Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 26

by Story With Sanjana August 26, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 26

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

मंगल फूफा को गुड्डू के घर से कुछ दूर पहले उतारकर गोलू आगे बढ़ गया। उधर गुड्डू गोलू को रोकने के लिए पिंकी के घर की तरफ से निकला लेकिन गोलू उसे कही दिखाई नहीं दिया और उसे ढूंढते ढूंढते गुड्डू गोलू के घर ही जा पहुंचा जहा घर के गेट के बाहर गुप्ता जी खड़े थे। गुप्ता जी को देखते ही गुड्डू ने बाइक वापस घुमा ली और जैसे ही जाने लगा गुप्ता जी की नजर उस पर पड़ गयी और उन्होंने आवाज दी,”ए गुड्डू ! हिया आवा ज़रा”

गुड्डू ने अपना हाथ अपने ललाट पर मारा क्योकि उसे गोलू को ढूँढना था और मिश्रा जी के सामने जाने से रोकना था और यहाँ गुप्ता जी ने उसे ही रोक लिया। वह मन मारकर गुप्ता जी के सामने चला आया तो गुप्ता जी ने कहा,”अब तुमहू आ ही गए हो तो हमको भी अपने साथ लेकर चलो,,,,,,,,,,,!!”
“कहा ?”,गुड्डू ने पूछा
“अरे तुम्हाये घर और कहा , चलो खिसको”,कहकर गुप्ता जी गुड्डू के पीछे आ बैठे।

गुड्डू उन्हें ना बोलता तब तक तो गुप्ता जी बैताल की तरह उसके पीछे बाइक पर सवार हो चुके थे। गुड्डू ने थोड़ी सी हिम्मत की और पूछा,”लेकिन आपको इत्ती रात मा हमाये घर काहे जाना है ?”
“काहे जाना है मतलब ! अब का तुम्हरे घर तुम से पूछ के जायेंगे ? चुपचाप आगे बढ़ो,,,,,,,,,,,,,नेता बनेंगे”,गुप्ता जी ने गुड्डू को फटकार लगाकर कहा तो गुड्डू ने तो आगे बढ़ने में ही अपनी भलाई समझी और बाइक स्टार्ट की।

“ठहरो,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू गुप्ता जी को लेकर आगे बढ़ता इस से पहले उसके और गुप्ता जी के कानो में एक कड़कदार आवाज पड़ी और दोनों ने साथ में पलटकर घर के दरवाजे की तरफ देखा। दरवाजे पर श्री श्री श्री गोलू महाराज की अम्मा खड़ी थी। गुड्डू और गुप्ता जी ने पहले गुप्ताइन को देखा और फिर दोनों ने एक दूसरे को देखा। गुप्ताइन दनदनाते हुए दोनों के पास आयी और गुड्डू से कहा,”का रे गुड्डू ? ऐसे तो बहुते बड़के वाले दोस्त बनते हो गोलुआ के , ओह्ह्ह का भाई भाई कहकर बुलाते हो और अब जब पिरोगराम की बारी आयी तो हमको पूछा तक नाही”

“पिरोगराम ? कौनसा पिरोगराम ?”,गुड्डू ने हैरानी भरे स्वर में पूछा
“अच्छा कौनसा पिरोगराम ? तुमको का लगता है तुम और तुम्हायी अम्मा बताएँगे नाही तो हमे पता नाही चलेगा,,,,,,,,,,,,पिंकिया सब बता दी हमका , मिश्रा जी मा पिरोगराम रखे और सिर्फ गोलू  को बुलाया , अरे हम का मर गए है,,,,,,,,,,,और मिश्रा जी छोडो हमको तो शिकायत है तुम्हायी अम्मा से , हमायी सहेली होकर उह्ह्ह भी हमका नाही बुलाई”,गुप्ताइन  ने मुँह बनाकर कहा

गुड्डू ने सुना तो मन ही मन किलसा गया क्योकि गुप्ताइन जिस पर प्रोग्राम की बात कर रही थी वो कुछ और था जिसे मिश्रा जी कि भाषा में सुताई कहते है। गुड्डू कुछ कहता उस से पहले गुप्ता जी बोल पड़े,”ए गोलू की अम्मा ! तुम और मिश्रा जी की घरवाली सहेली कब बने ?”

