Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 18

by Story With Sanjana August 5, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 18

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

नहाते नहाते गोलू के साथ एक नया कांड हो गया और उसकी प्यारी पिंकी ने उसे गलत समझ लिया। गुप्ता जी और गुप्ताइन ने भी गोलू की मदद नहीं की और वहा से चले गए। साबुन पर फिसल कर गोलू नीचे जा गिरा और हाथ पैर पटककर रोने लगा। जब से मंगल फूफा इस घर में आये थे तब से गोलू गुड्डू के साथ तो कम और मंगल फूफा के साथ ज्यादा दिखाई पड़ता था इसलिए गोलू को रोते देखकर मंगल फूफा उसके पास आये और कहा,”अरे काहे छोटे बच्चे के जैसे हाथ पैर पटक रहे हो ? लाओ अपनो हाथ दयो और उठो”

गोलू ने मंगल फूफा को घूरकर देखा और उनका हाथ साइड में झटककर कहा,”साला जब से तुम्हरा हाथ पकड़ा है तब से हर किसी के पैर पकड़ने की नौबत आ गई है फूफा,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा ने सुना तो एक पल के लिए मायूस हुए और फिर चिढ़कर कहा,”पहिले अपनी हरकते सुधार ल्यो ओह्ह्ह के बाद दुसरो पर बिल फाड़ना समझे”

गोलू को फटकार कर मंगल फूफा ने पानी से भरी बाल्टी उठायी और बाथरूम में चले गए। दरवाजा बंद करने जा ही रहे थे कि गोलू ने बचा हुआ लक्स साबुन मंगल फूफा की तरफ फेंककर कहा,”साबुन तो लेइ ल्यो , नहाओगे काहे से ?”
साबुन सीधा आकर मंगल फूफा के मुँह पर लगा और उन्होंने गुस्से से बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया।
गोलू ने बाल्टी में बचे पानी से खुद को साफ किया और तौलिया लपेटकर अंदर चला गया

मिश्रा जी का घर , कानपूर
“अरे शगुन ! माफ कर दयो ना बाबू और कित्ता परेशान करि हो हमका ?”,गुड्डू ने शगुन के पीछे अपने कमरे में आते हुए कहा
गुड्डू के आगे चलते चलते गुड्डू की तरफ पलटी और थोड़ा नाराजगी भरे स्वर में कहा,”और आप और गोलू जी जो सबकी नाक में दम करके रखते वो,,,,,,,,,,इस बार मैं आपको बिल्कुल माफ़ नहीं करने वाली गुड्डू जी ! पिछली बार क्या कहा था आपने मुझसे कि शगुन ये आखरी काण्ड है इसके बाद कोई कांड नहीं और लीजिये फिर आपका और गोलू जी का नया कांड सामने है,,,,,,,,,,,,,,आखिर कब सुधरेंगे आप लोग गुड्डू जी ?”

कहते कहते शगुन उदास हो गयी तो गुड्डू उसके करीब आया , अपनी बाँहो को शगुन की कमर से लपेटकर उसे अपने करीब करके उसकी आँखों में देखकर कहा,”अच्छा ठीक है अब से नहीं करेंगे , बस इस बार माफ़ी देइ दयो , अब ठीक है ना हो जाती है गलती इंसान ही है हम भी,.,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

शगुन ने सुना तो उदास नजरो से गुड्डू को देखते हुए कहा,”गुड्डू जी ! किस पत्नी को अच्छा लगेगा उसके पति को हर रोज अपने घरवालों से डांट सुनने को मिले ? जानती हूँ पापा जी आपको आपके भले के लिए चार बाते सुनाते है लेकिन उस वक्त मुझ पर क्या गुजरती है ये सिर्फ मैं ही जानती हूँ। इतना अच्छा काम है आपके पास उसमे मन लगाने के बजाय आप और गोलू जी दिनभर बकैती करते रहते है। क्या यही सब के लिए आपने पापाजी से लड़कर वेडिंग प्लानर का काम शुरू किया था ?”

