क्या अवनि का दिल और विश्वास जीतने के लिए पृथ्वी को करनी होगी फिर से एक नयी शुरुआत ? क्या शादी के बाद एक ही घर में पृथ्वी और अवनि रहने वाले है अजनबी बनकर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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3 comments

Anu Singh January 25, 2026 - 11:31 am

Kya sunday ko episode nhi aate?

Reply
Anu Singh January 25, 2026 - 12:01 pm

Kya sunday ko episode nhi aate hai? Main kbse wait kr rhi hu

Reply
Kiran January 26, 2026 - 5:13 am

Next part didi

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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