“अरे उह्ह दिन रामनगर की पहाड़ी पर बने थे , खिसको जरा जगह दयो”,कहते हुए भारी भरकम गुप्ताइन गुप्ता जी के पीछे आ बैठी और गुड्डू अपनी जगह से सीधा बाइक की टंकी पर,,,,,,,,,,गुड्डू ने गुस्से से पीछे देखा तो गुप्ता जी ने उसकी मुंडी आगे की तरफ करके कहा,”पीछे का देख रहे हो हमायी पिरोपर्टी है,,,,,,जे से पहिले की कोनो और आये और तुमको हेंडल पर बैठना पड़े जल्दी निकलो हिया से”

मरता क्या ना करता ? गुड्डू के पास इतना समय नहीं था कि वह रूककर महान गोलू के महान अम्मा पिताजी से बहस करे या उन्हें समझाए। उसने बाइक की टंकी पर बैठे बैठे ही बाइक स्टार्ट की और वहा से निकल गया।

गोलू की स्कूटी मिश्रा जी के घर के सामने आकर रुकी लेकिन गोलू हैरान क्योकि ना तो घर के बाहर रोशनी वाली लड़िया थी , ना ही कोई डीजे बज रहा था और  ना ही कोई उसके स्वागत के लिए घर के बाहर खड़ा था। कुल मिलाकर मिश्रा जी के घर के बाहर श्मशान सी ख़ामोशी फैली थी। गोलू को मामला कुछ समझ नहीं आया वह बाहर ही खड़े होकर अपनी ऊँगली अपने गाल पर थपथपाते हुए घर को देखने लगा।

गोलू चुपचाप घर को देख रहा था कि अपने स्कूटर पर सवार  शर्मा जी ने अपना स्कूटर लाकर सीधा रोका गोलू की टाँगो के बीच , बस ग़नीमत था स्कूटर के पहिये ने गोलू को नहीं छुआ। गोलू ने हड़बड़ाकर स्कूटर की तरफ देखा और जैसे ही उसकी नजर पड़ी शर्मा जी पर उसके गुस्से का पारा सातवे आसमान पर वह चिल्लाया,”रोक काहे दिए ? हमायी छाती पर ही चढ़ाय देते”

शर्मा जी भी गोलू के साथ रह रह कर बेशर्म और चिढ़चिढ़े हो गए थे इसलिए स्कूटर को पीछे लेकर कहा,”तो आप का हिया बीच सड़क पर कुकुर बनकर खड़े है”
शर्मा जी सीधे सीधे गोलू को कुत्ता कह रहे थे और ये सुनकर गोलू और चिढ गया ! उसने देखा शर्मा जी के साथ शर्माईन भी आयी है तो गोलू ने उनसे कहा,”देख रही हो सासु माँ , इह ससुर जी हमको कुकुर कह रहे है,,,,,,,,,,,,का इह इजजत है घर के दामाद की ?”

“पिंकी के पापा ! क्या कर रहे है आप ? घर के इकलौते दामाद को भला ऐसा कोई बोलता है का , माफ़ी मांगिये दामाद जी से,,,,,,,,,,,,,!!!”,शर्माईन ने गोलू की साइड लेकर कहा
शर्मा जी ने सामने खड़े गोलू को देखा और अपनी चार उंगलिया उसकी तरफ करके कहा,”माफ़ी मांगे ? उह्ह्ह भी जे आदमी से , अरे माफ़ी तो हमहू अपने आप से मांगते है शर्माईन जो ऐसे दलिद्र घर मा अपनी फूल सी बिटिया को ब्याहे रहे”

“आपकी उह्ह्ह फूल सी बिटिया हमाये घर मा रहकर फूल गोभी हो चुकी है,,,,,और का दलिद्र ? कौनसा आपसे दहेज़ लिए रहय हमहू ?”,गोलू ने चिढकर कहा
“एक तो अपनी बिटिया दे और साथ मा दहेज़ भी दे , आपको नाही लगता सकल के हिसाब से इत्ता ओवरकॉन्फिडेंस ठीक नाही है”,शर्मा जी ने कहा

