Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 11

by Story With Sanjana July 18, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 11

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गुप्ता जी से थप्पड़ खाकर गोलू सोफे पर जा गिरा उसे समझ नहीं आया कि उसने क्या गलत बोला। वह उठने को हुआ तभी उसकी नजर सोफे के सामने पड़ी टेबल पर रखे चाय के कप पर पड़ी। गोलू ठहरा चाय प्रेमी उसने चाय का कप उठाया और वही बैठकर ख़ुशी ख़ुशी पीने लगा और अपने ही घर में चल रहा तमाशा देखने लगा। गुप्ता जी रूपा को समझाने लगे और वही मंगल फूफा गुप्ता जी से उलझ गए। तीनो आपस में क्या बोल रहे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

गुप्ताइन गुप्ता जी के लिए चाय रख के गयी थी अब उनके लिए नाश्ता लेकर आयी लेकिन जब गुप्ता जी , मंगल फूफा और रूपा को आपस में उलझे देखा तो चिल्लाकर कहा,”इह सब का हो रहा है , काहे हमाये घर को सब्जी मार्किट बनाये हुए है आप तीनो ?”
गुप्ता जी ने सुना तो गुप्ताइन की तरफ आकर बोले,”जे डायलॉग सुबह तो याद ना आया तोह का गोलू की अम्मा”
“अरे भाड़ मा गवा डायलॉग इह बताओ आप और उह्ह्ह मंगल फूफा रूपा के पीछे काहे पड़े है ?”,गुप्ताइन ने गुप्ता जी को झिड़क कर कहा

“राम राम राम राम का कह रही हो गुप्ताइन , अरे हम काहे पीछे पड़ेंगे उनके ? हम तो ओह्ह का समझा रहे है कि हिया से ना जाए मंगल के साथ जो भी  गलतफहमी है उह्ह बैठ के सुलटाय ले लेकिन उह्ह्ह कुछो सुनने को तैयार ही नाही है,,,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा
“अरे एक औरत के मन की बात दूसरी औरत ही समझ सकती है , मर्दो के बस का काम नाही है जे,,,,,,,,,,परे हटिये हम बात करते है”,कहकर गुप्ताइन ने नाश्ते की प्लेट गुप्ता जी को थमाई और रूपा की तरफ चली आयी

“ए रूपा ! हिया तुमको कोनो परेसानी है का ? देखो हमाये मंगल फूफा तुमको हिया लेकर आये तो अब इह हम सबकी जिम्मेदारी है कि तुमको हिया किसी तरह की कोनो तकलीफ ना हो। का बात है हमे बताओ ? हम अबही सुलोचन देते है”,गुप्ताइन ने कहा
“सुलोचन नाही सोलुशन”,मंगल फूफा ने बीच में टोका

गुप्ताइन भी बोलना तो सोलुशन ही चाहती थी लेकिन उनकी अंग्रेजी में थोडी गड़बड़ थी लेकिन जैसे ही मंगल फूफा बीच में बोले गुप्ताइन ने घूरकर गुस्से से कहा,”तुमहू मास्टर लगे हो अंग्रेजी के , एक काम करो खुद ही समझाय ल्यो”
“नहीं नहीं आप बात कीजिये ना”,मंगल फूफा ने झेंपते हुए कहा तो गुप्ताइन रूपा की तरफ पलटी और कहा,”हाँ रूपा ! बताओ का तकलीफ है तुमको हिया ?”

“हमको तकलीफ जे घर से नाही बल्कि सामने वाले घर की फुलवारी से है जिसका नाम सुन सुन के हमाये कान दुखने लगे है”,रूपा ने अपने कानो पर हाथ रखकर कहा जैसे सच में उसके कान दर्द कर रहे हो
“अच्छा फुलवारी ! अरे तुम काहे ओह्ह्ह की चिंता कर रही हो अच्छी औरत है उह्ह , पहिले पहिले हमको भी गड़बड़ लगी ओह्ह्ह मा पर देखो हमाये गोलू के पिताजी का अब ओह्ह्ह के साथ कोई रिश्ता नाही है,,,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ताइन ने कहा

