Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 56

by Story With Sanjana April 16, 2026
written by Story With Sanjana April 16, 2026 2 comments
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Pasandida Aurat Season 2 – 56

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

अवनि सुरभि को साथ लेकर पृथ्वी की तरफ चल पड़ी। चलते चलते अवनि का फोन बजा स्क्रीन पर एक जाना पहचाना नंबर देखकर अवनि ने सुरभि से आगे चलने को कहा और खुद साइड में आकर बात करने लगी। सुरभि ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और ख़ुशी ख़ुशी पृथ्वी की तरफ बढ़ गयी। पृथ्वी के पास आकर सुरभि ने देखा कि पृथ्वी बहुत ही ध्यान से सामने देख रहा है। सुरभि को अजीब लगा , वह पृथ्वी के बगल में आकर खड़ी हुई और सामने देखा तो हैरानी से उसकी आँखे फ़ैल गयी और मुँह खुला का खुला रह गया।

सामने एक कपल हाथो में हाथ डाले बैठा था और दोनों के होंठ एक दूसरे की गिरफत में थे , उन्हें ना आस पास के लोगो की फ़िक्र थी ना ही दुनिया जहा की , वे दोनों तो बस एक दूसरे से अपना प्यार जाहिर करने में व्यस्त थे। पृथ्वी एकटक सामने देखे जा रहा था और सुरभि पृथ्वी को ऐसे देखकर हैरान थी।
पृथ्वी ने महसूस किया उसके बगल में कोई है तो उसने गर्दन घुमाकर देखा सुरभि बड़ी हैरानी से उसे ही देख रही थी ये देखकर पृथ्वी ने अपनी भँवे उचकाई।

“तुम कितने बेशर्म हो पृथ्वी”,सुरभि ने पृथ्वी को घूरकर देखते हुए कहा
“मैंने क्या किया ?”,पृथ्वी ने पूछा
सुरभि ने सामने एक दूसरे में डूबे कपल की तरफ इशारा करके कहा,”तुम उन्हें इतना ध्यान से क्यों देख रहे हो ? अच्छा लगता है किसी के प्राइवेट मोमेंट को ऐसे देखना”
पृथ्वी ने सुरभि की ऊँगली की दिशा में देखा तो उसकी नजर किस करते कपल पर पड़ी और उसने जल्दी से नजरे हटाकर कहा,”छी छी ये क्या दिखा रही हो तुम मुझे ?”

“वाह वह वाह कितने मासूम बन रहे हो तुम , अभी कुछ देर पहले तुम खुद कैसे उन्हें घूरकर देख रहे थे”,सुरभि में अपनी कमर पर हाथ रखकर पृथ्वी की तरफ बढ़ते हुए कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसे समझ आया कि सुरभि उसे गलत समझ रही है इसलिए उसने सुरभि की कुर्ती की बाजु पकड़ी और उसे अपनी जगह लाकर सामने देखने का इशारा किया। सुरभि ने सामने देखा तो पाया कपल के ठीक पीछे साड़ियों की एक बड़ी सी दुकान थी और शीशे में लगे स्टेच्यू ने बहुत ही सुन्दर साड़ी पहनी थी।

पृथ्वी उसे देख रहा था ना कि कपल को , सुरभि को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उसने पृथ्वी की तरफ देखा और झेंपकर कहा,”तुम वो साड़ी देख रहे थे ?”
“हाँ,,,,,अवनि अगर उसे पहनेगी तो कितनी अच्छी लगेगी उस साड़ी में,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने स्टेच्यू को देखकर बड़े प्यार से कहा
“अह्ह्ह्हह वहा मैं अवनि को रोमांस का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रही हूँ और यहाँ इस कछुआराम के ख्याली पुलाव ही ख़त्म नहीं हो रहे,,,,,,,!!!”,सुरभि बड़बड़ाई

