Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 54

by Story With Sanjana April 13, 2026
written by Story With Sanjana April 13, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat Season 2 – 54

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

विक्रम के ऑफिस से निकलकर पृथ्वी बाहर आया और आसमान की ओर देखकर एक गहरी साँस ली। अंदर उसने जो किया उसका उसे जरा भी अफ़सोस नहीं था जबकि ये बहुत बड़ी डील थी जिसे पृथ्वी ने बिना सोचे समझे केंसल कर दिया था। पृथ्वी ने अपनी शर्ट की बाजुओं को समेटा , और बालों में से हाथ घुमाते हुए आगे बढ़ गया।
अपने ऑफिस के मीटिंग रूम में खड़ा विक्रम गुस्से और अपमान की आग में जल रहा था। उसने हाथ में पकड़ी फाइल को टेबल पर फेंका और गुस्से से भरकर बाहर आया।

विक्रम को गुस्से में देखकर दिव्या सहमी हुई सी अपनी जगह खड़ी रही। विक्रम उसकी तरफ आया और कठोर स्वर में कहा,”आइंदा से मौर्या कम्पनी का कोई भी एम्प्लॉय यहाँ नहीं आना चाहिए ,, उस कम्पनी के साथ भाई की जितनी भी डील है मुझे सबकी डिटेल चाहिए और अभी इसी वक्त उनसे सारी फायनेंस डील केंसल कर दो,,,,,,,,,,,,!!!”
“सर डील केंसल करने से पहले अगर आप एक बार अविनाश सर से बात,,,,,,,,,!!!”,दिव्या ने डरते डरते कहा

लेकिन वह अपनी बात पूरी कर पाती इस से पहले ही विक्रम ने चिल्लाकर कहा,”तुम इस कम्पनी में काम मेरे लिए करती हो ये भाई के लिए,,,,,,,,,,उनसे मैं बात कर लूंगा तुम अभी सारी डील कैंसल करो और याद रहे आज के बाद अगर उस कम्पनी का एक भी एम्प्लॉय यहाँ नजर आया तो तुम अपनी नौकरी से हाथ धो बैठोगी समझी,,,,,,,,,,!!!!”
दिव्या ने सुना तो अपना सर झुका लिया और हामी में गर्दन हिला दी। गुस्से से भरा विक्रम वहा से चला गया और दिव्या मायूस होकर अपनी डेस्क पर आ बैठी।

मौर्या Pvt Ltd कम्पनी , नवी मुंबई
जयदीप परेशान सा अपने केबिन में यहाँ से वहा चक्कर काट रहा था। उसके चेहरे पर उलझन के भाव थे और वह काफी मायूस भी नजर आ रहा था। अब तक वह पृथ्वी के केबिन में 4 बार फोन करके अंकित से उसके आने के बारे में पूछ चुका था लेकिन पृथ्वी अभी तक नहीं आया था। थककर जयदीप सोफे पर आ बैठा और ऑफिस की केंटीन में फोन कर एक कॉफी भिजवाने को कहा  

कुछ देर बाद ऑफिस बॉय जयदीप के लिए कॉफी ले आया। वह कॉफी रखकर जैसे ही जाने लगा केबिन का दरवाजा खुला और पृथ्वी अंदर आया। जयदीप ने हाथ में पकड़ा कप नीचे रखा और उठकर पृथ्वी की तरफ आया। जयदीप के चेहरे पर उलझन और मायूसी के भाव देखकर पृथ्वी समझ गया कि जयदीप को सब पता चल चुका है इसलिए वह ख़ामोश रहा।  जयदीप ने ऑफिस बॉय को जाने का इशारा किया और पृथ्वी के सामने आकर अपने हाथो को बांधकर कहा,”क्या मैं जान सकता हूँ इस ऑफिस में बॉस कौन है ?”

“क्या आप ये बात नहीं जानते ?”,पृथ्वी ने जवाब देने के बजाय सवाल किया तो जयदीप चिढ गया और कहा,”मैं हूँ इस कम्पनी का बॉस”
“हाँ मैं जानता हूँ”,पृथ्वी ने बिना किसी भाव के शांत स्वर में कहा
“जब तुम ये बात जानते हो तो फिर तुमने मुझसे पूछे बिना मिस्टर कपूर के साथ आज की डील केंसल क्यों की ? पृथ्वी तुम्हे पता भी है वो कितनी बड़ी फायनेंस डील थी ,,, हाह किस से पूछकर तुमने वो डील केंसल की , या फिर तुम खुद को इस कम्पनी में बॉस समझने लगे हो ?”,पहली बार जयदीप का गुस्सा पृथ्वी पर फूटा लेकिन पृथ्वी अब भी शांत था।