गुप्ता जी ने सुना तो भड़ककर बोले,”अरे अब नहीं है से का मतलब है तुम्हरा पहले कौनसा ओह्ह के घर मा बैठकर ओह्ह्ह के भैंसिया के दूध की खीर खायी है हमने ?”
“हाँ हाँ वही मतलब इनका उनसे कोई चक्कर नाही है लेकिन जे मंगल फूफा इनकी गारंटी हम नाही ले सकते”,कहकर गुप्ताइन ने अपनी आँखे मटकाई और दोनों हाथ हवा में उठा दिए।
गुप्ताइन की बात सुनकर रूपा मंगल फूफा को घूरने लगी तो मंगल फूफा दर्द और तकलीफ से भरकर चिल्लाये,”लगा दी हमायी जिंदगी मा आग”

गुप्ताइन ने सुना तो मंगल फूफा की तरफ पलटकर कहा,”हम का आग लगाएंगे मंगल फूफा आप ही तो कह रहे थे उह्ह दिन कि फूल के बारे में कुछो कहा तो आपसे बुरा कोई ना होगा,,,,,,,,,,,कबो फूल कबो रूपा इह सब का छिनरई है फूफा,,,,,,,,,इह से अच्छा तो आप बीहड़ मा वापस चले जाओ”
गुप्ताइन ने मंगल की उम्मीद को पैरों से रौंदा और जाने लगी तो गुप्ता जी ने कहा,”अरे खाली नाश्ता दे दी हमका , चाय काहे नाही दी ?”

“चाय टेबल पर रख के तो गए थे,,,,,,पर आपका ध्यान हो तब ना,,,,,,,,,,पतो नाही इह घर के मर्द कब सुधरे है”,कहते हुए गुप्ताइन वहा से चली गयी।
गुप्ता जी ने देखा टेबल पर कोई चाय नहीं है जबकि साइड में बैठा गोलू मजे से चाय पी रहा था तो उन्होंने कहा,”जे कहा से ली बे तुमने ?”
“वो पिताजी हिया टेबल पर रखी थी तो हमने सोचा पी लेते है”,गोलू ने खिंसियकर कहा
“जहर पड़ा होगा तो निगल लोगे ?”,गुप्ता जी ने दाँत पीसकर कहा

गोलू तब तक चाय पी चुका था इसलिए चुपचाप कप रखा और थोड़ा साइड में खिसक गया क्योकि मौत और गुप्ता जी का थप्पड़ उसके गाल पर किसी भी बख्त आ सकता था लेकिन इस बार रूपा ने उसे बचा लिया। रूपा ने जोर से चिल्लाकर गुस्से से कहा,”बस मंगल जी ! बहुत हो गया जे फूल रूपा फूल , अब जब तक इह मामला सुलट नाही जाता तब तक हम हिया नाही आएंगे”

“ऐसा ना कहो रूपा ! अरे भगवान् की कसम हमहू सच कह रहे है फुलवारी से हमरा कोनो रिश्ता नाही”,मंगल फूफा ने गिड़गिड़ाकर कहा
रूपा ने एक नजर मंगल फूफा को देखा और दरवाजे की तरफ बढ़ गयी तो मंगल फूफा ने गुप्ता जी से कहा,”गुप्ता जी ! आप रोकिये ना उसको , अरे कुछ तो कहिये”

“सुनो रूपा”,गुप्ता जी ने कहा तो मंगल फूफा की जान में जान आयी लेकिन ही गुप्ता जी ने उनकी जान निकालकर रूपा से कहा,”तुमहू अकेली मिश्रा के घर कैसे जाहि हो ? रुको हम गोलुआ को साथ भेजते है इह लेकर जाएगा”
 रूपा ने हामी में गर्दन हिला दी और मंगल फूफा ने ये सुना तो गुस्से से गुप्ता जी को घूरने लगा। गुप्ता जी ने मंगल को नजरअंदाज किया और गोलू की गुद्दी पकड़कर उसे दरवाजे की तरफ धकेलकर कहा,”इह का सही सलामत मिश्रा जी के घर पहुचाय दयो”

“ऐसे जाए ? कपडे तो बदल लेन दयो”,गोलू ने कहा
“गुड्डू के घर ही जाना है कोई शादी ब्याह मा नाही जो सिंगार पट्टा करी हो अब , जल्दी जाओ और जल्दी वापस आना फिर तुम्हरे लिए एक ठो खुशखबरी है”,गुप्ता जी ने कहा
“कैसी खुशखबरी पिताजी ?”,गोलू ने कहा