गुस्से में आकर गोलू ने अपने हाथो को उठाया और मुट्ठिया भींच ली , आँखे जोरो से मीच ली और जोर से बोला,,,,,,,,,,,,,,,बससससससससस”
किसी ने आकर गोलू का कंधा थपथपाया तो गोलू ने आँख खोली और पलटकर देखा तो मंगल फूफा खड़े थे और हाँफ रहे थे। गोलू ने गर्दन घुमाकर इधर उधर देखा तो ना शर्मा जी वहा थे , ना शर्माईन वहा थी और ना ही उनका स्कूटर,,,,,,,,,,,,,,गोलू हक्का बक्का रह गया

कुछ देर पहले ही शर्मा और शर्माईन उसके सामने थे और अब एकदम से गायब ! गोलू मंगल फूफा से पूछने के लिए उनकी तरफ पलटा तो देखा मंगल फूफा तो खुद बुरी तरह से हांफ रहे है ये देखकर गोलू ने कहा,”का हुआ ! हांफ काहे रहे हो ?”
“अरे का बताये गोलू ! तुमहू तो हमको हुआ अकेला छोड़ के चले आये लेकिन एक ठो गली का कुत्ता हमाये पीछे लग गवा ,, भागते भागते हिया तक पहुंचे है”,मंगल फूफा ने हाँफते हुए कहा

“जैसा गेटअप तुमहू करके घूम रहे हो फूफा कुत्ता का गली का सूअर , बिल्ली , बकरी , मुर्गी सब तुम्हाये पीछे भागी है,,,,,,,,,,,,,कौन बोला साला तुमको इह लाल बुशर्ट पर इह धारी वाला पेंट पहनने को ?”,गोलू ने मंगल को फटकार लगाकर कहा
गोलू की बात सुनकर मंगल फूफा ने तुरंत अपना पेट अंदर खींच लिया और अपने सर पर हाथ घुमाकर झेंपते हुए कहा,”का गोलू तुम भी ! तुम्हाये सामने ही तो पहिनकर आये है और हमायी छोडो तुम बताओ तुम हिया खड़े होकर काहे चिल्लाय रहे थे ?”

“अरे उह्ह्ह है ना हमारा ससुर , जे मिश्रा जी ने लगता है आज के पिरोगराम मा उन्हें भी बुलाया है”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा
“अरे तो का हुआ मिश्रा जी चाहे शर्मा जी को बुलाये चाहे गुप्ता जी को , आज के पिरोगराम की रौनक तो तुमहू ही हो”,मंगल फूफा ने गोलू को मक्खन लगाकर कहा
“अरे काहे की रौनक ? जरा देखो मिश्रा जी के घर को , दो चार रौशनी की लड़िया भी नाही लगायी गयी इनसे,,,,,,,,,,,,,ना हमाये स्वागत मा कोई बाहिर आया और ना ही कोनो गाना बजा,,,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने बुरा सा मुँह बनाकर कहा

“अरे गोलू ! का पता मिश्रा जी तुम्हाये आने के बाद लड़िया जलाये और डीजे बजाए , का है कि आज के खासमखास मेहमान तो तुम हो ना ! अब तुमहु हिया नाही होंगे तो का फायदा जे सब का ? बोलो !”,मंगल फूफा ने बड़े प्यार से कहा
“बात तो तुमहू सही कह रहे हो फूफा ! अब खास मेहमान ही नहीं आया तो काहे लड़िया जलाकर बिजली का बिल बढ़ाना,,,,,,,,,,,,,,,चलो अंदर चलते है”,गोलू ने खुश होकर कहा

“एक मिनिट गोलू”,मंगल फूफा ने गोलू को रोका और अपने बालो को सेट किया , बटनों के बीच से जो पेट झाँक रहा था उसे अंदर किया और अपने गले में पड़ी सोने की चैनो को शर्ट के अंदर से बाहर करके कहा,”इह बताओ कैसे लग रहे है हम ? लग रहे है मतलब कैसे रहे है ? दिल से बताना झूठ नाही बोलना,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने मंगल फूफा को सर से लेकर पाँव तक देखा और कहा,”कतई जहर ! हमको तो डाउट है साला आज रूपा तुमको चाट के कही मर ना जाए”