“तुमने कुछ कहा ?”,पृथ्वी ने पूछा  
“अह्ह्ह नहीं ! मैं क्या कहूँगी ? वैसे तुम्हारी पसंद कुछ ज्यादा पुरानी नहीं है , आई मीन लड़के अपनी वाइफ के लिए शार्ट ड्रेस , नाईट ड्रेस , वन पीस खरीदते है और तुम साड़ी की बातें कर रहे हो”,सुरभि ने पृथ्वी को ताना मारकर कहा
“मैंने अवनि को आज तक कभी साड़ी में नहीं देखा,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने मासूमियत से कहा

“क्या लड़का है यार ? एक तो वो बोरिंग अवनि और दूसरा ये महान आदमी ,, अरे ऐसा ही रहा तो तुम दोनों की कहानी आगे कैसे बढ़ेगी ?”,सुरभि फिर बड़बड़ाई इसी के साथ उसके चेहरे पर अफ़सोस के भाव भी उभर आये
“ये तुम जब देखो तब खुद से क्या बात करने लगती हो , और अवनि कहा है ?”,पृथ्वी ने इधर उधर देखते हुए पूछा
“वो रही तुम्हारी अवनि”,सुरभि ने सामने से आती अवनि की तरफ इशारा करके कहा
“एक बार फिर से कहना”,पृथ्वी ने खुश होकर कहा

“क्या ?”,सुरभि ने हैरानी से पूछा
“वही जो अभी तुमने कहा”,पृथ्वी की आँखों से ख़ुशी अभी भी झलक रही थी
“वो रही तुम्हारी अवनि”,सुरभि ने पृथ्वी को घूरते हुए एक एक शब्द पर जोर देकर कहा
“हाये ! कितना अच्छा लगता है ना ये सुनना ‘तुम्हारी अवनि”,पृथ्वी ने बच्चो की तरह खुश होकर कहा
“तुम तो उसके प्यार में पुरे पागल हो चुके हो पृथ्वी”,सुरभि ने कहा तब तक अवनि भी उन दोनों के पास चली आयी और कहा,”कौन पागल हो गया है ?”

“ये तुम्हारे पूकीराम , इन्ही से पूछ लो”,कहकर सुरभि आगे बढ़ गयी।
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर अपनी भँवे उचकाई तो पृथ्वी ने मुस्कुरा कर ना में गर्दन हिला दी और अवनि से चलने का इशारा किया

अवनि और पृथ्वी साथ साथ चलने लगे और सुरभि उन दोनों से 10 कदम आगे चलने लगी। चलते चलते सुरभि ने जैसे ही पलटकर देखा अवनि ने एकदम से अपने  दोनों हाथो से पृथ्वी की बाँह थाम ली और उस से सटकर चलने लगी। सुरभि हल्का सा मुस्कुराई और आगे बढ़ गयी। दूसरी और बेचारा पृथ्वी अपनी बढ़ी हुई धड़कनो को सामान्य करने की कोशिश कर रहा था क्योकि अवनि से ये सब हरकतों की उम्मीद उसे बिल्कुल भी नहीं थी।

तीनो साऊथ मुंबई की सबसे फेमस जगह चले आये जहा खाने के कई रेस्त्रो और होटल्स थे। इसी रास्ते पर था “वर्सोनावा बार” जहा से नशे में धुत्त प्राची बाहर निकली थी। पृथ्वी सुरभि और अवनि से बातें करते हुए चला जा रहा था उसने सामने से आती प्राची पर ध्यान नहीं दिया। सामने से आती प्राची नशे में थी और चलते चलते सुरभि से टकरा गयी जिस से उसके हाथ में पकड़ी बियर सुरभि के कपड़ो पर आ गिरी।

“अंधी हो क्या ? देखकर नहीं चल सकती , पूरी ड्रिंक गिरा दी मुझपर,,,,,,,,,,,,मुंबई में क्या लोगो को चलने की तमीज नहीं है”,सुरभि ने गुस्से से कहा
“सॉरी बेब;’,प्राची ने नशे के उन्मांद में कहा। पृथ्वी ने जैसे ही सुना हैरानी से प्राची की तरफ देखा , प्राची का इस वक्त यहाँ होना बड़ी बात नहीं थी बल्कि बड़ी बात थी उसका इस हाल में अकेले यहाँ होना।
अवनि ने देखा सुरभि गुस्से में है तो वह उसके पास आयी और कहा,”जाने दो सुरभि ! इस वक्त ये होश में नहीं है,,,,,,,,,,!!!”