“पहिले रूपा को मिश्रा जी के घर छोड़कर आओ फिर बताते है”,गुप्ता जी ने कहा और अपना नाश्ता करने लगे
गोलू ने स्कूटी की चाबी उठाई और रूपा को साथ लेकर वहा से चला गया।

गुप्ता जी को नाश्ते में मिली थी चार खस्ता पूड़ी और आलू की रसेदार सब्जी और वे बड़े चाव से खा रहे थे लेकिन सामने खड़े मंगल फूफा गुस्से में उन्हें घूर रहे थे। गुप्ता जी ने देखा तो कहा,”घूर का रहे हो चाहिए तो एक आध पूड़ी तुमहू भी खाय ल्यो”
“हमायी नयी नयी प्रेम कहानी की पीपुडी बजा के हम से पूड़ी खाने को कह रहे हो”,मंगल फूफा ने गुस्से से कहा

“अरे मंगलू ! हम साला तुमको पहिले ही कहे रहे कि पियार और व्यापार औकात देख के करो,,,,,,,,,,अब लग गयी ना तुम्हायी लंका,,,,,,,,,,अब बैठ के हनुमान चालीसा गाओ”,गुप्ता जी ने आखरी पूड़ी खाकर उठते हुए कहा  
“हनुमान चालीसा काहे पढ़े ?”,मंगल फूफा ने हैरानी से कहा
गुप्ता जी प्लेट हाथ में उठाये मंगल की तरफ आये और कहा,”का है कि हनुमान चालीसा मा साफ लिखा है “भूत पिचास निकट नहीं आवे , महावीर जब नाम सुनावे”
 गुप्ता जी वहा से चले गए और बेचारा मंगल मुँह फाड़कर उन्हें जाते हुए देखता रहा।

मिश्रा जी का घर , कानपूर
मिश्रा जी , आदर्श फूफा और गुड्डू घर पहुंचे। आदर्श फूफा को देखते ही राजकुमारी ख़ुशी से झूमते हुए आये और आदर्श फूफा की बाँह थामकर कहा,”अरे कोमलिया के पिताजी आप आ गए ?”
“खुश तो ऐसे हो रही हो जैसे बॉर्डर पर जंग लड़ के आये है”,मिश्रा जी ने आदर्श फूफा के बगल से निकलकर अंदर जाते हुए कहा
“हाँ तो उह्ह जंग लड़ने से कम था का ? हमे पता होता हुआ इह सब होगा तो हम जाते ही नाही”,आदर्श फूफा ने कहा

मिश्रा जी पहले ही सबसे चिढ़े हुए थे आदर्श फूफा की बात सुनकर और चिढ़कर गए और वापस उनकी तरफ आकर कहा,”तो फिर काहे हमायी पूंछ पकड़कर
हुआ तक गए और गए थे हमायी मदद करने लेकिन सबके साथ मिलकर जो गोबर फैलाये हो ओह्ह्ह का कौन समेटी है आपकी जे राजकुमारी”

“ए मिश्रा जी हमायी फूल सी राजकुमारी को बीच मा लाने की जरूरत नाही है , देखा हमाये बिना एक दिन मा कैसे दुबला गयी है इह बेचारी,,,,,,,,,!!!”,आदर्श फूफा ने कहा तो भुआ शरमाकर साडी का पल्लू खाने लगी
मिश्रा जी ने सुना तो कहा,”आपकी राजकुमारी कबो किसी के बीच आ सकती है का ?”
मिश्रा जी का ताना आदर्श फूफा समझ गए इसलिए कहा,”हाँ हाँ हम सब समझ रहे है मिश्रा जी लेकिन कान खोलकर सुन लीजिये हम भी वेदिया के ब्याह से पहिले हिया से हिलेंगे नाही,,,,,,,,,,,!!!”