उसे ना जयदीप की बात पर गुस्सा आया ना ही उसने कुछ कहा वह बस ख़ामोशी से जयदीप को देखता रहा जिस से जयदीप और चिढ गया और पृथ्वी के सामने से हटकर कहा,”पृथ्वी तुम इस  कम्पनी में सिर्फ मैनेजर हो और मैनेजर होने के नाते तुम्हे बस अपनी सलाह देने की परमिशन है। कम्पनी के बड़े फैसले लेने का तुम्हे कोई हक़ नहीं है,,,,,,,,,,तुम जानते भी हो इस डील के केंसल होने के बाद मुझे कितना नुकसान होगा,,,,,,,,!!!”

“हाँ जानता हूँ और ये भी जानता हूँ कि ये डील आपके लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट थी,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अपनी चुप्पी तोड़ी
“फिर भी तुमने ऐसी बेवकूफी की पृथ्वी,,,,,,,,,,,तुमने इसे केंसल कर दिया बिना मुझसे पूछे , बिना मुझे बताये”,जयदीप ने पलटकर कहा
“ताकि आप एक बड़ी मुसीबत में ना फंसे”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
“कैसी मुसीबत ?”,जयदीप ने हैरानी से पूछा

पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और फिर कहा,”अविनाश कपूर के साथ आप जो मीटिंग करने जा रहे थे , जिसमे आपकी कम्पनी की फायनेंस डील विक्रम कपूर के साथ थी ,, इस डील में जो फायनेंस वो करने वाला है वो सब ब्लेक का पैसा है जिसका उसके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। अगर आप ये डील करते है तो आपके इसमें फसने के पुरे चांस है। मैं जानता हूँ मैं इस कम्पनी में एक मैनेजर हूँ लेकिन इस कम्पनी का मैनेजर होने के नाते कम्पनी की रेप्युटेशन के साथ साथ आपकी इज्जत बचाये रखना भी मेरी जिम्मेदारी है।

20 करोड़ की डील आपको आगे और मिल जाएगी लेकिन एक बार आप इसमें फंसे तो जिंदगीभर नहीं निकल पाएंगे। विक्रम कपूर एक बहुत ही बड़ा जालसाज और धोखेबाज इंसान है और मै नहीं चाहता आप इसमें फंसे,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी की बात सुनकर जयदीप हैरानी से उसे देखने लगा और फिर उसके सामने आकर कहा,”तुम्हे कैसे पता वो फ्रॉड है ?”

पृथ्वी जयदीप की टेबल की तरफ आया , उसका लेपटॉप अपनी तरफ घुमाया और अपने जेब से एक पेन ड्राइव निकालकर उसमे लगायी और अगले ही पल उसकी उंगलिया लेपटॉप के कीबोर्ड पर तेजी से चलने लगी। जयदीप उसकी तरफ चला आया पृथ्वी ने एक फाइल खोली और लेपटॉप जयदीप की तरफ घुमा दिया।

जयदीप ने देखा तो उसकी आँखे हैरानी से फ़ैल गयी , वह फाइल में मौजूद सभी जानकारी देखने लगा और देखकर उसे एक धक्का लगा। कुछ देर पहले पृथ्वी जो कुछ कह रहा था वो सच था। जयदीप ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”ये तुम्हे कहा से मिला ?”
“जब उसे मारने उसके ऑफिस,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी के मुँह से एकदम से निकला लेकिन वह सम्हल गया  
“तुम उसे मारने क्यों गए थे ?”,जयदीप ने पूछा

“मैं क्यों उसे मारने जाऊंगा , मैं क्या आपको गुंडा मवाली दिखता हू ?”,पृथ्वी ने जयदीप को घूरकर पूछा
“अरे लेकिन अभी तो तुमने कहा”,जयदीप ने हैरानी से कहा
“हाह ! मैंने कहा मैं उसे मारना चाहता हूँ”,पृथ्वी ने इतरा कर कहा
“अब तुम उसे क्यों मारना चाहते हो ?”,जयदीप ने लेपटॉप बंद करके कहा

“बस ऐसे ही मेरा मन है,,,,,,,,!!!”,कहते हुए पृथ्वी सोफे की तरफ चला गया जहा टेबल पर जयदीप के लिए कॉफी रखी गयी थी। जयदीप रोकता या कुछ कहता कुछ कहता इस से पहले पृथ्वी ने कप उठाया और एक घूंठ भरकर जयदीप की तरफ देखा।
“तुम्हारा मन है तो क्या किसी को भी मारोगे ?”,जयदीप ने पृथ्वी की तरफ आकर कहा
“अह्ह्ह हर किसी को नहीं बस उस विक्रम और प्रा,,,,,,,,,,,,!!!”,कहते कहते पृथ्वी रुक गया लेकिन जयदीप समझ गया पृथ्वी ने अगला नाम किसका लिया है इसलिए उसने कहा,”अब प्राची को क्यों मारना चाहते हो तुम ?”

