Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 – 33

by Story With Sanjana April 15, 2026
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Manmarjiyan Season 4 – 33

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गोलू का गुस्सा नवरत्न ने मंगल फूफा पर उतारा। मार खाकर मंगल फूफा उठे और कराहते हुए कहा,”अबे गोलू ! साला जब से तुम से मिले है हमाओ तो आतंक ही खत्म हुई गओ। तुम्हाये बाप से लेकर साला तुम्हाये पडोसी तक हर कोई हम पर हाथ साफ कर देता है। अरे ! हम का कोनो मंदिर का घंटा है जब जिसका मन किया हमे बजा दिया”

मंगल फूफा को रोते देखकर गोलू ने गुस्से से नवरतन को देखा और चिल्लाकर उसकी तरफ आते हुए कहा,”ए नवरतन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,चचा”
गोलू ने पहले गुस्से से कहा लेकिन नवरतन के हाथ में छुरा देखकर एकदम से उसकी आवाज धीमी पड़ गयी और उसने नवरतन के सामने आकर कहा,”का चचा काहे इत्ता गुस्साय हो और बेचारे हमाये फूफा को काहे लपेटे मा ले लिए ओह्ह्ह की तो कोनो गलती भी नाही है,,,,,,,,,,!!!”

“काहे गुस्साए है ? 100 कमीने मरे होंगे तब जाकर तुमहू एक धोखेबाज आदमी पैदा होई है गोलू,,,,,,,,,हमको शादी का सपना दिखा के हमायी भावनाओ से खेलते जरा भी लाज शर्म नाही आयी तुमको,,,,,,,,,,,ना कोई हीरा है ना ही ओह्ह्ह के ब्याह की जिम्मेदारी मिली है तुमका ,, हमको बातो मा लेकर हमाये पैसो से समोसे खाये , चाय पी और हमही को उल्लू बनाकर भाग गए , बताओ काहे किये जे ड्रामा हमाये साथ ?”,नवरतन ने गुस्से भरे स्वर में कहा और उसके चेहरे से उसकी तकलीफ साफ झलक रही थी।

गोलू ने सुना तो समझ गया कि उसका झूठ नवरतन के सामने आ चुका है इसलिए उसको बहलाते हुए कहा,”अरे अरे चचा का तुम भी , किसने कहा तुमसे कि कोनो हीरा नाही है ? अरे हीरा है बिल्कुल है और ओह्ह के ब्याह की जिम्मेदारी भी हमे ही मिली है,,,,,,,,,का भरोसा नाही है का आपको हम पे ?”
नवरतन ने सुना तो गोलू को घूरने लगा और कहा,”नहीं है ! खाओ अपने सर की कसम”

“साला अपने सर की कसम खाई और हमहू चल बसे तो फिर पिंकिया अकेली हो जाएगी , हमाये बच्चे पापा पापा किसको कहेंगे ? एक काम करते है फूफा की कसम खा लेते है उह्ह्ह सुलट भी गवा तो का दिक्कत है वैसे भी अपने हिस्से की जिंदगी तो उह्ह्ह जी ही चुके और अब तो फुलवारी से भी प्रेम नाही रहा ओह्ह्ह का,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू मन ही मन बुदबुदाया
नवरतन ने देखा बहुत देर से गोलू बस मुँह ही बना रहा है कुछ कह नहीं रहा तो उसने कहा,”खाओगे कसम कि हमहू मान ले झूठे हो तुम ?”

नवरतन की आवाज से गोलू की तन्द्रा टूटी और उसने मंगल फूफा की तरफ जाते हुए कहा,” खाएंगे ना , बिल्कुल खाएंगे लेकिन अपनी नाही हमहू अपने मंगल फूफा की कसम खाकर कहते है हीरा है और हमने ही ओह्ह्ह के ब्याह की जिम्मेदारी ली है”
मंगल फूफा ने जब सुना कि गोलू उनके सर की कसम खा रहा है तो उन्होंने गोलू का हाथ झटका और कहा,”अबे हमायी कसम काहे खा रहे हो का हमे निपटाने की सोच लिए हो गोलू ?”