गुड्डू ने एक हाथ से शगुन की कमर को थामे रखा और दूसरे हाथ से अपना कान पकड़कर कहा,”सॉरी ! अब से हमहू हर बात का ध्यान रखेंगे ना”
शगुन ने गुड्डू को पीछे किया और कहा,”मुझे आपकी किसी भी बात पर विश्वास नहीं है गुड्डू जी”
कहकर शगुन बिस्तर की तरफ चली आयी और वहा बिखरे तकिये ज़माने लगी। वेदी हाथ में कटे हुए फलों की प्लेट लेकर अंदर आयी और कहा,”भाभी ! जे अम्मा ने आपके लिए फल भिजवाए है , सुबह से आपने कुछो खाया नहीं है इन्हे याद से खा लीजियेगा”

“लाओ जे हमे दो”,गुड्डू ने वेदी से प्लेट लेकर कहा और वेदी वहा से चली गयी। गुड्डू प्लेट लेकर शगुन की तरफ आया और कहा,”का शगुन ? इह का सुन रहे है हम , तुमहू सुबह से कुछो खायी काहे नाही ? अरे जानती हो न इह से बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ता है”
शगुन ने गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”आपको कौनसी मेरी परवाह है ?”

“ए शगुन ! तुमहू चाहो तो हमको चार गाली देइ दयो , दुइ थप्पड़ मार दयो पर इह ना कहो हमे तुम्हायी परवाह नाही है ! तुम्हाये मुँह से इह सुनकर ना जान जल  जाती है हमायी”,गुड्डू ने कहा
शगुन ने एक नजर गुड्डू को देखा और बिस्तर पर आ बैठी। गुड्डू समझ गया कि शगुन उस से कुछ ज्यादा ही नाराज है , इतनी आसानी से नहीं मानेंगी। वह प्लेट लेकर शगुन के सामने बिस्तर पर आ बैठा और शगुन की तरफ देखकर बोला,”ठीक है तुमहू रहो हम से नाराज लेकिन हम अपने बच्चे से तो बात कर सकते है ना”

शगुन ने सुना तो मुँह बनाकर दूसरी तरफ देखने लगी और ये देखकर गुड्डू मुस्कुरा उठा। वह थोड़ा शगुन के पास आया और अपना कान शगुन के पेट से लगाकर कहा,”ए बिटवा या होवे वाली बिटिया , तुमहू जो भी हो हमायी आवाज तुम तक आय रही है ना,,,,,,,,देखो अब तुम्हायी अम्मा तो हमाये से गुस्सा है पर तुमहू तो जानत हो ना कि तुम्हाये पिताजी कितने मासूम और अच्छे इंसान है। अरे हमहू गलती करते नाही है उह अपनेआप हो जाती है। करने तो हमहु कर्म ही जाते है पर उह्ह कर्म कब कांड मा बदल जाते है हम खुद नाही जानते”

कहकर गुड्डू रुका और शगुन की तरफ देखा और कहा,”और जे तुम्हायी अम्मा को समझाओ यार इतनी नाराजगी सेहत के लिए ठीक नाही,,,,,,,हमहू इनसे बहुते पियार करते है इहलीये इत्ता मनाय रहे है,,,,,,,,,,का तुमको भूख लगी है , अरे तो पहिले कहना था ना ! रुको ! हमहू खिलाते है”
गुड्डू शगुन के पेट से दूर हटा और प्लेट में रखा सेब का टुकड़ा उठाकर शगुन की तरफ बढ़ा दिया तो शगुन ने कहा,”मुझे नहीं खाना”

“तुमको खिलाय भी नाही रहे है , उह्ह्ह तो हमाये बच्चे को भूख लगी है इहलीये,,,,,,,,,,चलो खाओ”
गुड्डू की प्यार भरी डांट सुनकर शगुन ने सेब का एक टुकड़ा खा लिया , मन ही मन तो वह गुड्डू को कब का माफ़ कर चुकी थी लेकिन आज कितने दिनों बाद उसे गुड्डू के साथ वक्त बिताने और उसे परेशान करने का मौका मिल रहा था इसलिए उसने मन की बात को चेहरे पर नहीं आने दिया और ख़ामोशी से गुड्डू के हाथो से फल खाती रही।