बहुत इरिटेट करती है वो मुझे,,,,,,पता है ऐसे घूरती है मुझे जैसे खा जाएगी”,पृथ्वी ने चिढ़े हुए स्वर में कहा
“शांत हो जाओ पृथ्वी ! वैसे भी देसाई सर से मेरी बात हो चुकी है अब से मिस प्राची किसी भी मीटिंग को अटेंड नहीं करेगी बल्कि कम्पनी के मैनेजर भरत माथुर अटेंड करेंगे सो प्राची की फ़िक्र तुम छोड़ दो”
“मुझे उसकी फ़िक्र है भी नहीं और मैं क्यों उसकी फ़िक्र करू ?”,पृथ्वी ने कॉफी पीते हुए कहा

जयदीप ने देखा उसकी कॉफी पृथ्वी पी रहा है तो अफ़सोस में अपना सर झटका और अगले ही पल उसकी नजर पड़ी पृथ्वी के शर्ट की कोलर पर लगे लिपस्टिक के निशान पर और उसने हैरानी से कहा,”ये तुम्हारी कोलर पर निशान कैसा है ?”
पृथ्वी ने सुना तो कॉफी का आखरी घूंठ मुँह से बाहर गिरते गिरते बचा और उसने खुद को सम्हालकर कहा,”कैसा निशान ?”

जयदीप ने ऊँगली से उसके शर्ट की कोलर की तरफ इशारा किया और कहा,”मैं इसकी बात कर रहा हूँ , देखने में तो ये किसी लिपस्टिक के निशान जैसा,,,,,,,!!!”
जयदीप अपनी बात पूरी करता इस से पहले पृथ्वी ने कप रखा अपना नाख़ून चबाकर शर्माते हुए कहा,”अह्ह्ह्ह मैं नहीं बताऊंगा , मुझे शर्म आती है”
इतना कहकर पृथ्वी वहा से चला गया और जयदीप मुँह फाडे उसे जाते हुए देखता रहा और खुद में ही बड़बड़ाया,”क्या हो गया है इस लड़के को ?”

आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
 दोपहर में सोई अवनि और सुरभि की आँखे शाम में खुली। सुरभि के घर से फोन आया था इसलिए वह बात करते हुए बालकनी की तरफ चली गयी और अवनि मुँह धोकर दोनों के लिए चाय बनाने किचन में चली आयी। चाय बनाते हुए अवनि ने देखा कि शाम में बनाने के लिए फ्रीज में सब्जिया नहीं है। उसने अपने और सुरभि के लिए चाय बनाई और बाहर चली आयी। सुरभि भी बात करके सोफे पर आ बैठी और दोनों चाय पीने लगी।

“सुरभि ! मुझे कुछ सब्जिया लेकर आनी है , तुम मेरे साथ नीचे चलोगी ?”,अवनि ने अपनी चाय खत्म करके पूछा  
“हाँ चलो ना ! वैसे भी जब से यहाँ आयी हूँ बाहर निकली ही नहीं,,,,,,,,,चलो चलते है”,सुरभि ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा
अवनि सुरभि को साथ लेकर नीचे चली आयी। सोसायटी के बाहर कुछ सब्जी वाले अपना ठेला लगाए खड़े थे। अवनि सुरभि के साथ वहा चली आयी और सब्जिया छाटने लगी। कुछ सब्जिया लेने के बाद अवनि की नजर लौकी पर पड़ी उसने जैसे ही उसे उठाया एक जानी पहचानी आवाज अवनि के कानो में पड़ी,”पृथ्वी को लौकी ज़रा भी पसंद नहीं है”

अवनि ने आवाज वाली दिशा में देखा तो पाया उस से कुछ ही दूर खड़ी लता भी अपने लिए ताजा सब्जिया छाँट रही है। अवनि लता को देखकर मुस्कुराई लेकिन लता ने कोई प्रतिक्रया नहीं दी बस एक नजर अवनि को देखा और अपना ध्यान वापस सब्जियों पर लगा लिया।
“कौन है ये ?”,सुरभि ने दबी आवाज में अवनि से पूछा