मंगल फूफा को उछलते देखकर नवरतन ने कहा,”अब जे कौन है और हमको एक ठो बात बताओ जे की कसम काहे खाय रहे तुमहू ?”
गोलू जिसका उलटे कामो में और मुसीबत के समय उलटा दिमाग कुछ ज्यादा ही तेजी से चलता था उसने लपककर मंगल फूफा के कंधो पर बाँह रखी और कहा,”जे है हमाये मंगल फूफा ! अभी तुमहू का कहे थे कि 100 कमीने मरे तो हमहू पैदा हुए , तो समझ ल्यो जब 100 महापुरुष मरे होंगे ना तब जाकर जे पैदा हुए इत्ते नेक दिल आदमी है जे। अरे आज तक एक चींटी तक नाही मारे है

किसी को गलत सब्द नाही कहे है , अरे जिनके नाम में ही मंगल है उह्ह्ह भला किसी का अमंगल का करेंगे। अरे हमहू अपने सगे बाप को इत्ता नाही मानते जितना इनको मानते है ऐसी सुद्ध पवित्र आत्मा के सर की कसम खाये फिर भी तुमको डाउट है नवरतन,,,,,,,,,,!!!”
नवरतन एक बार फिर गोलू की बातो में आ गया और ना में गर्दन हिला दी , दूसरी तरफ मंगल फूफा हैरानी से मुँह फाडे गोलू को देख रहे थे क्योकि जितनी तारीफ गोलू ने की थी उतनी तो मंगल फूफा अपने पुरे जीवन में नहीं सुने थे।

गोलू ने मंगल फूफा को साइड फेंका और नवरतन की तरफ आकर अपनी जेबे टटोलते हुए कहा,”और का कह रहे थे तुम कि तुम्हाये पैसे से समोसे खा लिए चाय पी लिए , अभी देते है तुम्हरा पइसा का भिखारी समझ लिए हो का हमे ?”

“अरे अरे गोलू भाई जाने दो यार हम तो बस ऐसे ही कह दिए गुस्से में,,,,,,,हमको पता है तुमहू हमसे झूठ थोड़े कहोगे”,नवरतन ने गोलू को रोककर खिंसियाते हुए  कहा लेकिन गोलू फिर भी जेबो से पैसे निकालने की एक्टिंग करता रहा जबकि उसकी जेब में सिर्फ गुड्डू का दिया एक 20 का नोट था।

नवरतन ने देखा गोलू कुछ ज्यादा ही सीरियस हो गया है तो उसने गोलू को रोका और कहा,”अरे गोलू सुनो यार ठीक है हो गयी गलती माफ़ कर दयो भाई , नहीं चाहिए चाय समोसे का पइसा,,,,,,,,,गुस्सा थूक दयो”
“हाँ ठीक है और ये ना समझना हम पैसे देना नहीं चाहते उह्ह्ह तो हमाये पास खुल्ले नाही थी उह्ह्ह बख्त वरना किसी और के पैसे से पानी तक नाही पीते है”,गोलू ने इतरा कर कहा

नवरतन गोलू के पास आया और उसकी बाँह दबाते हुए कहा,”हमको बस इत्ता बताओ हीरा सच मा है न ?”
गोलू ने सुना तो बाँयी भंव उठाकर नवरतन को देखा , नवरतन ने झेंपकर कहा,”हमाओ मतलब तुम जो कहे उह्ह सच था ना मतलब हीरा है ना ?”