गुड्डू भी बड़े प्यार से एक के बाद एक टुकड़ा शगुन को खिलाता रहा तभी रूपा कमरे में आयी और कहा,”गुड्डू जी,,,,,,,,,,,,मिश्रा जी ने तुमको हमे नवरतन के पास ले जाने को कहा था,,,,,,,,,,,,,,,भूल गए का ?”
रूपा का यू बिना दरवाजा खटखटाये सीधा कमरे में चले आना गुड्डू को अच्छा नहीं लगा उसने प्लेट शगुन की तरफ बढ़ा दी और रूपा की तरफ आकर उसी  के अंदाज में कहा,”क्यों जी ? किसी के कमरे में आने से पहिले दरवाजा खटखटा कर आना होता है ,, इत्ती भी समझ नहीं है आपके अंदर ?”

रूपा ने सुना तो मुँह बनाया और कहा,”अरे हमहू कित्ती देर से बाहिर तुम्हरा इन्तजार कर रहे है , चलो आओ देर होय रही है”
रूपा की बात सुनकर गुड्डू ने मायूसी से शगुन की तरफ देखा ! कितने दिनों बाद तो उसे शगुन के साथ वक्त बिताने का मौका मिला था और यहाँ भी इस रूपा ने रंग में भंग डाल दिया। शगुन ने धीरे से अपनी गर्दन हिलाकर गुड्डू से रूपा के साथ जाने का इशारा किया और प्लेट में रखे फल खुद ही उठाकर खाने लगी।
“चलिए हम आते है”,गुड्डू ने कहा

रूपा वहा से चली गयी तो गुड्डू शगुन के पास आया और उसका चेहरा अपने हाथो में लेकर उसके ललाट को चूमकर कहा,”हमाये पियार पर कबो शक नाही करना शगुन , इह सब मेहनत हमहू अपने परिवार और तुम्हाये लिए ही कर रहे है और अब तो एक और मेहमान आने वाला है ओह्ह्ह की जिम्मेदारी भी तो हमे ही उठानी है,,,,,,,,,,,,हम जरा रूपा को नवरत्न के हिया लेकर जाते है तुमहू इह खाकर आराम करना , हमहू जल्दी आ जायेंगे”
अब गुड्डू इतने प्यार से मनाये और शगुन ना माने ऐसा भला कैसे हो सकता था उसने मुस्कुराकर कहा,”जाईये माफ़ किया आपको”

गुड्डू ने सुना तो मुस्कुरा उठा और शगुन का गाल अपने होंठो से छूकर कहा,”बहुत बहुत शुक्रिया आपका , हमहू जाकर आते है”
गुड्डू शगुन कमरे में छोड़कर चला गया और शगुन गुड्डू की इस मासूमियत पर मुस्कुरा उठी। कुछ देर बाद बिंदिया शगुन के कमरे में आयी तो शगुन ने उसे अपने पास बुला लिया और दोनों साथ बैठकर बाते करने लगी

गुप्ता जी का घर , कानपुर
मंगल फूफा पर अपना गुस्सा निकालने के बाद गोलू अंदर आया और गुप्ता जी को घूरते हुए सीधा अपने कमरे में चला गया लेकिन अगले ही पल वापस भी आया और गोलू के पीछे आया पिंकी का फेंका लोशन का डिब्बा जो कि पिंकी ने उसे फेंक कर मारा था। गनीमत था डिब्बा गोलू को लगा नहीं और वह चिल्लाया,”अरे मार काहे रही हो पिंकिया ? हमहू समझाते है ना बाबू”