“पृथ्वी की आई है,,,,,,,!!!”,अवनि ने भी धीरे से कहा और लता की तरफ बढ़ गयी। सुरभि वही खड़ी ख़ामोशी से दोनों को देखने लगी। अवनि ने लता के पास आकर हाथ में पकड़ी लौकी को वापस रखा और कहा,”तो फिर आप ही बता दीजिये ना , उन्हें क्या पसंद है ?”
लता ने सुना तो अवनि की तरफ देखने लगी , लता का यू प्यारभरी नजरो से अवनि को देखना अवनि के मन को सुकून दे रहा था। पृथ्वी के लिए लता की आँखों में प्यार और परवाह आज भी मौजूद थी।

उन्होंने अवनि से नजर हटाई और सामने रखी सब्जियों में से कुछ सब्जिया छांटकर अवनि की तरफ बढ़ा दी। अवनि ने ख़ुशी ख़ुशी उन्हें लिया और पैसे चुकाकर वहा से चली गयी। लता ने भी अपनी सब्जिया ली और आगे बढ़ गयी। अवनि के लिए उनमे मन में जो नफरत और गुस्सा था वो अब धीरे धीरे कम होने लगा था।

“वो पृथ्वी की मम्मी थी तो फिर उन्होंने तुम से ठीक से बात क्यों नहीं की , क्या वो अब भी तुम से और पृथ्वी से नाराज है ?”,अवनि के साथ चलती सुरभि ने पूछा
“शायद हाँ और शायद नहीं भी,,,,,,,,,,,,,,हाँ इसलिए कि उन्होंने अभी तक पृथ्वी को माफ़ नहीं किया है और नहीं इसलिए कि अब वो पहले जैसे मुझसे दूर नहीं भागती,,,,,,,,!!!”,अवनि ने सुरभि की तरफ देखकर कहा
“देखना एक दिन वो तुम्हे और पृथ्वी को माफ़ भी कर देंगी और तुम्हे अपना भी लेंगी”,सुरभि ने अवनि की बाँह थामकर कहा और मुस्कुरा दी

दोनों सहेलिया बाते करते हुए आगे बढ़ गयी और उनके पीछे आती लता जी के कदम रुक गए जब उन्होंने अवनि की बात सुनी। सहसा ही एक टीस उनके दिल में उठी और फिर वे घर की तरफ बढ़ गयी।  

सिद्धार्थ का घर , सिरोही
“कौन थी वो लड़की ? अब तुम हमारी गैर मौजूदगी में लड़कियों को घर भी लाने लगे हो। मैं पूछता हूँ आखिर कौन थी वो लड़की ?”,जगदीश जी ने गुस्से से भरकर कहा
“सिद्धू ! तेरे पापा क्या कह रहे है , कौन लड़की थी और तू उसे घर क्यों लाया था ? चुप क्यों है जवाब दे ?”,गिरिजा जी ने दुखी स्वर में कहा

“अरे ये क्या जवाब देगा , इसकी अय्याशी के चर्चे तो पुरी सोसायटी में हो रहे है ,, हमारी पड़ोसन मिसेज मेहता और उनके पति दोनों ने खुद देखा है सुबह सुबह एक लड़की को हमारे घर से जाते हुए वो लोग क्या झूठ कहेंगे”,जगदीश जी ने कठोर स्वर में कहा  
“सुबह सुबह , तो क्या वो लड़की रातभर तुम्हारे साथ थी सिद्धू ?”,गिरिजा ने हैरानी और उदासी भरे स्वर में कहा
“मम्मी मैं आपको समझाता हूँ , आप अवनि को तो जानती है ना वो लड़की अवनि की दोस्त है। किसी वजह से उसे यहाँ रुकना पड़ा बस और आप लोग जैसा सोच रहे है वैसा कुछ भी नहीं है”,सिद्धार्थ ने अपनी चुप्पी तोड़ी

“और वो क्या वजह थी जो उसे यहाँ रुकना पड़ा ?”,जगदीश जी ने गुस्से से पूछा
“वो मैं आपको नहीं बता सकता”,सिद्धार्थ ने धीरे से कहा
“देखा ! सुन रही हो इसकी बात , ये हमे नहीं बता सकता कि रातभर वो लड़की इस घर में क्यों थी ? हमारी इज्जत मिटटी में मिलाने में कोई कसर तो तुमने पहले ही नहीं छोड़ी है अब ये सब भी करने लगे हो,,,,,,,,,!!!”,जगदीश जी गुस्से से चिल्लाये

