Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 27

by Story With Sanjana September 4, 2026
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Manmarjiyan Season 5 – 27

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू अपनी बाइक पर गुप्ता जी और गुप्ताइन को लिए चला आ रहा था। उन्हें देखते ही मंगल फूफा भाग गए , गोलू ने मंगल फूफा से कुछ कहते हुए इधर उधर देखा तो मंगल फूफा गायब ! गुड्डू की बाइक नजदीक आते देखकर गोलू को लगा गुप्ता जी कही उस से ना उलझ जाए सोचकर गोलू भी गायब,,,,,,,,,,,!!!
बाहर होते शोर को सुनकर आदर्श फूफा घर से बाहर आये इधर उधर देखा कोई नहीं तभी गुड्डू की बाइक का आगे वाला टायर आकर उनकी दोनों टाँगो के बीच रुका।

गुड्डू पहले ही गुप्ता जी और गुप्ताइन की वजह से टंकी पर बैठा था , एकदम से ब्रेक मारा तो गुप्ता जी गुड्डू पर आ गिरे और गुप्ताइन गुप्ता जी पर और गुड्डू का मुँह बाइक के हेंडल पर जबकि सामने खड़े आदर्श फूफा थर थर काँप रहे थे क्योकि बाइक एक इंच भी आगे और होती न तो फूफा की मर्दानगी को भारी नुकसान हो जाता।
गुप्ताइन ने खुद को सम्हाला और बाइक से नीचे उतर गयी , पीछे पीछे गुप्ता जी भी उतरे और आदर्श फूफा के सामने आकर कहा,”ए तुमहू काहे हिया साहरुक खान के जइसन बाँहे फैलाये खड़े हो ?”

आदर्श फूफा को होश आया उन्होंने हड़बड़ाकर पहले खुद को देखा कि कही कोई चोट तो नहीं आयी और फिर बाइक के हेंडल पर मुँह के बल गिरे गुड्डू को उठाकर कहा,”तुम्हायी आँखे है के बटन , इत्ता बड़ा ज़िंदा आदमी दिखाई नाही देता तोह का ? अभी तो जे फटफटिया हमाये ऊपर चढ़ाय देते”

गुड्डू को होश आया वह बाइक से नीचे उतरा और बाइक को स्टेण्ड पर लगाकर आदर्श फूफा से कहा,”अरे हम का किये ? हम तो गोलू को रोकने गए थे , उह्ह्ह तो मिला नाही जे दो जिन्दा भूत हम से चिपट गए , बैठने को सीट तक नाही दी बाइक की टंकी पर बैठकर आये है”
आदर्श फूफा ने सुना तो उन्हें गुड्डू पर दया आ गयी , गुड्डू का दुःख तो उनसे भी बड़ा था। वे गुस्से से गुप्ता जी की तरफ पलटे और कहा,”इत्ती रात मा हिया का कर रहे हो ?”

“धुप सेंक रहे है आओ तुमहू भी सेंक ल्यो,,,,,,,,,,,!!!”, गुप्ता जी ने कहा
आदर्श फूफा गुप्ता जी का कटाक्ष नहीं समझे और अपना सर खुजाने लगे तो गुप्ता जी ने आगे कहा,”तुमहू हमाये जीजा लगे हो जो तुमको बताये हम हिया का कर है,,,,,,,,,,,,,,साइड हटो हमहू पिरोगराम मा आये है , चलो गुप्ताइन”
आदर्श फूफा को साइड में धक्का देकर गुप्ता जी गुप्ताइन को लेकर घर के अंदर चले गए  

गुप्ता जी के धक्के से आदर्श फूफा लड़खड़ाए और गुड्डू के पास आकर कहा,”अरे गुड्डू ! जे गुप्ता कौनसे पिरोगराम मा आया है ? तुम्हरे पिताजी तो गोलू के लिए पिरोगराम रखे थे अब इह कौनसे पिरोगराम की बात कर रहा है ?”
गुड्डू सबसे अच्छा खासा चिढ चुका था इसलिए अपने हाथ में पकडे फोन को जमीन पर फेंककर कहा,”हम तो कहते है फूफा आज गोलू के साथ साथ गोलू के पिताजी का भी ट्रीटमेंट हो ही जान दयो , साला बहुत चरस बो रखो है जे आदमी ने भी हमायी जिंदगी मा”