“का समझाओगे तुम ?”,कहते हुए पिंकी ने फिर हाथ में पकडे तेल का बोतल गोलू की तरफ फेंककर मारा और इस बार बोतल सीधा गोलू के ललाट पर , उसने अपना ललाट मसलते हुए गुप्ता जी की तरफ देखा तो पाया गुप्ता जी मंद मंद मुस्कुरा रहे है ये देखकर गोलू चिढ गया। पिंकी पर तो उसका कोई जोर चला नहीं इसलिए गुप्ता जी के पास आकर गुस्से से कहा,”इह सबकी वजह आप है पिताजी”
“काहे ! हमहू कहे थे लब मैरिज करने को ? एक टाँग पे सवार होकर खुद किये हो ना तो अब खुदहि निपटो हम चलते है”,गुप्ता जी ने उठते हुए कहा

“अब आप कहा चले ? अरे हमाओ मामलो तो सुलटाय दयो”,गोलू ने मिन्नते करके कहा
गुप्ता जी गोलू के सामने आये और कहा,”बिटवा जैसी तुम्हायी किस्मत है ना हमे तो लाग रहो किसी दिन तुमहू सुलट जाहि हो और मामलों रह जाहि,,,,,,,,,,!!!”
गोलू की उम्मीदों पर पानी फेरकर गुप्ता जी ने उसका गाल थपथपाया और वहा से चले गए ये देखकर गोलू ने कहा,”अरे लेकिन आप जा कहा रहे है ?”

गुप्ता जी अपने कमरे की तरफ जाते जाते रुके और पलटकर कहा,”बहुत दिनों से तुम्हायी अम्मा कह रही थी कि हम उनको कही घुमाने नाही ले जाते तो सोच रहे है आज मोती झील लेकर चले जाए”
“हमायी जिंदगी मा आग लगाकर आप झील देखने जा रहे है , वाह पिताजी वाह”,गोलू ने ताली बजाकर कहा  
“इह ताली कानपूर के चौक मा बजाते ना तो चार रुपईया घर लेकर आते”,गुप्ता जी ने कहा
“का मतलब ?”,गोलू ने हैरानी से पूछा

“मतलब तुमहू नाही समझे हो बेटा , पढ़ने वाले समझ गए”,कहकर गुप्ता जी वहा से चले गए और गोलू बेचारा हैरान परेशान सर खुजाते हुए वही खड़ा रहा ऊपर से सिर्फ तौलिये में।  

मंगल फूफा नहाकर अंदर आये तो देखा गोलू अभी तक तौलिये में ही खड़ा है तो उसने गोलू के पास आकर कहा,”अरे गोलू ! तुमहू अभी तक कपडे नाही पहिने”
गोलू कुछ कहता इस से पहले गुप्ता जी और गुप्ताइन कमरे से बाहर आये और उन्हें देखकर गोलू का मुँह खुला का खुला रह गया। मंगल फूफा की भी आँखे बड़ी हो गयी और वे आँखे फाड़कर गुप्ता जी और गुप्ताइन को देखने लगे।

गुप्ता जी ने सफ़ेद कुरता पजामा पहना था , गले में सफ़ेद गमछा , आँखों पर धुप वाला चश्मा और मुँह में शायद बिमल पान मसाला पहले से फांक लिया था। उस पर उनकी घनी काली मुछे और सर पर लहराते बाल , ऐसे लग रहे थे जैसे किसी भोजपुरी फिल्म के हीरो हो तो वही बगल में खड़ी गुप्ताइन ने उलटे पल्लू की बनारसी साड़ी पहनी थी साथ में मेकअप किया था। बालों को भी आज नए स्टाइल से बनाया था और आँखो पर धुप वाला चश्मा , एक हाथ में पर्स लटकाये दूसरे हाथ से गुप्ता जी की बाँह थामकर गोलू और मंगल फूफा की तरफ चली आ रही थी।

गुप्ताइन जैसे ही गोलू के सामने से गुजरी गोलू ने हैरानी भरे स्वर में कहा,”इह सब का है अम्मा ?”
“हम तुम्हाये पिताजी के साथ घूमने जा रहे है शाम तक आ जायेंगे”,गुप्ताइन अपना चश्मा ठीक करते हुए कहा
“अरे लेकिन काहे ?”,गोलू ने रोआँसा होकर कहा
गुप्ताइन ने अपना चश्मा आँखों से थोड़ा नीचे करके नाक पर टिकाया और कहा,”उह्ह्ह का है ना बिटवा , हमहू अपने इकलौते बेटे को बहू के हाथो मार खाते नाही देख पाएंगे”

