Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 32

by Story With Sanjana April 13, 2026
written by Story With Sanjana April 13, 2026 1 comment
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Manmarjiyan Season 4 – 32

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गोलू को नहाने के लिए घर भेजकर गुड्डू एक बार फिर सबके बीच चला आया। मिश्रा जी ने देखा तो कहा,”अरे गुड्डू ! का बात इत्ता बख्त लगा दिया , का बतियाने लगे थे ओह्ह्ह के साथ ?”
“अरे नहीं नहीं पिताजी ! उह्ह्ह भिखारी बहुते ढीठ था जाने का नाम ही नाही ले रहा था बस उसी को घर से पार करके आये है”,गुड्डू ने कहा और अमन के बगल में आ बैठा

“मिश्रा जी ! हम क्या कह रहे है कि अमन और वेदी बिटिया का रिश्ता तो पक्का हो ही चुका है क्यों ना शादी भी इसी साल कर दी जाए , हमे अब अपनी बहू जल्द से जल्द अपने घर में चाहिए”,विनोद चाचा ने हँसते हुए कहा
गुड्डू ने सुना तो बगल में बैठे अमन के कंधे से अपने कंधे को टकरा कर मुस्कुराया और अमन ने भी शरमाकर अपना सर झुका लिया
“हाँ हाँ क्यों नहीं विनोद जी ! दिवाली के बाद जो एकादशी आती है केशव पंडित जी उसी दिन का शुभ मुहूर्त बताये है , तब तक नन्हा मेहमान भी घर मा आ जाही,,,,,,,,,!!!”,मिश्रा जी ने कहा

“ये तो फिर डबल ख़ुशी की बात हुई मिश्रा जी एक तरफ हम ससुर बनेंगे दूसरी तरफ नाना,,,,,,,,इसी बात पर लीजिये मिठाई खाइये”,कहते हुए विनोद चाचा ने लड्डू उठाकर मिश्रा जी को खिला दिया।
कुछ देर बाद प्रीति सबके लिए चाय ले आयी , लाना तो मिश्राइन और शगुन चाह रही थी लेकिन प्रीति ने दोनों को ही मना कर दिया और खुद चली आयी।
सभी चाय पीते हुए बाते करने लगे और गुड्डू मन ही मन चकिया जाने की प्लानिंग करने लगा।

गोलू पर खिंसिया कर शर्मा जी नवरत्न के पास पहुंचे। नवरतन हिंदी फिल्म आ कोई गाना गुनगुनाते हुए अपना कोट सिल रहा था , शर्मा जी आये और अपने हाथ में पकड़े ठेले से एक पेंट निकालकर नवरतन के टेबल पर रखकर कहा,”जे बेसुरो की तरह गाना बंद करो और फटाफट हमायी पेंट सिल दयो , आज शाम हमे किसी फंक्शन मा जाना है”

नवरतन ने सुना तो सर उठाकर सामने खड़े शर्मा जी को देखा और अगले ही पल नवरत्न का मुंह बन गया क्योकि शर्माजी ने उसे बेसुरा जो कहा था। नवरतन को मुँह बनाते देखकर शर्मा जी ने कहा,”पेंट सिलने के नाम पर मुँह काहे बनाय लिये फ्री मा नाही सिलवाय रहे पइसा देंगे , ल्यो जल्दी सिल दयो”
नवरतन ने शर्मा जी के हाथो से पेंट ली और कहा,”हमाओ मुँह पेंट सिलने के नाम पर नाही आपके मुँह से अपने लिए बेसुरा सुनकर बनो है”

“अब बिना सुर के गाओगे तो बेसुरा ही कहेंगे ना,,,,,,,वैसे तुमहू कब से जे सब सौक रखने लगे बे ?”,शर्मा जी ने पूछा
नवरतन ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”उह्ह्ह का है ना आज हमहू बहुते खुश है,,,,,,,,,!!!”
“खुश हो , ऐसी का बात है हमे भी बताओ जरा”,शर्मा जी ने नवरतन की बातो में दिलचस्पी दिखाकर पूछा
“अब का बताये शर्मा जी बात ही ऐसी है , 40 साल बाद जे घर मा पायल की आवाज गूंजेंगी”,नवरतन ने कहा और ये कहते हुए उसके गाल शर्म से लाल हुए जा रहे थे जैसे वह अधेड उमर का आदमी ना होकर कोई 18 साल का नौजवान हो।