“अरे तो जे बात कहने के लिए फोन तोड़ने की का जरूरत थी ? अब नंबर कैसे मिलेगा ?”,आदर्श फूफा ने चिल्लाकर कहा
“किसका नंबर ?”,गुड्डू ने हैरानी से पूछा क्योकि इस भागमभाग में वह भूल ही गया था कि उसके फ़ोन के आखरी डायल में रूपा के आशिक़ का नंबर था

“अबे रूपा के ?”,आदर्श फूफा ने अपनी बात भी पूरी नहीं की कि गुड्डू ने गुस्से से कहा,”ए फूफा ! हमको ना तुम पे पहिले से सक था साला जे मंगलू और नवरतन के साथ साथ तुमहू भी रूपा के चक्कर मा हो,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“अरे हमहू ओह्ह्ह के चक्कर मा नहीं है हमहू तो ओह्ह्ह का चक्कर सबके सामने लाने की बात कर रहे है”,आदर्श फूफा ने बिगड़कर कहा

“अच्छा ! तो फिर काहे मांगे रूपा का नंबर ? का चिट चैट करोगे ओह्ह्ह के साथ ?”,गुड्डू ने कहा
“अरे हमायी बात को समझो गुड्डू,,,,,,,,,,,!!!”,आदर्श फूफा ने दबे स्वर में कहा
गुड्डू तो नहीं समझा लेकिन आदर्श फूफा के पीछे खड़ी भुआ ने जरूर ये बात सुन ली ! भुआ आदर्श फूफा के सामने आयी और गला फाड़कर रोते हुए कहा,”बस जे ही देखना बाकि रह गवा था कोमलिया के पिताजी ! अरे का कमी रह गयी थी हमायी ब्यूटी मा जो उह्ह्ह रूपा पे दिल आ गवा तुम्हरा ?”

“कमी नाही सब जियादा ही जियादा है भुआ”,गुड्डू ने भुआ की तोंद देखकर कहा
“तुमहू चुप रहो गुडडुआ , अरे शिकायत तो हमे जे आदमी से है , जे आदमी जो 16 की उमर मा हमाये साथ सात फेरे लिए रहा उह्ह्ह आज 70 की उमर मा रूपा के फेरे मा पड़ गवा,,,,,,,,,,,,,,हमका उठाय ल्यो बजरंगबली , अब हमहू ना जी पाही है,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए भुआ अनाज के बोरे की तरह धडाम से घुटनो के  बल नीचे गिरी और आसमान की तरफ देखकर हाथ उठा दिए।

“अरे का कर रही हो राजकुमारी , तुमहू जैसा सोच रही हो वैसा कुछो नाही है,,,,,,,,,,,,अरे हमहू तो बस उह्ह रूपा का सच सबके सामने लाना चाहते है”,आदर्श फूफा ने कहा
मंगल फूफा गोलू को लेने बाहर आये और जैसे ही उन्होंने आदर्श फूफा की बात सुनी चिल्लाकर कहा,”ए गुड्डू के फूफा ! हमायी रूपा के बारे में कुछो कहा न तो काट के रख देंगे”

“का पिछले जन्म मा कसाई थे ?”,आदर्श फूफा ने कहा
“नाही पर जरूरत पड़ी ना तो इह जन्म मा बन जायेंगे रूपा जी के लिए”,मंगल फूफा ने सीना फुलाकर कहा जिस से शर्ट के बीच से झाँकते छाती के बात साफ नजर आने लगे

“जोन रुपए कुमारी के लिए तुमहू इतना फुदक रहे हो ना , जब ओह्ह्ह की सच्चाई पता चली है ना तो आँखे फट जाही है”,आदर्श फूफा ने कहा
भुआ ने सुना तो रोना बंद किया और आदर्श फूफा की तरफ देखकर कहा,”ए कोमलिया के पिताजी ! आँखे नाही कुछो और फटता है”