“अरे क्या जाने दो अवनि देखो ना इसने मेरी ड्रेस खराब कर दी,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने रोआँसा होकर कहा
प्राची ने अभी तक पृथ्वी को देखा नहीं था इसलिए अपने क्लच से कुछ नोट निकाले और सुरभि के हाथ में थमाकर कहा,”ये लो पैसे दूसरा खरीद लेना”
ड्रेस खराब होने की वजह से सुरभि पहले ही प्राची से चिढ़ी हुई थी उस पर प्राची ने पैसे देकर सुरभि का गुस्सा और भड़का दिया।

उसने उन नोटों को प्राची की तरफ फेंककर कहा,”ये पैसे का रौब कही और जाकर दिखाना समझी,,,,,,,,,तुम जैसी आमिर बाप की बिगड़ी हुई औलादो को यही आता है,,,,,,,पहले गलती करो और फिर पैसे का रौब दिखा दो”
“यू बिच,,,,,,,,,,तुम जानती भी हो मेरा बाप कौन है ?”,प्राची ने लड़खड़ाते हुए गुस्से से कहा
और ये कहते हुए उसने जैसे ही सुरभि को मारने के लिए अपना हाथ हवा में उठाया पृथ्वी ने आगे आकर प्राची के हाथ को थाम लिया और कहा,”ये नहीं जानती पर मैं जानता हूँ आपका बाप कौन है ?”

पृथ्वी को अपने सामने देखकर प्राची का गुस्सा एकदम से शांत हो गया और उसने मुस्कुरा कर कहा,”ओह्ह्ह पृथ्वी ! तुम यहाँ ? व्हाट अ प्लेजेंट सरप्राइज”
पृथ्वी ने धीरे से प्राची के हाथ को नीचे किया और सहजता से कहा,”मेम ! आप इस वक्त होश में नहीं है आपने बहुत ज्यादा शराब पी रखी है। क्या मैं आपके लिए कैब बुक कर दू ?”
पृथ्वी के मुँह से प्राची के लिए मेम सुनकर अवनि और सुरभि ने हैरानी से एक दूसरे को देखा लेकिन दोनों खामोश रही

“क्यों पृथ्वी ! कैब क्यों ? क्या तुम मुझे घर तक नहीं छोड़ सकते ?”,प्राची ने नशे के उन्मांद में उदास होकर कहा
“आई ऍम सॉरी मेम ! मैं यहाँ अपनी पत्नी और दोस्त के साथ आया हूँ और मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकता,,,,,,,,,मैं आपके लिए कैब बुक कर देता हूँ या फिर आपके मैनेजर नीलेश को इन्फॉर्म कर देता हूँ वे आपको घर छोड़ देंगे”,पृथ्वी इस बार भी सहजता से कहा हालाँकि प्राची से बात करना उसे जरा भी पसंद नहीं था।

प्राची ने जैसे ही सुना कि पृथ्वी अपनी पत्नी के साथ आया है तो उसकी उदासी एकदम से जलन और चिढ में बदल गयी , उसने पृथ्वी को साइड किया और कहा,”मुझे तुम्हारा ये अहसान नहीं चाहिए मैं खुद चली जाउंगी”
पृथ्वी कुछ कहता इस से पहले प्राची वहा से आगे बढ़ गयी। अवनि ने जाती हुई प्राची को देखा और पृथ्वी के पास आकर कहा,”पृथ्वी ! क्या तुम उन्हें जानते हो ?’
“हाँ वो मिस्टर देसाई की बेटी है , प्राची देसाई”,पृथ्वी ने बिना किसी भाव के कहा