गोलू ने कुछ ही दूर सीढ़ियों पर बैठे मंगल फूफा की तरफ इशारा करके कहा,”झूठ कहते तो अब तक उह्ह्ह आदमी निपट ना गया होता , ए यार नवरतन ! तुमहू ना जाओ हिया से साला तुमको हमरी बात पर भरोसा ही नाही है , हीरा के लिए हमहू कोनो और सोना ढूंढ लेंगे तुमहू जाओ,,,,,,,,,,!!”
“अरे अरे गोलू,,,,,,,,,,!”,नवरतन ने गिड़गिड़ाकर कहा

“नहीं नहीं तुमहू निकलो , तुमको साला हम पर गोलू गुप्ता उर्फ़ पिंकेश गुप्ता पर भरोसा नहीं है,,,,,,नहीं तुमहू जाओ तुमहू हीरा तो का तुमहू पीतल के भी लायक नहीं हो”,गोलू ने नवरतन को घर के दरवाजे की तरफ ले जाते हुए कहा
नवरतन ने भी गोलू की बाँह जकड ली और कहा,”अरे नहीं नहीं गोलू ऐसा करोगे का ? हमे है न हमे है विश्वास तुम्हायी बात पर,,,,,,,,,,,,,तुमहू कल जाओ हीरा जी से मिलो ओह्ह्ह से हमाये ब्याह की बात करो बस,,,,,,,,,,,!!!”

“जायेंगे कैसे जाने के लिए खर्चा पानी भी तो लगता है,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने अपनी गर्दन खुजाते हुए कहा
“हाँ हाँ हाँ तो हम देते है ना तुमको,,,,,,,,ये लो”,नवरतन ने अपनी जेब से मुड़े तुड़े नोट निकालकर गोलू के हाथ में थमाकर कहा
गोलू ने पैसे लिए जेब में रखे और कहा,”अब निकलो यहाँ से 4 दिन बाद आकर हमसे मिलना ओह्ह्ह के बाद तो ‘मैं सेहरा बाँध के आऊंगा”
नवरतन ने सुना तो मारे ख़ुशी के उसके बदन में झुरझुरी सी होने लगी और वह शरमाते हुए वहा से भाग गया।

 कहा नवरतन गोलू को मारने के इरादे से आया था और कहा गोलू ने उस से पैसे ऐंठकर उसे फिर बेवकूफ बना दिया। नवरतन के जाने के बाद गोलू जैसे ही पलटा उसके चेहरे से ख़ुशी गायब हो गयी। सीढ़ियों पर खड़े गुप्ता जी उसे ही घूर रहे थे। गोलू झेंपते हुए उनके सामने आ खड़ा हुआ तो गुप्ता जी ने कहा,”गुडडुआ के साथ मिलकर कांड करते थे उह्ह्ह का कम थे जो अब लोगो को बेवकूफ बनाकर उनसे पैसे लेना भी शुरू कर दिया”

“अरे पिताजी उह्ह्ह तो हमाओ पुराना हिसाब रहय नवरतन के साथ वही वापस किया है उसने,,,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने कहा
गुप्ता जी नीचे आये और गोलू का कान पकड़कर उसे आगे पीछे करते हुए कहा,”जे सर और दाढ़ी के बाल ना धुप मा सफ़ेद नाही किये है हमने , पुरे कानपूर को पगला सकते हो हमको नाही,,,,,,,,अंदर जाकर नहाय ल्यो तबेले मा पड़े गोबर के जइसन बास मार रहे हो”

बेचारा गोलू सब जगह बड़ी बड़ी बाते कर सकता था , धौंस जमा सकता था लेकिन बेचारे की अपने ही घर में कोई इज्जत नहीं थी और गुप्ता जी के सामने तो बिल्कुल नहीं।
गोलू ने अपने ही शर्ट को सूंघकर देखा और अगले ही पल उलटी वाला मुँह बनाते हुए बाथरूम की तरफ बढ़ गया। मंगल फूफा भी गुप्ता जी से नजरे बचाकर वहा से चले गए और गुप्ता जी इधर उधर देखकर वापस अंदर चले गए

मिश्रा जी का घर , कानपूर
“क्या हुआ प्रीति तुम हमे कहा लेकर जा रही हो ?”,सीढ़ियों से ऊपर जाती वेदी ने प्रीति से पूछा जिसने वेदी का हाथ थामा हुआ था। सभी नीचे थे और प्रीति वेदी को लेकर छत पर चली आयी।
“अरे बताओ भी तुम हमे यहाँ क्यों लेकर आयी हो ? सब तो नीचे है”,वेदी ने हैरानी से कहा
प्रीति ने उसका हाथ घुमाकर उसे अमन की तरफ किया जो कि छत पर वेदी का इंतजार कर रहा था।