शर्मा जी ने सुना तो हैरानी से नवरतन की तरफ देखा और कहा,”का कोनो भूतनी वूतनी चिपट गयी का तुमसे ? अबे रतनवा कित्ती बार कहे है उह्ह्ह ढाबे वाले चौराहे से देर रात नाही लौटा करो , अब पड़ गया ना मुसीबत तुम्हरे गले”
“अरे का अंट शंट बक रहे है आप , अरे हमहू शादी करने जा रहे है,,,,,,,,,,,जे कह रहे थे हम”,नवरतन ने झुंझलाकर कहा
“का शादी ! सुनो नवरतन जे उम्र मा बालों मा मेहँदी लगती है और तुमहू हाथो मा लगावे की बात कर रहे हो , वैसे कौन है उह्ह महान आदमी जोन तुम्हरा रिश्ता करवाय रहे ?”,शर्मा जी ने कहा

कुर्सी पर बैठे नवरतन ने शर्मा जी की पेंट को उलटा करते हुएकहा,”ल्यो बगल मा छोरा और गाँव मा ढिंढोरा , अरे उह्ह्ह महान आदमी कोई और नाही बल्कि आपके दामाद ही है श्री गोलू गुप्ता”
शर्मा जी ने सुना तो गिरते गिरते बचे और अपने सीने पर हाथ रखकर कहा,”पुरे कानपूर मा तुमको जे ही एक नमूना मिला नवरतन”
“मतलब ?”,नवरत्न ने पूछा

“मतलब जे कि उह्ह टोपी पहना गया तुमको ओह्ह्ह से बड़ा धोखेबाज और तिकड़मबाज आदमी पुरे कानपूर मा नाही है,,,,,,,अरे ओह्ह्ह खुद अपनी शादी हमायी बिटिया को फसाय के किये है , तुम्हरी शादी कहा से करवा देंगे ? चुना लगाय उह्ह तुमको,,,,,,,,,,,,!!”,शर्मा जी ने गोलू की सच्चाई नवरतन के सामने कही तो नवरतन का चेहरा गुस्से से भर गया , उसने हाथ में पकड़ी शर्मा जी की पेंट के दोनों पायचो को खींचा और पेंट के दो टुकड़े करके कहा,”हमाये कुंवारेपन की कसम साला उह्ह्ह गोलुआ को छोड़ेंगे नाही हम,,,,,,,,,,,,,!!”

शर्मा जी ने देखा नवरतन ने गुस्से में गुस्से में आकर उनकी पेंट फाड् दी है तो वे चिल्लाये,”अबे हमायी पेंट काहे फाडे ?”
नवरतन ने फटी पेंट शर्मा जी की तरफ फेंकी और उठकर गुस्से से अंदर जाते हुए कहा,”हमाये जज्बातों से खेलकर अच्छा नाही किये तुमहू गोलू गुप्ता”
शर्मा जी अपनी फ़टी हुई पेंट को देख रहे थे कि अगले ही पल नवरतन हाथ में बड़ा सा छुरा उठाये बाहर आया और जाने लगा तो शर्मा जी ने उसके जले पर नमक छिड़ककर कहा,”तुम्हाये श्री गोलू गुप्ता ने लड़की की फोटो तो दिखाई ही होगी ना तुमको,,,,,,,,,,!!!!”

नवरतन ने सुना तो गुस्से से पलटा और कहा,”श्री , अरे काहे का श्री आज ओह्ह् के नाम के आगे स्व नहीं लगाया ना तो हमाओ नाम भी नवरतन नाही,,,,,,,,,,,हमायी दुकान का ख्याल रखियेगा हमहू यू गए और यू आये”
नवरतन गुस्से में वहा से निकल गया और शर्मा जी अपनी फ़टी पेंट झोले में डालकर वहा से रवाना हो गए।

चकिया , चंदौली
“सुनो बे ! दुइ दिन और बचा है बिंदिया की शादी मा , सारा बंदोबस्त बाकि है का मेहमानो के सामने हमायी नाक कटवाओगे ?”,मंगेश ने अपने भाई के लड़के कैलाश से कहा
“अरे ताऊजी आप चिंता नाही करो , हमने और विमल चाचा ने कानपूर से बहुते बढ़िया बेडिंग प्लानर वाला बुक किया है। कल सबेरे उह्ह हिया आ जाएगा और सब बंदोबस्त कर देगा”,कैलाश ने कहा
“जे बेडिंग प्लानर का होता है ?”,मंगेश ने पूछा