“अरे का कर रही हो राजकुमारी , फॅमिली स्टोरी है ना भाई कुछो उलटा सीधा बोल दिए तो अगले एपिसोड मा बेन नही ना हो जायेंगे,,,,,,,,,,तुमहू अपना रोना जारी रखो”,फूफा ने कहा तो भुआ फिर साड़ी का पल्लू मुँह में दबाकर रोने लगी
“ए सुनो हमायी बात ! हमायी रूपा बिल्कुल मासूम है , अरे हो ही नाही सकता उह्ह्ह गलत निकले , साला हमहू जान दे देंगे अगर उह्ह्ह गलत हुयी तो”,मंगल फूफा ने जोश में आकर कहा

“अबे मंगलू ! अबे तुमहू अभी तुम्हायी मासूम रूपा की सच्चाई नाही जानते बे ?”,आदर्श फूफा ने मंगल फूफा को एक बार फिर समझाने की कोशिश की लेकिन कहते है न “सावन के अंधे को सब हरा ही हरा दिखता है” यही हाल हमारे मंगल फूफा का था उन्होंने अपने बालों में हाथ घुमाया और कहा,”सच्चाई इह है कि रूपा हम से बहुते पियार करती है”

आदर्श फूफा ने गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”ए गुड्डू ! ए जे हाफ टिकट को अंदर लेकर जाओ हम राजकुमारी को साथ लेकर आते है”
मंगल फूफा कुछ कहते इस से पहले ही गुड्डू ने उनकी गुड्डी पकड़ी और उन्हें उठाकर ही ले गया।
आदर्श फूफा जैसे तैसे राजकुमारी को मनाकर अंदर ले गए।

ख़ुशी से भरा गोलू हँसते खिलखिलाते अंदर आया और आकर सीधा हॉल में पड़े सोफे पर पैर पसार कर ऐसे बैठा जैसे कही का राजकुमार हो। मिश्रा जी अपने कमरे में थे ! उसी हॉल के एक तरफ गुप्ता जी और शर्मा जी आपस में उलझे हुए थे। शर्माईन और गुप्ताइन मिलकर मिश्राइन को ताने दे रही थी कि आज के प्रोग्राम में उन्हें क्यों नहीं बुलाया जबकि मिश्राइन खुद हैरान थी कि ये दोनों किस प्रोग्राम की बात कर रही है। शोर शराबा सुनकर लवली नीचे चला आया। शगुन अपने कमरे में आराम कर रही थी वह भी बाहर आयी , बिंदिया और रूपा भी चली आयी।

गुड्डू मंगल फूफा को लेकर आया और जैसे ही मंगल फूफा ने रूपा को देखा उसकी तरफ लपका लेकिन गुड्डू ने उसे वापस पीछे खींच लिया। रूपा ने मंगल फूफा को एक कातिलाना स्माइल दी और नजरे घुमा ली , मंगल फूफा के लिए तो इतना ही काफी था। वही पास में खड़े नवरत्न ने देखा तो उसके सीने पर सांप लौट गए। आदर्श फूफा राजकुमारी भुआ को लेकर अंदर आये लेकिन रूपा को देखते ही भुआ ने फिर रोना शुरू कर दिया।

अच्छा इन सब से बेखबर गोलू अपने ही ख्यालो में खोया था कि आज प्रोग्राम में सब बस उसे ही देख्नेगे , सब आकर उसका हाल चाल पूछेंगे , मिश्रा जी सबके सामने उसकी तारीफों के पूल बांधेंगे और मिश्राइन थाली भरकर नए नए पकवान उसके सामने पेश करेगी।