गोलू ने सुना हक्का बक्का रह गया। ये कैसे माँ-बाप थे जो बेटे को मौत मुँह में छोड़कर घूमने जा रहे थे। गुप्ता जी ने देखा गोलू की वजह से उन्हें देर हो रही है तो उन्होंने टूटी फूटी अंग्रेजी बोलते हुए कहा,”इसकूज मी गुप्ताइन ! बी आर पहिले से लेट,,,,,,,,नॉट बातचीत कम बाहर”
गोलू और मंगल फूफा ने सुना तो दोनों एक दूसरे का का मुँह देखने लगे और गुप्ता जी गुप्ताइन का हाथ थामकर वहा से चले गए।

गुप्ता जी और गुप्ताइन के जाने के बाद मंगल फूफा ने कहा,”अरे साला ! इह सब का था रे गोलू ?”
“उह सब छोडो फूफा इह देखो पिछले आधे घंटे से तौलिये मा ही खड़े है”,गोलू ने कहा
“काहे ?”,मंगल फूफा ने पूछा
“अरे पिंकिया हमको कमरे मा घुसने नाही दे रही , कपड़ा कहा से पहिने ?”,गोलू ने रोआँसा होकर कहा

“अरे तो तुमको नाही घुसने दे रही रुको हम बात करके आते है ओह्ह्ह से , हम बड़े है हमायी बात सुनेगी”,कहकर मंगल फूफा गोलू के कमरे के सामने चले आये और बड़े प्यार से कहा,”पिंकी बिटिया , पिंकी बिटिया,,,,,,,,,,,,,जरा गोलू के,,,,,,,,,,,,,,!!”
मंगल फूफा ने इतना ही कहा कि उड़ता हुआ पाउडर का डिब्बा आकर सीधा उनके मुँह पर लगा और सारा पाउडर उसके मुँह पर फ़ैल गया और कुछ मुँह में भी चला गया। मंगल फूफा उजड़े चमन से गोलू के पास आये।

“अरे हमायी पूरी बात तो सुन लेते फूफा , मिल गयी परसादी”,गोलू ने मंगल फूफा को ताना मारकर कहा
“सॉरी”,मंगल फूफा ने रोते हुए जैसे ही मुँह खोला मुँह में भरा पाउडर गोलू के मुँह पर और बेचारा गोलू इस वक्त फूफा को मार भी नहीं पाया क्योकि फूफा पहले ही पिंकी से परसादी ले चुका था।

( शगुन और गुड्डू की जिंदगी में ये प्यार भरे पल यू ही चलते रहेंगे या कोई कोई न डालता रहेगा इनमे खलल ? रूपा और नवरतन की ये दूसरी मुलाकात क्या रंग लाएगी ? कैसे मनाएगा गोलू अपनी पिंकिया को और कैसे करेगा उसका गुस्सा शांत ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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“का समझाओगे तुम ?”,कहते हुए पिंकी ने फिर हाथ में पकडे तेल का बोतल गोलू की तरफ फेंककर मारा और इस बार बोतल सीधा गोलू के ललाट पर , उसने अपना ललाट मसलते हुए गुप्ता जी की तरफ देखा तो पाया गुप्ता जी मंद मंद मुस्कुरा रहे है ये देखकर गोलू चिढ गया। पिंकी पर तो उसका कोई जोर चला नहीं इसलिए गुप्ता जी के पास आकर गुस्से से कहा,”इह सबकी वजह आप है पिताजी”
“काहे ! हमहू कहे थे लब मैरिज करने को ? एक टाँग पे सवार होकर खुद किये हो ना तो अब खुदहि निपटो हम चलते है”,गुप्ता जी ने उठते हुए कहा

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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