“अरे चाचा शादी मा टेंट लगाने से लेकर खाने पीने , नाचने गाने तक का सब बंदोबस्त वही लोग देखते है हमे तो बस उनको पैसा देना होता है बाकि सब जिम्मेदारी ओह्ह् की”,कैलाश ने खुश होकर कहा
“जे बहुते सही चीज है , ठीक है पैसो की जरूरत हो तो हमसे कहना,,,,,,,,,,और ज़रा पता करो बिंदिया के ससुराल मा जाने वाला दहेज़ का सब सामान तैयार है कि नाही ?”,मंगेश ने कहा और वहा से चला गया

बिंदिया के घर में कुछ मेहमान आ चुके थे और ये तो तय था कि मंगेश किसी भी कीमत पर जल्द से जल्द बिंदिया की शादी करना चाहता था  जिस से बिंदिया और लवली कभी एक दूसरे से मिल ना पाए।
मंगेश जा ही रहा था कि तभी सामने से आती एक सलवार सूट पहनी लड़की से टकरा गया जिसने सर पर दुप्पटा डालकर घूँघट किया हुआ था।  उसे देखकर मंगेश ने कहा,”कौन हो तुम ?”

“बिंदिया की सहेली होगी जी , ओह्ह्ह से मिलने आयी है,,,,,,,,,जाओ बिटिया तुमहू अंदर जाओ बिंदिया अंदर कमरा मा है”,लड़की कुछ जवाब देती इस से पहले बिंदिया की अम्मा ने कहा
“हाँ हाँ ठीक है जाओ,,,,,,,,,!!!”,लड़की से कहकर मंगेश अपनी पत्नी की तरफ आया और कहा,”सुनो ! उह्ह्ह बिंदिया के ब्याह के लिए जो गहने आये उह्ह अच्छे से सम्हालकर रखे ना तुमने ?”

“हाँ बिंदिया के बाकी सामान के साथ बक्सा मा रख दिए है,,,,,,,,,,सुनिए जी ! हमहू का कह रहे थे कि जे शादी करने से पहिले एक ठो बार बिटिया के मन की भी,,,,,,,,,,!!!”,बिंदिया की अम्मा ने इतना ही कहा कि एक तेज तर्रार थप्पड़ आकर उनके गाल पर लगा और मंगेश ने गुस्से से कहा,”बहुते हो चुकी तुम्हाये और तुम्हायी बिटिया के मन की , अब जे घर ओहि हुई है जोन हम चाही है इहलीये चुपचाप अपनी बिटिया के ब्याह की तैयारी करो वरना जे शादी के घर को मातम का घर बनाने मा हमको जरा देर नाही लगेगी,,,,,,,,,,,,,,समझयो”

मंगेश का गुस्सा देखकर बिंदिया की अम्मा सहमी हुई सी सर झुकाकर एक तरफ खड़ी हो गयी और मंगेश गुस्से में पैर पटकते हुए वहा से चला गया।

“कौन हो तुम ?”,घूंघट निकाले अपने सामने खड़ी एक अनजान लड़की को देख बिंदिया ने घबराहटभरे स्वर में पूछा
लड़की के भेष में खड़े मनोज ने अपना घूँघट हटाया और कहा,”बिंदिया हम है , मनोज”
मनोज को अपने सामने देखकर बिंदिया ने जल्दी से जाकर कमरे का दरवाजा बंद किया और मनोज के पास आकर कहा,”तुम हिया का कर रहे हो मनोज ? बापू ने तुमको हिया देखा तो बहुते बुरा होगा , तुम तुम हिया से चले जाओ”

“बिंदिया ! हमे तुम्हे कुछ बताना है , तुमहू लवली भैया को गलत नाही समझो , उन्होंने कहा है उह्ह जल्दी ही तुम्हे लेने आएंगे”,मनोज ने कहा
लवली का नाम सुनकर बिंदिया का चेहरा उदासी से घिर गया और उसने पलटकर कहा,”हमने तो उसके आने की उम्मीद ही खो दी है मनोज , हमरा लवली शहर जाकर बदल गवा है , अरे हमसे पियार होता तो का उह्ह्ह हमे वापस हिया भेजता ? हिया से जाने के बाद उसने कभी हमसे मिलने , बात करने की कोशिश तक नाही की और तुम कहते हो उह्ह हमे लेने आएगा,,,,,,,,,,,,,!!!!”