अवनि ने सुना तो उसे याद आया ये वही लड़की थी जिसके साथ पृथ्वी ने मीटिंग केंसल की थी और उसके बाद काफी ड्रामा हुआ भी हुआ था। उसने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”तुम्हे उन्हें ऐसे अकेले जाने देना नहीं चाहिए,,,,,,,,,,!!!”
“अवनि ! वो मेरी रिश्तेदार नहीं लगती है जो मैं उसके लिए परवाह दिखाऊ”,पृथ्वी ने पहली बार अवनि से चिढ़कर कहा

“रिश्तेदार नहीं है पर वो एक लड़की है पृथ्वी और इस वक्त बहुत नशे में है , देखो वो ठीक से चल भी नहीं पा रही है ऐसे में उसके साथ कोई दुर्घटना हो गयी तो कौन जिम्मेदार होगा ?”,अवनि ने पृथ्वी को समझाया
“मैं तो बिल्कुल जिम्मेदार नहीं होने वाला अवनि  और तुम ना ये जरूरत से ज्यादा अच्छा बनना बंद करो वरना किसी दिन तुम्हारा ये अच्छापन तुम्हे किसी बड़ी मुसीबत में डाल देगा”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने सुना तो उसे बुरा लगा , उसका अच्छा होना उसकी कमजोरी नहीं बल्कि उसका स्वाभाव था और फिर अवनि प्राची के इरादों से भी कहा वाकिफ थी वह तो बस इस वक्त उसमे एक अकेली मजबूर लड़की देख पा रही थी।
अवनि को ख़ामोशी से अपनी ओर घूरते पाकर पृथ्वी ने झुंझलाकर सुरभि से कहा,”अरे यार सुरभि ! समझाओ अपनी दोस्त को , हर जगह अच्छा बनना जरुरी नहीं होता,,,,,,,,,,,,,,!!!”

“अवनि,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने अवनि की बांह छूकर कहा तो अवनि ने अपनी बाँह झटकी और वहा से चली गई।  शादी के बाद पहली बार पृथ्वी अवनि की किसी बात पर चिढ़ा था और अवनि भी पहली बार पृथ्वी से गुस्सा हुई थी। पृथ्वी ने देखा कुछ दूर अवनि अपने दोनों हाथो को बांधे खड़ी है और उसे चेहरे से साफ जाहिर हो रहा था कि वह पृथ्वी से गुस्सा है।
“तुम्हे उस लड़की की मदद करने में क्या प्रॉब्लम है पृथ्वी ? हाँ ! वैसे वो है तो बहुत ही बद्तमीज लेकिन इस वक्त वो बहुत ही नशे में है तुम्हे जाना चाहिए”,सुरभि ने कहा

पृथ्वी ने सुना तो सुरभि को घुरा और कहा,”मैं पूरी मुंबई की हेल्प करने के लिए तैयार हूँ लेकिन उसकी नहीं करूंगा”
“लेकिन क्यों , ऐसा तो क्या हो गया ?”,सुरभि ने कहा
“वो मैं तुम्हे नहीं बता सकता,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“ठीक है तो फिर जाकर अपनी मैडम जी को मनाओ , मुझे बहुत भूख लगी है मैं जा रही हु अंदर”,कहकर सुरभि ने सामने बने रेस्टोरेंट की तरफ इशारा किया और वहा से चली गयी।