अमन को वहा देखते ही वेदी का दिल धड़क उठा और वह शरमाकर जाने लगी। प्रीति ने वेदी को रोका और कहा,”अरे कहा जा रहे हो ? बेचारा मेरा भाई तुम से बात करने आया है और तुम भाग रही हो , वैसे भी आज रात हम सब वापस जाने वाले है तो जाने से पहले बात कर लो फिर तो सीधा शादी में ही मिल पाओगी”
वेदी ने सुना तो अमन की तरफ देखा और जवाब में अमन ने भी हामी में गर्दन हिला दी। प्रीति ने जाते जाते वेदी के कंधे को अपने कंधे से टकराया और धीरे से कहा,”शादी से पहले तुम्हारा अमन के साथ कुछ तो स्पेशल मोमेंट होना चाहिए ना”

“धत बेशर्म”,वेदी ने कहते हुए धीरे से प्रीति की बाँह पर मारा तो प्रीति हँसते हुए वहा से चली गयी।  
वेदी और अमन अब आमने सामने थे कुछ महीनो बाद दोनों की शादी होने वाली थी और इस वक्त सगाई की अँगूठिया दोनों की उंगलियों में चमक रही थी। वेदी पलकें झुकाये अमन के सामने खड़ी थी और अमन मुस्कुराते हुए प्यार से वेदी को देख रहा था। कुछ देर बाद वेदी ने पलकें उठाकर अमन को देखा और फिर दिवार की तरफ चली आयी। अमन भी वेदी के बगल में चला आया तो वेदी ने कहा,”तुमने हमे यहाँ क्यों बुलाया , नीचे सबको पता चला तो क्या सोचेंगे ?

“इसमें क्या सोचना है ? हमारी सगाई हो चुकी है शादी होने वाली है और वैसे भी जब से मैं यहाँ आया हूँ तुमने मुझसे ठीक से बात तक नहीं की”,अमन ने प्यार से शिकायती लहजे में कहा
“कैसे करते ? नीचे सब है अम्मा पिताजी लवली भैया गुड्डू भैया भाभी और फिर तुम्हारे घरवाले भी तो है , अब क्या उनके सामने तुमसे बात करे”,वेदी ने भी उसी शिकायती लहजे में कहा

अमन ने वेदी की तरफ देखा और मुस्कुरा कर कहा,”क्यों नहीं कर सकती ?”
“हमे शर्म आती है , पता है आज सबके बीच जाने में भी कितनी शर्म लग रही है हमे”,वेदी ने कहा
“आज इस साड़ी में बहुत सुन्दर लग रही हो तुम”,अमन ने कहा
वेदी ने सुना तो अमन की तरफ देखकर मुस्कुरा दी और फिर एकदम से कहा,”अच्छा तुम हमारे लिए कुछ तोहफा लाने वाले थे , बताओ कहा है ?”

अमन वेदी के सामने आया अपनी जेब से एक छोटी सी डिब्बी निकाली और एकदम से उसके सामने बैठ गया , उसने अपना एक घुटना जमीन पर टिकाया और दूसरे घुटने को हाथ से छूकर कहा,”वेदी अपना पैर यहाँ रखो”
वेदी ने चप्पल निकाला और अपना पैर अमन के घुटने पर रख दिया , अमन ने डिब्बी में रखी महीन पायल निकाली और वेदी के पैर में पहना दी ये देखकर वेदी मुस्कुरा उठी। अमन ने उसके दूसरे पैर में भी पायल पहना दी और उठकर कहा,”कैसा लगा मेरा तोहफा ?”