कहते हुए बिंदिया पलटी उसकी आँखों में आँसू और चेहरे पर उदासी देखकर मनोज का दिल भी पिघल गया , बिंदिया ने अपनी आँखों में आये आंसुओ को रोककर कहा,”दो दिन बाद हमायी शादी किसी और के साथ हो जायेगी और ओह्ह्ह के बाद हमहू हमेशा हमेशा के लिए लवली के लिए पराये हो जायेंगे,,,,,,,,!!!”

बिंदिया मनोज के पास आयी और कहा तकलीफ भरे स्वर में कहा,”जाकर कह दो उस से अगर उह्ह्ह हमे आखरी फेरे तक भी लेने आया तो हम ख़ुशी ख़ुशी ओह्ह्ह के साथ चले जायेंगे वरना ओह्ह्ह के बाद उह्ह्ह जिंदगी मा दोबारा हमे अपनी शक्ल ना दिखाए,,,,,,,,,बाहर किसी को तुम पर सक हो ओह्ह्ह से पहिले हिया से चले जाओ,,,,,,,,,,जाओ”

मनोज ने सुना तो हामी में सर हिला दिया और वापस घूँघट करके जैसे ही दरवाजे की तरफ बढ़ा किसी ने बाहर से दरवाजा खोला और अंदर आया तो बिंदिया का चेहरा डर से फीका पड़ गया। दरवाजा खोलकर अंदर आने वाला कोई और नहीं बल्कि मंगेश था जिसे शक हो गया था।  

मंगेश ने सामने खड़े मनोज के सर से दुपट्टा खींच लिया और जब उसने देखा कि सामने मनोज खड़ा है तो उसकी कोलर पकड़कर उसे घसीटते हुए बाहर ले जाने लगा। बिंदिया ने उसे बचाने की कोशिश की तो मंगेश ने एक थप्पड़ उसे मारा और कमरे में धक्का देकर दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। मंगेश ने अपने आदमियों के साथ मिलकर मनोज को बहुत बुरी तरफ मारा और घर से बाहर फेंक दिया।

गुप्ता जी का घर , कानपूर
गुड्डू के घर से निकलकर गोलू अपने घर चला आया। जैसा कि गुड्डू ने कहा था गोलू इस वक्त किसी भिखारी से कम नहीं लग रहा था। वह जैसे ही अंदर आया सामने बगीचे की सफाई करते मंगल फूफा उसे रोकते हुए उसकी तरफ आये और कहा,”ए ए ए अंदर कहा चले आ रहे हो बे ? जे कानपुर के भिखारी कब से इत्ते फेमिलियर होने लगे कि घर मा भी घुसने लगे , ए रुको तुमहि से कह रहे है”

गोलू ने मंगल फूफा के मुँह से भिखारी शब्द सुना और इधर उधर देखा लेकिन उसे तो अपने अलावा वहा कोई और नजर नहीं आया। वह मंगल की तरफ बढ़ा और कहा,”अरे फूफा,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू अपनी बात पूरी करता इस से पहले मंगल फूफा ने उसे धक्का देकर कहा,”साले ! भिखारी होकर हम से रिश्ता जोड़ रहे हो”
मंगल के एक ही धक्के से गोलू लड़खड़ाकर नीचे जा गिरा , वह उठा और कहा,”अबे का पगला गए हो या सुबह सुबह भांग खा लिए हो , अबे हम है गोलू गुप्ता , अब का हमे भी नाही पहिचानते,,,,,,,,,,,,!!”

मंगल फूफा ने सुना तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ , उन्होंने ध्यान से देखा तो पाया सामने गोलू खड़ा है उन्होंने गोलू की तरफ आकर खिंसियाते हुए कहा,”हीहीहीही माफ़ करना गोलू हमे लगा कोनो गली का भिखारी है”
गोलू ने सुना तो गुस्से से अपना हाथ मंगल फूफा को दिखाकर कहा,”कोहनी मारकर मुँह खोंच देंगे समझे,,,,,,,,,!!!”
गोलू अभी मंगल फूफा पर खिंसिया ही रहा था कि तभी घर के गेट पर फुलवारी आयी और बड़े प्यार से कहा,”मंगल जी ! चाची अंदर है का ?”

मंगल फूफा ने सुना और दूसरी तरफ देखकर कहा,”हमे का पतो ? हम का तुम्हाये नौकर है खुदहि जाकर देख ल्यो”
फुलवारी ने सुना तो मुँह बनाकर वहा से चली गयी और गोलू मुँह फाडे हक्का बक्का सा मंगल फूफा को देखने लगा , एक ही रात में इतने बड़े चमत्कार की उम्मीद गोलू ने तो अपने जीवन में कभी नहीं की थी।  
गोलू को खोया हुआ देखकर मंगल फूफा ने उसके चेहरे के सामने हाथ हिलाया और कहा,”अब तुमको का हुआ तुमहू काहे पुतला बन के खड़े हो ?”