अवनि पृथ्वी से नाराज होकर खड़ी थी , सुरभि भी वहा से चली गयी। पृथ्वी ने सर उठाकर आसमान की तरफ देखा और धीरे से कहा,”परेशान करने के लिए आपको हर बार मैं ही मिलता हूँ,,,,,,,,,,नहीं आप बताओ मैने क्या गलत बोला ? आपकी वो प्यारी अवनि , मतलब हमारी उसे इतना अच्छा बनने की क्या जरूरत है। इस सड़क पर 100 लोग नशे में घूम रहे है तो क्या अब मैं सबको घर छोड़ने जाऊ , मैं यहाँ उसके साथ आया हूँ फिर मैं उसे अकेला छोड़कर कैसे जा सकता हूँ ? हाह ! मैं भी किस से शिकायत कर रहा हूँ कौनसा मेरी सुनते हो आप ? जा रहा हूँ उसे मनाने,,,,,,,,,,!!!”

कहकर पृथ्वी ने दो चार गहरी साँस ली और अवनि की तरफ चला आया। वह अवनि से कुछ दूरी बनाकर खड़ा हो गया और कहा,”अवनि,,,,,,,,!!!”
अवनि पृथ्वी की तरफ पीठ किये खड़ी थी वह उसकी तरफ पलटी और कहा,”तुम्हे क्या लगता है पृथ्वी मैं बेवकूफ हूँ ?”
“अरे नहीं ! किसने कहा ऐसा ?”,पृथ्वी ने ऐसे कहा जैसे कुछ हुआ ही ना हो जिस से अवनि और चिढ गयी और पृथ्वी के पास आकर कहा,”क्या कहा तुमने कि मेरा अच्छापन मुझे मुसीबत में डाल देगा और तुम मुझ पर चिल्लाये भी”

“अरे बेटा ! मैं कहा तुम पर चिल्लाया मैं तो,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने प्यार से कहा लेकिन अवनि गुस्सा थी इसलिए कहा,”हाँ तुम तो कुछ करते नहीं हो सारी गलती तो मेरी है , मैंने तुमसे उनकी हेल्प करने को कहा तो तुम चिढ गए , उसकी जगह मैं होती तब भी क्या तुम यही करते ?”
पृथ्वी ने सुना तो उसके चेहरे पर थोड़े गंभीर भाव आये और उसने कहा,”अवनि ! खुद को उस से कम्पेयर मत करो ,, तुम उसकी जगह नहीं हो सकती”

अवनि ने सुना तो पृथ्वी को देखने लगी और फिर धीरे से कहा,”तुम्हे इतना कठोर भी नहीं होना चाहिए पृथ्वी,,,,,,,,,,!!!”
“अच्छा ठीक है सॉरी”,पृथ्वी ने कहा
“मुझे नहीं चाहिए”,अवनि ने उदास होकर कहा और दूसरी तरफ देखने लगी अगले ही पल उसके कानों में पृथ्वी की आवाज पड़ी,”एक , दो , तीन , चार,,,,,,,,!!!”

अवनि ने गर्दन घुमाकर देखा तो पाया पृथ्वी अपने दोनों कान पकड़कर उठक बैठक लगा रहा था , आस पास मौजूद लोग पृथ्वी को देख रहे थे लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। अवनि ने देखा तो पृथ्वी के पास आयी और उसे रोकते हुए कहा,”मैंने ये सब करने को नहीं कहा था पृथ्वी,,,,,,,,,,!!!”
“मेरा मन था,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए कहा
“चलो यहाँ से,,,,,,,!!”,कहते हुए अवनि उसी रेस्त्रो की तरफ बढ़ गयी जिसमें सुरभि गयी थी। पृथ्वी भी मुस्कुराते हुए अवनि के पीछे चल पड़ा और गुनगुनाया

“डरता जहा हम से , हम तोसे डरते ये सब जाने मोरी रनिया हाये”
अवनि ने सुना तो पलटकर हैरानी से पृथ्वी को देखा और पृथ्वी अपनी गर्दन सहलाते हुए साइड में देखने लगा ये देखकर अवनि मुस्कुरा दी और आगे बढ़ गयी