“वेदिया के क्यों ? गुड्डू लवली के बच्चो के ब्याह तक रुक जाईये , यही खूंटा गाड़ लीजिये मिलके आप और आपकी फूल सी राजकुमारी”,मिश्रा जी ने कहा और वहा से चले गए
गुड्डू भी अंदर जाने के लिए आदर्श फूफा के बगल से निकला तो आदर्श फूफा ने कहा,”ए गुड्डू ! जे तुम्हाये पिताजी खूंटा गाड़ने की का बात कह रहे ?”
“अरे फूफा हमे पिताजी की बातो मा ना लपेटो हमहू बहुते थक गए है हमहू जा रहे है नहाने”,कहकर गुड्डू भी अंदर चला गया।

गोलू रूपा को लेकर वहा पहुंच ही चुका था इसलिए आदर्श फूफा के पास आया और भुआ के पैर छूकर कहा,”पाय लागू भुआ”
“अरे जुग जुग गोलू , भगवान् तुमको लम्बी उम्र दे पर इह का इह शेरवानी पहिन के काहे घूम रहे हो फिर से ब्याह करवाने की सोच रहे हो ?”,भुआ ने गोलू के कंधे पर अपना भारी भरकम हाथ मारकर कहा तो बेचारा गोलू लड़खड़ा गया लेकिन गिरने से पहले आदर्श फूफा ने उसकी बाँह पकड़कर उसे रोक लिया

“अरे उह्ह्ह बहुते लम्बी कहानी है भुआ बाद मा फुर्सत से सुनाएंगे,,,अभी के लिए रूपा लेकर आये है”,गोलू ने कहा
“रूपा ? का कच्छा बनियान का काम शुरू कर दिए हो का गोलू ? देखो भई जे तुम्हाये फूफा तो बनियान पहनत नाही और कच्छों भी उह्ह धारी वारो पहिने सो हमहू अपने हाथ से सिली है तुम्हरे रूपा के कच्छा बनियान तो हिया नाही बिके है लल्ला”,राजकुमारी भुआ ने गोलू की बात का कुछ और ही मतलब निकालकर कहा तो गोलू उन्हें घूरने लगा

“अरे घूर का रहे हो , अच्छा अच्छा बुरा ना मानों हमहू अपने बिटवा के लिए ले लेंगे”,भुआ ने कहा
“भगवान् के घर मा बुद्धि बट रही थी तब कहा थी अरे हमहू कच्छा बनियान की नाही रूपा की बात कर रहे है रूपा , उह्ह्ह 6 फूट की ज़िंदा औरत तुमको बनियान दिख रही है भुआ”,गोलू ने चिल्लाकर कहा
आदर्श फूफा ने देखा गोलू राजकुमारी पर चिल्ला रहा है तो उसका कोलर पकड़ा और कहा,”ए गोलू हमायी राजकुमारी पर नाही चिल्लाना वरना मुँह तोड़ देंगे तुम्हरा और इह रूपा हिया का कर रही है ?”

गोलू आदर्श फूफा से दूर हटा और रूपा के पास आकर उसे अंदर जाने का इशारा किया और आदर्श फूफा से बोला,”उह्ह्ह हम आपको काहे बताये ? मिश्रा जी अपने आप देख लेंगे”
कहकर गोलू जाने लगा अब आदर्श फूफा का मिश्रा जी पर तो कोई जोर चला नहीं इसलिए जाते जाते गोलू की तशरीफ़ पर एक लात मारी और कहा,”बड़े आये मिश्रा के चमचे,,,,,,,,,,,,,!!!” c

गोलू आदर्श फूफा को घूरते हुए वहा से चला गया। भुआ वही खड़ी गर्दन उठाये जाते गोलू को देखने लगी तो आदर्श फूफा ने कहा,”अब का घर तक छोड़कर आओगी ओह्ह का अंदर चलो और हमाये नहाने के लिए गरम पानी रखो”
राजकुमारी भुआ ने मुँह बनाया और अंदर चली गयी। रूपा मिश्रा जी के घर में आयी है ये देखकर आदर्श फूफा का हाथ अपने गाल पर चला गया और सहसा ही उन्हें वो सारे थप्पड़ याद आ गए।

( गुप्ता जी ने क्यों नहीं दिया मंगल फूफा का साथ ? आखिर गोलू के लिए कौनसी खुशखबरी बचा के बैठे है गुप्ता जी ? रूपा का मिश्रा जी के घर में आना बढ़ाएगा सबकी परेशानी या फिर होगा कोई नया कांड ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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गुप्ता जी ने सुना तो भड़ककर बोले,”अरे अब नहीं है से का मतलब है तुम्हरा पहले कौनसा ओह्ह के घर मा बैठकर ओह्ह्ह के भैंसिया के दूध की खीर खायी है हमने ?”
“हाँ हाँ वही मतलब इनका उनसे कोई चक्कर नाही है लेकिन जे मंगल फूफा इनकी गारंटी हम नाही ले सकते”,कहकर गुप्ताइन ने अपनी आँखे मटकाई और दोनों हाथ हवा में उठा दिए।
गुप्ताइन की बात सुनकर रूपा मंगल फूफा को घूरने लगी तो मंगल फूफा दर्द और तकलीफ से भरकर चिल्लाये,”लगा दी हमायी जिंदगी मा आग”