मंगल फूफा की आवाज से गोलू की तंद्रा टूटी। उसने मंगल फूफा के बगल में आकर उनके कंधो पर अपनी बाँह रखी और उन्हें सीढ़ियों की तरफ ले जाते हुए कहा,”जे सब का था फूफा ? मतलब कल तक तुमहू फुलवारी के पीछे लट्टू बने घूम रहे थे और आज एकदम से इत्ता रुड,,,,,,,,,,जे चमत्कार कैसे हुआ ?”
“तुमने कबो चमड़े के बेल्ट से मार खायी है गोलू ?”,मंगल फूफा ने मायूसी भरे स्वर में कहा
“नहीं चमड़े के बेल्ट से नाही,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने मासूमियत से कहा

“तो फिर तुम हमाओ दुःख नाही समझ पाओ , हमायी छोडो तुमहू जे हालत काहे बनाये हो भाई ?”,मंगल फूफा ने उतनी ही मायूसी से फिर कहा
“अरे यार का बताये फूफा हमाये जीवन मा कित्ती परेशानी है,,,,,,,अच्छा करने जाते है साला ऑटोमेटिक बुरा हो जाता है हमरे साथ , नहीं तुम बताओ मतलब किसी की भलाई करना गलत बात है का ?”,गोलू ने अपना दुखड़ा मंगल फूफा को कह सुनाया।

“हम का कह रहे है गोलू तुमहू कोनो अच्छा पंडित पकड़कर एक ठो बार ओह्ह को अपना हाथ दिखाय लयो , पता तो चले तुम्हरा कौनसा ग्रह खराब है”,मंगल फूफा ने गोलू को सलाह दी
गोलू मंगल फूफा की बात का कोई जवाब दे पाता इस से पहले दोनों के कानो में किसी की गुस्से भरी आवाज पड़ी,”हाथ तो तब दिखा पाओगे गोलुआ जब तुमहाओ हाथ बचेगो”  
गोलू और मंगल फूफा ने सुना तो पलटकर देखा। हाथ में बड़ा सा छुरा उठाये चेहरे पर गुस्से वाले भाव लिए नवरतन खड़ा था।

मंगल फूफा को तो कुछ समझ नहीं आया लेकिन गोलू की आँखों सामने कुछ देर पहले किया अपना कांड आ गया। वह नवरतन को कुछ समझाता इस से पहले नवरतन भागते हुए दोनों की तरफ आया और दोनों बचने के लिए लड़खड़ा कर सीढ़ियों पर आ गिरे। नवरतन भी भागते हुए आया और हाथ में पकड़ा छुरा सीढ़ी पर दे मारा लेकिन सही वक्त पर गोलू साइड हट गया और छुरा लगा मंगल फूफा के ठीक बगल में , एक पल के लिए तो बेचारे मंगल फूफा की जान ही हलक में आ गयी थी।

वह अपना हाथ सीने से लगाये उठकर बैठा और मरे हुए स्वर में नवरतन से कहा,”अबे ! देख के मारो बे , अभी तो छोटा कर देते हमे”
नवरतन एक तो पहले ही गोलू पर चिढ़ा हुआ था ऊपर से मंगल की बात सुनकर और खिज गया। उसने मंगल की तरफ देखा और कहा,”पहिले से इत्ते छोटे हो और कितना छोटा होना है , का बच्चो के स्कूल मा एडमिशन लोगे ?”
कहकर नवरतन मंगल फूफा को एक थप्पड़ मारा और अपनी बची हुई भड़ास भी उन पर निकाल दी

( क्या अमन और वेदी की शादी हो पायेगी बिना किसी परेशान के या इसमें भी होंगे गुड्डू गोलू की तरफ से अनचाहे कांड ? क्या मंगेश करवा देगा बिंदिया की शादी किसी और से या वक्त रहते लवली रोक देगा ये शादी ? क्या गोलू के साथ रहते रहते मंगल फूफा भी बन जायेंगे उसके जैसे ? जानने के लिए पढ़ते रहिये मनमर्जियाँ सीजन 4 मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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1 comment

Nency Patel April 14, 2026 - 4:50 pm

Kya mast likhte ho aap mam😂😂

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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