गोलू अपने ही ख्याली पुलाव पकाने में इतना खो गया कि उसे सब सामने दिखने लगा। जिस सोफे पर वह बैठा था वह सोफे उसे कोई राजसिहासन लगने लगा। उसके दांयी तरफ फटे पुराने कपडे पहने शर्मा जी खड़े थे और हाथो में पकड़ा बड़ा सा पंखा झल रहे थे , दाँयी तरफ गुप्ता जी खड़े थे और पंखा झल रहे थे। सामने कुछ ही दूर खाने के पकवानो से भरा बड़ा सा थाल लिए मिश्राइन खड़ी थी और दूसरी तरफ खड़े मिश्रा जी अपने आस पास खड़े लोगो के सामने गोलू की तारीफों के पुल बाँध रहे थे।

आदर्श फूफा गोलू के बगल में खड़े हाथ में इत्र की शीशी पकडे गोलू पर छिड़क रहे थे और वही गुड्डू “पिंकेश गुप्ता की जय” के नारे लगा रहा था। गोलू तो ख़ुशी से फुला नहीं समा रहा था। तभी अनारकली ड्रेस पहने सजी धजी रूपा गोलू के सामने आयी और नाचने गाने लगी। गोलू उठा , हाथ में गुलाब का फूल उठाया , उसे नाक से लगाकर सुंघा और रूपा की तरफ बढ़ा जबकि असल में वहा रूपा नहीं बल्कि मिश्रा जी के रूप में साक्षात् यमराज खड़े थे।

गोलू अपने कैरेक्टर में इतना घुस चुका था कि मिश्रा जी को अनारकली समझकर उनके पास आया। हाथ में पकड़ा गुलाब उनके गालों पर घुमाया और गुलाब उनकी तरफ बढाकर कहा,”ये नाचीज तुम्हे पिरेम का तोहफा भेंट करता है अनारकली”
मिश्रा जी ने गोलू के हाथ से गुलाब लिया और खींचकर एक चाँटा उसके गाल पर रसीद किया। पुरे चार चक्कर गोल गोल काटने के बाद गोलू धरती चाटता नजर आया और इसी के साथ उसका ख्याली पुलाव भी बिखर गया।

मिश्रा जी को वहा देखकर सब शांत हो गए। गोलू उठकर बैठा उसे लगा जैसे वह कोई सपना देख रहा था और अभी अभी नींद से उठा है।  उसकी नजर सामने खड़े मिश्रा जी पर पड़ी तो उसे आज शाम के प्रोग्राम की याद आयी ! वह उठा और ख़ुशी ख़ुशी मिश्रा जी के सामने आकर कहा,”का चचा ! आप हमसे कहे रहे गोलू तुम्हाये लिए पिरोगराम रखे है पर हिया तो ना रौनक है न , ना नाच गाना , ना ही पकवान,,,,,,,,,,आखिर जे किस तरफ का पिरोगराम है ?”

मिश्रा जी ने गोलू को घूरकर देखा और कहा,”हमहू तुमसे अकेले आने को कहे थे , जे पूरी बरात काहे लाये हो अपने साथ ?”
“बारात,,,,,,,,,,,,,बारात काहे लाएंगे हमाओ ब्याह तो,,,,,,,,,,,,,अरे पिताजी , ससुर जी , ए अम्मा , सासुमाआआआ , मंगलू , अबे नवरत्न भी है”,गोलू ने पहले बड़े आराम से मिश्रा जी से कहा और फिर जब पलटकर देखा तो सबको देखकर हैरानी से उसके मुंह से ये सब निकला।

गोलू जल्दी से मिश्रा जी की तरफ पलटा और कहा,”अम्मा कसम हमहू किसी को नाही बुलाये ? हमको नाही मालूम इह सब हिया का कर रहे है ? हो सकता है जे सब पिरोगराम देखने आये हो,,,,”
“अच्छा ! तो इह सब भी हिया पिरोगराम देखे तो तुमको चलेगा ?”,मिश्रा जी ने भंव चढ़ाकर पूछा

गोलू ने एक नजर फिर सबको देखा और मिश्रा जी के पास आकर दबे स्वर में कहा,”चलेगा तो हमको बिल्कुल नाही पर का करे एक हमाये बाप है , दूसरी हमायी अम्मा है , बचे उह्ह दो बूढ़ा बूढी तो उह्ह्ह हमायी मेहरारू के माई-बाप है अब उनको नाही पूछेंगे तो अच्छा नहीं ना लगेगा ,, अब एक उह्ह्ह मंगल फूफा है ओह्ह्ह का साथ लाने को तो आप खुद कहे रहय और नवरतन तो अब जब इत्ते लोग रुक ही रहे है तो ओह्ह्ह का भी रुक जान दयो का पतो अगली बार गुड्डू भैया और हम कपड़ा सिलवाए तो हमको बढ़िया डिस्काउंट देइ दे उह्ह्ह,,,,,,,,का कहते हो ?”