पृथ्वी अवनि के साथ उसी रेस्त्रो के बाहर चला आया जिसमे सुरभि गयी थी। उसने अवनि से अंदर चलने को कहा और खुद अपने फोन से किसी का नंबर डॉयल करने लगा। पृथ्वी ने फोन पर किसी से बात की और फिर खुद भी अंदर चला आया। अंदर आकर पृथ्वी सुरभि और अवनि की तरफ चला आया। 

वह अवनि के बगल में आ बैठा और कहा,”तुम दोनों ने कुछ आर्डर किया ?”
“नहीं ! तुम्हारा इंतजार कर रहे थे,,,,,,,हम्म्म”,अवनि ने मेनू कार्ड पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा
पृथ्वी ने मेनू सामने बैठी सुरभि की तरफ बढ़ाया और कहा,”तुम आर्डर करो,,,,,,,,,!!”
सुरभि ने तीनो के लिए खाना आर्डर किया और फिर बैठकर बातें करने लगे। कुछ देर बाद खाना आया और तीनो ने साथ मिलकर खाया।

अवनि ख़ामोशी से अपना खाना खा रही थी बस सुरभि और पृथ्वी ही कुछ न कुछ बात किये जा रहे थे। अवनि के जहन में अभी भी प्राची का नशे में लड़खड़ाना चल रहा था। ना चाहते हुए भी उसे प्राची की परवाह हो रही थी।  पृथ्वी ने अवनि को परेशान देखा तो अपना हाथ धीरे से उसके हाथ पर रखा और उसकी तरफ देखकर अपनी पलकें झपका दी जैसे वह अवनि के मन की परेशानी भाँप गया हो।

खाना खाकर पृथ्वी ने बिल पे किया और तीनो बाहर चले आये। रात के 11 बज रहे थे और बाहर मौसम भी काफी सुहावना हो चला था। हलकी ठंडी हवाएं और आसमान में चमकता चाँद बेहद खूबसूरत लग रहा था। सुरभि के कहने पर अवनि उसकी कुछ फोटो क्लिक करने लगी। पृथ्वी ने साइड में आकर कैब बुक करने के लिए अपना फोन निकाला और अगले ही पल उसका फोन बजा। स्क्रीन पर मिस्टर देसाई का नाम देखकर पृथ्वी को हैरानी हुई उसने फोन उठाया और कान से लगाकर कहा,”हेलो,,,,,,,,,,!!!”

“हेलो मिस्टर पृथ्वी ! सॉरी मैंने इस वक्त तुम्हे फोन किया ,, क्या प्राची तुम्हारे साथ है ?”,मिस्टर देसाई ने पूछा
मिस्टर देसाई का सवाल सुनकर पृथ्वी को थोड़ा अजीब लगा आखिर उन्हें ऐसा क्यों लगा कि प्राची उसके साथ होगी ?  

( क्या पृथ्वी करेगा अवनि को साड़ी गिफ्ट और अवनि पहनेगी उसे ? क्या पृथ्वी करेगा प्राची की मदद या छोड़ देगा उसे उसके हाल पर ? आखिर क्यों हर बार अवनि के सामने पिघल जाता है पृथ्वी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” सीजन 2 मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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2 comments

Kshmata Chauhan April 16, 2026 - 2:31 pm

Yeh baap beti milkar koi khel to nhi kel rhe hai Prithvi k sath…waise esa hai to nhi…quki Prachi to khud nashe m hai, wo kya planing karengi apne papa k sath milkar…lakin mr.desai ne Prithvi ko hee pho kyu kiya…badi baat yeh bhi ki Prachi hai kaha…kahin Vikram Kapoor ne usko kidnap to nhi kar liya…ya fir wo kahin pe talli padi hai.

Reply
Saurabh Agnihotri April 16, 2026 - 3:57 pm

i think she’s with Neelesh, His Personel Secreatery. Mujhe lag rha hai Prathvi ne use hi phone karke bataya tha.

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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