“ए गोलू ! मरे उह्ह्ह साला नवरतन,,,,,,,,,हमको तो रूपा जी के साथ 7 जन्म जीना है”,मंगल फूफा ने कहा
“हाँ तो इह अपना सातवां जन्म ही समझो और निकलो रूपा जी की जिंदगी से , उसको तुम्हायी नाही हमायी जरूरत है”,एक जानी पहचानी आवाज गोलू और मंगल फूफा के कानों में पड़ी और दोनों ने एक साथ आवाज वाली दिशा में देखा  

कोट पेंट पहन के सजा धजा नवरतन सामने खड़ा था। गोलू और मंगल फूफा ने पहले नवरतन को देखा और फिर दोनों ने हैरानी से एक दूसरे को,,,,,,,,,,,,,!!
“इह ससुरा हिया का कर रहा है ?”,मंगल फूफा ने दबे स्वर में पूछा
“हमे का पतो खुदही पूछ ल्यो”,गोलू ने मंगल फूफा को नवरतन के सामने धकियाकर कहा
“तुमहू हिया का कर रहे हो ?”,मंगल फूफा ने कठोर स्वर में नवरतन से पूछा

“तुमहू हमाये जीजा लगते हो जो तुमको बताये ?”, नवरतन ने भी कठोर स्वर में कहा
“लगते नाही तो बन जायेंगे,,,,,,,,,,,,,रूपा बहिन जो है तुम्हायी”,मंगल फूफा ने कठोर स्वर में कहा और फिर पलटकर गोलू को हाई फाइव दिया।
“उह्ह्ह रूपा जी खुद डिसाइड करि है कि कौन बने है ओह्ह्ह का घरवाला और कौनो का निकले है दिवाला ?”,नवरतन इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था

“रूपा जी डिसाइड कर ली है उह्ह्ह अपना पति हमको चुन ली है तुमहू रास्ता नापो”,मंगल फूफा ने कहा
“रूपा जी अपना फैसला कल सुनाई है , आज तो हमहू पिरोगराम मा आये है”,नवरतन ने अपना कोट सही करते हुए कहा
“तुमको पिरोगराम का निमंत्रण कौन दिए रहा ?”,मंगल फूफा ने पूछा

“और कौन देगा ! जे गोलू ही हमसे कहे रहा सबेरे की आज मिश्रा जी के घर मा पिरोगराम है तो हमहू चले आये , सोचा रूपा जी से भी मिल लेंगे और उनको थोड़ा नजदीक से जानने का मौका भी मिल जाही है”,नवरतन ने शरमा कर कहा
मंगल फूफा का चेहरा गुस्से में लाल उन्होंने पलटकर गोलू को देखा और गुस्से से कहा,”पड़ गयी तुम्हाये कलेजे को ठंडक ? गोलू हमको तो तुम ही हमायी  पिरेम कहानी के सबसे बड़े बिलिन नजर आय रहे हो,,,,,,,,,,,,,,!!!”

“अरे का फूफा ! इह ससुरा कहत रहा और तुमहू मान लिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर गोलू मंगल फूफा के पास आया और उनके कान में फुसफुसाकर कहा,”अरे जे को हिया इहलीये बुलाये क्योकि हमाये साथ साथ मिश्रा जी आपको भी तो दावत देंगे , अब जब इह नवरतन देखेगा कि खुद मिश्रा जी आपको दावत दे रहे है तो जे का तो दिमाग ही खराब हो जायेगा इह सब देखकर , ओह्ह्ह पे जब आप सबके सामने रूपा से अपने प्रेम का इजहार करे है तो सोचो का जान जली जे की , हिया आपने रूपा को प्रपोज किया और हुआ नवरतन का मेटर क्लोज”

गोलू की बात सुनकर मंगल फूफा ख़ुशी से फुले नहीं समाये उन्होंने गोलू की तरफ देखा और कहा,”सच कह रहे हो जे के बाद मेटर क्लोज न ?”
गोलू ने मंगल फूफा के टकले पर हाथ रखा और कहा,”रूपा की कसम”

“आई लव यू”,मंगल फूफा ने गोलू से चिपककर कहा
“जे बात 25 साल पहिले किसी लड़की से कहते ना तो आज हमाये जित्ते बड़े बबुआ होते तुम्हाये,,,,,,,,,,,और जे बात बात पर का मधुमक्खी की तरह हम से चिपक जाते हो ?”,गोलू ने मंगल फूफा को खुद से दूर धकेलकर कहा