गोलू की बात सुनकर मिश्रा जी कुछ देर चुप रहे और फिर कहा,”ठीक है फिर सबको लेकर आँगन मा चलो हमहू सरसो का तेल और डंडा लेकर आते है”
“का सरसो का तेल और डंडा ?”,गोलू ने चौंककर कहा
“लगता है पिरोगराम की ख़ुशी तुम्हाये कानो मा घुस गयी है हमहू कहे सरसो का भेल और ठंडा लेकर आते है तुम्हाये लिए , इत्ती दूर से आये हो थक नहीं ना गए होंगे,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!!”,मिश्रा जी ने तुरंत अपनी बात बदलकर कहा

गोलू ने सुना तो एकदम से चिल्लाया,”धोखेबाज , झूठे , पाखंडी , मक्कार , जालसाज , दुर्लल्ज ,पापी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”
मिश्रा जी के साथ साथ बाकि सब भी हैरानी से गोलू को देखने लगे तो गोलू ने कहा,”हम थे जो आपके बारे में गलत सोचते थे , अरे आप तो कितने मस्त आदमी है चच,,,,,,,,,,,,,लाईये लाईये भेल और ठंडा दोनों लाईये,,,,,,,,,,तब तक हमहू आँगन मा माहौल जमाते है”

मिश्रा जी ने हामी में सर हिलाया और अंदर चले गए वही गुड्डू ने अपना सर पीट लिया क्योकि आज से पहले उसने किसी को मार खाने से पहले इतना खुश किसी को नहीं देखा था।

( क्या आज की रात गुड्डू और आदर्श फूफा ला पाएंगे रूपा का सच सबके सामने ? क्या गुड्डू रोक पायेगा गोलू को या आज गोलू की लंका लगना तय है ? क्या होगा गोलू का हाल जब वह जानेगा पिरोगराम की असलियत ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू पहले ही गुप्ता जी और गुप्ताइन की वजह से टंकी पर बैठा था , एकदम से ब्रेक मारा तो गुप्ता जी गुड्डू पर आ गिरे और गुप्ताइन गुप्ता जी पर और गुड्डू का मुँह बाइक के हेंडल पर जबकि सामने खड़े आदर्श फूफा थर थर काँप रहे थे क्योकि बाइक एक इंच भी आगे और होती न तो फूफा की मर्दानगी को भारी नुकसान हो जाता।
गुप्ताइन ने खुद को सम्हाला और बाइक से नीचे उतर गयी , पीछे पीछे गुप्ता जी भी उतरे और आदर्श फूफा के सामने आकर कहा,”ए तुमहू काहे हिया साहरुक खान के जइसन बाँहे फैलाये खड़े हो ?”

गुड्डू पहले ही गुप्ता जी और गुप्ताइन की वजह से टंकी पर बैठा था , एकदम से ब्रेक मारा तो गुप्ता जी गुड्डू पर आ गिरे और गुप्ताइन गुप्ता जी पर और गुड्डू का मुँह बाइक के हेंडल पर जबकि सामने खड़े आदर्श फूफा थर थर काँप रहे थे क्योकि बाइक एक इंच भी आगे और होती न तो फूफा की मर्दानगी को भारी नुकसान हो जाता।
गुप्ताइन ने खुद को सम्हाला और बाइक से नीचे उतर गयी , पीछे पीछे गुप्ता जी भी उतरे और आदर्श फूफा के सामने आकर कहा,”ए तुमहू काहे हिया साहरुक खान के जइसन बाँहे फैलाये खड़े हो ?”

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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