“ये तो बहुत सुन्दर है”,वेदी ने खुश होकर कहा
“और मेरा तोहफा ?”,अमन ने वेदी के सामने अपनी हथेली करके कहा
“हम तो तुम्हारे लिए कुछ लेना भूल ही गए”,वेदी ने मायूसी भरे स्वर में कहा
अमन ने दोनों हाथो को बाँधा और वेदी की तरफ देखकर कहा,”वैसे तुम चाहो तो मुझे कुछ और भी दे सकती हो”
“क्या ?”,वेदी ने पूछा

अमन ने वेदी की तरफ देखते हुए अपनी ऊँगली से अपने गाल को छुआ ये देखकर वेदी शरमा गयी और अमन को साइड में धकियाकर वहा से जाते हुए कहा,”धत बेशर्म”
अमन मुस्कुराने लगा , वेदी जाते जाते रुकी और वापस आकर अपने होंठो से अमन के गाल को छुआ और वहा से चली गयी और पीछे छोड़ गयी शर्म से लाल होते अमन को  

 ऊपर अपने कमरे के बाहर हॉल की बालकनी में खड़ा लवली फोन कान से लगाये यहाँ वहा चक्कर काट रहा था।
“जे मनोज को का हुई गवा , उह्ह हमरा फोन काहे नाही उठा रहा है ?”,बड़बड़ाते हुए लवली ने एक बार फिर मनोज का नंबर डॉयल किया और चक्कर काटने लगा। वेदी नीचे जा चुकी थी और अमन छत पर था। गुड्डू को ढूंढते हुए प्रीति वहा आ पहुंची और एक बार फिर वह गुड्डू और लवली में उलझ गयी। उसे लगा बालकनी में फोन कान से लगाए गुड्डू खड़ा है।

वह लवली की तरफ आयी और जैसे ही लवली पलटा प्रीति ने उसे धप्पा कहा और लवली चौंक गया जिस से उसका फोन हाथ से फिसलकर वही पास पड़े पानी के टप में जा गिरा। लवली ने देखा फोन पानी में गिर गया है तो उसके चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये उसने प्रीति की तरफ देखा और गुस्से से कहा,”ये क्या बचपना है ? अकल नहीं है तुम मा , हमाओ फोन पानी मा गिराय दी। गुड्डू की साली हो हमायी नाही हमसे जे हंसी ठिठोली करने की कोनो जरूरत नाही है समझी तुम,,,,,,,,,,तुम्हायी अम्मा ने तुमको कुछो सिखाया है भी के नाही ?”

गुस्से गुस्से में लवली जो मुँह में आया वो बोलता चला गया और प्रीति ख़ामोशी से सुनती रही , उसकी आँखों में आँसू भर आये। वह गुड्डू समझकर जिसके पास आयी थी वह लवली था और जैसे ही लवली ने माँ का नाम लिया प्रीति के दिल में एक टीस उठी ,, अब तो कोई सामने कोई और होता तो प्रीति उस से लड़ जाती लेकिन सामने लवली था इसलिए वह कुछ बोल ही नहीं पायी।  

प्रीति को खामोश देखकर लवली ने पानी से अपना फोन निकाला और वहा से चला गया उसी वक्त गुड्डू वहा आ पहुंचा लवली के आखरी शब्द उसके कानो में पड़ चुके थे इसलिए वह जल्दी से प्रीति के पास आया और कहा,”प्रीति ! प्रीति का हुआ , तुम ठीक हो ना ? लवली भैया इत्ता गुस्से मा काहे है , तुम कुछ कह दी का उनसे ?”
प्रीति ने एक नजर गुड्डू को देखा और वहा से चली गयी लेकिन उसकी आँखों में आँसू देखकर गुड्डू का मन बैचैन हो गया।

( क्या नवरतन समझ पायेगा गोलू की चालाकी या बन जाएगा इस बार भी बेवकूफ ? आखिर क्यों नहीं सुधर पा रहा गोलू क्या उसे जरूरत है मिश्रा जी के ट्रीटमेंट की ? क्या गुड्डू समझा पायेगा प्रीति को लवली का स्वाभाव ? जानने के लिए पढ़ते रहिये मनमर्जियाँ सीजन 4 मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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