मंगल फूफा लड़खड़ाए लेकिन खुद को सम्हाल लिया और सामने खड़े नवरतन से कहा,”हिया खड़े खड़े का कर रहे हो ? जाओ अंदर जाओ”
“हाँ तो जायेंगे ना , तुमसे पूछ के थोड़े जायेंगे”,नवरतन ने कहा और मंगल फूफा को घूरते हुए वहा से चला गया।

मंगल फूफा ने एक बार फिर अपना पेट अंदर खींचा और गोलू के पास आकर कहा,”तो अब ?”
गोलू की नजर सामने से आती बाइक पर पड़ी जिस की टंकी पर गुड्डू सवार था और उसके पीछे गुप्ता जी और गुप्ताइन थे। गुप्ता जी और गुप्ताइन को वहा देखकर मंगल फूफा तो ऐसे गायब हुए जैसे गधे के सर से सींग और बचा गोलू तो वह गुड्डू , गुप्ता जी और गुप्ताइन को देखकर बड़बड़ाया,”जे गुड्डू भैया इत्ती रात मा अम्मा पिताजी को बेचने काहे निकले है ?”

( मिश्रा जी के घर आकर क्या बवाल करने वाली है मिश्रा मण्डली ? क्या मंगल फूफा कर पाएंगे आज सबके सामने रूपा से अपने प्रेम का इजहार ? क्या होगा गोलू का रिएक्शन जब वो जानेगा गुप्ता जी और गुप्ताइन के यहाँ आने की वजह ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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“ठहरो,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू गुप्ता जी को लेकर आगे बढ़ता इस से पहले उसके और गुप्ता जी के कानो में एक कड़कदार आवाज पड़ी और दोनों ने साथ में पलटकर घर के दरवाजे की तरफ देखा। दरवाजे पर श्री श्री श्री गोलू महाराज की अम्मा खड़ी थी। गुड्डू और गुप्ता जी ने पहले गुप्ताइन को देखा और फिर दोनों ने एक दूसरे को देखा। गुप्ताइन दनदनाते हुए दोनों के पास आयी और गुड्डू से कहा,”का रे गुड्डू ? ऐसे तो बहुते बड़के वाले दोस्त बनते हो गोलुआ के , ओह्ह्ह का भाई भाई कहकर बुलाते हो और अब जब पिरोगराम की बारी आयी तो हमको पूछा तक नाही”

“ठहरो,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू गुप्ता जी को लेकर आगे बढ़ता इस से पहले उसके और गुप्ता जी के कानो में एक कड़कदार आवाज पड़ी और दोनों ने साथ में पलटकर घर के दरवाजे की तरफ देखा। दरवाजे पर श्री श्री श्री गोलू महाराज की अम्मा खड़ी थी। गुड्डू और गुप्ता जी ने पहले गुप्ताइन को देखा और फिर दोनों ने एक दूसरे को देखा। गुप्ताइन दनदनाते हुए दोनों के पास आयी और गुड्डू से कहा,”का रे गुड्डू ? ऐसे तो बहुते बड़के वाले दोस्त बनते हो गोलुआ के , ओह्ह्ह का भाई भाई कहकर बुलाते हो और अब जब पिरोगराम की बारी आयी तो हमको पूछा तक नाही”

“ठहरो,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू गुप्ता जी को लेकर आगे बढ़ता इस से पहले उसके और गुप्ता जी के कानो में एक कड़कदार आवाज पड़ी और दोनों ने साथ में पलटकर घर के दरवाजे की तरफ देखा। दरवाजे पर श्री श्री श्री गोलू महाराज की अम्मा खड़ी थी। गुड्डू और गुप्ता जी ने पहले गुप्ताइन को देखा और फिर दोनों ने एक दूसरे को देखा। गुप्ताइन दनदनाते हुए दोनों के पास आयी और गुड्डू से कहा,”का रे गुड्डू ? ऐसे तो बहुते बड़के वाले दोस्त बनते हो गोलुआ के , ओह्ह्ह का भाई भाई कहकर बुलाते हो और अब जब पिरोगराम की बारी आयी तो हमको पूछा तक नाही”

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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