गुप्ता जी ने सुना तो भड़ककर बोले,”अरे अब नहीं है से का मतलब है तुम्हरा पहले कौनसा ओह्ह के घर मा बैठकर ओह्ह्ह के भैंसिया के दूध की खीर खायी है हमने ?”
“हाँ हाँ वही मतलब इनका उनसे कोई चक्कर नाही है लेकिन जे मंगल फूफा इनकी गारंटी हम नाही ले सकते”,कहकर गुप्ताइन ने अपनी आँखे मटकाई और दोनों हाथ हवा में उठा दिए।
गुप्ताइन की बात सुनकर रूपा मंगल फूफा को घूरने लगी तो मंगल फूफा दर्द और तकलीफ से भरकर चिल्लाये,”लगा दी हमायी जिंदगी मा आग”

गुप्ता जी ने सुना तो भड़ककर बोले,”अरे अब नहीं है से का मतलब है तुम्हरा पहले कौनसा ओह्ह के घर मा बैठकर ओह्ह्ह के भैंसिया के दूध की खीर खायी है हमने ?”
“हाँ हाँ वही मतलब इनका उनसे कोई चक्कर नाही है लेकिन जे मंगल फूफा इनकी गारंटी हम नाही ले सकते”,कहकर गुप्ताइन ने अपनी आँखे मटकाई और दोनों हाथ हवा में उठा दिए।
गुप्ताइन की बात सुनकर रूपा मंगल फूफा को घूरने लगी तो मंगल फूफा दर्द और तकलीफ से भरकर चिल्लाये,”लगा दी हमायी जिंदगी मा आग”

गुप्ता जी ने सुना तो भड़ककर बोले,”अरे अब नहीं है से का मतलब है तुम्हरा पहले कौनसा ओह्ह के घर मा बैठकर ओह्ह्ह के भैंसिया के दूध की खीर खायी है हमने ?”
“हाँ हाँ वही मतलब इनका उनसे कोई चक्कर नाही है लेकिन जे मंगल फूफा इनकी गारंटी हम नाही ले सकते”,कहकर गुप्ताइन ने अपनी आँखे मटकाई और दोनों हाथ हवा में उठा दिए।
गुप्ताइन की बात सुनकर रूपा मंगल फूफा को घूरने लगी तो मंगल फूफा दर्द और तकलीफ से भरकर चिल्लाये,”लगा दी हमायी जिंदगी मा आग”

गुप्ता जी ने सुना तो भड़ककर बोले,”अरे अब नहीं है से का मतलब है तुम्हरा पहले कौनसा ओह्ह के घर मा बैठकर ओह्ह्ह के भैंसिया के दूध की खीर खायी है हमने ?”
“हाँ हाँ वही मतलब इनका उनसे कोई चक्कर नाही है लेकिन जे मंगल फूफा इनकी गारंटी हम नाही ले सकते”,कहकर गुप्ताइन ने अपनी आँखे मटकाई और दोनों हाथ हवा में उठा दिए।
गुप्ताइन की बात सुनकर रूपा मंगल फूफा को घूरने लगी तो मंगल फूफा दर्द और तकलीफ से भरकर चिल्लाये,”लगा दी हमायी जिंदगी मा आग”

गुप्ता जी ने सुना तो भड़ककर बोले,”अरे अब नहीं है से का मतलब है तुम्हरा पहले कौनसा ओह्ह के घर मा बैठकर ओह्ह्ह के भैंसिया के दूध की खीर खायी है हमने ?”
“हाँ हाँ वही मतलब इनका उनसे कोई चक्कर नाही है लेकिन जे मंगल फूफा इनकी गारंटी हम नाही ले सकते”,कहकर गुप्ताइन ने अपनी आँखे मटकाई और दोनों हाथ हवा में उठा दिए।
गुप्ताइन की बात सुनकर रूपा मंगल फूफा को घूरने लगी तो मंगल फूफा दर्द और तकलीफ से भरकर चिल्लाये,”लगा दी हमायी जिंदगी मा आग”

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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