“मैंने कुछ गलत नहीं किया है पापा,,,,,,,,,!!!”,इस बार सिद्धार्थ ने थोड़ा तेज आवाज में कहा जिस से गिरिजा जी सहम गयी
“कुछ गलत नहीं किया है तो फिर बुलाओ उस लड़की को यहाँ,,,,,,,,,मैं बात करूंगा उस से वरना इस घर से निकल जाओ तुम”,जगदीश जी ने कहा और पैर पटकते हुए वहा से चले गए।

“ये सब क्या है सिद्दू ? कौन लड़की थी , तू क्यों लाया था उसे यहाँ ? क्या तुझे अपने पापा की इज्जत का , इस घर की इज्जत का जरा भी ख्याल नहीं है ?  सोसायटी वाले कैसी कैसी बाते बना रहे है , तू क्यों लाया था उसे यहाँ ?”,गिरिजा जी ने उदासी भरे स्वर में कहा।
गिरिजा से कहने के लिए सिद्धार्थ के पास कुछ नहीं था इसलिए वह सर झुकाकर चुपचाप वहा से चला गया और गिरिजा जी सोफे पर आ बैठी और रोने लगी।

अपने कमरे में आकर सिद्धार्थ बिस्तर पर आ बैठा और उस रात को याद करने लगा जब वह सुरभि को घर लेकर आया था। सिद्धार्थ को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह अब क्या करे और कैसे अपने घरवालों को यकीन दिलाये कि उसका किसी भी लड़की से कोई रिश्ता नहीं है वह बस सुरभि की मदद करने उसे यहाँ लाया था। सिद्धार्थ ने दोनों हाथो से अपना सर पकड़ लिया , सहसा ही उसे अपने पापा की कही बात याद आयी और एक बार फिर सुरभि का ख्याल आया। जगदीश जी सुरभि को यहाँ बुलाना चाहते थे और आखरी बार सिद्धार्थ जब सुरभि से मिला था तब सुरभि ने उसे बताया थी कि वह उदयपुर जा रही है।

सिद्धार्थ और परेशान हो गया ना वह सुरभि के बारे में ज्यादा कुछ जानता था ना ही उसके पास सुरभि का कोई फोन नंबर था। वह काफी देर तक इसी उलझन में रहा और फिर उसे अवनि की याद आयी। सिद्धार्थ ने अपना फोन उठाया और अवनि का नंबर डॉयल किया। रिंग जाने के साथ ही सिद्धार्थ की बेचैनी भी बढ़ती जा रही थी , अवनि जब उस से पूछेगी कि उसे सुरभि का नंबर क्यों चाहिए तो वह उसे क्या कहेगा ? और क्या पता अवनि उसका फोन ही ना उठाये

दूसरी तरफ अवनि और सुरभि किचन में थी और हॉल की टेबल पर रखा अवनि का फोन बज रहा था। पृथ्वी ऑफिस से घर आ चुका था। वह नहाकर अपने बालो को पोछते हुए जैसे ही हॉल में आया उसने देखा अवनि का फोन बज रहा है और अवनि किचन में है।
पृथ्वी ने टेबल पर रखे फोन को उठाकर देखा स्क्रीन पर सिद्धार्थ का नाम देखकर उसके चेहरे पर कठोरता के भाव उभर आये और भँवे तन गयी। उसने फोन उठया और कान से लगा लिया

“हेलो अवनि ! मैं सिद्धार्थ बात कर रहा , दरअसल मुझे तुम से बहुत जरुरी बात करनी है”,दूसरी तरफ से सिद्धार्थ की आवाज उभरी
सिद्धार्थ के मुँह से अवनि का नाम सुनकर पृथ्वी को चुभन का अहसास हुआ और उसने फोन काट दिया।

( क्या विक्रम लेगा पृथ्वी से अपने अपमान का बदला ? क्या लता के दिल में बनने लगी है अवनि के लिए जगह ? क्या अब भी है पृथ्वी के दिल में सिद्धार्थ के लिए गुस्सा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” सीजन 2 मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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1 comment

Nency Patel April 13, 2026 - 10:48 am

Yaar ab to prithvi ko siddhart ke sath bahavior sudharna chahiye because wo sadi se back out nai karta to ab tak avni aur siddharth ki sadi ho gai hoti

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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